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SSC CGLकंप्यूटर (Computer)

इंटरनेट, नेटवर्क और साइबर सुरक्षा

Internet, Networks, and Security

📖 किताब की तरह पढ़ें📝 इस परीक्षा का मॉक टेस्ट

SSC CGL Tier-2 में कंप्यूटर सेक्शन से लगभग 3-4 प्रश्न इसी अध्याय से पूछे जाते हैं। यह एक अत्यधिक स्कोरिंग विषय है क्योंकि इसके प्रश्न सीधे तकनीकी शब्दावली और उनके कार्यों पर आधारित होते हैं।

नेटवर्क के प्रकार (LAN/MAN/WAN) और टोपोलॉजी

नेटवर्क कंप्यूटरों और अन्य उपकरणों का एक समूह है जो आपस में डेटा और संसाधन साझा करने के लिए जुड़े होते हैं। भौगोलिक क्षेत्र के आधार पर नेटवर्क को मुख्य रूप से PAN (व्यक्तिगत), LAN (स्थानीय क्षेत्र), MAN (महानगरीय क्षेत्र) और WAN (व्यापक क्षेत्र) में बांटा जाता है। टोपोलॉजी (Topology) का अर्थ है नेटवर्क में उपकरणों (Nodes) का भौतिक या तार्किक लेआउट। प्रमुख टोपोलॉजी बस (Bus), स्टार (Star), रिंग (Ring), मेश (Mesh) और ट्री (Tree) हैं। एसएससी परीक्षाओं में नेटवर्क कवरेज सीमा, टोपोलॉजी की विशेषताओं और सेंट्रल डिवाइस से संबंधित प्रश्न पूछे जाते हैं।

सूत्र और उनके उदाहरण

📐 Mesh Topology में केबल/लिंक की संख्या = n(n - 1) / 2 — जब मेश टोपोलॉजी में 'n' कंप्यूटरों (Nodes) को एक-दूसरे से सीधे जोड़ने के लिए आवश्यक कुल समर्पित लिंक (Dedicated Links) की संख्या ज्ञात करनी हो।

कंप्यूटरों की संख्या (n) = 6

फॉर्मूला = n(n - 1) / 2

लिंक की संख्या = 6 × (6 - 1) / 2

= 6 × 5 / 2

= 30 / 2 = 15

नोड्स की संख्या (n) = 10

फॉर्मूला = n(n - 1) / 2

लिंक की संख्या = 10 × (10 - 1) / 2

= 10 × 9 / 2

= 90 / 2 = 45

परीक्षा में आने वाले प्रकार

हल किए हुए प्रश्न (हर प्रकार)

LAN (Local Area Network) सीमित भौगोलिक क्षेत्र जैसे घर या कार्यालय में कार्य करता है।

इसकी सीमा आमतौर पर 1 किमी के भीतर होती है।

PAN केवल व्यक्ति के निजी उपकरणों (जैसे ब्लूटूथ) के लिए होता है।

MAN शहर भर में और WAN पूरे देश/विश्व में फैला होता है।

इंटरनेट दुनिया भर के कंप्यूटरों का एक विशाल नेटवर्क है।

यह विशाल भौगोलिक दूरी (पूरे विश्व) को कवर करता है।

भौगोलिक सीमा न होने के कारण यह WAN के अंतर्गत आता है।

बस टोपोलॉजी (Bus Topology) में एक मुख्य बस केबल होती है।

सभी नोड्स सीधे इस बैकबोन केबल से जुड़े होते हैं।

केबल के दोनों सिरों पर टर्मिनेटर (Terminators) लगे होते हैं।

रिंग टोपोलॉजी में सभी उपकरण एक गोलाकार लूप बनाते हैं।

डेटा केवल एक ही दिशा में प्रवाहित होता है।

डेटा टकराव से बचने के लिए 'टोकन' (Token) का प्रयोग किया जाता है।

स्टार टोपोलॉजी में सभी नोड्स केंद्रीय उपकरण से जुड़े होते हैं।

यदि कोई व्यक्तिगत कंप्यूटर खराब होता है, तो बाकी नेटवर्क चलता रहता है।

लेकिन केंद्रीय हब/स्विच के विफल होने पर पूरा नेटवर्क ठप हो जाता है।

नोड्स की संख्या (n) = 8

मेश टोपोलॉजी लिंक सूत्र = n(n - 1) / 2

कुल लिंक = 8 × (8 - 1) / 2

= 8 × 7 / 2 = 28

ट्री टोपोलॉजी (Tree Topology) स्टार और बस टोपोलॉजी का मिश्रण है।

इसमें स्टार टोपोलॉजी के हब को बस केबल द्वारा जोड़ा जाता है।

यह एक पेड़ की शाखाओं की तरह पदानुक्रमित संरचना बनाती है।

परीक्षा में कैसे आता है

एसएससी CGL, CHSL, MTS और रेलवे परीक्षाओं में नेटवर्क के प्रकार (LAN/WAN की फुल फॉर्म तथा सीमा) और टोपोलॉजी की विशेषताओं (बैकबोन केबल, सेंट्रल हब, मेश केबल सूत्र) पर आधारित 1-2 प्रश्न कंप्यूटर सेक्शन में निश्चित रूप से आते हैं।

आम गलतियाँ

💡 याद रखें: केंद्रीय हब = स्टार टोपोलॉजी, बैकबोन केबल = बस टोपोलॉजी, उच्चतम सुरक्षा/रिडंडेंसी = मेश टोपोलॉजी। CGL में मेश लिंक का फॉर्मूला n(n-1)/2 अक्सर पूछा जाता है। पदक्रम (Hierarchy) = ट्री टोपोलॉजी। होतात।

नेटवर्किंग डिवाइस

नेटवर्किंग डिवाइस वे हार्डवेयर उपकरण हैं जो कंप्यूटर और अन्य उपकरणों को एक नेटवर्क से जोड़ते हैं। हब (Hub) एक बुनियादी डिवाइस है जो डेटा को सभी पोर्ट पर ब्रॉडकास्ट करता है, जबकि स्विच (Switch) केवल लक्षित डिवाइस (MAC एड्रेस के आधार पर) को डेटा भेजता है। राउटर (Router) अलग-अलग नेटवर्क को जोड़ता है और डेटा के लिए सबसे अच्छा रास्ता (Path) चुनता है। मॉडेम (Modem) डिजिटल सिग्नल को एनालॉग में और इसके विपरीत बदलकर इंटरनेट कनेक्शन सक्षम बनाता है।

