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SSC CGLगणित (Quantitative Aptitude)

ज्यामिति: रेखा, कोण और त्रिभुज

Geometry: Lines, Angles, and Triangles

📖 किताब की तरह पढ़ें📝 इस परीक्षा का मॉक टेस्ट

यह अध्याय SSC Tier-1 और Tier-2 दोनों के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण है, जिससे प्रति वर्ष 3 से 5 प्रश्न पूछे जाते हैं। मूल प्रमेयों और गुणों की स्पष्ट समझ से यह विषय कम समय में शत-प्रतिशत अंक दिलाने वाला सिद्ध होता है।

समानांतर रेखाएं और तिर्यक रेखा के कोण

जब दो या दो से अधिक समानांतर रेखाओं (Parallel lines) को कोई तीसरी रेखा काटती है, तो उसे तिर्यक रेखा (Transversal line) कहते हैं। इस कटान से कुल 8 कोण बनते हैं, जिनमें आपस में विशिष्ट संबंध होते हैं। संगत कोण (Corresponding angles - 'F' आकार) और एकांतर कोण (Alternate angles - 'Z' आकार) हमेशा आपस में बराबर होते हैं। तिर्यक रेखा के एक ही ओर बने अंतः कोणों (Co-interior angles - 'C' या 'U' आकार) का योग सदैव 180° (संपूरक) होता है। परीक्षा में जब भी 'AB || CD' दिया हो या तीर/जिग-जैग जैसी आकृति दिखे, तो समझ जाएं कि यही नियम लागू होगा।

सूत्र और उनके उदाहरण

📐 एकांतर कोण नियम (Alternate Angles): ∠1 = ∠2 (Z-आकार) तथा संगत कोण नियम (Corresponding Angles): ∠3 = ∠4 (F-आकार) — जब समानांतर रेखाओं के बीच 'Z' या 'F' आकृति वाले कोणों की तुलना करनी हो या अज्ञात कोण का मान निकालना हो।

एकांतर अंतः कोण आपस में बराबर होते हैं।

3x - 10 = 2x + 15

3x - 2x = 15 + 10

x = 25°

संगत कोण आपस में बराबर होते हैं।

4x + 20 = 6x - 10

6x - 4x = 20 + 10

2x = 30

x = 15°

कोण का मान = 4(15) + 20 = 60 + 20 = 80°

📐 क्रमागत अंतः कोण नियम (Co-interior Angles): θ₁ + θ₂ = 180° (C-आकार) — जब तिर्यक रेखा के एक ही तरफ स्थित दो आंतरिक कोण दिए हों।

तिर्यक रेखा के एक ही ओर के अंतः कोणों का योग = 180°

माना कोण 2k और 3k हैं।

2k + 3k = 180°

5k = 180°

k = 36°

बड़ा कोण = 3k = 3 × 36° = 108°

एक ही ओर के अंतः कोणों का योग = 180° होता है।

(2x + 15) + (3x + 40) = 180

5x + 55 = 180

5x = 180 - 55 = 125

x = 125 / 5 = 25°

परीक्षा में आने वाले प्रकार

हल किए हुए प्रश्न (हर प्रकार)

समानांतर रेखाओं में एकांतर बाह्य कोण (Alternate exterior angles) समान होते हैं।

अतः एकांतर बाह्य कोण = 115°

एक ही ओर के अंतः कोणों का योग 180° होता है।

(5x - 20) + (3x + 40) = 180°

8x + 20 = 180°

8x = 160°

x = 20°

∠PAB = 5(20) - 20 = 100 - 20 = 80°

बिंदु E से होकर जाने वाली एक सहायक रेखा EF खींचें जो AB || CD हो।

∠FEB = एकांतर कोण ∠ABE = 35°

∠FED = एकांतर कोण ∠CDE = 65°

∠BED = ∠FEB + ∠FED

∠BED = 35° + 65° = 100°

बिंदु E से रेखा EF || AB || CD खींचें।

AB || EF के लिए अंतः कोणों का योग: ∠A + ∠AEF = 180°

∠AEF = 180° - 110° = 70°

CD || EF के लिए अंतः कोणों का योग: ∠C + ∠CEF = 180°

∠CEF = 180° - 120° = 60°

∠AEC = ∠AEF + ∠CEF = 70° + 60° = 130°

माना अंतः कोण 2x और 2y हैं।

तिर्यक रेखा के एक ही ओर के अंतः कोणों का योग = 180°

2x + 2y = 180°

x + y = 90°

समद्विभाजकों से बने त्रिभुज में तीनों कोणों का योग = 180°

∠P + x + y = 180°

∠P + 90° = 180°

∠P = 90°

चूँकि AB || CD || EF है, इसलिए एकांतर अंतः कोण नियम से x = z होगा।

तिर्यक रेखा पर x और y अंतः कोण हैं, अतः x + y = 180°

चूँकि x = z, इसलिए z + y = 180°

y : z = 3 : 7 दिया है, माना y = 3k और z = 7k

3k + 7k = 180° ⇒ 10k = 180° ⇒ k = 18°

x = z = 7k = 7 × 18° = 126°

परीक्षा में कैसे आता है

SSC CGL (Tier-1 और Tier-2), CHSL तथा CPO में इस सब-टॉपिक से सीधे कोण ज्ञात करने वाले 1-2 प्रश्न अक्सर पूछे जाते हैं। विशेष रूप से जिग-जैग (V-shape) रेखाओं और कोण समद्विभाजक वाले प्रश्न बार-बार आते हैं।

आम गलतियाँ

💡 जिग-जैग/V-आकार वाली आकृति में, 'बाईं ओर मुड़ने वाले सभी कोणों का योग = दाईं ओर मुड़ने वाले सभी कोणों का योग' (Left Sum = Right Sum) का सीधा प्रयोग करें। इससे बिना सहायक रेखा खींचे उत्तर 5 सेकंड में आ जाता है। उदाहरण: यदि कोण अंदर की ओर नुकीले हों तो ∠E = ∠B + ∠D। अथवा कोने वाले बिंदु से दोनों रेखाओं के समानांतर एक छोटी काल्पनिक रेखा खींच लें। रेखा के एक ही तरफ के आंतरिक कोणों के समद्विभाजक हमेशा 90° पर मिलते हैं, इसे सीधे याद रखें। परीक्षार्थी अक्सर संगत कोण और एकांतर कोण में भ्रमित होते हैं, इस

त्रिभुज कोण योग, बहिष्कोण प्रमेय, समद्विबाहु और समबाहु त्रिभुज के नियम

किसी भी त्रिभुज (Triangle) के तीनों आंतरिक कोणों का योग हमेशा 180° होता है। यदि किसी त्रिभुज की एक भुजा को आगे बढ़ाया जाए, तो बनने वाला बहिष्कोण (Exterior angle) अपने दोनों सम्मुख अंतः कोणों (Interior opposite angles) के योग के बराबर होता है। समद्विबाहु त्रिभुज (Isosceles triangle) में दो भुजाएं बराबर होने पर उनके सामने के कोण भी आपस में बराबर होते हैं। समबाहु त्रिभुज (Equilateral triangle) की तीनों भुजाएं समान होती हैं और प्रत्येक कोण 60° का होता है।

सूत्र और उनके उदाहरण

📐 ∠A + ∠B + ∠C = 180° — जब त्रिभुज के दो कोण दिए हों और तीसरा कोण निकालना हो या कोणों का अनुपात दिया हो।

त्रिभुज के तीनों कोणों का योग = 180°

तीसरा कोण = 180° - (65° + 45°)

तीसरा कोण = 180° - 110°

तीसरा कोण = 70°

अनुपातिक योग = 2x + 3x + 4x = 9x

9x = 180°

x = 180° / 9 = 20°

सबसे बड़ा कोण = 4x = 4 × 20° = 80°

📐 बहिष्कोण = दो सम्मुख अंतः कोणों का योग (Exterior Angle = Sum of opposite interior angles) — जब किसी भुजा को बढ़ाने पर बना बाह्य कोण या उसके विपरीत अंतः कोण ज्ञात करने हों।

