होम › नोट्स › BPSC CCE › भूगोल
BPSC CCEभूगोलबिहार की नदियाँ, बाढ़ और नदी-घाटी परियोजनाएँ
Rivers of Bihar, Floods and River Valley Projects
यह अध्याय बीपीएससी प्रारंभिक परीक्षा के भूगोल खंड और मुख्य परीक्षा के सामान्य अध्ययन पेपर-2 के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसमें बिहार के अपवाह तंत्र, सिंचाई परियोजनाओं और बाढ़ प्रबंधन से संबंधित प्रश्न बार-बार पूछे जाते हैं।
बिहार में गंगा एवं उसकी उत्तरी सहायक नदियाँ
गंगा नदी बिहार के भूगोल और अपवाह तंत्र की रीढ़ है, जो राज्य को दो असमान भागों (उत्तरी बिहार और दक्षिणी बिहार) में विभाजित करती है। गंगा बिहार के बक्सर जिले के चौसा के समीप प्रवेश करती है और कटिहार से होते हुए पश्चिम बंगाल में प्रवेश करती है। उत्तरी बिहार की नदियाँ मुख्यतः हिमालय से निकलती हैं, इसलिए ये वर्षभर जल से भरी रहती हैं (सदा नीरा) और भारी अवसाद लाती हैं। इनमें घाघरा, गंडक, बूढ़ी गंडक, बागमती, कोसी और महानंदा प्रमुख हैं। ये नदियाँ उत्तर दिशा से बहती हुई गंगा के बाएँ तट पर आकर मिलती हैं। मानसून के दौरान अत्यधिक जलप्रवाह और मार्ग परिवर्तन के कारण उत्तरी बिहार का मैदान बाढ़ की गंभीर समस्या से जूझता है।
मुख्य तथ्य
- गंगा नदी बिहार में 445 किमी की दूरी तय करती है और राज्य के कुल 12 जिलों से होकर गुजरती है।
- गंगा में सबसे अधिक लंबाई पटना जिले में (लगभग 99 किमी) है।
- घाघरा (सरयू) नदी का उद्गम तिब्बत के मापचाचुंगो हिमनद से होता है और यह छपरा (सारण) के निकट गंगा में मिलती है।
- गंडक नदी नेपाल हिमालय के मानंगभोट और धौलागिरि क्षेत्र से निकलती है और हाजीपुर (सोनपुर) के पास गंगा में मिलती है।
- बूढ़ी गंडक नदी का उद्गम पश्चिमी चंपारण के सोमेश्वर पहाड़ी के चौतरवा चौर से होता है और यह खगड़िया के निकट गंगा में मिलती है।
- बूढ़ी गंडक उत्तर बिहार में सबसे तेज जलप्रवाह वाली नदी मानी जाती है।
- बागमती नदी नेपाल में शिवपुरी श्रेणी (काठमांडू घाटी) से निकलती है और बिहार में सीतामढ़ी जिले के शोरवतिया से प्रवेश करती है।
- कोसी नदी तिब्बत/नेपाल के गोसाईंस्थान (सप्तकोशिकी) से निकलती है और कटिहार के कुर्सेला के निकट गंगा में मिलती है।
- महानंदा नदी दार्जिलिंग (पश्चिम बंगाल) की महालधिराम पहाड़ियों से निकलती है और बिहार के किशनगंज, पूर्णिया, कटिहार से बहती हुई गंगा में मिलती है।
- महानंदा उत्तर बिहार के मैदान की सबसे पूर्वी सहायक नदी है।
- गंडक नदी को नेपाल में शालीग्रामी तथा मैदानी भाग में नारायणी के नाम से भी जाना जाता है।
- गंगा नदी बिहार में चौसा (बक्सर) में प्रवेश करती है तथा कटिहार जिले से बाहर निकलती है।
तालिका
- नदी का नाम: गंगा · उद्गम स्थल: गंगोत्री हिमनद (उत्तराखंड) · गंगा में संगम स्थल: बंगाल की खाड़ी (अंततः) · बिहार में विशेष पहचान: बिहार में 445 किमी, 12 जिलों से प्रवाह
- नदी का नाम: घाघरा (सरयू) · उद्गम स्थल: मापचाचुंगो (तिब्बत) · गंगा में संगम स्थल: छपरा (सारण) · बिहार में विशेष पहचान: उत्तर प्रदेश-बिहार सीमा का निर्धारण
- नदी का नाम: गंडक (नारायणी) · उद्गम स्थल: धौलागिरि/मानंगभोट (नेपाल) · गंगा में संगम स्थल: सोनपुर/हाजीपुर (वैशाली) · बिहार में विशेष पहचान: त्रिवेणी नहर इसी पर स्थित है
- नदी का नाम: बूढ़ी गंडक · उद्गम स्थल: सोमेश्वर श्रेणी (चौतरवा चौर) · गंगा में संगम स्थल: खगड़िया · बिहार में विशेष पहचान: उत्तर बिहार की सबसे तीव्र प्रवाह वाली नदी
- नदी का नाम: बागमती · उद्गम स्थल: शिवपुरी श्रेणी (नेपाल) · गंगा में संगम स्थल: बदलाघाट (कोसी/करेह में) · बिहार में विशेष पहचान: नेपाल की पवित्र नदी, सीतामढ़ी से प्रवेश
- नदी का नाम: कोसी · उद्गम स्थल: गोसाईंस्थान/सप्तकोशिकी (तिब्बत-नेपाल) · गंगा में संगम स्थल: कुर्सेला (कटिहार) · बिहार में विशेष पहचान: बिहार का शोक, तीव्र मार्ग परिवर्तन
- नदी का नाम: महानंदा · उद्गम स्थल: महालधिराम पहाड़ी (दार्जिलिंग) · गंगा में संगम स्थल: कटिहार/नवाबगंज (प. बंगाल सीमा) · बिहार में विशेष पहचान: उत्तर बिहार के मैदान की सबसे पूर्वी नदी
अभ्यास प्रश्न (हल सहित)
- प्रश्न 1: गंगा नदी बिहार के कितने जिलों से होकर प्रवाहित होती है?
(क) 10 (ख) 11 (ग) 12 (घ) 14
- ✔ उत्तर: (ग) 12 — गंगा नदी बिहार के 12 जिलों (बक्सर, भोजपुर, सारण, पटना, वैशाली, समस्तीपुर, बेगूसराय, लखीसराय, मुंगेर, खगड़िया, भागलपुर, कटिहार) से होकर गुजरती है।
- प्रश्न 2: निम्नलिखित में से कौन-सी नदी उत्तर बिहार में गंगा की सबसे पूर्वी सहायक नदी है?
(क) कोसी (ख) महानंदा (ग) बूढ़ी गंडक (घ) बागमती
- ✔ उत्तर: (ख) महानंदा — महानंदा नदी दार्जिलिंग पहाड़ियों से निकलकर बिहार के किशनगंज और कटिहार क्षेत्र में बहती हुई सबसे पूर्व में गंगा में मिलती है।
- प्रश्न 3: बूढ़ी गंडक नदी का उद्गम स्थल निम्नलिखित में से कौन-सा है?
(क) सोमेश्वर पहाड़ी (चौतरवा चौर) (ख) गोसाईंस्थान (ग) मापचाचुंगो हिमनद (घ) महालधिराम पर्वत
- ✔ उत्तर: (क) सोमेश्वर पहाड़ी (चौतरवा चौर) — बूढ़ी गंडक नदी पश्चिमी चंपारण जिले के सोमेश्वर पहाड़ी के चौतरवा चौर से निकलती है।
- प्रश्न 4: निम्नलिखित युग्मों (नदी और गंगा में संगम स्थल) पर विचार कीजिए:
1. घाघरा - छपरा
2. गंडक - सोनपुर (हाजीपुर)
3. कोसी - कुर्सेला (कटिहार)
उपर्युक्त में से कौन-से सही सुमेलित हैं?
(क) केवल 1 और 2 (ख) केवल 2 और 3 (ग) केवल 1 और 3 (घ) 1, 2 और 3
- ✔ उत्तर: (घ) 1, 2 और 3 — घाघरा छपरा के पास, गंडक पहलेजा/सोनपुर के पास और कोसी कुर्सेला (कटिहार) के पास गंगा में मिलती है।
- प्रश्न 5: गंगा नदी की बिहार में कुल लंबाई कितनी है?
(क) 405 किमी (ख) 445 किमी (ग) 425 किमी (घ) 500 किमी
- ✔ उत्तर: (ख) 445 किमी — गंगा नदी की बिहार राज्य में कुल लंबाई 445 किमी है, जिसमें सर्वाधिक लंबाई (99 किमी) पटना जिले में है।
📜 असली पिछले वर्ष के प्रश्न (BPSC)
- [BPSC 70वीं प्रारंभिक (13 दिसंबर 2024), प्रश्न 126] निम्नलिखित अपवाह प्रणालियों में से किससे बिहार की भूमि अपवाहित होती है ?
