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BPSC CCEइतिहास और राष्ट्रीय आंदोलनबिहार की कला, संस्कृति, पर्व और मेले
Art, Culture, Festivals, and Fairs of Bihar
यह अध्याय बीपीएससी प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह बिहार की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और पहचान को दर्शाता है। इसमें राज्य की अद्वितीय चित्रकला शैलियों, लोक नृत्यों और यूनेस्को विश्व धरोहर स्थलों का विस्तृत विवरण मिलता है।
बिहार की लोक चित्रकला और हस्तशिल्प
बिहार की लोक चित्रकलाएँ यहाँ की सांस्कृतिक समृद्धि और ग्रामीण जीवन का जीवंत प्रतिबिंब हैं। मधुबनी पेंटिंग, जिसे मिथिला कला भी कहा जाता है, अपनी जटिल ज्यामितीय आकृतियों और प्राकृतिक रंगों के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध है। मंजूषा कला भागलपुर (अंग क्षेत्र) की विशिष्ट शैली है, जो बिहुला-विषहरी की लोककथाओं और सर्प रूपांकनों पर आधारित है। टिकुली कला पटना की एक प्राचीन कला है, जिसे आधुनिक समय में उपेंद्र महारथी ने पुनर्जीवित किया। सिक्की घास कला और सुजनी कढ़ाई बिहार के महत्वपूर्ण हस्तशिल्प हैं, जिन्हें उनकी विशिष्टता के लिए जीआई (GI) टैग प्रदान किया गया है। ये कलाएँ न केवल धार्मिक और सामाजिक अनुष्ठानों का हिस्सा हैं, बल्कि बिहार की महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण का मुख्य स्रोत भी बनी हैं।
मुख्य तथ्य
- मधुबनी पेंटिंग को 2007 में भौगोलिक संकेत (GI Tag) प्राप्त हुआ था।
- जगदंबा देवी मधुबनी पेंटिंग के लिए पद्म श्री (1975) पाने वाली पहली कलाकार थीं।
- मधुबनी पेंटिंग की मुख्य शैलियाँ भरनी, कचनी, तांत्रिक, गोदना और कोहबर हैं।
- मंजूषा कला मुख्य रूप से भागलपुर क्षेत्र में प्रचलित है और इसे 'सर्प चित्रकला' भी कहा जाता है।
- मंजूषा कला में केवल तीन रंगों का उपयोग होता है: गुलाबी, पीला और हरा।
- टिकुली कला का केंद्र पटना है और इसमें कांच पर सोने के वर्क का उपयोग किया जाता है।
- सुजनी कढ़ाई (Sujani Embroidery) को 2006 में जीआई टैग मिला, यह मुख्य रूप से मुजफ्फरपुर से संबंधित है।
- सिक्की कला में 'सुनहरी घास' (Sikki Grass) का उपयोग टोकरियाँ और खिलौने बनाने के लिए किया जाता है।
- महासुंदरी देवी और दुलारी देवी मधुबनी कला की प्रसिद्ध समकालीन कलाकार हैं।
- उपेंद्र महारथी ने टिकुली कला को जापान की तकनीक से जोड़कर आधुनिक रूप दिया।
- मंजूषा कला एक 'स्क्रॉल पेंटिंग' है जिसे बक्सों (मंजूषा) पर बनाया जाता है।
- कोहबर पेंटिंग विशेष रूप से नवविवाहित जोड़ों के कमरे की दीवारों पर बनाई जाती है।
तालिका
- कला का नाम: मधुबनी पेंटिंग · प्रमुख क्षेत्र: मिथिला (मधुबनी, दरभंगा) · विशेषता / जीआई टैग: प्राकृतिक रंग, जीआई टैग (2007)
- कला का नाम: मंजूषा कला · प्रमुख क्षेत्र: अंग (भागलपुर) · विशेषता / जीआई टैग: सर्प रूपांकन, 3 रंग (गुलाबी, पीला, हरा)
- कला का नाम: टिकुली कला · प्रमुख क्षेत्र: पटना · विशेषता / जीआई टैग: कांच पर सोने का काम, बिंदी कला
- कला का नाम: सुजनी कढ़ाई · प्रमुख क्षेत्र: मुजफ्फरपुर / मिथिला · विशेषता / जीआई टैग: कपड़े पर कढ़ाई, जीआई टैग (2006)
- कला का नाम: सिक्की कला · प्रमुख क्षेत्र: मिथिला क्षेत्र · विशेषता / जीआई टैग: सुनहरी घास के उत्पाद, जीआई टैग
अभ्यास प्रश्न (हल सहित)
- प्रश्न 1: मधुबनी चित्रकला के संदर्भ में 'कचनी' शैली की मुख्य विशेषता क्या है?
(क) रंगों का गहरा भराव (ख) केवल रेखाओं के माध्यम से चित्रण (ग) कांच का उपयोग (घ) कपड़े पर कढ़ाई
- ✔ उत्तर: (ख) केवल रेखाओं के माध्यम से चित्रण — कचनी शैली में केवल रेखाओं (Line work) का उपयोग किया जाता है, जबकि भरनी में रंगों का भराव होता है।
- प्रश्न 2: बिहार की किस लोक कला को 'अंगिका चित्रकला' के नाम से भी जाना जाता है?
(क) मधुबनी (ख) टिकुली (ग) मंजूषा (घ) सुजनी
- ✔ उत्तर: (ग) मंजूषा — मंजूषा कला भागलपुर (अंग क्षेत्र) की है, इसलिए इसे अंगिका चित्रकला कहा जाता है।
- प्रश्न 3: निम्नलिखित में से किसे मधुबनी पेंटिंग के लिए सबसे पहले पद्म श्री से सम्मानित किया गया था?
(क) महासुंदरी देवी (ख) सीता देवी (ग) जगदंबा देवी (घ) गंगा देवी
- ✔ उत्तर: (ग) जगदंबा देवी — जगदंबा देवी को 1975 में मधुबनी कला के लिए पहला पद्म श्री मिला था।
- प्रश्न 4: मंजूषा कला में निम्नलिखित में से किस रंग का प्रयोग नहीं किया जाता है?
(क) गुलाबी (ख) पीला (ग) नीला (घ) हरा
- ✔ उत्तर: (ग) नीला — मंजूषा कला में केवल तीन रंगों - गुलाबी, पीला और हरा का ही प्रयोग होता है।
- प्रश्न 5: सुजनी क्या है, जिसे बिहार में जीआई टैग प्राप्त है?
(क) एक प्रकार की घास (ख) एक प्रकार की कढ़ाई (ग) एक लोक नृत्य (घ) एक मिट्टी का बर्तन
- ✔ उत्तर: (ख) एक प्रकार की कढ़ाई — सुजनी बिहार की एक पारंपरिक कढ़ाई (Embroidery) कला है।
📜 असली पिछले वर्ष के प्रश्न (BPSC)
- [BPSC 70वीं प्रारंभिक (13 दिसंबर 2024), प्रश्न 11] बिहुला महोत्सव विशेष रूप से प्रत्येक वर्ष अगस्त के महीने में बिहार के निम्नलिखित में से किस जिले में मनाया जाता है ?
(क) पटना (ख) भागलपुर (ग) दरभंगा (घ) सीतामढ़ी
- ✔ आधिकारिक उत्तर: (ख) भागलपुर — बिहुला महोत्सव भागलपुर में मनाया जाता है, जो मंजूषा कला की पृष्ठभूमि (बिहुला-विषहरी कथा) से सीधे जुड़ा है।
परीक्षा में कैसे आता है
बीपीएससी में इस विषय से अक्सर चित्रकला की शैलियों (जैसे भरनी, कचनी), संबंधित क्षेत्रों (मिथिला, अंग), प्रसिद्ध कलाकारों के नाम और जीआई टैग प्राप्त उत्पादों पर प्रश्न पूछे जाते हैं।
इनमें भ्रम न करें
- ✘ मधुबनी और मंजूषा के रंगों में भ्रम: मधुबनी में प्राकृतिक रंगों की विविधता है, जबकि मंजूषा में केवल 3 विशिष्ट रंग हैं।
- ✘ सिक्की और सुजनी: सिक्की एक घास है, जबकि सुजनी एक कढ़ाई कला है।
💡 मंजू (मंजूषा) भाग (भागलपुर) कर गुलाबी-पीली-हरी साड़ी लाई।
बिहार के लोकनृत्य, लोकगीत एवं भिखारी ठाकुर
बिहार की लोक संस्कृति अत्यंत समृद्ध और जीवंत है, जिसमें सामाजिक परिवेश, कृषि चक्र और पारिवारिक रिश्तों की गहरी अभिव्यक्ति मिलती है। जट-जटिन, झिझिया और डोमकच जैसे लोकनृत्य महिलाओं के जीवन, ऋतु परिवर्तन और वैवाहिक प्रसंगों से जुड़े हैं। वहीं सोहर, कजरी और चैता जैसे लोकगीत जीवन के संस्कारों एवं उत्सवों का अभिन्न अंग हैं। इस लोक परंपरा को राष्ट्रीय व वैश्विक मंच पर प्रतिष्ठित करने का श्रेय भिखारी ठाकुर को जाता है, जिन्हें 'भोजपुरी का शेक्सपियर' कहा जाता है। उन्होंने बिदेसिया और बेटी बेचवा जैसी रचनाओं के माध्यम से पलायन, गरीबी और सामाजिक कुरीतियों पर तीखा प्रहार किया। वर्तमान में भी यह लोक विधाएँ बीपीएससी परीक्षाओं में संस्कृति खंड का मुख्य आधार हैं।
मुख्य तथ्य
- भिखारी ठाकुर को महापंडित राहुल सांकृत्यायन ने 'भोजपुरी का शेक्सपियर' की उपाधि दी थी।
- भिखारी ठाकुर का जन्म 18 दिसंबर 1887 को सारण (छपरा) जिले के कुतुबपुर गाँव में हुआ था।
- 'बिदेसिया' भिखारी ठाकुर का अत्यंत लोकप्रिय नाटक है, जो आजीविका हेतु पति के परदेस गमन और पत्नी के विरह-व्यथा पर केंद्रित है।
- भिखारी ठाकुर की प्रमुख अन्य कृतियों में 'गबरघिचोर', 'बेटी वियोग' (बेटी बेचवा), 'विधवा विलाप' और 'भाई विरोध' शामिल हैं।
- भिखारी ठाकुर की नाट्य मंडली के प्रमुख कलाकार रामचंद्र मांझी को 2021 में लौंडा नाच कला हेतु 'पद्म श्री' से सम्मानित किया गया था।
- जट-जटिन मिथिला एवं कोसी क्षेत्र का प्रसिद्ध युगल लोकनृत्य-नाट्य है, जो सावन-भादो में वर्षा और वैवाहिक जीवन के सुख-दुख पर अभिनीत होता है।
- झिझिया नृत्य मिथिलांचल में नवरात्र के समय महिलाएं सिर पर जलते दीपों से युक्त छिद्रित घड़ा रखकर इंद्र देव की आराधना व बुरी नजर से बचाव हेतु करती हैं।
- डोमकच नृत्य विवाह के अवसर पर बारात प्रस्थान के पश्चात वर पक्ष की महिलाओं द्वारा पूरी रात हास्य-व्यंग्य शैली में प्रस्तुत किया जाता है।
