{"kind": "gs", "intro_hi": "यह अध्याय BPSC प्रारंभिक एवं मुख्य परीक्षा दोनों की दृष्टि से सर्वाधिक महत्वपूर्ण है, जिससे प्रतिवर्ष 3 से 5 प्रश्न पूछे जाते हैं। बिहार प्राचीन काल में बौद्ध एवं जैन धर्मों की जन्मभूमि और कर्मभूमि रहा है, इसलिए इन धर्मों के सिद्धांतों, संगीतियों और प्रमुख स्थलों का गहन अध्ययन परीक्षा में सफलता के लिए अनिवार्य है।", "intro_en": "This chapter is extremely vital for BPSC Prelims and Mains, consistently yielding 3 to 5 questions every year. Since Bihar served as the cradle and epicenter of both Buddhism and Jainism, a detailed understanding of their philosophies, councils, and historical sites is essential.", "subtopics": [{"name_hi": "बुद्ध का जीवन, बिहार के प्रमुख बौद्ध स्थल, चार आर्य सत्य एवं अष्टांगिक मार्ग", "name_en": "Buddha's Life, Key Buddhist Sites in Bihar, Four Noble Truths & Eightfold Path", "explain_hi": "गौतम बुद्ध (सिद्धार्थ) का जन्म शाक्य गणराज्य के कपिलवस्तु के लुम्बिनी में हुआ था, और चार दृश्यों को देखकर उन्होंने 29 वर्ष की आयु में गृहत्याग (महाभिनिष्क्रमण) किया। वैशाली के पास अलार कलाम सिद्धार्थ के प्रथम गुरु बने जिनसे उन्होंने सांख्य दर्शन सीखा। बिहार का बोधगया वह पावन स्थल है जहाँ उरुवेला में निरंजना (फल्गु) नदी के तट पर पीपल वृक्ष के नीचे वैशाख पूर्णिमा को उन्हें ज्ञान (संबोधि) प्राप्त हुआ। ज्ञान प्राप्ति के पश्चात बुद्ध ने अपना प्रथम उपदेश सारनाथ में दिया जिसे 'धर्मचक्रप्रवर्तन' कहते हैं, परंतु उनका अधिकांश कर्मक्षेत्र बिहार के राजगीर, वैशाली और नालंदा में रहा। मगध नरेश बिंबिसार ने उन्हें राजगीर में 'वेणुवन' विहार दान दिया, तथा वैशाली की नगरवधू आम्रपाली ने उन्हें 'आम्रवाटिका' समर्पित की। वैशाली में अपने प्रिय शिष्य आनंद के अनुरोध पर बुद्ध ने महिलाओं को संघ में प्रवेश की अनुमति दी, जहाँ उनकी मौसी प्रजापति गौतमी प्रथम भिक्षुणी बनीं। बुद्ध ने दुखों से मुक्ति हेतु चार आर्य सत्य तथा मध्यम मार्ग के रूप में अष्टांगिक मार्ग की शिक्षा दी।", "explain_en": "Gautama Buddha (Siddhartha) was born in Lumbini in the Shakya republic and left home at age 29 after witnessing four sights, an event known as Mahabhinishkramana. Near Vaishali, Alara Kalama became his first teacher, imparting knowledge of Samkhya philosophy. Bodh Gaya in Bihar is the holy site where Buddha attained enlightenment (Sambodhi) under a pipal tree on the banks of the Niranjana (Falgu) river on Vaishakha Purnima. After enlightenment, he delivered his first sermon at Sarnath (Dhammacakkappavattana), though his primary area of activity remained Bihar's Rajgir, Vaishali, and Nalanda. Magadha King Bimbisara gifted him 'Venuvana' Vihara in Rajgir, and Amrapali of Vaishali donated 'Amravatika'. At Vaishali, upon the request of his chief disciple Ananda, Buddha allowed women to enter the Buddhist Sangha, making his aunt Prajapati Gautami the first nun. To end human suffering, Buddha propounded the Four Noble Truths and the Eightfold Path (Middle Path).", "facts": [{"hi": "बुद्ध के बचपन का नाम सिद्धार्थ था और उनके पिता शुद्धोदन शाक्य गणराज्य के प्रमुख थे।", "en": "Buddha's childhood name was Siddhartha and his father Shuddhodana was the head of the Shakya republic."}, {"hi": "बुद्ध ने 29 वर्ष की आयु में चार दृश्य (वृद्ध, रोगी, मृत शरीर, संन्यासी) देखकर गृहत्याग किया, जिसे 'महाभिनिष्क्रमण' कहा जाता है।", "en": "At age 29, Buddha left home after seeing four sights (an old man, a sick man, a corpse, an ascetic), an event called 'Mahabhinishkramana'."}, {"hi": "सिद्धार्थ के प्रथम गुरु अलार कलाम थे, जिनसे उन्होंने वैशाली के निकट सांख्य दर्शन की शिक्षा ली।", "en": "Alara Kalama was Siddhartha's first teacher near Vaishali, from whom he learned Samkhya philosophy."}, {"hi": "35 वर्ष की आयु में बोधगया में निरंजना (फल्गु) नदी के तट पर पीपल वृक्ष के नीचे बुद्ध को ज्ञान (संबोधि) प्राप्त हुआ।", "en": "At age 35, Buddha attained enlightenment under a pipal tree on the banks of the Niranjana (Falgu) river in Bodh Gaya."}, {"hi": "बुद्ध ने अपना प्रथम उपदेश सारनाथ (ऋषिपत्तन) में दिया, जिसे 'धर्मचक्रप्रवर्तन' कहा जाता है।", "en": "Buddha delivered his first sermon at Sarnath (Rishipatana), known as 'Dhammacakkappavattana'."}, {"hi": "मगध सम्राट बिंबिसार ने बुद्ध के ठहरने के लिए राजगीर में 'वेणुवन' नामक विहार दान में दिया था।", "en": "Magadha King Bimbisara donated the 'Venuvana' Vihara in Rajgir for Buddha's stay."}, {"hi": "वैशाली की प्रसिद्ध गणिका/नगरवधू आम्रपाली ने बुद्ध को 'आम्रवाटिका' दान की और बौद्ध संघ में दीक्षा ली।", "en": "Amrapali, the famous courtesan of Vaishali, donated 'Amravatika' to Buddha and was ordained into the Sangha."}, {"hi": "वैशाली में अपने प्रिय शिष्य आनंद के आग्रह पर बुद्ध ने बौद्ध संघ में महिलाओं के प्रवेश की अनुमति प्रदान की।", "en": "At the request of his disciple Ananda in Vaishali, Buddha permitted women to enter the Buddhist Sangha."}, {"hi": "बौद्ध संघ में शामिल होने वाली प्रथम महिला बुद्ध की सौतेली माँ / मौसी महाप्रजापति गौतमी थीं।", "en": "Mahaprajapati Gautami, Buddha's stepmother/aunt, was the first woman to join the Buddhist Sangha."}, {"hi": "बुद्ध ने जीवन के दुखों को समझाने के लिए चार आर्य सत्य (दुख, दुख समुदाय, दुख निरोध, दुख निरोध गामिनी प्रतिपदा) दिए।", "en": "Buddha gave the Four Noble Truths (Suffering, Cause of Suffering, Cessation of Suffering, Path to Cessation of Suffering) to explain existence."}, {"hi": "दुख निरोध हेतु बुद्ध ने 'अष्टांगिक मार्ग' (मध्यम मार्ग / मज्झिम पटिपदा) का प्रतिपादन किया।", "en": "Buddha propounded the 'Eightfold Path' (Middle Path) as the way to end suffering."}, {"hi": "नालंदा बुद्ध के प्रमुख शिष्यों में से एक सारिपुत्र की जन्मभूमि एवं कर्मभूमि रही है।", "en": "Nalanda was the birthplace and workplace of Sariputra, one of Buddha's primary disciples."}, {"hi": "80 वर्ष की आयु में उत्तर प्रदेश के कुशीनगर में बुद्ध का निधन हुआ, जिसे 'महापरिनिर्वाण' कहा जाता है।", "en": "Buddha passed away at age 80 in Kushinagar, Uttar Pradesh, an event known as 'Mahaparinirvana'."}, {"hi": "मौर्य सम्राट अशोक ने अपने राज्याभिषेक के 10वें वर्ष में सबसे पहले बोधगया की धम्मयात्रा की थी।", "en": "Mauryan Emperor Ashoka undertook his first Dhammayatra to Bodh Gaya in the 10th year of his coronation."}], "examples": [{"q": "बिहार में गौतम बुद्ध को किस स्थान पर निरंजना नदी के तट पर ज्ञान (संबोधि) प्राप्त हुआ था?", "options": ["राजगीर", "वैशाली", "बोधगया", "पावापुरी"], "ans": 2, "why": "गौतम बुद्ध को 35 वर्ष की आयु में बोधगया (उरुवेला) में निरंजना (फल्गु) नदी के तट पर पीपल वृक्ष के नीचे ज्ञान प्राप्त हुआ था।"}, {"q": "गौतम बुद्ध तथा बिहार से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:\n1. बुद्ध ने अपने प्रथम गुरु अलार कलाम से सांख्य दर्शन की शिक्षा वैशाली के समीप प्राप्त की थी।\n2. वैशाली में शिष्य आनंद के कहने पर बुद्ध ने महिलाओं को संघ में प्रवेश दिया।\nउपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?", "options": ["केवल 1", "केवल 2", "1 और 2 दोनों", "न तो 1, न ही 2"], "ans": 2, "why": "दोनों कथन सत्य हैं; अलार कलाम बुद्ध के प्रथम गुरु थे और वैशाली में महाप्रजापति गौतमी पहली भिक्षुणी बनीं।"}, {"q": "मगध के किस शासक ने गौतम बुद्ध को राजगीर में निवास हेतु 'वेणुवन' नामक विहार उपहार में दिया था?", "options": ["अजातशत्रु", "बिंबिसार", "उदायिन", "महापद्मनंद"], "ans": 1, "why": "हर्यक वंश के संस्थापक राजा बिंबिसार ने बुद्ध के प्रति श्रद्धा व्यक्त करते हुए राजगीर में वेणुवन विहार दान दिया था।"}, {"q": "बौद्ध धर्म के अनुसार, दुखों के विनाश हेतु बुद्ध द्वारा प्रतिपादित 'अष्टांगिक मार्ग' को अन्य किस नाम से जाना जाता है?", "options": ["कठोर तपस्या मार्ग", "मध्यम मार्ग (मज्झिम पटिपदा)", "अहिंसा मार्ग", "त्रि रत्न मार्ग"], "ans": 1, "why": "अष्टांगिक मार्ग को अत्यधिक भोग और अत्यधिक कायाक्लेश दोनों से परे 'मध्यम मार्ग' या 'मज्झिम पटिपदा' कहा गया है।"}, {"q": "वैशाली की किस प्रसिद्ध नगरवधू ने गौतम बुद्ध को अपनी 'आम्रवाटिका' दान की थी?", "options": ["चेलना", "सलावती", "आम्रपाली", "वासवदत्ता"], "ans": 2, "why": "वैशाली की नगरवधू आम्रपाली ने बुद्ध के विचारों से प्रभावित होकर उन्हें आम्रवाटिका समर्पित की थी और स्वयं भिक्षुणी बनी थी।"}], "asked_hi": "BPSC प्रारंभिक परीक्षा में बोधगया में बुद्ध की ज्ञान प्राप्ति, वैशाली में संघ में महिलाओं के प्रवेश, बिंबिसार/आम्रपाली के दानों, तथा चार आर्य सत्य एवं अष्टांगिक मार्ग से संबंधित सीधे तथ्यात्मक तथा बहु-कथनीय प्रश्न बार-बार पूछे जाते हैं।", "asked_en": "In BPSC Prelims, questions regarding Buddha's enlightenment at Bodh Gaya, female entry to Sangha at Vaishali, donations by Bimbisara/Amrapali, and the Four Noble Truths/Eightfold Path are regularly asked as direct factual and multi-statement questions.", "confusions_hi": ["ज्ञान प्राप्ति बोधगया (बिहार) में हुई, जबकि प्रथम उपदेश सारनाथ (उत्तर प्रदेश) में दिया गया - छात्र अक्सर इनमें भ्रमित होते हैं।", "बुद्ध का महापरिनिर्वाण कुशीनगर (उत्तर प्रदेश) में हुआ था, जबकि जैन तीर्थंकर महावीर का निर्वाण पावापुरी (बिहार) में हुआ था।", "प्रथम गुरु अलार कलाम से मुलाकात वैशाली में हुई थी, जबकि दूसरे गुरु रुद्रक रामपुत्त से मुलाकात राजगीर में हुई थी।"], "table": {"head": ["स्थल (बिहार)", "मुख्य बौद्ध घटना / महत्त्व", "संबद्ध ऐतिहासिक व्यक्तित्व"], "rows": [["बोधगया", "निरंजना नदी तट पर पीपल वृक्ष के नीचे बुद्ध को ज्ञान (संबोधि) की प्राप्ति", "सम्राट अशोक (10वें वर्ष में धम्मयात्रा की)"], ["राजगीर", "बुद्ध का सर्वाधिक वर्षावास केंद्र, वेणुवन विहार में निवास", "बिंबिसार एवं अजातशत्रु"], ["वैशाली", "बौद्ध संघ में महिलाओं का प्रवेश, आम्रवाटिका का दान", "आनंद, महाप्रजापति गौतमी, आम्रपाली"], ["नालंदा", "बुद्ध का भ्रमण स्थल तथा उनके प्रमुख शिष्य सारिपुत्र की जन्मभूमि", "सारिपुत्र"]]}, "trick_hi": "बोध-ज्ञान निरंजना तीर, वैशाली नारी संघ गंभीर, सारनाथ उपदेश सुहात, कुशीनगर देह त्याग की बात।", "pyqs": []}, {"name_hi": "चार प्रमुख बौद्ध संगीतियाँ, बौद्ध सम्प्रदाय एवं त्रिपिटक", "name_en": "Four Buddhist Councils, Buddhist Sects and Tripitaka", "explain_hi": "महात्मा बुद्ध के महापरिनिर्वाण के उपरांत उनके उपदेशों के संकलन, संरक्षण तथा संघ में उभरे मतभेदों को सुलझाने के लिए चार प्रमुख बौद्ध संगीतियों का आयोजन किया गया। प्रथम तीन बौद्ध संगीतियाँ बिहार के राजगृह, वैशाली और पाटलिपुत्र में संपन्न हुईं, जबकि चौथी संगीति कश्मीर के कुंडलवन में हुई। प्रथम संगीति में बुद्ध के उपदेशों और नियमों को सुत्तपिटक तथा विनयपिटक के रूप में संकलित किया गया। तृतीय संगीति में तीसरा ग्रंथ अभिधम्मपिटक जोड़ा गया, जिससे त्रिपिटक पूर्ण हुआ। चौथी बौद्ध संगीति में बौद्ध धर्म का दो प्रमुख शाखाओं - हीनयान और महायान में विभाजन हो गया, तथा बाद में तंत्र-मंत्र से प्रभावित वज्रयान शाखा का उदय हुआ।", "explain_en": "Following the Mahaparinirvana of the Buddha, four major Buddhist councils were convened to preserve his teachings and resolve doctrinal disputes within the Sangha. The first three councils were held in Bihar at Rajgriha, Vaishali, and Pataliputra, while the fourth took place at Kundalvana in Kashmir. In the first council, Buddha's teachings and monastic rules were codified into the Sutta Pitaka and Vinaya Pitaka. The third council saw the compilation of the Abhidhamma Pitaka, completing the Tripitaka. The fourth council led to the formal schism of Buddhism into Hinayana and Mahayana sects, followed later by the rise of the esoteric Vajrayana school.", "facts": [{"hi": "प्रथम बौद्ध संगीति 483 ईसा पूर्व में राजगृह की सप्तपर्णी गुफा में हर्यंक वंश के शासक अजातशत्रु के शासनकाल में महाकस्सप (महाकश्यप) की अध्यक्षता में हुई।", "en": "The first Buddhist council was held in 483 BCE at Saptaparni Cave in Rajgriha under the patronage of Haryanka ruler Ajatashatru, presided over by Mahakassapa."