(क) महानदी (ख) घाघरा (ग) नर्मदा (घ) यमुना
- ✔ आधिकारिक उत्तर: (ख) घाघरा
परीक्षा में कैसे आता है
BPSC में उत्तर बिहार की नदियों के उद्गम स्थल, गंगा में मिलने के स्थान (संगम), गंगा के जिलेवार विस्तार (12 जिले, पटना में लंबाई) और पूर्व से पश्चिम के क्रम से संबंधित प्रश्न निरंतर पूछे जाते हैं।
इनमें भ्रम न करें
- ✘ गंडक और बूढ़ी गंडक में अंतर: गंडक का उद्गम नेपाल हिमालय में है जबकि बूढ़ी गंडक विशुद्ध रूप से बिहार के सोमेश्वर पहाड़ी (चौतरवा चौर) से निकलती है।
- ✘ गंगा में नदियों के मिलने का पश्चिम से पूर्व क्रम: घाघरा -> गंडक -> बूढ़ी गंडक -> बागमती -> कोसी -> महानंदा (महानंदा सबसे पूर्व में है)।
💡 उत्तर बिहार की नदियों का पश्चिम से पूर्व क्रम याद रखें: 'घा-गं-बू-बा-को-म' (घाघरा, गंडक, बूढ़ी गंडक, बागमती, कोसी, महानंदा)।
गंगा की दक्षिणी सहायक नदियाँ (सोन, पुनपुन, किऊल, फल्गू, कर्मनाशा)
गंगा नदी के दक्षिण से आकर मिलने वाली नदियाँ मुख्य रूप से प्रायद्वीपीय पठार, छोटानागपुर के पठार और कैमूर की पहाड़ियों से निकलती हैं। ये नदियाँ बरसाती या मौसमी (गैर-बारहमासी) प्रकृति की होती हैं, जो ग्रीष्म ऋतु में प्रायः सूख जाती हैं और वर्षा ऋतु में इनमें अचानक बाढ़ आ जाती है। सोन नदी दक्षिण बिहार की सबसे प्रमुख और लंबी नदी है, जो अमरकंटक से निकलकर पटना के निकट गंगा में समाहित होती है। पुनपुन, फल्गू, कर्मनाशा और किऊल नदियाँ दक्षिण बिहार की कृषि, धार्मिक मान्यताओं (पिंडदान) और भौगोलिकी के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। कर्मनाशा और सोन नदियाँ बिहार और उत्तर प्रदेश के बीच प्राकृतिक सीमा का निर्माण भी करती हैं।
मुख्य तथ्य
- सोन नदी का उद्गम मध्य प्रदेश के मैकाल पर्वत की अमरकंटक पहाड़ी से होता है।
- सोन नदी बिहार में रोहतास जिले से प्रवेश करती है और मनेर (पटना) के पास गंगा में मिलती है।
- उत्तरी कोयल, रिहंद, गोपद और कन्हार सोन नदी की प्रमुख सहायक नदियाँ हैं।
- पुनपुन नदी का उद्गम झारखंड के पलामू जिले के छोटानागपुर पठारी क्षेत्र से होता है।
- पुनपुन नदी पटना जिले के फतुहा नामक स्थान पर गंगा नदी में दाईं ओर से मिलती है।
- फल्गू नदी का निर्माण बोधगया के पास लीलाजन (निरंजना) और मोहना नदियों के संगम से होता है।
- भगवान बुद्ध को ज्ञान की प्राप्ति निरंजना (वर्तमान में लीलाजन/फल्गू) नदी के तट पर बोधगया में हुई थी।
- गया में फल्गू नदी के तट पर विश्वप्रसिद्ध पितृपक्ष मेले में पिंडदान किया जाता है और यहाँ देश का सबसे बड़ा रबर डैम (गयाजी डैम) बना है।
- कर्मनाशा नदी का उद्गम कैमूर जिले की कैमूर पहाड़ियों (सरोदाग) से होता है।
- कर्मनाशा नदी बक्सर जिले के चौसा के पास गंगा नदी में मिलती है और इसे धार्मिक रूप से अपवित्र माना जाता है।
- किऊल नदी का उद्गम झारखंड के गिरिडीह जिले की तिसरी पहाड़ी से होता है और यह जमुई जिले से बिहार में प्रवेश करती है।
- किऊल नदी लखीसराय जिले के सूर्यगढ़ा के निकट गंगा नदी में मिलती है।
- अजय नदी का उद्गम जमुई जिले के चकाई (बटपार) से होता है, लेकिन यह बिहार में गंगा से न मिलकर बंगाल में भागीरथी से मिलती है।
तालिका
- नदी का नाम: सोन · उद्गम स्थल: अमरकंटक (मैकाल पर्वत, म.प्र.) · गंगा में संगम स्थल: मनेर के निकट (पटना) · मुख्य विशेषता / सहायक नदियाँ: दक्षिण बिहार की सबसे बड़ी नदी; सहायक: उत्तरी कोयल, रिहंद, कन्हार
- नदी का नाम: पुनपुन · उद्गम स्थल: छोटा नागपुर पठार (पलामू, झारखंड) · गंगा में संगम स्थल: फतुहा (पटना) · मुख्य विशेषता / सहायक नदियाँ: पुराणों में 'कीकट' व 'बमागधी'; सहायक: मोरहर, दरधा
- नदी का नाम: फल्गू · उद्गम स्थल: निरंजना व मोहना का संगम (बोधगया) · गंगा में संगम स्थल: टाल क्षेत्र (पुनपुन/हरोहर तंत्र) · मुख्य विशेषता / सहायक नदियाँ: गया में पिंडदान स्थल; देश का सबसे बड़ा रबर डैम (गयाजी डैम)
- नदी का नाम: कर्मनाशा · उद्गम स्थल: कैमूर की पहाड़ियाँ (कैमूर/रोहतास) · गंगा में संगम स्थल: चौसा के निकट (बक्सर) · मुख्य विशेषता / सहायक नदियाँ: धार्मिक रूप से अपवित्र नदी; बिहार-उत्तर प्रदेश की प्राकृतिक सीमा
- नदी का नाम: किऊल · उद्गम स्थल: तिसरी पहाड़ी (गिरिडीह, झारखंड) · गंगा में संगम स्थल: सूर्यगढ़ा के निकट (लखीसराय) · मुख्य विशेषता / सहायक नदियाँ: जमुई, लखीसराय में प्रवाह; सहायक: हरोहर, बड़नार, अंजन
- नदी का नाम: चांदन · उद्गम स्थल: देवघर की पहाड़ियाँ (झारखंड) · गंगा में संगम स्थल: गंगा नदी (भागलपुर के निकट) · मुख्य विशेषता / सहायक नदियाँ: बांका और भागलपुर जिले में अपवाह
अभ्यास प्रश्न (हल सहित)
- प्रश्न 6: निम्नलिखित में से कौन-सी नदी पटना के समीप 'फतुहा' में गंगा नदी से मिलती है?
(क) सोन (ख) पुनपुन (ग) कर्मनाशा (घ) किऊल
- ✔ उत्तर: (ख) पुनपुन — पुनपुन नदी पलामू से निकलकर बिहार में बहती हुई पटना के फतुहा में गंगा में समाहित होती है।
- प्रश्न 7: कर्मनाशा नदी के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इसका उद्गम कैमूर की पहाड़ियों से होता है।
2. यह चौसा (बक्सर) के निकट गंगा नदी में मिलती है।
3. यह बिहार और उत्तर प्रदेश के मध्य प्राकृतिक सीमा रेखा बनाती है।
उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?
(क) केवल 1 और 2 (ख) केवल 2 और 3 (ग) केवल 1 और 3 (घ) 1, 2 और 3
- ✔ उत्तर: (घ) 1, 2 और 3 — कर्मनाशा नदी कैमूर से निकलती है, चौसा के पास गंगा में मिलती है और यूपी-बिहार सीमा बनाती है; अतः तीनों कथन सत्य हैं।
- प्रश्न 8: गया में बहने वाली प्रसिद्ध फल्गू नदी किन दो धाराओं के मिलने से बनती है?
(क) सोन और कन्हार (ख) निरंजना (लीलाजन) और मोहना (ग) हरोहर और बड़नार (घ) दरधा और मोरहर
- ✔ उत्तर: (ख) निरंजना (लीलाजन) और मोहना — फल्गू नदी बोधगया के पास लीलाजन (निरंजना) और मोहना नदियों के संगम से निर्मित होती है।
- प्रश्न 9: सोन नदी बिहार के किस जिले में सर्वप्रथम प्रवेश करती है?
(क) रोहतास (ख) औरंगाबाद (ग) कैमूर (घ) भोजपुर
- ✔ उत्तर: (क) रोहतास — मध्य प्रदेश के अमरकंटक से निकलने के बाद सोन नदी बिहार के रोहतास जिले में प्रवेश करती है।
- प्रश्न 10: बिहार की कौन-सी नदी अपने अपवित्र/अशुभ जल की लोकमान्यता के कारण 'कर्मनाशा' कहलाती है?
(क) किऊल (ख) अजय (ग) कर्मनाशा (घ) पुनपुन
- ✔ उत्तर: (ग) कर्मनाशा — कर्मनाशा शब्द का अर्थ ही 'कर्म का नाश करने वाली' माना गया है, जिसे लोकमान्यताओं में अपवित्र माना जाता है।
- प्रश्न 11: निम्नलिखित में से कौन-सी नदी बिहार में गंगा की दक्षिणी सहायक नदी नहीं है?
(क) सोन (ख) पुनपुन (ग) बागमती (घ) किऊल
- ✔ उत्तर: (ग) बागमती — बागमती उत्तरी बिहार की नदी है जो हिमालय/नेपाल से निकलकर गंगा की उत्तरी सहायक नदी प्रणाली का हिस्सा बनती है।
📜 असली पिछले वर्ष के प्रश्न (BPSC)
- [BPSC 71वीं प्रारंभिक (13 सितंबर 2025), प्रश्न 117] कर्मनाशा नदी का उदगम स्थल है :
(क) कैमूर जिला (ख) वैशाली जिला (ग) पटना जिला (घ) बिक्रम जिला
- ✔ आधिकारिक उत्तर: (क) कैमूर जिला — कर्मनाशा नदी का उद्गम कैमूर की पहाड़ियों (कैमूर जिला) के सरोदाग क्षेत्र से होता है तथा यह बक्सर के चौसा में गंगा में मिल जाती है।
परीक्षा में कैसे आता है
बीपीएससी में दक्षिणी सहायक नदियों से प्रश्न मुख्य रूप से उद्गम स्थल (जैसे कैमूर पहाड़ी, अमरकंटक, पलामू), गंगा में संगम स्थल (मनेर, फतुहा, चौसा, सूर्यगढ़ा) और धार्मिक व ऐतिहासिक महत्व (निरंजना/फल्गू, गयाजी डैम) पर प्रत्यक्ष और सुमेलित करने वाले प्रारूप में बार-बार पूछे जाते हैं।
इनमें भ्रम न करें
- ✘ पुनपुन और फल्गू का संगम भ्रम: फल्गू नदी सीधे गंगा में मुख्य धारा के रूप में न मिलकर टाल क्षेत्र में विलीन होती है या पुनपुन/हरोहर में मिलती है, जबकि पुनपुन प्रत्यक्ष रूप से फतुहा में गंगा में मिलती है।
- ✘ अजय नदी का अपवाह: अजय नदी जमुई (बिहार) से निकलती जरूर है, पर यह बिहार में गंगा से नहीं मिलती बल्कि झारखंड होते हुए पश्चिम बंगाल में भागीरथी नदी में मिलती है।
- ✘ सोन और पुनपुन का गंगा में मिलन स्थल: सोन नदी मनेर (दानापुर/पटना) के पास मिलती है जबकि पुनपुन नदी फतुहा (पटना) में मिलती है।
💡 ट्रिक: 'कर्म से चौसा, पुन से फतुहा, सोन से मनेर' (कर्मनाशा-चौसा, पुनपुन-फतुहा, सोन-मनेर संगम स्थल)
कोसी : 'बिहार का शोक', बाढ़ एवं तटबंध
कोसी नदी अपने प्रचंड जलप्रवाह, भारी गाद जमाव और निरंतर मार्ग परिवर्तन के कारण 'बिहार का शोक' (Sorrow of Bihar) कहलाती है। यह नदी हिमालय के सप्तकौशिकी क्षेत्र से भारी मात्रा में अवसाद (सिल्ट) लेकर आती है, जिससे इसका तल उथला हो जाता है और जलधारा नए रास्ते खोजने लगती है। पिछले 200 से 250 वर्षों में कोसी नदी पूर्व से पश्चिम की ओर लगभग 150 किलोमीटर खिसक चुकी है। बिहार का लगभग 73.06 प्रतिशत भौगोलिक क्षेत्र बाढ़ प्रवण है, जिसमें उत्तर बिहार सर्वाधिक संवेदनशील है। 18 अगस्त 2008 को नेपाल के कुसहा में तटबंध टूटने से आई भीषण बाढ़ इसका सबसे भयानक ऐतिहासिक उदाहरण है। बाढ़ नियंत्रण के लिए नदी के दोनों किनारों पर तटबंध बनाए गए हैं, किंतु अत्यधिक तलछटीकरण के कारण तटबंधों के बीच नदी का जलस्तर आसपास की भूमि से ऊंचा हो गया है।
मुख्य तथ्य
- कोसी नदी को अपने अनियंत्रित मार्ग परिवर्तन और विनाशकारी बाढ़ के कारण 'बिहार का शोक' कहा जाता है।
- बिहार राज्य का कुल 68.80 लाख हेक्टेयर (लगभग 73.06%) भौगोलिक क्षेत्र बाढ़ प्रवण श्रेणी में आता है।
- कोसी नदी पिछले 200 से 250 वर्षों में पूर्व से पश्चिम की ओर लगभग 150 किलोमीटर स्थानांतरित हो चुकी है।
- 18 अगस्त 2008 को नेपाल के कुसहा में पूर्वी कोसी तटबंध टूटने से उत्तर बिहार में प्रलयंकारी कुसहा त्रासदी हुई थी।
- कोसी नदी गंगा में कटिहार जिले के कुर्सेला के निकट विलीन होती है।
- उत्तर बिहार के 28 जिले बाढ़ से प्रभावित होते हैं, जिनमें सहरसा, सुपौल, मधेपुरा, खगड़िया और अररिया कोसी बाढ़ क्षेत्र में प्रमुख हैं।
- कोसी नदी द्वारा लाई गई भारी गाद (अवसाद) का जमाव इसके बार-बार मार्ग बदलने का मुख्य कारण है।
- कोसी बेसिन में बाढ़ के स्थायी समाधान हेतु भारत और नेपाल के मध्य वराहक्षेत्र में एक उच्च बांध (High Dam) प्रस्तावित है।
- तटबंध निर्माण के बावजूद नदी तल के निरंतर ऊपर उठने की घटना को एग्रिडेशन (Aggradation) कहा जाता है।
- बिहार में सर्वाधिक बाढ़ प्रभावित क्षेत्र उत्तर-पूर्वी तथा उत्तर-मध्य बिहार का मैदानी भाग है।
तालिका
- तथ्य / आयाम: उपनाम · विवरण: बिहार का शोक (Sorrow of Bihar) · प्रभावित प्रमुख जिले: सुपौल, मधेपुरा, सहरसा, खगड़िया
- तथ्य / आयाम: मार्ग परिवर्तन विस्तार · विवरण: लगभग 150 किमी (पूर्व से पश्चिम की ओर) · प्रभावित प्रमुख जिले: पूर्णिया से सहरसा/दरभंगा सीमा तक
- तथ्य / आयाम: कुल बाढ़ प्रवण क्षेत्र · विवरण: 68.80 लाख हेक्टेयर (लगभग 73.06%) · प्रभावित प्रमुख जिले: उत्तर बिहार के मैदानी जिले
- तथ्य / आयाम: प्रमुख तटबंध विफलता · विवरण: 18 अगस्त 2008 (कुसहा breach) · प्रभावित प्रमुख जिले: सुपौल, मधेपुरा, सहरसा, अररिया, पूर्णिया
- तथ्य / आयाम: गंगा से संगम स्थल · विवरण: कुर्सेला · प्रभावित प्रमुख जिले: कटिहार
अभ्यास प्रश्न (हल सहित)
- प्रश्न 12: निम्नलिखित में से किस नदी को अपनी विनाशकारी बाढ़ और बार-बार मार्ग बदलने के कारण 'बिहार का शोक' कहा जाता है?
