होम › नोट्स › BPSC CCE › इतिहास और राष्ट्रीय आंदोलन

BPSC CCEइतिहास और राष्ट्रीय आंदोलन

गुप्त काल, हर्ष और प्राचीन शिक्षा केंद्र

Gupta Period, Harsha and Ancient Educational Centres

📖 किताब की तरह पढ़ें📝 इस परीक्षा का मॉक टेस्ट

{"kind": "gs", "intro_hi": "यह अध्याय बीपीएससी प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा दोनों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसमें बिहार का प्राचीन इतिहास और उसकी सांस्कृतिक विरासत शामिल है। इससे गुप्त प्रशासन, नालंदा और विक्रमशिला जैसे प्राचीन विश्वविद्यालयों और चीनी यात्रियों से संबंधित प्रश्न लगातार पूछे जाते हैं।", "intro_en": "This chapter is extremely crucial for both BPSC Prelims and Mains as it covers ancient Bihar's history and its rich cultural heritage. Questions regarding Gupta administration, ancient universities like Nalanda and Vikramshila, and foreign travelers are frequently asked in the exam.", "subtopics": [{"name_hi": "गुप्त शासक: चंद्रगुप्त प्रथम, समुद्रगुप्त, चंद्रगुप्त द्वितीय एवं फाह्यान", "name_en": "Gupta Rulers: Chandragupta I, Samudragupta, Chandragupta II and Fa-Hien", "explain_hi": "गुप्त वंश की वास्तविक सत्ता की स्थापना चंद्रगुप्त प्रथम ने 319-320 ईस्वी में 'महाराजाधिराज' की उपाधि धारण करके की। उनके पुत्र समुद्रगुप्त ने व्यापक सैन्य अभियानों द्वारा साम्राज्य का भारी विस्तार किया, जिसकी विशद जानकारी हरिषेण द्वारा रचित 'प्रयाग प्रशस्ति' से मिलती है। समुद्रगुप्त की कलाप्रियता एवं सिक्कों पर वीणावादन के कारण उन्हें 'कविराज' भी कहा गया। उनके बाद चंद्रगुप्त द्वितीय (विक्रमादित्य) ने शकों को पराजित कर 'शकारि' की उपाधि ली और चांदी के सिक्के जारी किए। चंद्रगुप्त द्वितीय के शासनकाल में चीनी बौद्ध यात्री फाह्यान भारत आया, जिसने पाटलिपुत्र और गुप्तकालीन शांति-व्यवस्था का सजीव वर्णन किया।", "explain_en": "Chandragupta I established the real political power of the Gupta dynasty in 319-320 AD by assuming the title 'Maharajadhiraja'. His son, Samudragupta, massively expanded the empire through military campaigns documented in the 'Prayag Prashasti' composed by his court poet Harishena. Samudragupta was termed 'Kaviraja' due to his love for arts and coins depicting him playing the Veena. Chandragupta II (Vikramaditya) succeeded him, defeated the Sakas, adopted the title 'Sakari', and issued silver coins. During Chandragupta II's reign, the Chinese Buddhist pilgrim Fa-Hien visited India and provided a vivid account of Pataliputra and the peaceful governance of the Gupta era.", "facts": [{"hi": "चंद्रगुप्त प्रथम ने 319-320 ईस्वी में 'गुप्त संवत्' की शुरुआत की और 'महाराजाधिराज' की उपाधि धारण की।", "en": "Chandragupta I started the 'Gupta Samvat' in 319-320 AD and assumed the title 'Maharajadhiraja'."}, {"hi": "चंद्रगुप्त प्रथम का विवाह लिच्छवि राजकुमारी कुमारदेवी से हुआ था, जिसके बाद 'चंद्रगुप्त-कुमारदेवी प्रकार' के सोने के सिक्के जारी किए गए।", "en": "Chandragupta I married Lichchhavi princess Kumaradevi and issued 'Chandragupta-Kumaradevi' type gold coins."}, {"hi": "समुद्रगुप्त को उनकी महान सैन्य विजयों के कारण इतिहासकार वी.ए. स्मिथ ने 'भारत का नेपोलियन' कहा था।", "en": "Samudragupta was termed the 'Napoleon of India' by historian V.A. Smith due to his massive military conquests."}, {"hi": "प्रयाग प्रशस्ति (इलाहाबाद स्तंभ लेख) की रचना समुद्रगुप्त के दरबारी कवि हरिषेण ने संस्कृत भाषा में (चंपू शैली) की थी।", "en": "The Prayag Prashasti (Allahabad Pillar inscription) was composed by Samudragupta's court poet Harishena in Sanskrit (Champu style)."}, {"hi": "इलाहाबाद के एक ही स्तंभ पर अशोक, समुद्रगुप्त और बाद में मुगल सम्राट जहांगीर के अभिलेख उत्कीर्ण हैं।", "en": "Inscriptions of Ashoka, Samudragupta, and later Mughal emperor Jahangir are engraved on the same pillar at Allahabad."}, {"hi": "समुद्रगुप्त को सिक्कों पर वीणा बजाते हुए दिखाया गया है और उन्हें 'कविराज' की उपाधि प्राप्त थी।", "en": "Samudragupta is depicted playing the Veena on his coins and held the title 'Kaviraja'."}, {"hi": "श्रीलंका के राजा मेघवर्मन ने बोधगया में बौद्ध मठ बनाने की अनुमति मांगने के लिए समुद्रगुप्त के पास राजदूत भेजा था।", "en": "King Meghavarman of Sri Lanka sent an ambassador to Samudragupta seeking permission to build a Buddhist monastery at Bodh Gaya."}, {"hi": "चंद्रगुप्त द्वितीय ने अंतिम शक शासक रुद्रसिंह तृतीय को हराकर 'शकारि' तथा 'विक्रमादित्य' की उपाधि धारण की।", "en": "Chandragupta II defeated the last Saka ruler Rudrasimha III and adopted the titles 'Sakari' and 'Vikramaditya'."}, {"hi": "चंद्रगुप्त द्वितीय प्रथम गुप्त शासक थे जिन्होंने विजय के उपलक्ष्य में चांदी के सिक्के (रूपक) जारी किए।", "en": "Chandragupta II was the first Gupta ruler to issue silver coins (Rupaka) to commemorate his victory."}, {"hi": "दिल्ली का मेहरौली लौह स्तंभ अभिलेख राजा 'चंद्र' से संबंधित माना जाता है, जिनकी पहचान चंद्रगुप्त द्वितीय से की जाती है।", "en": "The Mehrauli Iron Pillar inscription in Delhi is attributed to King 'Chandra', identified as Chandragupta II."}, {"hi": "चंद्रगुप्त द्वितीय के दरबार में 'नवरत्न' रहते थे, जिनमें कालिदास, वराहमिहिर, अमरसिंह और धनवंतरी प्रमुख थे।", "en": "Chandragupta II's court hosted 'Navaratnas' (Nine Gems), including Kalidasa, Varahamihira, Amarasimha, and Dhanvantari."}, {"hi": "चीनी यात्री फाह्यान (399-414 ई.) चंद्रगुप्त द्वितीय के शासनकाल में भारत आया और उसने 'फ़ो-को-की' नामक यात्रा वृत्तांत लिखा।", "en": "Chinese pilgrim Fa-Hien (399-414 AD) visited India during Chandragupta II's reign and wrote the travelogue 'Fo-Kuo-Ki'."}, {"hi": "फाह्यान ने पाटलिपुत्र में अशोक के महल को देखकर लिखा कि यह मनुष्यों द्वारा नहीं बल्कि देवों द्वारा निर्मित प्रतीत होता है।", "en": "Fa-Hien visited Pataliputra and remarked that Ashoka's palace seemed to be created by spirits, not human hands."}], "examples": [{"q": "प्रयाग प्रशस्ति (इलाहाबाद स्तंभ अभिलेख) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:\n1. इसकी रचना समुद्रगुप्त के दरबारी कवि हरिषेण ने की थी।