}, {"hi": "प्रथम संगीति में आनंद ने 'सुत्तपिटक' (बुद्ध के उपदेश) तथा उपाली ने 'विनयपिटक' (संघ के नियम एवं आचार संहिता) का पाठ किया।", "en": "In the first council, Ananda recited the Sutta Pitaka (Buddha's teachings) and Upali recited the Vinaya Pitaka (monastic discipline and rules)."}, {"hi": "द्वितीय बौद्ध संगीति 383 ईसा पूर्व में वैशाली के बालुकाराम विहार में शिशुनाग वंश के शासक कालाशोक (काकवर्ण) के समय सबकामी (सर्वकामिन) की अध्यक्षता में हुई।", "en": "The second Buddhist council took place in 383 BCE at Vaishali under the patronage of Shishunaga ruler Kalashoka, presided over by Sabakami."}, {"hi": "द्वितीय संगीति में अनुशासन के नियमों को लेकर संघ पहली बार दो समूहों - 'स्थविर' (थेरावादी) और 'महासांघिक' में विभाजित हुआ।", "en": "At the second council, doctrinal disagreements over monastic rules led to the first split into Sthaviras (Theravadins) and Mahasanghikas."}, {"hi": "तृतीय बौद्ध संगीति 250/247 ईसा पूर्व में पाटलिपुत्र के अशोकाराम विहार में मौर्य सम्राट अशोक के शासनकाल में मोग्गलिपुत्त तिस्स की अध्यक्षता में संपन्न हुई।", "en": "The third Buddhist council was held around 250/247 BCE at Pataliputra under the patronage of Mauryan Emperor Ashoka, presided over by Moggaliputta Tissa."}, {"hi": "तृतीय संगीति में दार्शनिक सिद्धांतों से युक्त तीसरे पिटक 'अभिधम्मपिटक' (कथावत्थु ग्रंथ सहित) का संकलन किया गया।", "en": "In the third council, the philosophical third pitaka, Abhidhamma Pitaka (including Kathavatthu), was compiled."}, {"hi": "चतुर्थ बौद्ध संगीति प्रथम शताब्दी ईस्वी (लगभग 72 ईस्वी) में कश्मीर के कुंडलवन में कुषाण शासक कनिष्क के काल में वसुमित्र की अध्यक्षता में हुई, जिसके उपाध्यक्ष अश्वघोष थे।", "en": "The fourth Buddhist council was convened in the 1st century CE at Kundalvana (Kashmir) under Kushan king Kanishka, presided over by Vasumitra with Ashvaghosha as vice-president."}, {"hi": "चतुर्थ बौद्ध संगीति में बौद्ध धर्म स्पष्ट रूप से दो सम्प्रदायों—'हीनयान' और 'महायान' में विभाजित हो गया।", "en": "At the fourth council, Buddhism formally divided into two major sects: Hinayana and Mahayana."}, {"hi": "हीनयान बुद्ध को एक महापुरुष मानता है और मूर्तिपूजा का विरोध करता है (पाली भाषा का प्रयोग), जबकि महायान बुद्ध को ईश्वर मानकर उनकी मूर्तिपूजा करता है (संस्कृत भाषा का प्रयोग)।", "en": "Hinayana regards Buddha as a great human teacher and rejects idol worship (used Pali), whereas Mahayana deifies Buddha and worships his idols (used Sanskrit)."}, {"hi": "आठवीं शताब्दी में बंगाल और बिहार में पाल शासकों के संरक्षण में तांत्रिक बौद्ध धर्म की 'वज्रयान' शाखा का विकास हुआ, जिसका प्रमुख केंद्र विक्रमशिला विश्वविद्यालय था।", "en": "In the 8th century, the esoteric Vajrayana sect emerged under the patronage of Pala rulers in Bengal and Bihar, with Vikramashila University as its prominent center."}, {"hi": "सुत्तपिटक पाँच निकायों में विभाजित है: दीघ निकाय, मज्झिम निकाय, संयुक्त निकाय, अंगुत्तर निकाय और खुद्दक निकाय।", "en": "Sutta Pitaka is divided into five Nikayas: Digha Nikaya, Majjhima Nikaya, Samyutta Nikaya, Anguttara Nikaya, and Khuddaka Nikaya."}, {"hi": "सोलह महाजनपदों की सूची बौद्ध ग्रंथ 'अंगुत्तर निकाय' (सुत्तपिटक का भाग) तथा जैन ग्रंथ 'भगवती सूत्र' में मिलती है।", "en": "The list of the 16 Mahajanapadas is found in the Buddhist text Anguttara Nikaya (part of Sutta Pitaka) and the Jain text Bhagavati Sutra."}], "examples": [{"q": "तृतीय बौद्ध संगीति की अध्यक्षता निम्नलिखित में से किस बौद्ध भिक्षु द्वारा की गई थी?", "options": ["महाकश्यप", "सबकामी", "मोग्गलिपुत्त तिस्स", "वसुमित्र"], "ans": 2, "why": "तृतीय बौद्ध संगीति पाटलिपुत्र में मौर्य सम्राट अशोक के शासनकाल में मोग्गलिपुत्त तिस्स की अध्यक्षता में आयोजित की गई थी।"}, {"q": "बौद्ध धर्म के त्रिपिटक के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:\n1. विनयपिटक में बौद्ध संघ के आचार-नियम दिए गए हैं।\n2. सुत्तपिटक में भगवान बुद्ध के धार्मिक उपदेशों का संग्रह है।\n3. अभिधम्मपिटक का संकलन प्रथम बौद्ध संगीति में हुआ था।\nउपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?", "options": ["केवल 1 और 2", "केवल 2 और 3", "केवल 1 और 3", "1, 2 और 3"], "ans": 0, "why": "अभिधम्मपिटक का संकलन तृतीय बौद्ध संगीति (अशोक के काल) में हुआ था, न कि प्रथम बौद्ध संगीति में।"}, {"q": "चतुर्थ बौद्ध संगीति के संदर्भ में उपाध्यक्ष का पद किसने संभाला था?", "options": ["वसुमित्र", "अश्वघोष", "नागार्जुन", "पार्श्व"], "ans": 1, "why": "कनिष्क के काल में कुंडलवन (कश्मीर) में आयोजित चतुर्थ संगीति के अध्यक्ष वसुमित्र थे और उपाध्यक्ष अश्वघोष थे।"}, {"q": "सूची-I को सूची-II से सुमेलित कीजिए तथा नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:\nसूची-I (बौद्ध संगीति)\nA. प्रथम\nB. द्वितीय\nC. तृतीय\nD. चतुर्थ\nसूची-II (शासक)\n1. कनिष्क\n2. अशोक\n3. कालाशोक\n4. अजातशत्रु", "options": ["A-4, B-3, C-2, D-1", "A-3, B-4, C-1, D-2", "A-4, B-2, C-3, D-1", "A-1, B-2, C-3, D-4"], "ans": 0, "why": "प्रथम संगीति अजातशत्रु, द्वितीय कालाशोक, तृतीय अशोक तथा चतुर्थ कनिष्क के समय आयोजित हुई थी।"}, {"q": "बौद्ध धर्म की 'वज्रयान' शाखा का सर्वाधिक विकास बिहार में किस राजवंश के संरक्षण में हुआ?", "options": ["मौर्य वंश", "गुप्त वंश", "पाल वंश", "शुंग वंश"], "ans": 2, "why": "पाल शासक बौद्ध धर्म के अनुयायी थे और उनके काल में तंत्रयान/वज्रयान का व्यापक विकास हुआ, जिसके संवर्धन हेतु विक्रमशिला की स्थापना हुई।"}], "asked_hi": "BPSC इस उप-विषय से संगीतियों के स्थल, शासक, अध्यक्ष, उनके क्रम तथा संकलित ग्रंथों (त्रिपिटक) से जुड़े तथ्यात्मक प्रश्न लगभग प्रत्येक वर्ष या एकांतर वर्षों में अनिवार्य रूप से पूछता है।", "asked_en": "BPSC frequently tests this sub-topic through direct and matching questions focusing on the council venues, reigning monarchs, presiding monks, and the doctrinal outcomes like the Tripitaka and sect schisms.", "confusions_hi": ["छात्र प्रायः द्वितीय (कालाशोक) और तृतीय (अशोक) संगीति के शासकों तथा उनके अध्यक्षों (सबकामी बनाम मोग्गलिपुत्त तिस्स) में भ्रमित हो जाते हैं।", "चतुर्थ बौद्ध संगीति में 'वसुमित्र' अध्यक्ष थे और 'अश्वघोष' उपाध्यक्ष थे; छात्र इन दोनों के पदों को आपस में बदल देते हैं।"], "table": {"head": ["संगीति", "वर्ष", "स्थान", "शासक (वंश)", "अध्यक्ष", "प्रमुख कार्य / परिणाम"], "rows": [["प्रथम", "483 ईसा पूर्व", "राजगृह (सप्तपर्णी गुफा)", "अजातशत्रु (हर्यंक वंश)", "महाकश्यप", "बुद्ध के उपदेशों का संकलन: सुत्तपिटक और विनयपिटक"], ["द्वितीय", "383 ईसा पूर्व", "वैशाली (बालुकाराम विहार)", "कालाशोक (शिशुनाग वंश)", "सबकामी (सर्वकामिन)", "संघ का प्रथम विभाजन: स्थविर और महासांघिक"], ["तृतीय", "250 ईसा पूर्व", "पाटलिपुत्र (अशोकाराम)", "अशोक (मौर्य वंश)", "मोग्गलिपुत्त तिस्स", "तृतीय पिटक 'अभिधम्मपिटक' का संकलन"], ["चतुर्थ", "72 ईस्वी (प्रथम शताब्दी)", "कुंडलवन (कश्मीर)", "कनिष्क (कुषाण वंश)", "वसुमित्र (उपाध्यक्ष: अश्वघोष)", "बौद्ध धर्म का विभाजन: हीनयान एवं महायान"]]}, "trick_hi": "स्थान याद रखने की ट्रिक: 'रा-वै-पा-क' (राजगृह, वैशाली, पाटलिपुत्र, कश्मीर); शासक याद रखने की ट्रिक: 'अ-का-अ-क' (अजातशत्रु, कालाशोक, अशोक, कनिष्क)।", "pyqs": [{"id": "bpsc-cce-71-pre:95", "label": "BPSC 71वीं प्रारंभिक (13 सितंबर 2025), प्रश्न 95", "topic": "बौद्ध धर्म", "q": "कौन-सी बौद्ध संगीति बिहार में आयोजित नहीं की गई थी?", "options": ["प्रथम", "द्वितीय", "तृतीय", "चतुर्थ"], "ans": [3], "why_hi": "प्रथम संगीति राजगृह, द्वितीय वैशाली और तृतीय पाटलिपुत्र (तीनों बिहार) में हुई थीं, जबकि चतुर्थ संगीति कुंडलवन (कश्मीर) में हुई थी।"}]}, {"name_hi": "महावीर का जीवन, तीर्थंकर और जैन सिद्धांत", "name_en": "Life of Mahavira, Tirthankaras and Jain Principles", "explain_hi": "जैन धर्म एक अत्यंत प्राचीन धर्म है जिसमें 24 तीर्थंकरों की परंपरा रही है। भगवान महावीर इस परंपरा के अंतिम और 24वें तीर्थंकर थे, जिनका जन्म बिहार के वैशाली के पास कुंडग्राम में हुआ था। उन्होंने 30 वर्ष की आयु में गृह त्याग किया और 12 वर्षों की कठिन तपस्या के बाद 'कैवल्य' (सर्वोच्च ज्ञान) प्राप्त किया। महावीर ने पार्श्वनाथ द्वारा दिए गए चार व्रतों में पांचवां व्रत 'ब्रह्मचर्य' जोड़ा। उनके उपदेशों का मुख्य केंद्र अहिंसा और आत्म-संयम था। बिहार का पावापुरी वह स्थान है जहाँ उन्होंने निर्वाण प्राप्त किया, जो आज भी जैनियों का प्रमुख तीर्थ स्थल है।", "explain_en": "Jainism is an ancient religion with a tradition of 24 Tirthankaras, of whom Lord Mahavira was the last. He was born in Kundagram near Vaishali, Bihar, into a royal family but renounced worldly life at the age of 30. After 12 years of intense penance, he attained 'Kaivalya' (supreme knowledge) near the Rijupalika river. Mahavira added 'Brahmacharya' (celibacy) to the four existing vows of Parshvanatha, forming the 'Pancha Mahavrata'. His teachings emphasize non-violence and the 'Triratna' (Three Jewels) for liberation. He attained Nirvana at Pawapuri in Bihar, which remains a significant pilgrimage site.", "facts": [{"hi": "महावीर का जन्म 540 ईसा पूर्व (कुछ स्रोतों में 599 ईसा पूर्व) वैशाली के कुंडग्राम में हुआ था।", "en": "Mahavira was born in 540 BC (599 BC in some sources) at Kundagram in Vaishali."}, {"hi": "उनके पिता सिद्धार्थ ज्ञातृक क्षत्रिय संघ के प्रधान थे और माता त्रिशला लिच्छवी राजा चेटक की बहन थीं।", "en": "His father Siddhartha was the head of the Jnatrika clan and mother Trishala was the sister of Lichchhavi King Chetaka."}, {"hi": "महावीर के बचपन का नाम वर्धमान था और उनकी पत्नी का नाम यशोदा था।", "en": "Mahavira's childhood name was Vardhamana and his wife's name was Yashoda."}, {"hi": "42 वर्ष की आयु में जृम्भिकग्राम के पास ऋजुपालिका नदी के तट पर साल वृक्ष के नीचे उन्हें 'कैवल्य' प्राप्त हुआ।", "en": "At age 42, he attained 'Kaivalya' under a Sal tree on the banks of the Rijupalika river near Jrimbhikagrama."}, {"hi": "जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर ऋषभदेव (आदिनाथ) थे और 23वें तीर्थंकर पार्श्वनाथ थे।", "en": "The first Tirthankara of Jainism was Rishabhanatha (Adinath) and the 23rd was Parshvanatha."}, {"hi": "महावीर ने पार्श्वनाथ के चार व्रतों (अहिंसा, सत्य, अस्तेय, अपरिग्रह) में 'ब्रह्मचर्य' को पांचवें व्रत के रूप में जोड़ा।", "en": "Mahavira added 'Brahmacharya' as the fifth vow to Parshvanatha's four vows (Ahimsa, Satya, Asteya, Aparigraha)."