- सोहर बिहार में संतान (विशेषकर जन्मोत्सव) के अवसर पर गाया जाने वाला प्रमुख संस्कार गीत है।
- कजारी सावन माह में वर्षा ऋतु के आगमन, प्रेम और वियोग के भावों को अभिव्यक्त करने वाला प्रसिद्ध लोकगीत है।
- छऊ एक मुखौटा आधारित मार्शल (युद्ध) नृत्य है, जिसका उद्भव सरायकेला (अविभाजित बिहार) से माना जाता है।
- पवरिया नृत्य बिहार में पुत्र/संतान प्राप्ति के समय नर्तकों (किन्नर या विशिष्ट समूह) द्वारा बधाई एवं मंगलकामना हेतु किया जाता है।
तालिका
- लोकनृत्य / लोकगीत: जट-जटिन · प्रचलित क्षेत्र: मिथिला, कोसी · प्रमुख अवसर / संदर्भ: सावन-भादो (वर्षा ऋतु) · विशेषता: दाम्पत्य जीवन के नोक-झोंक व विरह पर आधारित युगल नृत्य
- लोकनृत्य / लोकगीत: झिझिया · प्रचलित क्षेत्र: मिथिलांचल · प्रमुख अवसर / संदर्भ: दुर्गा पूजा / नवरात्र · विशेषता: सिर पर छिद्रित घड़ा व जलता दीपक रखकर इंद्र स्तुति
- लोकनृत्य / लोकगीत: डोमकच · प्रचलित क्षेत्र: समस्त बिहार (भोजपुरी/मगध) · प्रमुख अवसर / संदर्भ: विवाह प्रसंग · विशेषता: बारात जाने के बाद महिलाओं द्वारा रात में हास्य-व्यंग्य प्रस्तुति
- लोकनृत्य / लोकगीत: बिदेसिया · प्रचलित क्षेत्र: भोजपुरी क्षेत्र · प्रमुख अवसर / संदर्भ: वर्ष भर (नाट्य मंचन) · विशेषता: प्रवासी पति की व्यथा; भिखारी ठाकुर द्वारा रचित
- लोकनृत्य / लोकगीत: सोहर · प्रचलित क्षेत्र: समस्त बिहार · प्रमुख अवसर / संदर्भ: संतान जन्मोत्सव · विशेषता: मंगलकामना और नवजात शिशु के आगमन पर संस्कार गीत
- लोकनृत्य / लोकगीत: छऊ · प्रचलित क्षेत्र: सीमावर्ती झारखंड/दक्षिण बिहार · प्रमुख अवसर / संदर्भ: चैत्र पर्व · विशेषता: मुखौटा पहनकर प्रस्तुत किया जाने वाला ओजस्वी युद्ध नृत्य
अभ्यास प्रश्न (हल सहित)
- प्रश्न 6: भिखारी ठाकुर को निम्नलिखित में से किसने 'भोजपुरी का शेक्सपियर' कहा था?
(क) डॉ. राजेन्द्र प्रसाद (ख) राहुल सांकृत्यायन (ग) फणीश्वर नाथ रेणु (घ) रामधारी सिंह 'दिनकर'
- ✔ उत्तर: (ख) राहुल सांकृत्यायन — महापंडित राहुल सांकृत्यायन ने लोकनाट्य में अद्वितीय योगदान के लिए भिखारी ठाकुर को 'भोजपुरी का शेक्सपियर' कहा था।
- प्रश्न 7: बिहार में 'झिझिया' लोकनृत्य के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सत्य है?
(क) यह सावन माह में केवल पुरुषों द्वारा किया जाता है। (ख) इसमें सिर पर छिद्रयुक्त घड़ा रखकर वर्षा के देवता इंद्र की स्तुति की जाती है। (ग) यह मगध क्षेत्र का प्रमुख युद्ध नृत्य है। (घ) यह विवाह के अवसर पर वर पक्ष द्वारा किया जाता है।
- ✔ उत्तर: (ख) इसमें सिर पर छिद्रयुक्त घड़ा रखकर वर्षा के देवता इंद्र की स्तुति की जाती है। — झिझिया मिथिलांचल में महिलाओं द्वारा नवरात्र के दौरान सिर पर छिद्रित दीपकयुक्त घड़ा रखकर किया जाने वाला प्रार्थना नृत्य है।
- प्रश्न 8: विवाह के अवसर पर बारात चले जाने के बाद घर की महिलाओं द्वारा रात में प्रस्तुत किया जाने वाला लोकनाट्य/नृत्य कौन-सा है?
(क) जट-जटिन (ख) कजरी (ग) डोमकच (घ) झिझिया
- ✔ उत्तर: (ग) डोमकच — डोमकच विवाह के अवसर पर बारात प्रस्थान के उपरांत रात भर महिलाओं द्वारा हास्य-विनोद के साथ किया जाता है।
- प्रश्न 9: निम्नलिखित में से कौन-सी नाट्य रचना भिखारी ठाकुर द्वारा रचित नहीं है?
(क) गबरघिचोर (ख) बेटी वियोग (ग) बिदेसिया (घ) मैला आँचल
- ✔ उत्तर: (घ) मैला आँचल — 'मैला आँचल' फणीश्वर नाथ रेणु का प्रसिद्ध उपन्यास है, जबकि गबरघिचोर, बेटी वियोग और बिदेसिया भिखारी ठाकुर की रचनाएँ हैं।
- प्रश्न 10: बिहार में संतान के जन्म के अवसर पर गाया जाने वाला पारंपरिक संस्कार गीत निम्नलिखित में से कौन-सा है?
(क) सोहर (ख) चैता (ग) कजरी (घ) बारहमासा
- ✔ उत्तर: (क) सोहर — सोहर जन्म संस्कार के अवसर पर मंगलकामना हेतु गाया जाने वाला प्रमुख लोकगीत है।
- प्रश्न 11: पद्म श्री से सम्मानित रामचंद्र मांझी किस लोक कला विधा के प्रसिद्ध कलाकार थे?
(क) मधुबनी चित्रकला (ख) लौंडा नाच / बिदेसिया (ग) मंजूषा कला (घ) छऊ नृत्य
- ✔ उत्तर: (ख) लौंडा नाच / बिदेसिया — रामचंद्र मांझी भिखारी ठाकुर की मंडली के प्रमुख कलाकार थे और उन्हें लौंडा नाच के लिए पद्म श्री (2021) मिला था।
परीक्षा में कैसे आता है
बीपीएससी में भिखारी ठाकुर की प्रमुख रचनाओं (बिदेसिया, गबरघिचोर आदि), उनकी उपाधि ('भोजपुरी का शेक्सपियर'), और लोकनृत्यों (जट-जटिन, झिझिया, डोमकच) के अवसर, क्षेत्र तथा प्रकृति पर सीधे वस्तुनिष्ठ प्रश्न पूछे जाते हैं।
इनमें भ्रम न करें
- ✘ जट-जटिन और झिझिया में भ्रम: जट-जटिन वर्षा ऋतु (सावन-भादो) में वैवाहिक जीवन का युगल नृत्य है, जबकि झिझिया नवरात्र में दुर्गा पूजा के समय छिद्रित घड़े के साथ किया जाता है।
- ✘ सोहर और कजरी में भ्रम: सोहर संतान जन्म के अवसर पर गाया जाने वाला संस्कार गीत है, जबकि कजरी वर्षा ऋतु और सावन में गाया जाने वाला ऋतु गीत है।
💡 याद रखें: 'भिखारी जी ने बिदेसिया में बेटी बेची और गबरघिचोर को रोते देखा' (बिदेसिया, बेटी बेचवा/वियोग, गबरघिचोर - भिखारी ठाकुर की रचनाएँ)।
बिहार के प्रमुख पर्व: छठ, सामा-चकेवा, जितिया और कर्मा
बिहार की संस्कृति में पर्व-त्योहार केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि प्रकृति और मानवीय संबंधों के उत्सव हैं। छठ पूजा बिहार का सबसे बड़ा 'महापर्व' है, जो स्वच्छता, पवित्रता और सूर्य उपासना का प्रतीक है। सामा-चकेवा और कर्मा जैसे त्योहार भाई-बहन के अटूट प्रेम को दर्शाते हैं, जबकि जितिया माताओं द्वारा अपनी संतान की लंबी आयु के लिए किया जाने वाला कठिन व्रत है। ये त्योहार बिहार की लोक परंपराओं, गीतों और सामुदायिक एकता को जीवंत रखते हैं। इनमें से अधिकांश पर्व प्रकृति (नदी, सूर्य, वृक्ष) की पूजा पर आधारित हैं, जो बिहार की प्राचीन कृषि संस्कृति को प्रदर्शित करते हैं।
मुख्य तथ्य
- छठ पूजा मुख्य रूप से कार्तिक शुक्ल षष्ठी को मनाई जाती है, जिसे 'महापर्व' कहा जाता है।
- छठ पूजा चार दिनों का उत्सव है: नहाय-खाय, खरना, संध्या अर्घ्य और उषा अर्घ्य।
- छठ दुनिया का एकमात्र ऐसा पर्व है जिसमें डूबते हुए सूर्य (अस्ताचलगामी सूर्य) को अर्घ्य दिया जाता है।
- सामा-चकेवा मिथिला क्षेत्र का प्रसिद्ध लोक पर्व है, जो भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक है।
- सामा-चकेवा कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की सप्तमी से पूर्णमासी तक मनाया जाता है।
- जितिया (जीवितपुत्रिका) व्रत अश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को मनाया जाता है।
- जितिया व्रत में जीमूतवाहन देवता की पूजा की जाती है।
- कर्मा पर्व भाद्रपद (भादो) मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी को मनाया जाता है।
- कर्मा पर्व में 'करम' वृक्ष की पूजा की जाती है और यह मुख्य रूप से जनजातीय क्षेत्रों में लोकप्रिय है।
- मधुश्रावणी पर्व मिथिला क्षेत्र में श्रावण मास में नवविवाहित महिलाओं द्वारा मनाया जाता है।
- तीज (हरितालिका तीज) भाद्रपद शुक्ल तृतीया को सुहागिन महिलाओं द्वारा मनाया जाता है।
- छठ पूजा साल में दो बार मनाई जाती है - चैती छठ (चैत्र मास) और कार्तिकी छठ (कार्तिक मास)।
तालिका
- पर्व का नाम: छठ पूजा · तिथि / मास: कार्तिक शुक्ल षष्ठी · मुख्य विशेषता: सूर्य उपासना, स्वच्छता और निर्जला व्रत
- पर्व का नाम: सामा-चकेवा · तिथि / मास: कार्तिक शुक्ल सप्तमी-पूर्णिमा · मुख्य विशेषता: भाई-बहन का प्रेम, मिट्टी की मूर्तियाँ
- पर्व का नाम: जितिया · तिथि / मास: अश्विन कृष्ण अष्टमी · मुख्य विशेषता: संतान की लंबी आयु हेतु कठिन व्रत
- पर्व का नाम: कर्मा · तिथि / मास: भादो शुक्ल एकादशी · मुख्य विशेषता: प्रकृति पूजा (करम वृक्ष), भाई-बहन का पर्व
- पर्व का नाम: मधुश्रावणी · तिथि / मास: श्रावण मास · मुख्य विशेषता: मिथिला की नवविवाहिताओं का पर्व
अभ्यास प्रश्न (हल सहित)
- प्रश्न 12: बिहार के किस पर्व में डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य देने की विशिष्ट परंपरा है?