सूत्र और उनके उदाहरण

📐 Modem = Modulator + Demodulator — जब डिजिटल सिग्नल को एनालॉग (Modulation) या एनालॉग को डिजिटल (Demodulation) में बदलना हो।

कंप्यूटर डिजिटल सिग्नल उत्पन्न करता है; टेलीफोन लाइन एनालॉग सिग्नल ले जाती है; मॉडेम का मॉड्यूलेटर डिजिटल को एनालॉग में बदलता है।

एनालॉग सिग्नल प्राप्त होता है; डीमॉड्यूलेटर इसे कंप्यूटर के लिए डिजिटल में बदलता है; यह प्रक्रिया डीमॉड्यूलेशन कहलाती है।

📐 Router = Layer 3 (Network Layer) Device — जब दो अलग-अलग नेटवर्क को जोड़ना हो और IP एड्रेस का उपयोग करना हो।

राउटर राउटिंग टेबल का उपयोग करता है; यह नेटवर्क लेयर पर काम करता है; यह सबसे कुशल पथ (Path) निर्धारित करता है।

राउटर स्थानीय नेटवर्क को इंटरनेट (WAN) से जोड़ता है; यह IP एड्रेस के आधार पर डेटा निर्देशित करता है।

📐 Switch = Layer 2 (Data Link Layer) Device — जब एक ही नेटवर्क (LAN) के भीतर MAC एड्रेस के आधार पर डेटा भेजना हो।

स्विच एक इंटेलिजेंट डिवाइस है; यह प्रत्येक पोर्ट से जुड़े डिवाइस का MAC एड्रेस स्टोर करता है; डेटा केवल सही पोर्ट पर भेजा जाता है।

हब डेटा ब्रॉडकास्ट करता है जिससे ट्रैफिक बढ़ता है; स्विच केवल लक्षित डिवाइस को डेटा भेजता है; इससे नेटवर्क की दक्षता बढ़ती है।

परीक्षा में आने वाले प्रकार

हल किए हुए प्रश्न (हर प्रकार)

स्विच डेटा लिंक लेयर पर कार्य करता है; यह लेयर 2 डिवाइस है; यह फ्रेम (Frames) के साथ काम करता है।

गेटवे (Gateway) एक प्रोटोकॉल कनवर्टर के रूप में कार्य करता है; यह पूरी तरह से अलग नेटवर्क आर्किटेक्चर को जोड़ सकता है।

MO का अर्थ है Modulator; DEM का अर्थ है Demodulator; यह सिग्नल रूपांतरण का कार्य करता है।

रिपीटर (Repeater) सिग्नल की शक्ति बढ़ाता है; यह लंबी दूरी के संचार में सिग्नल को खराब होने से बचाता है; यह फिजिकल लेयर पर काम करता है।

राउटर नेटवर्क लेयर पर काम करता है; यह लेयर 3 डिवाइस है; यह डेटा पैकेट (Packets) को रूट करता है।

ब्रिज (Bridge) दो समान नेटवर्क सेगमेंट को जोड़ता है; यह डेटा लिंक लेयर पर काम करता है; यह नेटवर्क को विभाजित कर ट्रैफिक कम करता है।

परीक्षा में कैसे आता है

SSC CGL और CHSL में नेटवर्किंग डिवाइस से 1-2 प्रश्न अक्सर पूछे जाते हैं। सबसे ज्यादा प्रश्न 'Hub vs Switch' और 'Router की OSI लेयर' पर आधारित होते हैं।

आम गलतियाँ

💡 याद रखें: राउटर = रूट (रास्ता) = नेटवर्क लेयर; स्विच = MAC एड्रेस = डेटा लिंक लेयर।

इंटरनेट की प्रमुख शब्दावलियाँ (URL, HTTP/HTTPS, DNS, IP, Email)

इंटरनेट पर वेब पेज खोजने, डेटा भेजने और संचार करने के लिए विशेष तकनीकों और नियमों का उपयोग किया जाता है। URL वेब पर किसी संसाधन का अनोखा पता होता है, और HTTP/HTTPS डेटा ट्रांसफर के प्रोटोकॉल हैं जहाँ HTTPS एन्क्रिप्शन के कारण सुरक्षित होता है। DNS (Domain Name System) इंसानों के पढ़ने योग्य डोमेन नाम (जैसे google.com) को कंप्यूटर के IP एड्रेस में बदलता है। IP एड्रेस नेटवर्क से जुड़ी हर डिवाइस की विशिष्ट पहचान संख्या है (IPv4 = 32 बिट, IPv6 = 128 बिट)। ई-मेल में CC (Carbon Copy) सभी प्राप्तकर्ताओं को दिखती है, जबकि BCC (Blind Carbon Copy) का पता अन्य प्राप्तकर्ताओं से गुप्त रखा जाता है।

सूत्र और उनके उदाहरण

📐 IPv4 Size = 32 Bits (4 Bytes) | IPv6 Size = 128 Bits (16 Bytes) — IP एड्रेस के प्रकार और उनकी बिट लंबाई से संबंधित प्रश्नों को हल करने के लिए।

IPv4 एड्रेस 4 ऑक्टेट्स (बािइट्स) से मिलकर बनता है।

प्रत्येक ऑक्टेट 8 बिट्स का होता है।

कुल बिट्स = 4 × 8 = 32 बिट्स।

IPv6 एड्रेस 128-बिट का होता है।

इसे 16-बिट के 8 हेक्साडेसिमल ब्लॉक में लिखा जाता है।

कुल आकार = 128 बिट्स (16 बाइट्स)।

📐 Email Recipients: To (Main) | CC (Visible Copy) | BCC (Hidden Copy) — ईमेल प्राप्तकर्ताओं की गोपनीयता और दृश्यता से संबंधित प्रश्नों को हल करने के लिए।

CC में सभी प्राप्तकर्ता एक-दूसरे की ईमेल आईडी देख सकते हैं।

BCC (Blind Carbon Copy) में जोड़े गए ईमेल पते किसी भी अन्य प्राप्तकर्ता को नहीं दिखते।

CC का पूर्ण रूप Carbon Copy होता है।

यह मूल संदेश की एक प्रति अन्य व्यक्तियों को सूचित करने हेतु भेजने के लिए प्रयोग होता है।

परीक्षा में आने वाले प्रकार

हल किए हुए प्रश्न (हर प्रकार)