बहिष्कोण प्रमेय से: ∠ACD = ∠A + ∠B

125° = 55° + ∠B

∠B = 125° - 55°

∠B = 70°

माना अंतः कोण 2x और 3x हैं।

2x + 3x = 110°

5x = 110°

x = 22°

छोटा कोण = 2x = 2 × 22° = 44°

📐 यदि AB = AC, तो ∠B = ∠C (समद्विबाहु नियम) — जब त्रिभुज में दो भुजाएं समान दी गई हों और उनके सम्मुख कोणों के संबंध से प्रश्न हल करना हो।

AB = AC होने के कारण ∠B = ∠C

∠A + ∠B + ∠C = 180°

40° + 2∠B = 180°

2∠B = 140°

∠B = 70°

चूंकि PQ = PR, इसलिए ∠R = ∠Q = 55°

∠P + ∠Q + ∠R = 180°

∠P + 55° + 55° = 180°

∠P = 180° - 110° = 70°

परीक्षा में आने वाले प्रकार

हल किए हुए प्रश्न (हर प्रकार)

तीनों कोणों का योग = 180°

(2x - 5) + (x + 15) + (3x + 20) = 180°

6x + 30 = 180°

6x = 150°

x = 25°

कोण 1 = 2(25) - 5 = 45°

कोण 2 = 25 + 15 = 40°

कोण 3 = 3(25) + 20 = 95°

बहिष्कोण प्रमेय: ∠ACD = ∠A + ∠B

130° = ∠A + 3∠A

4∠A = 130°

∠A = 130° / 4

∠A = 32.5°

∠ACB + ∠ACD = 180° (रैखिक युग्म)

∠ACB = 180° - 115° = 65°

चूंकि AB = AC, ∠B = ∠ACB = 65°

∠A = 180° - (∠B + ∠ACB)

∠A = 180° - (65° + 65°)

∠A = 180° - 130° = 50°

समबाहु त्रिभुज का प्रत्येक कोण = 60°

इसलिए ∠B = 60°

त्रिभुज ABD में, भुजा BD को C तक बढ़ाने पर बहिष्कोण ∠ADC बनता है।

बहिष्कोण प्रमेय: ∠ADC = ∠B + ∠BAD

∠ADC = 60° + 20°

∠ADC = 80°

अंतः कोण ∠B = 180° - 120° = 60°

अंतः कोण ∠C = 180° - 130° = 50°

त्रिभुज ABC में: ∠A + ∠B + ∠C = 180°

∠A = 180° - (60° + 50°)

∠A = 180° - 110° = 70°

माना ∠B = 2x, तो ∠C = 2x (चूंकि AB = AC)

BD कोण B का समद्विभाजक है, अतः ∠DBC = x

त्रिभुज BCD में BC = BD है, इसलिए ∠BDC = ∠C = 2x

त्रिभुज BCD में: x + 2x + 2x = 180°

5x = 180° => x = 36°

∠B = ∠C = 2 × 36° = 72°

∠A = 180° - (72° + 72°) = 36°

सूत्र: ∠BOC = 90° + (∠A / 2)

∠A = 70°

∠A / 2 = 70° / 2 = 35°

∠BOC = 90° + 35°

∠BOC = 125°

परीक्षा में कैसे आता है

SSC CGL, CHSL और MTS में इस सब-टॉपिक से सीधे कोण ज्ञात करने वाले 1-2 प्रश्न लगभग हर शिफ्ट में पूछे जाते हैं। विशेषकर बहिष्कोण प्रमेय और अंतः/बाह्य समद्विभाजक कोण सूत्र पर बार-बार प्रश्न आते हैं।

आम गलतियाँ

💡 जब कोण समद्विभाजक O पर मिलें, तो आंतरिक प्रतिच्छेद कोण = 90° + A/2 और बाह्य प्रतिच्छेद कोण = 90° - A/2 होता है; इसे सीधे याद रखें। बहिष्कोण के लिए अंतः कोण निकालने के बजाय सीधे दोनों सम्मुख कोण जोड़ें।

त्रिभुज असमिका और भुजाओं की संख्या

त्रिभुज असमिका (Triangle Inequality) के अनुसार, किसी त्रिभुज की किन्हीं दो भुजाओं का योगफल हमेशा तीसरी भुजा से बड़ा होना चाहिए और उनका अंतर हमेशा तीसरी भुजा से छोटा होना चाहिए। यदि दो भुजाएँ a और b हैं, तो तीसरी भुजा c का मान हमेशा |a - b| < c < a + b के बीच रहता है। ज्यामिति में यह नियम यह सुनिश्चित करता है कि दोनों छोटी भुजाएँ मिलकर तीसरी भुजा तक पहुँच सकें और आपस में जुड़कर एक बंद आकृति बना सकें। परीक्षा में जब भुजाओं के सम्भावित मान, त्रिभुज का प्रकार (न्यूनकोण/अधिककोण), या दिए गए परिमाप से बनने वाले कुल त्रिभुजों की संख्या पूछी जाए, तब इसी अवधारणा का उपयोग होता है।

सूत्र और उनके उदाहरण

📐 तीसरी भुजा का परास (Range): |a - b| < c < a + b, तथा सम्भावित पूर्णांक मान = 2 × min(a, b) - 1 — जब किसी त्रिभुज की दो भुजाएँ a और b दी गई हों और तीसरी भुजा c के सम्भावित पूर्णांक मानों की कुल संख्या या उसकी सीमा पूछी जाए।

तीसरी भुजा का परास = (11 - 7) < c < (11 + 7)

4 < c < 18

सम्भावित पूर्णांक मान = 5, 6, 7, ..., 17

कुल संख्या = 17 - 5 + 1 = 13

शॉर्टकट: 2 × min(7, 11) - 1 = 2 × 7 - 1 = 13

तीसरी भुजा की सीमा = (14 - 9) < c < (14 + 9)

5 < c < 23

न्यूनतम सम्भावित पूर्णांक मान = 5 + 1 = 6 सेमी

अधिकतम सम्भावित पूर्णांक मान = 23 - 1 = 22 सेमी

📐 कोणों के प्रकार की जांच (जहाँ c सबसे लंबी भुजा है): a² + b² > c² (न्यूनकोण), a² + b² = c² (समकोण), a² + b² < c² (अधिककोण) — जब त्रिभुज की तीनों भुजाएँ दी गई हों और यह पहचानना हो कि त्रिभुज न्यूनकोण (Acute), समकोण (Right) या अधिककोण (Obtuse) है।

सबसे बड़ी भुजा c = 11 सेमी

अन्य दो भुजाएँ a = 6 सेमी, b = 8 सेमी

a² + b² = 6² + 8² = 36 + 64 = 100

c² = 11² = 121

यहाँ a² + b² < c² (100 < 121)

अतः यह अधिककोण त्रिभुज है।

सबसे बड़ी भुजा c = 11 सेमी

a² + b² = 7² + 9² = 49 + 81 = 130

c² = 11² = 121

यहाँ a² + b² > c² (130 > 121)

अतः यह न्यूनकोण त्रिभुज है।

📐 परिमाप P से बनने वाले कुल त्रिभुज (पूर्णांक भुजाएँ): यदि P सम है = Round(P² / 48), यदि P विषम है = Round((P + 3)² / 48) — जब केवल त्रिभुज का परिमाप दिया गया हो और पूर्णांक भुजाओं वाले कुल सम्भावित त्रिभुजों की संख्या पूछी जाए।

यहाँ परिमाप P = 14 (सम संख्या है)

कुल त्रिभुज = Round(P² / 48)

14² / 48 = 196 / 48 = 4.083

निकटतम पूर्णांक (Round) = 4

यहाँ परिमाप P = 15 (विषम संख्या है)

कुल त्रिभुज = Round((P + 3)² / 48)

(15 + 3)² / 48 = 18² / 48 = 324 / 48 = 6.75

निकटतम पूर्णांक (Round) = 7

परीक्षा में आने वाले प्रकार

हल किए हुए प्रश्न (हर प्रकार)

