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BPSC CCEभूगोलबिहार की जलवायु, मिट्टी, वनस्पति और वन्यजीव
Climate, Soil, Vegetation, and Wildlife of Bihar
यह अध्याय बीपीएससी प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा (जीएस पेपर 2) के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह बिहार की भौतिक भूगोल और पर्यावरणीय चुनौतियों को कवर करता है। मिट्टी के प्रकार और जलवायु पैटर्न को समझना कृषि और आपदा प्रबंधन पर आधारित प्रश्नों के लिए अनिवार्य है।
बिहार की जलवायु: ऋतुएं, वर्षा वितरण, कालवैशाखी और लू
बिहार की जलवायु मुख्य रूप से उपोष्ण कटिबंधीय मानसूनी (Subtropical Monsoon) प्रकार की है, जो महाद्वीपीय विशेषताओं को भी दर्शाती है। कोपेन के जलवायु वर्गीकरण के अनुसार उत्तरी बिहार का अधिकांश भाग 'Cwg' तथा दक्षिणी बिहार 'Aw'/'Cwg' वर्ग में आता है। राज्य में वर्षा मुख्य रूप से दक्षिण-पश्चिम मानसून की बंगाल की खाड़ी शाखा द्वारा जून के मध्य से अक्टूबर के मध्य तक होती है। पूर्व से पश्चिम की ओर जाने पर वर्षा की मात्रा लगातार घटती जाती है, इसलिए सर्वाधिक वर्षा पूर्वोत्तर के किशनगंज जिले में और सबसे कम वर्षा दक्षिण-पश्चिम के औरंगाबाद जिले में दर्ज की जाती है। ग्रीष्म ऋतु में अप्रैल-मई के महीनों में पश्चिम से तेज गर्म और शुष्क हवाएं चलती हैं जिन्हें 'लू' कहा जाता है, जबकि इसी दौरान बंगाल की खाड़ी से आने वाले आद्र चक्रवाती तूफानों से होने वाली पूर्व-मानसूनी वर्षा को 'कालवैशाखी' या 'नार्वेस्टर' कहा जाता है।
मुख्य तथ्य
- बिहार की जलवायु कोपेन के अनुसार मुख्य रूप से 'Cwg' (उपोष्ण मानसूनी) प्रकार की है।
- ट्रेवार्था के अनुसार बिहार की जलवायु 'Caa' (उपोष्ण आर्द्र) तथा थार्नथ्वेट के अनुसार 'CA'w' और 'CB'w' के अंतर्गत आती है।
- बिहार में औसत वार्षिक वर्षा लगभग 112 सेंटीमीटर (1120 मिमी) होती है।
- बिहार में सर्वाधिक वर्षा वाला जिला किशनगंज (लगभग 180-200 सेमी) है।
- बिहार में सबसे कम वर्षा प्राप्त करने वाला जिला औरंगाबाद (लगभग 100 सेमी से कम) है।
- बिहार में मानसून का प्रवेश सामान्यतः 10 से 15 जून के मध्य सबसे पहले किशनगंज जिले से होता है।
- बिहार में अधिकांश वर्षा (लगभग 85-90%) दक्षिण-पश्चिम मानसून की 'बंगाल की खाड़ी शाखा' से होती है।
- शीत ऋतु (दिसंबर-जनवरी) में बिहार में हल्की वर्षा पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbances) के कारण होती है, जो रबी फसलों के लिए लाभदायक है।
- बिहार का सबसे गर्म और सबसे ठंडा जिला दोनों ही 'गया' है।
- मई बिहार का सबसे गर्म महीना होता है, जिसमें तापमान कई स्थानों पर 44-45°C तक पहुंच जाता है।
- ग्रीष्म ऋतु में चलने वाली गर्म, शुष्क और धूल भरी पछुआ हवा को 'लू' कहा जाता है, जिसकी गति 8-16 किमी/घंटा होती है।
- बिहार में वर्षा का वितरण पूर्व से पश्चिम की ओर तथा उत्तर से दक्षिण की ओर घटता जाता है।
तालिका
- जलवायु घटक / परिघटना: कोपेन जलवायु प्रकार · प्रमुख विशेषता / आंकड़ा: Cwg (शुष्क शीत उपोष्ण मानसूनी) · संबद्ध जिला / क्षेत्र: उत्तरी एवं मध्य बिहार
- जलवायु घटक / परिघटना: सर्वाधिक वर्षा · प्रमुख विशेषता / आंकड़ा: 180 - 200 सेमी · संबद्ध जिला / क्षेत्र: किशनगंज (पूर्वोत्तर बिहार)
- जलवायु घटक / परिघटना: न्यूनतम वर्षा · प्रमुख विशेषता / आंकड़ा: 90 - 100 सेमी · संबद्ध जिला / क्षेत्र: औरंगाबाद / अरवल (दक्षिण-पश्चिम)
- जलवायु घटक / परिघटना: सर्वाधिक गर्म स्थान · प्रमुख विशेषता / आंकड़ा: मई में 44°C - 45°C+ · संबद्ध जिला / क्षेत्र: गया
- जलवायु घटक / परिघटना: सर्वाधिक ठंडा स्थान · प्रमुख विशेषता / आंकड़ा: जनवरी में 3°C - 4°C · संबद्ध जिला / क्षेत्र: गया
- जलवायु घटक / परिघटना: ग्रीष्मकालीन गर्म हवाएं (लू) · प्रमुख विशेषता / आंकड़ा: शुष्क पछुआ पवन (8-16 किमी/घंटा) · संबद्ध जिला / क्षेत्र: दक्षिण एवं मध्य बिहार के मैदान
- जलवायु घटक / परिघटना: कालवैशाखी (नार्वेस्टर) · प्रमुख विशेषता / आंकड़ा: पूर्व-मानसूनी संवहनीय वर्षा/ओलावृष्टि · संबद्ध जिला / क्षेत्र: पूर्वी बिहार (पूर्णिया, कटिहार, किशनगंज)
- जलवायु घटक / परिघटना: शीतकालीन वर्षा · प्रमुख विशेषता / आंकड़ा: पश्चिमी विक्षोभ (रबी फसल हेतु उपयोगी) · संबद्ध जिला / क्षेत्र: समग्र बिहार (विशेषतः पश्चिमी भाग)
अभ्यास प्रश्न (हल सहित)
- प्रश्न 1: कोपेन के जलवायु वर्गीकरण के अनुसार, उत्तर बिहार का अधिकांश भाग किस जलवायु वर्ग के अंतर्गत आता है?
(क) Aw (ख) Cwg (ग) BShw (घ) As
- ✔ उत्तर: (ख) Cwg — कोपेन के अनुसार उत्तर बिहार तथा मध्य गंगा मैदान 'Cwg' (शुष्क शीत ऋतु वाला उपोष्ण मानसूनी) जलवायु वर्ग में आता है।
- प्रश्न 2: बिहार में दक्षिण-पश्चिम मानसून की किस शाखा से सर्वाधिक वर्षा प्राप्त होती है?
(क) अरब सागर शाखा (ख) बंगाल की खाड़ी शाखा (ग) पश्चिमी विक्षोभ (घ) नार्वेस्टर
- ✔ उत्तर: (ख) बंगाल की खाड़ी शाखा — बिहार में कुल वर्षा का 85% से अधिक भाग दक्षिण-पश्चिम मानसून की बंगाल की खाड़ी शाखा द्वारा प्राप्त होता है।
- प्रश्न 3: बिहार के निम्नलिखित जिलों में से किस जिले में सबसे अधिक औसत वार्षिक वर्षा दर्ज की जाती है?
(क) पश्चिमी चंपारण (ख) गया (ग) किशनगंज (घ) पटना
- ✔ उत्तर: (ग) किशनगंज — किशनगंज पूर्वोत्तर कोने में स्थित होने और बंगाल की खाड़ी के निकट होने के कारण सर्वाधिक वर्षा (180-200 सेमी) प्राप्त करता है।
- प्रश्न 4: बिहार के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. बिहार का सबसे गर्म एवं सबसे ठंडा दोनों ही जिला गया है।
2. ग्रीष्म ऋतु में चलने वाली गर्म और शुष्क पछुआ पवन को 'लू' कहा जाता है।
3. राज्य में पूर्व से पश्चिम की ओर जाने पर वर्षा की मात्रा बढ़ती है।
उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
(क) केवल 1 और 2 (ख) केवल 2 और 3 (ग) केवल 1 और 3 (घ) 1, 2 और 3
- ✔ उत्तर: (क) केवल 1 और 2 — कथन 3 गलत है क्योंकि बिहार में पूर्व से पश्चिम की ओर जाने पर वर्षा की मात्रा घटती है, बढ़ती नहीं।
- प्रश्न 5: बिहार में शीत ऋतु में होने वाली चक्रवातीय वर्षा का प्रमुख कारण क्या है?
(क) दक्षिण-पश्चिम मानसून (ख) लौटता हुआ मानसून (ग) भूमध्यसागरीय पश्चिमी विक्षोभ (घ) स्थानीय संवहनीय धाराएं
- ✔ उत्तर: (ग) भूमध्यसागरीय पश्चिमी विक्षोभ — शीत ऋतु (दिसंबर-जनवरी) में होने वाली वर्षा भूमध्य सागर से उठने वाले पश्चिमी विक्षोभों के कारण होती है।
- प्रश्न 6: बिहार में अप्रैल और मई के महीनों में स्थानीय तड़ित-झंझावात से होने वाली वर्षा को क्या कहा जाता है?
(क) मावठ (ख) कालवैशाखी / नार्वेस्टर (ग) चेरी ब्लॉसम (घ) लू
- ✔ उत्तर: (ख) कालवैशाखी / नार्वेस्टर — बंगाल और बिहार में ग्रीष्मकालीन पूर्व-मानसूनी तीव्र आंधी-तूफान वाली वर्षा को कालवैशाखी या नार्वेस्टर कहा जाता है।
📜 असली पिछले वर्ष के प्रश्न (BPSC)
- [BPSC 71वीं प्रारंभिक (13 सितंबर 2025), प्रश्न 120] बिहार का अधिकांश भाग निम्नलिखित में से किस प्रकार की जलवायु के अन्तर्गत आता है?