मनुष्य IP पते (जैसे 142.250.190.46) याद नहीं रख सकते, इसलिए वे डोमेन नाम (जैसे google.com) का प्रयोग करते हैं।

DNS सर्वर डोमेन नाम (Domain Name) को कंप्यूटर के समझने योग्य IP एड्रेस में परिवर्तित (Translate) करता है।

'To' और 'CC' वाले प्राप्तकर्ता एक-दूसरे को देख सकते हैं।

'BCC' में मौजूद प्राप्तकर्ता (C) 'To' और 'CC' दोनों के ईमेल पते देख सकता है।

लेकिन 'To' और 'CC' वाले व्यक्ति BCC (C) का ईमेल पता नहीं देख सकते।

HTTP एक असुरक्षित प्रोटोकॉल है जिसमें डेटा प्लेन टेक्स्ट में जाता है।

HTTPS डेटा को सुरक्षित और एन्क्रिप्ट करने के लिए SSL (Secure Sockets Layer) या TLS (Transport Layer Security) का उपयोग करता है।

IPv4 एड्रेस में 4 ऑक्टेट (बाइट) होते हैं, जिन्हें डॉट (.) से अलग किया जाता है।

प्रत्येक 8-बिट ऑक्टेट का मान 0 से 255 तक हो सकता है (जैसे 192.168.1.255)।

'Subject' फ़ील्ड ई-मेल का एक संक्षिप्त शीर्षक या सारांश प्रस्तुत करता है।

यह प्राप्तकर्ता को संदेश सामग्री खोले बिना उसका मुख्य विषय समझने में मदद करता है।

परीक्षा में कैसे आता है

SSC CGL, CHSL, MTS और Railway NTPC परीक्षाओं में इंटरनेट शब्दावलियों से 1-2 प्रश्न सीधे पूछे जाते हैं। विशेष रूप से IPv4/IPv6 बिट साइज, HTTPS में 'S' का अर्थ, DNS की भूमिका और BCC के उपयोग पर बार-बार प्रश्न बनते हैं।

आम गलतियाँ

💡 याद रखें: IPv4 = 32 बिट, IPv6 = 128 बिट। ईमेल में BCC = Blind (गुप्त), CC = Carbon Copy (दृश्यमान)। DNS = नाम को IP में बदलना। नेटवर्क में इनसे सीधा प्रश्न आता है।連結 [ quick start ] ️ [ basic docs ] 📝 [ standard parameters ] 🛠️ [ community plugins ] 🧩 [ advanced setup ] ⚙️ [ troubleshooting ] 🛠️ [ FAQ ] ❓ [ full changelog ] 📜 [ test page ] 🧪 🔥 simple-keyboard SVG Keyboard Layout Designer Standard keyboard layouts designed for vector SVG files with simple-keyboard compatibility. demo ✨ Live Demo

नेटवर्क प्रोटोकॉल और महत्वपूर्ण पूर्ण रूप

नेटवर्क प्रोटोकॉल (Network Protocol) डिजिटल संचार के लिए नियमों और मानकों का एक सेट है, जो यह तय करता है कि दो या दो से अधिक कंप्यूटर आपस में डेटा का आदान-प्रदान कैसे करेंगे। इंटरनेट पर डेटा भेजने, प्राप्त करने, वेब पेज लोड करने या ईमेल भेजने के लिए विशिष्ट प्रोटोकॉल काम करते हैं। एसएससी परीक्षा में मुख्य रूप से प्रोटोकॉल के पूर्ण रूप (Full Forms), उनके मुख्य कार्य (Functions) और उनके डिफॉल्ट पोर्ट नंबर (Port Numbers) से सीधे प्रश्न पूछे जाते हैं।

सूत्र और उनके उदाहरण

📐 प्रोटोकॉल = कार्य (Function) + डिफ़ॉल्ट पोर्ट नंबर (Port Number) — जब किसी प्रोटोकॉल के कार्य या उसके मानक पोर्ट नंबर से संबंधित प्रश्न हल करना हो।

HTTP का पूर्ण रूप Hypertext Transfer Protocol है।

यह वेब ब्राउज़र और वेब सर्वर के बीच डेटा ट्रांसफर करने का मूल प्रोटोकॉल है।

यह सामान्यतः पोर्ट नंबर 80 (Port 80) का उपयोग करता है।

HTTPS का पूर्ण रूप Hypertext Transfer Protocol Secure है।

यह डेटा को एन्क्रिप्ट (SSL/TLS) करके सुरक्षित रूप से भेजता है।

इसका मानक डिफ़ॉल्ट पोर्ट नंबर 443 होता है।

परीक्षा में आने वाले प्रकार

हल किए हुए प्रश्न (हर प्रकार)

TCP का अर्थ Transmission Control Protocol होता है, जो डेटा पैकेट को सही क्रम में पहुंचाता है।

IP का अर्थ Internet Protocol होता है, जो पैकेट्स को तार्किक पता (Logical Address) प्रदान करता है।

दोनों मिलकर इंटरनेट पर संचार की रीढ़ की हड्डी (Backbone) बनाते हैं।

ईमेल भेजने के लिए SMTP (Simple Mail Transfer Protocol) का उपयोग किया जाता है।

यह क्लाइंट से सर्वर या सर्वर से सर्वर तक ईमेल भेजता है।

यह मानक रूप से पोर्ट 25 पर कार्य करता है।

ईमेल प्राप्त करने के लिए POP3 (Post Office Protocol version 3) का उपयोग किया जाता है।

POP3 ईमेल को मेल सर्वर से डाउनलोड करके स्थानीय कंप्यूटर पर स्टोर करता है और सर्वर से हटा सकता है।

यह पोर्ट 110 पर संचालित होता है।

फाइल ट्रांसफर के लिए FTP (File Transfer Protocol) का उपयोग किया जाता है।

यह क्लाइंट-सर्वर मॉडल पर काम करता है।

यह दो कनेक्शन बनाता है: पोर्ट 21 पर कंट्रोल और पोर्ट 20 पर डेटा ट्रांसफर।

Telnet डेटा और पासवर्ड को प्लेन टेक्स्ट में भेजता है, जिससे यह असुरक्षित होता है।