(क) गंडक (ख) बागमती (ग) कोसी (घ) महानंदा
- ✔ उत्तर: (ग) कोसी — कोसी नदी को अनियंत्रित जलप्रवाह तथा मार्ग परिवर्तन के कारण 'बिहार का शोक' कहा जाता है।
- प्रश्न 13: बिहार का लगभग कितना प्रतिशत भौगोलिक क्षेत्र बाढ़ प्रवण (Flood-Prone) है?
(क) 55.20% (ख) 68.80% (ग) 73.06% (घ) 81.40%
- ✔ उत्तर: (ग) 73.06% — बिहार का कुल 68.80 लाख हेक्टेयर क्षेत्र जो कि लगभग 73.06% है, बाढ़ प्रवण श्रेणी में आता है।
- प्रश्न 14: अगस्त 2008 में कोसी नदी की कुसहा त्रासदी किस स्थान पर तटबंध टूटने से घटित हुई थी?
(क) भीमनगर (नेपाल) (ख) कुसहा (नेपाल) (ग) बीरपुर (बिहार) (घ) कुर्सेला (कटिहार)
- ✔ उत्तर: (ख) कुसहा (नेपाल) — 18 अगस्त 2008 को नेपाल स्थित कुसहा में पूर्वी कोसी तटबंध टूटने से भीषण बाढ़ आई थी।
- प्रश्न 15: कोसी नदी के लगातार मार्ग परिवर्तन (Course Shifting) का मुख्य भू-आकृतिक कारण क्या है?
(क) अत्यधिक जल की कमी (ख) हिमालयी क्षेत्र से भारी मात्रा में गाद (सिल्ट) का निक्षेपण (ग) चट्टानी धरातल (घ) घाघरा नदी का मिलन
- ✔ उत्तर: (ख) हिमालयी क्षेत्र से भारी मात्रा में गाद (सिल्ट) का निक्षेपण — कोसी द्वारा भारी मात्रा में लाए गए अवसाद नदी तल में जमा हो जाते हैं, जिससे धारा विचलित होकर मार्ग बदलती है।
- प्रश्न 16: कोसी नदी गंगा नदी में किस स्थान के निकट मिलती है?
(क) मनिहारी (ख) कुर्सेला (ग) फतुहा (घ) दीघवारा
- ✔ उत्तर: (ख) कुर्सेला — कोसी नदी कटिहार जिले के कुर्सेला के पास गंगा नदी में मिल जाती है।
परीक्षा में कैसे आता है
BPSC प्रीलिम्स में कोसी नदी के उपनाम ('बिहार का शोक'), मार्ग परिवर्तन की दिशा और दूरी (पूर्व से पश्चिम 150 किमी), बाढ़ प्रवण क्षेत्रफल (73.06% या 68.80 लाख हेक्टेयर) और कुसहा तटबंध विफलता (2008) से संबंधित सीधे तथ्यात्मक प्रश्न पूछे जाते हैं।
इनमें भ्रम न करें
- ✘ विद्यार्थी बाढ़ प्रवण क्षेत्रफल (68.80 लाख हेक्टेयर) और प्रतिशत (73.06%) में भ्रमित हो जाते हैं; 68.80 हेक्टेयर में संख्या है जबकि प्रतिशत 73.06% है।
- ✘ कोसी के गंगा में संगम स्थल को लेकर भ्रम: कोसी कुर्सेला (कटिहार) में मिलती है, जबकि महानंदा मनिहारी (कटिहार) के निकट गंगा में मिलती है।
- ✘ मार्ग परिवर्तन की दिशा: कोसी नदी समय के साथ पूर्व से पश्चिम की ओर खिसकी है, पश्चिम से पूर्व नहीं।
💡 ट्रिक: 'कोसी पू-प 150' = कोसी पूर्व से पश्चिम की ओर 150 किमी खिसकी और 'शोक' बनी।
बिहार की नदी-घाटी परियोजनाएँ (कोसी, गंडक, सोन, दुर्गावती, कदवन)
बिहार में जल संसाधनों के सही उपयोग, बाढ़ नियंत्रण और कृषि सिंचाई के लिए कई बहुउद्देशीय नदी-घाटी परियोजनाएँ विकसित की गई हैं। सोन नदी घाटी परियोजना बिहार की सबसे पुरानी परियोजना है, जिसकी शुरुआत 1874 में देहरी में एनिकट बनाकर हुई थी और बाद में 1968 में इंद्रपुरी बैराज बनाया गया। कोसी परियोजना 1954 के भारत-नेपाल समझौते के तहत हनुमाननगर (नेपाल) में बैराज बनाकर शुरू की गई, जिससे बाढ़ नियंत्रण और सिंचाई दोनों संभव हुआ। गंडक परियोजना भारत (बिहार व उत्तर प्रदेश) तथा नेपाल की संयुक्त पहल है, जिसके तहत वाल्मीकिनगर में बैराज बनाया गया है। दुर्गावती (कर्मचट) और प्रस्तावित कदवन (सोन उच्च बाँध) जैसी परियोजनाएँ दक्षिण बिहार के सूखाग्रस्त क्षेत्रों में सिंचाई का मुख्य साधन हैं।
मुख्य तथ्य
- सोन नदी घाटी परियोजना बिहार की पहली और सबसे पुरानी सिंचाई परियोजना है, जिसकी स्थापना 1874 में हुई थी।
- सोन नदी पर स्थित इंद्रपुरी बैराज का निर्माण 1968 में रोहतास जिले के इंद्रपुरी नामक स्थान पर किया गया था।
- कोसी परियोजना हेतु भारत और नेपाल के बीच समझौता 25 अप्रैल 1954 को हुआ था (संशोधन 1966 में)।
- कोसी बैराज का निर्माण नेपाल के हनुमाननगर में किया गया है, जो 1963 में बनकर तैयार हुआ।
- कोसी-मेची लिंक परियोजना बिहार की पहली और भारत की दूसरी नदी जोड़ो परियोजना है।
- कोसी-मेची लिंक परियोजना से सीमांचल के 4 जिले (अररिया, पूर्णिया, किशनगंज और कटिहार) लाभान्वित होंगे।
- गंडक परियोजना बिहार, उत्तर प्रदेश और नेपाल की एक संयुक्त परियोजना है, जिसका समझौता 1959 में हुआ था।
- गंडक परियोजना के अंतर्गत वाल्मीकिनगर (पश्चिम चंपारण) में बैराज का निर्माण किया गया है।
- त्रिवेणी नहर का निर्माण गंडक नदी पर वर्ष 1904 में सिंचाई सुविधा हेतु किया गया था।
- दुर्गावती जलाशय परियोजना (कर्मचट बाँध) कैमूर जिले में दुर्गावती नदी पर स्थित है।
- प्रस्तावित कदवन जलाशय परियोजना (सोन उच्च बाँध) सोन नदी पर झारखंड सीमा (गढ़वा/रोहतास) के पास स्थित है।
तालिका
- परियोजना: सोन परियोजना · नदी: सोन · बैराज / बाँध का स्थान: इंद्रपुरी (रोहतास) · लाभान्वित क्षेत्र / राज्य / देश: रोहतास, औरंगाबाद, भोजपुर, बक्सर, पटना
- परियोजना: कोसी परियोजना · नदी: कोसी · बैराज / बाँध का स्थान: हनुमाननगर (नेपाल) · लाभान्वित क्षेत्र / राज्य / देश: सुपौल, सहरसा, मधेपुरा, पूर्णिया, नेपाल
- परियोजना: गंडक परियोजना · नदी: गंडक · बैराज / बाँध का स्थान: वाल्मीकिनगर (पश्चिम चंपारण) · लाभान्वित क्षेत्र / राज्य / देश: प. चंपारण, पू. चंपारण, सारण, गोपालगंज, UP, नेपाल
- परियोजना: दुर्गावती परियोजना · नदी: दुर्गावती · बैराज / बाँध का स्थान: कर्मचट (कैमूर) · लाभान्वित क्षेत्र / राज्य / देश: कैमूर और रोहतास
- परियोजना: कदवन परियोजना · नदी: सोन · बैराज / बाँध का स्थान: कदवन (गढ़वा/रोहतास सीमा) · लाभान्वित क्षेत्र / राज्य / देश: रोहतास, औरंगाबाद, गढ़वा (झारखंड)
अभ्यास प्रश्न (हल सहित)
- प्रश्न 17: बिहार की सबसे पुरानी नदी-घाटी परियोजना निम्नलिखित में से कौन-सी है?
