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BPSC CCEभारतीय राजव्यवस्थान्यायपालिका, संवैधानिक एवं गैर-संवैधानिक निकाय तथा आपातकालीन उपबंध
Judiciary, Constitutional and Non-Constitutional Bodies, and Emergency Provisions
यह अध्याय बीपीएससी (BPSC) प्रारंभिक परीक्षा के सामान्य अध्ययन तथा मुख्य परीक्षा के सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र-2 (भारतीय राजव्यवस्था) के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इससे सर्वोच्च न्यायालय एवं पटना उच्च न्यायालय के अधिकार क्षेत्र, प्रमुख संवैधानिक पदों और आपातकालीन प्रावधानों पर प्रतिवर्ष प्रश्न पूछे जाते हैं।
सर्वोच्च न्यायालय: नियुक्ति, क्षेत्राधिकार एवं जनहित याचिका (PIL)
भारतीय संविधान के भाग 5 में अध्याय 4 के तहत अनुच्छेद 124 से 147 तक सर्वोच्च न्यायालय के गठन, शक्तियों और कार्यप्रणाली का वर्णन है। भारत में एकीकृत न्यायपालिका की व्यवस्था है, जिसके शीर्ष पर सर्वोच्च न्यायालय स्थित है जिसका उद्घाटन 28 जनवरी 1950 को हुआ था। सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश और अन्य न्यायाधीशों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा कॉलेजियम प्रणाली की सिफारिश पर की जाती है। सर्वोच्च न्यायालय को मूल क्षेत्राधिकार (अनुच्छेद 131), रिट क्षेत्राधिकार (अनुच्छेद 32), अपीलीय क्षेत्राधिकार तथा राष्ट्रपति को सलाह देने का परामर्शदात्री क्षेत्राधिकार (अनुच्छेद 143) प्राप्त है। साथ ही, अनुच्छेद 129 के तहत इसे अभिलेख न्यायालय घोषित किया गया है, जिसकी अवमानना पर दंड देने का अधिकार है। गरीबों और वंचितों तक न्याय की पहुँच सुनिश्चित करने के लिए 1980 के दशक में न्यायमूर्ति पी. एन. भगवती और न्यायमूर्ति वी. आर. कृष्ण अय्यर के प्रयासों से जनहित याचिका (PIL) की अवधारणा विकसित की गई थी।
मुख्य तथ्य
- सर्वोच्च न्यायालय की स्थापना 28 जनवरी 1950 को नई दिल्ली में की गई थी।
- मूल संविधान में मुख्य न्यायाधीश सहित कुल 8 न्यायाधीश (1+7) थे, जबकि वर्तमान स्वीकृत संख्या 34 (1 मुख्य न्यायाधीश + 33 अन्य) है।
- सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की संख्या में वृद्धि करने की अनन्य शक्ति संसद के पास है।
- संविधान के अनुच्छेद 124(2) के तहत सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है।
- कॉलेजियम प्रणाली में भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) और सर्वोच्च न्यायालय के 4 वरिष्ठतम न्यायाधीश शामिल होते हैं।
- सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश 65 वर्ष की आयु तक अपने पद पर बने रहते हैं और वे अपना त्यागपत्र राष्ट्रपति को सौंपते हैं।
- न्यायाधीश को हटाने की प्रक्रिया महाभियोग जैसी है, जो 'साबित कदाचार' या 'असमर्थता' के आधार पर संसद के दोनों सदनों द्वारा विशेष बहुमत से पारित होती है।
- अनुच्छेद 131 केंद्र और राज्यों या राज्यों के मध्य पारस्परिक विवादों पर सर्वोच्च न्यायालय का अनन्य मूल अधिकार क्षेत्र तय करता है।
- अनुच्छेद 32 के तहत सर्वोच्च न्यायालय मौलिक अधिकारों के प्रवर्तन के लिए 5 प्रकार की रिट (बंदी प्रत्यक्षीकरण, परमादेश, प्रतिषेध, उत्प्रेषण, अधिकार-पृच्छा) जारी कर सकता है।
- अनुच्छेद 143 राष्ट्रपति को विधि या तथ्य के व्यापक प्रश्न पर सर्वोच्च न्यायालय से परामर्श मांगने की शक्ति देता है।
- अनुच्छेद 129 के अनुसार सर्वोच्च न्यायालय एक 'अभिलेख न्यायालय' (Court of Record) है।
- भारत में जनहित याचिका (PIL) का जनक न्यायमूर्ति पी. एन. भगवती और न्यायमूर्ति वी. आर. कृष्ण अय्यर को माना जाता है।
- जनहित याचिका की अवधारणा मूल रूप से संयुक्त राज्य अमेरिका (USA) के न्यायशास्त्र से ली गई है।
- सर्वोच्च न्यायालय के प्रथम मुख्य न्यायाधीश एच. जे. कानिया (हीरालाल जे. कानिया) थे।
तालिका
- अनुच्छेद: अनुच्छेद 124 · विषय / क्षेत्राधिकार: स्थापना एवं न्यायाधीशों की नियुक्ति · मुख्य बिंदु: राष्ट्रपति द्वारा कॉलेजियम की सिफारिश पर नियुक्ति; सेवानिवृत्ति 65 वर्ष
- अनुच्छेद: अनुच्छेद 129 · विषय / क्षेत्राधिकार: अभिलेख न्यायालय (Court of Record) · मुख्य बिंदु: निर्णय साक्ष्य के रूप में सुरक्षित; अवमानना पर दंड देने का अधिकार
- अनुच्छेद: अनुच्छेद 131 · विषय / क्षेत्राधिकार: मूल/प्रारंभिक क्षेत्राधिकार · मुख्य बिंदु: केंद्र बनाम राज्य या राज्य बनाम राज्य के अनन्य संघीय विवाद
- अनुच्छेद: अनुच्छेद 136 · विषय / क्षेत्राधिकार: विशेष अनुमति याचिका (SLP) · मुख्य बिंदु: किसी भी न्यायालय या अधिकरण के निर्णय के विरुद्ध अपील की विशेष अनुमति
- अनुच्छेद: अनुच्छेद 137 · विषय / क्षेत्राधिकार: निर्णयों का पुनर्विलोकन (Review) · मुख्य बिंदु: सर्वोच्च न्यायालय अपने ही पूर्व निर्णयों की समीक्षा कर बदल सकता है
- अनुच्छेद: अनुच्छेद 143 · विषय / क्षेत्राधिकार: परामर्शदात्री क्षेत्राधिकार · मुख्य बिंदु: राष्ट्रपति सार्वजनिक महत्व के कानूनी प्रश्नों पर राय मांग सकते हैं (राय बाध्यकारी नहीं)
अभ्यास प्रश्न (हल सहित)
- प्रश्न 1: भारतीय संविधान के किस अनुच्छेद के तहत सर्वोच्च न्यायालय एक अभिलेख न्यायालय (Court of Record) के रूप में कार्य करता है?
(क) अनुच्छेद 126 (ख) अनुच्छेद 129 (ग) अनुच्छेद 131 (घ) अनुच्छेद 137
- ✔ उत्तर: (ख) अनुच्छेद 129 — अनुच्छेद 129 के अनुसार सर्वोच्च न्यायालय अभिलेख न्यायालय होता है और इसे अपनी अवमानना के लिए दंडित करने की शक्ति प्राप्त है।
- प्रश्न 2: सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या में वृद्धि करने का अधिकार किसे प्राप्त है?
(क) भारत के राष्ट्रपति को (ख) भारत के मुख्य न्यायाधीश को (ग) संसद को (विधि द्वारा) (घ) विधि मंत्रालय को
- ✔ उत्तर: (ग) संसद को (विधि द्वारा) — संविधान के अनुच्छेद 124(1) के अंतर्गत संसद को कानून बनाकर सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या तय करने का अधिकार है।
- प्रश्न 3: केंद्र और राज्यों के बीच किसी विवाद का निपटारा करना सर्वोच्च न्यायालय के किस क्षेत्राधिकार के अंतर्गत आता है?
(क) अपीलीय क्षेत्राधिकार (ख) परामर्शदात्री क्षेत्राधिकार (ग) प्रारंभिक (मूल) क्षेत्राधिकार (घ) समीक्षा क्षेत्राधिकार
- ✔ उत्तर: (ग) प्रारंभिक (मूल) क्षेत्राधिकार — अनुच्छेद 131 के तहत संघीय ढाँचे से संबंधित विवादों की सीधी सुनवाई सर्वोच्च न्यायालय का अनन्य मूल (प्रारंभिक) क्षेत्राधिकार है।
- प्रश्न 4: सर्वोच्च न्यायालय के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश 65 वर्ष की आयु तक पद धारण करते हैं।
2. राष्ट्रपति को सलाह देने का परामर्शदात्री क्षेत्राधिकार अनुच्छेद 143 में वर्णित है।
3. भारत में जनहित याचिका (PIL) की शुरुआत 1980 के दशक में हुई थी।
उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
(क) केवल 1 और 2 (ख) केवल 2 और 3 (ग) केवल 1 और 3 (घ) 1, 2 और 3
- ✔ उत्तर: (घ) 1, 2 और 3 — तीनों कथन सही हैं: सेवामुक्ति की आयु 65 वर्ष है, परामर्श अधिकार अनुच्छेद 143 में है और 1980 के दशक में पी.एन. भगवती के समय PIL प्रारंभ हुई।
- प्रश्न 5: भारत में जनहित याचिका (PIL) की अवधारणा को विकसित करने का मुख्य श्रेय निम्नलिखित में से किस न्यायाधीश को जाता है?
(क) न्यायमूर्ति एम. हिदायतुल्ला (ख) न्यायमूर्ति पी. एन. भगवती (ग) न्यायमूर्ति एच. जे. कानिया (घ) न्यायमूर्ति जे. एस. वर्मा
- ✔ उत्तर: (ख) न्यायमूर्ति पी. एन. भगवती — न्यायमूर्ति पी. एन. भगवती और न्यायमूर्ति वी. आर. कृष्ण अय्यर को भारत में जनहित याचिका के विकास का प्रणेता माना जाता है।
- प्रश्न 6: सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश और अन्य न्यायाधीशों की नियुक्ति कॉलेजियम प्रणाली के आधार पर कौन करता है?