\n2. यह केवल समुद्रगुप्त की विजयों का उल्लेख करता है और इस पर अन्य किसी राजा का लेख नहीं है।\n3. यह संस्कृत की चंपू शैली में लिखा गया है।\nउपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?", "options": ["केवल 1 और 2", "केवल 1 और 3", "केवल 2 और 3", "1, 2 और 3"], "ans": 1, "why": "प्रयाग प्रशस्ति की रचना हरिषेण ने चंपू शैली में की थी, तथा इस स्तंभ पर अशोक और जहांगीर के अभिलेख भी मौजूद हैं।"}, {"q": "शकों पर विजय प्राप्त करने के उपलक्ष्य में निम्नलिखित में से किस गुप्त शासक ने 'शकारि' की उपाधि ली तथा चांदी के सिक्के जारी किए?", "options": ["चंद्रगुप्त प्रथम", "समुद्रगुप्त", "चंद्रगुप्त द्वितीय", "स्कंदगुप्त"], "ans": 2, "why": "चंद्रगुप्त द्वितीय (विक्रमादित्य) ने शक राजा रुद्रसिंह तृतीय को पराजित कर 'शकारि' उपाधि ली और चांदी के रूपक सिक्के चलाए।"}, {"q": "चीनी यात्री फाह्यान किस गुप्त शासक के शासनकाल में भारत की यात्रा पर आया था?", "options": ["चंद्रगुप्त प्रथम", "समुद्रगुप्त", "चंद्रगुप्त द्वितीय", "कुमारगुप्त प्रथम"], "ans": 2, "why": "फाह्यान लगभग 399-414 ई. के दौरान चंद्रगुप्त द्वितीय (विक्रमादित्य) के शासनकाल में भारत आया था।"}, {"q": "बोधगया में एक बौद्ध मठ बनाने के लिए किस श्रीलंकाई राजा ने समुद्रगुप्त के पास अपना राजदूत भेजा था?", "options": ["मेघवर्मन", "धातुसेन", "अग्निमित्र", "काश्यप प्रथम"], "ans": 0, "why": "श्रीलंका के राजा मेघवर्मन ने बोधगया में बौद्ध भिक्षुओं के लिए विहार/मठ निर्माण की अनुमति हेतु समुद्रगुप्त को उपहार एवं राजदूत भेजा था।"}, {"q": "गुप्त संवत् (319-320 ई.) की शुरुआत करने का श्रेय किस शासक को दिया जाता है?", "options": ["श्रीगुप्त", "घटोत्कच", "चंद्रगुप्त प्रथम", "समुद्रगुप्त"], "ans": 2, "why": "चंद्रगुप्त प्रथम ने 319-320 ई. में अपने राज्यारोहण के अवसर पर गुप्त संवत् चलाया था।"}], "asked_hi": "BPSC की प्रारंभिक परीक्षा में प्रयाग प्रशस्ति के रचयिता, समुद्रगुप्त की उपाधियों (कविराज/नेपोलियन), फाह्यान के आगमन काल, गुप्त संवत् की तिथि और चंद्रगुप्त द्वितीय की शक-विजय पर प्रश्न नियमित रूप से पूछे जाते हैं।", "asked_en": "BPSC Prelims frequently asks questions about the author of Prayag Prashasti, Samudragupta's titles, Fa-Hien's visit, the start date of Gupta Era, and Chandragupta II's Saka conquest.", "confusions_hi": ["चंद्रगुप्त मौर्य (मौर्य वंश के संस्थापक) और चंद्रगुप्त प्रथम / चंद्रगुप्त द्वितीय (गुप्त शासक) के बीच भ्रमित न हों।", "प्रयाग प्रशस्ति स्तंभ पर अशोक, समुद्रगुप्त और जहांगीर तीनों के लेख हैं, केवल समुद्रगुप्त का नहीं।", "फाह्यान चंद्रगुप्त द्वितीय के समय आया था, जबकि ह्वेनसांग हर्षवर्धन के समय आया था (फाह्यान-चंद्रगुप्त II, ह्वेनसांग-हर्षवर्धन)।"], "table": {"head": ["गुप्त शासक / यात्री", "प्रमुख उपाधियाँ / ग्रंथ", "महत्वपूर्ण तथ्य / उपलब्धियाँ"], "rows": [["चंद्रगुप्त प्रथम", "महाराजाधिराज", "गुप्त संवत् (319-320 ई.) के प्रवर्तक, लिच्छवि राजकुमारी कुमारदेवी से विवाह।"], ["समुद्रगुप्त", "कविराज, भारत का नेपोलियन, लिच्छवि-दोहित्र", "प्रयाग प्रशस्ति (हरिषेण), सिक्कों पर वीणा वादन, मेघवर्मन को बोधगया मठ की अनुमति।"], ["चंद्रगुप्त द्वितीय", "विक्रमादित्य, शकारि, परमभागवत", "शकों का उन्मूलन, चांदी के सिक्के जारी किए, नवरत्न (कालिदास, वराहमिहिर आदि) का दरबार।"], ["फाह्यान", "फ़ो-को-की (यात्रा वृत्तांत)", "चंद्रगुप्त द्वितीय के काल में आगमन, पाटलिपुत्र में अशोक के राजप्रासाद की प्रशंसा।"]]}, "trick_hi": "'समुद्र में हरि की वीणा' -> समुद्रगुप्त के दरबारी कवि 'हरिषेण' थे और वे सिक्कों पर 'वीणा' बजाते दिखते हैं।", "pyqs": []}, {"name_hi": "गुप्त प्रशासन, अर्थव्यवस्था, स्वर्ण युग एवं विज्ञान", "name_en": "Gupta Administration, Economy, Golden Age Claims & Science", "explain_hi": "गुप्त साम्राज्य का शासन काल प्राचीन भारत का एक महत्वपूर्ण युग माना जाता है। गुप्तकालीन प्रशासनिक व्यवस्था विकेंद्रीकृत और सामंती प्रकृति की थी, जिसमें साम्राज्य भुक्ति (प्रांत), विषय (जिला) और ग्राम में विभाजित था। इस काल में व्यापारिक श्रेणियों, सोने के सिक्कों (दीनार) और उन्नत कृषि व्यवस्था का विकास हुआ; अमरकोश में 12 प्रकार की भूमि का उल्लेख मिलता है। पाटलिपुत्र/कुसुमपुर से जुड़े महान खगोलविद् आर्यभट्ट ने 'आर्यभटीय' लिखकर गणित एवं खगोलशास्त्र में क्रांति ला दी, वहीं वराहमिहिर ने 'बृहत्संहिता' की रचना की। सांस्कृतिक, कलात्मक और वैज्ञानिक उपलब्धियों के कारण ही गुप्त काल को भारतीय इतिहास का 'स्वर्ण युग' कहा जाता है। उत्तर-गुप्त काल (Later Gupta period) के ऐतिहासिक अवशेष बिहार के गया जिले के अपसढ़ से प्राप्त हुए हैं।", "explain_en": "The Gupta period represents a pivotal era in ancient Indian history characterized by a decentralized and feudal administrative system. The empire was divided into Bhuktis (provinces), Vishayas (districts), and Gramas (villages). The economy flourished with merchant guilds, gold coins known as Dinara, and structured agriculture, as highlighted by Amarakosha's 12 land classifications. Scientific achievements reached new heights with Aryabhata of Pataliputra/Kusumpura writing 'Aryabhatiya' and Varahamihira composing 'Brihat Samhita'. Due to supreme accomplishments in art, literature, and science, this era is termed the 'Golden Age of India'. Additionally, Later Gupta period relics are found at Apsadh in Bihar's Gaya district.", "facts": [{"hi": "कला, साहित्य और विज्ञान में अभूतपूर्व प्रगति के कारण गुप्त काल को 'भारतीय इतिहास का स्वर्ण युग' कहा जाता है।", "en": "The Gupta period is called the 'Golden Age of Indian History' due to extraordinary progress in art, literature, and science."}, {"hi": "महान गणितज्ञ एवं खगोलशास्त्री आर्यभट्ट का संबंध पाटलिपुत्र (कुसुमपुर) से था।", "en": "The great mathematician and astronomer Aryabhata was associated with Pataliputra (Kusumpura)."}, {"hi": "वराहमिहिर गुप्तकाल के प्रमुख खगोलशास्त्री थे, जिन्होंने 'बृहत्संहिता', 'बृहज्जातक' और 'पंचसिद्धान्तिका' ग्रंथ लिखे।", "en": "Varahamihira was a prominent Gupta astronomer who wrote 'Brihat Samhita', 'Brihajjataka', and 'Panchasiddhantika'."