(क) जितिया (ख) छठ पूजा (ग) सामा-चकेवा (घ) कर्मा
- ✔ उत्तर: (ख) छठ पूजा — छठ पूजा में पहले दिन डूबते सूर्य (संध्या अर्घ्य) और दूसरे दिन उगते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है।
- प्रश्न 13: सामा-चकेवा लोक पर्व बिहार के किस क्षेत्र में मुख्य रूप से प्रचलित है?
(क) मगध (ख) भोजपुर (ग) मिथिला (घ) अंग
- ✔ उत्तर: (ग) मिथिला — सामा-चकेवा मिथिलांचल का एक प्रमुख लोक पर्व है जो भाई-बहन के संबंधों पर आधारित है।
- प्रश्न 14: जितिया (जीवितपुत्रिका) व्रत किस तिथि को मनाया जाता है?
(क) कार्तिक शुक्ल षष्ठी (ख) अश्विन कृष्ण अष्टमी (ग) भादो शुक्ल एकादशी (घ) श्रावण पूर्णिमा
- ✔ उत्तर: (ख) अश्विन कृष्ण अष्टमी — जितिया व्रत अश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को संतान की लंबी आयु के लिए रखा जाता है।
- प्रश्न 15: कर्मा पर्व के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही है?
(क) यह केवल पुरुषों द्वारा मनाया जाता है। (ख) इसमें बरगद के पेड़ की पूजा होती है। (ग) यह भादो मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी को मनाया जाता है। (घ) यह मुख्य रूप से उत्तर बिहार का पर्व है।
- ✔ उत्तर: (ग) यह भादो मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी को मनाया जाता है। — कर्मा पर्व भादो शुक्ल एकादशी को मनाया जाता है और इसमें करम वृक्ष की पूजा होती है।
- प्रश्न 16: सूची-I (पर्व) को सूची-II (तिथि/मास) से सुमेलित कीजिए:
a) छठ पूजा - 1) अश्विन कृष्ण अष्टमी
b) जितिया - 2) कार्तिक शुक्ल षष्ठी
c) कर्मा - 3) श्रावण मास
d) मधुश्रावणी - 4) भादो शुक्ल एकादशी
(क) a-2, b-1, c-4, d-3 (ख) a-1, b-2, c-3, d-4 (ग) a-2, b-4, c-1, d-3 (घ) a-3, b-1, c-4, d-2
- ✔ उत्तर: (क) a-2, b-1, c-4, d-3 — छठ कार्तिक में, जितिया अश्विन में, कर्मा भादो में और मधुश्रावणी श्रावण में मनाई जाती है।
परीक्षा में कैसे आता है
BPSC में बिहार के त्योहारों से संबंधित प्रश्न अक्सर उनकी तिथियों (हिंदू कैलेंडर के अनुसार), संबंधित क्षेत्र (जैसे मिथिला) और उनके सांस्कृतिक महत्व पर पूछे जाते हैं। छठ पूजा और सामा-चकेवा से जुड़े प्रश्न बार-बार दोहराए जाते हैं।
इनमें भ्रम न करें
- ✘ छठ पूजा की तिथि: छात्र अक्सर कार्तिक और चैत्र मास के बीच भ्रमित होते हैं, हालांकि कार्तिक वाली छठ अधिक प्रमुख है।
- ✘ सामा-चकेवा बनाम कर्मा: दोनों भाई-बहन के पर्व हैं, लेकिन सामा-चकेवा मिथिला का है और कर्मा मुख्य रूप से जनजातीय/दक्षिण बिहार का।
💡 छठ-6 (षष्ठी), जितिया-8 (अष्टमी), कर्मा-11 (एकादशी) - इस संख्या क्रम से तिथियां याद रखें।
बिहार के प्रमुख मेले
बिहार की संस्कृति में मेलों का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है, जो धार्मिक आस्था और आर्थिक गतिविधियों का संगम होते हैं। सोनपुर मेला एशिया का सबसे बड़ा पशु मेला माना जाता है, जो गंगा और गंडक के संगम पर आयोजित होता है। गया का पितृपक्ष मेला पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए 'पिंडदान' हेतु विश्व प्रसिद्ध है। श्रावणी मेला सुल्तानगंज से देवघर तक की कठिन पैदल यात्रा के लिए जाना जाता है, जिसमें श्रद्धालु गंगा जल लेकर चलते हैं। राजगीर का मलमास मेला हर तीन साल में एक बार 'अधिमास' के दौरान लगता है, जहाँ गर्म कुंडों में स्नान का महत्व है। ये मेले न केवल बिहार की परंपरा को दर्शाते हैं बल्कि पर्यटन और स्थानीय व्यापार को भी बढ़ावा देते हैं।
मुख्य तथ्य
- सोनपुर मेला गंगा और गंडक नदी के संगम पर कार्तिक पूर्णिमा से शुरू होता है।
- सोनपुर मेले को 'हरिहर क्षेत्र मेला' के नाम से भी जाना जाता है।
- पितृपक्ष मेला गया में फल्गु नदी के तट पर आयोजित किया जाता है।
- गया में विष्णुपद मंदिर पिंडदान के लिए मुख्य केंद्र है।
- श्रावणी मेला सुल्तानगंज (भागलपुर) से शुरू होकर देवघर (झारखंड) तक जाता है।
- राजगीर का मलमास मेला प्रत्येक तीन वर्ष में एक बार (अधिमास में) लगता है।
- सिख धर्म के संस्थापक गुरु नानक देव ने गया और राजगीर की यात्रा की थी।
- गया के पास स्थित ताराडीह एक महत्वपूर्ण पुरातात्विक स्थल है।
- मनेर (पटना) में सूफी संत मखदूम यहिया मनेरी का उर्स मेला लगता है।
- सिमरिया मेला बेगूसराय में गंगा नदी के तट पर आयोजित होता है।
- सौराष्ट्र सभा मेला मधुबनी में ब्राह्मणों के विवाह संबंधों के लिए प्रसिद्ध है।
- मंदार मेला बांका जिले के मंदार पर्वत पर मकर संक्रांति के अवसर पर लगता है।
तालिका
- मेले का नाम: सोनपुर मेला · स्थान: सोनपुर (सारण) · विशेषता: एशिया का सबसे बड़ा पशु मेला, गंगा-गंडक संगम
- मेले का नाम: पितृपक्ष मेला · स्थान: गया · विशेषता: फल्गु नदी तट, पिंडदान हेतु प्रसिद्ध
- मेले का नाम: मलमास मेला · स्थान: राजगीर · विशेषता: प्रत्येक 3 वर्ष में, गर्म कुंड स्नान
- मेले का नाम: श्रावणी मेला · स्थान: सुल्तानगंज · विशेषता: काँवर यात्रा की शुरुआत
- मेले का नाम: मंदार मेला · स्थान: बांका · विशेषता: मकर संक्रांति पर मंदार पर्वत पर
अभ्यास प्रश्न (हल सहित)
- प्रश्न 17: एशिया का सबसे बड़ा पशु मेला बिहार के किस स्थान पर आयोजित किया जाता है?
(क) गया (ख) राजगीर (ग) सोनपुर (घ) भागलपुर
- ✔ उत्तर: (ग) सोनपुर — सोनपुर मेला एशिया का सबसे बड़ा पशु मेला है जो गंगा-गंडक संगम पर लगता है।
- प्रश्न 18: पितृपक्ष मेला, जहाँ लोग पिंडदान के लिए आते हैं, किस नदी के तट पर स्थित है?
(क) पुनपुन नदी (ख) फल्गु नदी (ग) सोन नदी (घ) गंडक नदी
- ✔ उत्तर: (ख) फल्गु नदी — गया का पितृपक्ष मेला फल्गु नदी के तट पर आयोजित होता है।
- प्रश्न 19: राजगीर में 'मलमास मेला' कितने वर्षों के अंतराल पर आयोजित किया जाता है?
(क) प्रत्येक वर्ष (ख) दो वर्ष (ग) तीन वर्ष (घ) पाँच वर्ष
- ✔ उत्तर: (ग) तीन वर्ष — मलमास मेला हिंदू कैलेंडर के अनुसार प्रत्येक तीन वर्ष (अधिमास) में लगता है।
- प्रश्न 20: श्रावणी मेले के दौरान श्रद्धालु गंगा जल कहाँ से उठाते हैं?
(क) पटना (ख) मुंगेर (ग) सुल्तानगंज (घ) कहलगाँव
- ✔ उत्तर: (ग) सुल्तानगंज — श्रद्धालु सुल्तानगंज से गंगा जल लेकर देवघर की यात्रा शुरू करते हैं।
- प्रश्न 21: निम्नलिखित में से कौन सा मेला सुमेलित नहीं है?
(क) मंदार मेला - बांका (ख) सिमरिया मेला - बेगूसराय (ग) सौराष्ट्र मेला - मधुबनी (घ) सोनपुर मेला - पटना
- ✔ उत्तर: (घ) सोनपुर मेला - पटना — सोनपुर मेला सारण जिले में आयोजित होता है, न कि पटना में।
📜 असली पिछले वर्ष के प्रश्न (BPSC)
- [BPSC 70वीं प्रारंभिक (13 दिसंबर 2024), प्रश्न 108] गंगा और गंडक नदियों के संगम पर आयोजित एक महीने तक चलने वाले पशु मेले का क्या नाम है ?