इसका सुरक्षित और एन्क्रिप्टेड विकल्प SSH (Secure Shell) है।

SSH डिफ़ॉल्ट रूप से पोर्ट 22 का उपयोग करता है।

नेटवर्क में ऑटोमैटिक IP असाइन करने का कार्य DHCP करता है।

DHCP का पूर्ण रूप Dynamic Host Configuration Protocol है।

यह नेटवर्क एडमिनिस्ट्रेटर को मैन्युअल IP सेट करने की आवश्यकता से मुक्त करता है।

लॉजिकल IP एड्रेस को फिजिकल MAC एड्रेस में मैप करने का कार्य ARP द्वारा किया जाता है।

ARP का पूर्ण रूप Address Resolution Protocol है।

इसके विपरीत MAC को IP में बदलने का कार्य RARP (Reverse ARP) करता है।

परीक्षा में कैसे आता है

एसएससी (CGL, CHSL, MTS) और रेलवे परीक्षाओं में प्रोटोकॉल से संबंधित 1-2 प्रश्न लगभग हर शिफ्ट में पूछे जाते हैं। प्रश्न मुख्य रूप से प्रोटोकॉल के पूर्ण रूप, ईमेल प्रोटोकॉल के कार्यों (भेजने बनाम प्राप्त करने), और मानक पोर्ट नंबरों पर आधारित होते हैं।

आम गलतियाँ

💡 ईमेल प्रोटोकॉल को आसानी से याद रखें: SMTP = 'Send Mail' (ईमेल भेजने के लिए), जबकि POP3 और IMAP = सर्वर से ईमेल प्राप्त (Receive) करने के लिए।

मालवेयर, फ़िशिंग, फ़ायरवॉल और सुरक्षा

साइबर सुरक्षा (Cyber Security) का अर्थ है कंप्यूटर सिस्टम और डेटा को अनधिकृत पहुंच या हमलों से बचाना। मालवेयर (Malware) हानिकारक सॉफ्टवेयर होते हैं जैसे वायरस, वॉर्म और ट्रोजन जो सिस्टम को नुकसान पहुँचाते हैं। फ़िशिंग (Phishing) के जरिए यूज़र को नकली ईमेल या वेबसाइट भेजकर उनकी निजी जानकारी (जैसे पासवर्ड) चुराई जाती है। फ़ायरवॉल (Firewall) एक सुरक्षा कवच है जो आने-जाने वाले नेटवर्क ट्रैफिक की निगरानी करता है। एन्क्रिप्शन (Encryption) डेटा को एक गुप्त कोड में बदल देता है ताकि केवल अधिकृत व्यक्ति ही उसे पढ़ सके।

सूत्र और उनके उदाहरण

📐 Encryption = Plaintext + Key -> Ciphertext — जब डेटा को सुरक्षित रूप से भेजने के लिए उसे कोड में बदलना हो।

मूल शब्द (Plaintext) = HELLO

की (Key) = +1 (प्रत्येक अक्षर को एक स्थान आगे बढ़ाएं)

H + 1 = I

E + 1 = F

L + 1 = M

L + 1 = M

O + 1 = P

एन्क्रिप्शन के बाद प्राप्त अपठनीय डेटा को सिफरटेक्स्ट कहते हैं।

यह प्लेनटेक्स्ट और की (Key) का मिश्रण होता है।

इसका उद्देश्य डेटा गोपनीयता बनाए रखना है।

📐 Malware Identification Rule: Self-Replication = Worm — जब यह पहचानना हो कि कौन सा मालवेयर बिना मानवीय हस्तक्षेप के फैलता है।

मालवेयर का प्रकार जो खुद की नकल करता है = वॉर्म (Worm)

इसे फैलने के लिए किसी फाइल से जुड़ने की जरूरत नहीं होती।

यह नेटवर्क बैंडविड्थ को खत्म कर देता है।

वायरस को फैलने के लिए मानव क्रिया (जैसे फाइल खोलना) चाहिए।

वॉर्म नेटवर्क का उपयोग कर खुद को स्वचालित रूप से फैलाता है।

परीक्षा में आने वाले प्रकार

हल किए हुए प्रश्न (हर प्रकार)

यह सॉफ्टवेयर खुद को सुरक्षित दिखाता है।

उपयोगकर्ता इसे धोखे से इंस्टॉल कर लेता है।

इसे 'ट्रोजन हॉर्स' (Trojan Horse) कहा जाता है।

की-लॉगर कीबोर्ड पर टाइप किए गए बटनों को रिकॉर्ड करता है।

यह उपयोगकर्ता की जासूसी करता है।

जासूसी करने वाले सॉफ्टवेयर को 'स्पाइवेयर' (Spyware) कहते हैं।

यह एक सोशल इंजीनियरिंग हमला है।

इसमें यूज़र को धोखा देकर जानकारी ली जाती है।

इस प्रक्रिया को 'फ़िशिंग' (Phishing) कहा जाता है।

यह हार्डवेयर या सॉफ्टवेयर दोनों हो सकता है।

यह डेटा पैकेट को फ़िल्टर करता है।

इसे 'फ़ायरवॉल' (Firewall) कहते हैं।

एन्क्रिप्शन का उल्टा डिक्रिप्शन होता है।

इसके लिए एक विशेष 'की' (Key) की आवश्यकता होती है।

OTP = One Time Password

यह केवल एक बार उपयोग के लिए वैध होता है।

यह टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (2FA) का हिस्सा है।

यह फाइलों को एन्क्रिप्ट कर देता है।

हमलावर फिरौती (Ransom) की मांग करता है।

इसे 'रैंसमवेयर' (Ransomware) कहा जाता है।

परीक्षा में कैसे आता है

SSC CGL और CHSL में इस विषय से अक्सर मालवेयर के प्रकार (विशेषकर Trojan और Worm) और सुरक्षा प्रोटोकॉल (Firewall) पर प्रश्न पूछे जाते हैं। फुल फॉर्म (जैसे OTP, HTTPS) भी महत्वपूर्ण हैं।

आम गलतियाँ

💡 कीवर्ड्स पर ध्यान दें: 'Self-replicating' का मतलब Worm है, 'Disguised' (छद्म रूप) का मतलब Trojan है, और 'Ransom' (फिरौती) का मतलब Ransomware है।

सारे सूत्र एक नज़र में (Revision)

अपने आप को जाँचिए — 10 प्रश्न

1. निम्नलिखित में से कौन सा नेटवर्क प्रकार आमतौर पर एक पूरे शहर या परिसर में फैला होता है?