(क) उपोष्ण कटिबंधीय मानसून (ख) उष्णकटिबंधीय सवाना (ग) गर्म एवं शुष्क (घ) गर्म एवं शुष्क मरुस्थल
- ✔ आधिकारिक उत्तर: (क) उपोष्ण कटिबंधीय मानसून — बिहार की अक्षांशीय स्थिति और मौसमी मानसूनी पवनों के प्रभाव के कारण इसका अधिकांश भाग उपोष्ण कटिबंधीय मानसूनी (Subtropical Monsoon) जलवायु क्षेत्र के अंतर्गत आता है।
परीक्षा में कैसे आता है
BPSC प्रारंभिक परीक्षा में जलवायु वर्गीकरण (विशेषकर कोपेन कोड Cwg/Aw), सर्वाधिक वर्षा वाला जिला (किशनगंज), सबसे कम वर्षा वाला जिला (औरंगाबाद), सबसे गर्म/ठंडा जिला (गया), तथा मानसूनी शाखाओं और 'लू'/'कालवैशाखी' की प्रकृति पर सीधे और कूट-आधारित प्रश्न बार-बार पूछे जाते हैं।
इनमें भ्रम न करें
- ✘ कोपेन वर्गीकरण: उत्तर बिहार मुख्य रूप से 'Cwg' के तहत आता है, जबकि दक्षिण बिहार के कुछ हिस्से 'Aw' में आते हैं। कई छात्र पूरे बिहार को केवल 'Aw' मान लेते हैं जो गलत है।
- ✘ वर्षा की दिशा: बिहार में वर्षा पूर्व से पश्चिम की ओर जाने पर 'घटती' है, छात्र अक्सर इसे बंगाल की खाड़ी के संरेखण के कारण उल्टा समझ लेते हैं।
- ✘ सबसे गर्म बनाम सबसे ठंडा जिला: दोनों का उत्तर 'गया' ही है, क्योंकि पठारी चट्टानी संरचना और महाद्वीपीय स्थिति के कारण यह गर्मियों में सबसे अधिक तपता है और सर्दियों में सबसे ज्यादा ठंडा होता है।
💡 याद रखें 'GK Monsoon': G से Gaya (सबसे गर्म व ठंडा), K से Kishanganj (सबसे अधिक वर्षा वाला जिला)।
बिहार की मिट्टियाँ: जलोढ़ (खादर/बांगर), टाल, दियारा, बलसुंदरी, करैल-केवाल
बिहार का अधिकांश भूभाग गंगा के मैदान के अंतर्गत आता है, जिसका निर्माण गंगा और उसकी सहायक नदियों द्वारा लाए गए अवसादों से हुआ है। भौतिक बनावट और गंगा नदी की स्थिति के आधार पर बिहार की मिट्टियों को उत्तरी बिहार का मैदान और दक्षिणी बिहार का मैदान में बाँटा जाता है। उत्तरी बिहार में नवीन जलोढ़ (खादर), पुरानी जलोढ़ (बलसुंदरी) और तराई मिट्टी प्रमुख हैं, जिनमें चूने की मात्रा अधिक पाई जाती है। दक्षिणी बिहार में गंगा के तटवर्ती क्षेत्र में टाल मिट्टी और पुराने जलोढ़ के रूप में करैल-केवाल तथा पठारी सीमा पर बलथर मिट्टी पाई जाती है। इसके अतिरिक्त नदियों के बहाव क्षेत्र में बनने वाले बाढ़-कृत टीलों और बालू के जमाव को 'दियारा भूमि' कहा जाता है। ये मिट्टियाँ राज्य में रबी, खरीफ और दलहन फसलों की सघन कृषि का प्रमुख आधार हैं।
मुख्य तथ्य
- बिहार के कुल क्षेत्रफल का लगभग 90% भाग जलोढ़ (Alluvial) मिट्टी से आच्छादित है।
- खादर (नवीन जलोढ़) मिट्टी प्रतिवर्ष बाढ़ द्वारा नवीनीकृत होती है और यह पूर्णिया, सहरसा, दरभंगा, खगड़िया तथा कटिहार में विस्तृत है।
- बलसुंदरी मिट्टी उत्तरी बिहार की पुरानी जलोढ़ मिट्टी है, जिसमें चूने (Lime) की अधिकता (30% तक) होती है और यह मक्का, गेहूँ तथा गन्ने के लिए उपयुक्त है।
- बलसुंदari मिट्टी का विस्तार मुख्यतः सारण, सीवान, गोपालगंज, मुजफ्फरपुर, वैशाली और समस्तीपुर जिलों में पाया जाता है।
- करैल-केवाल मिट्टी दक्षिणी बिहार के मैदान की पुरानी जलोढ़ मिट्टी है, जिसमें 'करैल' भारी चिकनी मिट्टी तथा 'केवाल' पीली-भूरी दोमट प्रकृति की होती है।
- करैल-केवाल मिट्टी का प्रसार रोहतास से लेकर गया, औरंगाबाद, पटना, जहानाबाद, मुंगेर और भागलपुर तक पाया जाता है।
- टाल (ताल) मिट्टी गंगा के दक्षिणी तट के समानांतर 8 से 10 किमी चौड़ी पट्टी में बक्सर से लेकर भागलपुर (पीरपैंती) तक फैली है।
- टाल क्षेत्र वर्षा ऋतु में जलमग्न रहता है, इसलिए यहाँ केवल रबी मौसम में मुख्यतः दलहन (चना, मसूर, खेसारी) और तिलहन की बंपर खेती होती है।
- दियारा मिट्टी गंगा, गंडक, कोसी और सोन नदियों के बाढ़ क्षेत्र में बालू और गाद के निक्षेप से बनती है, जो तरबूज, खरबूजा और परवल की खेती के लिए प्रसिद्ध है।
- बलथर मिट्टी छोटानागपुर पठार और दक्षिणी बिहार के मैदान के मिलन स्थल पर (कैमूर से बांका तक) संकीर्ण पट्टी में पाई जाने वाली लाल-पीली, अम्लीय व कंकरीली मिट्टी है।
- पीडमोंट दलदली (Piedmont Swamp) मिट्टी पश्चिमी चंपारण जिले के पश्चिमोत्तर भाग (सोमेश्वर पहाड़ी क्षेत्र) में पाई जाती है।
- उत्तरी बिहार की मिट्टियों में प्रायः नाइट्रोजन और फॉस्फोरस की कमी पाई जाती है, जबकि पोटाश पर्याप्त मात्रा में उपस्थित रहता है।
तालिका
- मिट्टी का प्रकार: खादर (नवीन जलोढ़) · प्रमुख विस्तार (जिले): पूर्णिया, सहरसा, कटिहार, दरभंगा, समस्तीपुर, खगड़िया · मुख्य विशेषताएँ एवं संघटक: प्रतिवर्ष बाढ़ से नवीनीकृत, गादयुक्त, भूरा/हल्का रंग, उपजाऊ · उपयुक्त फसलें: धान, जूट, मक्का, गेहूँ
- मिट्टी का प्रकार: बलसुंदरी (पुरानी जलोढ़) · प्रमुख विस्तार (जिले): सारण, सीवान, गोपालगंज, वैशाली, मुजफ्फरपुर, चंपारण · मुख्य विशेषताएँ एवं संघटक: चूनेदार (कैलकैरियस), क्षारीय प्रकृति, सफेद-धूसर रंग · उपयुक्त फसलें: गन्ना, मक्का, गेहूँ, तम्बाकू
- मिट्टी का प्रकार: करैल-केवाल (पुरानी जलोढ़) · प्रमुख विस्तार (जिले): रोहतास, भोजपुर, औरंगाबाद, गया, जहानाबाद, पटना, मुंगेर · मुख्य विशेषताएँ एवं संघटक: भारी चिकनी मिट्टी, सूखने पर दरारें, उच्च जलधारण क्षमता, तटस्थ से क्षारीय · उपयुक्त फसलें: धान, गेहूँ, चना, अलसी
- मिट्टी का प्रकार: टाल (ताल) मिट्टी · प्रमुख विस्तार (जिले): पटना (बख्तियारपुर/मोकामा), लखीसराय (बड़हिया), मुंगेर, भागलपुर · मुख्य विशेषताएँ एवं संघटक: गंगा के दक्षिण 8-10 किमी गर्त, बरसात में जलमग्न, भारी धूसर मिट्टी · उपयुक्त फसलें: दलहन (चना, मसूर, खेसारी), तिलहन
- मिट्टी का प्रकार: दियारा मिट्टी · प्रमुख विस्तार (जिले): गंगा, सोन, गंडक, घाघरा के कछारी/बाढ़ क्षेत्र · मुख्य विशेषताएँ एवं संघटक: बालू-सिल्ट का मिश्रण, नवीन कांप जमाव, ढीली संरचना · उपयुक्त फसलें: मक्का, परवल, तरबूज, ककड़ी
- मिट्टी का प्रकार: बलथर मिट्टी · प्रमुख विस्तार (जिले): कैमूर, रोहतास, औरंगाबाद, गया, जमुई, बांका (पठारी सीमा) · मुख्य विशेषताएँ एवं संघटक: लाल-पीला रंग, बालू-कंकड़ युक्त, अम्लीय, कम उर्वरा · उपयुक्त फसलें: मक्का, ज्वार, बाजरा, अरहर
- मिट्टी का प्रकार: पीडमोंट दलदली मिट्टी · प्रमुख विस्तार (जिले): पश्चिमी चंपारण (रामनगर और सोमेश्वर श्रेणी क्षेत्र) · मुख्य विशेषताएँ एवं संघटक: कंकड़-पत्थर युक्त, दलदली, जैविक पदार्थों से भरपूर, अम्लीय · उपयुक्त फसलें: धान, गन्ना, वनस्पति
अभ्यास प्रश्न (हल सहित)
- प्रश्न 7: बिहार में 'बलसुंदरी' मिट्टी की प्रमुख विशेषता क्या है?
(क) इसमें चूने (कैलकैरियस) की अत्यधिक प्रचुरता होती है (ख) यह अत्यधिक अम्लीय और बालू-प्रधान होती है (ग) यह केवल दक्षिणी बिहार के पठारी भाग में पाई जाती है (घ) यह वर्षा ऋतु में जलमग्न रहने वाली अनुपजाऊ मिट्टी है
- ✔ उत्तर: (क) इसमें चूने (कैलकैरियस) की अत्यधिक प्रचुरता होती है — बलसुंदरी उत्तरी बिहार की पुरानी जलोढ़ मिट्टी है, जिसमें चूने (Lime) की मात्रा 10% से 30% तक होती है।
- प्रश्न 8: गंगा के दक्षिणी तट पर बक्सर से भागलपुर तक विस्तृत 8 से 10 किमी चौड़े निम्न भूमि क्षेत्र में पाई जाने वाली मिट्टी कौन-सी है?
(क) बलथर मिट्टी (ख) टाल मिट्टी (ग) खादर मिट्टी (घ) पीडमोंट दलदली मिट्टी
- ✔ उत्तर: (ख) टाल मिट्टी — गंगा के दक्षिणी तटबंध के पीछे स्थित जलमग्न प्राकृतिक गर्त वाले क्षेत्र को टाल क्षेत्र कहा जाता है और वहाँ टाल मिट्टी पाई जाती है।
- प्रश्न 9: बिहार की 'करैल-केवाल' मिट्टी के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन असत्य है?
(क) यह दक्षिणी बिहार के मैदानी भागों की पुरानी जलोढ़ मिट्टी है। (ख) इस मिट्टी की जलधारण क्षमता काफी अधिक होती है। (ग) यह मिट्टी सूखने पर कड़ी हो जाती है और इसमें गहरी दरारें पड़ जाती हैं। (घ) यह मुख्य रूप से पश्चिमी चंपारण और किशनगंज जिलों में पाई जाती है।
- ✔ उत्तर: (घ) यह मुख्य रूप से पश्चिमी चंपारण और किशनगंज जिलों में पाई जाती है। — करैल-केवाल दक्षिणी बिहार (रोहतास, पटना, गया, औरंगाबाद, मुंगेर) की मिट्टी है, जबकि पश्चिमी चंपारण और किशनगंज उत्तरी बिहार में हैं।
- प्रश्न 10: बिहार में नदियों के पेटे तथा बाढ़ क्षेत्रों में बालू व गाद से निर्मित उपजाऊ द्वीप सदृश भूमि क्षेत्र को किस नाम से जाना जाता है?
(क) दियारा भूमि (ख) चौर भूमि (ग) मन भूमि (घ) तराई भूमि
- ✔ उत्तर: (क) दियारा भूमि — बाढ़ क्षेत्र में अवसादों के जमाव से बने ऊँचे कछारी मैदान या नदीय द्वीपों को बिहार में 'दियारा' कहा जाता है।
- प्रश्न 11: बिहार के निम्नलिखित जिलों में से किसमें 'बलथर मिट्टी' की संकीर्ण पट्टी पाई जाती है?
(क) सीतामढ़ी, शिवहर, मुजफ्फरपुर (ख) कैमूर, रोहतास, औरंगाबाद, बांका (ग) सहरसा, सुपौल, मधेपुरा (घ) गोपालगंज, सीवान, सारण
- ✔ उत्तर: (ख) कैमूर, रोहतास, औरंगाबाद, बांका — बलथर मिट्टी छोटानागपुर पठार की सीमा से लगे दक्षिणी जिलों जैसे कैमूर, रोहतास, औरंगाबाद, गया, नवादा, जमुई और बांका में पाई जाती है।
- प्रश्न 12: बिहार का टाल क्षेत्र निम्नलिखित में से किस कृषि उत्पाद के लिए राज्य भर में सबसे प्रसिद्ध है?