त्रिभुज बनने के लिए: दो छोटी भुजाओं का योग > तीसरी भुजा

विकल्प (A): 4 + 6 = 10 (बराबर है, बड़ा नहीं) ✗

विकल्प (B): 5 + 8 = 13 < 14 ✗

विकल्प (C): 7 + 9 = 16 > 15 ✓

विकल्प (D): 3 + 5 = 8 < 9 ✗

नियम: |15 - 8| < x < (15 + 8)

7 < x < 23

x के मान = 8, 9, 10, ..., 22

कुल मान = 22 - 8 + 1 = 15

डायरेक्ट ट्रिक: 2 × min(8, 15) - 1 = 2 × 8 - 1 = 15

तीसरी भुजा c के लिए असमिका: |a - b| < c < (a + b)

|12 - 5| < c < (12 + 5)

7 < c < 17

सबसे बड़ी भुजा c = 16 सेमी

दो छोटी भुजाएँ a = 9, b = 12

a² + b² = 9² + 12² = 81 + 144 = 225

c² = 16² = 256

यहाँ a² + b² < c² (225 < 256)

अतः यह अधिककोण त्रिभुज है।

तीसरी भुजा x सबसे बड़ी भुजा है, अतः x > 15

त्रिभुज असमिका से: x < 8 + 15 ⇒ x < 23

अधिककोण होने की शर्त: x² > 8² + 15² = 64 + 225 = 289

x > √289 ⇒ x > 17

अतः 17 < x < 23

x के पूर्णांक मान = 18, 19, 20, 21, 22

कुल मान = 5

त्रिभुज असमिका: 24 - 10 < x < 24 + 10 ⇒ 14 < x < 34

यदि 24 सबसे बड़ी भुजा है, तो x² + 10² > 24²

x² + 100 > 576 ⇒ x² > 476

21² = 441, 22² = 484

अतः x का न्यूनतम पूर्णांक मान = 22 सेमी

परिमाप P = 16 (सम संख्या है)

कुल त्रिभुज = Round(P² / 48)

16² / 48 = 256 / 48 = 5.333

5.333 का निकटतम पूर्णांक = 5

(ये 5 त्रिभुज हैं: (2,7,7), (3,6,7), (4,5,7), (4,6,6), (5,5,6))

परीक्षा में कैसे आता है

SSC CGL (Tier-1 और Tier-2), CHSL और CPO में इस टॉपिक से सीधे 1 प्रश्न अवश्य पूछा जाता है। आमतौर पर दो भुजाएँ देकर तीसरी भुजा के कुल सम्भावित मान या सबसे बड़ी भुजा के आधार पर न्यूनकोण/अधिककोण की पहचान पूछी जाती है।

आम गलतियाँ

💡 यदि दो भुजाएँ a और b दी हों, तो तीसरी भुजा के सम्भावित पूर्णांक मान हमेशा '2 × min(a, b) - 1' होते हैं। पेन उठाए बिना उत्तर टिक करें। जैसे भुजाएँ 8 और 15 हैं, तो मान = 2(8) - 1 = 15 होंगे। दिए गए परिमाप P के लिए कुल सम्भावित त्रिभुजों की संख्या सीधे Round(P²/48) (सम के लिए) या Round((P+3)²/48) (विषम के लिए) से निकालें। न्यूनकोण/अधिककोण की जांच हमेशा सबसे बड़ी भुजा (c) के साथ ही करें (c² < a²+b² या c² > a²+b²)। त्रिभुज असमिका में हमेशा दोनों छोटी भुजाओं का योग सबसे बड़ी भुजा से बड़ा होना चाहिए। प

त्रिभुजों की सर्वांगसमता एवं समरूपता

जब दो आकृतियों का आकार (shape) और माप (size) दोनों बिल्कुल एक समान हों, तो उन्हें सर्वांगसम (Congruent) कहते हैं (नियम: SSS, SAS, ASA, RHS)। जब दो आकृतियों का केवल आकार एक जैसा हो लेकिन माप अलग-अलग अनुपात में हो, तो उन्हें समरूप (Similar) कहते हैं (मुख्य नियम: AA, SAS, SSS)। यदि दो त्रिभुज समरूप हों, तो उनकी संगत भुजाओं (corresponding sides), शीर्षलंबों (altitudes), माध्यिकाओं (medians) और परिमापों (perimeters) का अनुपात सदैव समान रहता है। सबसे महत्वपूर्ण नियम: दो समरूप त्रिभुजों के क्षेत्रफलों का अनुपात उनकी संगत भुजाओं (या ऊँचाइयों/माध्यिकाओं/परिमापों) के वर्गों के अनुपात के बराबर होता है।

सूत्र और उनके उदाहरण

📐 Area(Δ1) / Area(Δ2) = (S₁ / S₂)² = (H₁ / H₂)² = (M₁ / M₂)² = (P₁ / P₂)² — जब दो त्रिभुज समरूप दिए हों और उनकी भुजाओं, ऊँचाइयों, माध्यिकाओं या परिमाप का अनुपात देकर क्षेत्रफलों का अनुपात या कोई अज्ञात मान पूछा जाए।

समरूप त्रिभुज के क्षेत्रफल का अनुपात = (संगत भुजाओं का अनुपात)²

Area(ΔABC) / Area(ΔDEF) = (BC / EF)²

64 / 121 = (16 / EF)²

दोनों पक्षों का वर्गमूल लेने पर: 8 / 11 = 16 / EF

EF = (16 × 11) / 8

EF = 2 × 11 = 22 सेमी

समरूप त्रिभुजों के क्षेत्रफलों का अनुपात = (शीर्षलंबों का अनुपात)²

Area(Δ1) / Area(Δ2) = (H₁ / H₂)²

Area(Δ1) / Area(Δ2) = (3 / 5)² = 9 / 25

अतः क्षेत्रफलों का अनुपात 9 : 25 है।

📐 P₁ / P₂ = S₁ / S₂ = H₁ / H₂ = M₁ / M₂ — जब दो समरूप त्रिभुजों के परिमाप और संगत भुजाओं या शीर्षलंबों के बीच संबंध ज्ञात करना हो।

समरूप त्रिभुजों के परिमापों का अनुपात = संगत भुजाओं का अनुपात

Perimeter(ΔABC) / Perimeter(ΔPQR) = AB / PQ

36 / 24 = AB / 10

3 / 2 = AB / 10

AB = (3 × 10) / 2 = 15 सेमी

P₁ / P₂ = M₁ / M₂

40 / 30 = 12 / M₂

4 / 3 = 12 / M₂

M₂ = (12 × 3) / 4 = 9 सेमी

परीक्षा में आने वाले प्रकार

हल किए हुए प्रश्न (हर प्रकार)

हम जानते हैं: Area(ΔABC) / Area(ΔPQR) = (Side₁ / Side₂)²

144 / 49 = (36 / Side₂)²

दोनों तरफ वर्गमूल लेने पर: 12 / 7 = 36 / Side₂

Side₂ = (36 × 7) / 12

Side₂ = 3 × 7 = 21 सेमी

समरूप त्रिभुजों के क्षेत्रफल का अनुपात उनकी संगत भुजाओं के वर्ग के अनुपात के बराबर होता है।

Area(ΔABC) / Area(ΔXYZ) = (BC / YZ)²

Area(ΔABC) / Area(ΔXYZ) = (4 / 7)² = 16 / 49

अतः अनुपात = 16 : 49

क्षेत्रफलों का अनुपात परिमापों के अनुपात के वर्ग के बराबर होता है:

Area(ΔABC) / Area(ΔDEF) = (Perimeter₁ / Perimeter₂)²

100 / 49 = (35 / P₂)²

वर्गमूल लेने पर: 10 / 7 = 35 / P₂

P₂ = (35 × 7) / 10

P₂ = 245 / 10 = 24.5 सेमी

AD / DB = 2 / 3, इसलिए AB = AD + DB = 2 + 3 = 5 इकाई

चूँकि DE || BC, अतः ΔADE ∼ ΔABC (AA समरूपता से)