}, {"hi": "त्रिरत्न में सम्यक दर्शन (सही विश्वास), सम्यक ज्ञान (सही ज्ञान) और सम्यक चरित्र (सही आचरण) शामिल हैं।", "en": "Triratna includes Samyak Darshana (Right Faith), Samyak Jnana (Right Knowledge), and Samyak Charitra (Right Conduct)."}, {"hi": "महावीर का प्रतीक चिन्ह 'सिंह' (Lion) है।", "en": "The symbol of Mahavira is the 'Lion'."}, {"hi": "भगवती सूत्र महावीर के जीवन और उनके 16 महाजनपदों के संबंधों का वर्णन करता है।", "en": "Bhagavati Sutra describes Mahavira's life and his connections with the 16 Mahajanapadas."}, {"hi": "महावीर के प्रथम शिष्य उनके दामाद जमालि थे।", "en": "Mahavira's first disciple was his son-in-law, Jamali."}, {"hi": "72 वर्ष की आयु में 468 ईसा पूर्व बिहार के पावापुरी (नालंदा) में महावीर का निर्वाण हुआ।", "en": "Mahavira attained Nirvana at the age of 72 in 468 BC at Pawapuri (Nalanda), Bihar."}, {"hi": "पार्श्वनाथ का प्रतीक चिन्ह 'सर्प' (Snake) है और उनका जन्म वाराणसी में हुआ था।", "en": "Parshvanatha's symbol is the 'Snake' and he was born in Varanasi."}], "examples": [{"q": "भगवान महावीर का जन्म बिहार के किस स्थान पर हुआ था?", "options": ["पावापुरी", "लुम्बिनी", "कुंडग्राम", "बोधगया"], "ans": 2, "why": "महावीर का जन्म वैशाली के निकट कुंडग्राम में हुआ था।"}, {"q": "जैन धर्म के 23वें तीर्थंकर पार्श्वनाथ का प्रतीक चिन्ह क्या है?", "options": ["सिंह", "सर्प", "वृषभ", "हाथी"], "ans": 1, "why": "पार्श्वनाथ का प्रतीक सर्प है, जबकि महावीर का सिंह और ऋषभदेव का वृषभ है।"}, {"q": "महावीर स्वामी ने जैन धर्म के सिद्धांतों में कौन सा पांचवां व्रत जोड़ा था?", "options": ["अहिंसा", "अस्तेय", "अपरिग्रह", "ब्रह्मचर्य"], "ans": 3, "why": "पार्श्वनाथ ने चार व्रत दिए थे, महावीर ने पांचवें व्रत के रूप में ब्रह्मचर्य को अनिवार्य किया।"}, {"q": "जैन धर्म के 'त्रिरत्न' में निम्नलिखित में से कौन सा शामिल नहीं है?", "options": ["सम्यक ज्ञान", "सम्यक दर्शन", "सम्यक भक्ति", "सम्यक चरित्र"], "ans": 2, "why": "जैन त्रिरत्न में ज्ञान, दर्शन और चरित्र शामिल हैं, भक्ति नहीं।"}, {"q": "महावीर स्वामी को किस नदी के तट पर ज्ञान (कैवल्य) प्राप्त हुआ था?", "options": ["निरंजना", "ऋजुपालिका", "गंगा", "गंडक"], "ans": 1, "why": "महावीर को ऋजुपालिका नदी के तट पर ज्ञान प्राप्त हुआ था, जबकि बुद्ध को निरंजना नदी के तट पर।"}], "asked_hi": "BPSC में महावीर के जन्म स्थान, माता-पिता के नाम, निर्वाण स्थल (पावापुरी) और जैन धर्म के पांच महाव्रतों से संबंधित प्रश्न बार-बार पूछे जाते हैं। तीर्थंकरों के क्रम और उनके प्रतीकों का मिलान करने वाले प्रश्न भी सामान्य हैं।", "asked_en": "BPSC frequently asks questions about Mahavira's birthplace, parents' names, place of Nirvana (Pawapuri), and the five Mahavratas. Matching the sequence of Tirthankaras and their symbols is also a common pattern.", "confusions_hi": ["बुद्ध का जन्म लुम्बिनी में हुआ था जबकि महावीर का कुंडग्राम (वैशाली) में; छात्र अक्सर इनमें भ्रमित हो जाते हैं।", "बुद्ध ने निरंजना नदी के तट पर ज्ञान प्राप्त किया, जबकि महावीर ने ऋजुपालिका नदी के तट पर।"], "table": {"head": ["तीर्थंकर", "क्रम", "प्रतीक", "विशेष तथ्य"], "rows": [["ऋषभदेव", "प्रथम", "वृषभ (बैल)", "जैन धर्म के संस्थापक"], ["पार्श्वनाथ", "23वें", "सर्प", "वाराणसी के राजा अश्वसेन के पुत्र"], ["महावीर", "24वें", "सिंह", "वास्तविक संस्थापक, बिहार में जन्म"]]}, "trick_hi": "महावीर के 5 व्रत याद रखने के लिए: 'सत्य अहिंसा की अस्तेय अपरिग्रह के साथ ब्रह्मचर्य की शक्ति' (सत्य, अहिंसा, अस्तेय, अपरिग्रह + ब्रह्मचर्य)।", "pyqs": []}, {"name_hi": "जैन संगीतियाँ, संप्रदाय और साहित्य", "name_en": "Jain Councils, Sects and Literature", "explain_hi": "महावीर स्वामी के निर्वाण के बाद जैन धर्म के सिद्धांतों को संकलित करने के लिए दो प्रमुख संगीतियाँ आयोजित की गईं। मगध में भीषण अकाल के कारण जैन संघ दो भागों में विभाजित हो गया: श्वेतांबर और दिगंबर। स्थूलभद्र के नेतृत्व वाले श्वेतांबर सफेद वस्त्र धारण करते थे, जबकि भद्रबाहु के अनुयायी दिगंबर नग्न रहते थे। प्रथम संगीति पाटलिपुत्र में हुई जहाँ 12 अंगों का संकलन किया गया। दूसरी संगीति गुजरात के वल्लभी में हुई जिसमें जैन ग्रंथों को अंतिम रूप दिया गया। जैन साहित्य मुख्य रूप से प्राकृत और अर्धमागधी भाषा में लिखा गया है जिसे 'आगम' कहा जाता है।", "explain_en": "After the Nirvana of Mahavira, two major councils were organized to compile Jain teachings. Due to a severe famine in Magadha, the Jain community split into two sects: Shvetambara and Digambara. The Shvetambaras, led by Sthulabhadra, wore white clothes, while the Digambaras, led by Bhadrabahu, remained naked. The first council was held in Pataliputra where 12 Angas were compiled. The second council took place in Vallabhi, Gujarat, to give the final shape to Jain scriptures. Jain literature is primarily written in Prakrit and Ardhamagadhi languages, collectively known as 'Agamas'.", "facts": [{"hi": "प्रथम जैन संगीति 300 ईसा पूर्व में पाटलिपुत्र (बिहार) में आयोजित की गई थी।", "en": "The first Jain Council was held in Pataliputra (Bihar) in 300 BC."}, {"hi": "प्रथम संगीति की अध्यक्षता स्थूलभद्र ने की थी।", "en": "The first council was presided over by Sthulabhadra."}, {"hi": "प्रथम संगीति के समय मगध का शासक चंद्रगुप्त मौर्य था।", "en": "The ruler of Magadha during the first council was Chandragupta Maurya."}, {"hi": "द्वितीय जैन संगीति 512 ईस्वी में वल्लभी (गुजरात) में आयोजित हुई थी।", "en": "The second Jain Council was held in Vallabhi (Gujarat) in 512 AD."}, {"hi": "द्वितीय संगीति की अध्यक्षता देवर्धि क्षमाश्रमण ने की थी।", "en": "The second council was presided over by Devardhi Kshamasramana."}, {"hi": "श्वेतांबर संप्रदाय के लोग सफेद वस्त्र पहनते हैं और इसके संस्थापक स्थूलभद्र थे।", "en": "Shvetambara sect followers wear white clothes and its founder was Sthulabhadra."}, {"hi": "दिगंबर संप्रदाय के लोग पूर्णतः नग्न रहते हैं और इसके संस्थापक भद्रबाहु थे।", "en": "Digambara sect followers remain completely naked and its founder was Bhadrabahu."}, {"hi": "जैन धर्म के पवित्र ग्रंथों को 'आगम' कहा जाता है।", "en": "The sacred texts of Jainism are called 'Agamas'."}, {"hi": "प्रथम संगीति में जैन धर्म के 12 अंगों का संकलन किया गया था।", "en": "The 12 Angas of Jainism were compiled during the first council."}, {"hi": "कल्पसूत्र की रचना भद्रबाहु ने संस्कृत भाषा में की थी।", "en": "Kalpa Sutra was composed by Bhadrabahu in Sanskrit language."}, {"hi": "जैन साहित्य की मुख्य भाषा प्राकृत (अर्धमागधी) रही है।", "en": "The primary language of Jain literature has been Prakrit (Ardhamagadhi)."}, {"hi": "भगवती सूत्र में 16 महाजनपदों का विवरण मिलता है।", "en": "Bhagavati Sutra contains details of the 16 Mahajanapadas."}], "examples": [{"q": "प्रथम जैन संगीति कहाँ आयोजित की गई थी?", "options": ["वल्लभी", "राजगृह", "पाटलिपुत्र", "वैशाली"], "ans": 2, "why": "प्रथम जैन संगीति 300 ईसा पूर्व में पाटलिपुत्र में स्थूलभद्र की अध्यक्षता में हुई थी।"}, {"q": "जैन धर्म के 'दिगंबर' संप्रदाय के नेता कौन थे?", "options": ["स्थूलभद्र", "भद्रबाहु", "पार्श्वनाथ", "महावीर स्वामी"], "ans": 1, "why": "अकाल के समय दक्षिण भारत जाने वाले समूह का नेतृत्व भद्रबाहु ने किया, जो दिगंबर कहलाए।"}, {"q": "द्वितीय जैन संगीति के अध्यक्ष कौन थे?", "options": ["स्थूलभद्र", "भद्रबाहु", "देवर्धि क्षमाश्रमण", "मोगलीपुत्त तिस्स"], "ans": 2, "why": "छठी शताब्दी में वल्लभी में हुई दूसरी संगीति की अध्यक्षता देवर्धि क्षमाश्रमण ने की थी।"}, {"q": "जैन साहित्य 'आगम' की भाषा क्या है?", "options": ["पालि", "संस्कृत", "प्राकृत (अर्धमागधी)", "हिंदी"], "ans": 2, "why": "प्रारंभिक जैन साहित्य मुख्य रूप से प्राकृत या अर्धमागधी भाषा में लिखा गया था।"}, {"q": "निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही है?\n1. प्रथम जैन संगीति चंद्रगुप्त मौर्य के काल में हुई।\n2. श्वेतांबर संप्रदाय के लोग नग्न रहते थे।", "options": ["केवल 1", "केवल 2", "1 और 2 दोनों", "कोई नहीं"], "ans": 0, "why": "कथन 1 सही है, लेकिन कथन 2 गलत है क्योंकि श्वेतांबर सफेद वस्त्र पहनते थे।"}], "asked_hi": "BPSC में अक्सर प्रथम जैन संगीति के स्थान (पाटलिपुत्र) और श्वेतांबर-दिगंबर के बीच अंतर से प्रश्न पूछे जाते हैं। शासक और अध्यक्ष का नाम मिलान करने वाले प्रश्नों में आता है।", "asked_en": "BPSC frequently asks about the location of the first Jain Council (Pataliputra) and the differences between Shvetambara and Digambara. Names of rulers and presidents often appear in match-the-following questions.", "confusions_hi": ["बौद्ध संगीति और जैन संगीति के स्थानों में भ्रम (प्रथम बौद्ध संगीति राजगृह में हुई, जबकि प्रथम जैन संगीति पाटलिपुत्र में)।", "स्थूलभद्र (श्वेतांबर - सफेद वस्त्र) और भद्रबाहु (दिगंबर - नग्न) के नामों में भ्रम।"], "table": {"head": ["संगीति", "समय", "स्थान", "अध्यक्ष", "मुख्य कार्य"], "rows": [["प्रथम", "300 ई.पू.", "पाटलिपुत्र", "स्थूलभद्र", "12 अंगों का संकलन, जैन धर्म का दो भागों में विभाजन"], ["द्वितीय", "512 ईस्वी", "वल्लभी (गुजरात)", "देवर्धि क्षमाश्रमण", "बिखरे हुए ग्रंथों का संकलन और लिपिबद्ध करना"]]}, "trick_hi": "S से स्थूलभद्र और S से श्वेतांबर (सफेद वस्त्र)। B से भद्रबाहु और B से Bare (नग्न/दिगंबर)।", "pyqs": []}, {"name_hi": "बौद्ध धर्म, जैन धर्म और आजीवक संप्रदाय की तुलना", "name_en": "Comparison of Buddhism, Jainism, and Ajivika Sect", "explain_hi": "छठी शताब्दी ईसा पूर्व में मध्य गंगा के मैदान (विशेषकर बिहार) में वैदिक कर्मकांडों और वर्ण व्यवस्था के विरोध में अनेक नास्तिक व श्रमण संप्रदायों का उदय हुआ। इनमें बौद्ध धर्म, जैन धर्म और आजीवक संप्रदाय सबसे प्रमुख थे। बौद्ध धर्म ने 'मध्यम मार्ग' को अपनाया, जबकि जैन धर्म ने अतिशय कायाक्लेश और कठोर अहिंसा पर बल दिया। आजीवक संप्रदाय के संस्थापक मक्खलि गोशाल थे, जिन्होंने 'नियतिवाद' (भाग्यवाद) का सिद्धांत दिया। मौर्य शासक अशोक और उसके पौत्र दशरथ ने गया की बराबर और नागार्जुनी पहाड़ियों की गुफाएं आजीवक संप्रदाय के साधुओं को दान में दी थीं। ये तीनों संप्रदाय ईश्वर की सत्ता और वेदों की प्रामाणिकता को अस्वीकार करते थे, लेकिन पुनर्जन्म और आत्मा के अस्तित्व पर इनके विचार भिन्न थे।", "explain_en": "In the 6th century BCE, several heterodox and Shramana sects arose in the Middle Ganga plain (especially Bihar) against Vedic rituals and the varna system. Among these, Buddhism, Jainism, and the Ajivika sect were the most prominent. Buddhism adopted the 'Middle Path', whereas Jainism emphasized extreme penance and strict non-violence. The Ajivika sect was founded by Makkhali Gosala, who proposed the doctrine of 'Niyativada' (Fatalism). Maurya meperor Ashoka and his grandson Dasharatha donated the caves of Barabar and Nagarjuni hills in Gaya to Ajivika monks. All three sects rejected the authority of the Vedas and the existence of a creator God, but held different views on soul and rebirth.", "facts": [{"hi": "बौद्ध धर्म मध्यम मार्ग (अष्टांगिक मार्ग) का पालन करता है, जबकि जैन धर्म अतिशय कायाक्लेश और कठोर तपस्या पर बल देता है।", "en": "Buddhism follows the Middle Path (Eightfold Path), whereas Jainism emphasizes severe austerity and body mortification."