(क) जूट और मखाना (ख) दलहन (चना, मसूर, खेसारी) (ग) चाय और अनानास (घ) गन्ना और कपास
- ✔ उत्तर: (ख) दलहन (चना, मसूर, खेसारी) — टाल मिट्टी वर्षा के पानी से भरी रहने के बाद रबी मौसम में सूखती है, जो दलहनी फसलों के अत्यधिक उत्पादन के लिए जानी जाती है।
परीक्षा में कैसे आता है
BPSC में बिहार की मिट्टियों से प्रत्यक्ष प्रश्न (जैसे- बलसुंदरी या करैल-केवाल किस क्षेत्र की मिट्टी है), विशेषताओं पर आधारित प्रश्न (चूना-युक्त, जलधारण क्षमता, दरारें पड़ना) तथा जिलों के सुमेलन वाले प्रश्न निरंतर पूछे जाते हैं।
इनमें भ्रम न करें
- ✘ बलसुंदरी और बलथर में अंतर: 'बलसुंदरी' उत्तरी बिहार की चूना-युक्त पुरानी जलोढ़ है (सारण, मुजफ्फरपुर), जबकि 'बलथर' दक्षिणी सीमावर्ती पठारी भाग (कैमूर-बांका) की लाल-पीली अम्लीय कंकरीली मिट्टी है।
- ✘ खादर और बांगर का स्थान: उत्तरी बिहार में कोसी-बागमती का बाढ़ क्षेत्र 'खादर' (नवीन जलोढ़) है, जबकि दक्षिणी बिहार का पुराना जलोढ़ भाग 'करैल-केवाल' (बांगर का स्थानीय रूप) कहलाता है।
- ✘ टाल और दियारा: 'टाल' दक्षिणी गंगा तट की गर्तनुमा भूमि है जो केवल रबी फसलों (दालों) हेतु उपयुक्त है, जबकि 'दियारा' नदी की धारा के बीच या किनारे बालू मिश्रित ऊँची कछारी भूमि है जो जायद/सब्जियों हेतु प्रसिद्ध है।
💡 याद रखें: उत्तर में 'सुंदरी' (बलसुंदरी = चूने वाली मीठी मिट्टी), दक्षिण में 'कड़ा करैल' (करैल-केवाल = भारी चिकनी मिट्टी), और गंगा किनारे 'दाल वाला टाल'।
वन एवं वनावरण
बिहार में वर्षा एवं भू-आकृति के आधार पर मुख्यतः दो प्रकार के पर्णपाती वन पाए जाते हैं: आर्द्र पर्णपाती वन और शुष्क पर्णपाती वन। 120 सेमी से अधिक वर्षा वाले उत्तरी-पूर्वी तथा हिमालयी तराई क्षेत्रों (जैसे पश्चिमी चंपारण, किशनगंज) में आर्द्र पर्णपाती वन पाए जाते हैं। इसके विपरीत, दक्षिण एवं दक्षिण-पश्चिम बिहार के कम वर्षा वाले पहाड़ी ढलानों पर शुष्क पर्णपाती वन पाए जाते हैं। भारतीय वन स्थिति रिपोर्ट (ISFR 2021) के अनुसार, बिहार में कुल वनावरण 7,380.79 वर्ग किमी है, जो राज्य के कुल भौगोलिक क्षेत्रफल का लगभग 7.84% है। सर्वाधिक वनावरण प्रतिशत और क्षेत्रफल वाला जिला कैमूर है, जबकि सबसे कम वनावरण वाला जिला शेखपुरा है।
मुख्य तथ्य
- ISFR 2021 के अनुसार बिहार का कुल वनावरण 7,380.79 वर्ग किमी है, जो कुल भौगोलिक क्षेत्रफल का 7.84% है।
- ISFR 2021 के अनुसार बिहार में वृक्षावरण (Tree Cover) 2,341 वर्ग किमी (2.48%) है।
- बिहार में वनावरण एवं वृक्षावरण का कुल योग 9,721.79 वर्ग किमी (10.32%) है।
- बिहार में सर्वाधिक वनावरण क्षेत्रफल वाला जिला कैमूर (1,051.56 वर्ग किमी) है।
- बिहार में न्यूनतम वनावरण क्षेत्रफल वाला जिला शेखपुरा (1.19 वर्ग किमी) है।
- प्रतिशत के आधार पर बिहार में सर्वाधिक वनावरण कैमूर (31.56%) तथा दूसरे स्थान पर जमुई (21.34%) है।
- प्रतिशत के आधार पर न्यूनतम वनावरण वाला जिला शेखपुरा (0.17%) है।
- बिहार में सर्वाधिक अति सघन वन (Very Dense Forest) पश्चिमी चंपारण जिले (249.34 वर्ग किमी) में पाए जाते हैं।
- 120 सेमी से अधिक वर्षा वाले क्षेत्रों (जैसे पश्चिमी चंपारण, किशनगंज) में आर्द्र पर्णपाती वन पाए जाते हैं।
- 120 सेमी से कम वर्षा वाले दक्षिणी पहाड़ियों में शुष्क पर्णपाती वन पाए जाते हैं, जिनमें साल, खैर और अमलतास प्रमुख हैं।
- ISFR 2021 के अनुसार 2019 के आकलन की तुलना में बिहार में वनावरण में 75 वर्ग किमी की वृद्धि दर्ज की गई है।
तालिका
- वन का प्रकार: आर्द्र पर्णपाती वन (Moist Deciduous) · वार्षिक वर्षा: 120 सेमी से अधिक · प्रमुख क्षेत्र/जिले: पश्चिमी चंपारण, किशनगंज, अररिया, पूर्णिया · प्रमुख वृक्ष प्रजातियाँ: साल, शीशम, सेमल, महुआ, बांस
- वन का प्रकार: शुष्क पर्णपाती वन (Dry Deciduous) · वार्षिक वर्षा: 120 सेमी से कम · प्रमुख क्षेत्र/जिले: कैमूर, रोहतास, गया, औरंगाबाद, नवादा, जमुई · प्रमुख वृक्ष प्रजातियाँ: साल, अमलतास, खैर, पलाश, नीम, महुआ
अभ्यास प्रश्न (हल सहित)
- प्रश्न 13: भारतीय वन स्थिति रिपोर्ट (ISFR 2021) के अनुसार बिहार के कुल भौगोलिक क्षेत्रफल का कितना प्रतिशत वनावरण (Forest Cover) के अंतर्गत आता है?
(क) 7.84% (ख) 2.48% (ग) 10.32% (घ) 9.38%
- ✔ उत्तर: (क) 7.84% — ISFR 2021 के अनुसार बिहार का कुल वनावरण 7,380.79 वर्ग किमी है जो राज्य के क्षेत्रफल का 7.84% है।
- प्रश्न 14: बिहार के निम्नलिखित जिलों में से किस जिले में क्षेत्रफल की दृष्टि से सर्वाधिक वन क्षेत्र स्थित है?
(क) पश्चिमी चंपारण (ख) कैमूर (ग) रोहतास (घ) जमुई
- ✔ उत्तर: (ख) कैमूर — कैमूर जिले में 1,051.56 वर्ग किमी वन क्षेत्र है जो बिहार के सभी जिलों में सर्वाधिक है।
- प्रश्न 15: बिहार में वनों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 120 सेमी से अधिक वर्षा वाले क्षेत्रों में आर्द्र पर्णपाती वन पाए जाते हैं।
2. बिहार में सर्वाधिक अति सघन वन (Very Dense Forest) पश्चिमी चंपारण जिले में हैं।
उपरोक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
(क) केवल 1 (ख) केवल 2 (ग) 1 और 2 दोनों (घ) न तो 1 और न ही 2
- ✔ उत्तर: (ग) 1 और 2 दोनों — उत्तरी-पूर्वी व तराई क्षेत्र (120 सेमी+ वर्षा) में आर्द्र पर्णपाती वन हैं तथा सर्वाधिक अति सघन वन पश्चिमी चंपारण में हैं।
- प्रश्न 16: भारतीय वन स्थिति रिपोर्ट 2021 के अनुसार बिहार में सबसे कम प्रतिशत वनावरण वाला जिला कौन-सा है?
(क) अरवल (ख) जहानाबाद (ग) शेखपुरा (घ) बक्सर
- ✔ उत्तर: (ग) शेखपुरा — शेखपुरा जिले में केवल 0.17% (1.19 वर्ग किमी) वनावरण है जो बिहार में न्यूनतम है।
- प्रश्न 17: बिहार की वनस्पति के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन असत्य है?
(क) साल बिहार के वनों का एक प्रमुख वृक्ष है। (ख) शुष्क पर्णपाती वन दक्षिण बिहार के पहाड़ी ढलानों पर पाए जाते हैं। (ग) बिहार का कुल वृक्षावरण (Tree Cover) 7.84% है। (घ) ISFR 2021 में बिहार के वनावरण में वृद्धि दर्ज की गई है।
- ✔ उत्तर: (ग) बिहार का कुल वृक्षावरण (Tree Cover) 7.84% है। — बिहार का वृक्षावरण (Tree Cover) 2.48% है, जबकि 7.84% वनावरण (Forest Cover) है।
परीक्षा में कैसे आता है
BPSC में बिहार के वनावरण (ISFR रिपोर्ट), सर्वाधिक/न्यूनतम वन वाले जिलों और वन प्रकारों (आर्द्र व शुष्क पर्णपाती) से संबंधित सीधे तथा कथन वाले प्रश्न नियमित रूप से पूछे जाते हैं।
इनमें भ्रम न करें
- ✘ छात्र अकसर वनावरण (7.84%) और वृक्षावरण (2.48%) में भ्रमित हो जाते हैं; दोनों का कुल योग 10.32% है।
- ✘ अति सघन वन में पश्चिमी चंपारण प्रथम स्थान पर है, जबकि कुल वनावरण क्षेत्रफल में कैमूर प्रथम स्थान पर है।
💡 कैमूर में 'कैमरा' लगाओ सबसे ज्यादा पेड़ दिखेंगे (सर्वाधिक वन = कैमूर), शेख की जेब 'खाली' है (न्यूनतम वन = शेखपुरा)।
वाल्मीकि टाइगर रिजर्व और वन्यजीव अभयारण्य
बिहार में जैव विविधता के संरक्षण के लिए एक राष्ट्रीय उद्यान और कई वन्यजीव अभयारण्य स्थित हैं। पश्चिमी चंपारण में स्थित वाल्मीकि राष्ट्रीय उद्यान राज्य का एकमात्र राष्ट्रीय उद्यान और एकमात्र बाघ आरक्षित क्षेत्र (Tiger Reserve) है। भागलपुर में गंगा नदी के किनारे स्थित विक्रमशिला अभयारण्य भारत का पहला डॉल्फिन अभयारण्य है, जो गंगा डॉल्फिन के संरक्षण के लिए समर्पित है। बेगूसराय की कावर झील बिहार की पहली और एकमात्र रामसर साइट है, जो एशिया की सबसे बड़ी मीठे पानी की गोखुर झील (Oxbow Lake) है। बक्सर पक्षी अभयारण्य अक्टूबर के महीने में कश्मीर से आने वाले 'लालसर' पक्षियों के लिए प्रसिद्ध है। राज्य के अन्य प्रमुख अभयारण्यों में भीमबांध (मुंगेर), गौतम बुद्ध (गया) और कैमूर अभयारण्य शामिल हैं।
मुख्य तथ्य
- वाल्मीकि राष्ट्रीय उद्यान (1990) बिहार का एकमात्र राष्ट्रीय उद्यान है।
- वाल्मीकि टाइगर रिजर्व बिहार का एकमात्र बाघ आरक्षित क्षेत्र है, जो पश्चिमी चंपारण में स्थित है।
- विक्रमशिला गंगेटिक डॉल्फिन अभयारण्य (भागलपुर) भारत का पहला डॉल्फिन अभयारण्य है।
- कावर झील (बेगूसराय) बिहार की एकमात्र रामसर साइट (Ramsar Site) है।
- कैमूर वन्यजीव अभयारण्य क्षेत्रफल की दृष्टि से बिहार का सबसे बड़ा अभयारण्य है।
- बक्सर पक्षी अभयारण्य में अक्टूबर में कश्मीर से 'लालसर' पक्षी आते हैं।
- उदयपुर वन्यजीव अभयारण्य बिहार के पश्चिमी चंपारण जिले में स्थित है।
- भीमबांध वन्यजीव अभयारण्य मुंगेर जिले में स्थित है और गर्म झरनों के लिए प्रसिद्ध है।
- नागी-नकटी पक्षी अभयारण्य बिहार के जमुई जिले में स्थित हैं।
- कुशेश्वर स्थान पक्षी अभयारण्य दरभंगा जिले में स्थित है।
- पंत (राजगीर) वन्यजीव अभयारण्य नालंदा जिले में स्थित है।
- गौतम बुद्ध वन्यजीव अभयारण्य गया जिले में स्थित है।
तालिका
- अभयारण्य/पार्क: वाल्मीकि राष्ट्रीय उद्यान · जिला: पश्चिमी चंपारण
- अभयारण्य/पार्क: विक्रमशिला डॉल्फिन अभयारण्य · जिला: भागलपुर
- अभयारण्य/पार्क: कावर झील पक्षी अभयारण्य · जिला: बेगूसराय
- अभयारण्य/पार्क: भीमबांध वन्यजीव अभयारण्य · जिला: मुंगेर
- अभयारण्य/पार्क: गौतम बुद्ध अभयारण्य · जिला: गया
- अभयारण्य/पार्क: कैमूर अभयारण्य · जिला: कैमूर और रोहतास
- अभयारण्य/पार्क: पंत (राजगीर) अभयारण्य · जिला: नालंदा
- अभयारण्य/पार्क: उदयपुर अभयारण्य · जिला: पश्चिमी चंपारण
- अभयारण्य/पार्क: कुशेश्वर स्थान · जिला: दरभंगा
अभ्यास प्रश्न (हल सहित)
- प्रश्न 18: बिहार का एकमात्र बाघ आरक्षित क्षेत्र (Tiger Reserve) कहाँ स्थित है?