Area(ΔADE) / Area(ΔABC) = (AD / AB)² = (2 / 5)² = 4 / 25

मान लें Area(ΔABC) = 25 इकाई, तो Area(ΔADE) = 4 इकाई

Area(DECB) = Area(ΔABC) - Area(ΔADE) = 25 - 4 = 21 इकाई

Area(ΔADE) : Area(DECB) = 4 : 21

AB || CD होने के कारण, एकांतर कोण समान होंगे: ∠OAB = ∠OCD और ∠OBA = ∠ODC

अतः AA समरूपता से: ΔAOB ∼ ΔCOD

समरूप त्रिभुजों के क्षेत्रफल का अनुपात = (संगत भुजाओं का अनुपात)²

Area(ΔAOB) / Area(ΔCOD) = (AB / CD)²

दिया है AB = 3CD, अतः AB / CD = 3 / 1

Area(ΔAOB) / Area(ΔCOD) = (3 / 1)² = 9 / 1

दिया है: Area(ΔBXY) = (1/2) × Area(ΔBAC)

चूँकि XY || AC, अतः ΔBXY ∼ ΔBAC

Area(ΔBXY) / Area(ΔBAC) = (BX / AB)² = 1 / 2

BX / AB = 1 / √2

AX = AB - BX

AX / AB = 1 - (BX / AB) = 1 - (1 / √2) = (√2 - 1) / √2

ΔABC में, तीनों कोणों का योग = 180°

∠C = 180° - (60° + 70°) = 180° - 130° = 50°

चूँकि ΔABC ≅ ΔPQR (सर्वांगसम त्रिभुज के संगत कोण बराबर होते हैं - CPCT)

संगत कोण: ∠A = ∠P, ∠B = ∠Q, ∠C = ∠R

अतः ∠R = ∠C = 50°

परीक्षा में कैसे आता है

SSC CGL, CHSL और CPO की हर शिफ्ट में समरूपता के क्षेत्रफल अनुपात प्रमेय [Area₁/Area₂ = (S₁/S₂)²] पर 1 से 2 प्रश्न अनिवार्य रूप से पूछे जाते हैं।

आम गलतियाँ

💡 अगर क्षेत्रफल का अनुपात दिया हो, तो भुजा या परिमाप निकालने के लिए तुरंत वर्गमूल (Square Root) निकालें; यदि भुजा/परिमाप दिया हो, तो क्षेत्रफल के लिए सीधे वर्ग (Square) करें। जैसे: Area अनुपात 49:81 है तो भुजा अनुपात सीधा √49:√81 = 7:9 होगा। (समय की बचत!)

आधारभूत आनुपातिकता प्रमेय और कोण समद्विभाजक प्रमेय

आधारभूत आनुपातिकता प्रमेय (BPT) के अनुसार, यदि किसी त्रिभुज की एक भुजा के समांतर कोई रेखा खींची जाए, तो वह अन्य दो भुजाओं को समान अनुपात में विभाजित करती है। कोण समद्विभाजक प्रमेय (Angle Bisector Theorem) यह बताता है कि त्रिभुज के किसी कोण का समद्विभाजक, सामने वाली भुजा को शेष दो भुजाओं के अनुपात में बाँटता है। ये दोनों प्रमेय त्रिभुज की भुजाओं के बीच संबंध स्थापित करने के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं। परीक्षा में अक्सर अज्ञात भुजा की लंबाई ज्ञात करने के लिए इनका उपयोग होता है।

सूत्र और उनके उदाहरण

📐 AD/DB = AE/EC (यदि DE || BC) — जब त्रिभुज की एक भुजा के समांतर रेखा दी गई हो और भुजाओं के खंडों का अनुपात निकालना हो।

BPT के अनुसार: AD/DB = AE/EC

2/3 = 4/EC

2 × EC = 12

EC = 6

BPT के अनुसार: AD/AB = AE/AC

1/3 = AE/15

3 × AE = 15

AE = 5

📐 AB/AC = BD/DC (आंतरिक कोण समद्विभाजक) — जब त्रिभुज के किसी आंतरिक कोण का समद्विभाजक सामने वाली भुजा को विभाजित करता हो।

प्रमेय से: AB/AC = BD/DC

6/8 = 3/DC

3/4 = 3/DC

DC = 4

BD/DC = AB/AC = 5/7

BD = [5/(5+7)] × BC

BD = (5/12) × 6

BD = 2.5

📐 AD = √(AB × AC - BD × DC) — जब त्रिभुज की भुजाओं और खंडों की लंबाई दी गई हो और कोण समद्विभाजक (AD) की लंबाई निकालनी हो।

BD/DC = 8/6 = 4/3

BD = 4, DC = 3 (चूंकि BC = 7)

AD² = AB × AC - BD × DC

AD² = 8 × 6 - 4 × 3 = 36

AD = 6

AD² = AB × AC - BD × DC

AD² = 5 × 4 - 2.5 × 2

AD² = 20 - 5 = 15

AD = √15

परीक्षा में आने वाले प्रकार

हल किए हुए प्रश्न (हर प्रकार)

BPT के अनुसार: AD/DB = AE/EC

3/5 = 6/EC

3 × EC = 30

EC = 10 सेमी

BPT के अनुसार: AD/DB = AE/EC

x/(x-2) = (x+2)/(x-1)

x(x-1) = (x-2)(x+2)

x² - x = x² - 4

x = 4

प्रमेय से: AB/AC = BD/DC

10/14 = BD/(6 - BD)

5/7 = BD/(6 - BD)

30 - 5BD = 7BD

12BD = 30

BD = 2.5 सेमी

प्रमेय: AB/AC = BD/DC

9/AC = 3/4

3 × AC = 36

AC = 12 सेमी

बाह्य कोण समद्विभाजक प्रमेय: AB/AC = BD/CD

12/8 = (5 + CD)/CD

3/2 = (5 + CD)/CD

3CD = 10 + 2CD

CD = 10 सेमी

BPT के उप-प्रमेय से: AD/AB = AE/AC

2/5 = 6/AC

2 × AC = 30

AC = 15 सेमी

BD/DC = 8/6 = 4/3

BD = 4 सेमी, DC = 3 सेमी (चूंकि BC=7)

AD² = AB × AC - BD × DC

AD² = 8 × 6 - 4 × 3 = 36

AD = 6 सेमी

परीक्षा में कैसे आता है

SSC CGL, CHSL और MTS परीक्षाओं में इस उप-विषय से हर साल कम से कम 1-2 प्रश्न पूछे जाते हैं। विशेष रूप से 'आंतरिक कोण समद्विभाजक प्रमेय' सबसे अधिक बार पूछा जाने वाला पैटर्न है।

आम गलतियाँ

💡 कोण समद्विभाजक प्रमेय के लिए याद रखें: 'Side 1 / Side 2 = Segment 1 / Segment 2', जहाँ प्रत्येक खंड अपनी संगत भुजा के बगल में होता है।

सारे सूत्र एक नज़र में (Revision)

अपने आप को जाँचिए — 10 प्रश्न

1. दो समांतर रेखाओं AB और CD को एक तिर्यक रेखा EF क्रमशः P और Q पर काटती है। यदि तिर्यक रेखा के एक ही ओर बने अंतःकोण ∠APQ = 3x + 20° और ∠PQD = 2x + 10° हैं, तो x का मान ज्ञात कीजिए।

  1. (क) 25°
  2. (ख) 30°
  3. (ग) 35°
  4. (घ) 40°
उत्तर देखें

उत्तर: (ख) 30°

तिर्यक रेखा के एक ही ओर बने अंतःकोणों का योग 180° होता है। (3x + 20°) + (2x + 10°) = 180° => 5x + 30° = 180° => 5x = 150° => x = 30°।

2. त्रिभुज ABC में, भुजा BC को D तक बढ़ाया जाता है। यदि बाह्य कोण ∠ACD = 115° और सम्मुख अंतः कोण ∠B = 45° है, तो ∠A का मान ज्ञात कीजिए।

  1. (क) 60°
  2. (ख) 65°
  3. (ग) 70°
  4. (घ) 75°
उत्तर देखें

उत्तर: (ग) 70°

बाह्य कोण प्रमेय से: ∠ACD = ∠A + ∠B => 115° = ∠A + 45° => ∠A = 70°।

3. पूर्णांक भुजाओं वाले ऐसे कितने त्रिभुज बनाए जा सकते हैं जिनकी दो भुजाएँ 5 सेमी और 9 सेमी हैं?