(क) केंद्रीय कानून मंत्री (ख) प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली समिति (ग) भारत के राष्ट्रपति (घ) उपराष्ट्रपति
- ✔ उत्तर: (ग) भारत के राष्ट्रपति — अनुच्छेद 124(2) के तहत सर्वोच्च न्यायालय के सभी न्यायाधीशों की औपचारिक नियुक्ति भारत के राष्ट्रपति द्वारा की जाती है।
परीक्षा में कैसे आता है
BPSC में सर्वोच्च न्यायालय से संबंधित प्रश्न सीधे अनुच्छेदों (जैसे 32, 129, 131, 143), न्यायाधीशों की सेवानिवृत्ति आयु (65 वर्ष), संख्या वृद्धि की शक्ति (संसद), तथा PIL के प्रणेता (पी.एन. भगवती) से पूछे जाते हैं। कथन-आधारित प्रश्नों में मूल बनाम अपीलीय क्षेत्राधिकार की तुलना कराई जाती है।
इनमें भ्रम न करें
- ✘ सेवानिवृत्ति की आयु: सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश 65 वर्ष में सेवानिवृत्त होते हैं, जबकि उच्च न्यायालय के न्यायाधीश 62 वर्ष में।
- ✘ संख्या निर्धारण: सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या 'संसद विधि द्वारा' बढ़ाती है, जबकि उच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या 'राष्ट्रपति' तय करते हैं।
- ✘ रिट अधिकारिता: अनुच्छेद 32 के तहत SC केवल मौलिक अधिकारों के हनन पर रिट जारी करता है, जबकि अनुच्छेद 226 के तहत HC मौलिक अधिकारों के साथ-साथ अन्य विधिक अधिकारों के लिए भी रिट जारी कर सकता है।
💡 याद रखें '143 = सलाह': राष्ट्रपति SC से विधिक मामलों में प्यार से सलाह मांगते हैं अनुच्छेद 143 के तहत (पर मानना बाध्यकारी नहीं)।
उच्च न्यायालय एवं पटना उच्च न्यायालय (1916)
भारतीय संविधान के भाग 6 में अनुच्छेद 214 से 231 तक उच्च न्यायालयों के गठन, क्षेत्राधिकार और शक्तियों का विवरण दिया गया है। अनुच्छेद 214 प्रत्येक राज्य के लिए एक उच्च न्यायालय का प्रावधान करता है, जबकि संसद अनुच्छेद 231 के तहत दो या अधिक राज्यों के लिए साझा उच्च न्यायालय बना सकती है। उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा भारत के मुख्य न्यायाधीश और संबंधित राज्यपाल के परामर्श से की जाती है। बिहार परीक्षा की दृष्टि से 3 फरवरी 1916 को स्थापित पटना उच्च न्यायालय अत्यंत महत्वपूर्ण है, जिसके पहले मुख्य न्यायाधीश सर एडवर्ड मेनार्ड डेस चैम्प्स चामियर थे। अनुच्छेद 226 के तहत उच्च न्यायालय को मौलिक अधिकारों और अन्य विधिक अधिकारों के लिए रिट जारी करने का व्यापक अधिकार प्राप्त है। इसके अलावा, अनुच्छेद 215 के तहत यह एक अभिलेख न्यायालय (Court of Record) है जो अपनी अवमानना पर दंड दे सकता है।
मुख्य तथ्य
- संविधान के अनुच्छेद 214 के अनुसार प्रत्येक राज्य के लिए एक उच्च न्यायालय होगा।
- अनुच्छेद 231 के तहत संसद कानून बनाकर दो या अधिक राज्यों के लिए एक ही साझा उच्च न्यायालय स्थापित कर सकती है।
- उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा सीजेआई और संबंधित राज्यपाल के परामर्श से की जाती है (अनुच्छेद 217)।
- पटना उच्च न्यायालय की स्थापना 3 फरवरी 1916 को हुई थी।
- पटना उच्च न्यायालय के भवन का उद्घाटन 3 फरवरी 1916 को तत्कालीन वायसराय लॉर्ड हार्डिंग द्वारा किया गया था।
- सर एडवर्ड मेनार्ड डेस चैम्प्स चामियर पटना उच्च न्यायालय के प्रथम मुख्य न्यायाधीश थे।
- स्वतंत्र भारत में पंडित लक्ष्मी कांत झा पटना उच्च न्यायालय के प्रथम भारतीय मुख्य न्यायाधीश बने (1948)।
- उच्च न्यायालय के न्यायाधीश की सेवानिवृत्ति की आयु 62 वर्ष होती है।
- अनुच्छेद 226 के तहत उच्च न्यायालय को रिट जारी करने की शक्ति प्राप्त है, जो केवल मौलिक अधिकारों तक सीमित नहीं है।
- अनुच्छेद 215 के अनुसार उच्च न्यायालय एक 'अभिलेख न्यायालय' (Court of Record) होता है।
- अनुच्छेद 227 उच्च न्यायालय को अपने अधीनस्थ सभी न्यायालयों और न्यायधिकरणों पर अधीक्षण की शक्ति देता है।
- उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों का वेतन राज्य की संचित निधि से दिया जाता है, जबकि उनकी पेंशन भारत की संचित निधि से दी जाती है।
तालिका
- विषय / प्रावधान: स्थापना का प्रावधान · संविधान अनुच्छेद / तिथि: अनुच्छेद 214 · मुख्य विवरण: प्रत्येक राज्य के लिए उच्च न्यायालय का प्रावधान
- विषय / प्रावधान: साझा उच्च न्यायालय · संविधान अनुच्छेद / तिथि: अनुच्छेद 231 · मुख्य विवरण: संसद द्वारा दो या अधिक राज्यों के लिए एक उच्च न्यायालय
- विषय / प्रावधान: न्यायाधीश नियुक्ति · संविधान अनुच्छेद / तिथि: अनुच्छेद 217 · मुख्य विवरण: राष्ट्रपति द्वारा (CJI व राज्यपाल से परामर्श पर)
- विषय / प्रावधान: रिट क्षेत्राधिकार · संविधान अनुच्छेद / तिथि: अनुच्छेद 226 · मुख्य विवरण: मौलिक अधिकार एवं अन्य कानूनी अधिकारों के लिए
- विषय / प्रावधान: अभिलेख न्यायालय · संविधान अनुच्छेद / तिथि: अनुच्छेद 215 · मुख्य विवरण: अदालत को अवमानना पर दंड देने का अधिकार
- विषय / प्रावधान: पटना उच्च न्यायालय स्थापना · संविधान अनुच्छेद / तिथि: 3 फरवरी 1916 · मुख्य विवरण: उद्घाटन वायसराय लॉर्ड हार्डिंग द्वारा किया गया
- विषय / प्रावधान: पटना HC प्रथम मुख्य न्यायाधीश · संविधान अनुच्छेद / तिथि: 1916 · मुख्य विवरण: सर एडवर्ड मेनार्ड डेस चैम्प्स चामियर
अभ्यास प्रश्न (हल सहित)
- प्रश्न 7: पटना उच्च न्यायालय की औपचारिक रूप से स्थापना किस तिथि को हुई थी?
(क) 3 मार्च 1916 (ख) 3 फरवरी 1916 (ग) 1 अप्रैल 1912 (घ) 12 दिसंबर 1911
- ✔ उत्तर: (ख) 3 फरवरी 1916 — पटना उच्च न्यायालय की स्थापना 3 फरवरी 1916 को हुई थी।
- प्रश्न 8: उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति किसके द्वारा की जाती है?
(क) संबंधित राज्य के राज्यपाल द्वारा (ख) भारत के राष्ट्रपति द्वारा (ग) भारत के मुख्य न्यायाधीश द्वारा (घ) राज्य के मुख्यमंत्री द्वारा
- ✔ उत्तर: (ख) भारत के राष्ट्रपति द्वारा — अनुच्छेद 217 के तहत उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है।
- प्रश्न 9: निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. अनुच्छेद 226 के तहत उच्च न्यायालय केवल मौलिक अधिकारों के लिए रिट जारी कर सकता है।
2. उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की सेवानिवृत्ति आयु 62 वर्ष है।
उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
(क) केवल 1 (ख) केवल 2 (ग) 1 और 2 दोनों (घ) न तो 1 और न ही 2
- ✔ उत्तर: (ख) केवल 2 — अनुच्छेद 226 के तहत उच्च न्यायालय मौलिक अधिकारों के अलावा अन्य विधिक अधिकारों के लिए भी रिट जारी कर सकता है।
- प्रश्न 10: पटना उच्च न्यायालय के प्रथम मुख्य न्यायाधीश कौन थे?
(क) सर एडवर्ड मेनार्ड डेस चैम्प्स चामियर (ख) पंडित लक्ष्मी कांत झा (ग) सर कर्टनी टेरेल (घ) आर्थर ट्रेवर डॉसन
- ✔ उत्तर: (क) सर एडवर्ड मेनार्ड डेस चैम्प्स चामियर — पटना उच्च न्यायालय के प्रथम मुख्य न्यायाधीश सर एडवर्ड मेनार्ड डेस चैम्प्स चामियर थे।
- प्रश्न 11: उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों के वेतन और पेंशन के संबंध में कौन-सा कथन सत्य है?
(क) वेतन और पेंशन दोनों राज्य की संचित निधि से दिए जाते हैं। (ख) वेतन और पेंशन दोनों भारत की संचित निधि से दिए जाते हैं। (ग) वेतन राज्य की संचित निधि से और पेंशन भारत की संचित निधि से दी जाती है। (घ) वेतन भारत की संचित निधि से और पेंशन राज्य की संचित निधि से दी जाती है।
- ✔ उत्तर: (ग) वेतन राज्य की संचित निधि से और पेंशन भारत की संचित निधि से दी जाती है। — उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों का वेतन राज्य की संचित निधि से और पेंशन भारत की संचित निधि से दी जाती है।
- प्रश्न 12: संविधान का कौन-सा अनुच्छेद दो या दो से अधिक राज्यों के लिए साझा उच्च न्यायालय की स्थापना का प्रावधान करता है?
(क) अनुच्छेद 214 (ख) अनुच्छेद 217 (ग) अनुच्छेद 226 (घ) अनुच्छेद 231
- ✔ उत्तर: (घ) अनुच्छेद 231 — अनुच्छेद 231 के तहत संसद दो या अधिक राज्यों के लिए साझा उच्च न्यायालय स्थापित कर सकती है।
परीक्षा में कैसे आता है
BPSC परीक्षा में पटना उच्च न्यायालय की स्थापना तिथि (3 फरवरी 1916), प्रथम मुख्य न्यायाधीश, अनुच्छेद 226 (रिट क्षेत्राधिकार) तथा न्यायाधीशों के वेतन एवं पेंशन के नियमों से सीधे एवं कथन-आधारित प्रश्न बार-बार पूछे जाते हैं।
इनमें भ्रम न करें
- ✘ बिहार का पृथक राज्य के रूप में गठन 1912 में हुआ था, लेकिन पटना उच्च न्यायालय की स्थापना 3 फरवरी 1916 को हुई।
- ✘ उच्च न्यायालय के न्यायाधीश की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है और वे अपना त्यागपत्र भी राष्ट्रपति को ही सौंपते हैं, राज्यपाल को नहीं।
- ✘ उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों का वेतन राज्य की संचित निधि से मिलता है, परंतु उनकी पेंशन भारत की संचित निधि से दी जाती है।
💡 3 फरवरी 1916 को पटना HC खुला; रिट में 226 (HC) 32 (SC) से बड़ा!
भारत के प्रमुख संवैधानिक निकाय (अनुच्छेद सहित)
भारतीय संविधान में कुछ विशेष संस्थाओं का उल्लेख सीधे अनुच्छेदों में किया गया है, जिन्हें संवैधानिक निकाय कहा जाता है। महान्यायवादी (अनुच्छेद 76) भारत सरकार का मुख्य कानूनी सलाहकार होता है, जबकि सीएजी (अनुच्छेद 148) सार्वजनिक धन का संरक्षक होता है। निर्वाचन आयोग (अनुच्छेद 324) देश में निष्पक्ष चुनाव आयोजित कराता है तथा राज्य निर्वाचन आयोग (अनुच्छेद 243K) स्थानीय निकायों के चुनाव कराता है। वित्त आयोग (अनुच्छेद 280) केंद्र और राज्यों के बीच कर राजस्व के बंटवारे की सिफारिश करता है। संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) और राज्य लोक सेवा आयोग (SPSC) अनुच्छेद 315 के तहत लोक सेवकों की भर्ती के लिए जिम्मेदार हैं। इन निकायों के प्रमुखों की नियुक्ति और कार्यकाल से प्रश्न BPSC में बार-बार पूछे जाते हैं।
मुख्य तथ्य
- भारत का महान्यायवादी (Article 76) राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त किया जाता है और राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत पद धारण करता है।
- अनुच्छेद 88 के अनुसार महान्यायवादी को संसद के किसी भी सदन में बोलने और कार्यवाही में भाग लेने का अधिकार है, किंतु वोट देने का अधिकार नहीं है।
- भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG - Article 148) की नियुक्ति राष्ट्रपति करते हैं और उनका कार्यकाल 6 वर्ष या 65 वर्ष की आयु (जो भी पहले हो) होता है।
- अनुच्छेद 280 के तहत राष्ट्रपति प्रत्येक 5 वर्ष में वित्त आयोग का गठन करते हैं।
- वित्त आयोग के सदस्यों की योग्यता का निर्धारण अनुच्छेद 280(2) के अनुसार संसद विधि बनाकर करती है।
- भारत का निर्वाचन आयोग (Article 324) संसद, राज्य विधानमंडल, राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के चुनाव का संचालन करता है।
- मार्च 2024 में चुनाव नियमों में संशोधन के बाद वरिष्ठ नागरिकों के लिए डाक मतपत्र (Postal Ballot) द्वारा मतदान की आयु सीमा 80 से बढ़ाकर 85 वर्ष कर दी गई।
- अनुच्छेद 243K के तहत राज्य निर्वाचन आयोग पंचायतों और नगरपालिकाओं की मतदाता सूची तैयार करता है और चुनाव आयोजित कराता है।
- राज्य निर्वाचन आयुक्त की नियुक्ति राज्यपाल करते हैं, लेकिन उन्हें हटाने की प्रक्रिया उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के समान होती है।
- अनुच्छेद 315 के तहत केंद्र में UPSC तथा राज्यों में SPSC का गठन किया जाता है।
- SPSC के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति राज्यपाल करते हैं, लेकिन उन्हें पद से केवल राष्ट्रपति ही हटा सकते हैं।
- राज्य का महाधिवक्ता (Advocate General) अनुच्छेद 165 के तहत राज्यपाल द्वारा नियुक्त किया जाता है।
तालिका
- संवैधानिक निकाय: भारत का महान्यायवादी (AG) · संबंधित अनुच्छेद: अनुच्छेद 76 · नियुक्ति कर्ता: राष्ट्रपति · कार्यकाल / पदमुक्ति: राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत
- संवैधानिक निकाय: नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) · संबंधित अनुच्छेद: अनुच्छेद 148 · नियुक्ति कर्ता: राष्ट्रपति · कार्यकाल / पदमुक्ति: 6 वर्ष या 65 वर्ष की आयु
- संवैधानिक निकाय: भारत का निर्वाचन आयोग (ECI) · संबंधित अनुच्छेद: अनुच्छेद 324 · नियुक्ति कर्ता: राष्ट्रपति · कार्यकाल / पदमुक्ति: 6 वर्ष या 65 वर्ष की आयु
- संवैधानिक निकाय: वित्त आयोग (FC) · संबंधित अनुच्छेद: अनुच्छेद 280 · नियुक्ति कर्ता: राष्ट्रपति · कार्यकाल / पदमुक्ति: 5 वर्ष (या राष्ट्रपति के अनुसार)
- संवैधानिक निकाय: संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) · संबंधित अनुच्छेद: अनुच्छेद 315-323 · नियुक्ति कर्ता: राष्ट्रपति · कार्यकाल / पदमुक्ति: 6 वर्ष या 65 वर्ष की आयु
- संवैधानिक निकाय: राज्य लोक सेवा आयोग (SPSC) · संबंधित अनुच्छेद: अनुच्छेद 315-323 · नियुक्ति कर्ता: राज्यपाल · कार्यकाल / पदमुक्ति: 6 वर्ष या 62 वर्ष (हटाने का अधिकार केवल राष्ट्रपति को)
- संवैधानिक निकाय: राज्य निर्वाचन आयोग (SEC) · संबंधित अनुच्छेद: अनुच्छेद 243K · नियुक्ति कर्ता: राज्यपाल · कार्यकाल / पदमुक्ति: उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के समान पदमुक्ति
- संवैधानिक निकाय: राज्य का महाधिवक्ता · संबंधित अनुच्छेद: अनुच्छेद 165 · नियुक्ति कर्ता: राज्यपाल · कार्यकाल / पदमुक्ति: राज्यपाल के प्रसादपर्यंत
अभ्यास प्रश्न (हल सहित)
- प्रश्न 13: भारत के महान्यायवादी के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सत्य है?