}, {"hi": "अमरसिंह द्वारा रचित 'अमरकोश' ग्रंथ में गुप्तकालीन 12 प्रकार की भूमियों का वर्णन मिलता है।", "en": "Amarasimha's 'Amarakosha' describes 12 types of land classifications during the Gupta period."}, {"hi": "अमरकोश के अनुसार 'उर्वरा' (उपजाऊ), 'मरु' (रेगिस्तान), 'शाद्वल' (घासयुक्त) तथा 'देवमातृक' (वर्षा से सिंचित) प्रमुख भूमि प्रकार थे।", "en": "According to Amarakosha, 'Urvara' (fertile), 'Maru' (desert), 'Shadvala' (grassy), and 'Devamatrika' (rain-fed) were major land types."}, {"hi": "उत्तर-गुप्त काल (Later Gupta period) के ऐतिहासिक साक्ष्य और अवशेष बिहार के गया जिले के 'अपसढ़' से प्राप्त हुए हैं।", "en": "Historical evidence and relics of the Later Gupta period have been recovered from 'Apsadh' in Gaya district of Bihar."}, {"hi": "गुप्त साम्राज्य में प्रांतों को 'भुक्ति' कहा जाता था, जिसके प्रशासक को 'उपरिक' या 'उपरिक महाराज' कहते थे।", "en": "In the Gupta Empire, provinces were called 'Bhukti', and their administrator was known as 'Uparika' or 'Uparika Maharaja'."}, {"hi": "भुक्ति का विभाजन 'विषय' (जिला) में होता था, जिसका प्रमुख अधिकारी 'विषयपति' कहलाता था।", "en": "A Bhukti was divided into 'Vishaya' (district), headed by an officer called 'Vishayapati'."}, {"hi": "गुप्त काल में सोने के सिक्कों को 'दीनार' तथा चाँदी के सिक्कों को 'रूपक' (रूप्यक) कहा जाता था।", "en": "In the Gupta era, gold coins were called 'Dinara' and silver coins were referred to as 'Rupaka'."}, {"hi": "इंडिका से पाटलिपुत्र प्रशासन की जानकारी मिलती है, जहाँ प्रशासन 6 समितियों (प्रत्येक में 5 सदस्य) द्वारा चलाया जाता था।", "en": "Indica provides information on Pataliputra administration, which was run by 6 committees of 5 members each."}, {"hi": "गुप्त काल में सामान्यतः उपज का 1/6 भाग भू-राजस्व (भाग) के रूप में लिया जाता था।", "en": "In the Gupta period, land revenue ('Bhaga') was generally levied at 1/6th of the total produce."}], "examples": [{"q": "प्राचीन खगोलशास्त्री एवं गणितज्ञ आर्यभट्ट का संबंध बिहार के किस स्थान से था?", "options": ["वैशाली", "पाटलिपुत्र (कुसुमपुर)", "राजगृह", "अंग"], "ans": 1, "why": "आर्यभट्ट प्राचीन भारत के महान गणितज्ञ थे जिनका संबंध पाटलिपुत्र (कुसुमपुर) से था।"}, {"q": "गुप्तकालीन विद्वान अमरसिंह के ग्रंथ 'अमरकोश' के अनुसार 'देवमातृक' भूमि का क्या अर्थ है?", "options": ["नहरों द्वारा सिंचित भूमि", "वर्षा जल से सिंचित होने वाली भूमि", "बंजर अथवा रेगिस्तानी भूमि", "घास वाली भूमि"], "ans": 1, "why": "अमरकोश में देवमातृक भूमि का तात्पर्य प्राकृतिक वर्षा जल से सिंचित होने वाली कृषि भूमि से है।"}, {"q": "उत्तर-गुप्त काल (Later Gupta period) से संबंधित अवशेष बिहार के किस जिले में स्थित 'अपसढ़' से प्राप्त हुए हैं?", "options": ["पटना", "गया", "भागलपुर", "नालंदा"], "ans": 1, "why": "उत्तर-गुप्त काल के महत्वपूर्ण पुरातात्विक साक्ष्य गया जिले के अपसढ़ नामक स्थान से मिले हैं।"}, {"q": "गुप्तकालीन प्रशासनिक इकाइयों को बढ़ते से घटते आकार (उच्च से निम्न) के सही क्रम में व्यवस्थित कीजिए:", "options": ["विषय - भुक्ति - ग्राम", "भुक्ति - विषय - ग्राम", "ग्राम - विषय - भुक्ति", "भुक्ति - ग्राम - विषय"], "ans": 1, "why": "गुप्त काल में साम्राज्य भुक्ति (प्रांत) में, भुक्ति विषय (जिला) में और विषय ग्रामों में विभाजित था।"}, {"q": "निम्नलिखित में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?\n1. वराहमिहिर ने 'बृहत्सहित' की रचना की थी।\n2. गुप्त काल में सोने के सिक्कों को 'रूपक' कहा जाता था।", "options": ["केवल 1", "केवल 2", "1 और 2 दोनों", "न तो 1, न ही 2"], "ans": 0, "why": "कथन 1 सही है। कथन 2 गलत है क्योंकि गुप्त काल में सोने के सिक्कों को 'दीनार' तथा चाँदी के सिक्कों को 'रूपक' कहा जाता था।"}], "asked_hi": "BPSC प्रीलिम्स में गुप्तकालीन विज्ञान (आर्यभट्ट/वराहमिहिर), अमरकोश के अनुसार भू-राजस्व एवं भूमि वर्गीकरण, प्रशासनिक पदों (उपरिक, विषयपति) और बिहार केंद्रित पुरातात्विक स्थलों (जैसे अपसढ़, गया) से प्रश्न पूछे जाते हैं।", "asked_en": "BPSC Prelims frequently asks questions regarding Gupta period science (Aryabhata/Varahamihira), Amarakosha land classifications, administrative titles (Uparika, Vishayapati), and Bihar-centric archaeological sites (like Apsadh in Gaya).", "confusions_hi": ["दीनार (सोने के सिक्के) और रूपक (चाँदी के सिक्के) के नाम में छात्र भ्रमित होते हैं।", "देवमातृक (वर्षा से सिंचित भूमि) और अदेवमातृक (कृत्रिम सिंचाई/बिना वर्षा की भूमि) में अंतर याद रखें।", "पाटलिपुत्र नगर प्रशासन की 6 समितियों (प्रत्येक में 5 सदस्य) का उल्लेख मूलतः इंडिका से प्राप्त होता है।"], "table": {"head": ["शब्दावली / इकाई", "वर्ग / प्रकार", "विवरण / अर्थ"], "rows": [["भुक्ति (Bhukti)", "प्रशासनिक इकाई", "प्रांत (प्रमुख अधिकारी: उपरिक/उपरिक महाराज)"], ["विषय (Vishaya)", "प्रशासनिक इकाई", "जिला (प्रमुख अधिकारी: विषयपति)"], ["दीनार (Dinara)", "मुद्रा", "गुप्तकालीन स्वर्ण सिक्का"], ["रूपक (Rupaka)", "मुद्रा", "गुप्तकालीन रजत (चाँदी) सिक्का"], ["उर्वरा (Urvara)", "भूमि प्रकार (अमरकोश)", "उपजाऊ कृषि भूमि"], ["मरु (Maru)", "भूमि प्रकार (अमरकोश)", "रेगिस्तान / बंजर भूमि"], ["शाद्वल (Shadvala)", "भूमि प्रकार (अमरकोश)", "घास से ढकी भूमि"], ["देवमातृक (Devamatrika)", "भूमि प्रकार (अमरकोश)", "वर्षा के जल से सिंचित भूमि"]]}, "trick_hi": "गुप्त सिक्का ट्रिक: 'सोना गया दीनार में, चाँदी आई रूपक में' (सोना = दीनार, चाँदी = रूपक)।", "pyqs": [{"id": "bpsc-cce-70-pre:146", "label": "BPSC 70वीं प्रारंभिक (13 दिसंबर 2024), प्रश्न 146", "topic": "प्राचीन भारतीय भूमि के प्रकार", "q": "अमरकोश के अनुसार भूमि के प्रकारों पर विचार करें :\na. उर्वरा-उपजाऊ\nb. मरू-रेगिस्तान\nc. शादवला-घास\nd. देवमातृक-वर्षा से सिंचित\nनिम्न में से कौन-सा सही है ?", "options": ["a और b दोनों", "c और d दोनों", "b, c और d", "उपरोक्त में से एक से अधिक"], "ans": [3], "why_hi": "अमरकोश के अनुसार उर्वरा (उपजाऊ), मरु (रेगिस्तान), शाद्वल (घास) और देवमातृक (वर्षा से सिंचित) भूमि के वर्गीकरण से संबंधित सभी विकल्प सही हैं।"