  1. (क) 7
  2. (ख) 8
  3. (ग) 9
  4. (घ) 10
उत्तर देखें

उत्तर: (ग) 9

तीसरी भुजा x के लिए: (9 - 5) < x < (9 + 5) => 4 < x < 14। सम्भावित पूर्णांक मान = 5, 6, 7, 8, 9, 10, 11, 12, 13 (कुल 9 मान)।

4. ΔABC में, AD कोण ∠A का आंतरिक द्विभाजक है जो BC से D पर मिलता है। यदि AB = 8 सेमी, AC = 12 सेमी और BC = 10 सेमी है, तो BD की लंबाई ज्ञात कीजिए।

  1. (क) 4 सेमी
  2. (ख) 5 सेमी
  3. (ग) 6 सेमी
  4. (घ) 3 सेमी
उत्तर देखें

उत्तर: (क) 4 सेमी

कोण द्विभाजक प्रमेय से: BD/DC = AB/AC = 8/12 = 2/3। इसलिए BD = (2 / 5) * 10 = 4 सेमी।

5. ΔABC में, DE || BC है जहाँ D, AB पर और E, AC पर स्थित है। यदि AD = x, DB = x - 2, AE = x + 2 और EC = x - 1 है, तो x का मान ज्ञात कीजिए।

  1. (क) 3
  2. (ख) 4
  3. (ग) 5
  4. (घ) 6
उत्तर देखें

उत्तर: (ख) 4

BPT से: AD/DB = AE/EC => x/(x - 2) = (x + 2)/(x - 1) => x(x - 1) = (x - 2)(x + 2) => x² - x = x² - 4 => x = 4।

6. दो त्रिभुज ΔABC और ΔDEF इस प्रकार समरूप हैं कि क्षेत्रफल(ΔABC) = 64 सेमी² और क्षेत्रफल(ΔDEF) = 121 सेमी² है। यदि ΔABC की सबसे बड़ी भुजा 16 सेमी है, तो ΔDEF की सबसे बड़ी भुजा ज्ञात कीजिए।

  1. (क) 20 सेमी
  2. (ख) 22 सेमी
  3. (ग) 24 सेमी
  4. (घ) 26 सेमी
उत्तर देखें

उत्तर: (ख) 22 सेमी

क्षेत्रफलों का अनुपात = भुजाओं के वर्गों का अनुपात => 64/121 = (16/x)² => 8/11 = 16/x => x = 22 सेमी।

7. ΔABC में, AB = AC है। भुजा BC को D तक इस प्रकार बढ़ाया जाता है कि CD = AC हो। यदि ∠A = 40° है, तो ∠BAD का मान ज्ञात कीजिए।

  1. (क) 65°
  2. (ख) 70°
  3. (ग) 75°
  4. (घ) 80°
उत्तर देखें

उत्तर: (ग) 75°

1) ΔABC में: ∠B = ∠ACB = (180° - 40°)/2 = 70°। 2) ∠ACD (बाह्य कोण) = 180° - 70° = 110°। 3) ΔACD में (AC = CD): ∠CAD = (180° - 110°)/2 = 35°। 4) ∠BAD = ∠BAC + ∠CAD = 40° + 35° = 75°।

8. ΔABC में, DE || BC इस प्रकार है कि रेखा खंड DE, ΔABC को समान क्षेत्रफल वाले दो भागों में विभाजित करता है। अनुपात AD : DB ज्ञात कीजिए।

  1. (क) 1 : (√2 - 1)
  2. (ख) 1 : √2
  3. (ग) √2 : 1
  4. (घ) 1 : 2
उत्तर देखें

उत्तर: (क) 1 : (√2 - 1)

Area(ΔADE)/Area(ΔABC) = 1/2 => (AD/AB)² = 1/2 => AD/AB = 1/√2 => AB/AD = √2 => (AD + DB)/AD = √2 => 1 + DB/AD = √2 => DB/AD = √2 - 1 => AD/DB = 1/(√2 - 1)।

9. ΔABC में, AD कोण ∠A का समद्विभाजक है जो BC से D पर मिलता है। ΔABC का परिमाप 30 सेमी है। यदि BD = 4 सेमी और CD = 6 सेमी है, तो भुजा AB की लंबाई ज्ञात कीजिए।

  1. (क) 6 सेमी
  2. (ख) 8 सेमी
  3. (ग) 10 सेमी
  4. (घ) 12 सेमी
उत्तर देखें

उत्तर: (ख) 8 सेमी

BC = 4 + 6 = 10 सेमी। परिमाप = AB + AC + 10 = 30 => AB + AC = 20 सेमी। कोण द्विभाजक प्रमेय से: AB/AC = BD/CD = 4/6 = 2/3। AB = (2/5) * 20 = 8 सेमी।

10. ΔABC में, D भुजा AB पर एक बिंदु इस प्रकार है कि AD : DB = 2 : 3 है, और E भुजा AC पर एक बिंदु इस प्रकार है कि DE || BC है। D से होकर जाती हुई BE के समांतर एक रेखा AC को F पर मिलती है। यदि AC = 20 सेमी है, तो AF की लंबाई ज्ञात कीजिए।

  1. (क) 3.2 सेमी
  2. (ख) 4.8 सेमी
  3. (ग) 5.0 सेमी
  4. (घ) 6.4 सेमी
उत्तर देखें

उत्तर: (क) 3.2 सेमी

1) ΔABC में DE || BC => AE/AC = AD/AB = 2/5 => AE = (2/5) * 20 = 8 सेमी। 2) ΔABE में DF || BE => AF/AE = AD/AB = 2/5 => AF = (2/5) * 8 = 3.2 सेमी।

English version — Geometry: Lines, Angles, and Triangles

This chapter is crucial for both SSC Tier-1 and Tier-2 exams, with 3 to 5 questions asked every year. A strong grasp of basic theorems and properties makes this section highly scoring and time-efficient.

Angles with Parallel Lines and a Transversal

When two parallel lines are intersected by a transversal line, 8 angles are formed with specific geometric properties. Corresponding angles ('F' shape) and alternate angles ('Z' shape) are equal to each other. Consecutive interior angles on the same side of the transversal ('C' or 'U' shape) are supplementary (sum = 180°). In SSC exams, whenever parallel lines or zig-zag/arrowhead figures are given, these angle-pair properties are used to solve for unknown angles.

Formulas with examples

📐 एकांतर कोण नियम (Alternate Angles): ∠1 = ∠2 (Z-आकार) तथा संगत कोण नियम (Corresponding Angles): ∠3 = ∠4 (F-आकार) — Use when finding unknown variables using equal alternate ('Z' shape) or corresponding ('F' shape) angles.

एकांतर अंतः कोण आपस में बराबर होते हैं।

3x - 10 = 2x + 15

3x - 2x = 15 + 10

x = 25°

संगत कोण आपस में बराबर होते हैं।

4x + 20 = 6x - 10

6x - 4x = 20 + 10

2x = 30

x = 15°

कोण का मान = 4(15) + 20 = 60 + 20 = 80°

📐 क्रमागत अंतः कोण नियम (Co-interior Angles): θ₁ + θ₂ = 180° (C-आकार) — Use when angles lie on the same side of the transversal inside two parallel lines.