(क) वह संसद के किसी भी सदन की कार्यवाही में भाग ले सकता है और मतदान कर सकता है। (ख) उसे पद से हटाने के लिए महाभियोग प्रक्रिया अपनाई जाती है। (ग) वह राष्ट्रपति को विधिक मामलों में परामर्श देता है और राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत पद धारण करता है। (घ) उसकी नियुक्ति संसद की सिफारिश पर प्रधानमंत्री करते हैं।
- ✔ उत्तर: (ग) वह राष्ट्रपति को विधिक मामलों में परामर्श देता है और राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत पद धारण करता है। — अनुच्छेद 76 के तहत महान्यायवादी की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है और वह राष्ट्रपति को विधिक सलाह देता है तथा उनके प्रसादपर्यंत पद धारण करता है।
- प्रश्न 14: वित्त आयोग के सदस्यों की अर्हताओं और चयन विधि का निर्धारण कौन करता है?
(क) भारत के राष्ट्रपति (ख) संसद विधि द्वारा (ग) केंद्रीय मंत्रिमंडल (घ) सर्वोच्च न्यायालय
- ✔ उत्तर: (ख) संसद विधि द्वारा — अनुच्छेद 280(2) के तहत संसद को यह शक्ति प्राप्त है कि वह कानून बनाकर वित्त आयोग के सदस्यों की योग्यताएं तय करे।
- प्रश्न 15: राज्य लोक सेवा आयोग (SPSC) के अध्यक्ष और सदस्यों के संदर्भ में सही कथन चुनिए:
(क) नियुक्ति और पदमुक्ति दोनों राज्यपाल द्वारा की जाती है। (ख) नियुक्ति और पदमुक्ति दोनों राष्ट्रपति द्वारा की जाती है। (ग) नियुक्ति राज्यपाल द्वारा की जाती है, परंतु पदमुक्ति केवल राष्ट्रपति द्वारा हो सकती है। (घ) नियुक्ति मुख्यमंत्री की सिफारिश पर राष्ट्रपति करते हैं।
- ✔ उत्तर: (ग) नियुक्ति राज्यपाल द्वारा की जाती है, परंतु पदमुक्ति केवल राष्ट्रपति द्वारा हो सकती है। — SPSC के अध्यक्ष/सदस्यों की नियुक्ति राज्यपाल करते हैं, परंतु उन्हें हटाने का अधिकार केवल राष्ट्रपति के पास है।
- प्रश्न 16: निम्नलिखित में से कौन-सा युग्म सही सुमेलित नहीं है?
(क) भारत का महान्यायवादी - अनुच्छेद 76 (ख) नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक - अनुच्छेद 148 (ग) वित्त आयोग - अनुच्छेद 280 (घ) राज्य निर्वाचन आयोग - अनुच्छेद 326
- ✔ उत्तर: (घ) राज्य निर्वाचन आयोग - अनुच्छेद 326 — राज्य निर्वाचन आयोग का प्रावधान अनुच्छेद 243K में है, जबकि अनुच्छेद 326 वयस्क मताधिकार से संबंधित है।
- प्रश्न 17: मार्च 2024 में किए गए संशोधनों के अनुसार वरिष्ठ नागरिकों के लिए डाक मतपत्र (Postal Ballot) की न्यूनतम आयु पात्रता क्या है?
(क) 80 वर्ष (ख) 82 वर्ष (ग) 85 वर्ष (घ) 90 वर्ष
- ✔ उत्तर: (ग) 85 वर्ष — मार्च 2024 में डाक मतपत्र द्वारा मतदान हेतु वरिष्ठ नागरिकों की पात्रता आयु 80 से बढ़ाकर 85 वर्ष कर दी गई।
📜 असली पिछले वर्ष के प्रश्न (BPSC)
- [BPSC 71वीं प्रारंभिक (13 सितंबर 2025), प्रश्न 57] भारत का महान्यायवादी :
(क) सर्वोच्च न्यायालय के अतिरिक्त सुनवाई हेतु अर्ह नहीं है। (ख) राष्ट्रपति को विधिक मामलों में परामर्श देता है। (ग) संसद के सदन की प्रक्रिया में भाग नहीं ले सकता है। (घ) सरकार का पूर्ण कालिक सलाहकार है।
- ✔ आधिकारिक उत्तर: (ख) राष्ट्रपति को विधिक मामलों में परामर्श देता है। — अनुच्छेद 76 के तहत भारत का महान्यायवादी राष्ट्रपति को विधिक मामलों में परामर्श देने के लिए नियुक्त किया जाता है।
- [BPSC 71वीं प्रारंभिक (13 सितंबर 2025), प्रश्न 64] निम्नलिखित में से कौन वित्त आयोग के सदस्य के लिए आवश्यक अर्हताओं का निर्धारण करता है?
(क) भारत का राष्ट्रपति (ख) मंत्रिपरिषद (ग) संसद विधि द्वारा (घ) संघीय कैबिनेट
- ✔ आधिकारिक उत्तर: (ग) संसद विधि द्वारा — अनुच्छेद 280(2) के अनुसार वित्त आयोग के सदस्यों के लिए आवश्यक अर्हताओं का निर्धारण संसद विधि द्वारा करती है।
- [BPSC 70वीं प्रारंभिक (13 दिसंबर 2024), प्रश्न 8] मार्च 2024 में किए गए बदलावों के बाद, वरिष्ठ नागरिकों के लिए डाक मतपत्र द्वारा मतदान करने की पात्रता आयु क्या है ?
(क) 80 वर्ष (ख) 85 वर्ष (ग) 90 वर्ष (घ) 82 वर्ष
- ✔ आधिकारिक उत्तर: (ख) 85 वर्ष — मार्च 2024 में संशोधन कर वरिष्ठ नागरिकों हेतु डाक मतपत्र द्वारा मतदान की न्यूनतम पात्रता आयु 85 वर्ष कर दी गई।
परीक्षा में कैसे आता है
BPSC में संवैधानिक निकायों से अनुच्छेदों (जैसे 76, 148, 280, 324, 243K), नियुक्तिकर्ता, कार्यकाल, सदस्यों की योग्यताओं को निर्धारित करने वाली संस्था तथा संशोधनों पर सीधे प्रश्न पूछे जाते हैं।
इनमें भ्रम न करें
- ✘ राज्य लोक सेवा आयोग (SPSC) के अध्यक्ष को नियुक्त राज्यपाल करते हैं, लेकिन हटा केवल राष्ट्रपति सकते हैं (राज्यपाल नहीं)।
- ✘ वित्त आयोग के सदस्यों की योग्यताएं राष्ट्रपति तय नहीं करते, बल्कि संसद कानून बनाकर तय करती है।
- ✘ राज्य निर्वाचन आयुक्त की नियुक्ति राज्यपाल करते हैं, लेकिन उन्हें हटाने का तरीका वही है जो उच्च न्यायालय के न्यायाधीश का है।
💡 अनुच्छेद क्रम याद रखें: AG(76) -> CAG(148) -> SEC(243K) -> FC(280) -> UPSC(315) -> EC(324)
गैर-संवैधानिक एवं वैधानिक निकाय (नीति आयोग, NHRC, CVC, लोकपाल)
भारतीय शासन व्यवस्था में ऐसे निकाय जिनका उल्लेख संविधान के मूल पाठ या अनुच्छेदों में नहीं है, गैर-संवैधानिक निकाय कहलाते हैं। इन्हें दो श्रेणियों में बांटा जाता है: वैधानिक (संसद के कानून द्वारा निर्मित) और कार्यकारी (मंत्रिमंडल के प्रस्ताव द्वारा निर्मित)। नीति आयोग 1 जनवरी 2015 को योजना आयोग के स्थान पर एक कार्यकारी निकाय के रूप में गठित किया गया, जो 'सहकारी संघवाद' और 'थिंक टैंक' के रूप में कार्य करता है। नीति आयोग के प्रमुख दस्तावेज़ विकसित भारत 2047 के लक्ष्यों को वर्ष 2070 तक नेट जीरो (Net Zero 2070) उत्सर्जन लक्ष्य के साथ संरेखित करते हैं। मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम 1993 के तहत राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) की स्थापना एक वैधानिक निकाय के रूप में की गई। इसी प्रकार, भ्रष्टाचार रोकने हेतु संथानम समिति की सिफारिश पर CVC (1964 में गठित, 2003 में वैधानिक दर्जा) तथा 2013 के अधिनियम द्वारा लोकपाल का गठन किया गया।
मुख्य तथ्य
- नीति आयोग (NITI Aayog) का गठन 1 जनवरी 2015 को मंत्रिमंडल के एक प्रस्ताव द्वारा योजना आयोग के स्थान पर किया गया था।
- नीति आयोग एक गैर-संवैधानिक एवं गैर-वैधानिक (कार्यकारी) निकाय है, जिसके पदेन अध्यक्ष भारत के प्रधानमंत्री होते हैं।
- नीति आयोग की गवर्निंग काउंसिल में सभी राज्यों के मुख्यमंत्री और केंद्र शासित प्रदेशों के उपराज्यपाल शामिल होते हैं।
- नीति आयोग के रिपोर्ट और दृष्टिकोण दस्तावेज 'विकसित भारत 2047' को 'नेट जीरो 2070' लक्ष्यों के साथ संरेखित करते हैं।
- राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) की स्थापना मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 के तहत 12 अक्टूबर 1993 को हुई थी।
- केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC) का गठन 1964 में संथानम समिति की सिफारिश पर हुआ तथा इसे 2003 में वैधानिक दर्जा प्राप्त हुआ।
- लोकपाल और लोकायुक्त अधिनियम 2013 के तहत भारत के पहले लोकपाल न्यायमूर्ति पिनाकी चंद्र घोष (2019) नियुक्त किए गए थे।
- केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) की स्थापना सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम, 2005 के तहत 2005 में की गई थी।
- राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) का गठन राष्ट्रीय महिला आयोग अधिनियम, 1990 के अंतर्गत जनवरी 1992 में हुआ था।
- राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) की स्थापना पर्यावरण मामलों के त्वरित निपटान हेतु NGT अधिनियम, 2010 के तहत की गई थी।
तालिका
- निकाय का नाम: नीति आयोग · प्रकृति (प्रकार): गैर-वैधानिक (कार्यकारी) · स्थापना वर्ष: 2015 · गठन का आधार/अधिनियम: मंत्रिमंडल का संकल्प (Executive Resolution)
- निकाय का नाम: राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) · प्रकृति (प्रकार): वैधानिक निकाय · स्थापना वर्ष: 1993 · गठन का आधार/अधिनियम: मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993
- निकाय का नाम: केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC) · प्रकृति (प्रकार): वैधानिक निकाय · स्थापना वर्ष: 1964 (वैधानिक दर्जा 2003) · गठन का आधार/अधिनियम: के. संथानम समिति / CVC अधिनियम 2003
- निकाय का नाम: लोकपाल एवं लोकायुक्त · प्रकृति (प्रकार): वैधानिक निकाय · स्थापना वर्ष: 2014 (अधिनियम 2013) · गठन का आधार/अधिनियम: लोकपाल एवं लोकायुक्त अधिनियम, 2013
- निकाय का नाम: केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) · प्रकृति (प्रकार): वैधानिक निकाय · स्थापना वर्ष: 2005 · गठन का आधार/अधिनियम: सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम, 2005
- निकाय का नाम: राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) · प्रकृति (प्रकार): वैधानिक अधिकरण · स्थापना वर्ष: 2010 · गठन का आधार/अधिनियम: राष्ट्रीय हरित अधिकरण अधिनियम, 2010
अभ्यास प्रश्न (हल सहित)
- प्रश्न 18: निम्नलिखित में से कौन-सा निकाय गैर-वैधानिक और केवल कार्यकारी प्रस्ताव द्वारा गठित है?
(क) राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (ख) केंद्रीय सतर्कता आयोग (ग) नीति आयोग (घ) केंद्रीय सूचना आयोग
- ✔ उत्तर: (ग) नीति आयोग — नीति आयोग संसद के किसी कानून द्वारा नहीं, बल्कि 1 जनवरी 2015 को केंद्रीय मंत्रिमंडल के एक कार्यकारी प्रस्ताव द्वारा बनाया गया था।
- प्रश्न 19: केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC) की स्थापना किस समिति की सिफारिशों के आधार पर की गई थी?
(क) बलवंत राय मेहता समिति (ख) के. संथानम समिति (ग) प्रशासनिक सुधार आयोग (घ) स्वर्ण सिंह समिति
- ✔ उत्तर: (ख) के. संथानम समिति — CVC का गठन 1964 में भ्रष्टाचार निवारण हेतु गठित संथानम समिति की सिफारिश पर किया गया था।
- प्रश्न 20: राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. यह एक संवैधानिक निकाय है।
2. इसकी स्थापना मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 के तहत हुई थी।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
(क) केवल 1 (ख) केवल 2 (ग) 1 और 2 दोनों (घ) न तो 1 और न ही 2
- ✔ उत्तर: (ख) केवल 2 — NHRC एक वैधानिक (Statutory) निकाय है, न कि संवैधानिक (Constitutional) निकाय।
- प्रश्न 21: नीति आयोग के संबंध में कौन-सा कथन सत्य है?