(क) कोसी परियोजना (ख) गंडक परियोजना (ग) सोन नदी-घाटी परियोजना (घ) दुर्गावती परियोजना
- ✔ उत्तर: (ग) सोन नदी-घाटी परियोजना — सोन नदी-घाटी परियोजना का निर्माण 1874 में हुआ था, जो बिहार की सबसे पुरानी नहर एवं सिंचाई परियोजना है।
- प्रश्न 18: गंडक नदी परियोजना से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. यह बिहार, उत्तर प्रदेश और नेपाल की संयुक्त परियोजना है।
2. इस परियोजना के तहत वाल्मीकिनगर में बैराज बनाया गया है।
उपरोक्त में से कौन-सा/से कथन सत्य है/हैं?
(क) केवल 1 (ख) केवल 2 (ग) 1 और 2 दोनों (घ) न तो 1 और न ही 2
- ✔ उत्तर: (ग) 1 और 2 दोनों — गंडक परियोजना बिहार, यूपी और नेपाल की संयुक्त पहल है और इसका बैराज वाल्मीकिनगर (पश्चिम चंपारण) में स्थित है।
- प्रश्न 19: सोन नदी पर स्थित 'इंद्रपुरी बैराज' बिहार के किस जिले में स्थित है?
(क) औरंगाबाद (ख) रोहतास (ग) भोजपुर (घ) बक्सर
- ✔ उत्तर: (ख) रोहतास — इंद्रपुरी बैराज रोहतास जिले के इंद्रपुरी में सोन नदी पर वर्ष 1968 में बनाया गया था।
- प्रश्न 20: वर्ष 1904 में गंडक नदी से निकाली गई प्रमुख नहर कौन-सी है?
(क) सोन नहर (ख) त्रिवेणी नहर (ग) ढाका नहर (घ) तेऊर नहर
- ✔ उत्तर: (ख) त्रिवेणी नहर — त्रिवेणी नहर का निर्माण 1904 में पश्चिम चंपारण में गंडक नदी पर सिंचाई के लिए किया गया था।
- प्रश्न 21: दुर्गावती जलाशय परियोजना (कर्मचट बाँध) से मुख्य रूप से बिहार के कौन-से जिले लाभान्वित होते हैं?
(क) पटना और नालंदा (ख) कैमूर और रोहतास (ग) मुंगेर और जमुई (घ) सहरसा और मधेपुरा
- ✔ उत्तर: (ख) कैमूर और रोहतास — दुर्गावती जलाशय परियोजना कैमूर जिले में स्थित है और यह कैमूर तथा रोहतास जिलों को सिंचाई का पानी प्रदान करती है।
📜 असली पिछले वर्ष के प्रश्न (BPSC)
- [BPSC 71वीं प्रारंभिक (13 सितंबर 2025), प्रश्न 12] कोसी-मेची लिंक परियोजना से बिहार के कौन-कौन से जिलों को लाभ होगा?
(क) पटना, नालंदा, गया, सिवान (ख) दरभंगा, मुजफ्फरपुर, सीतामढ़ी, बेगूसराय (ग) अररिया, पूर्णिया, किशनगंज, कटिहार (घ) उपरोक्त में से एक से अधिक
- ✔ आधिकारिक उत्तर: (ग) अररिया, पूर्णिया, किशनगंज, कटिहार — कोसी-मेची नदी लिंक परियोजना बिहार की पहली नदी जोड़ो परियोजना है, जिससे सीमांचल के 4 जिलों अररिया, पूर्णिया, किशनगंज और कटिहार को सिंचाई लाभ मिलेगा।
परीक्षा में कैसे आता है
BPSC की प्रारंभिक परीक्षा में नदी-घाटी परियोजनाओं से संबंधित बैराज का स्थान, निर्माण वर्ष, संयुक्त राज्य/देश और लाभान्वित जिलों पर लगातार सीधे तथा बहु-कथनीय प्रश्न पूछे जाते हैं।
इनमें भ्रम न करें
- ✘ देहरी एनिकट (1874) और इंद्रपुरी बैराज (1968) दोनों सोन नदी पर हैं, लेकिन देहरी पुराना एनिकट है जबकि इंद्रपुरी नया बैराज है।
- ✘ त्रिवेणी नहर (1904) और गंडक परियोजना (1959) दोनों गंडक नदी से संबंधित हैं, लेकिन दोनों का निर्माण काल अलग-अलग है।
- ✘ कोसी बैराज हनुमाननगर में है जो नेपाल सीमा के अंदर स्थित है, न कि बिहार के किसी जिले में।
💡 सोन का देहरी-इंद्रपुरी, गंडक का वाल्मीकि, कोसी का हनुमान!
बिहार के जलप्रपात और गर्म जलकुंड
बिहार के दक्षिणी सीमावर्ती जिलों में विंध्यन और धारवाड़ चट्टानों की उपस्थिति के कारण कई मनोरम जलप्रपात और गर्म जलकुंड पाए जाते हैं। जलप्रपात मुख्य रूप से रोहतास, कैमूर और नवादा के पहाड़ी क्षेत्रों में स्थित हैं, जहाँ नदियाँ अचानक ढाल मिलने पर नीचे गिरती हैं। गर्म जलकुंडों का मुख्य केंद्र राजगीर (नालंदा) और मुंगेर है, जहाँ भू-गर्भीय हलचलों और गंधक की उपस्थिति के कारण पानी का तापमान अधिक रहता है। राजगीर का ब्रह्मकुंड बिहार का सबसे गर्म जलकुंड माना जाता है, जिसका धार्मिक महत्व भी है। नवादा का ककोलत जलप्रपात अपनी शीतल जलधारा के लिए पूरे उत्तर भारत में प्रसिद्ध है। ये स्थल न केवल पर्यटन के केंद्र हैं, बल्कि इनके जल में औषधीय गुण भी पाए जाते हैं जो चर्म रोगों के उपचार में सहायक होते हैं।
मुख्य तथ्य
- ककोलत जलप्रपात नवादा जिले में स्थित है और इसकी ऊँचाई लगभग 150 से 160 फीट है।
- ब्रह्मकुंड राजगीर का सबसे गर्म जलकुंड है, जिसका तापमान लगभग 87 डिग्री सेल्सियस रहता है।
- मुंगेर जिले का सबसे गर्म जलकुंड लक्ष्मण कुंड है।
- तेलहर कुंड जलप्रपात कैमूर जिले में स्थित है और यह अपनी सुंदरता के लिए प्रसिद्ध है।
- धुआँ कुंड और मंझर कुंड जलप्रपात सासाराम (रोहतास) में काओ नदी पर स्थित हैं।
- राजगीर के प्रमुख जलकुंडों में सप्तधारा, सूर्यकुंड, मखदूम कुंड और नानक कुंड शामिल हैं।
- मुंगेर में सीताकुंड, ऋषिकुंड, भीमबांध, भरारी कुंड और पंचतर कुंड स्थित हैं।
- गया जिले में 'अग्निकुंड' नामक एक प्रसिद्ध गर्म जलकुंड स्थित है।
- ककोलत जलप्रपात को अक्सर 'बिहार का नियाग्रा' कहा जाता है।
- जीआर खंड जलप्रपात भोजपुर जिले में फुलवरिया नदी पर स्थित है।
तालिका
- नाम: ककोलत · स्थान (जिला): नवादा · प्रकार: जलप्रपात
- नाम: ब्रह्मकुंड · स्थान (जिला): राजगीर (नालंदा) · प्रकार: गर्म जलकुंड
- नाम: सीताकुंड · स्थान (जिला): मुंगेर · प्रकार: गर्म जलकुंड
- नाम: तेलहर कुंड · स्थान (जिला): कैमूर · प्रकार: जलप्रपात
- नाम: धुआँ कुंड · स्थान (जिला): रोहतास (सासाराम) · प्रकार: जलप्रपात
- नाम: लक्ष्मण कुंड · स्थान (जिला): मुंगेर · प्रकार: गर्म जलकुंड
- नाम: अग्निकुंड · स्थान (जिला): गया · प्रकार: गर्म जलकुंड
- नाम: मंझर कुंड · स्थान (जिला): रोहतास · प्रकार: जलप्रपात
अभ्यास प्रश्न (हल सहित)
- प्रश्न 22: बिहार का सबसे प्रसिद्ध जलप्रपात 'ककोलत' किस जिले में स्थित है?
(क) रोहतास (ख) नवादा (ग) कैमूर (घ) नालंदा
- ✔ उत्तर: (ख) नवादा — ककोलत जलप्रपात नवादा जिले में स्थित है और यह ठंडे पानी के लिए प्रसिद्ध है।
- प्रश्न 23: राजगीर स्थित 'ब्रह्मकुंड' का औसत तापमान कितना रहता है?
(क) 50°C (ख) 100°C (ग) 87°C (घ) 72°C
- ✔ उत्तर: (ग) 87°C — ब्रह्मकुंड राजगीर का सबसे गर्म जलकुंड है जिसका तापमान 87 डिग्री सेल्सियस के करीब होता है।
- प्रश्न 24: निम्नलिखित में से कौन सा गर्म जलकुंड मुंगेर जिले में स्थित नहीं है?
(क) सीताकुंड (ख) लक्ष्मण कुंड (ग) ऋषिकुंड (घ) सप्तधारा
- ✔ उत्तर: (घ) सप्तधारा — सप्तधारा जलकुंड राजगीर (नालंदा) में स्थित है, जबकि अन्य तीनों मुंगेर में हैं।
- प्रश्न 25: तेलहर कुंड जलप्रपात बिहार के किस जिले में स्थित है?