(क) कैमूर (ख) पश्चिमी चंपारण (ग) मुंगेर (घ) गया
- ✔ उत्तर: (ख) पश्चिमी चंपारण — वाल्मीकि टाइगर रिजर्व बिहार का एकमात्र बाघ आरक्षित क्षेत्र है जो पश्चिमी चंपारण में स्थित है।
- प्रश्न 19: भारत का प्रथम डॉल्फिन अभयारण्य बिहार के किस जिले में है?
(क) पटना (ख) वैशाली (ग) भागलपुर (घ) कटिहार
- ✔ उत्तर: (ग) भागलपुर — विक्रमशिला गंगेटिक डॉल्फिन अभयारण्य भागलपुर जिले में गंगा नदी में स्थित है।
- प्रश्न 20: निम्नलिखित में से कौन सा युग्म सही सुमेलित नहीं है?
(क) कावर झील - बेगूसराय (ख) भीमबांध - मुंगेर (ग) उदयपुर अभयारण्य - राजस्थान (घ) गौतम बुद्ध अभयारण्य - गया
- ✔ उत्तर: (ग) उदयपुर अभयारण्य - राजस्थान — उदयपुर वन्यजीव अभयारण्य बिहार के पश्चिमी चंपारण जिले में स्थित है, न कि राजस्थान में।
- प्रश्न 21: बिहार की एकमात्र रामसर साइट कौन सी है?
(क) कुशेश्वर स्थान (ख) कावर झील (ग) बक्सर पक्षी अभयारण्य (घ) नागी बांध
- ✔ उत्तर: (ख) कावर झील — बेगूसराय की कावर झील बिहार की पहली और एकमात्र रामसर साइट घोषित की गई है।
- प्रश्न 22: बिहार के किस अभयारण्य में कश्मीरी पक्षी 'लालसर' मुख्य रूप से देखे जाते हैं?
(क) बक्सर पक्षी अभयारण्य (ख) नकटी पक्षी अभयारण्य (ग) पंत अभयारण्य (घ) वाल्मीकि अभयारण्य
- ✔ उत्तर: (क) बक्सर पक्षी अभयारण्य — बक्सर पक्षी अभयारण्य अक्टूबर में कश्मीर से आने वाले लालसर पक्षियों के लिए जाना जाता है।
📜 असली पिछले वर्ष के प्रश्न (BPSC)
- [BPSC 71वीं प्रारंभिक (13 सितंबर 2025), प्रश्न 114] निम्नलिखित में से कौन-सा पार्क/अभ्यारण्य बिहार में बाघ परियोजना के अर्न्तगत आता है?
(क) वाल्मीकी राष्ट्रीय पार्क (ख) उदयपुर वन्यजीव अभ्यारण्य (ग) भीमबन्द वन्यजीव अभ्यारण्य (घ) इनमें से कोई नहीं
- ✔ आधिकारिक उत्तर: (क) वाल्मीकी राष्ट्रीय पार्क — वाल्मीकि राष्ट्रीय पार्क बिहार का एकमात्र राष्ट्रीय उद्यान और बाघ परियोजना (Tiger Project) के अंतर्गत आने वाला क्षेत्र है।
परीक्षा में कैसे आता है
BPSC अक्सर अभयारण्यों के स्थान (जिलों) और 'एकमात्र' या 'प्रथम' जैसी विशेषताओं पर प्रश्न पूछता है। वाल्मीकि टाइगर रिजर्व और कावर झील से संबंधित प्रश्न बार-बार पूछे जाते हैं।
इनमें भ्रम न करें
- ✘ उदयपुर वन्यजीव अभयारण्य: छात्र अक्सर इसे राजस्थान में समझते हैं, लेकिन यह बिहार के पश्चिमी चंपारण में है।
- ✘ वाल्मीकि और उदयपुर: ये दोनों ही पश्चिमी चंपारण में हैं, लेकिन वाल्मीकि एकमात्र नेशनल पार्क है।
💡 वाल्मीकि और उदयपुर दोनों 'पश्चिम' (पश्चिमी चंपारण) में बाघ देखते हैं।
बिहार की पर्यावरणीय समस्याएँ: बाढ़, सूखा और आर्सेनिक
बिहार अपनी विशिष्ट भौगोलिक बनावट के कारण दोहरी प्राकृतिक आपदाओं का सामना करता है। उत्तर बिहार हिमालयी नदियों के कारण अत्यधिक बाढ़ प्रवण है, जहाँ कोसी नदी को अपनी विनाशकारी प्रकृति के कारण 'बिहार का शोक' कहा जाता है। इसके विपरीत, दक्षिण बिहार के जिले मानसूनी वर्षा की अनिश्चितता के कारण अक्सर सूखे की चपेट में रहते हैं। राज्य में जल प्रदूषण भी एक बड़ी समस्या है, विशेषकर गंगा के मैदानी इलाकों के भूजल में आर्सेनिक की उच्च मात्रा पाई जाती है। दक्षिण बिहार के कुछ जिलों में फ्लोराइड और उत्तर-पूर्वी जिलों में आयरन की अधिकता भी स्वास्थ्य के लिए गंभीर चुनौती बनी हुई है। सरकार इन समस्याओं के समाधान के लिए नदी जोड़ो परियोजनाओं और सुरक्षित पेयजल योजनाओं पर कार्य कर रही है।
मुख्य तथ्य
- बिहार भारत का सर्वाधिक बाढ़ प्रवण राज्य है, जिसका लगभग 73.06% क्षेत्रफल बाढ़ प्रभावित है।
- बिहार के कुल 38 जिलों में से 28 जिले बाढ़ की समस्या से ग्रस्त हैं।
- कोसी नदी को अपनी धाराओं के बार-बार बदलने के कारण 'बिहार का शोक' कहा जाता है।
- दक्षिण बिहार के गया, औरंगाबाद, नवादा और जमुई जिले मुख्य रूप से सूखा प्रवण क्षेत्र हैं।
- बिहार के 18 जिलों के भूजल में आर्सेनिक की मात्रा विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मानकों से अधिक है।
- आर्सेनिक संदूषण मुख्य रूप से गंगा नदी के किनारे स्थित जिलों जैसे भोजपुर, बक्सर और वैशाली में पाया जाता है।
- दक्षिण बिहार के 11 जिलों (जैसे मुंगेर, रोहतास) में फ्लोराइड की समस्या गंभीर है।
- कोसी-मेची नदी जोड़ो परियोजना भारत की दूसरी सबसे बड़ी नदी जोड़ो परियोजना है।
- कोसी-मेची परियोजना से सीमांचल के चार जिलों: अररिया, पूर्णिया, किशनगंज और कटिहार को लाभ होगा।
- बिहार में बाढ़ का मुख्य कारण नेपाल के जलग्रहण क्षेत्रों में होने वाली भारी वर्षा है।
- भूजल में आयरन (लोहा) की समस्या मुख्य रूप से उत्तर-पूर्वी जिलों जैसे पूर्णिया और कटिहार में है।
तालिका
- समस्या: बाढ़ · प्रभावित मुख्य जिले: सहरसा, सुपौल, मधेपुरा, खगड़िया · विशेष तथ्य: राज्य का 73% क्षेत्र प्रभावित
- समस्या: सूखा · प्रभावित मुख्य जिले: गया, औरंगाबाद, नवादा, जमुई · विशेष तथ्य: दक्षिण बिहार में वर्षा की कमी
- समस्या: आर्सेनिक · प्रभावित मुख्य जिले: भोजपुर, बक्सर, वैशाली, पटना · विशेष तथ्य: गंगा के तटवर्ती 18 जिले
- समस्या: फ्लोराइड · प्रभावित मुख्य जिले: मुंगेर, नवादा, रोहतास, जमुई · विशेष तथ्य: दक्षिण बिहार के 11 जिले
- समस्या: आयरन · प्रभावित मुख्य जिले: पूर्णिया, कटिहार, किशनगंज · विशेष तथ्य: उत्तर-पूर्वी बिहार के 9 जिले
अभ्यास प्रश्न (हल सहित)
- प्रश्न 23: बिहार का कौन सा भाग सर्वाधिक बाढ़ प्रवण है?
(क) दक्षिण बिहार (ख) उत्तर बिहार (ग) पूर्वी बिहार (घ) पश्चिमी बिहार
- ✔ उत्तर: (ख) उत्तर बिहार — हिमालय से आने वाली नदियों (कोसी, गंडक, बागमती) के कारण उत्तर बिहार का 70% से अधिक क्षेत्र बाढ़ प्रभावित रहता है।
- प्रश्न 24: कोसी-मेची लिंक परियोजना से बिहार के किन जिलों को सिंचाई लाभ प्राप्त होगा?
(क) पटना, गया, नालंदा (ख) दरभंगा, मधुबनी, सहरसा (ग) अररिया, पूर्णिया, किशनगंज, कटिहार (घ) रोहतास, कैमूर, बक्सर
- ✔ उत्तर: (ग) अररिया, पूर्णिया, किशनगंज, कटिहार — यह परियोजना सीमांचल के इन चार जिलों में बाढ़ नियंत्रण और सिंचाई के लिए बनाई गई है।
- प्रश्न 25: बिहार के किस जिले में भूजल में आर्सेनिक का संदूषण सबसे अधिक पाया गया है?
(क) भोजपुर (ख) गया (ग) किशनगंज (घ) बांका
- ✔ उत्तर: (क) भोजपुर — गंगा के मैदानी इलाकों में स्थित भोजपुर जिला आर्सेनिक संदूषण से सर्वाधिक प्रभावित जिलों में से एक है।
- प्रश्न 26: निम्नलिखित में से कौन सा जिला बिहार के सूखा प्रवण क्षेत्र के अंतर्गत आता है?
(क) सहरसा (ख) नवादा (ग) सुपौल (घ) मधेपुरा
- ✔ उत्तर: (ख) नवादा — नवादा दक्षिण बिहार का हिस्सा है जहाँ वर्षा की कमी के कारण सूखे की स्थिति बनी रहती है।
- प्रश्न 27: बिहार में फ्लोराइड की समस्या मुख्य रूप से किस क्षेत्र में पाई जाती है?
(क) उत्तर-पूर्वी बिहार (ख) उत्तर-पश्चिमी बिहार (ग) दक्षिण बिहार (घ) मध्य बिहार
- ✔ उत्तर: (ग) दक्षिण बिहार — दक्षिण बिहार के पहाड़ी और पठारी क्षेत्रों (जैसे मुंगेर, जमुई) के भूजल में फ्लोराइड की अधिकता है।
📜 असली पिछले वर्ष के प्रश्न (BPSC)
- [BPSC 71वीं प्रारंभिक (13 सितंबर 2025), प्रश्न 12] कोसी-मेची लिंक परियोजना से बिहार के कौन-कौन से जिलों को लाभ होगा?