}]}, {"name_hi": "हर्षवर्धन और ह्वेनसांग", "name_en": "Harshavardhana and Hiuen Tsang", "explain_hi": "सातवीं शताब्दी के प्रारंभ में पुष्यभूति वंश के शासक हर्षवर्धन ने उत्तर भारत में एक विशाल साम्राज्य की स्थापना की। उसने अपनी राजधानी थानेश्वर से कन्नौज स्थानांतरित की, जिससे कन्नौज उत्तर भारत का प्रमुख राजनीतिक केंद्र बन गया। हर्ष के शासनकाल में चीनी बौद्ध यात्री ह्वेनसांग (युआन च्वांग) भारत आया, जिसने नालंदा विश्वविद्यालय में शिक्षा ग्रहण की और 635 ई. में पाटलिपुत्र की यात्रा की। ह्वेनसांग ने अपने यात्रा वृत्तांत 'सियुकी' में तत्कालीन भारत की सामाजिक, धार्मिक एवं प्रशासनिक स्थिति का विस्तृत वर्णन किया है। हर्ष स्वयं एक महान विद्वान था और उसने कन्नौज तथा प्रयाग में विशाल धार्मिक सभाओं का आयोजन कराया था।", "explain_en": "In the early 7th century, Harshavardhana of the Pushyabhuti dynasty established a large empire in Northern India. He shifted his capital from Thanesar to Kannauj, making Kannauj the political center of Northern India. During his reign, the Chinese Buddhist pilgrim Hiuen Tsang visited India, studied at Nalanda University, and visited Pataliputra in 635 AD. Hiuen Tsang recorded the socio-religious and administrative conditions of India in his travelogue 'Si-Yu-Ki'. Harsha himself was a great scholar and organized grand religious assemblies at Kannauj and Prayag.", "facts": [{"hi": "हर्षवर्धन पुष्यभूति (वर्धन) वंश का सबसे प्रतापी शासक था, जिसने अपनी राजधानी थानेश्वर से कन्नौज स्थानांतरित की।", "en": "Harshavardhana was the most powerful ruler of the Pushyabhuti (Vardhana) dynasty, who shifted his capital from Thanesar to Kannauj."}, {"hi": "चीनी यात्री ह्वेनसांग 7वीं शताब्दी में (629-645 ई.) हर्षवर्धन के शासनकाल में भारत आया था।", "en": "The Chinese traveler Hiuen Tsang visited India in the 7th century (629-645 AD) during the reign of Harshavardhana."}, {"hi": "ह्वेनसांग ने 635 ई. में पाटलिपुत्र (बिहार) की यात्रा की थी।", "en": "Hiuen Tsang visited Pataliputra (Bihar) in the year 635 A.D."}, {"hi": "ह्वेनसांग ने नालंदा विश्वविद्यालय में बौद्ध धर्म एवं दर्शन का अध्ययन किया, जहाँ उस समय आचार्य शीलभद्र कुलपति थे।", "en": "Hiuen Tsang studied Buddhist philosophy at Nalanda University under the chancellorship of Acharya Shilabhadra."}, {"hi": "ह्वेनसांग के यात्रा वृत्तांत का नाम 'सियुकी' (पश्चिम युगीन वृत्तांत) है।", "en": "The travelogue written by Hiuen Tsang is named 'Si-Yu-Ki' (Record of the Western Regions)."}, {"hi": "ह्वेनसांग को 'शाक्यमुनि' और 'यात्रियों का राजकुमार' (Prince of Pilgrims) भी कहा जाता है।", "en": "Hiuen Tsang is also known as 'Shakyamuni' and the 'Prince of Pilgrims'."}, {"hi": "हर्षवर्धन ने कन्नौज में एक विशाल धर्मसभा और प्रयाग में प्रत्येक 5वें वर्ष 'महामोक्ष परिषद' (प्रयाग की सभा) आयोजित की।", "en": "Harsha organized a grand religious assembly at Kannauj and the 'Maha Moksha Parishad' (Prayag Assembly) every 5th year at Prayag."}, {"hi": "हर्षवर्धन स्वयं तीन संस्कृत नाटकों के रचयिता थे: रत्नावली, प्रियदर्शिका और नागानंद।", "en": "Harshavardhana authored three Sanskrit plays: Ratnavali, Priyadarsika, and Nagananda."}, {"hi": "हर्ष के दरबारी कवि बाणभट्ट थे, जिन्होंने 'हर्षचरित' और 'कादंबरी' की रचना की।", "en": "Banabhatta was Harsha's court poet who wrote 'Harshacharita' and 'Kadambari'."}, {"hi": "हर्षवर्धन को दक्षिण भारत की ओर विस्तार करने से चालुक्य शासक पुलकेशिन द्वितीय ने नर्मदा नदी के तट पर पराजित कर रोका।", "en": "Harsha's southward expansion was checked by Chalukya ruler Pulakeshin II on the banks of the Narmada River."}, {"hi": "पुलकेशिन द्वितीय और हर्ष के बीच युद्ध का उल्लेख ऐहोल अभिलेख (रविकीर्ति द्वारा रचित) में मिलता है।", "en": "The conflict between Pulakeshin II and Harsha is recorded in the Aihole Inscription authored by Ravikirti."}, {"hi": "हर्षवर्धन ने 'शिलादित्य' की उपाधि धारण की थी।", "en": "Harshavardhana assumed the title of 'Siladitya'."}], "examples": [{"q": "चीनी यात्री ह्वेनसांग ने किस वर्ष पाटलिपुत्र की यात्रा की थी?", "options": ["605 ई.", "635 ई.", "645 ई.", "675 ई."], "ans": 1, "why": "ह्वेनसांग ने 635 ई. में बिहार के पाटलिपुत्र शहर का भ्रमण किया था।"}, {"q": "निम्नलिखित में से कौन सी रचना राजा हर्षवर्धन द्वारा नहीं लिखी गई है?", "options": ["रत्नावली", "प्रियदर्शिका", "कादंबरी", "नागानंद"], "ans": 2, "why": "'कादंबरी' की रचना हर्ष के दरबारी कवि बाणभट्ट ने की थी, जबकि अन्य तीनों नाटक हर्ष के हैं।"}, {"q": "हर्षवर्धन को नर्मदा नदी के तट पर किस दक्षिण भारतीय शासक ने पराजित किया था?", "options": ["राजेंद्र प्रथम", "पुलकेशिन द्वितीय", "विक्रमादित्य VI", "नरसिंहवर्मन प्रथम"], "ans": 1, "why": "चालुक्य सम्राट पुलकेशिन द्वितीय ने नर्मदा नदी के युद्ध में हर्षवर्धन को पराजित किया था।"}, {"q": "ह्वेनसांग के भारत आगमन के समय नालंदा विश्वविद्यालय के कुलपति कौन थे?", "options": ["धर्मपाल", "शीलभद्र", "दिंगनाग", "वसुबंधु"], "ans": 1, "why": "ह्वेनसांग के अध्ययन काल के दौरान नालंदा विश्वविद्यालय के प्रधान/कुलपति आचार्य शीलभद्र थे।"}, {"q": "हर्षवर्धन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:\n1. उसने अपनी राजधानी थानेश्वर से कन्नौज स्थानांतरित की।\n2. वह प्रत्येक पाँचवें वर्ष प्रयाग में महामोक्ष परिषद का आयोजन करता था।\nउपरोक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?", "options": ["केवल 1", "केवल 2", "1 और 2 दोनों", "न तो 1 और न ही 2"], "ans": 2, "why": "हर्ष ने राजधानी कन्नौज बनाई तथा प्रयाग में पंचवार्षिक महामोक्ष परिषद आयोजित की, दोनों कथन सत्य हैं।"