(क) इसके अध्यक्ष भारत के वित्त मंत्री होते हैं। (ख) यह राज्यों को वित्तीय अनुदान आवंटित करता है। (ग) यह एक वैधानिक संस्था है। (घ) भारत के प्रधानमंत्री इसके पदेन अध्यक्ष होते हैं।
- ✔ उत्तर: (घ) भारत के प्रधानमंत्री इसके पदेन अध्यक्ष होते हैं। — नीति आयोग के पदेन अध्यक्ष भारत के प्रधानमंत्री होते हैं और यह अनुदान आवंटित करने का कार्य नहीं करता।
- प्रश्न 22: भारत के प्रथम लोकपाल के रूप में किसे नियुक्त किया गया था?
(क) न्यायमूर्ति ए. के. सीकरी (ख) न्यायमूर्ति पिनाकी चंद्र घोष (ग) न्यायमूर्ति एच. एल. दत्तू (घ) न्यायमूर्ति यू. यू. ललित
- ✔ उत्तर: (ख) न्यायमूर्ति पिनाकी चंद्र घोष — मार्च 2019 में न्यायमूर्ति पिनाकी चंद्र घोष को भारत का पहला लोकपाल नियुक्त किया गया था।
परीक्षा में कैसे आता है
BPSC प्रीलिम्स में गैर-संवैधानिक निकायों से प्रश्न अक्सर उनके स्वरूप (संवैधानिक बनाम वैधानिक/कार्यकारी), स्थापना का वर्ष, संबंधित समिति की सिफारिशें (जैसे CVC के लिए संथानम समिति) तथा अध्यक्ष/संरचना से पूछे जाते हैं।
इनमें भ्रम न करें
- ✘ संवैधानिक बनाम वैधानिक निकाय: संवैधानिक निकाय का उल्लेख संविधान के अनुच्छेदों में होता है (जैसे वित्त आयोग-Art 280), जबकि वैधानिक निकाय संसद के अधिनियम द्वारा बनते हैं (जैसे NHRC, CVC, Lokpal)। नीति आयोग कार्यकारी निकाय है।
- ✘ योजना आयोग बनाम नीति आयोग: योजना आयोग वित्तीय संसाधन आवंटित करता था और ऊपर से नीचे (Top-down) मॉडल पर काम करता था; नीति आयोग केवल परामर्शदात्री निकाय (Think Tank) है और नीचे से ऊपर (Bottom-up) मॉडल पर आधारित है।
💡 याद रखें: CVC = संथानम समिति (1964/2003) | नीति = कार्यकारी Think Tank (1 Jan 2015) | NHRC = 1993 अधिनियम
आपातकालीन प्रावधान (अनुच्छेद 352, 356, 360)
भारतीय संविधान के भाग XVIII (अनुच्छेद 352 से 360) में आपातकालीन प्रावधानों का उल्लेख किया गया है। इन प्रावधानों का मुख्य उद्देश्य देश की संप्रभुता, एकता, अखंडता और सुरक्षा की रक्षा करना है। आपातकाल लागू होने पर भारत का संघात्मक ढांचा बिना किसी औपचारिक संशोधन के एकात्मक रूप में बदल जाता है। राष्ट्रीय आपातकाल (अनुच्छेद 352) युद्ध, बाह्य आक्रमण या सशस्त्र विद्रोह के आधार पर लगाया जाता है। राज्य में संवैधानिक तंत्र की विफलता पर राष्ट्रपति शासन (अनुच्छेद 356) और वित्तीय स्थायित्व को खतरा होने पर वित्तीय आपातकाल (अनुच्छेद 360) लागू किया जाता है। 44वें संविधान संशोधन (1978) द्वारा इन प्रावधानों में दूरगामी सुधार किए गए ताकि इनका दुरुपयोग रोका जा सके।
मुख्य तथ्य
- संविधान के भाग 18 (अनुच्छेद 352-360) में आपातकालीन प्रावधान दिए गए हैं।
- भारत सरकार अधिनियम 1935 से आपातकालीन प्रावधान तथा जर्मनी के वाइमर संविधान से आपातकाल में मौलिक अधिकारों के निलंबन का सिद्धांत लिया गया है।
- अनुच्छेद 352 के तहत राष्ट्रीय आपातकाल युद्ध, बाह्य आक्रमण या 'सशस्त्र विद्रोह' के आधार पर लगाया जाता है।
- 44वें संविधान संशोधन 1978 द्वारा 'आंतरिक अशांति' शब्द के स्थान पर 'सशस्त्र विद्रोह' शब्द प्रतिस्थापित किया गया।
- राष्ट्रीय आपातकाल (अनुच्छेद 352) की घोषणा को संसद द्वारा 1 माह के भीतर विशेष बहुमत से अनुमोदित होना अनिवार्य है।
- संसद के अनुमोदन के बाद राष्ट्रीय आपातकाल एक बार में 6 माह के लिए बढ़ता है तथा इसे अनिश्चित काल तक जारी रखा जा सकता है।
- अनुच्छेद 358 के तहत युद्ध या बाह्य आक्रमण के आधार पर आपातकाल लगने पर अनुच्छेद 19 में वर्णित मौलिक अधिकार स्वतः निलंबित हो जाते हैं।
- अनुच्छेद 359 के तहत राष्ट्रपति आदेश जारी कर मौलिक अधिकारों के प्रवर्तन को निलंबित कर सकते हैं, लेकिन अनुच्छेद 20 और 21 को कभी निलंबित नहीं किया जा सकता।
- अनुच्छेद 356 (राष्ट्रपति शासन) राज्य में संवैधानिक तंत्र विफल होने पर लगाया जाता है।
- अनुच्छेद 365 के अनुसार यदि कोई राज्य केंद्र के निर्देशों का पालन करने में विफल रहता है, तो अनुच्छेद 356 लगाया जा सकता है।
- अनुच्छेद 356 के तहत घोषणा को संसद द्वारा 2 माह के भीतर साधारण बहुमत से अनुमोदित किया जाना आवश्यक है और इसकी अधिकतम अवधि 3 वर्ष है।
- भारत में सबसे पहले राष्ट्रपति शासन 1951 में पंजाब राज्य में लगाया गया था।
- अनुच्छेद 360 वित्तीय आपातकाल से संबंधित है जिसे 2 माह के भीतर साधारण बहुमत से संसद द्वारा अनुमोदित किया जाना चाहिए।
- भारत में अब तक एक बार भी वित्तीय आपातकाल (अनुच्छेद 360) नहीं लगाया गया है।
- संविधान में 'मंत्रिमंडल' (Cabinet) शब्द का प्रयोग केवल अनुच्छेद 352(3) में 44वें संशोधन द्वारा जोड़ा गया है।
तालिका
- प्रकार (Type): राष्ट्रीय आपातकाल · अनुच्छेद (Article): अनुच्छेद 352 · आधार (Grounds): युद्ध, बाह्य आक्रमण, सशस्त्र विद्रोह · संसदीय स्वीकृति समय (Approval Window): 1 माह (विशेष बहुमत) · अधिकतम अवधि (Max Duration): अनिश्चित (हर 6 माह में नवीनीकरण)
- प्रकार (Type): राष्ट्रपति शासन · अनुच्छेद (Article): अनुच्छेद 356 · आधार (Grounds): राज्य में संवैधानिक तंत्र की विफलता (अनुच्छेद 365 भी) · संसदीय स्वीकृति समय (Approval Window): 2 माह (साधारण बहुमत) · अधिकतम अवधि (Max Duration): अधिकतम 3 वर्ष
- प्रकार (Type): वित्तीय आपातकाल · अनुच्छेद (Article): अनुच्छेद 360 · आधार (Grounds): वित्तीय स्थायित्व या साख को खतरा · संसदीय स्वीकृति समय (Approval Window): 2 माह (साधारण बहुमत) · अधिकतम अवधि (Max Duration): अनिश्चितकाल (कोई समय सीमा नहीं)
अभ्यास प्रश्न (हल सहित)
- प्रश्न 23: भारतीय संविधान का कौन-सा अनुच्छेद यह प्रावधान करता है कि आपातकाल के दौरान भी अनुच्छेद 20 तथा 21 द्वारा प्रदत्त मौलिक अधिकार निलंबित नहीं किए जा सकते?
(क) अनुच्छेद 356 (ख) अनुच्छेद 358 (ग) अनुच्छेद 359 (घ) अनुच्छेद 360
- ✔ उत्तर: (ग) अनुच्छेद 359 — 44वें संशोधन के अनुसार अनुच्छेद 359 के तहत राष्ट्रपति आदेश द्वारा भी अनुच्छेद 20 और 21 को निलंबित नहीं किया जा सकता।
- प्रश्न 24: राष्ट्रीय आपातकाल (अनुच्छेद 352) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इसकी उद्घोषणा को संसद के दोनों सदनों द्वारा 1 महीने के भीतर विशेष बहुमत से स्वीकृत होना चाहिए।
2. 'सशस्त्र विद्रोह' शब्द को 42वें संविधान संशोधन द्वारा जोड़ा गया था।
उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
(क) केवल 1 (ख) केवल 2 (ग) 1 और 2 दोनों (घ) न तो 1 और न ही 2
- ✔ उत्तर: (क) केवल 1 — कथन 1 सही है; कथन 2 गलत है क्योंकि 'सशस्त्र विद्रोह' शब्द 44वें संशोधन 1978 द्वारा शामिल किया गया था।
- प्रश्न 25: अनुच्छेद 356 के तहत किसी राज्य में राष्ट्रपति शासन अधिकतम कितनी अवधि तक बढ़ाया जा सकता है?
(क) 1 वर्ष (ख) 2 वर्ष (ग) 3 वर्ष (घ) अनिश्चित काल
- ✔ उत्तर: (ग) 3 वर्ष — अनुच्छेद 356 के तहत राष्ट्रपति शासन हर 6 महीने में बढ़ाकर अधिकतम 3 वर्ष तक ही लागू रखा जा सकता है।
- प्रश्न 26: वित्तीय आपातकाल (अनुच्छेद 360) के संबंध में कौन-सा कथन सत्य है?
(क) इसे संसद द्वारा 1 माह के भीतर अनुमोदित किया जाना चाहिए। (ख) इसे लागू करने की अधिकतम अवधि 3 वर्ष है। (ग) भारत में इसे अब तक एक बार लागू किया जा चुका है। (घ) इसके लागू रहने की कोई अधिकतम समय-सीमा निर्धारित नहीं है।
- ✔ उत्तर: (घ) इसके लागू रहने की कोई अधिकतम समय-सीमा निर्धारित नहीं है। — अनुच्छेद 360 के तहत वित्तीय आपातकाल के लिए कोई अधिकतम समय सीमा तय नहीं है और यह अब तक भारत में कभी लागू नहीं हुआ है।
- प्रश्न 27: संविधान में 'मंत्रिमंडल' (Cabinet) शब्द का प्रयोग पहली बार किस अनुच्छेद में और किस संशोधन द्वारा किया गया?
(क) अनुच्छेद 74 (42वां संशोधन) (ख) अनुच्छेद 352 (44वां संशोधन) (ग) अनुच्छेद 75 (44वां संशोधन) (घ) अनुच्छेद 356 (42वां संशोधन)
- ✔ उत्तर: (ख) अनुच्छेद 352 (44वां संशोधन) — 44वें संविधान संशोधन 1978 द्वारा अनुच्छेद 352(3) में 'कैबिनेट' या 'मंत्रिमंडल' की लिखित सिफारिश की शर्त जोड़ी गई।
परीक्षा में कैसे आता है
BPSC में आपातकालीन प्रावधानों से अनुच्छेद 352, 356 और 360 के अंतर, आवश्यक बहुमत, समय सीमा और 44वें संशोधन के बदलावों पर सीधे एवं कथन-आधारित प्रश्न पूछे जाते हैं।
इनमें भ्रम न करें
- ✘ राष्ट्रीय आपातकाल (अनुच्छेद 352) के अनुमोदन के लिए 1 माह का समय और विशेष बहुमत चाहिए, जबकि अनुच्छेद 356 और 360 के लिए 2 माह का समय और साधारण बहुमत की आवश्यकता होती है।
- ✘ अनुच्छेद 358 केवल युद्ध या बाह्य आक्रमण के आधार पर अनुच्छेद 19 को स्वतः निलंबित करता है, जबकि अनुच्छेद 359 में राष्ट्रपति आदेश द्वारा मौलिक अधिकारों के प्रवर्तन को निलंबित करते हैं (अनुच्छेद 20 और 21 को छोड़कर)।
💡 अनुच्छेद का क्रम: 352 (+4) -> 356 (+4) -> 360। स्वीकृति समय: 352 के लिए 1 महीना, बाकी दोनों (356 व 360) के लिए 2 महीने।
एक नज़र में (Revision)
- सर्वोच्च न्यायालय का गठन और अधिकारिता अनुच्छेद 124 से 147 (भाग V) में वर्णित है; इसके न्यायाधीशों की नियुक्ति कॉलेजियम प्रणाली की संस्तुति पर राष्ट्रपति द्वारा की जाती है।
- सर्वोच्च न्यायालय के पास मूल (अनुच्छेद 131), अपीलीय और सलाहकार (अनुच्छेद 143) क्षेत्राधिकार हैं, तथा न्यायमूर्ति पी.एन. भगवती को भारत में जनहित याचिका (PIL) का जनक माना जाता है।
- उच्च न्यायालयों का प्रावधान अनुच्छेद 214 से 231 (भाग VI) में है; पटना उच्च न्यायालय की स्थापना 9 फरवरी 1916 (उद्घाटन 3 फरवरी 1916) को हुई थी।
- अनुच्छेद 226 के तहत उच्च न्यायालयों का रिट क्षेत्राधिकार मौलिक अधिकारों के साथ-साथ अन्य विधिक अधिकारों के लिए भी लागू होता है, जो कि अनुच्छेद 32 से अधिक व्यापक है।
- भारत निर्वाचन आयोग एक स्थायी संवैधानिक निकाय है जिसका उल्लेख अनुच्छेद 324 में है, जो संसद, राज्य विधानमंडलों, राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के चुनावों का संचालन करता है।
- संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) और राज्य लोक सेवा आयोग (SPSC) का प्रावधान अनुच्छेद 315 से 323 तक है; बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) राज्य स्तरीय संवैधानिक संस्था है।
- भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (CAG) का पद अनुच्छेद 148 के तहत सृजित है, जिन्हें लोक वित्त का संरक्षक और लोक लेखा समिति का 'मित्र एवं मार्गदर्शक' कहा जाता है।
- वित्त आयोग (अनुच्छेद 280) प्रत्येक पांच वर्ष में राष्ट्रपति द्वारा गठित अर्ध-न्यायिक निकाय है, जो केंद्र और राज्यों के बीच करों के बंटवारे की अनुशंसा करता है।
- भारत का महान्यायवादी (अनुच्छेद 76) देश का सर्वोच्च विधि अधिकारी होता है, जिसे संसद की कार्यवाही में भाग लेने और बोलने का अधिकार है, परंतु मतदान का अधिकार नहीं है।
- नीति आयोग (1 जनवरी 2015) कार्यपालिका के प्रस्ताव द्वारा गठित गैर-संवैधानिक एवं गैर-सांविधिक निकाय है, जबकि NHRC (1993), CVC (2003 में सांविधिक दर्जा) और लोकपाल सांविधिक निकाय हैं।
- राष्ट्रीय आपातकाल (अनुच्छेद 352) युद्ध, बाह्य आक्रमण या सशस्त्र विद्रोह के आधार पर लगाया जाता है तथा इसे संसद द्वारा 1 माह के भीतर विशेष बहुमत से स्वीकृत होना अनिवार्य है।
- राष्ट्रपति शासन (अनुच्छेद 356) राज्यों में संवैधानिक तंत्र की विफलता पर 2 माह के भीतर साधारण बहुमत से स्वीकृत होता है, जबकि वित्तीय आपातकाल (अनुच्छेद 360) भारत में अब तक एक बार भी लागू नहीं किया गया है।
अपने आप को जाँचिए — 10 प्रश्न
1. पटना उच्च न्यायालय की स्थापना किस वर्ष हुई थी?