(क) कटिहार मेला (ख) सोनपुर मेला (ग) पूर्णिया मेला (घ) उपरोक्त में एक से अधिक
- ✔ आधिकारिक उत्तर: (ख) सोनपुर मेला — सोनपुर मेला गंगा और गंडक नदियों के संगम पर आयोजित होने वाला एक महीने का पशु मेला है।
परीक्षा में कैसे आता है
BPSC अक्सर मेलों के स्थान, उनसे जुड़ी नदियों के संगम और उनके आयोजन के समय (जैसे कार्तिक पूर्णिमा या मलमास) के बारे में प्रश्न पूछता है।
इनमें भ्रम न करें
- ✘ सोनपुर मेले को अक्सर पटना का मेला समझ लिया जाता है, जबकि यह सारण जिले में स्थित है।
- ✘ फल्गु नदी को 'निरंजना' भी कहा जाता है, छात्र इन दोनों नामों में भ्रमित हो सकते हैं।
💡 सोनपुर का 'सोना' पशु (पशु मेला) गंगा-गंडक के 'संग' (संगम) रहता है।
बिहार के वास्तुकला, विरासत स्थल और संग्रहालय
बिहार की वास्तुकला मौर्य काल से लेकर आधुनिक काल तक के गौरवशाली इतिहास को दर्शाती है। महाबोधि मंदिर और नालंदा महाविहार यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल बिहार के दो सबसे महत्वपूर्ण स्थल हैं। बराबर की गुफाएं भारत में चट्टानों को काटकर बनाई गई सबसे पुरानी गुफाओं का उदाहरण पेश करती हैं। सासाराम में शेरशाह सूरी का मकबरा भारत-इस्लामी वास्तुकला का एक उत्कृष्ट नमूना है जो एक झील के बीच स्थित है। पटना का गोलघर और पटना संग्रहालय ब्रिटिश काल की स्थापत्य कला की विशिष्ट पहचान हैं। ये स्थल न केवल पर्यटन के केंद्र हैं, बल्कि बिहार की प्राचीन शैक्षणिक और सांस्कृतिक विरासत के जीवंत प्रतीक भी हैं।
मुख्य तथ्य
- महाबोधि मंदिर, बोधगया को वर्ष 2002 में यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल घोषित किया गया था।
- नालंदा महाविहार के पुरातात्विक स्थल को वर्ष 2016 में यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल किया गया।
- बराबर की गुफाएं (जहानाबाद) मौर्य सम्राट अशोक और उनके पौत्र दशरथ द्वारा आजीवक संप्रदाय के लिए बनवाई गई थीं।
- सासाराम स्थित शेरशाह सूरी का मकबरा एक अष्टकोणीय (Octagonal) संरचना है, जिसे 'लाल पत्थर का दूसरा ताजमहल' भी कहा जाता है।
- पटना के गोलघर का निर्माण 1786 में कैप्टन जॉन गार्स्टिन द्वारा भीषण अकाल के बाद अनाज भंडारण के लिए कराया गया था।
- प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय की स्थापना 5वीं शताब्दी में गुप्त शासक कुमारगुप्त प्रथम ने की थी।
- बिहार में नालंदा विश्वविद्यालय की पुन: स्थापना (आधुनिक) वर्ष 2014 में की गई थी।
- विक्रमशिला विश्वविद्यालय की स्थापना पाल वंश के शासक धर्मपाल द्वारा भागलपुर जिले में की गई थी।
- केसरिया स्तूप (पूर्वी चंपारण) को विश्व का सबसे ऊंचा और बड़ा बौद्ध स्तूप माना जाता है।
- पटना संग्रहालय (Patna Museum) की स्थापना 1917 में हुई थी, जो अपनी 'दीदारगंज यक्षी' की प्रतिमा के लिए प्रसिद्ध है।
- विष्णुपद मंदिर, गया का वर्तमान ढांचा 1787 में इंदौर की महारानी अहिल्याबाई होलकर द्वारा बनवाया गया था।
- राजगीर का विश्व शांति स्तूप रत्नागिरी पहाड़ी पर स्थित है, जिसे जापान के सहयोग से बनाया गया है।
तालिका
- स्थल: महाबोधि मंदिर · स्थान: बोधगया · संबंधित शासक/निर्माता: अशोक (मूल) / पाल शासक
- स्थल: नालंदा विश्वविद्यालय · स्थान: नालंदा · संबंधित शासक/निर्माता: कुमारगुप्त प्रथम
- स्थल: विक्रमशिला विश्वविद्यालय · स्थान: भागलपुर · संबंधित शासक/निर्माता: धर्मपाल
- स्थल: शेरशाह का मकबरा · स्थान: सासाराम · संबंधित शासक/निर्माता: शेरशाह सूरी
- स्थल: गोलघर · स्थान: पटना · संबंधित शासक/निर्माता: कैप्टन जॉन गार्स्टिन
- स्थल: विष्णुपद मंदिर · स्थान: गया · संबंधित शासक/निर्माता: अहिल्याबाई होलकर
अभ्यास प्रश्न (हल सहित)
- प्रश्न 22: यूनेस्को द्वारा नालंदा महाविहार को विश्व धरोहर स्थल के रूप में किस वर्ष मान्यता दी गई थी?
(क) 2002 (ख) 2012 (ग) 2015 (घ) 2016
- ✔ उत्तर: (घ) 2016 — नालंदा महाविहार को 2016 में यूनेस्को की सूची में शामिल किया गया था, जबकि महाबोधि मंदिर को 2002 में।
- प्रश्न 23: सासाराम स्थित शेरशाह सूरी के मकबरे की स्थापत्य शैली के बारे में कौन सा कथन सही है?
(क) यह एक वर्गाकार संरचना है। (ख) यह एक अष्टकोणीय संरचना है। (ग) यह पूरी तरह से सफेद संगमरमर से बना है। (घ) यह एक गुफा मंदिर है।
- ✔ उत्तर: (ख) यह एक अष्टकोणीय संरचना है। — शेरशाह सूरी का मकबरा अपनी अष्टकोणीय (Octagonal) बनावट के लिए प्रसिद्ध है।
- प्रश्न 24: पटना के प्रसिद्ध गोलघर का निर्माण किस उद्देश्य से किया गया था?
(क) सैन्य छावनी के लिए (ख) अनाज भंडारण के लिए (ग) प्रशासनिक कार्यालय के लिए (घ) धार्मिक सभा के लिए
- ✔ उत्तर: (ख) अनाज भंडारण के लिए — 1770 के अकाल के बाद, भविष्य में अनाज की कमी को रोकने के लिए 1786 में इसका निर्माण हुआ था।
- प्रश्न 25: प्राचीन विक्रमशिला विश्वविद्यालय के संस्थापक कौन थे?
(क) कुमारगुप्त प्रथम (ख) चंद्रगुप्त मौर्य (ग) धर्मपाल (घ) गोपाल
- ✔ उत्तर: (ग) धर्मपाल — पाल शासक धर्मपाल ने 8वीं शताब्दी के अंत में विक्रमशिला विश्वविद्यालय की स्थापना की थी।
- प्रश्न 26: निम्नलिखित में से कौन सा स्थल बिहार में स्थित विश्व का सबसे ऊंचा बौद्ध स्तूप है?
(क) सारनाथ स्तूप (ख) केसरिया स्तूप (ग) सांची स्तूप (घ) धमेख स्तूप
- ✔ उत्तर: (ख) केसरिया स्तूप — पूर्वी चंपारण में स्थित केसरिया स्तूप को विश्व का सबसे ऊंचा स्तूप माना जाता है।
📜 असली पिछले वर्ष के प्रश्न (BPSC)
- [BPSC 71वीं प्रारंभिक (13 सितंबर 2025), प्रश्न 116] बिहार में नालन्दा विश्वविद्यालय की पुर्न-स्थापना किस वर्ष हुई थी ?
(क) 2005 (ख) 2007 (ग) 2008 (घ) 2014
- ✔ आधिकारिक उत्तर: (घ) 2014 — यह प्रश्न सीधे नालंदा विश्वविद्यालय की आधुनिक पुन: स्थापना (2014) के बारे में पूछता है, जो बिहार की शैक्षणिक विरासत का हिस्सा है।
- [BPSC 71वीं प्रारंभिक (13 सितंबर 2025), प्रश्न 95] कौन-सी बौद्ध संगीति बिहार में आयोजित नहीं की गई थी?
(क) प्रथम (ख) द्वितीय (ग) तृतीय (घ) चतुर्थ
- ✔ आधिकारिक उत्तर: (घ) चतुर्थ — यह प्रश्न बौद्ध संगीतियों के बारे में है, जो राजगीर, वैशाली और पाटलिपुत्र जैसे महत्वपूर्ण विरासत स्थलों पर आयोजित हुई थीं।
परीक्षा में कैसे आता है
BPSC अक्सर यूनेस्को स्थलों के वर्ष, प्राचीन विश्वविद्यालयों के संस्थापकों और विशिष्ट स्मारकों (जैसे गोलघर या शेरशाह का मकबरा) की विशेषताओं के बारे में प्रश्न पूछता है।
इनमें भ्रम न करें
- ✘ नालंदा विश्वविद्यालय (कुमारगुप्त प्रथम) और विक्रमशिला विश्वविद्यालय (धर्मपाल) के संस्थापकों में भ्रम।
- ✘ महाबोधि मंदिर (2002) और नालंदा महाविहार (2016) के यूनेस्को वर्ष में भ्रम।
💡 'महा-दो' (Mahabodhi - 2002) और 'नालंदा-सोलह' (Nalanda - 2016) - इस तरह यूनेस्को वर्ष याद रखें।
एक नज़र में (Revision)
- मधुबनी पेंटिंग (मिथिला) प्राकृतिक रंगों का उपयोग करती है और इसमें भर्नी और कचनी जैसी शैलियाँ शामिल हैं।
- मंजूषा कला अंग क्षेत्र (भागलपुर) की है, जो बिहुला-विषहरी की लोककथाओं पर आधारित है।
- टिकुली कला में पिघले हुए कांच और सोने के वर्क का उपयोग किया जाता है, जिसका केंद्र पटना है।
- सिक्की घास शिल्प बिहार की एक अनूठी पर्यावरण-अनुकूल कला है जिसे जीआई टैग प्राप्त है।
- सुजनी कढ़ाई पारंपरिक रूप से पुराने कपड़ों से रजाई बनाने की कला है, जिसे जीआई टैग मिला है।
- भिखारी ठाकुर को 'भोजपुरी का शेक्सपियर' कहा जाता है, जिन्होंने 'बिदेसिया' की रचना की।
- जट-जटिन मिथिला क्षेत्र का एक प्रसिद्ध लोक नृत्य है जो पति-पत्नी के संबंधों को दर्शाता है।
- छठ पूजा बिहार का सबसे महत्वपूर्ण पर्व है, जो सूर्य देव और छठी मइया को समर्पित है।
- सोनपुर मेला (हरिहर क्षेत्र मेला) एशिया का सबसे बड़ा पशु मेला है, जो गंगा-गंडक के संगम पर लगता है।
- गया का पितृपक्ष मेला पूर्वजों के पिंडदान के लिए विश्व प्रसिद्ध है।
- महाबोधि मंदिर (2002) और नालंदा महाविहार (2016) बिहार के दो यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल हैं।
- सामा-चकेवा भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक पर्व है जो कार्तिक माह में मनाया जाता है।
- राजगीर मलमास मेला हर तीन साल में एक बार आयोजित होने वाला एक पवित्र स्नान मेला है।
- झिझिया नृत्य राजा चित्रसेन की कथा से जुड़ा है और बुरी नजर से बचने के लिए किया जाता है।
अपने आप को जाँचिए — 10 प्रश्न
1. मंजूषा कला, जो बिहार के अंग क्षेत्र में प्रचलित है, मुख्य रूप से किस लोककथा पर आधारित है?