}, {"hi": "आजीवक संप्रदाय के संस्थापक मक्खलि गोशाल थे, जो शुरुआत में महावीर स्वामी के शिष्य थे।", "en": "The Ajivika sect was founded by Makkhali Gosala, who was initially a disciple of Mahavira."}, {"hi": "आजीवक संप्रदाय का मुख्य सिद्धांत 'नियतिवाद' (भाग्य ही मनुष्य के सुख-दुख को निर्धारित करता है) था।", "en": "The main doctrine of the Ajivika sect was 'Niyativada' (Fatalism - destiny determines human happiness and sorrow)."}, {"hi": "बौद्ध धर्म अनात्मवादी (आत्मा के स्थायी अस्तित्व को न मानने वाला) है, जबकि जैन धर्म सर्वजीववादी एवं आत्मवादी है।", "en": "Buddhism denies the existence of a permanent soul (Anatta), while Jainism recognizes the presence of soul in all entities."}, {"hi": "बौद्ध और जैन दोनों संप्रदाय ईश्वर को सृष्टि का रचयिता नहीं मानते तथा वेदों की अपौरुषेयता को खारिज करते हैं।", "en": "Both Buddhism and Jainism reject God as the creator of the universe and deny the authority of the Vedas."}, {"hi": "मौर्य सम्राट अशोक ने गया स्थित बराबर की पहाड़ियों में आजीवक साधुओं के लिए कर्ण चौपार, सुदामा और विश्व झोपड़ी गुफाओं का निर्माण करवाया।", "en": "Maurya Emperor Ashoka constructed the Karna Chaupar, Sudama, and Vishwa Zopadi caves in Barabar hills for Ajivika monks."}, {"hi": "अशोक के पौत्र दशरथ ने नागार्जुनी पहाड़ियों में आजीवक संप्रदाय के लिए गोपिका, वापी और वदथिक गुफाएं समर्पित की थीं।", "en": "Ashoka's grandson Dasharatha dedicated the Gopika, Vapi, and Vadathika caves in Nagarjuni hills to the Ajivika sect."}, {"hi": "बौद्ध धर्म का जन-प्रचार पालि भाषा में हुआ, जबकि प्रारंभिक जैन साहित्य अर्धमागधी (प्राकृत) भाषा में लिखा गया।", "en": "Buddhist teachings were propagated in Pali language, whereas early Jain literature was written in Ardhamagadhi (Prakrit)."}, {"hi": "घोर अक्रियवादी संप्रदाय के संस्थापक पूरण कश्यप थे, जिन्होंने कर्मफल के सिद्धांत का खंडन किया।", "en": "Purana Kassapa was the founder of the Akriyavada sect, who rejected the doctrine of karma."}, {"hi": "उच्छेदवाद (कट्टर भौतिकवाद) के समर्थक अजित केशकम्बलिन थे, जिन्हें चार्वाक दर्शन का अग्रदूत माना जाता है।", "en": "Ajita Kesakambalin was the proponent of Utchedavada (Materialism), considered a forerunner of Charvaka philosophy."}, {"hi": "अनिश्चयवाद (संशयवाद) के प्रमुख आचार्य संजय वेलट्ठिपुत्त थे।", "en": "Sanjaya Belatthiputta was the leading teacher of Anischayavada (Scepticism)."}, {"hi": "नित्यवाद (उच्छेदरहित/अकृतकवाद) के प्रतिपादक पकुध कच्चायन थे।", "en": "Pakudha Kaccayana was the proponent of Nityavada (Eternalism)."}], "examples": [{"q": "बराबर की पहाड़ियों में आजीवक संप्रदाय के साधुओं के लिए गुफाओं का निर्माण निम्नलिखित में से किस शासक ने करवाया था?", "options": ["चंद्रगुप्त मौर्य", "अशोक", "बिंबिसार", "कनिष्क"], "ans": 1, "why": "मौर्य सम्राट अशोक ने गया के पास बराबर की पहाड़ियों में आजीवक साधुओं के लिए गुफाएं (सुदामा, कर्ण चौपार आदि) बनवाई थीं।"}, {"q": "प्रसिद्ध प्राचीन श्रमण संप्रदाय 'आजीवक संप्रदाय' के संस्थापक कौन थे?", "options": ["पूरण कश्यप", "अजित केशकम्बलिन", "मक्खलि गोशाल", "पकुध कच्चायन"], "ans": 2, "why": "आजीवक संप्रदाय की स्थापना मक्खलि गोशाल ने की थी, जिनका मुख्य सिद्धांत 'नियतिवाद' था।"}, {"q": "बौद्ध धर्म और जैन धर्म के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:\n1. बौद्ध धर्म आत्मा के स्थायी अस्तित्व को स्वीकार नहीं करता है।\n2. जैन धर्म के अनुसार सजीव एवं निर्जीव दोनों में आत्मा का वास होता है।\n3. दोनों धर्म वेदों की प्रामाणिकता को स्वीकार करते हैं।\nउपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?", "options": ["केवल 1 और 2", "केवल 2 और 3", "केवल 1 और 3", "1, 2 और 3"], "ans": 0, "why": "बौद्ध धर्म अनात्मवादी है और जैन धर्म सर्वजीववादी है; परंतु दोनों धर्म वेदों की प्रामाणिकता को खारिज करते हैं, इसलिए कथन 3 गलत है।"}, {"q": "सूची-I (संप्रदाय) को सूची-II (संस्थापक/प्रवर्तक) से सुमेलित कीजिए:\na) नियतिवाद — 1) अजित केशकम्बलिन\nb) अक्रियवाद — 2) मक्खलि गोशाल\nc) उच्छेदवाद — 3) पूरण कश्यप\nd) अनिश्चयवाद — 4) संजय वेलट्ठिपुत्त", "options": ["a-2, b-3, c-1, d-4", "a-3, b-2, c-1, d-4", "a-2, b-1, c-3, d-4", "a-4, b-3, c-2, d-1"], "ans": 0, "why": "नियतिवाद के मक्खलि गोशाल, अक्रियवाद के पूरण कश्यप, उच्छेदवाद के अजित केशकम्बलिन तथा अनिश्चयवाद के संजय वेलट्ठिपुत्त संस्थापक थे।"}, {"q": "अशोक के पौत्र दशरथ ने आजीवक संप्रदाय के मुनियों को निम्नलिखित में से किस स्थान पर गुफाएं दान में दी थीं?", "options": ["बराबर पहाड़ियां", "नागार्जुनी पहाड़ियां", "राजगीर पहाड़ियां", "गृधकूट पर्वत"], "ans": 1, "why": "अशोक ने बराबर की पहाड़ियों में तथा उसके पौत्र दशरथ ने नागार्जुनी पहाड़ियों में आजीवकों के लिए गुफाएं बनवाई थीं।"}], "asked_hi": "BPSC में प्राचीन धार्मिक सुधार आंदोलनों, विशेषकर बौद्ध-जैन तुलना तथा आजीवक संप्रदाय (अशोक व दशरथ के गुफा दान, मक्खलि गोशाल के नियतिवाद) पर सीधे प्रश्न तथा कथन-आधारित प्रश्न बार-बार पूछे जाते हैं।", "asked_en": "BPSC frequently asks direct and statement-based questions on ancient religious reform movements, especially comparing Buddhism vs Jainism and the Ajivika sect (Barabar/Nagarjuni caves donated by Ashoka & Dasharatha, Niyativada of Makkhali Gosala).", "confusions_hi": ["बराबर पहाड़ियों की गुफाएं अशोक ने बनवाई थीं, जबकि नागार्जुनी पहाड़ियों की गुफाएं उसके पौत्र दशरथ ने बनवाई थीं।", "बौद्ध धर्म अनात्मवादी (आत्मा नहीं मानता) है, जबकि जैन धर्म में आत्मा के अस्तित्व को अत्यधिक महत्व दिया गया है।", "बौद्ध धर्म ने पालि भाषा को अपनाया जबकि प्रारंभिक जैन साहित्य अर्धमागधी (प्राकृत) में लिखा गया।"], "table": {"head": ["विशिष्टता/लक्षण", "बौद्ध धर्म", "जैन धर्म", "आजीवक संप्रदाय"], "rows": [["संस्थापक / प्रमुख", "गौतम बुद्ध", "ऋषभदेव (प्रथम), महावीर (24वें)", "मक्खलि गोशाल"], ["मुख्य दर्शन / सिद्धांत", "मध्यम मार्ग, प्रतीयसमुत्पाद", "स्याद्वाद, अनेकांतवाद, त्रिरत्न", "नियतिवाद (भाग्य ही सर्वोपरि)"], ["आत्मा सम्बंधी विचार", "अनात्मवादी (स्थायी आत्मा नहीं)", "आत्मवादी (प्रत्येक जीव/कण में आत्मा)", "नियतिबद्ध आत्मा"], ["कठोरता व अहिंसा", "व्यावहारिक अहिंसा, मध्यम मार्ग", "अत्यधिक कठोर अहिंसा एवं कायाक्लेश", "कर्मनिरपेक्ष साधना"], ["मुख्य प्रचार भाषा", "पालि", "प्राकृत (अर्धमागधी)", "प्राकृत / पालि ग्रन्थों में उल्लेख"], ["बिहार में प्रमुख गुफाएं/दान", "बराबर की लोमस ऋषि गुफा (बाद का काल)", "वैशाली, पावापुरी क्षेत्र", "बराबर (अशोक) व नागार्जुनी (दशरथ) गुफाएं"]]}, "trick_hi": "याद रखें: 'नियति गोशाल की, मध्यम बुद्ध का, कायाक्लेश महावीर का' (आजीवक=नियतिवाद/गोशाल, बौद्ध=मध्यम मार्ग, जैन=कठोर कायाक्लेश)।", "pyqs": []}], "summary_hi": ["गौतम बुद्ध को बोधगया में निरंजना (पुनपुन/फल्गु) नदी के तट पर पीपल के वृक्ष के नीचे वैशाख पूर्णिमा को ज्ञान प्राप्त हुआ।", "बौद्ध धर्म के चार आर्य सत्य हैं: दुःख, दुःख समुदाय, दुःख निरोध और दुःख निरोध गामिनी प्रतिपदा (अष्टांगिक मार्ग)।", "प्रथम बौद्ध संगीति राजगृह में (अजातशत्रु/महाकश्यप), द्वितीय वैशाली में (कालाशोक/सब्बकामी), तृतीय पाटलिपुत्र में (अशोक/मोगलिपुत्त तिस्स) और चतुर्थ कश्मीर में (कनिष्क/वसुमित्र) आयोजित हुई।", "सुत्तपिटक (बुद्ध के उपदेश), विनयपिटक (संघ के नियम) तथा अभिधम्मपिटक (दार्शनिक व्याख्याएं) को संयुक्त रूप से 'त्रिपिटक' कहा जाता है।", "कुषाण काल में कनिष्क के समय चतुर्थ बौद्ध संगीति में बौद्ध धर्म दो संप्रदायों—हीनयान और महायान में विभाजित हो गया, जबकि 8वीं सदी में वज्रयान शाखा उभरी।", "24वें जैन तीर्थंकर वर्धमान महावीर का जन्म वैशाली के निकट कुंडग्राम में हुआ तथा उन्हें बिहार के पावापुरी में निर्वाण प्राप्त हुआ।", "23वें तीर्थंकर पार्श्वनाथ के चार महाव्रतों (सत्य, अहिंसा, अस्तेय, अपरिग्रह) में महावीर स्वामी ने पाँचवाँ महाव्रत 'ब्रह्मचर्य' जोड़ा।", "जैन धर्म के 'त्रिरत्न' हैं: सम्यक् दर्शन (सही विश्वास), सम्यक् ज्ञान (सही ज्ञान) और सम्यक् चरित्र (सही आचरण)।", "प्रथम जैन संगीति पाटलिपुत्र में चंद्रगुप्त मौर्य के काल में स्थूलभद्र की अध्यक्षता में हुई, जहाँ जैन धर्म श्वेतांबर और दिगंबर संप्रदायों में बँट गया।", "द्वितीय जैन संगीति वल्लभी (गुजरात) में देवाधि क्षमाश्रमण की अध्यक्षता में आयोजित हुई, जहाँ जैन आगम ग्रंथों को लिपिबद्ध किया गया।", "मक्खलि गोशाल द्वारा स्थापित आजीवक संप्रदाय पूर्ण नियतिवाद (भाग्यवादिता) के सिद्धांत पर आधारित था।"], "summary_en": ["Gautama Buddha attained enlightenment (Sambodhi) on Vaishakha Purnima under a Pipal tree on the banks of Niranjana (Phalgu) River in Bodh Gaya.", "The Four Noble Truths of Buddhism lead to the Eightfold Path (Ashtangika Marga) for attaining Nirvana.", "Buddhist Councils: 1st at Rajgir (Ajatashatru/Mahakasyapa), 2nd at Vaishali (Kalashoka/Sabbakami), 3rd at Pataliputra (Ashoka/Moggaliputta Tissa), 4th at Kashmir (Kanishka/Vasumitra).", "Tripitaka includes Sutta Pitaka (Teachings), Vinaya Pitaka (Monastic Rules), and Abhidhamma Pitaka (Philosophical Interpretations).", "Buddhism split into Hinayana and Mahayana during the 4th Council under Kanishka, while Vajrayana emerged later around the 8th century.", "Vardhamana Mahavira, the 24th Tirthankara, was born at Kundagram near Vaishali and attained Nirvana at Pawapuri in Bihar.", "Mahavira added the 5th vow 'Brahmacharya' (Celibacy) to Parshvanatha's existing four vows (Satya, Ahimsa, Asteya, Aparigraha).", "The Triratna (Three Jewels) of Jainism are Right Faith (Samyak Darshana), Right Knowledge (Samyak Jnana), and Right Conduct (Samyak Charitra).", "The 1st Jain Council occurred at Pataliputra under Sthulabhadra during Chandragupta Maurya's reign, splitting Jainism into Shvetambara and Digambara.", "The 2nd Jain Council took place at Vallabhi (Gujarat) under Devardhi Kshemashramana, where Jain Agamas were codified.", "The Ajivika sect, founded by Makkhali Gosala, was based on the doctrine of absolute fatalism (Niyativada)."]}
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BPSC CCEइतिहास और राष्ट्रीय आंदोलनबौद्ध धर्म और जैन धर्म (बिहार के केंद्र)
Buddhism and Jainism (Centers in Bihar)
अपने आप को जाँचिए — 10 प्रश्न
1. गौतम बुद्ध के जीवन से जुड़े बिहार के ऐतिहासिक स्थलों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. उन्होंने बोधगया में निरंजना नदी के तट पर ज्ञान प्राप्त किया। 2. वैशाली में प्रजापति गौतमी को संघ में शामिल कर महिलाओं को प्रवेश दिया गया। 3. प्रथम बौद्ध संगीति का आयोजन राजगृह की सप्तपर्णी गुफा में हुआ था। उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?
- (क) केवल 1 और 2
- (ख) केवल 2 और 3
- (ग) केवल 1 और 3
- (घ) 1, 2 और 3
उत्तर देखें
उत्तर: (घ) 1, 2 और 3
तीनों कथन सही हैं। बुद्ध ने बोधगया में ज्ञान प्राप्त किया, वैशाली में आनंद के अनुरोध पर प्रजापति गौतमी को संघ में प्रवेश दिया तथा अजातशत्रु के संरक्षण में राजगृह की सप्तपर्णी गुफा में प्रथम संगीति हुई।
2. तृतीय बौद्ध संगीति का आयोजन पाटलिपुत्र में किसके शासनकाल में और किसकी अध्यक्षता में हुआ था?