(क) पटना, नालंदा, गया, सिवान (ख) दरभंगा, मुजफ्फरपुर, सीतामढ़ी, बेगूसराय (ग) अररिया, पूर्णिया, किशनगंज, कटिहार (घ) उपरोक्त में से एक से अधिक
- ✔ आधिकारिक उत्तर: (ग) अररिया, पूर्णिया, किशनगंज, कटिहार — कोसी-मेची लिंक परियोजना का उद्देश्य कोसी के अतिरिक्त पानी को मेची नदी में स्थानांतरित करना है, जिससे अररिया, पूर्णिया, किशनगंज और कटिहार जिलों को लाभ होगा।
परीक्षा में कैसे आता है
BPSC में इस विषय से अक्सर बाढ़ प्रभावित जिलों के नाम, कोसी नदी की प्रकृति, और भूजल प्रदूषण (आर्सेनिक/फ्लोराइड) के वितरण पर प्रश्न पूछे जाते हैं। हाल के वर्षों में नदी जोड़ो परियोजनाओं (जैसे कोसी-मेची) पर विशेष ध्यान दिया गया है।
इनमें भ्रम न करें
- ✘ कोसी को 'बिहार का शोक' कहा जाता है, जबकि दामोदर को 'बंगाल का शोक' कहा जाता था।
- ✘ आर्सेनिक की समस्या गंगा के किनारे (मैदानी भाग) में है, जबकि फ्लोराइड की समस्या दक्षिण बिहार के पठारी जिलों में है।
💡 कोसी-मेची के लाभार्थी जिले: 'APK-K' (Araria, Purnia, Kishanganj, Katihar)
एक नज़र में (Revision)
- कोपेन के अनुसार बिहार की जलवायु मुख्य रूप से 'Cwg' (नमी वाली उपोष्णकटिबंधीय) श्रेणी में आती है।
- बिहार में मानसून का आगमन आमतौर पर जून के मध्य में होता है और किशनगंज में सर्वाधिक वर्षा होती है।
- ग्रीष्म ऋतु में चलने वाली गर्म हवा को 'लू' और मानसून पूर्व वर्षा को 'काल बैसाखी' कहा जाता है।
- उत्तर बिहार में नवीन जलोढ़ (खादर) और दक्षिण बिहार में पुरानी जलोढ़ (बांगर) मिट्टी की प्रधानता है।
- गंगा के दक्षिणी तट पर 8-10 किमी चौड़ी पट्टी में 'टाल' मिट्टी पाई जाती है जो रबी फसलों के लिए प्रसिद्ध है।
- सहरसा और पूर्णिया के कुछ हिस्सों में चूना प्रधान 'बलसुंदरी' मिट्टी पाई जाती है।
- दक्षिण बिहार की भारी और चिकनी मिट्टी को 'करैल-केवाल' मिट्टी के नाम से जाना जाता है।
- भारत वन स्थिति रिपोर्ट 2021 के अनुसार बिहार का कुल वन आवरण लगभग 7.84% है।
- पश्चिम चंपारण में स्थित वाल्मीकि टाइगर रिजर्व बिहार का एकमात्र राष्ट्रीय उद्यान और बाघ अभयारण्य है।
- बेगूसराय की कांवर झील बिहार की पहली और एकमात्र रामसर साइट (Ramsar Site) है।
- भागलपुर में स्थित विक्रमशिला गांगेय डॉल्फिन अभयारण्य एशिया का पहला डॉल्फिन संरक्षित क्षेत्र है।
- बिहार का उत्तरी भाग बाढ़ से और दक्षिणी भाग सूखे से अत्यधिक प्रभावित रहता है।
- गंगा के मैदानी इलाकों के भूजल में आर्सेनिक संदूषण एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या है।
अपने आप को जाँचिए — 9 प्रश्न
1. कोपेन के जलवायु वर्गीकरण के अनुसार, उत्तर बिहार की जलवायु को किस रूप में प्रदर्शित किया जा सकता है?
- (क) Cwg
- (ख) Aw
- (ग) Amw
- (घ) BShw
उत्तर देखें
उत्तर: (क) Cwg
कोपेन के वर्गीकरण के अनुसार, बिहार का अधिकांश भाग, विशेषकर उत्तर बिहार, Cwg (नमी वाली उपोष्णकटिबंधीय) जलवायु के अंतर्गत आता है।
2. बिहार के किस जिले में औसत वार्षिक वर्षा सर्वाधिक होती है?
- (क) पूर्णिया
- (ख) कटिहार
- (ग) किशनगंज
- (घ) अररिया
उत्तर देखें
उत्तर: (ग) किशनगंज
किशनगंज बिहार का सबसे पूर्वी जिला है और बंगाल की खाड़ी के मानसून से निकटता के कारण यहाँ सर्वाधिक वर्षा होती है।
3. बिहार में 'टाल' (Tal) मिट्टी का विस्तार कहाँ पाया जाता है?
- (क) गंगा के उत्तरी मैदान में
- (ख) गंगा के दक्षिणी तट पर 8-10 किमी की पट्टी में
- (ग) तराई क्षेत्र में
- (घ) कैमूर की पहाड़ियों पर
उत्तर देखें
उत्तर: (ख) गंगा के दक्षिणी तट पर 8-10 किमी की पट्टी में
टाल मिट्टी गंगा के दक्षिणी तट पर बक्सर से भागलपुर तक एक संकीर्ण पट्टी में पाई जाती है, जो वर्षा ऋतु में जलमग्न रहती है।
4. बिहार की 'बलसुंदरी' मिट्टी के संदर्भ में कौन सा कथन सत्य है?
- (क) यह मुख्य रूप से दक्षिण बिहार में पाई जाती है
- (ख) इसमें चूने (Lime) की प्रधानता होती है
- (ग) यह केवल धान की खेती के लिए उपयुक्त है
- (घ) यह एक अम्लीय मिट्टी है
उत्तर देखें
उत्तर: (ख) इसमें चूने (Lime) की प्रधानता होती है
बलसुंदरी मिट्टी उत्तर बिहार (सहरसा, मुजफ्फरपुर, पूर्णिया) में पाई जाती है और इसमें चूने की मात्रा अधिक होती है, जो बागवानी फसलों के लिए अच्छी है।
5. भारत वन स्थिति रिपोर्ट (ISFR) 2021 के अनुसार, बिहार के कुल भौगोलिक क्षेत्र का कितना प्रतिशत वन आवरण (Forest Cover) है?
- (क) 6.35%
- (ख) 7.84%
- (ग) 9.21%
- (घ) 10.50%
उत्तर देखें
उत्तर: (ख) 7.84%
ISFR 2021 के अनुसार, बिहार का वन आवरण 7,380.79 वर्ग किमी है, जो इसके कुल भौगोलिक क्षेत्रफल का 7.84% है।
6. बिहार का एकमात्र राष्ट्रीय उद्यान 'वाल्मीकि राष्ट्रीय उद्यान' किस जिले में स्थित है?
- (क) पूर्वी चंपारण
- (ख) पश्चिम चंपारण
- (ग) गया
- (घ) रोहतास
उत्तर देखें
उत्तर: (ख) पश्चिम चंपारण
वाल्मीकि राष्ट्रीय उद्यान और टाइगर रिजर्व बिहार के पश्चिम चंपारण जिले के उत्तर-पश्चिमी भाग में स्थित है।
7. बिहार की किस झील को राज्य का पहला 'रामसर साइट' घोषित किया गया है?
- (क) कुशेश्वर स्थान झील
- (ख) घोघा झील
- (ग) कांवर झील
- (घ) सिमरी झील
उत्तर देखें
उत्तर: (ग) कांवर झील
बेगूसराय जिले में स्थित कांवर झील (कबरताल) को 2020 में बिहार की पहली रामसर साइट के रूप में मान्यता दी गई थी।
8. विक्रमशिला गांगेय डॉल्फिन अभयारण्य बिहार के किस जिले में स्थित है?
- (क) पटना
- (ख) मुंगेर
- (ग) भागलपुर
- (घ) वैशाली
उत्तर देखें
उत्तर: (ग) भागलपुर
विक्रमशिला गांगेय डॉल्फिन अभयारण्य भागलपुर जिले में सुल्तानगंज से कहलगांव तक गंगा नदी के 50-60 किमी क्षेत्र में फैला हुआ है।
9. बिहार के गंगा के मैदानी इलाकों के भूजल में निम्नलिखित में से कौन सा प्रदूषक मुख्य रूप से पाया जाता है?
- (क) फ्लोराइड
- (ख) आर्सेनिक
- (ग) यूरेनियम
- (घ) नाइट्रेट
उत्तर देखें
उत्तर: (ख) आर्सेनिक
बिहार के गंगा के किनारे वाले जिलों (जैसे पटना, भोजपुर, वैशाली) के भूजल में आर्सेनिक का स्तर सुरक्षित सीमा से बहुत अधिक पाया गया है।
English version — Climate, Soil, Vegetation, and Wildlife of Bihar
This chapter is crucial for BPSC Prelims and Mains (GS Paper 2) as it covers Bihar's physical geography and environmental challenges. Understanding soil types and climate patterns is essential for answering questions on agriculture and disaster management.
Climate of Bihar: Seasons, Rainfall Pattern, Kalbaisakhi and Loo
The climate of Bihar is predominantly subtropical monsoon type with continental characteristics. According to Koppen's climate classification, Northern Bihar largely falls under 'Cwg' while Southern Bihar falls under 'Aw' and 'Cwg'. Bihar receives the bulk of its precipitation between mid-June and mid-October via the Bay of Bengal branch of the South-West Monsoon. Rainfall decreases from east to west; hence, Kishanganj in the northeast receives the highest rainfall, while Aurangabad in the southwest receives the lowest. During the summer months of April and May, extremely hot and dry westerly winds known as 'Loo' sweep across the plains, whereas pre-monsoon convective thunderstorms known as 'Kalbaisakhi' or 'Nor'westers' bring localized showers beneficial for summer crops.
Key facts
- According to Koppen's classification, the majority of Bihar's climate is of 'Cwg' (subtropical monsoon) type.
- According to Trewartha, Bihar's climate falls under 'Caa' and under Thornthwaite it falls under 'CA'w' and 'CB'w'.
- The average annual rainfall in Bihar is approximately 112 cm (1120 mm).
- Kishanganj is the district with the highest annual rainfall in Bihar (approx. 180-200 cm).
- Aurangabad is the district receiving the lowest rainfall in Bihar (less than 100 cm).
- The South-West monsoon usually arrives in Bihar between June 10 and 15, entering first via Kishanganj district.
- Most of the rainfall in Bihar (approx. 85-90%) is brought by the Bay of Bengal branch of the South-West Monsoon.
- Winter light rainfall during December-January in Bihar is caused by Western Disturbances, which is beneficial for Rabi crops.
- Gaya is both the hottest as well as the coldest district in Bihar.
- May is the hottest month in Bihar, with temperatures frequently touching 44-45°C.
- The hot, dry, and dust-raising westerly winds blowing during summer are called 'Loo', with speeds around 8-16 km/h.
- The distribution of rainfall in Bihar decreases from east to west and generally from north to south.
Table
- जलवायु घटक / परिघटना: कोपेन जलवायु प्रकार · प्रमुख विशेषता / आंकड़ा: Cwg (शुष्क शीत उपोष्ण मानसूनी) · संबद्ध जिला / क्षेत्र: उत्तरी एवं मध्य बिहार
- जलवायु घटक / परिघटना: सर्वाधिक वर्षा · प्रमुख विशेषता / आंकड़ा: 180 - 200 सेमी · संबद्ध जिला / क्षेत्र: किशनगंज (पूर्वोत्तर बिहार)
- जलवायु घटक / परिघटना: न्यूनतम वर्षा · प्रमुख विशेषता / आंकड़ा: 90 - 100 सेमी · संबद्ध जिला / क्षेत्र: औरंगाबाद / अरवल (दक्षिण-पश्चिम)
- जलवायु घटक / परिघटना: सर्वाधिक गर्म स्थान · प्रमुख विशेषता / आंकड़ा: मई में 44°C - 45°C+ · संबद्ध जिला / क्षेत्र: गया
- जलवायु घटक / परिघटना: सर्वाधिक ठंडा स्थान · प्रमुख विशेषता / आंकड़ा: जनवरी में 3°C - 4°C · संबद्ध जिला / क्षेत्र: गया
- जलवायु घटक / परिघटना: ग्रीष्मकालीन गर्म हवाएं (लू) · प्रमुख विशेषता / आंकड़ा: शुष्क पछुआ पवन (8-16 किमी/घंटा) · संबद्ध जिला / क्षेत्र: दक्षिण एवं मध्य बिहार के मैदान
- जलवायु घटक / परिघटना: कालवैशाखी (नार्वेस्टर) · प्रमुख विशेषता / आंकड़ा: पूर्व-मानसूनी संवहनीय वर्षा/ओलावृष्टि · संबद्ध जिला / क्षेत्र: पूर्वी बिहार (पूर्णिया, कटिहार, किशनगंज)
- जलवायु घटक / परिघटना: शीतकालीन वर्षा · प्रमुख विशेषता / आंकड़ा: पश्चिमी विक्षोभ (रबी फसल हेतु उपयोगी) · संबद्ध जिला / क्षेत्र: समग्र बिहार (विशेषतः पश्चिमी भाग)
Practice questions (solved)
- Q 1: कोपेन के जलवायु वर्गीकरण के अनुसार, उत्तर बिहार का अधिकांश भाग किस जलवायु वर्ग के अंतर्गत आता है?
(क) Aw (ख) Cwg (ग) BShw (घ) As
- ✔ Answer: (ख) Cwg — कोपेन के अनुसार उत्तर बिहार तथा मध्य गंगा मैदान 'Cwg' (शुष्क शीत ऋतु वाला उपोष्ण मानसूनी) जलवायु वर्ग में आता है।
- Q 2: बिहार में दक्षिण-पश्चिम मानसून की किस शाखा से सर्वाधिक वर्षा प्राप्त होती है?