- (क) रामायण
- (ख) बिहुला-विषहरी
- (ग) महाभारत
- (घ) उपर्युक्त में से कोई नहीं / उपर्युक्त में से एक से अधिक
उत्तर देखें
उत्तर: (ख) बिहुला-विषहरी
मंजूषा कला भागलपुर (अंग क्षेत्र) की एक सर्प कला है जो बिहुला और विषहरी (सांपों की देवी) की कथा पर आधारित है।
2. निम्नलिखित में से किसे 'भोजपुरी का शेक्सपियर' कहा जाता है?
- (क) विद्यापति
- (ख) फणीश्वर नाथ रेणु
- (ग) भिखारी ठाकुर
- (घ) उपर्युक्त में से कोई नहीं / उपर्युक्त में से एक से अधिक
उत्तर देखें
उत्तर: (ग) भिखारी ठाकुर
भिखारी ठाकुर एक प्रसिद्ध लोक नाटककार थे, जिन्हें उनके सांस्कृतिक योगदान के कारण 'भोजपुरी का शेक्सपियर' कहा जाता है।
3. बिहार के किस लोक नृत्य में मिट्टी के घड़े में दीया जलाकर महिलाएं नृत्य करती हैं?
- (क) जट-जटिन
- (ख) झिझिया
- (ग) बिदेसिया
- (घ) उपर्युक्त में से कोई नहीं / उपर्युक्त में से एक से अधिक
उत्तर देखें
उत्तर: (ख) झिझिया
झिझिया नृत्य में महिलाएं अपने सिर पर छिद्रित मिट्टी के घड़े (जिसमें दीया जलता है) को संतुलित करके नृत्य करती हैं।
4. बिहार के निम्नलिखित में से किस उत्पाद को भौगोलिक संकेत (GI) टैग प्राप्त है?
- (क) सिक्कि घास उत्पाद
- (ख) सुजनी कढ़ाई
- (ग) मधुबनी पेंटिंग
- (घ) उपर्युक्त में से कोई नहीं / उपर्युक्त में से एक से अधिक
उत्तर देखें
उत्तर: (घ) उपर्युक्त में से कोई नहीं / उपर्युक्त में से एक से अधिक
सिक्कि घास, सुजनी कढ़ाई और मधुबनी पेंटिंग तीनों को बिहार के लिए जीआई टैग प्राप्त है।
5. सोनपुर का प्रसिद्ध 'हरिहर क्षेत्र मेला' किन दो नदियों के संगम पर आयोजित किया जाता है?
- (क) गंगा और कोसी
- (ख) गंगा और गंडक
- (ग) गंडक और सोन
- (घ) उपर्युक्त में से कोई नहीं / उपर्युक्त में से एक से अधिक
उत्तर देखें
उत्तर: (ख) गंगा और गंडक
सोनपुर मेला हर साल कार्तिक पूर्णिमा पर गंगा और गंडक नदियों के संगम पर आयोजित किया जाता है।
6. नालंदा महाविहार को किस वर्ष यूनेस्को (UNESCO) विश्व धरोहर स्थल घोषित किया गया था?
- (क) 2002
- (ख) 2012
- (ग) 2016
- (घ) उपर्युक्त में से कोई नहीं / उपर्युक्त में से एक से अधिक
उत्तर देखें
उत्तर: (ग) 2016
नालंदा महाविहार को 2016 में यूनेस्को की सूची में शामिल किया गया था, जबकि महाबोधि मंदिर को 2002 में शामिल किया गया था।
7. छठ पूजा के दौरान किस देवता की पूजा की जाती है?
- (क) भगवान शिव
- (ख) भगवान विष्णु
- (ग) सूर्य देव
- (घ) उपर्युक्त में से कोई नहीं / उपर्युक्त में से एक से अधिक
उत्तर देखें
उत्तर: (ग) सूर्य देव
छठ पूजा मुख्य रूप से सूर्य देव और उनकी पत्नी उषा (छठी मइया) को समर्पित है।
8. 'सामा-चकेवा' लोक पर्व बिहार के किस क्षेत्र में मुख्य रूप से मनाया जाता है?
- (क) मगध
- (ख) मिथिला
- (ग) भोजपुर
- (घ) उपर्युक्त में से कोई नहीं / उपर्युक्त में से एक से अधिक
उत्तर देखें
उत्तर: (ख) मिथिला
सामा-चकेवा मिथिला क्षेत्र का एक प्रमुख त्योहार है जो भाई-बहन के बीच के स्नेह को दर्शाता है।
9. पितृपक्ष मेला, जहाँ लोग अपने पूर्वजों के लिए 'पिंडदान' करते हैं, कहाँ आयोजित किया जाता है?
- (क) पटना
- (ख) गया
- (ग) वैशाली
- (घ) उपर्युक्त में से कोई नहीं / उपर्युक्त में से एक से अधिक
उत्तर देखें
उत्तर: (ख) गया
गया में फल्गु नदी के तट पर पितृपक्ष के दौरान विश्व प्रसिद्ध पिंडदान मेला आयोजित किया जाता है।
10. टिकुली कला का मुख्य केंद्र बिहार का कौन सा शहर है?
- (क) दरभंगा
- (ख) पटना
- (ग) मधुबनी
- (घ) उपर्युक्त में से कोई नहीं / उपर्युक्त में से एक से अधिक
उत्तर देखें
उत्तर: (ख) पटना
टिकुली कला का उद्भव और मुख्य केंद्र पटना है, जिसमें कांच पर बारीक नक्काशी की जाती है।
English version — Art, Culture, Festivals, and Fairs of Bihar
This chapter is crucial for BPSC Prelims and Mains as it showcases Bihar's rich cultural heritage and identity. It provides detailed insights into the state's unique painting styles, folk dances, and UNESCO World Heritage sites.
Folk Paintings and Handicrafts of Bihar
The folk paintings of Bihar are a vibrant reflection of its cultural richness and rural life. Madhubani painting, also known as Mithila art, is internationally renowned for its intricate geometric patterns and use of natural dyes. Manjusha art is a unique style from the Bhagalpur (Ang) region, centered around the folklore of Bihula-Bishahari and snake motifs. Tikuli art is an ancient craft from Patna, revived in modern times by Upendra Maharathi. Sikki grass craft and Sujani embroidery are significant handicrafts of Bihar, both of which have been granted GI tags for their uniqueness. These art forms are not only part of religious and social rituals but have also become a primary source of economic empowerment for the women of Bihar.
Key facts
- Madhubani painting received the Geographical Indication (GI Tag) in 2007.
- Jagdamba Devi was the first artist to receive the Padma Shri (1975) for Madhubani painting.
- The main styles of Madhubani painting are Bharni, Kachni, Tantrik, Godna, and Kohbar.
- Manjusha art is mainly prevalent in the Bhagalpur region and is also called 'Snake Painting'.
- Only three colors are used in Manjusha art: Pink, Yellow, and Green.
- The center of Tikuli art is Patna, and it involves the use of gold leaf work on glass.
- Sujani Embroidery received the GI tag in 2006; it is primarily associated with Muzaffarpur.
- In Sikki art, 'Golden Grass' (Sikki) is used to make baskets and toys.
- Mahasundari Devi and Dulari Devi are famous contemporary artists of Madhubani art.
- Upendra Maharathi modernized Tikuli art by integrating it with Japanese techniques.
- Manjusha art is a 'scroll painting' traditionally done on boxes (Manjusha).
- Kohbar painting is specifically made on the walls of the room of newlywed couples.
Table
- कला का नाम: मधुबनी पेंटिंग · प्रमुख क्षेत्र: मिथिला (मधुबनी, दरभंगा) · विशेषता / जीआई टैग: प्राकृतिक रंग, जीआई टैग (2007)
- कला का नाम: मंजूषा कला · प्रमुख क्षेत्र: अंग (भागलपुर) · विशेषता / जीआई टैग: सर्प रूपांकन, 3 रंग (गुलाबी, पीला, हरा)
- कला का नाम: टिकुली कला · प्रमुख क्षेत्र: पटना · विशेषता / जीआई टैग: कांच पर सोने का काम, बिंदी कला
- कला का नाम: सुजनी कढ़ाई · प्रमुख क्षेत्र: मुजफ्फरपुर / मिथिला · विशेषता / जीआई टैग: कपड़े पर कढ़ाई, जीआई टैग (2006)
- कला का नाम: सिक्की कला · प्रमुख क्षेत्र: मिथिला क्षेत्र · विशेषता / जीआई टैग: सुनहरी घास के उत्पाद, जीआई टैग
Practice questions (solved)
- Q 1: मधुबनी चित्रकला के संदर्भ में 'कचनी' शैली की मुख्य विशेषता क्या है?
(क) रंगों का गहरा भराव (ख) केवल रेखाओं के माध्यम से चित्रण (ग) कांच का उपयोग (घ) कपड़े पर कढ़ाई
- ✔ Answer: (ख) केवल रेखाओं के माध्यम से चित्रण — कचनी शैली में केवल रेखाओं (Line work) का उपयोग किया जाता है, जबकि भरनी में रंगों का भराव होता है।
- Q 2: बिहार की किस लोक कला को 'अंगिका चित्रकला' के नाम से भी जाना जाता है?