(क) कैमूर (ख) भोजपुर (ग) सासाराम (घ) नवादा
- ✔ उत्तर: (क) कैमूर — तेलहर कुंड कैमूर जिले के भगवानपुर प्रखंड में स्थित एक प्रसिद्ध जलप्रपात है।
- प्रश्न 26: सूची-I को सूची-II से सुमेलित कीजिए:
(A) धुआँ कुंड - (1) नवादा
(B) ककोलत - (2) सासाराम
(C) अग्निकुंड - (3) मुंगेर
(D) सीताकुंड - (4) गया
(क) A-2, B-1, C-4, D-3 (ख) A-1, B-2, C-3, D-4 (ग) A-2, B-1, C-3, D-4 (घ) A-4, B-3, C-2, D-1
- ✔ उत्तर: (क) A-2, B-1, C-4, D-3 — धुआँ कुंड सासाराम में, ककोलत नवादा में, अग्निकुंड गया में और सीताकुंड मुंगेर में स्थित है।
परीक्षा में कैसे आता है
बीपीएससी में इस उप-विषय से अक्सर जलप्रपात और जलकुंडों की जिला-वार अवस्थिति (Location) पूछी जाती है। 'सबसे गर्म जलकुंड' और 'ककोलत की स्थिति' पर प्रश्न बार-बार दोहराए जाते हैं।
इनमें भ्रम न करें
- ✘ सीताकुंड मुंगेर में है, जबकि रामकुंड और लक्ष्मण कुंड भी मुंगेर में ही हैं, लेकिन सूर्यकुंड राजगीर में है।
- ✘ धुआँ कुंड और मंझर कुंड दोनों सासाराम (रोहतास) में हैं, इन्हें अलग-अलग जिलों में समझने की गलती न करें।
💡 मुंगेर के कुंड याद रखने की ट्रिक: 'सीता-लक्ष्मण और ऋषि भीम के साथ मुंगेर गए' (सीताकुंड, लक्ष्मणकुंड, ऋषिकुंड, भीमबांध)।
एक नज़र में (Revision)
- गंगा नदी बिहार में बक्सर के चौसा के पास प्रवेश करती है और इसकी कुल लंबाई बिहार में 445 किमी है।
- घाघरा, गंडक, बूढ़ी गंडक, बागमती, कोसी और महानंदा बिहार की प्रमुख उत्तरवर्ती नदियाँ हैं।
- गंडक नदी का उद्गम नेपाल के न्युबिन हिमाल ग्लेशियर से होता है और यह सोनपुर में गंगा से मिलती है।
- कोसी नदी को अपनी विनाशकारी बाढ़ और मार्ग बदलने की प्रवृत्ति के कारण 'बिहार का शोक' कहा जाता है।
- सोन, पुनपुन, किऊल, फल्गु और कर्मनाशा बिहार की प्रमुख दक्षिणवर्ती नदियाँ हैं।
- सोन नदी अमरकंटक (मप्र) से निकलती है और दानापुर के पास मनेर में गंगा में मिलती है।
- इंद्रपुरी बैराज सोन नदी पर स्थित है, जो बिहार की सबसे पुरानी नहर प्रणाली का हिस्सा है।
- कोसी परियोजना भारत और नेपाल की संयुक्त परियोजना है, जिसका समझौता 1954 में हुआ था।
- गंडक परियोजना के तहत वाल्मीकि नगर में बैराज बनाया गया है, जिससे बिहार और उत्तर प्रदेश लाभान्वित होते हैं।
- फल्गु नदी के किनारे विष्णुपद मंदिर स्थित है और यहाँ पितृपक्ष मेला लगता है।
- ककोलत जलप्रपात नवादा जिले में स्थित है, जिसे बिहार का सबसे प्रसिद्ध जलप्रपात माना जाता है।
- राजगीर में ब्रह्मकुंड सबसे गर्म जलकुंड है, जबकि मुंगेर में सीताकुंड प्रसिद्ध है।
अपने आप को जाँचिए — 10 प्रश्न
1. गंगा नदी बिहार के किस जिले में प्रवेश करती है?
- (क) भोजपुर
- (ख) बक्सर
- (ग) सारण
- (घ) रोहतास
उत्तर देखें
उत्तर: (ख) बक्सर
गंगा नदी बिहार में बक्सर जिले के चौसा के पास प्रवेश करती है।
2. निम्नलिखित में से कौन सी नदी नेपाल के न्युबिन हिमाल ग्लेशियर से निकलती है?
- (क) कोसी
- (ख) गंडक
- (ग) बागमती
- (घ) कमला
उत्तर देखें
उत्तर: (ख) गंडक
गंडक नदी का उद्गम नेपाल हिमालय के न्युबिन हिमाल ग्लेशियर से होता है।
3. कोसी नदी के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें: 1. इसे 'बिहार का शोक' कहा जाता है। 2. यह कुरसेला (कटिहार) के पास गंगा में मिलती है।
- (क) केवल 1 सही है
- (ख) केवल 2 सही है
- (ग) 1 और 2 दोनों सही हैं
- (घ) न तो 1 और न ही 2 सही है
उत्तर देखें
उत्तर: (ग) 1 और 2 दोनों सही हैं
कोसी को अपनी विनाशकारी बाढ़ के कारण बिहार का शोक कहा जाता है और यह कुरसेला में गंगा से मिलती है।
4. सोन नदी बिहार में गंगा से कहाँ मिलती है?
- (क) फतुहा
- (ख) मनेर
- (ग) मुंगेर
- (घ) हाजीपुर
उत्तर देखें
उत्तर: (ख) मनेर
सोन नदी पटना जिले के मनेर (दानापुर के पास) में गंगा में मिलती है।
5. बिहार का प्रसिद्ध 'इंद्रपुरी बैराज' किस नदी पर स्थित है?
- (क) गंडक
- (ख) कोसी
- (ग) सोन
- (घ) पुनपुन
उत्तर देखें
उत्तर: (ग) सोन
इंद्रपुरी बैराज रोहतास जिले में सोन नदी पर स्थित है।
6. बिहार की कौन सी नदी 'अपवित्र नदी' मानी जाती है?
- (क) फल्गु
- (ख) कर्मनाशा
- (ग) किऊल
- (घ) सकरी
उत्तर देखें
उत्तर: (ख) कर्मनाशा
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कर्मनाशा नदी को अपवित्र माना जाता है।
7. ककोलत जलप्रपात बिहार के किस जिले में स्थित है?
- (क) कैमूर
- (ख) रोहतास
- (ग) नवादा
- (घ) जमुई
उत्तर देखें
उत्तर: (ग) नवादा
ककोलत जलप्रपात नवादा जिले में स्थित एक प्रसिद्ध पर्यटन स्थल है।
8. मुंगेर में स्थित प्रसिद्ध गर्म जलकुंड कौन सा है?
- (क) ब्रह्मकुंड
- (ख) सीताकुंड
- (ग) सूर्यकुंड
- (घ) नानककुंड
उत्तर देखें
उत्तर: (ख) सीताकुंड
सीताकुंड मुंगेर में स्थित है, जबकि ब्रह्मकुंड राजगीर में स्थित है।
9. बिहार की सबसे लंबी नदी जो पूरी तरह से बिहार के भीतर ही हिमालयी क्षेत्र (सोमेश्वर श्रेणी) से निकलती है?
- (क) बागमती
- (ख) बूढ़ी गंडक
- (ग) कमला
- (घ) महानंदा
उत्तर देखें
उत्तर: (ख) बूढ़ी गंडक
बूढ़ी गंडक पश्चिम चंपारण की सोमेश्वर श्रेणियों से निकलती है और बिहार में बहने वाली सबसे लंबी उत्तरवर्ती सहायक नदी है।
10. सूची-I (नदी) को सूची-II (उद्गम स्थल) से सुमेलित करें: A. सोन - 1. छोटानागपुर पठार, B. पुनपुन - 2. अमरकंटक, C. घाघरा - 3. नम्पा श्रेणी
- (क) A-2, B-1, C-3
- (ख) A-1, B-2, C-3
- (ग) A-3, B-1, C-2
- (घ) A-2, B-3, C-1
उत्तर देखें
उत्तर: (क) A-2, B-1, C-3
सोन अमरकंटक से, पुनपुन पलामू/छोटानागपुर से और घाघरा नम्पा श्रेणी (नेपाल) से निकलती है।
English version — Rivers of Bihar, Floods and River Valley Projects
This chapter is crucial for the Geography section of BPSC Prelims and GS Paper-2 of Mains. Questions regarding Bihar's drainage system, irrigation projects, and flood management are frequently asked from this topic.
Ganga in Bihar and its Northern Tributaries
The Ganga river forms the backbone of Bihar's drainage system, dividing the state into two unequal halves: North Bihar and South Bihar. It enters Bihar near Chausa in Buxar district and flows out into West Bengal through Katihar. The northern tributaries originate primarily from the Himalayas, making them perennial and heavy silt carriers. Major northern tributaries include the Ghaghara, Gandak, Burhi Gandak, Bagmati, Kosi, and Mahananda, all joining the Ganga on its left bank. Due to heavy monsoonal discharge and frequent course shifting, the plains of North Bihar face severe flood hazards every year.
Key facts
- The Ganga river flows for 445 km in Bihar, traversing through 12 districts of the state.
- The Ganga has the longest stretch within Patna district (approximately 99 km).
- Ghaghara (Saryu) originates from the Mapchachungo glacier in Tibet and merges with Ganga near Chhapra (Saran).
- Gandak river originates in the Nepal Himalayas (Dhaulagiri region) and joins the Ganga near Hajipur (Sonepur).
- Burhi Gandak originates from Chautarwa Chaur in Someshwar Hills of West Champaran and joins the Ganga near Khagaria.
- Burhi Gandak is regarded as the river with the fastest water flow in North Bihar.
- Bagmati river originates from the Shivapuri range in Nepal and enters Bihar at Shorwatiya in Sitamarhi district.
- Kosi river originates from Gosainthan (Saptakoshi) in Tibet/Nepal and meets the Ganga near Kursela in Katihar.
- Mahananda river originates from Mahaldiram hills in Darjeeling and merges into the Ganga after flowing through Kishanganj, Purnia, and Katihar.
- Mahananda is the easternmost northern tributary of the Ganga in North Bihar plains.
- Gandak river is known as Shaligrami in Nepal and Narayani in the plains.
- River Ganga enters Bihar at Chausa (Buxar) and exits near Katihar district.
Table
- नदी का नाम: गंगा · उद्गम स्थल: गंगोत्री हिमनद (उत्तराखंड) · गंगा में संगम स्थल: बंगाल की खाड़ी (अंततः) · बिहार में विशेष पहचान: बिहार में 445 किमी, 12 जिलों से प्रवाह
- नदी का नाम: घाघरा (सरयू) · उद्गम स्थल: मापचाचुंगो (तिब्बत) · गंगा में संगम स्थल: छपरा (सारण) · बिहार में विशेष पहचान: उत्तर प्रदेश-बिहार सीमा का निर्धारण
- नदी का नाम: गंडक (नारायणी) · उद्गम स्थल: धौलागिरि/मानंगभोट (नेपाल) · गंगा में संगम स्थल: सोनपुर/हाजीपुर (वैशाली) · बिहार में विशेष पहचान: त्रिवेणी नहर इसी पर स्थित है
- नदी का नाम: बूढ़ी गंडक · उद्गम स्थल: सोमेश्वर श्रेणी (चौतरवा चौर) · गंगा में संगम स्थल: खगड़िया · बिहार में विशेष पहचान: उत्तर बिहार की सबसे तीव्र प्रवाह वाली नदी
- नदी का नाम: बागमती · उद्गम स्थल: शिवपुरी श्रेणी (नेपाल) · गंगा में संगम स्थल: बदलाघाट (कोसी/करेह में) · बिहार में विशेष पहचान: नेपाल की पवित्र नदी, सीतामढ़ी से प्रवेश
- नदी का नाम: कोसी · उद्गम स्थल: गोसाईंस्थान/सप्तकोशिकी (तिब्बत-नेपाल) · गंगा में संगम स्थल: कुर्सेला (कटिहार) · बिहार में विशेष पहचान: बिहार का शोक, तीव्र मार्ग परिवर्तन
- नदी का नाम: महानंदा · उद्गम स्थल: महालधिराम पहाड़ी (दार्जिलिंग) · गंगा में संगम स्थल: कटिहार/नवाबगंज (प. बंगाल सीमा) · बिहार में विशेष पहचान: उत्तर बिहार के मैदान की सबसे पूर्वी नदी
Practice questions (solved)
- Q 1: गंगा नदी बिहार के कितने जिलों से होकर प्रवाहित होती है?
(क) 10 (ख) 11 (ग) 12 (घ) 14
- ✔ Answer: (ग) 12 — गंगा नदी बिहार के 12 जिलों (बक्सर, भोजपुर, सारण, पटना, वैशाली, समस्तीपुर, बेगूसराय, लखीसराय, मुंगेर, खगड़िया, भागलपुर, कटिहार) से होकर गुजरती है।
- Q 2: निम्नलिखित में से कौन-सी नदी उत्तर बिहार में गंगा की सबसे पूर्वी सहायक नदी है?