}], "asked_hi": "BPSC प्रारंभिक परीक्षा में ह्वेनसांग के भारत/बिहार आगमन का समय, नालंदा में उसका अध्ययन, हर्षवर्धन की रचनाएँ, दरबारी कवि (बाणभट्ट), प्रयाग की धार्मिक सभा तथा पुलकेशिन द्वितीय के साथ नर्मदा युद्ध से संबंधित सीधे तथा सुमेलित करने वाले प्रश्न पूछे जाते हैं।", "asked_en": "BPSC asks direct factual and matching questions regarding Hiuen Tsang's visit to India/Bihar, his stay at Nalanda, Harsha's literary works, court poet Banabhatta, Prayag assembly, and the battle of Narmada against Pulakeshin II.", "confusions_hi": ["फाह्यान (चंद्रगुप्त द्वितीय/गुप्त काल) और ह्वेनसांग (हर्षवर्धन/7वीं सदी) के आगमन काल और शासक में भ्रम होना।", "हर्ष की अपनी रचनाओं (रत्नावली, प्रियदर्शिका, नागानंद) और उनके कवि बाणभट्ट की रचनाओं (हर्षचरित, कादंबरी) में अंतर न समझ पाना।"], "table": {"head": ["विषय / क्षेत्र", "महत्वपूर्ण विवरण", "संबंधित प्रमुख तथ्य"], "rows": [["राजधानी परिवर्तन", "थानेश्वर से कन्नौज", "उत्तर भारत की राजनीति का केंद्र कन्नौज बना"], ["चीनी यात्री", "ह्वेनसांग (सियुकी)", "7वीं शताब्दी (635 ई. में पाटलिपुत्र यात्रा)"], ["धार्मिक सभाएँ", "कन्नौज सभा एवं प्रयाग सभा", "प्रयाग में प्रत्येक 5वें वर्ष महामोक्ष परिषद का आयोजन"], ["हर्ष की साहित्यिक कृतियाँ", "रत्नावली, प्रियदर्शिका, नागानंद", "संस्कृत भाषा के प्रसिद्ध नाटक"], ["दरबारी विद्वान", "बाणभट्ट", "'हर्षचरित' और 'कादंबरी' के रचयिता"], ["ऐतिहासिक युद्ध", "नर्मदा नदी का युद्ध", "चालुक्य नरेश पुलकेशिन द्वितीय ने हर्ष को हराया (ऐहोल प्रशस्ति)"]]}, "trick_hi": "ह से हर्षवर्धन, ह से ह्वेनसांग (7वीं सदी में आए) और क से कन्नौज राजधानी बनाई।", "pyqs": [{"id": "bpsc-cce-71-pre:88", "label": "BPSC 71वीं प्रारंभिक (13 सितंबर 2025), प्रश्न 88", "topic": "प्राचीन भारत", "q": "सूची-I को सूची-II के साथ सुमेलित कीजिए।\nसूची-I (घटना/स्थान) — सूची-II (सम्बन्धित व्यक्ति)\na) चोल गंगम झील — 1) चन्द्रगुप्त मौर्य\nb) धर्म महामात्र की नियुक्ति — 2) हर्षवर्धन\nc) प्रयाग की सभा — 3) राजेन्द्र प्रथम\nd) सुदर्शन झील — 4) अशोक\nनीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए :", "options": ["a-3, b-4, c-2, d-1", "a-1, b-4, c-2, d-3", "a-3, b-4, c-1, d-2", "a-2, b-3, c-1, d-4"], "ans": [0], "why_hi": "हर्षवर्धन प्रत्येक पाँच वर्ष में प्रयाग में धार्मिक सभा (महामोक्ष परिषद) का आयोजन करता था, इसलिए प्रयाग की सभा हर्षवर्धन से संबंधित है।"}]}, {"name_hi": "नालंदा, विक्रमशिला और ओदंतपुरी विश्वविद्यालय", "name_en": "Nalanda, Vikramshila and Odantapuri Universities", "explain_hi": "प्राचीन बिहार अंतरराष्ट्रीय शिक्षा का सबसे बड़ा केंद्र था, जहाँ विश्व भर से छात्र अध्ययन करने आते थे। नालंदा महाविहार की स्थापना 5वीं शताब्दी ईस्वी में गुप्त शासक कुमारगुप्त प्रथम ने की थी। बाद में सम्राट हर्षवर्धन और पाल शासकों (जैसे धर्मपाल) ने इसे उदारतापूर्वक दान और गाँव देकर संरक्षण प्रदान किया। भागलपुर में स्थित विक्रमशिला विश्वविद्यालय की स्थापना पाल सम्राट धर्मपाल ने की थी, जो वज्रयान बौद्ध धर्म तथा तर्कशास्त्र का प्रमुख केंद्र बना। इसके अलावा बिहारशरीफ स्थित ओदंतपुरी विश्वविद्यालय की स्थापना भी पाल काल में हुई थी। 12वीं शताब्दी के अंत में बख्तियार खिलजी ने इन सभी महान शिक्षा केंद्रों पर आक्रमण कर इन्हें नष्ट कर दिया और इनके विशाल पुस्तकालयों को जला दिया।", "explain_en": "Ancient Bihar was a global hub of learning, attracting scholars and students from across Asia. Nalanda Mahavihara was established in the 5th century CE by the Gupta ruler Kumaragupta I. It subsequently received royal patronage and village grants from Emperor Harshavardhana and Pala rulers like Dharmapala. Vikramshila University, located near Bhagalpur, was founded by Pala Emperor Dharmapala and became a renowned center for Vajrayana Buddhism and logic. Additionally, Odantapuri University at Bihar Sharif was established during the Pala period. In the late 12th century, Bakhtiyar Khilji attacked and destroyed these great seats of learning, burning their extensive libraries.", "facts": [{"hi": "नालंदा महाविहार की स्थापना 5वीं शताब्दी ईस्वी में गुप्त शासक कुमारगुप्त प्रथम (महेंद्रादित्य) ने की थी।", "en": "Nalanda Mahavihara was founded in the 5th century CE by Gupta ruler Kumaragupta I (Mahendraditya)."}, {"hi": "हर्षवर्धन और पाल राजा धर्मपाल ने नालंदा महाविहार के रखरखाव के लिए 100 से 200 गाँवों का राजस्व दान दिया था।", "en": "Harshavardhana and Pala king Dharmapala donated revenues of 100 to 200 villages for Nalanda Mahavihara's maintenance."}, {"hi": "चीनी यात्री ह्वेनसांग के नालंदा प्रवास के दौरान वहाँ के कुलपति आचार्य शीलभद्र थे।", "en": "Acharya Silabhadra was the Chancellor of Nalanda during the visit of Chinese traveler Hiuen Tsang."}, {"hi": "नालंदा के विशाल पुस्तकालय क्षेत्र को 'धर्मगंज' कहा जाता था, जिसमें रत्नसागर, रत्नोदधि और रत्नरंजक नामक तीन भवन थे।", "en": "The library complex of Nalanda was known as 'Dharmaganja', comprising three buildings: Ratnasagara, Ratnodadhi, and Ratnaranjaka."}, {"hi": "विक्रमशिला महाविहार की स्थापना पाल वंश के शासक धर्मपाल ने 8वीं-9वीं शताब्दी में की थी।", "en": "Vikramshila Mahavihara was founded by Pala dynasty ruler Dharmapala in the 8th-9th century."}, {"hi": "विक्रमशिला विश्वविद्यालय वर्तमान बिहार के भागलपुर जिले के अंतीचक गाँव में स्थित था।", "en": "Vikramshila University was located at Antichak village in present-day Bhagalpur district of Bihar."}, {"hi": "विक्रमशिला विश्वविद्यालय बौद्ध धर्म की 'वज्रयान' शाखा और तंत्रज्ञान के अध्ययन का मुख्य केंद्र था।", "en": "Vikramshila University was a major center for the study of the Vajrayana branch of Buddhism and Tantrism."}, {"hi": "प्रसिद्ध बौद्ध विद्वान अतीश दीपंकर (श्रीज्ञान) विक्रमशिला विश्वविद्यालय से संबंधित थे, जिन्होंने तिब्बत में बौद्ध धर्म का प्रचार किया।", "en": "Famous Buddhist scholar Atisha Dipankara (Srijnana) was associated with Vikramshila and propagated Buddhism in Tibet."}, {"hi": "ओदंतपुरी (उदंतपुर) विश्वविद्यालय बिहार शरीफ (नालंदा जिला) में स्थित था, जिसकी स्थापना पाल वंश के संस्थापक गोपाल ने की थी।", "en": "Odantapuri (Udantapur) University was situated in Bihar Sharif (Nalanda district) and founded by Gopala, the Pala dynasty founder."}, {"hi": "तुर्क सेनापति इख्तियारुद्दीन मोहम्मद बिन बख्तियार खिलजी ने 12वीं सदी के अंत (लगभग 1193-1200 ई.) में नालंदा, विक्रमशिला और ओदंतपुरी को नष्ट कर दिया।", "en": "Turkic commander Ikhtiyaruddin Muhammad bin Bakhtiyar Khilji destroyed Nalanda, Vikramshila, and Odantapuri in the late 12th century (c. 1193-1200 CE)."}], "examples": [{"q": "नालंदा महाविहार की स्थापना निम्नलिखित में से किस गुप्त शासक ने की थी?", "options": ["चंद्रगुप्त द्वितीय", "समुद्रगुप्त", "कुमारगुप्त प्रथम", "स्कंदगुप्त"], "ans": 2, "why": "नालंदा महाविहार की स्थापना 5वीं शताब्दी में गुप्त शासक कुमारगुप्त प्रथम ने की थी।"