तिर्यक रेखा के एक ही ओर के अंतः कोणों का योग = 180°

माना कोण 2k और 3k हैं।

2k + 3k = 180°

5k = 180°

k = 36°

बड़ा कोण = 3k = 3 × 36° = 108°

एक ही ओर के अंतः कोणों का योग = 180° होता है।

(2x + 15) + (3x + 40) = 180

5x + 55 = 180

5x = 180 - 55 = 125

x = 125 / 5 = 25°

Question types asked

Solved questions (every type)

समानांतर रेखाओं में एकांतर बाह्य कोण (Alternate exterior angles) समान होते हैं।

अतः एकांतर बाह्य कोण = 115°

एक ही ओर के अंतः कोणों का योग 180° होता है।

(5x - 20) + (3x + 40) = 180°

8x + 20 = 180°

8x = 160°

x = 20°

∠PAB = 5(20) - 20 = 100 - 20 = 80°

बिंदु E से होकर जाने वाली एक सहायक रेखा EF खींचें जो AB || CD हो।

∠FEB = एकांतर कोण ∠ABE = 35°

∠FED = एकांतर कोण ∠CDE = 65°

∠BED = ∠FEB + ∠FED

∠BED = 35° + 65° = 100°

बिंदु E से रेखा EF || AB || CD खींचें।

AB || EF के लिए अंतः कोणों का योग: ∠A + ∠AEF = 180°

∠AEF = 180° - 110° = 70°

CD || EF के लिए अंतः कोणों का योग: ∠C + ∠CEF = 180°

∠CEF = 180° - 120° = 60°

∠AEC = ∠AEF + ∠CEF = 70° + 60° = 130°

माना अंतः कोण 2x और 2y हैं।

तिर्यक रेखा के एक ही ओर के अंतः कोणों का योग = 180°

2x + 2y = 180°

x + y = 90°

समद्विभाजकों से बने त्रिभुज में तीनों कोणों का योग = 180°

∠P + x + y = 180°

∠P + 90° = 180°

∠P = 90°

चूँकि AB || CD || EF है, इसलिए एकांतर अंतः कोण नियम से x = z होगा।

तिर्यक रेखा पर x और y अंतः कोण हैं, अतः x + y = 180°

चूँकि x = z, इसलिए z + y = 180°

y : z = 3 : 7 दिया है, माना y = 3k और z = 7k

3k + 7k = 180° ⇒ 10k = 180° ⇒ k = 18°

x = z = 7k = 7 × 18° = 126°

How it is asked

Asked as 1-2 direct geometry questions in SSC CGL, CHSL, and MTS. Pattern mainly covers arrowhead (zig-zag) figures, transversal interior angle pairs, and angle bisectors forming right angles.

Common mistakes

💡 जिग-जैग/V-आकार वाली आकृति में, 'बाईं ओर मुड़ने वाले सभी कोणों का योग = दाईं ओर मुड़ने वाले सभी कोणों का योग' (Left Sum = Right Sum) का सीधा प्रयोग करें। इससे बिना सहायक रेखा खींचे उत्तर 5 सेकंड में आ जाता है। उदाहरण: यदि कोण अंदर की ओर नुकीले हों तो ∠E = ∠B + ∠D। अथवा कोने वाले बिंदु से दोनों रेखाओं के समानांतर एक छोटी काल्पनिक रेखा खींच लें। रेखा के एक ही तरफ के आंतरिक कोणों के समद्विभाजक हमेशा 90° पर मिलते हैं, इसे सीधे याद रखें। परीक्षार्थी अक्सर संगत कोण और एकांतर कोण में भ्रमित होते हैं, इस

Triangle Angle Sum, Exterior Angle Theorem, Isosceles and Equilateral Facts

The sum of all three interior angles of a triangle is always 180 degrees. An exterior angle of a triangle is equal to the sum of its two opposite interior angles. In an isosceles triangle, angles opposite to equal sides are equal to each other. An equilateral triangle has all three sides equal and each interior angle measures exactly 60 degrees.

Formulas with examples

📐 ∠A + ∠B + ∠C = 180° — When two angles of a triangle are given and the third is required, or when the ratio of angles is given.

त्रिभुज के तीनों कोणों का योग = 180°

तीसरा कोण = 180° - (65° + 45°)

तीसरा कोण = 180° - 110°

तीसरा कोण = 70°

अनुपातिक योग = 2x + 3x + 4x = 9x

9x = 180°

x = 180° / 9 = 20°

सबसे बड़ा कोण = 4x = 4 × 20° = 80°

📐 बहिष्कोण = दो सम्मुख अंतः कोणों का योग (Exterior Angle = Sum of opposite interior angles) — When an exterior angle formed by extending a side or its opposite interior angles need to be found.

बहिष्कोण प्रमेय से: ∠ACD = ∠A + ∠B

125° = 55° + ∠B

∠B = 125° - 55°

∠B = 70°

माना अंतः कोण 2x और 3x हैं।

2x + 3x = 110°

5x = 110°

x = 22°

छोटा कोण = 2x = 2 × 22° = 44°

📐 यदि AB = AC, तो ∠B = ∠C (समद्विबाहु नियम) — When two sides of a triangle are equal and opposite angle relations are used.

AB = AC होने के कारण ∠B = ∠C

∠A + ∠B + ∠C = 180°

40° + 2∠B = 180°

2∠B = 140°

∠B = 70°

चूंकि PQ = PR, इसलिए ∠R = ∠Q = 55°

∠P + ∠Q + ∠R = 180°

∠P + 55° + 55° = 180°

∠P = 180° - 110° = 70°

Question types asked

Solved questions (every type)

तीनों कोणों का योग = 180°

(2x - 5) + (x + 15) + (3x + 20) = 180°

6x + 30 = 180°

6x = 150°

x = 25°

कोण 1 = 2(25) - 5 = 45°

कोण 2 = 25 + 15 = 40°

कोण 3 = 3(25) + 20 = 95°

बहिष्कोण प्रमेय: ∠ACD = ∠A + ∠B

130° = ∠A + 3∠A

4∠A = 130°

∠A = 130° / 4

∠A = 32.5°

∠ACB + ∠ACD = 180° (रैखिक युग्म)

∠ACB = 180° - 115° = 65°

चूंकि AB = AC, ∠B = ∠ACB = 65°

∠A = 180° - (∠B + ∠ACB)

∠A = 180° - (65° + 65°)

∠A = 180° - 130° = 50°

समबाहु त्रिभुज का प्रत्येक कोण = 60°

इसलिए ∠B = 60°

त्रिभुज ABD में, भुजा BD को C तक बढ़ाने पर बहिष्कोण ∠ADC बनता है।

बहिष्कोण प्रमेय: ∠ADC = ∠B + ∠BAD

∠ADC = 60° + 20°

∠ADC = 80°

अंतः कोण ∠B = 180° - 120° = 60°

अंतः कोण ∠C = 180° - 130° = 50°

त्रिभुज ABC में: ∠A + ∠B + ∠C = 180°

∠A = 180° - (60° + 50°)

∠A = 180° - 110° = 70°

माना ∠B = 2x, तो ∠C = 2x (चूंकि AB = AC)

BD कोण B का समद्विभाजक है, अतः ∠DBC = x

त्रिभुज BCD में BC = BD है, इसलिए ∠BDC = ∠C = 2x

त्रिभुज BCD में: x + 2x + 2x = 180°

5x = 180° => x = 36°

∠B = ∠C = 2 × 36° = 72°

∠A = 180° - (72° + 72°) = 36°

सूत्र: ∠BOC = 90° + (∠A / 2)

∠A = 70°

∠A / 2 = 70° / 2 = 35°

∠BOC = 90° + 35°

∠BOC = 125°

How it is asked

SSC exams (CGL, CHSL, MTS, GD) regularly ask 1-2 questions directly from triangle angle properties, particularly the exterior angle theorem and angle bisector intersections.