  1. (क) LAN
  2. (ख) PAN
  3. (ग) MAN
  4. (घ) WAN
उत्तर देखें

उत्तर: (ग) MAN

MAN (Metropolitan Area Network) एक शहर के भीतर विभिन्न LAN को जोड़ने के लिए उपयोग किया जाता है।

2. ईमेल भेजते समय, 'BCC' विकल्प का मुख्य उद्देश्य क्या है?

  1. (क) ईमेल की एक प्रति मुख्य प्राप्तकर्ता को भेजना
  2. (ख) प्राप्तकर्ता की पहचान अन्य प्राप्तकर्ताओं से छिपाना
  3. (ग) ईमेल को स्पैम के रूप में चिह्नित करना
  4. (घ) ईमेल को एन्क्रिप्ट करना
उत्तर देखें

उत्तर: (ख) प्राप्तकर्ता की पहचान अन्य प्राप्तकर्ताओं से छिपाना

BCC (Blind Carbon Copy) का उपयोग तब किया जाता है जब आप नहीं चाहते कि अन्य प्राप्तकर्ताओं को पता चले कि ईमेल और किसे भेजा गया है।

3. कंप्यूटर को टेलीफोन लाइनों के माध्यम से इंटरनेट से जोड़ने के लिए किस उपकरण का उपयोग किया जाता है?

  1. (क) Switch
  2. (ख) Router
  3. (ग) Modem
  4. (घ) Hub
उत्तर देखें

उत्तर: (ग) Modem

Modem (Modulator-Demodulator) एनालॉग टेलीफोन सिग्नल को डिजिटल डेटा में बदलता है।

4. किस टोपोलॉजी में, यदि केंद्रीय हब विफल हो जाता है, तो पूरा नेटवर्क डाउन हो जाता है?

  1. (क) Bus Topology
  2. (ख) Ring Topology
  3. (ग) Star Topology
  4. (घ) Mesh Topology
उत्तर देखें

उत्तर: (ग) Star Topology

Star Topology में सभी नोड्स एक केंद्रीय हब से जुड़े होते हैं, इसलिए हब की विफलता पूरे नेटवर्क को प्रभावित करती है।

5. सुरक्षित ऑनलाइन लेनदेन के लिए उपयोग किए जाने वाले HTTPS प्रोटोकॉल में 'S' का क्या अर्थ है?

  1. (क) Simple
  2. (ख) System
  3. (ग) Secure
  4. (घ) Standard
उत्तर देखें

उत्तर: (ग) Secure

HTTPS का पूर्ण रूप Hypertext Transfer Protocol Secure है, जो डेटा एन्क्रिप्शन सुनिश्चित करता है।

6. एक प्रकार का मैलवेयर जो उपयोगकर्ता की फाइलों को लॉक कर देता है और उन्हें अनलॉक करने के लिए भुगतान की मांग करता है, क्या कहलाता है?

  1. (क) Spyware
  2. (ख) Ransomware
  3. (ग) Trojan Horse
  4. (घ) Worm
उत्तर देखें

उत्तर: (ख) Ransomware

Ransomware डेटा को एन्क्रिप्ट करता है और इसे डिक्रिप्ट करने के लिए फिरौती (Ransom) मांगता है।

7. IPv6 (इंटरनेट प्रोटोकॉल संस्करण 6) एड्रेस का आकार क्या है?

  1. (क) 32 bits
  2. (ख) 64 bits
  3. (ग) 128 bits
  4. (घ) 256 bits
उत्तर देखें

उत्तर: (ग) 128 bits

IPv4 32-बिट का होता है, जबकि आधुनिक IPv6 128-बिट एड्रेस का उपयोग करता है।

8. OSI मॉडल की किस परत (Layer) पर 'राउटर' कार्य करता है?

  1. (क) Physical Layer
  2. (ख) Data Link Layer
  3. (ग) Network Layer
  4. (घ) Transport Layer
उत्तर देखें

उत्तर: (ग) Network Layer

राउटर 'Network Layer' (Layer 3) पर कार्य करते हैं क्योंकि वे IP एड्रेस के आधार पर डेटा पैकेट रूट करते हैं।

9. निम्नलिखित में से कौन सा कथन 'Worm' और 'Virus' के बीच मुख्य अंतर को सही ढंग से बताता है?

  1. (क) वायरस को फैलने के लिए मानव क्रिया की आवश्यकता होती है, जबकि वर्म स्वयं को दोहराता है।
  2. (ख) वर्म को फैलने के लिए मानव क्रिया की आवश्यकता होती है, जबकि वायरस स्वयं को दोहराता है।
  3. (ग) वायरस केवल हार्डवेयर को नुकसान पहुंचाता है।
  4. (घ) वर्म केवल ईमेल के माध्यम से फैलता है।
उत्तर देखें

उत्तर: (क) वायरस को फैलने के लिए मानव क्रिया की आवश्यकता होती है, जबकि वर्म स्वयं को दोहराता है।

वायरस को एक होस्ट फ़ाइल और मानव हस्तक्षेप (जैसे फ़ाइल खोलना) की आवश्यकता होती है, जबकि वर्म नेटवर्क पर स्वतंत्र रूप से फैल सकते हैं।

10. एक फ़ायरवॉल (Firewall) का प्राथमिक कार्य क्या है?

  1. (क) कंप्यूटर की प्रोसेसिंग गति बढ़ाना
  2. (ख) नेटवर्क ट्रैफ़िक की निगरानी और फ़िल्टर करना
  3. (ग) हटाए गए डेटा को पुनर्प्राप्त करना
  4. (घ) वेबसाइटों की लोडिंग गति बढ़ाना
उत्तर देखें

उत्तर: (ख) नेटवर्क ट्रैफ़िक की निगरानी और फ़िल्टर करना

फ़ायरवॉल सुरक्षा नियमों के आधार पर आने वाले और जाने वाले नेटवर्क ट्रैफ़िक को नियंत्रित करके अनधिकृत पहुंच को रोकता है।

English version — Internet, Networks, and Security

In SSC CGL Tier-2, approximately 3-4 questions are asked from this chapter in the computer section. It is a highly scoring topic as questions are directly based on technical terminology and their functions.

Network Types (LAN/MAN/WAN) and Topologies

A network is a collection of computers and devices connected together to share data and resources. Based on geographical coverage, networks are categorized into PAN, LAN, MAN, and WAN. Topology refers to the physical or logical arrangement of nodes in a network. Major topologies include Bus, Star, Ring, Mesh, and Tree. SSC exams frequently ask questions regarding network coverage range, central devices, and characteristics of various topologies.