}, {"q": "प्रसिद्ध विक्रमशिला विश्वविद्यालय की स्थापना किस पाल राजा द्वारा की गई थी?", "options": ["गोपाल", "धर्मपाल", "देवपाल", "महीपाल प्रथम"], "ans": 1, "why": "विक्रमशिला विश्वविद्यालय की स्थापना भागलपुर में पाल सम्राट धर्मपाल द्वारा की गई थी।"}, {"q": "प्राचीन विश्वविद्यालय तथा उनके संस्थापक के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा/से युग्म सही सुमेलित है/हैं?\n1. नालंदा — कुमारगुप्त प्रथम\n2. विक्रमशिला — धर्मपाल\n3. ओदंतपुरी — गोपाल", "options": ["केवल 1 और 2", "केवल 2 और 3", "केवल 1 और 3", "1, 2 और 3"], "ans": 3, "why": "तीनों युग्म सही सुमेलित हैं: नालंदा (कुमारगुप्त I), विक्रमशिला (धर्मपाल) तथा ओदंतपुरी (गोपाल)।"}, {"q": "प्राचीन बिहार के महाविहारों (नालंदा, विक्रमशिला और ओदंतपुरी) को 12वीं शताब्दी के अंत में किसने नष्ट किया था?", "options": ["महमुद गजनवी", "मोहम्मद गोरी", "बख्तियार खिलजी", "कुतुबुद्दीन ऐबक"], "ans": 2, "why": "बख्तियार खिलजी ने आक्रमण करके नालंदा, विक्रमशिला तथा ओदंतपुरी विश्वविद्यालयों को जलाकर नष्ट कर दिया था।"}, {"q": "विक्रमशिला विश्वविद्यालय वर्तमान बिहार के किस जिले में स्थित था?", "options": ["नालंदा", "भागलपुर", "पटना", "गया"], "ans": 1, "why": "विक्रमशिला विश्वविद्यालय वर्तमान में भागलपुर जिले के अंतीचक स्थान पर स्थित था।"}], "asked_hi": "BPSC की प्रारंभिक परीक्षा में प्राचीन विश्वविद्यालयों के संस्थापक (कुमारगुप्त I, धर्मपाल), उनके स्थान (भागलपुर, बिहारशरीफ), प्रसिद्ध आचार्यों (शीलभद्र, अतीश दीपंकर) और बख्तियार खिलजी द्वारा किए गए विनाश पर बार-बार प्रश्न पूछे जाते हैं।", "asked_en": "BPSC frequently asks questions regarding the founders of ancient universities (Kumaragupta I, Dharmapala), their geographic locations (Bhagalpur, Bihar Sharif), famous scholars (Silabhadra, Atisha Dipankara), and their destruction by Bakhtiyar Khilji.", "confusions_hi": ["नालंदा की स्थापना कुमारगुप्त प्रथम ने की थी, जबकि विक्रमशिला की स्थापना पाल राजा धर्मपाल ने की थी; छात्र बहुधा धर्मपाल को नालंदा का संस्थापक समझ लेते हैं क्योंकि उन्होंने नालंदा को भी गाँव दान दिए थे।", "विक्रमशिला भागलपुर (अंतीचक) में है, जबकि ओदंतपुरी नालंदा जिले के बिहारशरीफ में स्थित है।"], "table": {"head": ["विश्वविद्यालय का नाम", "संस्थापक/संरक्षक", "वर्तमान स्थान", "मुख्य अध्ययन विषय/विशेषता"], "rows": [["नालंदा महाविहार", "कुमारगुप्त प्रथम (संस्थापक), हर्ष व धर्मपाल (संरक्षक)", "बड़गाँव/नालंदा (बिहार)", "महायान बौद्ध धर्म, दर्शन, तर्कशास्त्र, चिकित्सा"], ["विक्रमशिला महाविहार", "धर्मपाल (पाल वंश)", "अंतीचक, भागलपुर (बिहार)", "वज्रयान बौद्ध धर्म, तंत्रशास्त्र, तर्कशास्त्र"], ["ओदंतपुरी महाविहार", "गोपाल (पाल वंश)", "बिहार शरीफ, नालंदा (बिहार)", "बौद्ध शिक्षा व तंत्र ज्ञान"]]}, "trick_hi": "ना-कु, विक-धर्म, ओ-गो (नालंदा = कुमारगुप्त, विक्रमशिला = धर्मपाल, ओदंतपुरी = गोपाल)", "pyqs": []}, {"name_hi": "बिहार-बंगाल का पाल वंश और उसकी संस्कृति", "name_en": "Pala Dynasty of Bihar-Bengal and its Culture", "explain_hi": "पाल वंश की स्थापना 750 ईस्वी में गोपाल द्वारा की गई थी, जब बंगाल में 'मात्स्यन्याय' (अराजकता) की स्थिति थी। यह वंश बिहार और बंगाल के इतिहास में कला, शिक्षा और बौद्ध धर्म के संरक्षण के लिए प्रसिद्ध है। धर्मपाल और देवपाल जैसे महान शासकों ने न केवल साम्राज्य का विस्तार किया, बल्कि विक्रमशिला और ओदंतपुरी जैसे महान विश्वविद्यालयों की नींव भी रखी। पाल शासक बौद्ध धर्म के वज्रयान संप्रदाय के अनुयायी थे और उनके समय में धीमन और विठपाल जैसे कलाकारों ने कांस्य मूर्तिकला को नई ऊंचाइयों पर पहुँचाया। 12वीं शताब्दी के अंत में बख्तियार खिलजी के आक्रमणों और सेन वंश के उदय के साथ इस गौरवशाली युग का अंत हुआ।", "explain_en": "The Pala dynasty was founded by Gopala in 750 AD during a period of anarchy in Bengal known as 'Matsyanyaya'. This dynasty is renowned in the history of Bihar and Bengal for its patronage of art, education, and Buddhism. Great rulers like Dharmapala and Devapala not only expanded the empire but also laid the foundations of great universities like Vikramshila and Odantapuri. The Pala rulers were followers of the Vajrayana sect of Buddhism, and during their reign, artists like Dhiman and Vitpala took bronze sculpture to new heights. This glorious era ended in the late 12th century with the invasions of Bakhtiyar Khilji and the rise of the Sena dynasty.", "facts": [{"hi": "पाल वंश का संस्थापक गोपाल (750-770 ई.) था, जिसे जनता द्वारा चुना गया था।", "en": "The founder of the Pala dynasty was Gopala (750-770 AD), who was elected by the people."}, {"hi": "धर्मपाल ने भागलपुर जिले में प्रसिद्ध विक्रमशिला विश्वविद्यालय की स्थापना की थी।", "en": "Dharmapala founded the famous Vikramshila University in Bhagalpur district."}, {"hi": "देवपाल ने अपनी राजधानी बिहार के मुंगेर में स्थानांतरित की थी।", "en": "Devapala shifted his capital to Munger in Bihar."}, {"hi": "ओदंतपुरी (बिहारशरीफ) महाविहार की स्थापना पाल शासक गोपाल ने की थी।", "en": "The Odantapuri (Bihar Sharif) Mahavihara was established by the Pala ruler Gopala."}, {"hi": "पाल काल के दौरान धीमन और विठपाल कांस्य मूर्तिकला के महान कलाकार थे।", "en": "Dhiman and Vitpala were great artists of bronze sculpture during the Pala period."}, {"hi": "कन्नौज के लिए 'त्रिपक्षीय संघर्ष' पाल, प्रतिहार और राष्ट्रकूटों के बीच हुआ था।", "en": "The 'Tripartite Struggle' for Kannauj took place between the Palas, Pratiharas, and Rashtrakutas."}, {"hi": "इल्तुतमिश बिहार पर अभियान चलाने वाला दिल्ली का पहला सुल्तान था (1225 ई.)।", "en": "Iltutmish was the first Sultan of Delhi to campaign in Bihar (1225 AD)."}, {"hi": "बख्तियार खिलजी ने 1203-04 में सेन वंश के शासक लक्ष्मण सेन की राजधानी नदिया पर हमला किया था।", "en": "Bakhtiyar Khilji attacked Nadia, the capital of Lakshmana Sen of the Sena dynasty, in 1203-04."}, {"hi": "पाल वंश के पतन के बाद बिहार में 'चेरो' जैसे स्थानीय राजवंशों का उदय हुआ।", "en": "After the fall of the Pala dynasty, local dynasties like the 'Chero' emerged in Bihar."