(क) कोसी (ख) महानंदा (ग) बूढ़ी गंडक (घ) बागमती
- ✔ Answer: (ख) महानंदा — महानंदा नदी दार्जिलिंग पहाड़ियों से निकलकर बिहार के किशनगंज और कटिहार क्षेत्र में बहती हुई सबसे पूर्व में गंगा में मिलती है।
- Q 3: बूढ़ी गंडक नदी का उद्गम स्थल निम्नलिखित में से कौन-सा है?
(क) सोमेश्वर पहाड़ी (चौतरवा चौर) (ख) गोसाईंस्थान (ग) मापचाचुंगो हिमनद (घ) महालधिराम पर्वत
- ✔ Answer: (क) सोमेश्वर पहाड़ी (चौतरवा चौर) — बूढ़ी गंडक नदी पश्चिमी चंपारण जिले के सोमेश्वर पहाड़ी के चौतरवा चौर से निकलती है।
- Q 4: निम्नलिखित युग्मों (नदी और गंगा में संगम स्थल) पर विचार कीजिए:
1. घाघरा - छपरा
2. गंडक - सोनपुर (हाजीपुर)
3. कोसी - कुर्सेला (कटिहार)
उपर्युक्त में से कौन-से सही सुमेलित हैं?
(क) केवल 1 और 2 (ख) केवल 2 और 3 (ग) केवल 1 और 3 (घ) 1, 2 और 3
- ✔ Answer: (घ) 1, 2 और 3 — घाघरा छपरा के पास, गंडक पहलेजा/सोनपुर के पास और कोसी कुर्सेला (कटिहार) के पास गंगा में मिलती है।
- Q 5: गंगा नदी की बिहार में कुल लंबाई कितनी है?
(क) 405 किमी (ख) 445 किमी (ग) 425 किमी (घ) 500 किमी
- ✔ Answer: (ख) 445 किमी — गंगा नदी की बिहार राज्य में कुल लंबाई 445 किमी है, जिसमें सर्वाधिक लंबाई (99 किमी) पटना जिले में है।
📜 Real previous-year questions (BPSC)
- [BPSC 70वीं प्रारंभिक (13 दिसंबर 2024), प्रश्न 126] निम्नलिखित अपवाह प्रणालियों में से किससे बिहार की भूमि अपवाहित होती है ?
(क) महानदी (ख) घाघरा (ग) नर्मदा (घ) यमुना
- ✔ Official answer: (ख) घाघरा
How it is asked
BPSC frequently tests origins of North Bihar rivers, their confluence points with Ganga, Ganga's district count (12 districts, max length in Patna), and their west-to-east geographic order.
Do not confuse
- ✘ गंडक और बूढ़ी गंडक में अंतर: गंडक का उद्गम नेपाल हिमालय में है जबकि बूढ़ी गंडक विशुद्ध रूप से बिहार के सोमेश्वर पहाड़ी (चौतरवा चौर) से निकलती है।
- ✘ गंगा में नदियों के मिलने का पश्चिम से पूर्व क्रम: घाघरा -> गंडक -> बूढ़ी गंडक -> बागमती -> कोसी -> महानंदा (महानंदा सबसे पूर्व में है)।
💡 उत्तर बिहार की नदियों का पश्चिम से पूर्व क्रम याद रखें: 'घा-गं-बू-बा-को-म' (घाघरा, गंडक, बूढ़ी गंडक, बागमती, कोसी, महानंदा)।
Southern Tributaries of Ganga (Son, Punpun, Kiul, Falgu, Karmanasa)
The southern tributaries of the Ganga river primarily originate from the Peninsular plateau, Chotanagpur plateau, and Kaimur hills. These rivers are rain-fed and non-perennial in nature, often drying up during peak summers and experiencing flash floods during monsoons. The Son river is the longest and most significant southern tributary, originating from Amarkantak and merging into the Ganga near Patna. Rivers like Punpun, Falgu, Karmanasa, and Kiul are critical for agriculture, religious rituals (Pind Daan), and the physiography of South Bihar. Furthermore, rivers like the Karmanasa and Son also form natural political boundaries between Bihar and Uttar Pradesh.
Key facts
- The Son river originates from the Amarkantak hills of the Maikal range in Madhya Pradesh.
- The Son river enters Bihar through Rohtas district and joins the Ganga near Maner (Patna).
- North Koel, Rihand, Gopad, and Kanhar are the major tributaries of the Son river.
- The Punpun river originates from the Chotanagpur plateau region in Palamu district, Jharkhand.
- The Punpun river joins the Ganga on its right bank at Fatuha in Patna district.
- The Falgu river is formed by the confluence of the Lilajan (Niranjana) and Mohana rivers near Bodh Gaya.
- Lord Buddha attained enlightenment on the banks of the Niranjana (now Lilajan/Falgu) river in Bodh Gaya.
- Pind Daan is performed on the banks of the Falgu river in Gaya during Pitrapaksha, and India's largest rubber dam (Gayaji Dam) is built here.
- The Karmanasa river originates from the Kaimur hills (Sarodag) in Kaimur district.
- The Karmanasa river meets the Ganga near Chausa in Buxar district and is traditionally considered inauspicious.
- The Kiul river originates from the Tisri hill in Giridih district, Jharkhand, and enters Bihar through Jamui district.
- The Kiul river meets the Ganga river near Surajgarha in Lakhisarai district.
- The Ajay river originates from Chakai (Batpar) in Jamui district, but joins the Bhagirathi in West Bengal rather than the Ganga in Bihar.
Table
- नदी का नाम: सोन · उद्गम स्थल: अमरकंटक (मैकाल पर्वत, म.प्र.) · गंगा में संगम स्थल: मनेर के निकट (पटना) · मुख्य विशेषता / सहायक नदियाँ: दक्षिण बिहार की सबसे बड़ी नदी; सहायक: उत्तरी कोयल, रिहंद, कन्हार
- नदी का नाम: पुनपुन · उद्गम स्थल: छोटा नागपुर पठार (पलामू, झारखंड) · गंगा में संगम स्थल: फतुहा (पटना) · मुख्य विशेषता / सहायक नदियाँ: पुराणों में 'कीकट' व 'बमागधी'; सहायक: मोरहर, दरधा
- नदी का नाम: फल्गू · उद्गम स्थल: निरंजना व मोहना का संगम (बोधगया) · गंगा में संगम स्थल: टाल क्षेत्र (पुनपुन/हरोहर तंत्र) · मुख्य विशेषता / सहायक नदियाँ: गया में पिंडदान स्थल; देश का सबसे बड़ा रबर डैम (गयाजी डैम)
- नदी का नाम: कर्मनाशा · उद्गम स्थल: कैमूर की पहाड़ियाँ (कैमूर/रोहतास) · गंगा में संगम स्थल: चौसा के निकट (बक्सर) · मुख्य विशेषता / सहायक नदियाँ: धार्मिक रूप से अपवित्र नदी; बिहार-उत्तर प्रदेश की प्राकृतिक सीमा
- नदी का नाम: किऊल · उद्गम स्थल: तिसरी पहाड़ी (गिरिडीह, झारखंड) · गंगा में संगम स्थल: सूर्यगढ़ा के निकट (लखीसराय) · मुख्य विशेषता / सहायक नदियाँ: जमुई, लखीसराय में प्रवाह; सहायक: हरोहर, बड़नार, अंजन
- नदी का नाम: चांदन · उद्गम स्थल: देवघर की पहाड़ियाँ (झारखंड) · गंगा में संगम स्थल: गंगा नदी (भागलपुर के निकट) · मुख्य विशेषता / सहायक नदियाँ: बांका और भागलपुर जिले में अपवाह
Practice questions (solved)
- Q 6: निम्नलिखित में से कौन-सी नदी पटना के समीप 'फतुहा' में गंगा नदी से मिलती है?
(क) सोन (ख) पुनपुन (ग) कर्मनाशा (घ) किऊल
- ✔ Answer: (ख) पुनपुन — पुनपुन नदी पलामू से निकलकर बिहार में बहती हुई पटना के फतुहा में गंगा में समाहित होती है।
- Q 7: कर्मनाशा नदी के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इसका उद्गम कैमूर की पहाड़ियों से होता है।
2. यह चौसा (बक्सर) के निकट गंगा नदी में मिलती है।
3. यह बिहार और उत्तर प्रदेश के मध्य प्राकृतिक सीमा रेखा बनाती है।
उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?
(क) केवल 1 और 2 (ख) केवल 2 और 3 (ग) केवल 1 और 3 (घ) 1, 2 और 3
- ✔ Answer: (घ) 1, 2 और 3 — कर्मनाशा नदी कैमूर से निकलती है, चौसा के पास गंगा में मिलती है और यूपी-बिहार सीमा बनाती है; अतः तीनों कथन सत्य हैं।
- Q 8: गया में बहने वाली प्रसिद्ध फल्गू नदी किन दो धाराओं के मिलने से बनती है?
(क) सोन और कन्हार (ख) निरंजना (लीलाजन) और मोहना (ग) हरोहर और बड़नार (घ) दरधा और मोरहर
- ✔ Answer: (ख) निरंजना (लीलाजन) और मोहना — फल्गू नदी बोधगया के पास लीलाजन (निरंजना) और मोहना नदियों के संगम से निर्मित होती है।
- Q 9: सोन नदी बिहार के किस जिले में सर्वप्रथम प्रवेश करती है?
(क) रोहतास (ख) औरंगाबाद (ग) कैमूर (घ) भोजपुर
- ✔ Answer: (क) रोहतास — मध्य प्रदेश के अमरकंटक से निकलने के बाद सोन नदी बिहार के रोहतास जिले में प्रवेश करती है।
- Q 10: बिहार की कौन-सी नदी अपने अपवित्र/अशुभ जल की लोकमान्यता के कारण 'कर्मनाशा' कहलाती है?
(क) किऊल (ख) अजय (ग) कर्मनाशा (घ) पुनपुन
- ✔ Answer: (ग) कर्मनाशा — कर्मनाशा शब्द का अर्थ ही 'कर्म का नाश करने वाली' माना गया है, जिसे लोकमान्यताओं में अपवित्र माना जाता है।
- Q 11: निम्नलिखित में से कौन-सी नदी बिहार में गंगा की दक्षिणी सहायक नदी नहीं है?
(क) सोन (ख) पुनपुन (ग) बागमती (घ) किऊल
- ✔ Answer: (ग) बागमती — बागमती उत्तरी बिहार की नदी है जो हिमालय/नेपाल से निकलकर गंगा की उत्तरी सहायक नदी प्रणाली का हिस्सा बनती है।
📜 Real previous-year questions (BPSC)
- [BPSC 71वीं प्रारंभिक (13 सितंबर 2025), प्रश्न 117] कर्मनाशा नदी का उदगम स्थल है :
(क) कैमूर जिला (ख) वैशाली जिला (ग) पटना जिला (घ) बिक्रम जिला
- ✔ Official answer: (क) कैमूर जिला — कर्मनाशा नदी का उद्गम कैमूर की पहाड़ियों (कैमूर जिला) के सरोदाग क्षेत्र से होता है तथा यह बक्सर के चौसा में गंगा में मिल जाती है।
How it is asked
BPSC regularly asks questions on southern tributaries covering origin places (Kaimur, Amarkantak, Palamu), confluence points with Ganga (Maner, Fatuha, Chausa, Surajgarha), and religious/historical significance (Falgu/Niranjana, Gayaji Dam) in direct and match-the-column formats.