Formulas with examples

📐 Mesh Topology में केबल/लिंक की संख्या = n(n - 1) / 2 — Used to calculate the total number of physical links required to connect 'n' nodes in a fully connected Mesh topology.

कंप्यूटरों की संख्या (n) = 6

फॉर्मूला = n(n - 1) / 2

लिंक की संख्या = 6 × (6 - 1) / 2

= 6 × 5 / 2

= 30 / 2 = 15

नोड्स की संख्या (n) = 10

फॉर्मूला = n(n - 1) / 2

लिंक की संख्या = 10 × (10 - 1) / 2

= 10 × 9 / 2

= 90 / 2 = 45

Question types asked

Solved questions (every type)

LAN (Local Area Network) सीमित भौगोलिक क्षेत्र जैसे घर या कार्यालय में कार्य करता है।

इसकी सीमा आमतौर पर 1 किमी के भीतर होती है।

PAN केवल व्यक्ति के निजी उपकरणों (जैसे ब्लूटूथ) के लिए होता है।

MAN शहर भर में और WAN पूरे देश/विश्व में फैला होता है।

इंटरनेट दुनिया भर के कंप्यूटरों का एक विशाल नेटवर्क है।

यह विशाल भौगोलिक दूरी (पूरे विश्व) को कवर करता है।

भौगोलिक सीमा न होने के कारण यह WAN के अंतर्गत आता है।

बस टोपोलॉजी (Bus Topology) में एक मुख्य बस केबल होती है।

सभी नोड्स सीधे इस बैकबोन केबल से जुड़े होते हैं।

केबल के दोनों सिरों पर टर्मिनेटर (Terminators) लगे होते हैं।

रिंग टोपोलॉजी में सभी उपकरण एक गोलाकार लूप बनाते हैं।

डेटा केवल एक ही दिशा में प्रवाहित होता है।

डेटा टकराव से बचने के लिए 'टोकन' (Token) का प्रयोग किया जाता है।

स्टार टोपोलॉजी में सभी नोड्स केंद्रीय उपकरण से जुड़े होते हैं।

यदि कोई व्यक्तिगत कंप्यूटर खराब होता है, तो बाकी नेटवर्क चलता रहता है।

लेकिन केंद्रीय हब/स्विच के विफल होने पर पूरा नेटवर्क ठप हो जाता है।

नोड्स की संख्या (n) = 8

मेश टोपोलॉजी लिंक सूत्र = n(n - 1) / 2

कुल लिंक = 8 × (8 - 1) / 2

= 8 × 7 / 2 = 28

ट्री टोपोलॉजी (Tree Topology) स्टार और बस टोपोलॉजी का मिश्रण है।

इसमें स्टार टोपोलॉजी के हब को बस केबल द्वारा जोड़ा जाता है।

यह एक पेड़ की शाखाओं की तरह पदानुक्रमित संरचना बनाती है।

How it is asked

In SSC CGL, CHSL, MTS, and Railway exams, 1-2 questions are regularly asked in the Computer section based on network types (LAN/WAN full forms and range) and topology features (Backbone cable, Central Hub, Mesh cable formula).

Common mistakes

💡 याद रखें: केंद्रीय हब = स्टार टोपोलॉजी, बैकबोन केबल = बस टोपोलॉजी, उच्चतम सुरक्षा/रिडंडेंसी = मेश टोपोलॉजी। CGL में मेश लिंक का फॉर्मूला n(n-1)/2 अक्सर पूछा जाता है। पदक्रम (Hierarchy) = ट्री टोपोलॉजी। होतात।

Networking Devices

Networking devices are hardware components used to connect computers and other devices on a network. A Hub is a basic device that broadcasts data to all ports, whereas a Switch is smarter and sends data only to the intended recipient using MAC addresses. A Router connects different networks (like LAN and WAN) and finds the best path for data packets. A Modem (Modulator-Demodulator) converts digital signals to analog and vice versa to enable internet transmission over telephone or cable lines.

Formulas with examples

📐 Modem = Modulator + Demodulator — When converting digital signals to analog (Modulation) or analog to digital (Demodulation).

कंप्यूटर डिजिटल सिग्नल उत्पन्न करता है; टेलीफोन लाइन एनालॉग सिग्नल ले जाती है; मॉडेम का मॉड्यूलेटर डिजिटल को एनालॉग में बदलता है।

एनालॉग सिग्नल प्राप्त होता है; डीमॉड्यूलेटर इसे कंप्यूटर के लिए डिजिटल में बदलता है; यह प्रक्रिया डीमॉड्यूलेशन कहलाती है।

📐 Router = Layer 3 (Network Layer) Device — When connecting two different networks and using IP addresses for routing.

राउटर राउटिंग टेबल का उपयोग करता है; यह नेटवर्क लेयर पर काम करता है; यह सबसे कुशल पथ (Path) निर्धारित करता है।

राउटर स्थानीय नेटवर्क को इंटरनेट (WAN) से जोड़ता है; यह IP एड्रेस के आधार पर डेटा निर्देशित करता है।

📐 Switch = Layer 2 (Data Link Layer) Device — When sending data within the same network (LAN) based on MAC addresses.

स्विच एक इंटेलिजेंट डिवाइस है; यह प्रत्येक पोर्ट से जुड़े डिवाइस का MAC एड्रेस स्टोर करता है; डेटा केवल सही पोर्ट पर भेजा जाता है।

हब डेटा ब्रॉडकास्ट करता है जिससे ट्रैफिक बढ़ता है; स्विच केवल लक्षित डिवाइस को डेटा भेजता है; इससे नेटवर्क की दक्षता बढ़ती है।

Question types asked

Solved questions (every type)

स्विच डेटा लिंक लेयर पर कार्य करता है; यह लेयर 2 डिवाइस है; यह फ्रेम (Frames) के साथ काम करता है।

गेटवे (Gateway) एक प्रोटोकॉल कनवर्टर के रूप में कार्य करता है; यह पूरी तरह से अलग नेटवर्क आर्किटेक्चर को जोड़ सकता है।

MO का अर्थ है Modulator; DEM का अर्थ है Demodulator; यह सिग्नल रूपांतरण का कार्य करता है।

रिपीटर (Repeater) सिग्नल की शक्ति बढ़ाता है; यह लंबी दूरी के संचार में सिग्नल को खराब होने से बचाता है; यह फिजिकल लेयर पर काम करता है।

राउटर नेटवर्क लेयर पर काम करता है; यह लेयर 3 डिवाइस है; यह डेटा पैकेट (Packets) को रूट करता है।

ब्रिज (Bridge) दो समान नेटवर्क सेगमेंट को जोड़ता है; यह डेटा लिंक लेयर पर काम करता है; यह नेटवर्क को विभाजित कर ट्रैफिक कम करता है।

How it is asked

1-2 questions on networking devices are frequently asked in SSC CGL and CHSL. Most questions focus on 'Hub vs Switch' differences and the 'OSI layer of a Router'.