Common mistakes

💡 जब कोण समद्विभाजक O पर मिलें, तो आंतरिक प्रतिच्छेद कोण = 90° + A/2 और बाह्य प्रतिच्छेद कोण = 90° - A/2 होता है; इसे सीधे याद रखें। बहिष्कोण के लिए अंतः कोण निकालने के बजाय सीधे दोनों सम्मुख कोण जोड़ें।

Triangle Inequality and Number of Triangles

According to the Triangle Inequality Theorem, the sum of any two sides of a triangle must always be strictly greater than the third side, and their positive difference must be less than the third side (|a - b| < c < a + b). Geometrically, if the sum of the two shorter sides is not greater than the longest side, the ends cannot meet to form a closed polygon. In exams, questions asking whether three sides can form a triangle, the range or count of integer values for the third side, or the classification into acute/obtuse triangles directly test this concept.

Formulas with examples

📐 तीसरी भुजा का परास (Range): |a - b| < c < a + b, तथा सम्भावित पूर्णांक मान = 2 × min(a, b) - 1 — Used when two sides a and b are given and you need to find the range or the number of possible integer values for the third side c.

तीसरी भुजा का परास = (11 - 7) < c < (11 + 7)

4 < c < 18

सम्भावित पूर्णांक मान = 5, 6, 7, ..., 17

कुल संख्या = 17 - 5 + 1 = 13

शॉर्टकट: 2 × min(7, 11) - 1 = 2 × 7 - 1 = 13

तीसरी भुजा की सीमा = (14 - 9) < c < (14 + 9)

5 < c < 23

न्यूनतम सम्भावित पूर्णांक मान = 5 + 1 = 6 सेमी

अधिकतम सम्भावित पूर्णांक मान = 23 - 1 = 22 सेमी

📐 कोणों के प्रकार की जांच (जहाँ c सबसे लंबी भुजा है): a² + b² > c² (न्यूनकोण), a² + b² = c² (समकोण), a² + b² < c² (अधिककोण) — Used to classify a triangle as acute, right, or obtuse given its three side lengths (where c is the longest side).

सबसे बड़ी भुजा c = 11 सेमी

अन्य दो भुजाएँ a = 6 सेमी, b = 8 सेमी

a² + b² = 6² + 8² = 36 + 64 = 100

c² = 11² = 121

यहाँ a² + b² < c² (100 < 121)

अतः यह अधिककोण त्रिभुज है।

सबसे बड़ी भुजा c = 11 सेमी

a² + b² = 7² + 9² = 49 + 81 = 130

c² = 11² = 121

यहाँ a² + b² > c² (130 > 121)

अतः यह न्यूनकोण त्रिभुज है।

📐 परिमाप P से बनने वाले कुल त्रिभुज (पूर्णांक भुजाएँ): यदि P सम है = Round(P² / 48), यदि P विषम है = Round((P + 3)² / 48) — Used to find the total number of non-congruent triangles with integer sides when only the perimeter P is given.

यहाँ परिमाप P = 14 (सम संख्या है)

कुल त्रिभुज = Round(P² / 48)

14² / 48 = 196 / 48 = 4.083

निकटतम पूर्णांक (Round) = 4

यहाँ परिमाप P = 15 (विषम संख्या है)

कुल त्रिभुज = Round((P + 3)² / 48)

(15 + 3)² / 48 = 18² / 48 = 324 / 48 = 6.75

निकटतम पूर्णांक (Round) = 7

Question types asked

Solved questions (every type)

त्रिभुज बनने के लिए: दो छोटी भुजाओं का योग > तीसरी भुजा

विकल्प (A): 4 + 6 = 10 (बराबर है, बड़ा नहीं) ✗

विकल्प (B): 5 + 8 = 13 < 14 ✗

विकल्प (C): 7 + 9 = 16 > 15 ✓

विकल्प (D): 3 + 5 = 8 < 9 ✗

नियम: |15 - 8| < x < (15 + 8)

7 < x < 23

x के मान = 8, 9, 10, ..., 22

कुल मान = 22 - 8 + 1 = 15

डायरेक्ट ट्रिक: 2 × min(8, 15) - 1 = 2 × 8 - 1 = 15

तीसरी भुजा c के लिए असमिका: |a - b| < c < (a + b)

|12 - 5| < c < (12 + 5)

7 < c < 17

सबसे बड़ी भुजा c = 16 सेमी

दो छोटी भुजाएँ a = 9, b = 12

a² + b² = 9² + 12² = 81 + 144 = 225

c² = 16² = 256

यहाँ a² + b² < c² (225 < 256)

अतः यह अधिककोण त्रिभुज है।

तीसरी भुजा x सबसे बड़ी भुजा है, अतः x > 15

त्रिभुज असमिका से: x < 8 + 15 ⇒ x < 23

अधिककोण होने की शर्त: x² > 8² + 15² = 64 + 225 = 289

x > √289 ⇒ x > 17

अतः 17 < x < 23

x के पूर्णांक मान = 18, 19, 20, 21, 22

कुल मान = 5

त्रिभुज असमिका: 24 - 10 < x < 24 + 10 ⇒ 14 < x < 34

यदि 24 सबसे बड़ी भुजा है, तो x² + 10² > 24²

x² + 100 > 576 ⇒ x² > 476

21² = 441, 22² = 484

अतः x का न्यूनतम पूर्णांक मान = 22 सेमी

परिमाप P = 16 (सम संख्या है)

कुल त्रिभुज = Round(P² / 48)

16² / 48 = 256 / 48 = 5.333

5.333 का निकटतम पूर्णांक = 5

(ये 5 त्रिभुज हैं: (2,7,7), (3,6,7), (4,5,7), (4,6,6), (5,5,6))

How it is asked

Asked frequently in SSC CGL (Tier 1 & 2), CHSL, and CPO as 1 direct question. Common patterns include finding the number of integer values of the third side or identifying acute/obtuse triangles based on side inequalities.

Common mistakes

💡 यदि दो भुजाएँ a और b दी हों, तो तीसरी भुजा के सम्भावित पूर्णांक मान हमेशा '2 × min(a, b) - 1' होते हैं। पेन उठाए बिना उत्तर टिक करें। जैसे भुजाएँ 8 और 15 हैं, तो मान = 2(8) - 1 = 15 होंगे। दिए गए परिमाप P के लिए कुल सम्भावित त्रिभुजों की संख्या सीधे Round(P²/48) (सम के लिए) या Round((P+3)²/48) (विषम के लिए) से निकालें। न्यूनकोण/अधिककोण की जांच हमेशा सबसे बड़ी भुजा (c) के साथ ही करें (c² < a²+b² या c² > a²+b²)। त्रिभुज असमिका में हमेशा दोनों छोटी भुजाओं का योग सबसे बड़ी भुजा से बड़ा होना चाहिए। प

Congruence and Similarity of Triangles

Two triangles are congruent if they have the exact same shape and size (criteria: SSS, SAS, ASA, RHS). Two triangles are similar if their corresponding angles are equal and corresponding sides are in the same ratio (criteria: AA, SAS, SSS). In similar triangles, the ratio of perimeters, altitudes, and medians equals the ratio of corresponding sides. The ratio of their areas is equal to the square of the ratio of their corresponding linear dimensions (sides, heights, medians, or perimeters).

Formulas with examples

📐 Area(Δ1) / Area(Δ2) = (S₁ / S₂)² = (H₁ / H₂)² = (M₁ / M₂)² = (P₁ / P₂)² — Used when two triangles are similar and relation between their areas and linear dimensions (sides, heights, medians, perimeters) is required.

समरूप त्रिभुज के क्षेत्रफल का अनुपात = (संगत भुजाओं का अनुपात)²

Area(ΔABC) / Area(ΔDEF) = (BC / EF)²

64 / 121 = (16 / EF)²

दोनों पक्षों का वर्गमूल लेने पर: 8 / 11 = 16 / EF

EF = (16 × 11) / 8

EF = 2 × 11 = 22 सेमी

समरूप त्रिभुजों के क्षेत्रफलों का अनुपात = (शीर्षलंबों का अनुपात)²

Area(Δ1) / Area(Δ2) = (H₁ / H₂)²

Area(Δ1) / Area(Δ2) = (3 / 5)² = 9 / 25

अतः क्षेत्रफलों का अनुपात 9 : 25 है।

📐 P₁ / P₂ = S₁ / S₂ = H₁ / H₂ = M₁ / M₂ — Used to relate perimeters of similar triangles directly to their corresponding sides, altitudes, or medians.