- (क) अजातशत्रु एवं महाकश्यप
- (ख) कालाशोक एवं सब्बकामी
- (ग) अशोक एवं मोगलिपुत्त तिस्स
- (घ) कनिष्क एवं वसुमित्र
उत्तर देखें
उत्तर: (ग) अशोक एवं मोगलिपुत्त तिस्स
तृतीय बौद्ध संगीति पाटलिपुत्र में मौर्य सम्राट अशोक के शासनकाल में मोगलिपुत्त तिस्स की अध्यक्षता में आयोजित की गई थी।
3. बौद्ध धर्म ग्रंथों 'त्रिपिटक' के संदर्भ में कौन सा युग्म सही सुमेलित है? 1. विनयपिटक - बौद्ध संघ के नियम एवं अनुशासन 2. सुत्तपिटक - बुद्ध के उपदेश एवं धार्मिक सिद्धांत 3. अभिधम्मपिटक - बौद्ध दर्शन की व्याख्या
- (क) केवल 1 और 2
- (ख) केवल 2 और 3
- (ग) केवल 1 और 3
- (घ) 1, 2 और 3
उत्तर देखें
उत्तर: (घ) 1, 2 और 3
तीनों युग्म सही सुमेलित हैं। विनयपिटक में संघ के नियम, सुत्तपिटक में बुद्ध के मुख्य उपदेश और अभिधम्मपिटक में दार्शनिक सिद्धांतों का वर्णन है।
4. वर्धमान महावीर के जीवन से संबंधित स्थानों का सही मिलान कीजिए: (a) जन्म स्थान - 1. पावापुरी (b) निर्वाण स्थान - 2. कुंडग्राम (वैशाली) (c) प्रथम उपदेश - 3. ऋजुपालिका नदी (d) कैवल्य (ज्ञान) प्राप्ति - 4. विपुलचल पहाड़ी (राजगृह)
- (क) a-2, b-1, c-4, d-3
- (ख) a-1, b-2, c-3, d-4
- (ग) a-2, b-1, c-3, d-4
- (घ) a-4, b-3, c-2, d-1
उत्तर देखें
उत्तर: (क) a-2, b-1, c-4, d-3
वर्धमान महावीर का जन्म वैशाली के कुंडग्राम (a-2) में हुआ, निर्वाण पावापुरी (b-1) में, प्रथम उपदेश राजगृह की विपुलचल पहाड़ी (c-4) पर तथा कैवल्य प्राप्ति ऋजुपालिका नदी के तट पर (d-3) हुई।
5. जैन धर्म के 'पंच महाव्रत' में पाँचवाँ महाव्रत 'ब्रह्मचर्य' किस तीर्थंकर द्वारा जोड़ा गया था?
- (क) ऋषभदेव
- (ख) पार्श्वनाथ
- (ग) वर्धमान महावीर
- (घ) अरिष्टनेमि
उत्तर देखें
उत्तर: (ग) वर्धमान महावीर
23वें तीर्थंकर पार्श्वनाथ ने चार व्रतों (अहिंसा, सत्य, अस्तेय, अपरिग्रह) का प्रतिपादन किया था। 24वें तीर्थंकर महावीर स्वामी ने इसमें पाँचवाँ व्रत 'ब्रह्मचर्य' जोड़ा।
6. पाटलिपुत्र में आयोजित प्रथम जैन संगीति के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन सा कथन असत्य है?
- (क) इसका आयोजन चंद्रगुप्त मौर्य के शासनकाल में हुआ था।
- (ख) इसकी अध्यक्षता स्थूलभद्र ने की थी।
- (ग) इस संगीति में जैन धर्म श्वेतांबर और दिगंबर दो भागों में विभाजित हो गया।
- (घ) इस संगीति में जैन धर्म के आगम ग्रंथों का अंतिम रूप से संकलन वल्लभी में हुआ था।
उत्तर देखें
उत्तर: (घ) इस संगीति में जैन धर्म के आगम ग्रंथों का अंतिम रूप से संकलन वल्लभी में हुआ था।
आगम ग्रंथों का अंतिम संकलन वल्लभी में आयोजित 'द्वितीय जैन संगीति' (देवाधि क्षमाश्रमण की अध्यक्षता) में हुआ था, प्रथम संगीति में नहीं।
7. जैन धर्म के सिद्धांतों के संदर्भ में 'त्रिरत्न' में निम्नलिखित में से क्या शामिल नहीं है?
- (क) सम्यक् दर्शन
- (ख) सम्यक् ज्ञान
- (ग) सम्यक् चरित्र
- (घ) सम्यक् विचार
उत्तर देखें
उत्तर: (घ) सम्यक् विचार
जैन धर्म के त्रिरत्न हैं: सम्यक् दर्शन (सही विश्वास), सम्यक् ज्ञान (सही ज्ञान) और सम्यक् चरित्र/आचरण। 'सम्यक् विचार' अष्टांगिक मार्ग (बौद्ध धर्म) का भाग है।
8. प्राचीन काल के प्रसिद्ध 'आजीवक संप्रदाय' के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों में से कौन सा सही है?
- (क) इसके संस्थापक मक्खलि गोशाल थे और यह संप्रदाय 'नियतिवाद' (भाग्यवादिता) पर विश्वास करता था।
- (ख) इसके संस्थापक गौतम बुद्ध के शिष्य उपालि थे।
- (ग) इस संप्रदाय को केवल कनिष्क ने संरक्षण प्रदान किया था।
- (घ) आजीवक संप्रदाय पुनर्जन्म के सिद्धांत को पूरी तरह खारिज करता था और केवल भौतिकवाद का समर्थक था।
उत्तर देखें
उत्तर: (क) इसके संस्थापक मक्खलि गोशाल थे और यह संप्रदाय 'नियतिवाद' (भाग्यवादिता) पर विश्वास करता था।
आजीवक संप्रदाय की स्थापना मक्खलि गोशाल ने की थी। यह संप्रदाय 'नियतिवाद' (नियत नियम/भाग्य) में विश्वास करता था कि संसार की सभी वस्तुएं नियति द्वारा पूर्व निर्धारित हैं।
9. बौद्ध धर्म की किस शाखा में तंत्र-मंत्र, जादू-टोना और तारा देवी की पूजा को प्रमुखता मिली, जिसका विकास बिहार के नालंदा और विक्रमशिला विश्वविद्यालयों में हुआ?
- (क) हीनयान
- (ख) महायान
- (ग) वज्रयान
- (घ) थेरवाद
उत्तर देखें
उत्तर: (ग) वज्रयान
वज्रयान शाखा का उदय 7वीं-8वीं शताब्दी में हुआ जिसमें तंत्र-मंत्र और तारा देवी की उपासना की जाने लगी। बिहार के पाल शासकों ने नालंदा और विक्रमशिला में इसे विशेष प्रोत्साहन दिया।
10. द्वितीय बौद्ध संगीति के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. यह संगीति बुद्ध की मृत्यु के 100 वर्ष बाद वैशाली में आयोजित हुई थी। 2. इस समय मगध का शासक कालाशोक (काकवर्ण) था। 3. इस संगीति में बौद्ध संघ पहली बार 'स्थाविर' और 'महासांघिक' दो समूहों में विभाजित हो गया। उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?
- (क) केवल 1 और 2
- (ख) केवल 2 और 3
- (ग) केवल 1 और 3
- (घ) 1, 2 और 3
उत्तर देखें
उत्तर: (घ) 1, 2 और 3
तीनों कथन सही हैं। द्वितीय संगीति वैशाली में कालाशोक के समय हुई, जिसकी अध्यक्षता सब्बकामी ने की। यहीं मतभेदों के कारण संघ 'स्थाविर' और 'महासांघिक' में विभाजित हुआ।
English version — Buddhism and Jainism (Centers in Bihar)
{"kind": "gs", "intro_hi": "यह अध्याय BPSC प्रारंभिक एवं मुख्य परीक्षा दोनों की दृष्टि से सर्वाधिक महत्वपूर्ण है, जिससे प्रतिवर्ष 3 से 5 प्रश्न पूछे जाते हैं। बिहार प्राचीन काल में बौद्ध एवं जैन धर्मों की जन्मभूमि और कर्मभूमि रहा है, इसलिए इन धर्मों के सिद्धांतों, संगीतियों और प्रमुख स्थलों का गहन अध्ययन परीक्षा में सफलता के लिए अनिवार्य है।", "intro_en": "This chapter is extremely vital for BPSC Prelims and Mains, consistently yielding 3 to 5 questions every year. Since Bihar served as the cradle and epicenter of both Buddhism and Jainism, a detailed understanding of their philosophies, councils, and historical sites is essential.", "subtopics": [{"name_hi": "बुद्ध का जीवन, बिहार के प्रमुख बौद्ध स्थल, चार आर्य सत्य एवं अष्टांगिक मार्ग", "name_en": "Buddha's Life, Key Buddhist Sites in Bihar, Four Noble Truths & Eightfold Path", "explain_hi": "गौतम बुद्ध (सिद्धार्थ) का जन्म शाक्य गणराज्य के कपिलवस्तु के लुम्बिनी में हुआ था, और चार दृश्यों को देखकर उन्होंने 29 वर्ष की आयु में गृहत्याग (महाभिनिष्क्रमण) किया। वैशाली के पास अलार कलाम सिद्धार्थ के प्रथम गुरु बने जिनसे उन्होंने सांख्य दर्शन सीखा। बिहार का बोधगया वह पावन स्थल है जहाँ उरुवेला में निरंजना (फल्गु) नदी के तट पर पीपल वृक्ष के नीचे वैशाख पूर्णिमा को उन्हें ज्ञान (संबोधि) प्राप्त हुआ। ज्ञान प्राप्ति के पश्चात बुद्ध ने अपना प्रथम उपदेश सारनाथ में दिया जिसे 'धर्मचक्रप्रवर्तन' कहते हैं, परंतु उनका अधिकांश कर्मक्षेत्र बिहार के राजगीर, वैशाली और नालंदा में रहा। मगध नरेश बिंबिसार ने उन्हें राजगीर में 'वेणुवन' विहार दान दिया, तथा वैशाली की नगरवधू आम्रपाली ने उन्हें 'आम्रवाटिका' समर्पित की। वैशाली में अपने प्रिय शिष्य आनंद के अनुरोध पर बुद्ध ने महिलाओं को संघ में प्रवेश की अनुमति दी, जहाँ उनकी मौसी प्रजापति गौतमी प्रथम भिक्षुणी बनीं। बुद्ध ने दुखों से मुक्ति हेतु चार आर्य सत्य तथा मध्यम मार्ग के रूप में अष्टांगिक मार्ग की शिक्षा दी।", "explain_en": "Gautama Buddha (Siddhartha) was born in Lumbini in the Shakya republic and left home at age 29 after witnessing four sights, an event known as Mahabhinishkramana. Near Vaishali, Alara Kalama became his first teacher, imparting knowledge of Samkhya philosophy. Bodh Gaya in Bihar is the holy site where Buddha attained enlightenment (Sambodhi) under a pipal tree on the banks of the Niranjana (Falgu) river on Vaishakha Purnima. After enlightenment, he delivered his first sermon at Sarnath (Dhammacakkappavattana), though his primary area of activity remained Bihar's Rajgir, Vaishali, and Nalanda. Magadha King Bimbisara gifted him 'Venuvana' Vihara in Rajgir, and Amrapali of Vaishali donated 'Amravatika'. At Vaishali, upon the request of his chief disciple Ananda, Buddha allowed women to enter the Buddhist Sangha, making his aunt Prajapati Gautami the first nun. To end human suffering, Buddha propounded the Four Noble Truths and the Eightfold Path (Middle Path).", "facts": [{"hi": "बुद्ध के बचपन का नाम सिद्धार्थ था और उनके पिता शुद्धोदन शाक्य गणराज्य के प्रमुख थे।", "en": "Buddha's childhood name was Siddhartha and his father Shuddhodana was the head of the Shakya republic."}, {"hi": "बुद्ध ने 29 वर्ष की आयु में चार दृश्य (वृद्ध, रोगी, मृत शरीर, संन्यासी) देखकर गृहत्याग किया, जिसे 'महाभिनिष्क्रमण' कहा जाता है।", "en": "At age 29, Buddha left home after seeing four sights (an old man, a sick man, a corpse, an ascetic), an event called 'Mahabhinishkramana'."}, {"hi": "सिद्धार्थ के प्रथम गुरु अलार कलाम थे, जिनसे उन्होंने वैशाली के निकट सांख्य दर्शन की शिक्षा ली।", "en": "Alara Kalama was Siddhartha's first teacher near Vaishali, from whom he learned Samkhya philosophy."}, {"hi": "35 वर्ष की आयु में बोधगया में निरंजना (फल्गु) नदी के तट पर पीपल वृक्ष के नीचे बुद्ध को ज्ञान (संबोधि) प्राप्त हुआ।", "en": "At age 35, Buddha attained enlightenment under a pipal tree on the banks of the Niranjana (Falgu) river in Bodh Gaya."}, {"hi": "बुद्ध ने अपना प्रथम उपदेश सारनाथ (ऋषिपत्तन) में दिया, जिसे 'धर्मचक्रप्रवर्तन' कहा जाता है।", "en": "Buddha delivered his first sermon at Sarnath (Rishipatana), known as 'Dhammacakkappavattana'."}, {"hi": "मगध सम्राट बिंबिसार ने बुद्ध के ठहरने के लिए राजगीर में 'वेणुवन' नामक विहार दान में दिया था।", "en": "Magadha King Bimbisara donated the 'Venuvana' Vihara in Rajgir for Buddha's stay."}, {"hi": "वैशाली की प्रसिद्ध गणिका/नगरवधू आम्रपाली ने बुद्ध को 'आम्रवाटिका' दान की और बौद्ध संघ में दीक्षा ली।", "en": "Amrapali, the famous courtesan of Vaishali, donated 'Amravatika' to Buddha and was ordained into the Sangha."}, {"hi": "वैशाली में अपने प्रिय शिष्य आनंद के आग्रह पर बुद्ध ने बौद्ध संघ में महिलाओं के प्रवेश की अनुमति प्रदान की।", "en": "At the request of his disciple Ananda in Vaishali, Buddha permitted women to enter the Buddhist Sangha."}, {"hi": "बौद्ध संघ में शामिल होने वाली प्रथम महिला बुद्ध की सौतेली माँ / मौसी महाप्रजापति गौतमी थीं।", "en": "Mahaprajapati Gautami, Buddha's stepmother/aunt, was the first woman to join the Buddhist Sangha."}, {"hi": "बुद्ध ने जीवन के दुखों को समझाने के लिए चार आर्य सत्य (दुख, दुख समुदाय, दुख निरोध, दुख निरोध गामिनी प्रतिपदा) दिए।", "en": "Buddha gave the Four Noble Truths (Suffering, Cause of Suffering, Cessation of Suffering, Path to Cessation of Suffering) to explain existence."}, {"hi": "दुख निरोध हेतु बुद्ध ने 'अष्टांगिक मार्ग' (मध्यम मार्ग / मज्झिम पटिपदा) का प्रतिपादन किया।", "en": "Buddha propounded the 'Eightfold Path' (Middle Path) as the way to end suffering."}, {"hi": "नालंदा बुद्ध के प्रमुख शिष्यों में से एक सारिपुत्र की जन्मभूमि एवं कर्मभूमि रही है।", "en": "Nalanda was the birthplace and workplace of Sariputra, one of Buddha's primary disciples."}, {"hi": "80 वर्ष की आयु में उत्तर प्रदेश के कुशीनगर में बुद्ध का निधन हुआ, जिसे 'महापरिनिर्वाण' कहा जाता है।", "en": "Buddha passed away at age 80 in Kushinagar, Uttar Pradesh, an event known as 'Mahaparinirvana'."}, {"hi": "मौर्य सम्राट अशोक ने अपने राज्याभिषेक के 10वें वर्ष में सबसे पहले बोधगया की धम्मयात्रा की थी।", "en": "Mauryan Emperor Ashoka undertook his first Dhammayatra to Bodh Gaya in the 10th year of his coronation."