- (क) 1912
- (ख) 1916
- (ग) 1919
- (घ) 1921
उत्तर देखें
उत्तर: (ख) 1916
पटना उच्च न्यायालय की स्थापना 3 फरवरी 1916 को हुई थी, जब इसने औपचारिक रूप से कार्य करना शुरू किया था।
2. भारतीय संविधान के किस अनुच्छेद के तहत भारत का राष्ट्रपति सर्वोच्च न्यायालय से विधिक या तथ्यात्मक प्रश्नों पर सलाह ले सकता है?
- (क) अनुच्छेद 129
- (ख) अनुच्छेद 131
- (ग) अनुच्छेद 137
- (घ) अनुच्छेद 143
उत्तर देखें
उत्तर: (घ) अनुच्छेद 143
अनुच्छेद 143 राष्ट्रपति को सार्वजनिक महत्व के मामलों पर सर्वोच्च न्यायालय से परामर्श लेने की शक्ति (सलाहकारी क्षेत्राधिकार) प्रदान करता है।
3. भारत में जनहित याचिका (PIL) की अवधारणा की शुरुआत मुख्य रूप से किस मुख्य न्यायाधीश/न्यायमूर्ति की पहल से मानी जाती है?
- (क) न्यायमूर्ति एम. हिदायतुल्ला
- (ख) न्यायमूर्ति पी. एन. भगवती
- (ग) न्यायमूर्ति एच. जे. कनिया
- (घ) न्यायमूर्ति वाई. वी. चंद्रचूड़
उत्तर देखें
उत्तर: (ख) न्यायमूर्ति पी. एन. भगवती
भारत में पीआईएल (PIL) की शुरुआत 1980 के दशक में न्यायमूर्ति पी. एन. भगवती और न्यायमूर्ति वी. आर. कृष्णा अय्यर द्वारा की गई थी।
4. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारत के महान्यायवादी (Attorney General) की नियुक्ति अनुच्छेद 76 के तहत राष्ट्रपति द्वारा की जाती है।
2. उन्हें संसद के दोनों सदनों में बोलने और कार्यवाही में भाग लेने का अधिकार है।
3. उन्हें संसद में मतदान करने का अधिकार भी प्राप्त है।
उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
- (क) केवल 1 और 2
- (ख) केवल 2 और 3
- (ग) केवल 1 और 3
- (घ) 1, 2 और 3
उत्तर देखें
उत्तर: (क) केवल 1 और 2
अनुच्छेद 88 के तहत महान्यायवादी को संसद के दोनों सदनों में बोलने और भाग लेने का अधिकार है, परंतु उन्हें मतदान करने का अधिकार प्राप्त नहीं है।
5. सूची-I को सूची-II से सुमेलित कीजिए तथा नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:
सूची-I (संस्थान)
A. भारत का नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक
B. वित्त आयोग
C. भारत निर्वाचन आयोग
D. संघ लोक सेवा आयोग
सूची-II (अनुच्छेद)
1. अनुच्छेद 280
2. अनुच्छेद 148
3. अनुच्छेद 315
4. अनुच्छेद 324
कूट:
- (क) A-2, B-1, C-4, D-3
- (ख) A-1, B-2, C-4, D-3
- (ग) A-2, B-1, C-3, D-4
- (घ) A-4, B-3, C-2, D-1
उत्तर देखें
उत्तर: (क) A-2, B-1, C-4, D-3
CAG अनुच्छेद 148, वित्त आयोग अनुच्छेद 280, निर्वाचन आयोग अनुच्छेद 324 और UPSC अनुच्छेद 315 के तहत उल्लिखित हैं।
6. लोक लेखा समिति (Public Accounts Committee) के 'मित्र, दार्शनिक एवं मार्गदर्शक' के रूप में कौन कार्य करता है?
- (क) भारत का महान्यायवादी
- (ख) भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (CAG)
- (ग) वित्त आयोग के अध्यक्ष
- (घ) रिजर्व बैंक के गवर्नर
उत्तर देखें
उत्तर: (ख) भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (CAG)
CAG की लेखापरीक्षा रिपोर्टों की जांच संसद की लोक लेखा समिति (PAC) करती है, इसलिए CAG को इस समिति का 'मित्र, दार्शनिक और मार्गदर्शक' कहा जाता है।
7. निम्नलिखित में से कौन-सा निकाय न तो संवैधानिक है और न ही सांविधिक (वैधानिक), बल्कि एक गैर-सांविधिक कार्यकारी निकाय है?
- (क) राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC)
- (ख) केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC)
- (ग) नीति आयोग (NITI Aayog)
- (घ) लोकपाल
उत्तर देखें
उत्तर: (ग) नीति आयोग (NITI Aayog)
नीति आयोग की स्थापना 1 जनवरी 2015 को केंद्रीय मंत्रिमंडल के एक कार्यकारी संकल्प द्वारा की गई थी। यह न तो संवैधानिक निकाय है और न ही सांविधिक।
8. किस संविधान संशोधन अधिनियम द्वारा अनुच्छेद 352 में राष्ट्रीय आपातकाल के आधार के रूप में 'आंतरिक अशांति' शब्द के स्थान पर 'सशस्त्र विद्रोह' शब्द प्रतिस्थापित किया गया?
- (क) 42वां संविधान संशोधन अधिनियम, 1976
- (ख) 44वां संविधान संशोधन अधिनियम, 1978
- (ग) 52वां संविधान संशोधन अधिनियम, 1985
- (घ) 61वां संविधान संशोधन अधिनियम, 1989
उत्तर देखें
उत्तर: (ख) 44वां संविधान संशोधन अधिनियम, 1978
44वें संविधान संशोधन अधिनियम 1978 द्वारा अनुच्छेद 352 में 'आंतरिक अशांति' शब्द को हटाकर 'सशस्त्र विद्रोह' शब्द जोड़ा गया ताकि आपातकाल के दुरुपयोग को रोका जा सके।
9. उच्च न्यायालयों के रिट क्षेत्राधिकार के संदर्भ में, भारतीय संविधान का अनुच्छेद 226 सर्वोच्च न्यायालय के अनुच्छेद 32 से किस प्रकार भिन्न है?
- (क) अनुच्छेद 226 केवल मौलिक अधिकारों के प्रवर्तन तक सीमित है।
- (ख) अनुच्छेद 226 मौलिक अधिकारों के साथ-साथ अन्य सामान्य विधिक अधिकारों के प्रवर्तन हेतु भी रिट जारी करने की शक्ति देता है।
- (ग) उच्च न्यायालय केवल बंदी प्रत्यक्षीकरण रिट जारी कर सकता है।
- (घ) अनुच्छेद 226 के तहत रिट जारी करना उच्च न्यायालय के लिए अनिवार्य है।
उत्तर देखें
उत्तर: (ख) अनुच्छेद 226 मौलिक अधिकारों के साथ-साथ अन्य सामान्य विधिक अधिकारों के प्रवर्तन हेतु भी रिट जारी करने की शक्ति देता है।
सर्वोच्च न्यायालय अनुच्छेद 32 के तहत केवल मौलिक अधिकारों के उल्लंघन पर रिट जारी कर सकता है, जबकि उच्च न्यायालय अनुच्छेद 226 के तहत विधिक अधिकारों के लिए भी रिट जारी कर सकता है।
10. भारतीय संविधान के अनुच्छेद 360 के अंतर्गत वित्तीय आपातकाल भारत में अब तक कितनी बार घोषित किया गया है?
- (क) एक बार (1991 के आर्थिक संकट के दौरान)
- (ख) दो बार
- (ग) तीन बार
- (घ) एक बार भी नहीं
उत्तर देखें
उत्तर: (घ) एक बार भी नहीं
भारत में अब तक एक बार भी अनुच्छेद 360 के तहत वित्तीय आपातकाल लागू नहीं किया गया है।
English version — Judiciary, Constitutional and Non-Constitutional Bodies, and Emergency Provisions
This chapter is crucial for both BPSC Prelims General Studies and Mains GS Paper-2 (Indian Polity). Questions regarding the jurisdictions of the Supreme Court and Patna High Court, key constitutional posts, and emergency provisions are routinely asked every year.
Supreme Court: Appointment, Jurisdiction, PIL
Part V (Articles 124 to 147) of the Indian Constitution deals with the organization, powers, and jurisdiction of the Supreme Court. India has a single integrated judicial system with the Supreme Court at its apex, inaugurated on January 28, 1950. Judges, including the Chief Justice of India (CJI), are appointed by the President following recommendations from the Collegium system. The court exercises original jurisdiction (Article 131), writ jurisdiction (Article 32), appellate jurisdiction, and advisory jurisdiction (Article 143). Under Article 129, it serves as a Court of Record with powers to punish for its contempt. To ensure justice for marginalized sections, Public Interest Litigation (PIL) was introduced in the 1980s under the pioneering leadership of Justice P. N. Bhagwati and Justice V. R. Krishna Iyer.
Key facts
- The Supreme Court of India was inaugurated on 28 January 1950 in New Delhi.
- The original Constitution provided for 8 judges (1 CJI + 7), whereas the current sanctioned strength is 34 (1 CJI + 33 others).
- The Parliament has the exclusive power to increase the number of judges in the Supreme Court.
- Judges of the Supreme Court are appointed by the President under Article 124(2) of the Constitution.
- The Supreme Court Collegium consists of the CJI and 4 senior-most judges of the apex court.
- Supreme Court judges hold office until the age of 65 years and submit their resignation to the President.
- A judge can be removed by the President following an address by Parliament with a special majority on grounds of proved misbehaviour or incapacity.
- Article 131 confers exclusive original jurisdiction on the Supreme Court in federal disputes between the Centre and States or among States.
- Under Article 32, the Supreme Court can issue 5 types of writs (Habeas Corpus, Mandamus, Prohibition, Certiorari, Quo-Warranto) for enforcement of Fundamental Rights.
- Article 143 empowers the President to seek advisory opinion from the Supreme Court on questions of law or fact.
- According to Article 129, the Supreme Court is a 'Court of Record'.
- Justice P.N. Bhagwati and Justice V.R. Krishna Iyer are regarded as the pioneers of PIL in India.
- The concept of Public Interest Litigation (PIL) originated in the jurisprudence of the USA.
- The first Chief Justice of India was H.J. Kania (Hiralal J. Kania).
Table
- अनुच्छेद: अनुच्छेद 124 · विषय / क्षेत्राधिकार: स्थापना एवं न्यायाधीशों की नियुक्ति · मुख्य बिंदु: राष्ट्रपति द्वारा कॉलेजियम की सिफारिश पर नियुक्ति; सेवानिवृत्ति 65 वर्ष
- अनुच्छेद: अनुच्छेद 129 · विषय / क्षेत्राधिकार: अभिलेख न्यायालय (Court of Record) · मुख्य बिंदु: निर्णय साक्ष्य के रूप में सुरक्षित; अवमानना पर दंड देने का अधिकार
- अनुच्छेद: अनुच्छेद 131 · विषय / क्षेत्राधिकार: मूल/प्रारंभिक क्षेत्राधिकार · मुख्य बिंदु: केंद्र बनाम राज्य या राज्य बनाम राज्य के अनन्य संघीय विवाद
- अनुच्छेद: अनुच्छेद 136 · विषय / क्षेत्राधिकार: विशेष अनुमति याचिका (SLP) · मुख्य बिंदु: किसी भी न्यायालय या अधिकरण के निर्णय के विरुद्ध अपील की विशेष अनुमति
- अनुच्छेद: अनुच्छेद 137 · विषय / क्षेत्राधिकार: निर्णयों का पुनर्विलोकन (Review) · मुख्य बिंदु: सर्वोच्च न्यायालय अपने ही पूर्व निर्णयों की समीक्षा कर बदल सकता है
- अनुच्छेद: अनुच्छेद 143 · विषय / क्षेत्राधिकार: परामर्शदात्री क्षेत्राधिकार · मुख्य बिंदु: राष्ट्रपति सार्वजनिक महत्व के कानूनी प्रश्नों पर राय मांग सकते हैं (राय बाध्यकारी नहीं)
Practice questions (solved)
- Q 1: भारतीय संविधान के किस अनुच्छेद के तहत सर्वोच्च न्यायालय एक अभिलेख न्यायालय (Court of Record) के रूप में कार्य करता है?