Common mistakes

💡 Remember: Router = Route (Path) = Network Layer; Switch = MAC Address = Data Link Layer.

Internet Terms (URL, HTTP/HTTPS, DNS, IP Address, Email CC/BCC)

Various standard technologies and protocols enable communication and web navigation on the Internet. A URL is the unique address of a web resource, while HTTP and HTTPS are data transfer protocols (HTTPS is encrypted and secure via SSL/TLS). DNS (Domain Name System) translates human-friendly domain names (like google.com) into numerical IP addresses. An IP address uniquely identifies each device on a network (IPv4 uses 32 bits, IPv6 uses 128 bits). In emails, CC (Carbon Copy) makes recipient email addresses visible to everyone, whereas BCC (Blind Carbon Copy) keeps recipient addresses hidden from all others.

Formulas with examples

📐 IPv4 Size = 32 Bits (4 Bytes) | IPv6 Size = 128 Bits (16 Bytes) — To determine the bit and byte length of IPv4 and IPv6 addresses.

IPv4 एड्रेस 4 ऑक्टेट्स (बािइट्स) से मिलकर बनता है।

प्रत्येक ऑक्टेट 8 बिट्स का होता है।

कुल बिट्स = 4 × 8 = 32 बिट्स।

IPv6 एड्रेस 128-बिट का होता है।

इसे 16-बिट के 8 हेक्साडेसिमल ब्लॉक में लिखा जाता है।

कुल आकार = 128 बिट्स (16 बाइट्स)।

📐 Email Recipients: To (Main) | CC (Visible Copy) | BCC (Hidden Copy) — To choose the correct field (CC or BCC) based on recipient email address visibility.

CC में सभी प्राप्तकर्ता एक-दूसरे की ईमेल आईडी देख सकते हैं।

BCC (Blind Carbon Copy) में जोड़े गए ईमेल पते किसी भी अन्य प्राप्तकर्ता को नहीं दिखते।

CC का पूर्ण रूप Carbon Copy होता है।

यह मूल संदेश की एक प्रति अन्य व्यक्तियों को सूचित करने हेतु भेजने के लिए प्रयोग होता है।

Question types asked

Solved questions (every type)

मनुष्य IP पते (जैसे 142.250.190.46) याद नहीं रख सकते, इसलिए वे डोमेन नाम (जैसे google.com) का प्रयोग करते हैं।

DNS सर्वर डोमेन नाम (Domain Name) को कंप्यूटर के समझने योग्य IP एड्रेस में परिवर्तित (Translate) करता है।

'To' और 'CC' वाले प्राप्तकर्ता एक-दूसरे को देख सकते हैं।

'BCC' में मौजूद प्राप्तकर्ता (C) 'To' और 'CC' दोनों के ईमेल पते देख सकता है।

लेकिन 'To' और 'CC' वाले व्यक्ति BCC (C) का ईमेल पता नहीं देख सकते।

HTTP एक असुरक्षित प्रोटोकॉल है जिसमें डेटा प्लेन टेक्स्ट में जाता है।

HTTPS डेटा को सुरक्षित और एन्क्रिप्ट करने के लिए SSL (Secure Sockets Layer) या TLS (Transport Layer Security) का उपयोग करता है।

IPv4 एड्रेस में 4 ऑक्टेट (बाइट) होते हैं, जिन्हें डॉट (.) से अलग किया जाता है।

प्रत्येक 8-बिट ऑक्टेट का मान 0 से 255 तक हो सकता है (जैसे 192.168.1.255)।

'Subject' फ़ील्ड ई-मेल का एक संक्षिप्त शीर्षक या सारांश प्रस्तुत करता है।

यह प्राप्तकर्ता को संदेश सामग्री खोले बिना उसका मुख्य विषय समझने में मदद करता है।

How it is asked

In SSC CGL, CHSL, MTS, and Railway exams, 1-2 factual questions are direct repeats from this sub-topic. Frequently asked concepts include IPv4/IPv6 bit length, the meaning of 'S' in HTTPS, DNS translation, and email BCC functionality.

Common mistakes

💡 याद रखें: IPv4 = 32 बिट, IPv6 = 128 बिट। ईमेल में BCC = Blind (गुप्त), CC = Carbon Copy (दृश्यमान)। DNS = नाम को IP में बदलना। नेटवर्क में इनसे सीधा प्रश्न आता है।連結 [ quick start ] ️ [ basic docs ] 📝 [ standard parameters ] 🛠️ [ community plugins ] 🧩 [ advanced setup ] ⚙️ [ troubleshooting ] 🛠️ [ FAQ ] ❓ [ full changelog ] 📜 [ test page ] 🧪 🔥 simple-keyboard SVG Keyboard Layout Designer Standard keyboard layouts designed for vector SVG files with simple-keyboard compatibility. demo ✨ Live Demo

Network Protocols and Common Full Forms

A network protocol is a standardized set of rules and conventions that determines how data is transmitted and received between devices over a network. Specific protocols govern distinct tasks such as web browsing, file transfers, and emailing. SSC exams frequently test the full forms of these protocols, their primary operational functions, and their standard default port numbers.

Formulas with examples

📐 प्रोटोकॉल = कार्य (Function) + डिफ़ॉल्ट पोर्ट नंबर (Port Number) — Used to recall functions and standard port numbers of fundamental networking protocols.