}], "examples": [{"q": "बिहार में गौतम बुद्ध को किस स्थान पर निरंजना नदी के तट पर ज्ञान (संबोधि) प्राप्त हुआ था?", "options": ["राजगीर", "वैशाली", "बोधगया", "पावापुरी"], "ans": 2, "why": "गौतम बुद्ध को 35 वर्ष की आयु में बोधगया (उरुवेला) में निरंजना (फल्गु) नदी के तट पर पीपल वृक्ष के नीचे ज्ञान प्राप्त हुआ था।"}, {"q": "गौतम बुद्ध तथा बिहार से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:\n1. बुद्ध ने अपने प्रथम गुरु अलार कलाम से सांख्य दर्शन की शिक्षा वैशाली के समीप प्राप्त की थी।\n2. वैशाली में शिष्य आनंद के कहने पर बुद्ध ने महिलाओं को संघ में प्रवेश दिया।\nउपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?", "options": ["केवल 1", "केवल 2", "1 और 2 दोनों", "न तो 1, न ही 2"], "ans": 2, "why": "दोनों कथन सत्य हैं; 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The first three councils were held in Bihar at Rajgriha, Vaishali, and Pataliputra, while the fourth took place at Kundalvana in Kashmir. In the first council, Buddha's teachings and monastic rules were codified into the Sutta Pitaka and Vinaya Pitaka. The third council saw the compilation of the Abhidhamma Pitaka, completing the Tripitaka. The fourth council led to the formal schism of Buddhism into Hinayana and Mahayana sects, followed later by the rise of the esoteric Vajrayana school.", "facts": [{"hi": "प्रथम बौद्ध संगीति 483 ईसा पूर्व में राजगृह की सप्तपर्णी गुफा में हर्यंक वंश के शासक अजातशत्रु के शासनकाल में महाकस्सप (महाकश्यप) की अध्यक्षता में हुई।", "en": "The first Buddhist council was held in 483 BCE at Saptaparni Cave in Rajgriha under the patronage of Haryanka ruler Ajatashatru, presided over by Mahakassapa."}, {"hi": "प्रथम संगीति में आनंद ने 'सुत्तपिटक' (बुद्ध के उपदेश) तथा उपाली ने 'विनयपिटक' (संघ के नियम एवं आचार संहिता) का पाठ किया।", "en": "In the first council, Ananda recited the Sutta Pitaka (Buddha's teachings) and Upali recited the Vinaya Pitaka (monastic discipline and rules)."}, {"hi": "द्वितीय बौद्ध संगीति 383 ईसा पूर्व में वैशाली के बालुकाराम विहार में शिशुनाग वंश के शासक कालाशोक (काकवर्ण) के समय सबकामी (सर्वकामिन) की अध्यक्षता में हुई।", "en": "The second Buddhist council took place in 383 BCE at Vaishali under the patronage of Shishunaga ruler Kalashoka, presided over by Sabakami."}, {"hi": "द्वितीय संगीति में अनुशासन के नियमों को लेकर संघ पहली बार दो समूहों - 'स्थविर' (थेरावादी) और 'महासांघिक' में विभाजित हुआ।", "en": "At the second council, doctrinal disagreements over monastic rules led to the first split into Sthaviras (Theravadins) and Mahasanghikas."}, {"hi": "तृतीय बौद्ध संगीति 250/247 ईसा पूर्व में पाटलिपुत्र के अशोकाराम विहार में मौर्य सम्राट अशोक के शासनकाल में मोग्गलिपुत्त तिस्स की अध्यक्षता में संपन्न हुई।", "en": "The third Buddhist council was held around 250/247 BCE at Pataliputra under the patronage of Mauryan Emperor Ashoka, presided over by Moggaliputta Tissa."}, {"hi": "तृतीय संगीति में दार्शनिक सिद्धांतों से युक्त तीसरे पिटक 'अभिधम्मपिटक' (कथावत्थु ग्रंथ सहित) का संकलन किया गया।", "en": "In the third council, the philosophical third pitaka, Abhidhamma Pitaka (including Kathavatthu), was compiled."}, {"hi": "चतुर्थ बौद्ध संगीति प्रथम शताब्दी ईस्वी (लगभग 72 ईस्वी) में कश्मीर के कुंडलवन में कुषाण शासक कनिष्क के काल में वसुमित्र की अध्यक्षता में हुई, जिसके उपाध्यक्ष अश्वघोष थे।", "en": "The fourth Buddhist council was convened in the 1st century CE at Kundalvana (Kashmir) under Kushan king Kanishka, presided over by Vasumitra with Ashvaghosha as vice-president."}, {"hi": "चतुर्थ बौद्ध संगीति में बौद्ध धर्म स्पष्ट रूप से दो सम्प्रदायों—'हीनयान' और 'महायान' में विभाजित हो गया।", "en": "At the fourth council, Buddhism formally divided into two major sects: Hinayana and Mahayana."}, {"hi": "हीनयान बुद्ध को एक महापुरुष मानता है और मूर्तिपूजा का विरोध करता है (पाली भाषा का प्रयोग), जबकि महायान बुद्ध को ईश्वर मानकर उनकी मूर्तिपूजा करता है (संस्कृत भाषा का प्रयोग)।", "en": "Hinayana regards Buddha as a great human teacher and rejects idol worship (used Pali), whereas Mahayana deifies Buddha and worships his idols (used Sanskrit)."}, {"hi": "आठवीं शताब्दी में बंगाल और बिहार में पाल शासकों के संरक्षण में तांत्रिक बौद्ध धर्म की 'वज्रयान' शाखा का विकास हुआ, जिसका प्रमुख केंद्र विक्रमशिला विश्वविद्यालय था।", "en": "In the 8th century, the esoteric Vajrayana sect emerged under the patronage of Pala rulers in Bengal and Bihar, with Vikramashila University as its prominent center."}, {"hi": "सुत्तपिटक पाँच निकायों में विभाजित है: दीघ निकाय, मज्झिम निकाय, संयुक्त निकाय, अंगुत्तर निकाय और खुद्दक निकाय।", "en": "Sutta Pitaka is divided into five Nikayas: Digha Nikaya, Majjhima Nikaya, Samyutta Nikaya, Anguttara Nikaya, and Khuddaka Nikaya."}, {"hi": "सोलह महाजनपदों की सूची बौद्ध ग्रंथ 'अंगुत्तर निकाय' (सुत्तपिटक का भाग) तथा जैन ग्रंथ 'भगवती सूत्र' में मिलती है।", "en": "The list of the 16 Mahajanapadas is found in the Buddhist text Anguttara Nikaya (part of Sutta Pitaka) and the Jain text Bhagavati Sutra."}], "examples": [{"q": "तृतीय बौद्ध संगीति की अध्यक्षता निम्नलिखित में से किस बौद्ध भिक्षु द्वारा की गई थी?", "options": ["महाकश्यप", "सबकामी", "मोग्गलिपुत्त तिस्स", "वसुमित्र"], "ans": 2, "why": "तृतीय बौद्ध संगीति पाटलिपुत्र में मौर्य सम्राट अशोक के शासनकाल में मोग्गलिपुत्त तिस्स की अध्यक्षता में आयोजित की गई थी।"}, {"q": "बौद्ध धर्म के त्रिपिटक के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:\n1. विनयपिटक में बौद्ध संघ के आचार-नियम दिए गए हैं।\n2. सुत्तपिटक में भगवान बुद्ध के धार्मिक उपदेशों का संग्रह है।\n3. अभिधम्मपिटक का संकलन प्रथम बौद्ध संगीति में हुआ था।\nउपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?", "options": ["केवल 1 और 2", "केवल 2 और 3", "केवल 1 और 3", "1, 2 और 3"], "ans": 0, "why": "अभिधम्मपिटक का संकलन तृतीय बौद्ध संगीति (अशोक के काल) में हुआ था, न कि प्रथम बौद्ध संगीति में।"}, {"q": "चतुर्थ बौद्ध संगीति के संदर्भ में उपाध्यक्ष का पद किसने संभाला था?", "options": ["वसुमित्र", "अश्वघोष", "नागार्जुन", "पार्श्व"], "ans": 1, "why": "कनिष्क के काल में कुंडलवन (कश्मीर) में आयोजित चतुर्थ संगीति के अध्यक्ष वसुमित्र थे और उपाध्यक्ष अश्वघोष थे।"}, {"q": "सूची-I को सूची-II से सुमेलित कीजिए तथा नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:\nसूची-I (बौद्ध संगीति)\nA. प्रथम\nB. द्वितीय\nC. तृतीय\nD. चतुर्थ\nसूची-II (शासक)\n1. कनिष्क\n2. अशोक\n3. कालाशोक\n4. अजातशत्रु", "options": ["A-4, B-3, C-2, D-1", "A-3, B-4, C-1, D-2", "A-4, B-2, C-3, D-1", "A-1, B-2, C-3, D-4"], "ans": 0, "why": "प्रथम संगीति अजातशत्रु, द्वितीय कालाशोक, तृतीय अशोक तथा चतुर्थ कनिष्क के समय आयोजित हुई थी।"}, {"q": "बौद्ध धर्म की 'वज्रयान' शाखा का सर्वाधिक विकास बिहार में किस राजवंश के संरक्षण में हुआ?", "options": ["मौर्य वंश", "गुप्त वंश", "पाल वंश", "शुंग वंश"], "ans": 2, "why": "पाल शासक बौद्ध धर्म के अनुयायी थे और उनके काल में तंत्रयान/वज्रयान का व्यापक विकास हुआ, जिसके संवर्धन हेतु विक्रमशिला की स्थापना हुई।"}], "asked_hi": "BPSC इस उप-विषय से संगीतियों के स्थल, शासक, अध्यक्ष, उनके क्रम तथा संकलित ग्रंथों (त्रिपिटक) से जुड़े तथ्यात्मक प्रश्न लगभग प्रत्येक वर्ष या एकांतर वर्षों में अनिवार्य रूप से पूछता है।", "asked_en": "BPSC frequently tests this sub-topic through direct and matching questions focusing on the council venues, reigning monarchs, presiding monks, and the doctrinal outcomes like the Tripitaka and sect schisms.", "confusions_hi": ["छात्र प्रायः द्वितीय (कालाशोक) और तृतीय (अशोक) संगीति के शासकों तथा उनके अध्यक्षों (सबकामी बनाम मोग्गलिपुत्त तिस्स) में भ्रमित हो जाते हैं।", "चतुर्थ बौद्ध संगीति में 'वसुमित्र' अध्यक्ष थे और 'अश्वघोष' उपाध्यक्ष थे; छात्र इन दोनों के पदों को आपस में बदल देते हैं।"], "table": {"head": ["संगीति", "वर्ष", "स्थान", "शासक (वंश)", "अध्यक्ष", "प्रमुख कार्य / परिणाम"], "rows": [["प्रथम", "483 ईसा पूर्व", "राजगृह (सप्तपर्णी गुफा)", "अजातशत्रु (हर्यंक वंश)", "महाकश्यप", "बुद्ध के उपदेशों का संकलन: सुत्तपिटक और विनयपिटक"], ["द्वितीय", "383 ईसा पूर्व", "वैशाली (बालुकाराम विहार)", "कालाशोक (शिशुनाग वंश)", "सबकामी (सर्वकामिन)", "संघ का प्रथम विभाजन: स्थविर और महासांघिक"], ["तृतीय", "250 ईसा पूर्व", "पाटलिपुत्र (अशोकाराम)", "अशोक (मौर्य वंश)", "मोग्गलिपुत्त तिस्स", "तृतीय पिटक 'अभिधम्मपिटक' का संकलन"], ["चतुर्थ", "72 ईस्वी (प्रथम शताब्दी)", "कुंडलवन (कश्मीर)", "कनिष्क (कुषाण वंश)", "वसुमित्र (उपाध्यक्ष: अश्वघोष)", "बौद्ध धर्म का विभाजन: हीनयान एवं महायान"]]}, "trick_hi": "स्थान याद रखने की ट्रिक: 'रा-वै-पा-क' (राजगृह, वैशाली, पाटलिपुत्र, कश्मीर); शासक याद रखने की ट्रिक: 'अ-का-अ-क' (अजातशत्रु, कालाशोक, अशोक, कनिष्क)।", "pyqs": [{"id": "bpsc-cce-71-pre:95", "label": "BPSC 71वीं प्रारंभिक (13 सितंबर 2025), प्रश्न 95", "topic": "बौद्ध धर्म", "q": "कौन-सी बौद्ध संगीति बिहार में आयोजित नहीं की गई थी?", "options": ["प्रथम", "द्वितीय", "तृतीय", "चतुर्थ"], "ans": [3], "why_hi": "प्रथम संगीति राजगृह, द्वितीय वैशाली और तृतीय पाटलिपुत्र (तीनों बिहार) में हुई थीं, जबकि चतुर्थ संगीति कुंडलवन (कश्मीर) में हुई थी।"}]}, {"name_hi": "महावीर का जीवन, तीर्थंकर और जैन सिद्धांत", "name_en": "Life of Mahavira, Tirthankaras and Jain Principles", "explain_hi": "जैन धर्म एक अत्यंत प्राचीन धर्म है जिसमें 24 तीर्थंकरों की परंपरा रही है। भगवान महावीर इस परंपरा के अंतिम और 24वें तीर्थंकर थे, जिनका जन्म बिहार के वैशाली के पास कुंडग्राम में हुआ था। उन्होंने 30 वर्ष की आयु में गृह त्याग किया और 12 वर्षों की कठिन तपस्या के बाद 'कैवल्य' (सर्वोच्च ज्ञान) प्राप्त किया। महावीर ने पार्श्वनाथ द्वारा दिए गए चार व्रतों में पांचवां व्रत 'ब्रह्मचर्य' जोड़ा। उनके उपदेशों का मुख्य केंद्र अहिंसा और आत्म-संयम था। बिहार का पावापुरी वह स्थान है जहाँ उन्होंने निर्वाण प्राप्त किया, जो आज भी जैनियों का प्रमुख तीर्थ स्थल है।", "explain_en": "Jainism is an ancient religion with a tradition of 24 Tirthankaras, of whom Lord Mahavira was the last. He was born in Kundagram near Vaishali, Bihar, into a royal family but renounced worldly life at the age of 30. After 12 years of intense penance, he attained 'Kaivalya' (supreme knowledge) near the Rijupalika river. Mahavira added 'Brahmacharya' (celibacy) to the four existing vows of Parshvanatha, forming the 'Pancha Mahavrata'. His teachings emphasize non-violence and the 'Triratna' (Three Jewels) for liberation. He attained Nirvana at Pawapuri in Bihar, which remains a significant pilgrimage site.", "facts": [{"hi": "महावीर का जन्म 540 ईसा पूर्व (कुछ स्रोतों में 599 ईसा पूर्व) वैशाली के कुंडग्राम में हुआ था।", "en": "Mahavira was born in 540 BC (599 BC in some sources) at Kundagram in Vaishali."