(क) मधुबनी (ख) टिकुली (ग) मंजूषा (घ) सुजनी
- ✔ Answer: (ग) मंजूषा — मंजूषा कला भागलपुर (अंग क्षेत्र) की है, इसलिए इसे अंगिका चित्रकला कहा जाता है।
- Q 3: निम्नलिखित में से किसे मधुबनी पेंटिंग के लिए सबसे पहले पद्म श्री से सम्मानित किया गया था?
(क) महासुंदरी देवी (ख) सीता देवी (ग) जगदंबा देवी (घ) गंगा देवी
- ✔ Answer: (ग) जगदंबा देवी — जगदंबा देवी को 1975 में मधुबनी कला के लिए पहला पद्म श्री मिला था।
- Q 4: मंजूषा कला में निम्नलिखित में से किस रंग का प्रयोग नहीं किया जाता है?
(क) गुलाबी (ख) पीला (ग) नीला (घ) हरा
- ✔ Answer: (ग) नीला — मंजूषा कला में केवल तीन रंगों - गुलाबी, पीला और हरा का ही प्रयोग होता है।
- Q 5: सुजनी क्या है, जिसे बिहार में जीआई टैग प्राप्त है?
(क) एक प्रकार की घास (ख) एक प्रकार की कढ़ाई (ग) एक लोक नृत्य (घ) एक मिट्टी का बर्तन
- ✔ Answer: (ख) एक प्रकार की कढ़ाई — सुजनी बिहार की एक पारंपरिक कढ़ाई (Embroidery) कला है।
📜 Real previous-year questions (BPSC)
- [BPSC 70वीं प्रारंभिक (13 दिसंबर 2024), प्रश्न 11] बिहुला महोत्सव विशेष रूप से प्रत्येक वर्ष अगस्त के महीने में बिहार के निम्नलिखित में से किस जिले में मनाया जाता है ?
(क) पटना (ख) भागलपुर (ग) दरभंगा (घ) सीतामढ़ी
- ✔ Official answer: (ख) भागलपुर — बिहुला महोत्सव भागलपुर में मनाया जाता है, जो मंजूषा कला की पृष्ठभूमि (बिहुला-विषहरी कथा) से सीधे जुड़ा है।
How it is asked
BPSC frequently asks questions about painting styles (like Bharni, Kachni), associated regions (Mithila, Ang), names of famous artists, and products with GI tags.
Do not confuse
- ✘ मधुबनी और मंजूषा के रंगों में भ्रम: मधुबनी में प्राकृतिक रंगों की विविधता है, जबकि मंजूषा में केवल 3 विशिष्ट रंग हैं।
- ✘ सिक्की और सुजनी: सिक्की एक घास है, जबकि सुजनी एक कढ़ाई कला है।
💡 मंजू (मंजूषा) भाग (भागलपुर) कर गुलाबी-पीली-हरी साड़ी लाई।
Folk Dances, Songs of Bihar and Bhikhari Thakur
Bihar possesses a remarkably vibrant folk culture reflecting agricultural cycles, domestic relationships, and social realities. Folk dances such as Jat-Jatin, Jhijhiya, and Domkach are closely tied to women's experiences, monsoonal shifts, and marital traditions. Concurrently, traditional songs like Sohar, Kajari, and Chaita mark critical rites of passage and seasonal transitions. Bhikhari Thakur, famously hailed as the 'Shakespeare of Bhojpuri', transformed this folk theater into a powerful instrument of social critique, addressing migration and dowry through masterworks like Bidesia. His legacy, along with traditional forms like Chhau and Launda Nach, forms a critical segment of Bihar's cultural heritage frequently tested in BPSC examinations.
Key facts
- Bhikhari Thakur was conferred the title 'Shakespeare of Bhojpuri' by polymath Rahul Sankrityayan.
- Bhikhari Thakur was born on December 18, 1887, in Qutubpur village of Saran (Chhapra) district.
- 'Bidesia' is Bhikhari Thakur's most celebrated play, depicting male migration for livelihood and the wife's agony of separation.
- Other prominent works of Bhikhari Thakur include 'Gabarghichor', 'Beti Viyog' (Beti Bechwa), 'Vidhwa Vilap', and 'Bhai Virodh'.
- Ramchandra Manjhi, a veteran artist of Bhikhari Thakur's troupe, was awarded the 'Padma Shri' in 2021 for Launda Nach.
- Jat-Jatin is a popular couple folk dance-drama of Mithila and Kosi, performed during monsoon portraying married life.
- Jhijhiya is performed by women in Mithilanchal during Navratri carrying perforated pots with lamps to propitiate Indra.
- Domkach is a satirical nocturnal dance performed exclusively by women of the groom's house after the wedding procession departs.
- Sohar is an auspicious ceremonial folk song sung primarily during childbirth and naming celebrations in Bihar.
- Kajari is a classical folk song sung during the rainy month of Shravana expressing themes of love and separation.
- Chhau is a mask-based martial dance originating from Saraikela (formerly in undivided Bihar).
- Pawariya dance is performed to congratulate families upon childbirth and seek blessings for the newborn.
Table
- लोकनृत्य / लोकगीत: जट-जटिन · प्रचलित क्षेत्र: मिथिला, कोसी · प्रमुख अवसर / संदर्भ: सावन-भादो (वर्षा ऋतु) · विशेषता: दाम्पत्य जीवन के नोक-झोंक व विरह पर आधारित युगल नृत्य
- लोकनृत्य / लोकगीत: झिझिया · प्रचलित क्षेत्र: मिथिलांचल · प्रमुख अवसर / संदर्भ: दुर्गा पूजा / नवरात्र · विशेषता: सिर पर छिद्रित घड़ा व जलता दीपक रखकर इंद्र स्तुति
- लोकनृत्य / लोकगीत: डोमकच · प्रचलित क्षेत्र: समस्त बिहार (भोजपुरी/मगध) · प्रमुख अवसर / संदर्भ: विवाह प्रसंग · विशेषता: बारात जाने के बाद महिलाओं द्वारा रात में हास्य-व्यंग्य प्रस्तुति
- लोकनृत्य / लोकगीत: बिदेसिया · प्रचलित क्षेत्र: भोजपुरी क्षेत्र · प्रमुख अवसर / संदर्भ: वर्ष भर (नाट्य मंचन) · विशेषता: प्रवासी पति की व्यथा; भिखारी ठाकुर द्वारा रचित
- लोकनृत्य / लोकगीत: सोहर · प्रचलित क्षेत्र: समस्त बिहार · प्रमुख अवसर / संदर्भ: संतान जन्मोत्सव · विशेषता: मंगलकामना और नवजात शिशु के आगमन पर संस्कार गीत
- लोकनृत्य / लोकगीत: छऊ · प्रचलित क्षेत्र: सीमावर्ती झारखंड/दक्षिण बिहार · प्रमुख अवसर / संदर्भ: चैत्र पर्व · विशेषता: मुखौटा पहनकर प्रस्तुत किया जाने वाला ओजस्वी युद्ध नृत्य
Practice questions (solved)
- Q 6: भिखारी ठाकुर को निम्नलिखित में से किसने 'भोजपुरी का शेक्सपियर' कहा था?
(क) डॉ. राजेन्द्र प्रसाद (ख) राहुल सांकृत्यायन (ग) फणीश्वर नाथ रेणु (घ) रामधारी सिंह 'दिनकर'
- ✔ Answer: (ख) राहुल सांकृत्यायन — महापंडित राहुल सांकृत्यायन ने लोकनाट्य में अद्वितीय योगदान के लिए भिखारी ठाकुर को 'भोजपुरी का शेक्सपियर' कहा था।
- Q 7: बिहार में 'झिझिया' लोकनृत्य के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सत्य है?
(क) यह सावन माह में केवल पुरुषों द्वारा किया जाता है। (ख) इसमें सिर पर छिद्रयुक्त घड़ा रखकर वर्षा के देवता इंद्र की स्तुति की जाती है। (ग) यह मगध क्षेत्र का प्रमुख युद्ध नृत्य है। (घ) यह विवाह के अवसर पर वर पक्ष द्वारा किया जाता है।
- ✔ Answer: (ख) इसमें सिर पर छिद्रयुक्त घड़ा रखकर वर्षा के देवता इंद्र की स्तुति की जाती है। — झिझिया मिथिलांचल में महिलाओं द्वारा नवरात्र के दौरान सिर पर छिद्रित दीपकयुक्त घड़ा रखकर किया जाने वाला प्रार्थना नृत्य है।
- Q 8: विवाह के अवसर पर बारात चले जाने के बाद घर की महिलाओं द्वारा रात में प्रस्तुत किया जाने वाला लोकनाट्य/नृत्य कौन-सा है?
(क) जट-जटिन (ख) कजरी (ग) डोमकच (घ) झिझिया
- ✔ Answer: (ग) डोमकच — डोमकच विवाह के अवसर पर बारात प्रस्थान के उपरांत रात भर महिलाओं द्वारा हास्य-विनोद के साथ किया जाता है।
- Q 9: निम्नलिखित में से कौन-सी नाट्य रचना भिखारी ठाकुर द्वारा रचित नहीं है?
(क) गबरघिचोर (ख) बेटी वियोग (ग) बिदेसिया (घ) मैला आँचल
- ✔ Answer: (घ) मैला आँचल — 'मैला आँचल' फणीश्वर नाथ रेणु का प्रसिद्ध उपन्यास है, जबकि गबरघिचोर, बेटी वियोग और बिदेसिया भिखारी ठाकुर की रचनाएँ हैं।
- Q 10: बिहार में संतान के जन्म के अवसर पर गाया जाने वाला पारंपरिक संस्कार गीत निम्नलिखित में से कौन-सा है?
(क) सोहर (ख) चैता (ग) कजरी (घ) बारहमासा
- ✔ Answer: (क) सोहर — सोहर जन्म संस्कार के अवसर पर मंगलकामना हेतु गाया जाने वाला प्रमुख लोकगीत है।
- Q 11: पद्म श्री से सम्मानित रामचंद्र मांझी किस लोक कला विधा के प्रसिद्ध कलाकार थे?
(क) मधुबनी चित्रकला (ख) लौंडा नाच / बिदेसिया (ग) मंजूषा कला (घ) छऊ नृत्य
- ✔ Answer: (ख) लौंडा नाच / बिदेसिया — रामचंद्र मांझी भिखारी ठाकुर की मंडली के प्रमुख कलाकार थे और उन्हें लौंडा नाच के लिए पद्म श्री (2021) मिला था।
How it is asked
BPSC regularly asks direct and statement-based questions on Bhikhari Thakur's plays, his epithet, and specific folk dance forms like Jat-Jatin, Jhijhiya, and Domkach regarding their seasonal timing and cultural context.