HTTP का पूर्ण रूप Hypertext Transfer Protocol है।

यह वेब ब्राउज़र और वेब सर्वर के बीच डेटा ट्रांसफर करने का मूल प्रोटोकॉल है।

यह सामान्यतः पोर्ट नंबर 80 (Port 80) का उपयोग करता है।

HTTPS का पूर्ण रूप Hypertext Transfer Protocol Secure है।

यह डेटा को एन्क्रिप्ट (SSL/TLS) करके सुरक्षित रूप से भेजता है।

इसका मानक डिफ़ॉल्ट पोर्ट नंबर 443 होता है।

Question types asked

Solved questions (every type)

TCP का अर्थ Transmission Control Protocol होता है, जो डेटा पैकेट को सही क्रम में पहुंचाता है।

IP का अर्थ Internet Protocol होता है, जो पैकेट्स को तार्किक पता (Logical Address) प्रदान करता है।

दोनों मिलकर इंटरनेट पर संचार की रीढ़ की हड्डी (Backbone) बनाते हैं।

ईमेल भेजने के लिए SMTP (Simple Mail Transfer Protocol) का उपयोग किया जाता है।

यह क्लाइंट से सर्वर या सर्वर से सर्वर तक ईमेल भेजता है।

यह मानक रूप से पोर्ट 25 पर कार्य करता है।

ईमेल प्राप्त करने के लिए POP3 (Post Office Protocol version 3) का उपयोग किया जाता है।

POP3 ईमेल को मेल सर्वर से डाउनलोड करके स्थानीय कंप्यूटर पर स्टोर करता है और सर्वर से हटा सकता है।

यह पोर्ट 110 पर संचालित होता है।

फाइल ट्रांसफर के लिए FTP (File Transfer Protocol) का उपयोग किया जाता है।

यह क्लाइंट-सर्वर मॉडल पर काम करता है।

यह दो कनेक्शन बनाता है: पोर्ट 21 पर कंट्रोल और पोर्ट 20 पर डेटा ट्रांसफर।

Telnet डेटा और पासवर्ड को प्लेन टेक्स्ट में भेजता है, जिससे यह असुरक्षित होता है।

इसका सुरक्षित और एन्क्रिप्टेड विकल्प SSH (Secure Shell) है।

SSH डिफ़ॉल्ट रूप से पोर्ट 22 का उपयोग करता है।

नेटवर्क में ऑटोमैटिक IP असाइन करने का कार्य DHCP करता है।

DHCP का पूर्ण रूप Dynamic Host Configuration Protocol है।

यह नेटवर्क एडमिनिस्ट्रेटर को मैन्युअल IP सेट करने की आवश्यकता से मुक्त करता है।

लॉजिकल IP एड्रेस को फिजिकल MAC एड्रेस में मैप करने का कार्य ARP द्वारा किया जाता है।

ARP का पूर्ण रूप Address Resolution Protocol है।

इसके विपरीत MAC को IP में बदलने का कार्य RARP (Reverse ARP) करता है।

How it is asked

In SSC (CGL, CHSL, MTS) and Railway exams, 1-2 questions are regularly asked from network protocols. Questions typically focus on protocol full forms, functions (such as sending vs. receiving emails), and standard default port numbers.

Common mistakes

💡 Remember email protocols with keywords: SMTP = 'Send Mail To Person' (Sending), POP3/IMAP = Receiving/Reading emails.

Malware, Phishing, Firewall, and Security

Cyber security involves protecting computer systems and data from unauthorized access or attacks. Malware refers to malicious software like viruses, worms, and Trojans designed to damage or gain unauthorized access. Phishing is a fraudulent attempt to obtain sensitive information by disguising as a trustworthy entity via emails or websites. A Firewall acts as a barrier that monitors and filters incoming and outgoing network traffic based on security rules. Encryption converts data into a secure code (ciphertext) to prevent unauthorized reading during transmission.

Formulas with examples

📐 Encryption = Plaintext + Key -> Ciphertext — When data needs to be converted into a code for secure transmission.

मूल शब्द (Plaintext) = HELLO

की (Key) = +1 (प्रत्येक अक्षर को एक स्थान आगे बढ़ाएं)

H + 1 = I

E + 1 = F

L + 1 = M

L + 1 = M

O + 1 = P

एन्क्रिप्शन के बाद प्राप्त अपठनीय डेटा को सिफरटेक्स्ट कहते हैं।

यह प्लेनटेक्स्ट और की (Key) का मिश्रण होता है।

इसका उद्देश्य डेटा गोपनीयता बनाए रखना है।

📐 Malware Identification Rule: Self-Replication = Worm — When identifying which malware spreads automatically without human intervention.

मालवेयर का प्रकार जो खुद की नकल करता है = वॉर्म (Worm)

इसे फैलने के लिए किसी फाइल से जुड़ने की जरूरत नहीं होती।

यह नेटवर्क बैंडविड्थ को खत्म कर देता है।

वायरस को फैलने के लिए मानव क्रिया (जैसे फाइल खोलना) चाहिए।

वॉर्म नेटवर्क का उपयोग कर खुद को स्वचालित रूप से फैलाता है।

Question types asked

Solved questions (every type)

यह सॉफ्टवेयर खुद को सुरक्षित दिखाता है।

उपयोगकर्ता इसे धोखे से इंस्टॉल कर लेता है।

इसे 'ट्रोजन हॉर्स' (Trojan Horse) कहा जाता है।

की-लॉगर कीबोर्ड पर टाइप किए गए बटनों को रिकॉर्ड करता है।

यह उपयोगकर्ता की जासूसी करता है।

जासूसी करने वाले सॉफ्टवेयर को 'स्पाइवेयर' (Spyware) कहते हैं।

यह एक सोशल इंजीनियरिंग हमला है।

इसमें यूज़र को धोखा देकर जानकारी ली जाती है।

इस प्रक्रिया को 'फ़िशिंग' (Phishing) कहा जाता है।

यह हार्डवेयर या सॉफ्टवेयर दोनों हो सकता है।

यह डेटा पैकेट को फ़िल्टर करता है।

इसे 'फ़ायरवॉल' (Firewall) कहते हैं।

एन्क्रिप्शन का उल्टा डिक्रिप्शन होता है।

इसके लिए एक विशेष 'की' (Key) की आवश्यकता होती है।

OTP = One Time Password

यह केवल एक बार उपयोग के लिए वैध होता है।

यह टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (2FA) का हिस्सा है।

यह फाइलों को एन्क्रिप्ट कर देता है।

हमलावर फिरौती (Ransom) की मांग करता है।

इसे 'रैंसमवेयर' (Ransomware) कहा जाता है।

How it is asked

In SSC CGL and CHSL, questions are frequently asked on types of malware (especially Trojan and Worm) and security protocols like Firewall. Full forms (like OTP, HTTPS) are also highly important.

Common mistakes

💡 Look for keywords: 'Self-replicating' means Worm, 'Disguised' means Trojan, and 'Ransom' means Ransomware.

All formulas at a glance

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