}, {"hi": "फिरोज शाह तुगलक ने 1359 में अपने बंगाल अभियान के दौरान बिहार की यात्रा की थी।", "en": "Firoz Shah Tughlaq visited Bihar during his Bengal campaign in 1359."}, {"hi": "1733 में सुजाउद्दीन ने बिहार को बंगाल सूबे में मिला लिया था।", "en": "In 1733, Shujauddin annexed Bihar into the Bengal province."}], "examples": [{"q": "विक्रमशिला विश्वविद्यालय की स्थापना किस पाल शासक ने की थी?", "options": ["गोपाल", "धर्मपाल", "देवपाल", "महिपाल"], "ans": 1, "why": "धर्मपाल ने 8वीं शताब्दी के अंत में भागलपुर में विक्रमशिला विश्वविद्यालय की स्थापना की थी।"}, {"q": "पाल काल में कांस्य मूर्तियों के निर्माण की शैली के लिए कौन प्रसिद्ध थे?", "options": ["धीमन और विठपाल", "अजातशत्रु", "चाणक्य", "उपरोक्त में से कोई नहीं"], "ans": 0, "why": "धीमन और विठपाल पाल कालीन बिहार के प्रसिद्ध मूर्तिकार थे।"}, {"q": "किस सुल्तान ने 1225 ई. में बिहार और बंगाल पर अधिकार करने के लिए अभियान चलाया था?", "options": ["बख्तियार खिलजी", "इल्तुतमिश", "बलवन", "अलाउद्दीन खिलजी"], "ans": 1, "why": "इल्तुतमिश दिल्ली का पहला सुल्तान था जिसने 1225 में बिहार पर सफल सैन्य अभियान किया था।"}, {"q": "पाल वंश के पतन के बाद बिहार में किस स्थानीय राजवंश का प्रभुत्व बढ़ा?", "options": ["मौर्य वंश", "चेरो वंश", "कर्नाट वंश", "उज्जैनिया वंश"], "ans": 1, "why": "पालों के पतन के बाद बिहार के कुछ हिस्सों में चेरो राजवंश एक प्रमुख शक्ति के रूप में उभरा।"}, {"q": "मुंगेर को अपनी राजधानी बनाने वाला पाल शासक कौन था?", "options": ["गोपाल", "धर्मपाल", "देवपाल", "रामपाल"], "ans": 2, "why": "देवपाल ने अपनी प्रशासनिक सुविधा के लिए राजधानी को मुंगेर स्थानांतरित किया था।"}], "asked_hi": "BPSC अक्सर पाल वंश के संस्थापकों, उनके द्वारा स्थापित विश्वविद्यालयों (विक्रमशिला, ओदंतपुरी) और पाल कालीन कला (कांस्य मूर्तिकला) के बारे में प्रश्न पूछता है। त्रिपक्षीय संघर्ष और मध्यकालीन आक्रमणकारियों का क्रम भी महत्वपूर्ण है।", "asked_en": "BPSC frequently asks questions about the founders of the Pala dynasty, the universities they established (Vikramshila, Odantapuri), and Pala art (bronze sculpture). The Tripartite Struggle and the sequence of medieval invaders are also important.", "confusions_hi": ["ओदंतपुरी की स्थापना गोपाल ने की थी, जबकि विक्रमशिला की स्थापना धर्मपाल ने की थी।", "बख्तियार खिलजी ने नालंदा को नष्ट किया था, लेकिन वह पाल शासक नहीं बल्कि एक आक्रमणकारी था।"], "table": {"head": ["शासक", "प्रमुख उपलब्धि", "राजधानी/क्षेत्र"], "rows": [["गोपाल", "पाल वंश का संस्थापक, ओदंतपुरी महाविहार", "बंगाल"], ["धर्मपाल", "विक्रमशिला विश्वविद्यालय, त्रिपक्षीय संघर्ष", "कन्नौज पर प्रभाव"], ["देवपाल", "मुंगेर को राजधानी बनाया, बौद्ध धर्म का विस्तार", "मुंगेर (बिहार)"], ["लक्ष्मण सेन", "सेन वंश का शासक (पालों के बाद)", "नदिया (बंगाल)"]]}, "trick_hi": "गोपाल ने 'ओढ़ा' (ओदंतपुरी), धर्म ने 'विक्रम' (विक्रमशिला) को पाला।", "pyqs": [{"id": "bpsc-cce-71-pre:86", "label": "BPSC 71वीं प्रारंभिक (13 सितंबर 2025), प्रश्न 86", "topic": "प्राचीन भारत", "q": "सूची-I को सूची-II के साथ सुमेलित कीजिए।\nसूची-I\nप्राचीन भारत के स्थल\nसूची-II\nवर्तमान में किस राज्य में\na) कर्णसुवर्ण — 1) महाराष्ट्र\nb) प्राग्ज्योतिष — 2) गुजरात\nc) गिरनार — 3) पश्चिम बंगाल\nd) प्रतिष्ठान — 4) असम\nनीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए :", "options": ["a-4, b-3, c-1, d-2", "a-3, b-4, c-2, d-1", "a-3, b-2, c-4, d-1", "a-4, b-2, c-1, d-3"], "ans": [1], "why_hi": "कर्णसुवर्ण पश्चिम बंगाल में स्थित है, जो पाल और सेन काल के दौरान एक महत्वपूर्ण राजनीतिक केंद्र था।"}]}], "summary_hi": ["चंद्रगुप्त प्रथम ने 319-320 ईस्वी में गुप्त संवत की शुरुआत की और महाराजाधिराज की उपाधि धारण की।", "समुद्रगुप्त को 'भारत का नेपोलियन' कहा जाता है, जिसकी विजयों का उल्लेख हरिषेण द्वारा रचित प्रयाग प्रशस्ति में मिलता है।", "चंद्रगुप्त द्वितीय (विक्रमादित्य) के शासनकाल में प्रसिद्ध चीनी यात्री फाह्यान भारत आया था।", "प्राचीन भारत के महान खगोलशास्त्री आर्यभट्ट का संबंध कुसुमपुर (पाटलिपुत्र) से था, जिन्होंने 'आर्यभट्टीय' की रचना की।", "वराहमिहिर ने गुप्त काल के दौरान 'बृहत्संहिता' और 'पंचसिद्धांतिका' नामक ग्रंथों की रचना की।", "सम्राट हर्षवर्धन के शासनकाल में चीनी यात्री ह्वेनसांग भारत आया और उसने नालंदा विश्वविद्यालय में अध्ययन किया।", "नालंदा महाविहार की स्थापना 5वीं शताब्दी में गुप्त शासक कुमारगुप्त प्रथम (महेंद्रादित्य) ने की थी।", "नालंदा विश्वविद्यालय को 12वीं शताब्दी के अंत में तुर्क आक्रमणकारी इख्तियारुद्दीन मुहम्मद बिन बख्तियार खिलजी ने नष्ट कर दिया था।", "बिहार के भागलपुर में स्थित प्रसिद्ध 'विक्रमशिला विश्वविद्यालय' की स्थापना पाल शासक धर्मपाल ने की थी।", "बिहार शरीफ में 'ओदंतपुरी महाविहार' की स्थापना पाल वंश के संस्थापक गोपाल ने की थी।", "सुवर्णद्वीप के शासक बालपुत्रदेव के अनुरोध पर पाल शासक देवपाल ने नालंदा महाविहार के लिए 5 गाँव दान में दिए थे।"], "summary_en": ["Chandragupta I started the Gupta Era in 319-320 AD and assumed the title of Maharajadhiraja.", "Samudragupta, known as the 'Napoleon of India', is praised in the Prayag Prashasti composed by Harisena.", "The famous Chinese traveler Fa-Hien visited India during the reign of Chandragupta II (Vikramaditya).", "The great ancient astronomer Aryabhata belonged to Kusumpura (Pataliputra) and authored 'Aryabhatiya'.", "Varahamihira composed famous treatises like 'Brihat Samhita' and 'Panchasiddhantika' during the Gupta era.", "Chinese traveler Hiuen Tsang visited India during Harshavardhana's reign and studied at Nalanda University.", "Nalanda Mahavihara was founded in the 5th century AD by the Gupta ruler Kumaragupta I (Mahendraditya).", "Nalanda Mahavihara was destroyed at the end of the 12th century by the Turkic invader Bakhtiyar Khilji.", "The famous Vikramshila University in Bhagalpur, Bihar was founded by the Pala king Dharmapala.", "Odantapuri Mahavihara at Bihar Sharif was established by Gopala, the founder of the Pala dynasty.", "Pala ruler Devapala granted 5 villages for the upkeep of Nalanda University at the request of Balaputradeva of Suvarnadvipa."]}