(क) अनुच्छेद 126 (ख) अनुच्छेद 129 (ग) अनुच्छेद 131 (घ) अनुच्छेद 137
- ✔ Answer: (ख) अनुच्छेद 129 — अनुच्छेद 129 के अनुसार सर्वोच्च न्यायालय अभिलेख न्यायालय होता है और इसे अपनी अवमानना के लिए दंडित करने की शक्ति प्राप्त है।
- Q 2: सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या में वृद्धि करने का अधिकार किसे प्राप्त है?
(क) भारत के राष्ट्रपति को (ख) भारत के मुख्य न्यायाधीश को (ग) संसद को (विधि द्वारा) (घ) विधि मंत्रालय को
- ✔ Answer: (ग) संसद को (विधि द्वारा) — संविधान के अनुच्छेद 124(1) के अंतर्गत संसद को कानून बनाकर सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या तय करने का अधिकार है।
- Q 3: केंद्र और राज्यों के बीच किसी विवाद का निपटारा करना सर्वोच्च न्यायालय के किस क्षेत्राधिकार के अंतर्गत आता है?
(क) अपीलीय क्षेत्राधिकार (ख) परामर्शदात्री क्षेत्राधिकार (ग) प्रारंभिक (मूल) क्षेत्राधिकार (घ) समीक्षा क्षेत्राधिकार
- ✔ Answer: (ग) प्रारंभिक (मूल) क्षेत्राधिकार — अनुच्छेद 131 के तहत संघीय ढाँचे से संबंधित विवादों की सीधी सुनवाई सर्वोच्च न्यायालय का अनन्य मूल (प्रारंभिक) क्षेत्राधिकार है।
- Q 4: सर्वोच्च न्यायालय के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश 65 वर्ष की आयु तक पद धारण करते हैं।
2. राष्ट्रपति को सलाह देने का परामर्शदात्री क्षेत्राधिकार अनुच्छेद 143 में वर्णित है।
3. भारत में जनहित याचिका (PIL) की शुरुआत 1980 के दशक में हुई थी।
उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
(क) केवल 1 और 2 (ख) केवल 2 और 3 (ग) केवल 1 और 3 (घ) 1, 2 और 3
- ✔ Answer: (घ) 1, 2 और 3 — तीनों कथन सही हैं: सेवामुक्ति की आयु 65 वर्ष है, परामर्श अधिकार अनुच्छेद 143 में है और 1980 के दशक में पी.एन. भगवती के समय PIL प्रारंभ हुई।
- Q 5: भारत में जनहित याचिका (PIL) की अवधारणा को विकसित करने का मुख्य श्रेय निम्नलिखित में से किस न्यायाधीश को जाता है?
(क) न्यायमूर्ति एम. हिदायतुल्ला (ख) न्यायमूर्ति पी. एन. भगवती (ग) न्यायमूर्ति एच. जे. कानिया (घ) न्यायमूर्ति जे. एस. वर्मा
- ✔ Answer: (ख) न्यायमूर्ति पी. एन. भगवती — न्यायमूर्ति पी. एन. भगवती और न्यायमूर्ति वी. आर. कृष्ण अय्यर को भारत में जनहित याचिका के विकास का प्रणेता माना जाता है।
- Q 6: सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश और अन्य न्यायाधीशों की नियुक्ति कॉलेजियम प्रणाली के आधार पर कौन करता है?
(क) केंद्रीय कानून मंत्री (ख) प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली समिति (ग) भारत के राष्ट्रपति (घ) उपराष्ट्रपति
- ✔ Answer: (ग) भारत के राष्ट्रपति — अनुच्छेद 124(2) के तहत सर्वोच्च न्यायालय के सभी न्यायाधीशों की औपचारिक नियुक्ति भारत के राष्ट्रपति द्वारा की जाती है।
How it is asked
BPSC frequently tests direct articles (such as 32, 129, 131, 143), retirement age of SC judges (65 years vs HC 62 years), Parliamentary power to increase judges, and the origin/pioneers of PIL. Statement-based questions often contrast original and appellate jurisdictions.
Do not confuse
- ✘ सेवानिवृत्ति की आयु: सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश 65 वर्ष में सेवानिवृत्त होते हैं, जबकि उच्च न्यायालय के न्यायाधीश 62 वर्ष में।
- ✘ संख्या निर्धारण: सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या 'संसद विधि द्वारा' बढ़ाती है, जबकि उच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या 'राष्ट्रपति' तय करते हैं।
- ✘ रिट अधिकारिता: अनुच्छेद 32 के तहत SC केवल मौलिक अधिकारों के हनन पर रिट जारी करता है, जबकि अनुच्छेद 226 के तहत HC मौलिक अधिकारों के साथ-साथ अन्य विधिक अधिकारों के लिए भी रिट जारी कर सकता है।
💡 याद रखें '143 = सलाह': राष्ट्रपति SC से विधिक मामलों में प्यार से सलाह मांगते हैं अनुच्छेद 143 के तहत (पर मानना बाध्यकारी नहीं)।
High Courts including Patna High Court (1916)
Articles 214 to 231 in Part VI of the Indian Constitution govern the organization, jurisdiction, and powers of High Courts. Article 214 mandates a High Court for each state, while Article 231 empowers Parliament to establish a common High Court for multiple states. High Court judges are appointed by the President in consultation with the Chief Justice of India and the state Governor. For Bihar competitive exams, the Patna High Court, established on 3 February 1916 with Sir Edward Maynard Des Champs Chamier as its first Chief Justice, is a key subject. Under Article 226, High Courts possess broad writ jurisdiction extending to both fundamental and legal rights. Furthermore, under Article 215, a High Court functions as a Court of Record with powers to punish for its contempt.
Key facts
- According to Article 214 of the Constitution, there shall be a High Court for each state.
- Under Article 231, Parliament can establish a common High Court for two or more states by law.
- High Court judges are appointed by the President after consulting the CJI and the Governor (Article 217).
- Patna High Court was established on 3 February 1916.
- The building of Patna High Court was inaugurated on 3 February 1916 by Lord Hardinge.
- Sir Edward Maynard Des Champs Chamier was the first Chief Justice of Patna High Court.
- Pandit Lakshmi Kanta Jha became the first Indian Chief Justice of Patna High Court in independent India (1948).
- The retirement age of a High Court judge is 62 years.
- Under Article 226, High Courts possess writ jurisdiction not restricted solely to fundamental rights.
- According to Article 215, every High Court is a 'Court of Record'.
- Article 227 gives the High Court power of superintendence over all subordinate courts and tribunals.
- Salaries of High Court judges are charged on the State Consolidated Fund, whereas their pensions are charged on the Consolidated Fund of India.
Table
- विषय / प्रावधान: स्थापना का प्रावधान · संविधान अनुच्छेद / तिथि: अनुच्छेद 214 · मुख्य विवरण: प्रत्येक राज्य के लिए उच्च न्यायालय का प्रावधान
- विषय / प्रावधान: साझा उच्च न्यायालय · संविधान अनुच्छेद / तिथि: अनुच्छेद 231 · मुख्य विवरण: संसद द्वारा दो या अधिक राज्यों के लिए एक उच्च न्यायालय
- विषय / प्रावधान: न्यायाधीश नियुक्ति · संविधान अनुच्छेद / तिथि: अनुच्छेद 217 · मुख्य विवरण: राष्ट्रपति द्वारा (CJI व राज्यपाल से परामर्श पर)
- विषय / प्रावधान: रिट क्षेत्राधिकार · संविधान अनुच्छेद / तिथि: अनुच्छेद 226 · मुख्य विवरण: मौलिक अधिकार एवं अन्य कानूनी अधिकारों के लिए
- विषय / प्रावधान: अभिलेख न्यायालय · संविधान अनुच्छेद / तिथि: अनुच्छेद 215 · मुख्य विवरण: अदालत को अवमानना पर दंड देने का अधिकार
- विषय / प्रावधान: पटना उच्च न्यायालय स्थापना · संविधान अनुच्छेद / तिथि: 3 फरवरी 1916 · मुख्य विवरण: उद्घाटन वायसराय लॉर्ड हार्डिंग द्वारा किया गया
- विषय / प्रावधान: पटना HC प्रथम मुख्य न्यायाधीश · संविधान अनुच्छेद / तिथि: 1916 · मुख्य विवरण: सर एडवर्ड मेनार्ड डेस चैम्प्स चामियर
Practice questions (solved)
- Q 7: पटना उच्च न्यायालय की औपचारिक रूप से स्थापना किस तिथि को हुई थी?
(क) 3 मार्च 1916 (ख) 3 फरवरी 1916 (ग) 1 अप्रैल 1912 (घ) 12 दिसंबर 1911
- ✔ Answer: (ख) 3 फरवरी 1916 — पटना उच्च न्यायालय की स्थापना 3 फरवरी 1916 को हुई थी।
- Q 8: उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति किसके द्वारा की जाती है?
(क) संबंधित राज्य के राज्यपाल द्वारा (ख) भारत के राष्ट्रपति द्वारा (ग) भारत के मुख्य न्यायाधीश द्वारा (घ) राज्य के मुख्यमंत्री द्वारा
- ✔ Answer: (ख) भारत के राष्ट्रपति द्वारा — अनुच्छेद 217 के तहत उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है।
- Q 9: निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. अनुच्छेद 226 के तहत उच्च न्यायालय केवल मौलिक अधिकारों के लिए रिट जारी कर सकता है।
2. उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की सेवानिवृत्ति आयु 62 वर्ष है।
उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
(क) केवल 1 (ख) केवल 2 (ग) 1 और 2 दोनों (घ) न तो 1 और न ही 2
- ✔ Answer: (ख) केवल 2 — अनुच्छेद 226 के तहत उच्च न्यायालय मौलिक अधिकारों के अलावा अन्य विधिक अधिकारों के लिए भी रिट जारी कर सकता है।
- Q 10: पटना उच्च न्यायालय के प्रथम मुख्य न्यायाधीश कौन थे?
(क) सर एडवर्ड मेनार्ड डेस चैम्प्स चामियर (ख) पंडित लक्ष्मी कांत झा (ग) सर कर्टनी टेरेल (घ) आर्थर ट्रेवर डॉसन
- ✔ Answer: (क) सर एडवर्ड मेनार्ड डेस चैम्प्स चामियर — पटना उच्च न्यायालय के प्रथम मुख्य न्यायाधीश सर एडवर्ड मेनार्ड डेस चैम्प्स चामियर थे।
- Q 11: उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों के वेतन और पेंशन के संबंध में कौन-सा कथन सत्य है?
(क) वेतन और पेंशन दोनों राज्य की संचित निधि से दिए जाते हैं। (ख) वेतन और पेंशन दोनों भारत की संचित निधि से दिए जाते हैं। (ग) वेतन राज्य की संचित निधि से और पेंशन भारत की संचित निधि से दी जाती है। (घ) वेतन भारत की संचित निधि से और पेंशन राज्य की संचित निधि से दी जाती है।
- ✔ Answer: (ग) वेतन राज्य की संचित निधि से और पेंशन भारत की संचित निधि से दी जाती है। — उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों का वेतन राज्य की संचित निधि से और पेंशन भारत की संचित निधि से दी जाती है।
- Q 12: संविधान का कौन-सा अनुच्छेद दो या दो से अधिक राज्यों के लिए साझा उच्च न्यायालय की स्थापना का प्रावधान करता है?
(क) अनुच्छेद 214 (ख) अनुच्छेद 217 (ग) अनुच्छेद 226 (घ) अनुच्छेद 231
- ✔ Answer: (घ) अनुच्छेद 231 — अनुच्छेद 231 के तहत संसद दो या अधिक राज्यों के लिए साझा उच्च न्यायालय स्थापित कर सकती है।
How it is asked
BPSC frequently asks direct and statement-based questions on the Patna High Court establishment date (3 Feb 1916), first Chief Justice, Article 226 writ powers, and salary-pension funding rules.
Do not confuse
- ✘ बिहार का पृथक राज्य के रूप में गठन 1912 में हुआ था, लेकिन पटना उच्च न्यायालय की स्थापना 3 फरवरी 1916 को हुई।
- ✘ उच्च न्यायालय के न्यायाधीश की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है और वे अपना त्यागपत्र भी राष्ट्रपति को ही सौंपते हैं, राज्यपाल को नहीं।
- ✘ उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों का वेतन राज्य की संचित निधि से मिलता है, परंतु उनकी पेंशन भारत की संचित निधि से दी जाती है।
💡 3 फरवरी 1916 को पटना HC खुला; रिट में 226 (HC) 32 (SC) से बड़ा!