Do not confuse
- ✘ पुनपुन और फल्गू का संगम भ्रम: फल्गू नदी सीधे गंगा में मुख्य धारा के रूप में न मिलकर टाल क्षेत्र में विलीन होती है या पुनपुन/हरोहर में मिलती है, जबकि पुनपुन प्रत्यक्ष रूप से फतुहा में गंगा में मिलती है।
- ✘ अजय नदी का अपवाह: अजय नदी जमुई (बिहार) से निकलती जरूर है, पर यह बिहार में गंगा से नहीं मिलती बल्कि झारखंड होते हुए पश्चिम बंगाल में भागीरथी नदी में मिलती है।
- ✘ सोन और पुनपुन का गंगा में मिलन स्थल: सोन नदी मनेर (दानापुर/पटना) के पास मिलती है जबकि पुनपुन नदी फतुहा (पटना) में मिलती है।
💡 ट्रिक: 'कर्म से चौसा, पुन से फतुहा, सोन से मनेर' (कर्मनाशा-चौसा, पुनपुन-फतुहा, सोन-मनेर संगम स्थल)
Kosi: 'Sorrow of Bihar', Floods and Embankments
The Kosi River is known as the 'Sorrow of Bihar' due to its massive discharge, heavy silt deposition, and unpredictable course shifting. Originating from the Saptakoshi region in the Himalayas, it brings enormous sediments that choke its riverbed, forcing it to breach banks and carve new channels. Over the last 200 to 250 years, the Kosi has migrated approximately 150 km westward. Around 73.06 percent of Bihar's geographical area is flood-prone, with North Bihar being the most severely impacted. The catastrophic embankment breach at Kusaha in Nepal on 18 August 2008 remains one of the worst flood disasters in Bihar's history. Although extensive embankments were built along both banks to contain floods, heavy siltation has raised the riverbed higher than the surrounding floodplains.
Key facts
- The Kosi River is designated as the 'Sorrow of Bihar' due to its frequent course-shifting and devastating floods.
- A total of 68.80 lakh hectares (approx. 73.06%) of Bihar's geographical area is categorized as flood-prone.
- Over the past 200 to 250 years, the Kosi River has shifted approximately 150 kilometers from east to west.
- On 18 August 2008, the collapse of the Eastern Kosi Embankment at Kusaha in Nepal triggered the catastrophic Kusaha flood disaster.
- The Kosi River merges into the Ganga River near Kursela in Katihar district.
- Out of Bihar's districts, 28 in North Bihar are flood-affected, with Saharsa, Supaul, Madhepura, Khagaria, and Araria being prime Kosi flood zones.
- Heavy silt deposition brought down by the Kosi River is the primary cause of its frequent channel migration.
- A High Dam at Barahkshetra is proposed jointly by India and Nepal as a long-term solution for floods in the Kosi basin.
- The continuous rising of the riverbed despite embankment construction is geologically known as aggradation.
- The most severely flood-affected zones in Bihar are the plains of north-eastern and north-central Bihar.
Table
- तथ्य / आयाम: उपनाम · विवरण: बिहार का शोक (Sorrow of Bihar) · प्रभावित प्रमुख जिले: सुपौल, मधेपुरा, सहरसा, खगड़िया
- तथ्य / आयाम: मार्ग परिवर्तन विस्तार · विवरण: लगभग 150 किमी (पूर्व से पश्चिम की ओर) · प्रभावित प्रमुख जिले: पूर्णिया से सहरसा/दरभंगा सीमा तक
- तथ्य / आयाम: कुल बाढ़ प्रवण क्षेत्र · विवरण: 68.80 लाख हेक्टेयर (लगभग 73.06%) · प्रभावित प्रमुख जिले: उत्तर बिहार के मैदानी जिले
- तथ्य / आयाम: प्रमुख तटबंध विफलता · विवरण: 18 अगस्त 2008 (कुसहा breach) · प्रभावित प्रमुख जिले: सुपौल, मधेपुरा, सहरसा, अररिया, पूर्णिया
- तथ्य / आयाम: गंगा से संगम स्थल · विवरण: कुर्सेला · प्रभावित प्रमुख जिले: कटिहार
Practice questions (solved)
- Q 12: निम्नलिखित में से किस नदी को अपनी विनाशकारी बाढ़ और बार-बार मार्ग बदलने के कारण 'बिहार का शोक' कहा जाता है?
(क) गंडक (ख) बागमती (ग) कोसी (घ) महानंदा
- ✔ Answer: (ग) कोसी — कोसी नदी को अनियंत्रित जलप्रवाह तथा मार्ग परिवर्तन के कारण 'बिहार का शोक' कहा जाता है।
- Q 13: बिहार का लगभग कितना प्रतिशत भौगोलिक क्षेत्र बाढ़ प्रवण (Flood-Prone) है?
(क) 55.20% (ख) 68.80% (ग) 73.06% (घ) 81.40%
- ✔ Answer: (ग) 73.06% — बिहार का कुल 68.80 लाख हेक्टेयर क्षेत्र जो कि लगभग 73.06% है, बाढ़ प्रवण श्रेणी में आता है।
- Q 14: अगस्त 2008 में कोसी नदी की कुसहा त्रासदी किस स्थान पर तटबंध टूटने से घटित हुई थी?
(क) भीमनगर (नेपाल) (ख) कुसहा (नेपाल) (ग) बीरपुर (बिहार) (घ) कुर्सेला (कटिहार)
- ✔ Answer: (ख) कुसहा (नेपाल) — 18 अगस्त 2008 को नेपाल स्थित कुसहा में पूर्वी कोसी तटबंध टूटने से भीषण बाढ़ आई थी।
- Q 15: कोसी नदी के लगातार मार्ग परिवर्तन (Course Shifting) का मुख्य भू-आकृतिक कारण क्या है?
(क) अत्यधिक जल की कमी (ख) हिमालयी क्षेत्र से भारी मात्रा में गाद (सिल्ट) का निक्षेपण (ग) चट्टानी धरातल (घ) घाघरा नदी का मिलन
- ✔ Answer: (ख) हिमालयी क्षेत्र से भारी मात्रा में गाद (सिल्ट) का निक्षेपण — कोसी द्वारा भारी मात्रा में लाए गए अवसाद नदी तल में जमा हो जाते हैं, जिससे धारा विचलित होकर मार्ग बदलती है।
- Q 16: कोसी नदी गंगा नदी में किस स्थान के निकट मिलती है?
(क) मनिहारी (ख) कुर्सेला (ग) फतुहा (घ) दीघवारा
- ✔ Answer: (ख) कुर्सेला — कोसी नदी कटिहार जिले के कुर्सेला के पास गंगा नदी में मिल जाती है।
How it is asked
BPSC Prelims frequently tests facts around the moniker 'Sorrow of Bihar', extent and direction of course migration (150 km eastward to westward), total flood-prone area (73.06% / 68.80 lakh hectares), and the 2008 Kusaha embankment breach.
Do not confuse
- ✘ विद्यार्थी बाढ़ प्रवण क्षेत्रफल (68.80 लाख हेक्टेयर) और प्रतिशत (73.06%) में भ्रमित हो जाते हैं; 68.80 हेक्टेयर में संख्या है जबकि प्रतिशत 73.06% है।
- ✘ कोसी के गंगा में संगम स्थल को लेकर भ्रम: कोसी कुर्सेला (कटिहार) में मिलती है, जबकि महानंदा मनिहारी (कटिहार) के निकट गंगा में मिलती है।
- ✘ मार्ग परिवर्तन की दिशा: कोसी नदी समय के साथ पूर्व से पश्चिम की ओर खिसकी है, पश्चिम से पूर्व नहीं।
💡 ट्रिक: 'कोसी पू-प 150' = कोसी पूर्व से पश्चिम की ओर 150 किमी खिसकी और 'शोक' बनी।
River Valley Projects in Bihar (Kosi, Gandak, Son, Durgawati, Kadwan)
To manage water resources, control floods, and boost agricultural irrigation, several multipurpose river valley projects were constructed in Bihar. The Son River Valley Project is the oldest in Bihar, initiated in 1874 with an anicut at Dehri and later upgraded with the Indrapuri Barrage in 1968. The Kosi Project was launched following a 1954 Indo-Nepal agreement by constructing a barrage at Hanuman Nagar in Nepal for flood control and irrigation. The Gandak Project is a joint venture of Bihar, Uttar Pradesh, and Nepal, featuring a barrage at Valmikinagar. Projects like Durgawati (Karamchat Dam) and the proposed Kadwan Reservoir serve as vital irrigation sources for the drought-prone regions of South Bihar.
Key facts
- Son River Valley Project is the first and oldest irrigation project in Bihar, established in 1874.
- Indrapuri Barrage on the Son river was constructed in 1868 at Indrapuri in Rohtas district.
- The India-Nepal agreement for the Kosi Project was signed on April 25, 1954 (revised in 1966).
- Kosi Barrage was constructed at Hanuman Nagar in Nepal and completed in 1963.
- Kosi-Mechi Link Project is Bihar's first and India's second river interlinking project.
- The Kosi-Mechi Link Project will benefit 4 districts of Seemanchal (Araria, Purnia, Kishanganj, and Katihar).
- Gandak Project is a joint project of Bihar, Uttar Pradesh, and Nepal, with an agreement signed in 1959.
- Under the Gandak Project, a barrage was constructed at Valmikinagar (West Champaran).
- Triveni Canal was constructed on the Gandak river in 1904 for irrigation purposes.
- Durgawati Reservoir Project (Karamchat Dam) is located on the Durgawati river in Kaimur district.
- The proposed Kadwan Reservoir Project (Son High Dam) is located on the Son river near the Jharkhand border (Garhwa/Rohtas).
Table
- परियोजना: सोन परियोजना · नदी: सोन · बैराज / बाँध का स्थान: इंद्रपुरी (रोहतास) · लाभान्वित क्षेत्र / राज्य / देश: रोहतास, औरंगाबाद, भोजपुर, बक्सर, पटना
- परियोजना: कोसी परियोजना · नदी: कोसी · बैराज / बाँध का स्थान: हनुमाननगर (नेपाल) · लाभान्वित क्षेत्र / राज्य / देश: सुपौल, सहरसा, मधेपुरा, पूर्णिया, नेपाल
- परियोजना: गंडक परियोजना · नदी: गंडक · बैराज / बाँध का स्थान: वाल्मीकिनगर (पश्चिम चंपारण) · लाभान्वित क्षेत्र / राज्य / देश: प. चंपारण, पू. चंपारण, सारण, गोपालगंज, UP, नेपाल
- परियोजना: दुर्गावती परियोजना · नदी: दुर्गावती · बैराज / बाँध का स्थान: कर्मचट (कैमूर) · लाभान्वित क्षेत्र / राज्य / देश: कैमूर और रोहतास
- परियोजना: कदवन परियोजना · नदी: सोन · बैराज / बाँध का स्थान: कदवन (गढ़वा/रोहतास सीमा) · लाभान्वित क्षेत्र / राज्य / देश: रोहतास, औरंगाबाद, गढ़वा (झारखंड)
Practice questions (solved)
- Q 17: बिहार की सबसे पुरानी नदी-घाटी परियोजना निम्नलिखित में से कौन-सी है?