}, {"hi": "उनके पिता सिद्धार्थ ज्ञातृक क्षत्रिय संघ के प्रधान थे और माता त्रिशला लिच्छवी राजा चेटक की बहन थीं।", "en": "His father Siddhartha was the head of the Jnatrika clan and mother Trishala was the sister of Lichchhavi King Chetaka."}, {"hi": "महावीर के बचपन का नाम वर्धमान था और उनकी पत्नी का नाम यशोदा था।", "en": "Mahavira's childhood name was Vardhamana and his wife's name was Yashoda."}, {"hi": "42 वर्ष की आयु में जृम्भिकग्राम के पास ऋजुपालिका नदी के तट पर साल वृक्ष के नीचे उन्हें 'कैवल्य' प्राप्त हुआ।", "en": "At age 42, he attained 'Kaivalya' under a Sal tree on the banks of the Rijupalika river near Jrimbhikagrama."}, {"hi": "जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर ऋषभदेव (आदिनाथ) थे और 23वें तीर्थंकर पार्श्वनाथ थे।", "en": "The first Tirthankara of Jainism was Rishabhanatha (Adinath) and the 23rd was Parshvanatha."}, {"hi": "महावीर ने पार्श्वनाथ के चार व्रतों (अहिंसा, सत्य, अस्तेय, अपरिग्रह) में 'ब्रह्मचर्य' को पांचवें व्रत के रूप में जोड़ा।", "en": "Mahavira added 'Brahmacharya' as the fifth vow to Parshvanatha's four vows (Ahimsa, Satya, Asteya, Aparigraha)."}, {"hi": "त्रिरत्न में सम्यक दर्शन (सही विश्वास), सम्यक ज्ञान (सही ज्ञान) और सम्यक चरित्र (सही आचरण) शामिल हैं।", "en": "Triratna includes Samyak Darshana (Right Faith), Samyak Jnana (Right Knowledge), and Samyak Charitra (Right Conduct)."}, {"hi": "महावीर का प्रतीक चिन्ह 'सिंह' (Lion) है।", "en": "The symbol of Mahavira is the 'Lion'."}, {"hi": "भगवती सूत्र महावीर के जीवन और उनके 16 महाजनपदों के संबंधों का वर्णन करता है।", "en": "Bhagavati Sutra describes Mahavira's life and his connections with the 16 Mahajanapadas."}, {"hi": "महावीर के प्रथम शिष्य उनके दामाद जमालि थे।", "en": "Mahavira's first disciple was his son-in-law, Jamali."}, {"hi": "72 वर्ष की आयु में 468 ईसा पूर्व बिहार के पावापुरी (नालंदा) में महावीर का निर्वाण हुआ।", "en": "Mahavira attained Nirvana at the age of 72 in 468 BC at Pawapuri (Nalanda), Bihar."}, {"hi": "पार्श्वनाथ का प्रतीक चिन्ह 'सर्प' (Snake) है और उनका जन्म वाराणसी में हुआ था।", "en": "Parshvanatha's symbol is the 'Snake' and he was born in Varanasi."}], "examples": [{"q": "भगवान महावीर का जन्म बिहार के किस स्थान पर हुआ था?", "options": ["पावापुरी", "लुम्बिनी", "कुंडग्राम", "बोधगया"], "ans": 2, "why": "महावीर का जन्म वैशाली के निकट कुंडग्राम में हुआ था।"}, {"q": "जैन धर्म के 23वें तीर्थंकर पार्श्वनाथ का प्रतीक चिन्ह क्या है?", "options": ["सिंह", "सर्प", "वृषभ", "हाथी"], "ans": 1, "why": "पार्श्वनाथ का प्रतीक सर्प है, जबकि महावीर का सिंह और ऋषभदेव का वृषभ है।"}, {"q": "महावीर स्वामी ने जैन धर्म के सिद्धांतों में कौन सा पांचवां व्रत जोड़ा था?", "options": ["अहिंसा", "अस्तेय", "अपरिग्रह", "ब्रह्मचर्य"], "ans": 3, "why": "पार्श्वनाथ ने चार व्रत दिए थे, महावीर ने पांचवें व्रत के रूप में ब्रह्मचर्य को अनिवार्य किया।"}, {"q": "जैन धर्म के 'त्रिरत्न' में निम्नलिखित में से कौन सा शामिल नहीं है?", "options": ["सम्यक ज्ञान", "सम्यक दर्शन", "सम्यक भक्ति", "सम्यक चरित्र"], "ans": 2, "why": "जैन त्रिरत्न में ज्ञान, दर्शन और चरित्र शामिल हैं, भक्ति नहीं।"}, {"q": "महावीर स्वामी को किस नदी के तट पर ज्ञान (कैवल्य) प्राप्त हुआ था?", "options": ["निरंजना", "ऋजुपालिका", "गंगा", "गंडक"], "ans": 1, "why": "महावीर को ऋजुपालिका नदी के तट पर ज्ञान प्राप्त हुआ था, जबकि बुद्ध को निरंजना नदी के तट पर।"}], "asked_hi": "BPSC में महावीर के जन्म स्थान, माता-पिता के नाम, निर्वाण स्थल (पावापुरी) और जैन धर्म के पांच महाव्रतों से संबंधित प्रश्न बार-बार पूछे जाते हैं। तीर्थंकरों के क्रम और उनके प्रतीकों का मिलान करने वाले प्रश्न भी सामान्य हैं।", "asked_en": "BPSC frequently asks questions about Mahavira's birthplace, parents' names, place of Nirvana (Pawapuri), and the five Mahavratas. Matching the sequence of Tirthankaras and their symbols is also a common pattern.", "confusions_hi": ["बुद्ध का जन्म लुम्बिनी में हुआ था जबकि महावीर का कुंडग्राम (वैशाली) में; छात्र अक्सर इनमें भ्रमित हो जाते हैं।", "बुद्ध ने निरंजना नदी के तट पर ज्ञान प्राप्त किया, जबकि महावीर ने ऋजुपालिका नदी के तट पर।"], "table": {"head": ["तीर्थंकर", "क्रम", "प्रतीक", "विशेष तथ्य"], "rows": [["ऋषभदेव", "प्रथम", "वृषभ (बैल)", "जैन धर्म के संस्थापक"], ["पार्श्वनाथ", "23वें", "सर्प", "वाराणसी के राजा अश्वसेन के पुत्र"], ["महावीर", "24वें", "सिंह", "वास्तविक संस्थापक, बिहार में जन्म"]]}, "trick_hi": "महावीर के 5 व्रत याद रखने के लिए: 'सत्य अहिंसा की अस्तेय अपरिग्रह के साथ ब्रह्मचर्य की शक्ति' (सत्य, अहिंसा, अस्तेय, अपरिग्रह + ब्रह्मचर्य)।", "pyqs": []}, {"name_hi": "जैन संगीतियाँ, संप्रदाय और साहित्य", "name_en": "Jain Councils, Sects and Literature", "explain_hi": "महावीर स्वामी के निर्वाण के बाद जैन धर्म के सिद्धांतों को संकलित करने के लिए दो प्रमुख संगीतियाँ आयोजित की गईं। मगध में भीषण अकाल के कारण जैन संघ दो भागों में विभाजित हो गया: श्वेतांबर और दिगंबर। स्थूलभद्र के नेतृत्व वाले श्वेतांबर सफेद वस्त्र धारण करते थे, जबकि भद्रबाहु के अनुयायी दिगंबर नग्न रहते थे। प्रथम संगीति पाटलिपुत्र में हुई जहाँ 12 अंगों का संकलन किया गया। दूसरी संगीति गुजरात के वल्लभी में हुई जिसमें जैन ग्रंथों को अंतिम रूप दिया गया। जैन साहित्य मुख्य रूप से प्राकृत और अर्धमागधी भाषा में लिखा गया है जिसे 'आगम' कहा जाता है।", "explain_en": "After the Nirvana of Mahavira, two major councils were organized to compile Jain teachings. Due to a severe famine in Magadha, the Jain community split into two sects: Shvetambara and Digambara. The Shvetambaras, led by Sthulabhadra, wore white clothes, while the Digambaras, led by Bhadrabahu, remained naked. The first council was held in Pataliputra where 12 Angas were compiled. The second council took place in Vallabhi, Gujarat, to give the final shape to Jain scriptures. Jain literature is primarily written in Prakrit and Ardhamagadhi languages, collectively known as 'Agamas'.", "facts": [{"hi": "प्रथम जैन संगीति 300 ईसा पूर्व में पाटलिपुत्र (बिहार) में आयोजित की गई थी।", "en": "The first Jain Council was held in Pataliputra (Bihar) in 300 BC."}, {"hi": "प्रथम संगीति की अध्यक्षता स्थूलभद्र ने की थी।", "en": "The first council was presided over by Sthulabhadra."}, {"hi": "प्रथम संगीति के समय मगध का शासक चंद्रगुप्त मौर्य था।", "en": "The ruler of Magadha during the first council was Chandragupta Maurya."}, {"hi": "द्वितीय जैन संगीति 512 ईस्वी में वल्लभी (गुजरात) में आयोजित हुई थी।", "en": "The second Jain Council was held in Vallabhi (Gujarat) in 512 AD."}, {"hi": "द्वितीय संगीति की अध्यक्षता देवर्धि क्षमाश्रमण ने की थी।", "en": "The second council was presided over by Devardhi Kshamasramana."}, {"hi": "श्वेतांबर संप्रदाय के लोग सफेद वस्त्र पहनते हैं और इसके संस्थापक स्थूलभद्र थे।", "en": "Shvetambara sect followers wear white clothes and its founder was Sthulabhadra."}, {"hi": "दिगंबर संप्रदाय के लोग पूर्णतः नग्न रहते हैं और इसके संस्थापक भद्रबाहु थे।", "en": "Digambara sect followers remain completely naked and its founder was Bhadrabahu."}, {"hi": "जैन धर्म के पवित्र ग्रंथों को 'आगम' कहा जाता है।", "en": "The sacred texts of Jainism are called 'Agamas'."}, {"hi": "प्रथम संगीति में जैन धर्म के 12 अंगों का संकलन किया गया था।", "en": "The 12 Angas of Jainism were compiled during the first council."}, {"hi": "कल्पसूत्र की रचना भद्रबाहु ने संस्कृत भाषा में की थी।", "en": "Kalpa Sutra was composed by Bhadrabahu in Sanskrit language."}, {"hi": "जैन साहित्य की मुख्य भाषा प्राकृत (अर्धमागधी) रही है।", "en": "The primary language of Jain literature has been Prakrit (Ardhamagadhi)."}, {"hi": "भगवती सूत्र में 16 महाजनपदों का विवरण मिलता है।", "en": "Bhagavati Sutra contains details of the 16 Mahajanapadas."}], "examples": [{"q": "प्रथम जैन संगीति कहाँ आयोजित की गई थी?", "options": ["वल्लभी", "राजगृह", "पाटलिपुत्र", "वैशाली"], "ans": 2, "why": "प्रथम जैन संगीति 300 ईसा पूर्व में पाटलिपुत्र में स्थूलभद्र की अध्यक्षता में हुई थी।"}, {"q": "जैन धर्म के 'दिगंबर' संप्रदाय के नेता कौन थे?", "options": ["स्थूलभद्र", "भद्रबाहु", "पार्श्वनाथ", "महावीर स्वामी"], "ans": 1, "why": "अकाल के समय दक्षिण भारत जाने वाले समूह का नेतृत्व भद्रबाहु ने किया, जो दिगंबर कहलाए।"}, {"q": "द्वितीय जैन संगीति के अध्यक्ष कौन थे?", "options": ["स्थूलभद्र", "भद्रबाहु", "देवर्धि क्षमाश्रमण", "मोगलीपुत्त तिस्स"], "ans": 2, "why": "छठी शताब्दी में वल्लभी में हुई दूसरी संगीति की अध्यक्षता देवर्धि क्षमाश्रमण ने की थी।"}, {"q": "जैन साहित्य 'आगम' की भाषा क्या है?", "options": ["पालि", "संस्कृत", "प्राकृत (अर्धमागधी)", "हिंदी"], "ans": 2, "why": "प्रारंभिक जैन साहित्य मुख्य रूप से प्राकृत या अर्धमागधी भाषा में लिखा गया था।"}, {"q": "निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही है?\n1. प्रथम जैन संगीति चंद्रगुप्त मौर्य के काल में हुई।\n2. श्वेतांबर संप्रदाय के लोग नग्न रहते थे।", "options": ["केवल 1", "केवल 2", "1 और 2 दोनों", "कोई नहीं"], "ans": 0, "why": "कथन 1 सही है, लेकिन कथन 2 गलत है क्योंकि श्वेतांबर सफेद वस्त्र पहनते थे।"}], "asked_hi": "BPSC में अक्सर प्रथम जैन संगीति के स्थान (पाटलिपुत्र) और श्वेतांबर-दिगंबर के बीच अंतर से प्रश्न पूछे जाते हैं। शासक और अध्यक्ष का नाम मिलान करने वाले प्रश्नों में आता है।", "asked_en": "BPSC frequently asks about the location of the first Jain Council (Pataliputra) and the differences between Shvetambara and Digambara. Names of rulers and presidents often appear in match-the-following questions.", "confusions_hi": ["बौद्ध संगीति और जैन संगीति के स्थानों में भ्रम (प्रथम बौद्ध संगीति राजगृह में हुई, जबकि प्रथम जैन संगीति पाटलिपुत्र में)।", "स्थूलभद्र (श्वेतांबर - सफेद वस्त्र) और भद्रबाहु (दिगंबर - नग्न) के नामों में भ्रम।"], "table": {"head": ["संगीति", "समय", "स्थान", "अध्यक्ष", "मुख्य कार्य"], "rows": [["प्रथम", "300 ई.