Constitutional Bodies of India with Articles
Constitutional bodies are authorities created directly by the Constitution of India. The Attorney General (Article 76) is the chief legal advisor to the Union Government, while the CAG (Article 148) acts as the guardian of the public purse. The Election Commission of India (Article 324) manages national and state elections, whereas State Election Commissions (Article 243K) handle local body elections. The Finance Commission (Article 280) recommends tax revenue distribution between the Union and States. UPSC and SPSC (Articles 315-323) conduct recruitment for civil services. Their articles, appointments, tenures, and removal procedures are frequently tested in BPSC CCE.
Key facts
- The Attorney General of India (Article 76) is appointed by the President and holds office during the pleasure of the President.
- Under Article 88, the Attorney General has the right to speak and participate in Parliamentary proceedings, but has no right to vote.
- The CAG of India (Article 148) is appointed by the President for a term of 6 years or up to 65 years of age, whichever is earlier.
- Under Article 280, the President constitutes a Finance Commission every five years.
- According to Article 280(2), the qualifications of Finance Commission members are determined by Parliament by law.
- The Election Commission of India (Article 324) conducts elections for Parliament, State Legislatures, President, and Vice-President.
- In March 2024, the age eligibility for senior citizens to vote via postal ballot was raised from 80 years to 85 years.
- Under Article 243K, the State Election Commission prepares electoral rolls and conducts elections for Panchayats and Municipalities.
- The State Election Commissioner is appointed by the Governor, but can be removed only in the manner similar to a High Court Judge.
- Under Article 315, UPSC is constituted for the Union and SPSC for individual States.
- Members and Chairman of SPSC are appointed by the Governor, but can only be removed by the President.
- The Advocate General of a State is appointed by the Governor under Article 165.
Table
- संवैधानिक निकाय: भारत का महान्यायवादी (AG) · संबंधित अनुच्छेद: अनुच्छेद 76 · नियुक्ति कर्ता: राष्ट्रपति · कार्यकाल / पदमुक्ति: राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत
- संवैधानिक निकाय: नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) · संबंधित अनुच्छेद: अनुच्छेद 148 · नियुक्ति कर्ता: राष्ट्रपति · कार्यकाल / पदमुक्ति: 6 वर्ष या 65 वर्ष की आयु
- संवैधानिक निकाय: भारत का निर्वाचन आयोग (ECI) · संबंधित अनुच्छेद: अनुच्छेद 324 · नियुक्ति कर्ता: राष्ट्रपति · कार्यकाल / पदमुक्ति: 6 वर्ष या 65 वर्ष की आयु
- संवैधानिक निकाय: वित्त आयोग (FC) · संबंधित अनुच्छेद: अनुच्छेद 280 · नियुक्ति कर्ता: राष्ट्रपति · कार्यकाल / पदमुक्ति: 5 वर्ष (या राष्ट्रपति के अनुसार)
- संवैधानिक निकाय: संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) · संबंधित अनुच्छेद: अनुच्छेद 315-323 · नियुक्ति कर्ता: राष्ट्रपति · कार्यकाल / पदमुक्ति: 6 वर्ष या 65 वर्ष की आयु
- संवैधानिक निकाय: राज्य लोक सेवा आयोग (SPSC) · संबंधित अनुच्छेद: अनुच्छेद 315-323 · नियुक्ति कर्ता: राज्यपाल · कार्यकाल / पदमुक्ति: 6 वर्ष या 62 वर्ष (हटाने का अधिकार केवल राष्ट्रपति को)
- संवैधानिक निकाय: राज्य निर्वाचन आयोग (SEC) · संबंधित अनुच्छेद: अनुच्छेद 243K · नियुक्ति कर्ता: राज्यपाल · कार्यकाल / पदमुक्ति: उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के समान पदमुक्ति
- संवैधानिक निकाय: राज्य का महाधिवक्ता · संबंधित अनुच्छेद: अनुच्छेद 165 · नियुक्ति कर्ता: राज्यपाल · कार्यकाल / पदमुक्ति: राज्यपाल के प्रसादपर्यंत
Practice questions (solved)
- Q 13: भारत के महान्यायवादी के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सत्य है?
(क) वह संसद के किसी भी सदन की कार्यवाही में भाग ले सकता है और मतदान कर सकता है। (ख) उसे पद से हटाने के लिए महाभियोग प्रक्रिया अपनाई जाती है। (ग) वह राष्ट्रपति को विधिक मामलों में परामर्श देता है और राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत पद धारण करता है। (घ) उसकी नियुक्ति संसद की सिफारिश पर प्रधानमंत्री करते हैं।
- ✔ Answer: (ग) वह राष्ट्रपति को विधिक मामलों में परामर्श देता है और राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत पद धारण करता है। — अनुच्छेद 76 के तहत महान्यायवादी की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है और वह राष्ट्रपति को विधिक सलाह देता है तथा उनके प्रसादपर्यंत पद धारण करता है।
- Q 14: वित्त आयोग के सदस्यों की अर्हताओं और चयन विधि का निर्धारण कौन करता है?
(क) भारत के राष्ट्रपति (ख) संसद विधि द्वारा (ग) केंद्रीय मंत्रिमंडल (घ) सर्वोच्च न्यायालय
- ✔ Answer: (ख) संसद विधि द्वारा — अनुच्छेद 280(2) के तहत संसद को यह शक्ति प्राप्त है कि वह कानून बनाकर वित्त आयोग के सदस्यों की योग्यताएं तय करे।
- Q 15: राज्य लोक सेवा आयोग (SPSC) के अध्यक्ष और सदस्यों के संदर्भ में सही कथन चुनिए:
(क) नियुक्ति और पदमुक्ति दोनों राज्यपाल द्वारा की जाती है। (ख) नियुक्ति और पदमुक्ति दोनों राष्ट्रपति द्वारा की जाती है। (ग) नियुक्ति राज्यपाल द्वारा की जाती है, परंतु पदमुक्ति केवल राष्ट्रपति द्वारा हो सकती है। (घ) नियुक्ति मुख्यमंत्री की सिफारिश पर राष्ट्रपति करते हैं।
- ✔ Answer: (ग) नियुक्ति राज्यपाल द्वारा की जाती है, परंतु पदमुक्ति केवल राष्ट्रपति द्वारा हो सकती है। — SPSC के अध्यक्ष/सदस्यों की नियुक्ति राज्यपाल करते हैं, परंतु उन्हें हटाने का अधिकार केवल राष्ट्रपति के पास है।
- Q 16: निम्नलिखित में से कौन-सा युग्म सही सुमेलित नहीं है?
(क) भारत का महान्यायवादी - अनुच्छेद 76 (ख) नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक - अनुच्छेद 148 (ग) वित्त आयोग - अनुच्छेद 280 (घ) राज्य निर्वाचन आयोग - अनुच्छेद 326
- ✔ Answer: (घ) राज्य निर्वाचन आयोग - अनुच्छेद 326 — राज्य निर्वाचन आयोग का प्रावधान अनुच्छेद 243K में है, जबकि अनुच्छेद 326 वयस्क मताधिकार से संबंधित है।
- Q 17: मार्च 2024 में किए गए संशोधनों के अनुसार वरिष्ठ नागरिकों के लिए डाक मतपत्र (Postal Ballot) की न्यूनतम आयु पात्रता क्या है?
(क) 80 वर्ष (ख) 82 वर्ष (ग) 85 वर्ष (घ) 90 वर्ष
- ✔ Answer: (ग) 85 वर्ष — मार्च 2024 में डाक मतपत्र द्वारा मतदान हेतु वरिष्ठ नागरिकों की पात्रता आयु 80 से बढ़ाकर 85 वर्ष कर दी गई।
📜 Real previous-year questions (BPSC)
- [BPSC 71वीं प्रारंभिक (13 सितंबर 2025), प्रश्न 57] भारत का महान्यायवादी :
(क) सर्वोच्च न्यायालय के अतिरिक्त सुनवाई हेतु अर्ह नहीं है। (ख) राष्ट्रपति को विधिक मामलों में परामर्श देता है। (ग) संसद के सदन की प्रक्रिया में भाग नहीं ले सकता है। (घ) सरकार का पूर्ण कालिक सलाहकार है।
- ✔ Official answer: (ख) राष्ट्रपति को विधिक मामलों में परामर्श देता है। — अनुच्छेद 76 के तहत भारत का महान्यायवादी राष्ट्रपति को विधिक मामलों में परामर्श देने के लिए नियुक्त किया जाता है।
- [BPSC 71वीं प्रारंभिक (13 सितंबर 2025), प्रश्न 64] निम्नलिखित में से कौन वित्त आयोग के सदस्य के लिए आवश्यक अर्हताओं का निर्धारण करता है?
(क) भारत का राष्ट्रपति (ख) मंत्रिपरिषद (ग) संसद विधि द्वारा (घ) संघीय कैबिनेट
- ✔ Official answer: (ग) संसद विधि द्वारा — अनुच्छेद 280(2) के अनुसार वित्त आयोग के सदस्यों के लिए आवश्यक अर्हताओं का निर्धारण संसद विधि द्वारा करती है।
- [BPSC 70वीं प्रारंभिक (13 दिसंबर 2024), प्रश्न 8] मार्च 2024 में किए गए बदलावों के बाद, वरिष्ठ नागरिकों के लिए डाक मतपत्र द्वारा मतदान करने की पात्रता आयु क्या है ?
(क) 80 वर्ष (ख) 85 वर्ष (ग) 90 वर्ष (घ) 82 वर्ष
- ✔ Official answer: (ख) 85 वर्ष — मार्च 2024 में संशोधन कर वरिष्ठ नागरिकों हेतु डाक मतपत्र द्वारा मतदान की न्यूनतम पात्रता आयु 85 वर्ष कर दी गई।
How it is asked
BPSC tests constitutional bodies through direct factual questions on governing articles, appointing authorities, removal procedures, and terms of office.
Do not confuse
- ✘ राज्य लोक सेवा आयोग (SPSC) के अध्यक्ष को नियुक्त राज्यपाल करते हैं, लेकिन हटा केवल राष्ट्रपति सकते हैं (राज्यपाल नहीं)।
- ✘ वित्त आयोग के सदस्यों की योग्यताएं राष्ट्रपति तय नहीं करते, बल्कि संसद कानून बनाकर तय करती है।
- ✘ राज्य निर्वाचन आयुक्त की नियुक्ति राज्यपाल करते हैं, लेकिन उन्हें हटाने का तरीका वही है जो उच्च न्यायालय के न्यायाधीश का है।
💡 अनुच्छेद क्रम याद रखें: AG(76) -> CAG(148) -> SEC(243K) -> FC(280) -> UPSC(315) -> EC(324)
Non-Constitutional & Statutory Bodies (NITI Aayog, NHRC, CVC, Lokpal)
Bodies that are not mentioned in the original articles of the Indian Constitution are termed non-constitutional bodies. They are broadly classified into statutory bodies (created by an Act of Parliament) and executive bodies (created by a Cabinet resolution). NITI Aayog was established on 1 January 2015 by an executive resolution replacing the Planning Commission to function as a think tank based on cooperative federalism. NITI Aayog reports align Viksit Bharat 2047 targets with India's Net Zero 2070 commitments alongside revitalizing state economies. The National Human Rights Commission (NHRC) was formed as a statutory body under the Protection of Human Rights Act, 1993. Similarly, the Central Vigilance Commission (CVC, formed in 1964 and granted statutory status in 2003 based on Santhanam Committee recommendations) and Lokpal (under Lokpal Act 2013) were created to tackle corruption.
Key facts
- NITI Aayog was established on 1 January 2015 via a Cabinet resolution, replacing the Planning Commission.
- NITI Aayog is an executive (non-constitutional and non-statutory) body whose ex-officio Chairman is the Prime Minister of India.
- The Governing Council of NITI Aayog consists of Chief Ministers of all states and Lt. Governors of Union Territories.
- NITI Aayog reports align the Viksit Bharat 2047 framework with Net Zero 2070 climate goals.
- The National Human Rights Commission (NHRC) was established on 12 October 1993 under the Protection of Human Rights Act, 1993.
- The Central Vigilance Commission (CVC) was set up in 1964 on Santhanam Committee recommendations and given statutory status in 2003.
- Under the Lokpal and Lokayuktas Act 2013, Justice Pinaki Chandra Ghose was appointed as India's first Lokpal in 2019.
- The Central Information Commission (CIC) was established in 2005 under the Right to Information (RTI) Act, 2005.
- The National Commission for Women (NCW) was set up in January 1992 under the National Commission for Women Act, 1990.
- The National Green Tribunal (NGT) was established under the NGT Act, 2010 for expeditious disposal of environmental disputes.
Table
- निकाय का नाम: नीति आयोग · प्रकृति (प्रकार): गैर-वैधानिक (कार्यकारी) · स्थापना वर्ष: 2015 · गठन का आधार/अधिनियम: मंत्रिमंडल का संकल्प (Executive Resolution)
- निकाय का नाम: राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) · प्रकृति (प्रकार): वैधानिक निकाय · स्थापना वर्ष: 1993 · गठन का आधार/अधिनियम: मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993
- निकाय का नाम: केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC) · प्रकृति (प्रकार): वैधानिक निकाय · स्थापना वर्ष: 1964 (वैधानिक दर्जा 2003) · गठन का आधार/अधिनियम: के. संथानम समिति / CVC अधिनियम 2003
- निकाय का नाम: लोकपाल एवं लोकायुक्त · प्रकृति (प्रकार): वैधानिक निकाय · स्थापना वर्ष: 2014 (अधिनियम 2013) · गठन का आधार/अधिनियम: लोकपाल एवं लोकायुक्त अधिनियम, 2013
- निकाय का नाम: केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) · प्रकृति (प्रकार): वैधानिक निकाय · स्थापना वर्ष: 2005 · गठन का आधार/अधिनियम: सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम, 2005
- निकाय का नाम: राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) · प्रकृति (प्रकार): वैधानिक अधिकरण · स्थापना वर्ष: 2010 · गठन का आधार/अधिनियम: राष्ट्रीय हरित अधिकरण अधिनियम, 2010
Practice questions (solved)
- Q 18: निम्नलिखित में से कौन-सा निकाय गैर-वैधानिक और केवल कार्यकारी प्रस्ताव द्वारा गठित है?