(क) अरब सागर शाखा (ख) बंगाल की खाड़ी शाखा (ग) पश्चिमी विक्षोभ (घ) नार्वेस्टर
- ✔ Answer: (ख) बंगाल की खाड़ी शाखा — बिहार में कुल वर्षा का 85% से अधिक भाग दक्षिण-पश्चिम मानसून की बंगाल की खाड़ी शाखा द्वारा प्राप्त होता है।
- Q 3: बिहार के निम्नलिखित जिलों में से किस जिले में सबसे अधिक औसत वार्षिक वर्षा दर्ज की जाती है?
(क) पश्चिमी चंपारण (ख) गया (ग) किशनगंज (घ) पटना
- ✔ Answer: (ग) किशनगंज — किशनगंज पूर्वोत्तर कोने में स्थित होने और बंगाल की खाड़ी के निकट होने के कारण सर्वाधिक वर्षा (180-200 सेमी) प्राप्त करता है।
- Q 4: बिहार के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. बिहार का सबसे गर्म एवं सबसे ठंडा दोनों ही जिला गया है।
2. ग्रीष्म ऋतु में चलने वाली गर्म और शुष्क पछुआ पवन को 'लू' कहा जाता है।
3. राज्य में पूर्व से पश्चिम की ओर जाने पर वर्षा की मात्रा बढ़ती है।
उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
(क) केवल 1 और 2 (ख) केवल 2 और 3 (ग) केवल 1 और 3 (घ) 1, 2 और 3
- ✔ Answer: (क) केवल 1 और 2 — कथन 3 गलत है क्योंकि बिहार में पूर्व से पश्चिम की ओर जाने पर वर्षा की मात्रा घटती है, बढ़ती नहीं।
- Q 5: बिहार में शीत ऋतु में होने वाली चक्रवातीय वर्षा का प्रमुख कारण क्या है?
(क) दक्षिण-पश्चिम मानसून (ख) लौटता हुआ मानसून (ग) भूमध्यसागरीय पश्चिमी विक्षोभ (घ) स्थानीय संवहनीय धाराएं
- ✔ Answer: (ग) भूमध्यसागरीय पश्चिमी विक्षोभ — शीत ऋतु (दिसंबर-जनवरी) में होने वाली वर्षा भूमध्य सागर से उठने वाले पश्चिमी विक्षोभों के कारण होती है।
- Q 6: बिहार में अप्रैल और मई के महीनों में स्थानीय तड़ित-झंझावात से होने वाली वर्षा को क्या कहा जाता है?
(क) मावठ (ख) कालवैशाखी / नार्वेस्टर (ग) चेरी ब्लॉसम (घ) लू
- ✔ Answer: (ख) कालवैशाखी / नार्वेस्टर — बंगाल और बिहार में ग्रीष्मकालीन पूर्व-मानसूनी तीव्र आंधी-तूफान वाली वर्षा को कालवैशाखी या नार्वेस्टर कहा जाता है।
📜 Real previous-year questions (BPSC)
- [BPSC 71वीं प्रारंभिक (13 सितंबर 2025), प्रश्न 120] बिहार का अधिकांश भाग निम्नलिखित में से किस प्रकार की जलवायु के अन्तर्गत आता है?
(क) उपोष्ण कटिबंधीय मानसून (ख) उष्णकटिबंधीय सवाना (ग) गर्म एवं शुष्क (घ) गर्म एवं शुष्क मरुस्थल
- ✔ Official answer: (क) उपोष्ण कटिबंधीय मानसून — बिहार की अक्षांशीय स्थिति और मौसमी मानसूनी पवनों के प्रभाव के कारण इसका अधिकांश भाग उपोष्ण कटिबंधीय मानसूनी (Subtropical Monsoon) जलवायु क्षेत्र के अंतर्गत आता है।
How it is asked
BPSC frequently asks questions on Koppen's classification codes (Cwg/Aw), maximum rainfall district (Kishanganj), minimum rainfall district (Aurangabad), extreme temperature district (Gaya), and characteristics of local winds like Loo and Kalbaisakhi.
Do not confuse
- ✘ कोपेन वर्गीकरण: उत्तर बिहार मुख्य रूप से 'Cwg' के तहत आता है, जबकि दक्षिण बिहार के कुछ हिस्से 'Aw' में आते हैं। कई छात्र पूरे बिहार को केवल 'Aw' मान लेते हैं जो गलत है।
- ✘ वर्षा की दिशा: बिहार में वर्षा पूर्व से पश्चिम की ओर जाने पर 'घटती' है, छात्र अक्सर इसे बंगाल की खाड़ी के संरेखण के कारण उल्टा समझ लेते हैं।
- ✘ सबसे गर्म बनाम सबसे ठंडा जिला: दोनों का उत्तर 'गया' ही है, क्योंकि पठारी चट्टानी संरचना और महाद्वीपीय स्थिति के कारण यह गर्मियों में सबसे अधिक तपता है और सर्दियों में सबसे ज्यादा ठंडा होता है।
💡 याद रखें 'GK Monsoon': G से Gaya (सबसे गर्म व ठंडा), K से Kishanganj (सबसे अधिक वर्षा वाला जिला)।
Soils of Bihar: Alluvial (Khadar/Bangar), Tal, Diara, Balsundari, Karail-Kewal
Most of Bihar falls within the fertile Gangetic plain formed by sediments deposited by the Ganga and its perennial tributaries. Based on physical geography and the course of the Ganga, the soils of Bihar are broadly classified into North Bihar Plains and South Bihar Plains. North Bihar is dominated by Khadar (new alluvium), Balsundari (lime-rich older alluvium), and Piedmont swamp soils. South Bihar features Karail-Kewal (heavy clayey older alluvium), Tal soils (waterlogged depression belt south of Ganga), and Balther soils near the southern plateau fringes. In addition, dynamic riverbed sandbanks formed by recurring floods are known as Diara lands. These distinct soil types form the backbone of Bihar's intensive cultivation of paddy, wheat, maize, sugarcane, and pulses.
Key facts
- Nearly 90% of Bihar's total geographical area is covered by alluvial soil.
- Khadar (new alluvium) is replenished annually by floods and is predominantly found in Purnia, Saharsa, Darbhanga, Khagaria, and Katihar.
- Balsundari soil is the older alluvium of North Bihar, rich in lime content (up to 30%), and highly suitable for maize, wheat, and sugarcane.
- Balsundari soil extends mainly across Saran, Siwan, Gopalganj, Muzaffarpur, Vaishali, and Samastipur districts.
- Karail-Kewal is the older alluvium of South Bihar, where 'Karail' is heavy clay and 'Kewal' represents yellowish-brown loamy soil.
- Karail-Kewal soil extends from Rohtas through Gaya, Aurangabad, Patna, Jehanabad, Munger, to Bhagalpur.
- Tal soil extends along the southern bank of the Ganga in an 8-10 km wide low-lying belt from Buxar to Bhagalpur (Pirpainti).
- The Tal region remains inundated during the monsoon, making it famous for bumper winter (rabi) pulse crops (gram, lentil, khesari) and oilseeds.
- Diara soil is formed by sand and silt deposits in active floodplains of Ganga, Gandak, Kosi, and Sone, ideal for cucurbits and pointed gourd.
- Balther soil is a narrow belt of reddish-yellow, acidic, gravelly soil along the junction of the Chotanagpur plateau and South Bihar plain (Kaimur to Banka).
- Piedmont swamp soil is exclusively found in the northwestern part of West Champaran district around the Someshwar hill tract.
- Soils of North Bihar are generally deficient in nitrogen and phosphorus, whereas potash content is usually adequate.
Table
- मिट्टी का प्रकार: खादर (नवीन जलोढ़) · प्रमुख विस्तार (जिले): पूर्णिया, सहरसा, कटिहार, दरभंगा, समस्तीपुर, खगड़िया · मुख्य विशेषताएँ एवं संघटक: प्रतिवर्ष बाढ़ से नवीनीकृत, गादयुक्त, भूरा/हल्का रंग, उपजाऊ · उपयुक्त फसलें: धान, जूट, मक्का, गेहूँ
- मिट्टी का प्रकार: बलसुंदरी (पुरानी जलोढ़) · प्रमुख विस्तार (जिले): सारण, सीवान, गोपालगंज, वैशाली, मुजफ्फरपुर, चंपारण · मुख्य विशेषताएँ एवं संघटक: चूनेदार (कैलकैरियस), क्षारीय प्रकृति, सफेद-धूसर रंग · उपयुक्त फसलें: गन्ना, मक्का, गेहूँ, तम्बाकू
- मिट्टी का प्रकार: करैल-केवाल (पुरानी जलोढ़) · प्रमुख विस्तार (जिले): रोहतास, भोजपुर, औरंगाबाद, गया, जहानाबाद, पटना, मुंगेर · मुख्य विशेषताएँ एवं संघटक: भारी चिकनी मिट्टी, सूखने पर दरारें, उच्च जलधारण क्षमता, तटस्थ से क्षारीय · उपयुक्त फसलें: धान, गेहूँ, चना, अलसी
- मिट्टी का प्रकार: टाल (ताल) मिट्टी · प्रमुख विस्तार (जिले): पटना (बख्तियारपुर/मोकामा), लखीसराय (बड़हिया), मुंगेर, भागलपुर · मुख्य विशेषताएँ एवं संघटक: गंगा के दक्षिण 8-10 किमी गर्त, बरसात में जलमग्न, भारी धूसर मिट्टी · उपयुक्त फसलें: दलहन (चना, मसूर, खेसारी), तिलहन
- मिट्टी का प्रकार: दियारा मिट्टी · प्रमुख विस्तार (जिले): गंगा, सोन, गंडक, घाघरा के कछारी/बाढ़ क्षेत्र · मुख्य विशेषताएँ एवं संघटक: बालू-सिल्ट का मिश्रण, नवीन कांप जमाव, ढीली संरचना · उपयुक्त फसलें: मक्का, परवल, तरबूज, ककड़ी
- मिट्टी का प्रकार: बलथर मिट्टी · प्रमुख विस्तार (जिले): कैमूर, रोहतास, औरंगाबाद, गया, जमुई, बांका (पठारी सीमा) · मुख्य विशेषताएँ एवं संघटक: लाल-पीला रंग, बालू-कंकड़ युक्त, अम्लीय, कम उर्वरा · उपयुक्त फसलें: मक्का, ज्वार, बाजरा, अरहर
- मिट्टी का प्रकार: पीडमोंट दलदली मिट्टी · प्रमुख विस्तार (जिले): पश्चिमी चंपारण (रामनगर और सोमेश्वर श्रेणी क्षेत्र) · मुख्य विशेषताएँ एवं संघटक: कंकड़-पत्थर युक्त, दलदली, जैविक पदार्थों से भरपूर, अम्लीय · उपयुक्त फसलें: धान, गन्ना, वनस्पति
Practice questions (solved)
- Q 7: बिहार में 'बलसुंदरी' मिट्टी की प्रमुख विशेषता क्या है?
(क) इसमें चूने (कैलकैरियस) की अत्यधिक प्रचुरता होती है (ख) यह अत्यधिक अम्लीय और बालू-प्रधान होती है (ग) यह केवल दक्षिणी बिहार के पठारी भाग में पाई जाती है (घ) यह वर्षा ऋतु में जलमग्न रहने वाली अनुपजाऊ मिट्टी है
- ✔ Answer: (क) इसमें चूने (कैलकैरियस) की अत्यधिक प्रचुरता होती है — बलसुंदरी उत्तरी बिहार की पुरानी जलोढ़ मिट्टी है, जिसमें चूने (Lime) की मात्रा 10% से 30% तक होती है।
- Q 8: गंगा के दक्षिणी तट पर बक्सर से भागलपुर तक विस्तृत 8 से 10 किमी चौड़े निम्न भूमि क्षेत्र में पाई जाने वाली मिट्टी कौन-सी है?
(क) बलथर मिट्टी (ख) टाल मिट्टी (ग) खादर मिट्टी (घ) पीडमोंट दलदली मिट्टी
- ✔ Answer: (ख) टाल मिट्टी — गंगा के दक्षिणी तटबंध के पीछे स्थित जलमग्न प्राकृतिक गर्त वाले क्षेत्र को टाल क्षेत्र कहा जाता है और वहाँ टाल मिट्टी पाई जाती है।
- Q 9: बिहार की 'करैल-केवाल' मिट्टी के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन असत्य है?