Do not confuse
- ✘ जट-जटिन और झिझिया में भ्रम: जट-जटिन वर्षा ऋतु (सावन-भादो) में वैवाहिक जीवन का युगल नृत्य है, जबकि झिझिया नवरात्र में दुर्गा पूजा के समय छिद्रित घड़े के साथ किया जाता है।
- ✘ सोहर और कजरी में भ्रम: सोहर संतान जन्म के अवसर पर गाया जाने वाला संस्कार गीत है, जबकि कजरी वर्षा ऋतु और सावन में गाया जाने वाला ऋतु गीत है।
💡 याद रखें: 'भिखारी जी ने बिदेसिया में बेटी बेची और गबरघिचोर को रोते देखा' (बिदेसिया, बेटी बेचवा/वियोग, गबरघिचोर - भिखारी ठाकुर की रचनाएँ)।
Major Festivals of Bihar: Chhath, Sama-Chakeva, Jitiya, and Karma
Festivals in Bihar are not just religious rituals but celebrations of nature and human relationships. Chhath Puja is the state's most significant 'Mahaparv', symbolizing purity, discipline, and Sun worship. Festivals like Sama-Chakeva and Karma highlight the unbreakable bond between brothers and sisters, while Jitiya is a rigorous fast observed by mothers for the longevity of their children. These festivals keep Bihar's folk traditions, songs, and communal harmony alive. Most of these celebrations are centered around nature (rivers, sun, trees), reflecting the ancient agrarian culture of Bihar.
Key facts
- Chhath Puja is primarily celebrated on Kartik Shukla Shashti and is known as 'Mahaparv'.
- Chhath Puja is a four-day festival: Nahay-Khay, Kharna, Sandhya Arghya, and Usha Arghya.
- Chhath is the only festival in the world where the setting sun is offered prayers (Arghya).
- Sama-Chakeva is a famous folk festival of the Mithila region, symbolizing the love between brother and sister.
- Sama-Chakeva is celebrated from Kartik Shukla Saptami to Purnima.
- Jitiya (Jivitputrika) fast is observed on the Ashtami of Krishna Paksha in the month of Ashwin.
- In the Jitiya fast, the deity Jimutavahana is worshipped.
- Karma festival is celebrated on the Ekadashi of Shukla Paksha in the month of Bhadrapada (Bhado).
- The 'Karam' tree is worshipped during the Karma festival, which is mainly popular in tribal areas.
- Madhushravani festival is celebrated by newly married women in the Mithila region during the month of Shravan.
- Teej (Haritalika Teej) is celebrated by married women on Bhadrapada Shukla Tritiya.
- Chhath Puja is celebrated twice a year - Chaiti Chhath (Chaitra month) and Kartiki Chhath (Kartik month).
Table
- पर्व का नाम: छठ पूजा · तिथि / मास: कार्तिक शुक्ल षष्ठी · मुख्य विशेषता: सूर्य उपासना, स्वच्छता और निर्जला व्रत
- पर्व का नाम: सामा-चकेवा · तिथि / मास: कार्तिक शुक्ल सप्तमी-पूर्णिमा · मुख्य विशेषता: भाई-बहन का प्रेम, मिट्टी की मूर्तियाँ
- पर्व का नाम: जितिया · तिथि / मास: अश्विन कृष्ण अष्टमी · मुख्य विशेषता: संतान की लंबी आयु हेतु कठिन व्रत
- पर्व का नाम: कर्मा · तिथि / मास: भादो शुक्ल एकादशी · मुख्य विशेषता: प्रकृति पूजा (करम वृक्ष), भाई-बहन का पर्व
- पर्व का नाम: मधुश्रावणी · तिथि / मास: श्रावण मास · मुख्य विशेषता: मिथिला की नवविवाहिताओं का पर्व
Practice questions (solved)
- Q 12: बिहार के किस पर्व में डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य देने की विशिष्ट परंपरा है?
(क) जितिया (ख) छठ पूजा (ग) सामा-चकेवा (घ) कर्मा
- ✔ Answer: (ख) छठ पूजा — छठ पूजा में पहले दिन डूबते सूर्य (संध्या अर्घ्य) और दूसरे दिन उगते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है।
- Q 13: सामा-चकेवा लोक पर्व बिहार के किस क्षेत्र में मुख्य रूप से प्रचलित है?
(क) मगध (ख) भोजपुर (ग) मिथिला (घ) अंग
- ✔ Answer: (ग) मिथिला — सामा-चकेवा मिथिलांचल का एक प्रमुख लोक पर्व है जो भाई-बहन के संबंधों पर आधारित है।
- Q 14: जितिया (जीवितपुत्रिका) व्रत किस तिथि को मनाया जाता है?
(क) कार्तिक शुक्ल षष्ठी (ख) अश्विन कृष्ण अष्टमी (ग) भादो शुक्ल एकादशी (घ) श्रावण पूर्णिमा
- ✔ Answer: (ख) अश्विन कृष्ण अष्टमी — जितिया व्रत अश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को संतान की लंबी आयु के लिए रखा जाता है।
- Q 15: कर्मा पर्व के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही है?
(क) यह केवल पुरुषों द्वारा मनाया जाता है। (ख) इसमें बरगद के पेड़ की पूजा होती है। (ग) यह भादो मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी को मनाया जाता है। (घ) यह मुख्य रूप से उत्तर बिहार का पर्व है।
- ✔ Answer: (ग) यह भादो मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी को मनाया जाता है। — कर्मा पर्व भादो शुक्ल एकादशी को मनाया जाता है और इसमें करम वृक्ष की पूजा होती है।
- Q 16: सूची-I (पर्व) को सूची-II (तिथि/मास) से सुमेलित कीजिए:
a) छठ पूजा - 1) अश्विन कृष्ण अष्टमी
b) जितिया - 2) कार्तिक शुक्ल षष्ठी
c) कर्मा - 3) श्रावण मास
d) मधुश्रावणी - 4) भादो शुक्ल एकादशी
(क) a-2, b-1, c-4, d-3 (ख) a-1, b-2, c-3, d-4 (ग) a-2, b-4, c-1, d-3 (घ) a-3, b-1, c-4, d-2
- ✔ Answer: (क) a-2, b-1, c-4, d-3 — छठ कार्तिक में, जितिया अश्विन में, कर्मा भादो में और मधुश्रावणी श्रावण में मनाई जाती है।
How it is asked
In BPSC, questions related to Bihar's festivals are often asked about their dates (according to the Hindu calendar), the specific region (like Mithila), and their cultural significance. Questions on Chhath Puja and Sama-Chakeva are frequently repeated.
Do not confuse
- ✘ छठ पूजा की तिथि: छात्र अक्सर कार्तिक और चैत्र मास के बीच भ्रमित होते हैं, हालांकि कार्तिक वाली छठ अधिक प्रमुख है।
- ✘ सामा-चकेवा बनाम कर्मा: दोनों भाई-बहन के पर्व हैं, लेकिन सामा-चकेवा मिथिला का है और कर्मा मुख्य रूप से जनजातीय/दक्षिण बिहार का।
💡 छठ-6 (षष्ठी), जितिया-8 (अष्टमी), कर्मा-11 (एकादशी) - इस संख्या क्रम से तिथियां याद रखें।
Major Fairs of Bihar
Fairs hold a significant place in Bihar's culture, serving as a confluence of religious faith and economic activities. The Sonepur Mela is considered Asia's largest cattle fair, held at the confluence of the Ganga and Gandak rivers. Gaya's Pitripaksha Mela is world-famous for 'Pind Daan' to ensure peace for the souls of ancestors. The Shravani Mela is known for the arduous foot journey from Sultanganj to Deoghar, where devotees carry Ganga water. Rajgir's Malmas Mela occurs once every three years during the 'Adhik Maas', emphasizing the importance of bathing in hot springs. These fairs not only reflect Bihar's traditions but also boost tourism and local trade.
Key facts
- Sonepur Mela starts on Kartik Purnima at the confluence of Ganga and Gandak rivers.
- Sonepur Mela is also known as the 'Harihar Kshetra Mela'.
- Pitripaksha Mela is organized on the banks of the Phalgu River in Gaya.
- Vishnupad Temple in Gaya is the main center for Pind Daan.
- Shravani Mela starts from Sultanganj (Bhagalpur) and goes up to Deoghar (Jharkhand).
- The Malmas Mela of Rajgir is held once every three years (during Adhik Maas).
- Guru Nanak Dev, the founder of Sikhism, visited Gaya and Rajgir.
- Taradih, located near Gaya, is an important archaeological site.
- The Urs Mela of Sufi saint Makhdum Yahya Maneri is held in Maner (Patna).
- Simaria Mela is organized on the banks of the Ganga river in Begusarai.
- Saurath Sabha Mela in Madhubani is famous for Brahmin marriage alliances.
- Mandar Mela is held on Mandar Hill in Banka district on the occasion of Makar Sankranti.
Table
- मेले का नाम: सोनपुर मेला · स्थान: सोनपुर (सारण) · विशेषता: एशिया का सबसे बड़ा पशु मेला, गंगा-गंडक संगम
- मेले का नाम: पितृपक्ष मेला · स्थान: गया · विशेषता: फल्गु नदी तट, पिंडदान हेतु प्रसिद्ध
- मेले का नाम: मलमास मेला · स्थान: राजगीर · विशेषता: प्रत्येक 3 वर्ष में, गर्म कुंड स्नान
- मेले का नाम: श्रावणी मेला · स्थान: सुल्तानगंज · विशेषता: काँवर यात्रा की शुरुआत
- मेले का नाम: मंदार मेला · स्थान: बांका · विशेषता: मकर संक्रांति पर मंदार पर्वत पर
Practice questions (solved)
- Q 17: एशिया का सबसे बड़ा पशु मेला बिहार के किस स्थान पर आयोजित किया जाता है?
(क) गया (ख) राजगीर (ग) सोनपुर (घ) भागलपुर
- ✔ Answer: (ग) सोनपुर — सोनपुर मेला एशिया का सबसे बड़ा पशु मेला है जो गंगा-गंडक संगम पर लगता है।
- Q 18: पितृपक्ष मेला, जहाँ लोग पिंडदान के लिए आते हैं, किस नदी के तट पर स्थित है?
(क) पुनपुन नदी (ख) फल्गु नदी (ग) सोन नदी (घ) गंडक नदी
- ✔ Answer: (ख) फल्गु नदी — गया का पितृपक्ष मेला फल्गु नदी के तट पर आयोजित होता है।
- Q 19: राजगीर में 'मलमास मेला' कितने वर्षों के अंतराल पर आयोजित किया जाता है?