(क) कोसी परियोजना (ख) गंडक परियोजना (ग) सोन नदी-घाटी परियोजना (घ) दुर्गावती परियोजना
- ✔ Answer: (ग) सोन नदी-घाटी परियोजना — सोन नदी-घाटी परियोजना का निर्माण 1874 में हुआ था, जो बिहार की सबसे पुरानी नहर एवं सिंचाई परियोजना है।
- Q 18: गंडक नदी परियोजना से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. यह बिहार, उत्तर प्रदेश और नेपाल की संयुक्त परियोजना है।
2. इस परियोजना के तहत वाल्मीकिनगर में बैराज बनाया गया है।
उपरोक्त में से कौन-सा/से कथन सत्य है/हैं?
(क) केवल 1 (ख) केवल 2 (ग) 1 और 2 दोनों (घ) न तो 1 और न ही 2
- ✔ Answer: (ग) 1 और 2 दोनों — गंडक परियोजना बिहार, यूपी और नेपाल की संयुक्त पहल है और इसका बैराज वाल्मीकिनगर (पश्चिम चंपारण) में स्थित है।
- Q 19: सोन नदी पर स्थित 'इंद्रपुरी बैराज' बिहार के किस जिले में स्थित है?
(क) औरंगाबाद (ख) रोहतास (ग) भोजपुर (घ) बक्सर
- ✔ Answer: (ख) रोहतास — इंद्रपुरी बैराज रोहतास जिले के इंद्रपुरी में सोन नदी पर वर्ष 1968 में बनाया गया था।
- Q 20: वर्ष 1904 में गंडक नदी से निकाली गई प्रमुख नहर कौन-सी है?
(क) सोन नहर (ख) त्रिवेणी नहर (ग) ढाका नहर (घ) तेऊर नहर
- ✔ Answer: (ख) त्रिवेणी नहर — त्रिवेणी नहर का निर्माण 1904 में पश्चिम चंपारण में गंडक नदी पर सिंचाई के लिए किया गया था।
- Q 21: दुर्गावती जलाशय परियोजना (कर्मचट बाँध) से मुख्य रूप से बिहार के कौन-से जिले लाभान्वित होते हैं?
(क) पटना और नालंदा (ख) कैमूर और रोहतास (ग) मुंगेर और जमुई (घ) सहरसा और मधेपुरा
- ✔ Answer: (ख) कैमूर और रोहतास — दुर्गावती जलाशय परियोजना कैमूर जिले में स्थित है और यह कैमूर तथा रोहतास जिलों को सिंचाई का पानी प्रदान करती है।
📜 Real previous-year questions (BPSC)
- [BPSC 71वीं प्रारंभिक (13 सितंबर 2025), प्रश्न 12] कोसी-मेची लिंक परियोजना से बिहार के कौन-कौन से जिलों को लाभ होगा?
(क) पटना, नालंदा, गया, सिवान (ख) दरभंगा, मुजफ्फरपुर, सीतामढ़ी, बेगूसराय (ग) अररिया, पूर्णिया, किशनगंज, कटिहार (घ) उपरोक्त में से एक से अधिक
- ✔ Official answer: (ग) अररिया, पूर्णिया, किशनगंज, कटिहार — कोसी-मेची नदी लिंक परियोजना बिहार की पहली नदी जोड़ो परियोजना है, जिससे सीमांचल के 4 जिलों अररिया, पूर्णिया, किशनगंज और कटिहार को सिंचाई लाभ मिलेगा।
How it is asked
In BPSC Prelims, direct and multi-statement factual questions are frequently asked regarding barrage locations, construction years, participating states/countries, and beneficiary districts.
Do not confuse
- ✘ देहरी एनिकट (1874) और इंद्रपुरी बैराज (1968) दोनों सोन नदी पर हैं, लेकिन देहरी पुराना एनिकट है जबकि इंद्रपुरी नया बैराज है।
- ✘ त्रिवेणी नहर (1904) और गंडक परियोजना (1959) दोनों गंडक नदी से संबंधित हैं, लेकिन दोनों का निर्माण काल अलग-अलग है।
- ✘ कोसी बैराज हनुमाननगर में है जो नेपाल सीमा के अंदर स्थित है, न कि बिहार के किसी जिले में।
💡 सोन का देहरी-इंद्रपुरी, गंडक का वाल्मीकि, कोसी का हनुमान!
Waterfalls and Hot Springs of Bihar
Due to the presence of Vindhyan and Dharwar rock formations in the southern border districts of Bihar, several scenic waterfalls and hot springs are found. Waterfalls are primarily located in the hilly terrains of Rohtas, Kaimur, and Nawada, where rivers drop vertically due to sudden changes in topography. The main centers for hot springs are Rajgir (Nalanda) and Munger, where water remains hot due to geothermal activity and sulfur content. Brahm Kund in Rajgir is considered the hottest spring in Bihar and holds significant religious importance. The Kakolat waterfall in Nawada is famous across North India for its cool waters. These sites are not only tourist attractions but also possess medicinal properties in their water, helpful in treating skin diseases.
Key facts
- Kakolat waterfall is located in Nawada district and its height is approximately 150 to 160 feet.
- Brahm Kund is the hottest spring in Rajgir, with a temperature of about 87 degrees Celsius.
- Lakshman Kund is the hottest spring in Munger district.
- Telhar Kund waterfall is located in Kaimur district and is famous for its beauty.
- Dhua Kund and Manjhar Kund waterfalls are located on the Kao river in Sasaram (Rohtas).
- Major springs in Rajgir include Saptadhara, Suryakund, Makhdum Kund, and Nanak Kund.
- Sitakund, Rishikund, Bhimbandh, Bharari Kund, and Panchtar Kund are located in Munger.
- A famous hot spring named 'Agnikund' is located in Gaya district.
- Kakolat waterfall is often referred to as the 'Niagara of Bihar'.
- Jiarkund waterfall is located on the Phulwariya river in Bhojpur district.
Table
- नाम: ककोलत · स्थान (जिला): नवादा · प्रकार: जलप्रपात
- नाम: ब्रह्मकुंड · स्थान (जिला): राजगीर (नालंदा) · प्रकार: गर्म जलकुंड
- नाम: सीताकुंड · स्थान (जिला): मुंगेर · प्रकार: गर्म जलकुंड
- नाम: तेलहर कुंड · स्थान (जिला): कैमूर · प्रकार: जलप्रपात
- नाम: धुआँ कुंड · स्थान (जिला): रोहतास (सासाराम) · प्रकार: जलप्रपात
- नाम: लक्ष्मण कुंड · स्थान (जिला): मुंगेर · प्रकार: गर्म जलकुंड
- नाम: अग्निकुंड · स्थान (जिला): गया · प्रकार: गर्म जलकुंड
- नाम: मंझर कुंड · स्थान (जिला): रोहतास · प्रकार: जलप्रपात
Practice questions (solved)
- Q 22: बिहार का सबसे प्रसिद्ध जलप्रपात 'ककोलत' किस जिले में स्थित है?
(क) रोहतास (ख) नवादा (ग) कैमूर (घ) नालंदा
- ✔ Answer: (ख) नवादा — ककोलत जलप्रपात नवादा जिले में स्थित है और यह ठंडे पानी के लिए प्रसिद्ध है।
- Q 23: राजगीर स्थित 'ब्रह्मकुंड' का औसत तापमान कितना रहता है?
(क) 50°C (ख) 100°C (ग) 87°C (घ) 72°C
- ✔ Answer: (ग) 87°C — ब्रह्मकुंड राजगीर का सबसे गर्म जलकुंड है जिसका तापमान 87 डिग्री सेल्सियस के करीब होता है।
- Q 24: निम्नलिखित में से कौन सा गर्म जलकुंड मुंगेर जिले में स्थित नहीं है?
(क) सीताकुंड (ख) लक्ष्मण कुंड (ग) ऋषिकुंड (घ) सप्तधारा
- ✔ Answer: (घ) सप्तधारा — सप्तधारा जलकुंड राजगीर (नालंदा) में स्थित है, जबकि अन्य तीनों मुंगेर में हैं।
- Q 25: तेलहर कुंड जलप्रपात बिहार के किस जिले में स्थित है?
(क) कैमूर (ख) भोजपुर (ग) सासाराम (घ) नवादा
- ✔ Answer: (क) कैमूर — तेलहर कुंड कैमूर जिले के भगवानपुर प्रखंड में स्थित एक प्रसिद्ध जलप्रपात है।
- Q 26: सूची-I को सूची-II से सुमेलित कीजिए:
(A) धुआँ कुंड - (1) नवादा
(B) ककोलत - (2) सासाराम
(C) अग्निकुंड - (3) मुंगेर
(D) सीताकुंड - (4) गया
(क) A-2, B-1, C-4, D-3 (ख) A-1, B-2, C-3, D-4 (ग) A-2, B-1, C-3, D-4 (घ) A-4, B-3, C-2, D-1
- ✔ Answer: (क) A-2, B-1, C-4, D-3 — धुआँ कुंड सासाराम में, ककोलत नवादा में, अग्निकुंड गया में और सीताकुंड मुंगेर में स्थित है।
How it is asked
In BPSC, questions from this sub-topic often focus on the district-wise location of waterfalls and hot springs. Questions on the 'hottest spring' and the 'location of Kakolat' are frequently repeated.
Do not confuse
- ✘ सीताकुंड मुंगेर में है, जबकि रामकुंड और लक्ष्मण कुंड भी मुंगेर में ही हैं, लेकिन सूर्यकुंड राजगीर में है।
- ✘ धुआँ कुंड और मंझर कुंड दोनों सासाराम (रोहतास) में हैं, इन्हें अलग-अलग जिलों में समझने की गलती न करें।
💡 मुंगेर के कुंड याद रखने की ट्रिक: 'सीता-लक्ष्मण और ऋषि भीम के साथ मुंगेर गए' (सीताकुंड, लक्ष्मणकुंड, ऋषिकुंड, भीमबांध)।
Quick revision
- Ganga enters Bihar near Chausa in Buxar and has a total length of 445 km within the state.
- Ghaghara, Gandak, Burhi Gandak, Bagmati, Kosi, and Mahananda are major northern tributaries.
- Gandak originates from Nhubine Himal Glacier in Nepal and joins Ganga at Sonpur.
- Kosi is known as the 'Sorrow of Bihar' due to its devastating floods and course-shifting nature.
- Son, Punpun, Kiul, Falgu, and Karmanasa are the primary southern tributaries of Bihar.
- Son river originates from Amarkantak (MP) and joins Ganga at Maner near Danapur.
- Indrapuri Barrage is located on the Son river, part of Bihar's oldest canal system.
- The Kosi Project is a joint venture between India and Nepal, signed in 1954.
- The Gandak Project includes a barrage at Valmiki Nagar, benefiting Bihar and Uttar Pradesh.
- The Vishnupad Temple is located on the banks of the Falgu river, famous for Pitrapaksha Mela.
- Kakolat waterfall is located in Nawada district and is considered the most famous in Bihar.
- Brahmakund is the hottest spring in Rajgir, while Sitakund is a famous spring in Munger.