(क) यह दक्षिणी बिहार के मैदानी भागों की पुरानी जलोढ़ मिट्टी है। (ख) इस मिट्टी की जलधारण क्षमता काफी अधिक होती है। (ग) यह मिट्टी सूखने पर कड़ी हो जाती है और इसमें गहरी दरारें पड़ जाती हैं। (घ) यह मुख्य रूप से पश्चिमी चंपारण और किशनगंज जिलों में पाई जाती है।
- ✔ Answer: (घ) यह मुख्य रूप से पश्चिमी चंपारण और किशनगंज जिलों में पाई जाती है। — करैल-केवाल दक्षिणी बिहार (रोहतास, पटना, गया, औरंगाबाद, मुंगेर) की मिट्टी है, जबकि पश्चिमी चंपारण और किशनगंज उत्तरी बिहार में हैं।
- Q 10: बिहार में नदियों के पेटे तथा बाढ़ क्षेत्रों में बालू व गाद से निर्मित उपजाऊ द्वीप सदृश भूमि क्षेत्र को किस नाम से जाना जाता है?
(क) दियारा भूमि (ख) चौर भूमि (ग) मन भूमि (घ) तराई भूमि
- ✔ Answer: (क) दियारा भूमि — बाढ़ क्षेत्र में अवसादों के जमाव से बने ऊँचे कछारी मैदान या नदीय द्वीपों को बिहार में 'दियारा' कहा जाता है।
- Q 11: बिहार के निम्नलिखित जिलों में से किसमें 'बलथर मिट्टी' की संकीर्ण पट्टी पाई जाती है?
(क) सीतामढ़ी, शिवहर, मुजफ्फरपुर (ख) कैमूर, रोहतास, औरंगाबाद, बांका (ग) सहरसा, सुपौल, मधेपुरा (घ) गोपालगंज, सीवान, सारण
- ✔ Answer: (ख) कैमूर, रोहतास, औरंगाबाद, बांका — बलथर मिट्टी छोटानागपुर पठार की सीमा से लगे दक्षिणी जिलों जैसे कैमूर, रोहतास, औरंगाबाद, गया, नवादा, जमुई और बांका में पाई जाती है।
- Q 12: बिहार का टाल क्षेत्र निम्नलिखित में से किस कृषि उत्पाद के लिए राज्य भर में सबसे प्रसिद्ध है?
(क) जूट और मखाना (ख) दलहन (चना, मसूर, खेसारी) (ग) चाय और अनानास (घ) गन्ना और कपास
- ✔ Answer: (ख) दलहन (चना, मसूर, खेसारी) — टाल मिट्टी वर्षा के पानी से भरी रहने के बाद रबी मौसम में सूखती है, जो दलहनी फसलों के अत्यधिक उत्पादन के लिए जानी जाती है।
How it is asked
BPSC regularly asks direct identification questions on soil types (regions of Balsundari or Karail-Kewal), their pedological characteristics (lime content, moisture retention, cracking), and district-matching questions.
Do not confuse
- ✘ बलसुंदरी और बलथर में अंतर: 'बलसुंदरी' उत्तरी बिहार की चूना-युक्त पुरानी जलोढ़ है (सारण, मुजफ्फरपुर), जबकि 'बलथर' दक्षिणी सीमावर्ती पठारी भाग (कैमूर-बांका) की लाल-पीली अम्लीय कंकरीली मिट्टी है।
- ✘ खादर और बांगर का स्थान: उत्तरी बिहार में कोसी-बागमती का बाढ़ क्षेत्र 'खादर' (नवीन जलोढ़) है, जबकि दक्षिणी बिहार का पुराना जलोढ़ भाग 'करैल-केवाल' (बांगर का स्थानीय रूप) कहलाता है।
- ✘ टाल और दियारा: 'टाल' दक्षिणी गंगा तट की गर्तनुमा भूमि है जो केवल रबी फसलों (दालों) हेतु उपयुक्त है, जबकि 'दियारा' नदी की धारा के बीच या किनारे बालू मिश्रित ऊँची कछारी भूमि है जो जायद/सब्जियों हेतु प्रसिद्ध है।
💡 याद रखें: उत्तर में 'सुंदरी' (बलसुंदरी = चूने वाली मीठी मिट्टी), दक्षिण में 'कड़ा करैल' (करैल-केवाल = भारी चिकनी मिट्टी), और गंगा किनारे 'दाल वाला टाल'।
Forests and Forest Cover in Bihar
Based on rainfall and topography, Bihar predominantly features two types of deciduous forests: Moist Deciduous Forests and Dry Deciduous Forests. Moist deciduous forests are found in north-eastern and Himalayan Terai regions (like West Champaran and Kishanganj) receiving over 120 cm of rainfall. Conversely, dry deciduous forests thrive in the drier southern and south-western hilly tracts of Bihar. According to ISFR 2021, Bihar's total forest cover is 7,380.79 sq km, accounting for about 7.84% of its geographical area. Kaimur ranks highest in forest cover (both area and percentage), while Sheikhpura has the lowest forest cover.
Key facts
- According to ISFR 2021, total forest cover in Bihar is 7,380.79 sq km, which is 7.84% of the total geographical area.
- According to ISFR 2021, tree cover in Bihar is 2,341 sq km (2.48%).
- The combined forest and tree cover in Bihar is 9,721.79 sq km (10.32%).
- The district with the highest forest cover area in Bihar is Kaimur (1,051.56 sq km).
- The district with the lowest forest cover area in Bihar is Sheikhpura (1.19 sq km).
- Percentage-wise, Kaimur has the highest forest cover (31.56%), followed by Jamui (21.34%).
- Percentage-wise, Sheikhpura has the lowest forest cover (0.17%).
- The highest area of Very Dense Forest in Bihar is found in West Champaran district (249.34 sq km).
- Moist Deciduous Forests are found in regions receiving over 120 cm rainfall (e.g., West Champaran, Kishanganj).
- Dry Deciduous Forests are found in southern hills with less than 120 cm rainfall, featuring Sal, Khair, and Amaltas.
- According to ISFR 2021, Bihar recorded an increase of 75 sq km in forest cover compared to the 2019 assessment.
Table
- वन का प्रकार: आर्द्र पर्णपाती वन (Moist Deciduous) · वार्षिक वर्षा: 120 सेमी से अधिक · प्रमुख क्षेत्र/जिले: पश्चिमी चंपारण, किशनगंज, अररिया, पूर्णिया · प्रमुख वृक्ष प्रजातियाँ: साल, शीशम, सेमल, महुआ, बांस
- वन का प्रकार: शुष्क पर्णपाती वन (Dry Deciduous) · वार्षिक वर्षा: 120 सेमी से कम · प्रमुख क्षेत्र/जिले: कैमूर, रोहतास, गया, औरंगाबाद, नवादा, जमुई · प्रमुख वृक्ष प्रजातियाँ: साल, अमलतास, खैर, पलाश, नीम, महुआ
Practice questions (solved)
- Q 13: भारतीय वन स्थिति रिपोर्ट (ISFR 2021) के अनुसार बिहार के कुल भौगोलिक क्षेत्रफल का कितना प्रतिशत वनावरण (Forest Cover) के अंतर्गत आता है?
(क) 7.84% (ख) 2.48% (ग) 10.32% (घ) 9.38%
- ✔ Answer: (क) 7.84% — ISFR 2021 के अनुसार बिहार का कुल वनावरण 7,380.79 वर्ग किमी है जो राज्य के क्षेत्रफल का 7.84% है।
- Q 14: बिहार के निम्नलिखित जिलों में से किस जिले में क्षेत्रफल की दृष्टि से सर्वाधिक वन क्षेत्र स्थित है?
(क) पश्चिमी चंपारण (ख) कैमूर (ग) रोहतास (घ) जमुई
- ✔ Answer: (ख) कैमूर — कैमूर जिले में 1,051.56 वर्ग किमी वन क्षेत्र है जो बिहार के सभी जिलों में सर्वाधिक है।
- Q 15: बिहार में वनों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 120 सेमी से अधिक वर्षा वाले क्षेत्रों में आर्द्र पर्णपाती वन पाए जाते हैं।
2. बिहार में सर्वाधिक अति सघन वन (Very Dense Forest) पश्चिमी चंपारण जिले में हैं।
उपरोक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
(क) केवल 1 (ख) केवल 2 (ग) 1 और 2 दोनों (घ) न तो 1 और न ही 2
- ✔ Answer: (ग) 1 और 2 दोनों — उत्तरी-पूर्वी व तराई क्षेत्र (120 सेमी+ वर्षा) में आर्द्र पर्णपाती वन हैं तथा सर्वाधिक अति सघन वन पश्चिमी चंपारण में हैं।
- Q 16: भारतीय वन स्थिति रिपोर्ट 2021 के अनुसार बिहार में सबसे कम प्रतिशत वनावरण वाला जिला कौन-सा है?
(क) अरवल (ख) जहानाबाद (ग) शेखपुरा (घ) बक्सर
- ✔ Answer: (ग) शेखपुरा — शेखपुरा जिले में केवल 0.17% (1.19 वर्ग किमी) वनावरण है जो बिहार में न्यूनतम है।
- Q 17: बिहार की वनस्पति के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन असत्य है?
(क) साल बिहार के वनों का एक प्रमुख वृक्ष है। (ख) शुष्क पर्णपाती वन दक्षिण बिहार के पहाड़ी ढलानों पर पाए जाते हैं। (ग) बिहार का कुल वृक्षावरण (Tree Cover) 7.84% है। (घ) ISFR 2021 में बिहार के वनावरण में वृद्धि दर्ज की गई है।
- ✔ Answer: (ग) बिहार का कुल वृक्षावरण (Tree Cover) 7.84% है। — बिहार का वृक्षावरण (Tree Cover) 2.48% है, जबकि 7.84% वनावरण (Forest Cover) है।
How it is asked
BPSC regularly asks direct and statement-based questions on Bihar forest cover (ISFR report), districts with highest/lowest forests, and forest types (moist and dry deciduous).
Do not confuse
- ✘ छात्र अकसर वनावरण (7.84%) और वृक्षावरण (2.48%) में भ्रमित हो जाते हैं; दोनों का कुल योग 10.32% है।
- ✘ अति सघन वन में पश्चिमी चंपारण प्रथम स्थान पर है, जबकि कुल वनावरण क्षेत्रफल में कैमूर प्रथम स्थान पर है।
💡 कैमूर में 'कैमरा' लगाओ सबसे ज्यादा पेड़ दिखेंगे (सर्वाधिक वन = कैमूर), शेख की जेब 'खाली' है (न्यूनतम वन = शेखपुरा)।
Valmiki Tiger Reserve and Wildlife Sanctuaries
Bihar hosts one national park and several wildlife sanctuaries to protect its rich biodiversity. Valmiki National Park, located in West Champaran, is the state's only national park and its sole Tiger Reserve. The Vikramshila Gangetic Dolphin Sanctuary in Bhagalpur is India's first sanctuary dedicated to the National Aquatic Animal, the Gangetic Dolphin. Kanwar Lake in Begusarai is Bihar's first and only Ramsar site, known as Asia's largest freshwater oxbow lake. Buxar Bird Sanctuary is famous for attracting 'Lalsar' birds from Kashmir during October. Other significant protected areas include Bhimbandh in Munger, Gautam Buddha in Gaya, and the Kaimur Wildlife Sanctuary.
Key facts
- Valmiki National Park (1990) is the only national park in Bihar.
- Valmiki Tiger Reserve is the only tiger reserve in Bihar, located in West Champaran.
- Vikramshila Gangetic Dolphin Sanctuary (Bhagalpur) is India's first dolphin sanctuary.
- Kanwar Lake (Begusarai) is the only Ramsar Site in Bihar.
- Kaimur Wildlife Sanctuary is the largest sanctuary in Bihar by area.
- Buxar Bird Sanctuary attracts 'Lalsar' birds from Kashmir in October.
- Udaipur Wildlife Sanctuary is located in the West Champaran district of Bihar.
- Bhimbandh Wildlife Sanctuary is located in Munger district and is famous for hot springs.
- Nagi-Nakti Bird Sanctuaries are located in the Jamui district of Bihar.
- Kusheshwar Asthan Bird Sanctuary is located in Darbhanga district.
- Pant (Rajgir) Wildlife Sanctuary is located in Nalanda district.
- Gautam Buddha Wildlife Sanctuary is located in Gaya district.