समरूप त्रिभुजों के परिमापों का अनुपात = संगत भुजाओं का अनुपात

Perimeter(ΔABC) / Perimeter(ΔPQR) = AB / PQ

36 / 24 = AB / 10

3 / 2 = AB / 10

AB = (3 × 10) / 2 = 15 सेमी

P₁ / P₂ = M₁ / M₂

40 / 30 = 12 / M₂

4 / 3 = 12 / M₂

M₂ = (12 × 3) / 4 = 9 सेमी

Question types asked

Solved questions (every type)

हम जानते हैं: Area(ΔABC) / Area(ΔPQR) = (Side₁ / Side₂)²

144 / 49 = (36 / Side₂)²

दोनों तरफ वर्गमूल लेने पर: 12 / 7 = 36 / Side₂

Side₂ = (36 × 7) / 12

Side₂ = 3 × 7 = 21 सेमी

समरूप त्रिभुजों के क्षेत्रफल का अनुपात उनकी संगत भुजाओं के वर्ग के अनुपात के बराबर होता है।

Area(ΔABC) / Area(ΔXYZ) = (BC / YZ)²

Area(ΔABC) / Area(ΔXYZ) = (4 / 7)² = 16 / 49

अतः अनुपात = 16 : 49

क्षेत्रफलों का अनुपात परिमापों के अनुपात के वर्ग के बराबर होता है:

Area(ΔABC) / Area(ΔDEF) = (Perimeter₁ / Perimeter₂)²

100 / 49 = (35 / P₂)²

वर्गमूल लेने पर: 10 / 7 = 35 / P₂

P₂ = (35 × 7) / 10

P₂ = 245 / 10 = 24.5 सेमी

AD / DB = 2 / 3, इसलिए AB = AD + DB = 2 + 3 = 5 इकाई

चूँकि DE || BC, अतः ΔADE ∼ ΔABC (AA समरूपता से)

Area(ΔADE) / Area(ΔABC) = (AD / AB)² = (2 / 5)² = 4 / 25

मान लें Area(ΔABC) = 25 इकाई, तो Area(ΔADE) = 4 इकाई

Area(DECB) = Area(ΔABC) - Area(ΔADE) = 25 - 4 = 21 इकाई

Area(ΔADE) : Area(DECB) = 4 : 21

AB || CD होने के कारण, एकांतर कोण समान होंगे: ∠OAB = ∠OCD और ∠OBA = ∠ODC

अतः AA समरूपता से: ΔAOB ∼ ΔCOD

समरूप त्रिभुजों के क्षेत्रफल का अनुपात = (संगत भुजाओं का अनुपात)²

Area(ΔAOB) / Area(ΔCOD) = (AB / CD)²

दिया है AB = 3CD, अतः AB / CD = 3 / 1

Area(ΔAOB) / Area(ΔCOD) = (3 / 1)² = 9 / 1

दिया है: Area(ΔBXY) = (1/2) × Area(ΔBAC)

चूँकि XY || AC, अतः ΔBXY ∼ ΔBAC

Area(ΔBXY) / Area(ΔBAC) = (BX / AB)² = 1 / 2

BX / AB = 1 / √2

AX = AB - BX

AX / AB = 1 - (BX / AB) = 1 - (1 / √2) = (√2 - 1) / √2

ΔABC में, तीनों कोणों का योग = 180°

∠C = 180° - (60° + 70°) = 180° - 130° = 50°

चूँकि ΔABC ≅ ΔPQR (सर्वांगसम त्रिभुज के संगत कोण बराबर होते हैं - CPCT)

संगत कोण: ∠A = ∠P, ∠B = ∠Q, ∠C = ∠R

अतः ∠R = ∠C = 50°

How it is asked

Asked in almost every shift of SSC CGL, CHSL, and CPO as 1-2 questions directly testing the ratio of areas = square of ratio of sides/perimeters.

Common mistakes

💡 अगर क्षेत्रफल का अनुपात दिया हो, तो भुजा या परिमाप निकालने के लिए तुरंत वर्गमूल (Square Root) निकालें; यदि भुजा/परिमाप दिया हो, तो क्षेत्रफल के लिए सीधे वर्ग (Square) करें। जैसे: Area अनुपात 49:81 है तो भुजा अनुपात सीधा √49:√81 = 7:9 होगा। (समय की बचत!)

Basic Proportionality Theorem (BPT) and Angle Bisector Theorem

The Basic Proportionality Theorem (BPT) states that if a line is drawn parallel to one side of a triangle, it divides the other two sides in the same ratio. The Angle Bisector Theorem states that an angle bisector of a triangle divides the opposite side into segments that are proportional to the other two sides of the triangle. These theorems are fundamental for finding unknown side lengths in geometry problems. They are frequently tested in SSC exams through direct applications or combined with similarity.

Formulas with examples

📐 AD/DB = AE/EC (यदि DE || BC) — When a line is parallel to one side of a triangle and you need to find the ratio of side segments.

BPT के अनुसार: AD/DB = AE/EC

2/3 = 4/EC

2 × EC = 12

EC = 6

BPT के अनुसार: AD/AB = AE/AC

1/3 = AE/15

3 × AE = 15

AE = 5

📐 AB/AC = BD/DC (आंतरिक कोण समद्विभाजक) — When the internal bisector of an angle divides the opposite side.

प्रमेय से: AB/AC = BD/DC

6/8 = 3/DC

3/4 = 3/DC

DC = 4

BD/DC = AB/AC = 5/7

BD = [5/(5+7)] × BC

BD = (5/12) × 6

BD = 2.5

📐 AD = √(AB × AC - BD × DC) — When you need to find the actual length of the internal angle bisector.

BD/DC = 8/6 = 4/3

BD = 4, DC = 3 (चूंकि BC = 7)

AD² = AB × AC - BD × DC

AD² = 8 × 6 - 4 × 3 = 36

AD = 6

AD² = AB × AC - BD × DC

AD² = 5 × 4 - 2.5 × 2

AD² = 20 - 5 = 15

AD = √15

Question types asked

Solved questions (every type)

BPT के अनुसार: AD/DB = AE/EC

3/5 = 6/EC

3 × EC = 30

EC = 10 सेमी

BPT के अनुसार: AD/DB = AE/EC

x/(x-2) = (x+2)/(x-1)

x(x-1) = (x-2)(x+2)

x² - x = x² - 4

x = 4

प्रमेय से: AB/AC = BD/DC

10/14 = BD/(6 - BD)

5/7 = BD/(6 - BD)

30 - 5BD = 7BD

12BD = 30

BD = 2.5 सेमी

प्रमेय: AB/AC = BD/DC

9/AC = 3/4

3 × AC = 36

AC = 12 सेमी

बाह्य कोण समद्विभाजक प्रमेय: AB/AC = BD/CD

12/8 = (5 + CD)/CD

3/2 = (5 + CD)/CD

3CD = 10 + 2CD

CD = 10 सेमी

BPT के उप-प्रमेय से: AD/AB = AE/AC

2/5 = 6/AC

2 × AC = 30

AC = 15 सेमी

BD/DC = 8/6 = 4/3

BD = 4 सेमी, DC = 3 सेमी (चूंकि BC=7)

AD² = AB × AC - BD × DC

AD² = 8 × 6 - 4 × 3 = 36

AD = 6 सेमी

How it is asked

In SSC CGL, CHSL, and MTS exams, 1-2 questions are frequently asked from this sub-topic every year. The 'Internal Angle Bisector Theorem' is the most common pattern observed.

Common mistakes

💡 For the Angle Bisector Theorem, remember: 'Side 1 / Side 2 = Segment 1 / Segment 2', where each segment is adjacent to its respective side.

All formulas at a glance

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