पू.", "पाटलिपुत्र", "स्थूलभद्र", "12 अंगों का संकलन, जैन धर्म का दो भागों में विभाजन"], ["द्वितीय", "512 ईस्वी", "वल्लभी (गुजरात)", "देवर्धि क्षमाश्रमण", "बिखरे हुए ग्रंथों का संकलन और लिपिबद्ध करना"]]}, "trick_hi": "S से स्थूलभद्र और S से श्वेतांबर (सफेद वस्त्र)। B से भद्रबाहु और B से Bare (नग्न/दिगंबर)।", "pyqs": []}, {"name_hi": "बौद्ध धर्म, जैन धर्म और आजीवक संप्रदाय की तुलना", "name_en": "Comparison of Buddhism, Jainism, and Ajivika Sect", "explain_hi": "छठी शताब्दी ईसा पूर्व में मध्य गंगा के मैदान (विशेषकर बिहार) में वैदिक कर्मकांडों और वर्ण व्यवस्था के विरोध में अनेक नास्तिक व श्रमण संप्रदायों का उदय हुआ। इनमें बौद्ध धर्म, जैन धर्म और आजीवक संप्रदाय सबसे प्रमुख थे। बौद्ध धर्म ने 'मध्यम मार्ग' को अपनाया, जबकि जैन धर्म ने अतिशय कायाक्लेश और कठोर अहिंसा पर बल दिया। आजीवक संप्रदाय के संस्थापक मक्खलि गोशाल थे, जिन्होंने 'नियतिवाद' (भाग्यवाद) का सिद्धांत दिया। मौर्य शासक अशोक और उसके पौत्र दशरथ ने गया की बराबर और नागार्जुनी पहाड़ियों की गुफाएं आजीवक संप्रदाय के साधुओं को दान में दी थीं। ये तीनों संप्रदाय ईश्वर की सत्ता और वेदों की प्रामाणिकता को अस्वीकार करते थे, लेकिन पुनर्जन्म और आत्मा के अस्तित्व पर इनके विचार भिन्न थे।", "explain_en": "In the 6th century BCE, several heterodox and Shramana sects arose in the Middle Ganga plain (especially Bihar) against Vedic rituals and the varna system. Among these, Buddhism, Jainism, and the Ajivika sect were the most prominent. Buddhism adopted the 'Middle Path', whereas Jainism emphasized extreme penance and strict non-violence. The Ajivika sect was founded by Makkhali Gosala, who proposed the doctrine of 'Niyativada' (Fatalism). Maurya meperor Ashoka and his grandson Dasharatha donated the caves of Barabar and Nagarjuni hills in Gaya to Ajivika monks. All three sects rejected the authority of the Vedas and the existence of a creator God, but held different views on soul and rebirth.", "facts": [{"hi": "बौद्ध धर्म मध्यम मार्ग (अष्टांगिक मार्ग) का पालन करता है, जबकि जैन धर्म अतिशय कायाक्लेश और कठोर तपस्या पर बल देता है।", "en": "Buddhism follows the Middle Path (Eightfold Path), whereas Jainism emphasizes severe austerity and body mortification."}, {"hi": "आजीवक संप्रदाय के संस्थापक मक्खलि गोशाल थे, जो शुरुआत में महावीर स्वामी के शिष्य थे।", "en": "The Ajivika sect was founded by Makkhali Gosala, who was initially a disciple of Mahavira."}, {"hi": "आजीवक संप्रदाय का मुख्य सिद्धांत 'नियतिवाद' (भाग्य ही मनुष्य के सुख-दुख को निर्धारित करता है) था।", "en": "The main doctrine of the Ajivika sect was 'Niyativada' (Fatalism - destiny determines human happiness and sorrow)."}, {"hi": "बौद्ध धर्म अनात्मवादी (आत्मा के स्थायी अस्तित्व को न मानने वाला) है, जबकि जैन धर्म सर्वजीववादी एवं आत्मवादी है।", "en": "Buddhism denies the existence of a permanent soul (Anatta), while Jainism recognizes the presence of soul in all entities."}, {"hi": "बौद्ध और जैन दोनों संप्रदाय ईश्वर को सृष्टि का रचयिता नहीं मानते तथा वेदों की अपौरुषेयता को खारिज करते हैं।", "en": "Both Buddhism and Jainism reject God as the creator of the universe and deny the authority of the Vedas."}, {"hi": "मौर्य सम्राट अशोक ने गया स्थित बराबर की पहाड़ियों में आजीवक साधुओं के लिए कर्ण चौपार, सुदामा और विश्व झोपड़ी गुफाओं का निर्माण करवाया।", "en": "Maurya Emperor Ashoka constructed the Karna Chaupar, Sudama, and Vishwa Zopadi caves in Barabar hills for Ajivika monks."}, {"hi": "अशोक के पौत्र दशरथ ने नागार्जुनी पहाड़ियों में आजीवक संप्रदाय के लिए गोपिका, वापी और वदथिक गुफाएं समर्पित की थीं।", "en": "Ashoka's grandson Dasharatha dedicated the Gopika, Vapi, and Vadathika caves in Nagarjuni hills to the Ajivika sect."}, {"hi": "बौद्ध धर्म का जन-प्रचार पालि भाषा में हुआ, जबकि प्रारंभिक जैन साहित्य अर्धमागधी (प्राकृत) भाषा में लिखा गया।", "en": "Buddhist teachings were propagated in Pali language, whereas early Jain literature was written in Ardhamagadhi (Prakrit)."}, {"hi": "घोर अक्रियवादी संप्रदाय के संस्थापक पूरण कश्यप थे, जिन्होंने कर्मफल के सिद्धांत का खंडन किया।", "en": "Purana Kassapa was the founder of the Akriyavada sect, who rejected the doctrine of karma."}, {"hi": "उच्छेदवाद (कट्टर भौतिकवाद) के समर्थक अजित केशकम्बलिन थे, जिन्हें चार्वाक दर्शन का अग्रदूत माना जाता है।", "en": "Ajita Kesakambalin was the proponent of Utchedavada (Materialism), considered a forerunner of Charvaka philosophy."}, {"hi": "अनिश्चयवाद (संशयवाद) के प्रमुख आचार्य संजय वेलट्ठिपुत्त थे।", "en": "Sanjaya Belatthiputta was the leading teacher of Anischayavada (Scepticism)."}, {"hi": "नित्यवाद (उच्छेदरहित/अकृतकवाद) के प्रतिपादक पकुध कच्चायन थे।", "en": "Pakudha Kaccayana was the proponent of Nityavada (Eternalism)."}], "examples": [{"q": "बराबर की पहाड़ियों में आजीवक संप्रदाय के साधुओं के लिए गुफाओं का निर्माण निम्नलिखित में से किस शासक ने करवाया था?", "options": ["चंद्रगुप्त मौर्य", "अशोक", "बिंबिसार", "कनिष्क"], "ans": 1, "why": "मौर्य सम्राट अशोक ने गया के पास बराबर की पहाड़ियों में आजीवक साधुओं के लिए गुफाएं (सुदामा, कर्ण चौपार आदि) बनवाई थीं।"}, {"q": "प्रसिद्ध प्राचीन श्रमण संप्रदाय 'आजीवक संप्रदाय' के संस्थापक कौन थे?", "options": ["पूरण कश्यप", "अजित केशकम्बलिन", "मक्खलि गोशाल", "पकुध कच्चायन"], "ans": 2, "why": "आजीवक संप्रदाय की स्थापना मक्खलि गोशाल ने की थी, जिनका मुख्य सिद्धांत 'नियतिवाद' था।"}, {"q": "बौद्ध धर्म और जैन धर्म के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:\n1. बौद्ध धर्म आत्मा के स्थायी अस्तित्व को स्वीकार नहीं करता है।\n2. जैन धर्म के अनुसार सजीव एवं निर्जीव दोनों में आत्मा का वास होता है।\n3. दोनों धर्म वेदों की प्रामाणिकता को स्वीकार करते हैं।\nउपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?", "options": ["केवल 1 और 2", "केवल 2 और 3", "केवल 1 और 3", "1, 2 और 3"], "ans": 0, "why": "बौद्ध धर्म अनात्मवादी है और जैन धर्म सर्वजीववादी है; परंतु दोनों धर्म वेदों की प्रामाणिकता को खारिज करते हैं, इसलिए कथन 3 गलत है।"}, {"q": "सूची-I (संप्रदाय) को सूची-II (संस्थापक/प्रवर्तक) से सुमेलित कीजिए:\na) नियतिवाद — 1) अजित केशकम्बलिन\nb) अक्रियवाद — 2) मक्खलि गोशाल\nc) उच्छेदवाद — 3) पूरण कश्यप\nd) अनिश्चयवाद — 4) संजय वेलट्ठिपुत्त", "options": ["a-2, b-3, c-1, d-4", "a-3, b-2, c-1, d-4", "a-2, b-1, c-3, d-4", "a-4, b-3, c-2, d-1"], "ans": 0, "why": "नियतिवाद के मक्खलि गोशाल, अक्रियवाद के पूरण कश्यप, उच्छेदवाद के अजित केशकम्बलिन तथा अनिश्चयवाद के संजय वेलट्ठिपुत्त संस्थापक थे।"}, {"q": "अशोक के पौत्र दशरथ ने आजीवक संप्रदाय के मुनियों को निम्नलिखित में से किस स्थान पर गुफाएं दान में दी थीं?", "options": ["बराबर पहाड़ियां", "नागार्जुनी पहाड़ियां", "राजगीर पहाड़ियां", "गृधकूट पर्वत"], "ans": 1, "why": "अशोक ने बराबर की पहाड़ियों में तथा उसके पौत्र दशरथ ने नागार्जुनी पहाड़ियों में आजीवकों के लिए गुफाएं बनवाई थीं।"}], "asked_hi": "BPSC में प्राचीन धार्मिक सुधार आंदोलनों, विशेषकर बौद्ध-जैन तुलना तथा आजीवक संप्रदाय (अशोक व दशरथ के गुफा दान, मक्खलि गोशाल के नियतिवाद) पर सीधे प्रश्न तथा कथन-आधारित प्रश्न बार-बार पूछे जाते हैं।", "asked_en": "BPSC frequently asks direct and statement-based questions on ancient religious reform movements, especially comparing Buddhism vs Jainism and the Ajivika sect (Barabar/Nagarjuni caves donated by Ashoka & Dasharatha, Niyativada of Makkhali Gosala).", "confusions_hi": ["बराबर पहाड़ियों की गुफाएं अशोक ने बनवाई थीं, जबकि नागार्जुनी पहाड़ियों की गुफाएं उसके पौत्र दशरथ ने बनवाई थीं।", "बौद्ध धर्म अनात्मवादी (आत्मा नहीं मानता) है, जबकि जैन धर्म में आत्मा के अस्तित्व को अत्यधिक महत्व दिया गया है।", "बौद्ध धर्म ने पालि भाषा को अपनाया जबकि प्रारंभिक जैन साहित्य अर्धमागधी (प्राकृत) में लिखा गया।"], "table": {"head": ["विशिष्टता/लक्षण", "बौद्ध धर्म", "जैन धर्म", "आजीवक संप्रदाय"], "rows": [["संस्थापक / प्रमुख", "गौतम बुद्ध", "ऋषभदेव (प्रथम), महावीर (24वें)", "मक्खलि गोशाल"], ["मुख्य दर्शन / सिद्धांत", "मध्यम मार्ग, प्रतीयसमुत्पाद", "स्याद्वाद, अनेकांतवाद, त्रिरत्न", "नियतिवाद (भाग्य ही सर्वोपरि)"], ["आत्मा सम्बंधी विचार", "अनात्मवादी (स्थायी आत्मा नहीं)", "आत्मवादी (प्रत्येक जीव/कण में आत्मा)", "नियतिबद्ध आत्मा"], ["कठोरता व अहिंसा", "व्यावहारिक अहिंसा, मध्यम मार्ग", "अत्यधिक कठोर अहिंसा एवं कायाक्लेश", "कर्मनिरपेक्ष साधना"], ["मुख्य प्रचार भाषा", "पालि", "प्राकृत (अर्धमागधी)", "प्राकृत / पालि ग्रन्थों में उल्लेख"], ["बिहार में प्रमुख गुफाएं/दान", "बराबर की लोमस ऋषि गुफा (बाद का काल)", "वैशाली, पावापुरी क्षेत्र", "बराबर (अशोक) व नागार्जुनी (दशरथ) गुफाएं"]]}, "trick_hi": "याद रखें: 'नियति गोशाल की, मध्यम बुद्ध का, कायाक्लेश महावीर का' (आजीवक=नियतिवाद/गोशाल, बौद्ध=मध्यम मार्ग, जैन=कठोर कायाक्लेश)।", "pyqs": []}], "summary_hi": ["गौतम बुद्ध को बोधगया में निरंजना (पुनपुन/फल्गु) नदी के तट पर पीपल के वृक्ष के नीचे वैशाख पूर्णिमा को ज्ञान प्राप्त हुआ।", "बौद्ध धर्म के चार आर्य सत्य हैं: दुःख, दुःख समुदाय, दुःख निरोध और दुःख निरोध गामिनी प्रतिपदा (अष्टांगिक मार्ग)।", "प्रथम बौद्ध संगीति राजगृह में (अजातशत्रु/महाकश्यप), द्वितीय वैशाली में (कालाशोक/सब्बकामी), तृतीय पाटलिपुत्र में (अशोक/मोगलिपुत्त तिस्स) और चतुर्थ कश्मीर में (कनिष्क/वसुमित्र) आयोजित हुई।", "सुत्तपिटक (बुद्ध के उपदेश), विनयपिटक (संघ के नियम) तथा अभिधम्मपिटक (दार्शनिक व्याख्याएं) को संयुक्त रूप से 'त्रिपिटक' कहा जाता है।", "कुषाण काल में कनिष्क के समय चतुर्थ बौद्ध संगीति में बौद्ध धर्म दो संप्रदायों—हीनयान और महायान में विभाजित हो गया, जबकि 8वीं सदी में वज्रयान शाखा उभरी।", "24वें जैन तीर्थंकर वर्धमान महावीर का जन्म वैशाली के निकट कुंडग्राम में हुआ तथा उन्हें बिहार के पावापुरी में निर्वाण प्राप्त हुआ।", "23वें तीर्थंकर पार्श्वनाथ के चार महाव्रतों (सत्य, अहिंसा, अस्तेय, अपरिग्रह) में महावीर स्वामी ने पाँचवाँ महाव्रत 'ब्रह्मचर्य' जोड़ा।", "जैन धर्म के 'त्रिरत्न' हैं: सम्यक् दर्शन (सही विश्वास), सम्यक् ज्ञान (सही ज्ञान) और सम्यक् चरित्र (सही आचरण)।", "प्रथम जैन संगीति पाटलिपुत्र में चंद्रगुप्त मौर्य के काल में स्थूलभद्र की अध्यक्षता में हुई, जहाँ जैन धर्म श्वेतांबर और दिगंबर संप्रदायों में बँट गया।", "द्वितीय जैन संगीति वल्लभी (गुजरात) में देवाधि क्षमाश्रमण की अध्यक्षता में आयोजित हुई, जहाँ जैन आगम ग्रंथों को लिपिबद्ध किया गया।", "मक्खलि गोशाल द्वारा स्थापित आजीवक संप्रदाय पूर्ण नियतिवाद (भाग्यवादिता) के सिद्धांत पर आधारित था।"], "summary_en": ["Gautama Buddha attained enlightenment (Sambodhi) on Vaishakha Purnima under a Pipal tree on the banks of Niranjana (Phalgu) River in Bodh Gaya.", "The Four Noble Truths of Buddhism lead to the Eightfold Path (Ashtangika Marga) for attaining Nirvana.", "Buddhist Councils: 1st at Rajgir (Ajatashatru/Mahakasyapa), 2nd at Vaishali (Kalashoka/Sabbakami), 3rd at Pataliputra (Ashoka/Moggaliputta Tissa), 4th at Kashmir (Kanishka/Vasumitra).", "Tripitaka includes Sutta Pitaka (Teachings), Vinaya Pitaka (Monastic Rules), and Abhidhamma Pitaka (Philosophical Interpretations).", "Buddhism split into Hinayana and Mahayana during the 4th Council under Kanishka, while Vajrayana emerged later around the 8th century.", "Vardhamana Mahavira, the 24th Tirthankara, was born at Kundagram near Vaishali and attained Nirvana at Pawapuri in Bihar.", "Mahavira added the 5th vow 'Brahmacharya' (Celibacy) to Parshvanatha's existing four vows (Satya, Ahimsa, Asteya, Aparigraha).", "The Triratna (Three Jewels) of Jainism are Right Faith (Samyak Darshana), Right Knowledge (Samyak Jnana), and Right Conduct (Samyak Charitra).", "The 1st Jain Council occurred at Pataliputra under Sthulabhadra during Chandragupta Maurya's reign, splitting Jainism into Shvetambara and Digambara.", "The 2nd Jain Council took place at Vallabhi (Gujarat) under Devardhi Kshemashramana, where Jain Agamas were codified.", "The Ajivika sect, founded by Makkhali Gosala, was based on the doctrine of absolute fatalism (Niyativada)."]}