(क) प्रत्येक वर्ष (ख) दो वर्ष (ग) तीन वर्ष (घ) पाँच वर्ष
- ✔ Answer: (ग) तीन वर्ष — मलमास मेला हिंदू कैलेंडर के अनुसार प्रत्येक तीन वर्ष (अधिमास) में लगता है।
- Q 20: श्रावणी मेले के दौरान श्रद्धालु गंगा जल कहाँ से उठाते हैं?
(क) पटना (ख) मुंगेर (ग) सुल्तानगंज (घ) कहलगाँव
- ✔ Answer: (ग) सुल्तानगंज — श्रद्धालु सुल्तानगंज से गंगा जल लेकर देवघर की यात्रा शुरू करते हैं।
- Q 21: निम्नलिखित में से कौन सा मेला सुमेलित नहीं है?
(क) मंदार मेला - बांका (ख) सिमरिया मेला - बेगूसराय (ग) सौराष्ट्र मेला - मधुबनी (घ) सोनपुर मेला - पटना
- ✔ Answer: (घ) सोनपुर मेला - पटना — सोनपुर मेला सारण जिले में आयोजित होता है, न कि पटना में।
📜 Real previous-year questions (BPSC)
- [BPSC 70वीं प्रारंभिक (13 दिसंबर 2024), प्रश्न 108] गंगा और गंडक नदियों के संगम पर आयोजित एक महीने तक चलने वाले पशु मेले का क्या नाम है ?
(क) कटिहार मेला (ख) सोनपुर मेला (ग) पूर्णिया मेला (घ) उपरोक्त में एक से अधिक
- ✔ Official answer: (ख) सोनपुर मेला — सोनपुर मेला गंगा और गंडक नदियों के संगम पर आयोजित होने वाला एक महीने का पशु मेला है।
How it is asked
BPSC frequently asks questions about the location of fairs, the confluence of rivers associated with them, and the timing of their organization (like Kartik Purnima or Malmas).
Do not confuse
- ✘ सोनपुर मेले को अक्सर पटना का मेला समझ लिया जाता है, जबकि यह सारण जिले में स्थित है।
- ✘ फल्गु नदी को 'निरंजना' भी कहा जाता है, छात्र इन दोनों नामों में भ्रमित हो सकते हैं।
💡 सोनपुर का 'सोना' पशु (पशु मेला) गंगा-गंडक के 'संग' (संगम) रहता है।
Architecture, Heritage Sites, and Museums of Bihar
The architecture of Bihar reflects a glorious history spanning from the Mauryan era to the modern period. The Mahabodhi Temple and Nalanda Mahavihara are the two most significant sites in Bihar included in the UNESCO World Heritage list. The Barabar Caves represent the oldest examples of rock-cut architecture in India. Sher Shah Suri's tomb in Sasaram is an excellent specimen of Indo-Islamic architecture, situated in the middle of a lake. Patna's Golghar and the Patna Museum are distinct hallmarks of British-era architectural style. These sites are not only centers of tourism but also living symbols of Bihar's ancient educational and cultural heritage.
Key facts
- Mahabodhi Temple, Bodh Gaya was declared a UNESCO World Heritage Site in the year 2002.
- The archaeological site of Nalanda Mahavihara was included in the UNESCO World Heritage list in 2016.
- The Barabar Caves (Jehanabad) were built by Mauryan Emperor Ashoka and his grandson Dasharatha for the Ajivika sect.
- Sher Shah Suri's tomb in Sasaram is an octagonal structure, often called the 'Second Taj Mahal of red stone'.
- Patna's Golghar was built in 1786 by Captain John Garstin for grain storage following a severe famine.
- The ancient Nalanda University was founded in the 5th century by the Gupta ruler Kumaragupta I.
- The re-establishment (modern) of Nalanda University in Bihar was done in the year 2014.
- Vikramshila University was established by the Pala dynasty ruler Dharmapala in Bhagalpur district.
- Kesaria Stupa (East Champaran) is considered the world's tallest and largest Buddhist stupa.
- Patna Museum was established in 1917 and is famous for its 'Didarganj Yakshi' statue.
- The current structure of Vishnupad Temple, Gaya was built in 1787 by Queen Ahilyabai Holkar of Indore.
- The World Peace Pagoda (Vishwa Shanti Stupa) in Rajgir is located on Ratnagiri Hill, built with Japanese collaboration.
Table
- स्थल: महाबोधि मंदिर · स्थान: बोधगया · संबंधित शासक/निर्माता: अशोक (मूल) / पाल शासक
- स्थल: नालंदा विश्वविद्यालय · स्थान: नालंदा · संबंधित शासक/निर्माता: कुमारगुप्त प्रथम
- स्थल: विक्रमशिला विश्वविद्यालय · स्थान: भागलपुर · संबंधित शासक/निर्माता: धर्मपाल
- स्थल: शेरशाह का मकबरा · स्थान: सासाराम · संबंधित शासक/निर्माता: शेरशाह सूरी
- स्थल: गोलघर · स्थान: पटना · संबंधित शासक/निर्माता: कैप्टन जॉन गार्स्टिन
- स्थल: विष्णुपद मंदिर · स्थान: गया · संबंधित शासक/निर्माता: अहिल्याबाई होलकर
Practice questions (solved)
- Q 22: यूनेस्को द्वारा नालंदा महाविहार को विश्व धरोहर स्थल के रूप में किस वर्ष मान्यता दी गई थी?
(क) 2002 (ख) 2012 (ग) 2015 (घ) 2016
- ✔ Answer: (घ) 2016 — नालंदा महाविहार को 2016 में यूनेस्को की सूची में शामिल किया गया था, जबकि महाबोधि मंदिर को 2002 में।
- Q 23: सासाराम स्थित शेरशाह सूरी के मकबरे की स्थापत्य शैली के बारे में कौन सा कथन सही है?
(क) यह एक वर्गाकार संरचना है। (ख) यह एक अष्टकोणीय संरचना है। (ग) यह पूरी तरह से सफेद संगमरमर से बना है। (घ) यह एक गुफा मंदिर है।
- ✔ Answer: (ख) यह एक अष्टकोणीय संरचना है। — शेरशाह सूरी का मकबरा अपनी अष्टकोणीय (Octagonal) बनावट के लिए प्रसिद्ध है।
- Q 24: पटना के प्रसिद्ध गोलघर का निर्माण किस उद्देश्य से किया गया था?
(क) सैन्य छावनी के लिए (ख) अनाज भंडारण के लिए (ग) प्रशासनिक कार्यालय के लिए (घ) धार्मिक सभा के लिए
- ✔ Answer: (ख) अनाज भंडारण के लिए — 1770 के अकाल के बाद, भविष्य में अनाज की कमी को रोकने के लिए 1786 में इसका निर्माण हुआ था।
- Q 25: प्राचीन विक्रमशिला विश्वविद्यालय के संस्थापक कौन थे?
(क) कुमारगुप्त प्रथम (ख) चंद्रगुप्त मौर्य (ग) धर्मपाल (घ) गोपाल
- ✔ Answer: (ग) धर्मपाल — पाल शासक धर्मपाल ने 8वीं शताब्दी के अंत में विक्रमशिला विश्वविद्यालय की स्थापना की थी।
- Q 26: निम्नलिखित में से कौन सा स्थल बिहार में स्थित विश्व का सबसे ऊंचा बौद्ध स्तूप है?
(क) सारनाथ स्तूप (ख) केसरिया स्तूप (ग) सांची स्तूप (घ) धमेख स्तूप
- ✔ Answer: (ख) केसरिया स्तूप — पूर्वी चंपारण में स्थित केसरिया स्तूप को विश्व का सबसे ऊंचा स्तूप माना जाता है।
📜 Real previous-year questions (BPSC)
- [BPSC 71वीं प्रारंभिक (13 सितंबर 2025), प्रश्न 116] बिहार में नालन्दा विश्वविद्यालय की पुर्न-स्थापना किस वर्ष हुई थी ?
(क) 2005 (ख) 2007 (ग) 2008 (घ) 2014
- ✔ Official answer: (घ) 2014 — यह प्रश्न सीधे नालंदा विश्वविद्यालय की आधुनिक पुन: स्थापना (2014) के बारे में पूछता है, जो बिहार की शैक्षणिक विरासत का हिस्सा है।
- [BPSC 71वीं प्रारंभिक (13 सितंबर 2025), प्रश्न 95] कौन-सी बौद्ध संगीति बिहार में आयोजित नहीं की गई थी?
(क) प्रथम (ख) द्वितीय (ग) तृतीय (घ) चतुर्थ
- ✔ Official answer: (घ) चतुर्थ — यह प्रश्न बौद्ध संगीतियों के बारे में है, जो राजगीर, वैशाली और पाटलिपुत्र जैसे महत्वपूर्ण विरासत स्थलों पर आयोजित हुई थीं।
How it is asked
BPSC frequently asks questions about the years of UNESCO recognition, founders of ancient universities, and specific features of monuments like Golghar or Sher Shah's tomb.
Do not confuse
- ✘ नालंदा विश्वविद्यालय (कुमारगुप्त प्रथम) और विक्रमशिला विश्वविद्यालय (धर्मपाल) के संस्थापकों में भ्रम।
- ✘ महाबोधि मंदिर (2002) और नालंदा महाविहार (2016) के यूनेस्को वर्ष में भ्रम।
💡 'महा-दो' (Mahabodhi - 2002) और 'नालंदा-सोलह' (Nalanda - 2016) - इस तरह यूनेस्को वर्ष याद रखें।
Quick revision
- Madhubani painting (Mithila) uses natural colors and includes styles like Bharni and Kachni.
- Manjusha art belongs to the Anga region (Bhagalpur) and is based on the Bihula-Bishahari folklore.
- Tikuli art uses melted glass and gold foil, with Patna as its primary center.
- Sikki grass craft is a unique eco-friendly art of Bihar that holds a GI tag.
- Sujani embroidery is the traditional art of making quilts from old clothes, awarded a GI tag.
- Bhikhari Thakur is known as the 'Shakespeare of Bhojpuri' and created the famous 'Bidesia'.
- Jat-Jatin is a famous folk dance of the Mithila region depicting husband-wife relationships.
- Chhath Puja is Bihar's most significant festival, dedicated to the Sun God and Chhathi Maiya.
- Sonepur Mela (Harihar Kshetra Mela) is Asia's largest cattle fair, held at the Ganga-Gandak confluence.
- The Pitripaksha Mela in Gaya is world-famous for 'Pind Daan' to ancestors.
- Mahabodhi Temple (2002) and Nalanda Mahavihara (2016) are Bihar's two UNESCO World Heritage sites.
- Sama-Chakeva is a festival symbolizing brother-sister love, celebrated in the month of Kartik.
- Rajgir Malmas Mela is a sacred bathing fair held once every three years.
- Jhijhiya dance is associated with the legend of King Chitrasen and performed to ward off the evil eye.