(क) राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (ख) केंद्रीय सतर्कता आयोग (ग) नीति आयोग (घ) केंद्रीय सूचना आयोग
- ✔ Answer: (ग) नीति आयोग — नीति आयोग संसद के किसी कानून द्वारा नहीं, बल्कि 1 जनवरी 2015 को केंद्रीय मंत्रिमंडल के एक कार्यकारी प्रस्ताव द्वारा बनाया गया था।
- Q 19: केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC) की स्थापना किस समिति की सिफारिशों के आधार पर की गई थी?
(क) बलवंत राय मेहता समिति (ख) के. संथानम समिति (ग) प्रशासनिक सुधार आयोग (घ) स्वर्ण सिंह समिति
- ✔ Answer: (ख) के. संथानम समिति — CVC का गठन 1964 में भ्रष्टाचार निवारण हेतु गठित संथानम समिति की सिफारिश पर किया गया था।
- Q 20: राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. यह एक संवैधानिक निकाय है।
2. इसकी स्थापना मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 के तहत हुई थी।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
(क) केवल 1 (ख) केवल 2 (ग) 1 और 2 दोनों (घ) न तो 1 और न ही 2
- ✔ Answer: (ख) केवल 2 — NHRC एक वैधानिक (Statutory) निकाय है, न कि संवैधानिक (Constitutional) निकाय।
- Q 21: नीति आयोग के संबंध में कौन-सा कथन सत्य है?
(क) इसके अध्यक्ष भारत के वित्त मंत्री होते हैं। (ख) यह राज्यों को वित्तीय अनुदान आवंटित करता है। (ग) यह एक वैधानिक संस्था है। (घ) भारत के प्रधानमंत्री इसके पदेन अध्यक्ष होते हैं।
- ✔ Answer: (घ) भारत के प्रधानमंत्री इसके पदेन अध्यक्ष होते हैं। — नीति आयोग के पदेन अध्यक्ष भारत के प्रधानमंत्री होते हैं और यह अनुदान आवंटित करने का कार्य नहीं करता।
- Q 22: भारत के प्रथम लोकपाल के रूप में किसे नियुक्त किया गया था?
(क) न्यायमूर्ति ए. के. सीकरी (ख) न्यायमूर्ति पिनाकी चंद्र घोष (ग) न्यायमूर्ति एच. एल. दत्तू (घ) न्यायमूर्ति यू. यू. ललित
- ✔ Answer: (ख) न्यायमूर्ति पिनाकी चंद्र घोष — मार्च 2019 में न्यायमूर्ति पिनाकी चंद्र घोष को भारत का पहला लोकपाल नियुक्त किया गया था।
How it is asked
In BPSC Prelims, questions on non-constitutional bodies frequently focus on their nature (constitutional vs statutory/executive), year of establishment, recommending committee (e.g., Santhanam Committee for CVC), and head/composition.
Do not confuse
- ✘ संवैधानिक बनाम वैधानिक निकाय: संवैधानिक निकाय का उल्लेख संविधान के अनुच्छेदों में होता है (जैसे वित्त आयोग-Art 280), जबकि वैधानिक निकाय संसद के अधिनियम द्वारा बनते हैं (जैसे NHRC, CVC, Lokpal)। नीति आयोग कार्यकारी निकाय है।
- ✘ योजना आयोग बनाम नीति आयोग: योजना आयोग वित्तीय संसाधन आवंटित करता था और ऊपर से नीचे (Top-down) मॉडल पर काम करता था; नीति आयोग केवल परामर्शदात्री निकाय (Think Tank) है और नीचे से ऊपर (Bottom-up) मॉडल पर आधारित है।
💡 याद रखें: CVC = संथानम समिति (1964/2003) | नीति = कार्यकारी Think Tank (1 Jan 2015) | NHRC = 1993 अधिनियम
Emergency Provisions (Article 352, 356, 360)
Part XVIII (Articles 352 to 360) of the Indian Constitution details emergency provisions to safeguard the sovereignty, unity, integrity, and security of the nation. During an emergency, the federal structure transforms into a unitary system without a formal constitutional amendment. National Emergency (Article 352) is declared on grounds of war, external aggression, or armed rebellion. President's Rule (Article 356) is imposed during the breakdown of constitutional machinery in a state, while Financial Emergency (Article 360) addresses threats to financial stability. The 44th Constitutional Amendment Act of 1978 introduced crucial safeguards to prevent the misuse of these powers.
Key facts
- Part 18 (Articles 352-360) of the Constitution contains the emergency provisions.
- Emergency provisions were borrowed from the GOI Act 1935, and suspension of Fundamental Rights during emergency from Germany's Weimar Constitution.
- Under Article 352, National Emergency is declared on grounds of war, external aggression, or 'armed rebellion'.
- The 44th Constitutional Amendment 1978 replaced the term 'internal disturbance' with 'armed rebellion'.
- National Emergency declaration under Art 352 must be approved by Parliament within 1 month by a special majority.
- Upon parliamentary approval, National Emergency extends for 6 months at a time and can be continued indefinitely.
- Under Article 358, Fundamental Rights under Article 19 are automatically suspended during an emergency declared on grounds of war or external aggression.
- Under Article 359, the President can suspend enforcement of FRs by order, but Articles 20 and 21 can never be suspended.
- Article 356 (President's Rule) is imposed when constitutional machinery fails in a state.
- Under Article 365, failure of a state to comply with Union directions serves as a ground for invoking Article 356.
- President's Rule under Art 356 must be approved within 2 months by simple majority and has a maximum limit of 3 years.
- President's Rule was first imposed in Punjab state in 1951.
- Article 360 relates to Financial Emergency, which must be approved by Parliament within 2 months by simple majority.
- Financial Emergency under Article 360 has never been imposed in India.
- The word 'Cabinet' appears in the Constitution only in Article 352(3), added by the 44th Amendment.
Table
- प्रकार (Type): राष्ट्रीय आपातकाल · अनुच्छेद (Article): अनुच्छेद 352 · आधार (Grounds): युद्ध, बाह्य आक्रमण, सशस्त्र विद्रोह · संसदीय स्वीकृति समय (Approval Window): 1 माह (विशेष बहुमत) · अधिकतम अवधि (Max Duration): अनिश्चित (हर 6 माह में नवीनीकरण)
- प्रकार (Type): राष्ट्रपति शासन · अनुच्छेद (Article): अनुच्छेद 356 · आधार (Grounds): राज्य में संवैधानिक तंत्र की विफलता (अनुच्छेद 365 भी) · संसदीय स्वीकृति समय (Approval Window): 2 माह (साधारण बहुमत) · अधिकतम अवधि (Max Duration): अधिकतम 3 वर्ष
- प्रकार (Type): वित्तीय आपातकाल · अनुच्छेद (Article): अनुच्छेद 360 · आधार (Grounds): वित्तीय स्थायित्व या साख को खतरा · संसदीय स्वीकृति समय (Approval Window): 2 माह (साधारण बहुमत) · अधिकतम अवधि (Max Duration): अनिश्चितकाल (कोई समय सीमा नहीं)
Practice questions (solved)
- Q 23: भारतीय संविधान का कौन-सा अनुच्छेद यह प्रावधान करता है कि आपातकाल के दौरान भी अनुच्छेद 20 तथा 21 द्वारा प्रदत्त मौलिक अधिकार निलंबित नहीं किए जा सकते?
(क) अनुच्छेद 356 (ख) अनुच्छेद 358 (ग) अनुच्छेद 359 (घ) अनुच्छेद 360
- ✔ Answer: (ग) अनुच्छेद 359 — 44वें संशोधन के अनुसार अनुच्छेद 359 के तहत राष्ट्रपति आदेश द्वारा भी अनुच्छेद 20 और 21 को निलंबित नहीं किया जा सकता।
- Q 24: राष्ट्रीय आपातकाल (अनुच्छेद 352) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इसकी उद्घोषणा को संसद के दोनों सदनों द्वारा 1 महीने के भीतर विशेष बहुमत से स्वीकृत होना चाहिए।
2. 'सशस्त्र विद्रोह' शब्द को 42वें संविधान संशोधन द्वारा जोड़ा गया था।
उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
(क) केवल 1 (ख) केवल 2 (ग) 1 और 2 दोनों (घ) न तो 1 और न ही 2
- ✔ Answer: (क) केवल 1 — कथन 1 सही है; कथन 2 गलत है क्योंकि 'सशस्त्र विद्रोह' शब्द 44वें संशोधन 1978 द्वारा शामिल किया गया था।
- Q 25: अनुच्छेद 356 के तहत किसी राज्य में राष्ट्रपति शासन अधिकतम कितनी अवधि तक बढ़ाया जा सकता है?
(क) 1 वर्ष (ख) 2 वर्ष (ग) 3 वर्ष (घ) अनिश्चित काल
- ✔ Answer: (ग) 3 वर्ष — अनुच्छेद 356 के तहत राष्ट्रपति शासन हर 6 महीने में बढ़ाकर अधिकतम 3 वर्ष तक ही लागू रखा जा सकता है।
- Q 26: वित्तीय आपातकाल (अनुच्छेद 360) के संबंध में कौन-सा कथन सत्य है?
(क) इसे संसद द्वारा 1 माह के भीतर अनुमोदित किया जाना चाहिए। (ख) इसे लागू करने की अधिकतम अवधि 3 वर्ष है। (ग) भारत में इसे अब तक एक बार लागू किया जा चुका है। (घ) इसके लागू रहने की कोई अधिकतम समय-सीमा निर्धारित नहीं है।
- ✔ Answer: (घ) इसके लागू रहने की कोई अधिकतम समय-सीमा निर्धारित नहीं है। — अनुच्छेद 360 के तहत वित्तीय आपातकाल के लिए कोई अधिकतम समय सीमा तय नहीं है और यह अब तक भारत में कभी लागू नहीं हुआ है।
- Q 27: संविधान में 'मंत्रिमंडल' (Cabinet) शब्द का प्रयोग पहली बार किस अनुच्छेद में और किस संशोधन द्वारा किया गया?
(क) अनुच्छेद 74 (42वां संशोधन) (ख) अनुच्छेद 352 (44वां संशोधन) (ग) अनुच्छेद 75 (44वां संशोधन) (घ) अनुच्छेद 356 (42वां संशोधन)
- ✔ Answer: (ख) अनुच्छेद 352 (44वां संशोधन) — 44वें संविधान संशोधन 1978 द्वारा अनुच्छेद 352(3) में 'कैबिनेट' या 'मंत्रिमंडल' की लिखित सिफारिश की शर्त जोड़ी गई।
How it is asked
BPSC frequently asks direct and statement-based questions on emergency articles (352, 356, 360), parliamentary approval timeframes, majorities, and changes brought by the 44th Amendment.
Do not confuse
- ✘ राष्ट्रीय आपातकाल (अनुच्छेद 352) के अनुमोदन के लिए 1 माह का समय और विशेष बहुमत चाहिए, जबकि अनुच्छेद 356 और 360 के लिए 2 माह का समय और साधारण बहुमत की आवश्यकता होती है।
- ✘ अनुच्छेद 358 केवल युद्ध या बाह्य आक्रमण के आधार पर अनुच्छेद 19 को स्वतः निलंबित करता है, जबकि अनुच्छेद 359 में राष्ट्रपति आदेश द्वारा मौलिक अधिकारों के प्रवर्तन को निलंबित करते हैं (अनुच्छेद 20 और 21 को छोड़कर)।
💡 अनुच्छेद का क्रम: 352 (+4) -> 356 (+4) -> 360। स्वीकृति समय: 352 के लिए 1 महीना, बाकी दोनों (356 व 360) के लिए 2 महीने।
Quick revision
- The Supreme Court is provided under Articles 124 to 147 (Part V); appointments are made by the President based on the Collegium system recommendations.
- The Supreme Court holds original (Art 131), appellate, and advisory (Art 143) jurisdictions; Justice P.N. Bhagwati is recognized as the pioneer of PIL in India.
- High Courts are covered under Articles 214 to 231 (Part VI); the Patna High Court was formally established and inaugurated in February 1916.
- Under Article 226, a High Court has wider writ jurisdiction than the Supreme Court (Art 32) as it can issue writs for both Fundamental and ordinary legal rights.
- The Election Commission of India is a constitutional body under Article 324, overseeing elections to Parliament, State Legislatures, the President, and the Vice-President.
- UPSC and State Public Service Commissions are provided under Articles 315 to 323; BPSC functions as the constitutional recruiting body for Bihar.
- The Comptroller and Auditor General (CAG) under Article 148 acts as the guardian of the public purse and is the 'friend, philosopher, and guide' of the Public Accounts Committee.
- The Finance Commission (Article 280) is constituted by the President every five years to recommend the distribution of net tax proceeds between the Union and States.
- The Attorney General of India (Article 76) is the chief legal advisor, possessing the right to speak and participate in Parliament without the right to vote.
- NITI Aayog (established 1 Jan 2015) is an extra-constitutional, non-statutory body formed by an executive resolution, whereas NHRC, CVC, and Lokpal are statutory bodies.
- National Emergency (Article 352) is proclaimed on grounds of war, external aggression, or armed rebellion, requiring approval within one month by a special majority.
- President's Rule (Article 356) addresses the failure of constitutional machinery in states, while Financial Emergency (Article 360) has never been invoked in India.