Table
- अभयारण्य/पार्क: वाल्मीकि राष्ट्रीय उद्यान · जिला: पश्चिमी चंपारण
- अभयारण्य/पार्क: विक्रमशिला डॉल्फिन अभयारण्य · जिला: भागलपुर
- अभयारण्य/पार्क: कावर झील पक्षी अभयारण्य · जिला: बेगूसराय
- अभयारण्य/पार्क: भीमबांध वन्यजीव अभयारण्य · जिला: मुंगेर
- अभयारण्य/पार्क: गौतम बुद्ध अभयारण्य · जिला: गया
- अभयारण्य/पार्क: कैमूर अभयारण्य · जिला: कैमूर और रोहतास
- अभयारण्य/पार्क: पंत (राजगीर) अभयारण्य · जिला: नालंदा
- अभयारण्य/पार्क: उदयपुर अभयारण्य · जिला: पश्चिमी चंपारण
- अभयारण्य/पार्क: कुशेश्वर स्थान · जिला: दरभंगा
Practice questions (solved)
- Q 18: बिहार का एकमात्र बाघ आरक्षित क्षेत्र (Tiger Reserve) कहाँ स्थित है?
(क) कैमूर (ख) पश्चिमी चंपारण (ग) मुंगेर (घ) गया
- ✔ Answer: (ख) पश्चिमी चंपारण — वाल्मीकि टाइगर रिजर्व बिहार का एकमात्र बाघ आरक्षित क्षेत्र है जो पश्चिमी चंपारण में स्थित है।
- Q 19: भारत का प्रथम डॉल्फिन अभयारण्य बिहार के किस जिले में है?
(क) पटना (ख) वैशाली (ग) भागलपुर (घ) कटिहार
- ✔ Answer: (ग) भागलपुर — विक्रमशिला गंगेटिक डॉल्फिन अभयारण्य भागलपुर जिले में गंगा नदी में स्थित है।
- Q 20: निम्नलिखित में से कौन सा युग्म सही सुमेलित नहीं है?
(क) कावर झील - बेगूसराय (ख) भीमबांध - मुंगेर (ग) उदयपुर अभयारण्य - राजस्थान (घ) गौतम बुद्ध अभयारण्य - गया
- ✔ Answer: (ग) उदयपुर अभयारण्य - राजस्थान — उदयपुर वन्यजीव अभयारण्य बिहार के पश्चिमी चंपारण जिले में स्थित है, न कि राजस्थान में।
- Q 21: बिहार की एकमात्र रामसर साइट कौन सी है?
(क) कुशेश्वर स्थान (ख) कावर झील (ग) बक्सर पक्षी अभयारण्य (घ) नागी बांध
- ✔ Answer: (ख) कावर झील — बेगूसराय की कावर झील बिहार की पहली और एकमात्र रामसर साइट घोषित की गई है।
- Q 22: बिहार के किस अभयारण्य में कश्मीरी पक्षी 'लालसर' मुख्य रूप से देखे जाते हैं?
(क) बक्सर पक्षी अभयारण्य (ख) नकटी पक्षी अभयारण्य (ग) पंत अभयारण्य (घ) वाल्मीकि अभयारण्य
- ✔ Answer: (क) बक्सर पक्षी अभयारण्य — बक्सर पक्षी अभयारण्य अक्टूबर में कश्मीर से आने वाले लालसर पक्षियों के लिए जाना जाता है।
📜 Real previous-year questions (BPSC)
- [BPSC 71वीं प्रारंभिक (13 सितंबर 2025), प्रश्न 114] निम्नलिखित में से कौन-सा पार्क/अभ्यारण्य बिहार में बाघ परियोजना के अर्न्तगत आता है?
(क) वाल्मीकी राष्ट्रीय पार्क (ख) उदयपुर वन्यजीव अभ्यारण्य (ग) भीमबन्द वन्यजीव अभ्यारण्य (घ) इनमें से कोई नहीं
- ✔ Official answer: (क) वाल्मीकी राष्ट्रीय पार्क — वाल्मीकि राष्ट्रीय पार्क बिहार का एकमात्र राष्ट्रीय उद्यान और बाघ परियोजना (Tiger Project) के अंतर्गत आने वाला क्षेत्र है।
How it is asked
BPSC frequently asks questions about the locations (districts) of sanctuaries and features like 'only' or 'first'. Questions related to Valmiki Tiger Reserve and Kanwar Lake are recurrent.
Do not confuse
- ✘ उदयपुर वन्यजीव अभयारण्य: छात्र अक्सर इसे राजस्थान में समझते हैं, लेकिन यह बिहार के पश्चिमी चंपारण में है।
- ✘ वाल्मीकि और उदयपुर: ये दोनों ही पश्चिमी चंपारण में हैं, लेकिन वाल्मीकि एकमात्र नेशनल पार्क है।
💡 वाल्मीकि और उदयपुर दोनों 'पश्चिम' (पश्चिमी चंपारण) में बाघ देखते हैं।
Environmental Issues of Bihar: Floods, Drought, and Arsenic
Bihar faces dual natural disasters due to its unique geographical structure. North Bihar is highly flood-prone due to Himalayan rivers, where the Kosi River is known as the 'Sorrow of Bihar' for its destructive nature. Conversely, South Bihar districts often suffer from drought due to the uncertainty of monsoon rainfall. Water pollution is also a major issue in the state, especially high levels of arsenic in the groundwater of the Gangetic plains. Excess fluoride in some South Bihar districts and iron in north-eastern districts also pose serious health challenges. The government is working on river-linking projects and safe drinking water schemes to address these issues.
Key facts
- Bihar is India's most flood-prone state, with approximately 73.06% of its area affected by floods.
- Out of 38 districts in Bihar, 28 districts are plagued by flood problems.
- The Kosi River is called the 'Sorrow of Bihar' due to its frequent course changes.
- Gaya, Aurangabad, Nawada, and Jamui districts of South Bihar are primarily drought-prone areas.
- Arsenic levels in the groundwater of 18 districts in Bihar exceed World Health Organization (WHO) standards.
- Arsenic contamination is mainly found in districts along the Ganga river, such as Bhojpur, Buxar, and Vaishali.
- Fluoride problems are severe in 11 districts of South Bihar (e.g., Munger, Rohtas).
- The Kosi-Mechi river interlinking project is India's second-largest river interlinking project.
- The Kosi-Mechi project will benefit four districts of Seemanchal: Araria, Purnia, Kishanganj, and Katihar.
- The main cause of floods in Bihar is heavy rainfall in the catchment areas of Nepal.
- The problem of iron in groundwater is mainly in north-eastern districts like Purnia and Katihar.
Table
- समस्या: बाढ़ · प्रभावित मुख्य जिले: सहरसा, सुपौल, मधेपुरा, खगड़िया · विशेष तथ्य: राज्य का 73% क्षेत्र प्रभावित
- समस्या: सूखा · प्रभावित मुख्य जिले: गया, औरंगाबाद, नवादा, जमुई · विशेष तथ्य: दक्षिण बिहार में वर्षा की कमी
- समस्या: आर्सेनिक · प्रभावित मुख्य जिले: भोजपुर, बक्सर, वैशाली, पटना · विशेष तथ्य: गंगा के तटवर्ती 18 जिले
- समस्या: फ्लोराइड · प्रभावित मुख्य जिले: मुंगेर, नवादा, रोहतास, जमुई · विशेष तथ्य: दक्षिण बिहार के 11 जिले
- समस्या: आयरन · प्रभावित मुख्य जिले: पूर्णिया, कटिहार, किशनगंज · विशेष तथ्य: उत्तर-पूर्वी बिहार के 9 जिले
Practice questions (solved)
- Q 23: बिहार का कौन सा भाग सर्वाधिक बाढ़ प्रवण है?
(क) दक्षिण बिहार (ख) उत्तर बिहार (ग) पूर्वी बिहार (घ) पश्चिमी बिहार
- ✔ Answer: (ख) उत्तर बिहार — हिमालय से आने वाली नदियों (कोसी, गंडक, बागमती) के कारण उत्तर बिहार का 70% से अधिक क्षेत्र बाढ़ प्रभावित रहता है।
- Q 24: कोसी-मेची लिंक परियोजना से बिहार के किन जिलों को सिंचाई लाभ प्राप्त होगा?
(क) पटना, गया, नालंदा (ख) दरभंगा, मधुबनी, सहरसा (ग) अररिया, पूर्णिया, किशनगंज, कटिहार (घ) रोहतास, कैमूर, बक्सर
- ✔ Answer: (ग) अररिया, पूर्णिया, किशनगंज, कटिहार — यह परियोजना सीमांचल के इन चार जिलों में बाढ़ नियंत्रण और सिंचाई के लिए बनाई गई है।
- Q 25: बिहार के किस जिले में भूजल में आर्सेनिक का संदूषण सबसे अधिक पाया गया है?
(क) भोजपुर (ख) गया (ग) किशनगंज (घ) बांका
- ✔ Answer: (क) भोजपुर — गंगा के मैदानी इलाकों में स्थित भोजपुर जिला आर्सेनिक संदूषण से सर्वाधिक प्रभावित जिलों में से एक है।
- Q 26: निम्नलिखित में से कौन सा जिला बिहार के सूखा प्रवण क्षेत्र के अंतर्गत आता है?
(क) सहरसा (ख) नवादा (ग) सुपौल (घ) मधेपुरा
- ✔ Answer: (ख) नवादा — नवादा दक्षिण बिहार का हिस्सा है जहाँ वर्षा की कमी के कारण सूखे की स्थिति बनी रहती है।
- Q 27: बिहार में फ्लोराइड की समस्या मुख्य रूप से किस क्षेत्र में पाई जाती है?
(क) उत्तर-पूर्वी बिहार (ख) उत्तर-पश्चिमी बिहार (ग) दक्षिण बिहार (घ) मध्य बिहार
- ✔ Answer: (ग) दक्षिण बिहार — दक्षिण बिहार के पहाड़ी और पठारी क्षेत्रों (जैसे मुंगेर, जमुई) के भूजल में फ्लोराइड की अधिकता है।
📜 Real previous-year questions (BPSC)
- [BPSC 71वीं प्रारंभिक (13 सितंबर 2025), प्रश्न 12] कोसी-मेची लिंक परियोजना से बिहार के कौन-कौन से जिलों को लाभ होगा?
(क) पटना, नालंदा, गया, सिवान (ख) दरभंगा, मुजफ्फरपुर, सीतामढ़ी, बेगूसराय (ग) अररिया, पूर्णिया, किशनगंज, कटिहार (घ) उपरोक्त में से एक से अधिक
- ✔ Official answer: (ग) अररिया, पूर्णिया, किशनगंज, कटिहार — कोसी-मेची लिंक परियोजना का उद्देश्य कोसी के अतिरिक्त पानी को मेची नदी में स्थानांतरित करना है, जिससे अररिया, पूर्णिया, किशनगंज और कटिहार जिलों को लाभ होगा।
How it is asked
In BPSC, questions are frequently asked about the names of flood-affected districts, the nature of the Kosi River, and the distribution of groundwater pollution (arsenic/fluoride). In recent years, special focus has been given to river-linking projects like Kosi-Mechi.
Do not confuse
- ✘ कोसी को 'बिहार का शोक' कहा जाता है, जबकि दामोदर को 'बंगाल का शोक' कहा जाता था।
- ✘ आर्सेनिक की समस्या गंगा के किनारे (मैदानी भाग) में है, जबकि फ्लोराइड की समस्या दक्षिण बिहार के पठारी जिलों में है।
💡 कोसी-मेची के लाभार्थी जिले: 'APK-K' (Araria, Purnia, Kishanganj, Katihar)
Quick revision
- According to Koeppen, Bihar's climate primarily falls under the 'Cwg' (Humid Subtropical) category.
- Monsoon usually arrives in Bihar in mid-June, with Kishanganj receiving the highest rainfall.
- Hot summer winds are called 'Loo', while pre-monsoon showers are known as 'Kalbaisakhi'.
- North Bihar is dominated by New Alluvial (Khadar) soil, while South Bihar has Old Alluvial (Bangar) soil.
- 'Tal' soil is found in an 8-10 km wide belt south of the Ganges, famous for Rabi crops.
- Lime-rich 'Balsundari' soil is found in parts of Saharsa and Purnia districts.
- The heavy, clayey soil of South Bihar is known as 'Karail-Kewal' soil.
- According to ISFR 2021, Bihar's total forest cover is approximately 7.84%.
- Valmiki Tiger Reserve in West Champaran is Bihar's only National Park and Tiger Reserve.
- Kanwar Lake in Begusarai is Bihar's first and only Ramsar Site.
- Vikramshila Gangetic Dolphin Sanctuary in Bhagalpur is Asia's first dolphin protected area.
- North Bihar is highly flood-prone, while South Bihar is frequently affected by drought.
- Arsenic contamination in groundwater is a serious health issue in the Gangetic plains of Bihar.