अपने आप को जाँचिए — 10 प्रश्न

1. प्रयाग प्रशस्ति (इलाहाबाद स्तंभ लेख) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. इसकी रचना समुद्रगुप्त के दरबारी कवि हरिषेण द्वारा की गई थी। 2. यह संस्कृत भाषा में चंपू काव्य शैली में उत्कीर्ण है। उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?

  1. (क) केवल 1
  2. (ख) केवल 2
  3. (ग) 1 और 2 दोनों
  4. (घ) न तो 1 और न ही 2
उत्तर देखें

उत्तर: (ग) 1 और 2 दोनों

प्रयाग प्रशस्ति की रचना समुद्रगुप्त के महासंधिविग्रहिक और दरबारी कवि हरिषेण ने की थी। यह संस्कृत भाषा और चंपू (गद्य-पद्य मिश्रित) शैली में लिखी गई है।

2. प्रसिद्ध चीनी बौद्ध यात्री फाह्यान ने किस गुप्त सम्राट के शासनकाल के दौरान भारत की यात्रा की थी?

  1. (क) चंद्रगुप्त प्रथम
  2. (ख) समुद्रगुप्त
  3. (ग) चंद्रगुप्त द्वितीय (विक्रमादित्य)
  4. (घ) स्कंदगुप्त
उत्तर देखें

उत्तर: (ग) चंद्रगुप्त द्वितीय (विक्रमादित्य)

फाह्यान ने चंद्रगुप्त द्वितीय (विक्रमादित्य) के शासनकाल (399-414 ईस्वी) के दौरान भारत का दौरा किया और मध्य देश के बौद्ध धार्मिक स्थलों का भ्रमण किया।

3. प्राचीन भारत के प्रसिद्ध गणितज्ञ और खगोलशास्त्री आर्यभट्ट का संबंध बिहार के किस स्थान से था?

  1. (क) वैशाली
  2. (ख) कुसुमपुर (पाटलिपुत्र)
  3. (ग) अंग (भागलपुर)
  4. (घ) राजगृह
उत्तर देखें

उत्तर: (ख) कुसुमपुर (पाटलिपुत्र)

आर्यभट्ट कुसुमपुर (पाटलिपुत्र/पटना) के रहने वाले थे, जहाँ उन्होंने अपनी प्रसिद्ध कृति 'आर्यभट्टीय' की रचना की और शून्य तथा दशमलव प्रणाली का विवरण दिया।

4. सम्राट हर्षवर्धन के शासनकाल में भारत आने वाले चीनी तीर्थयात्री ह्वेनसांग ने किस प्राचीन केंद्र में बौद्ध धर्म का गहन अध्ययन किया था?

  1. (क) तक्षशिला
  2. (ख) विक्रमशिला
  3. (ग) नालंदा महाविहार
  4. (घ) ओदंतपुरी
उत्तर देखें

उत्तर: (ग) नालंदा महाविहार

ह्वेनसांग ने हर्षवर्धन के समय भारत की यात्रा की और नालंदा महाविहार में आचार्य शीलभद्र के मार्गदर्शन में योगशास्त्र और बौद्ध दर्शन का अध्ययन किया।

5. प्राचीन नालंदा महाविहार की स्थापना निम्नलिखित में से किस गुप्त शासक ने की थी?

  1. (क) कुमारगुप्त प्रथम
  2. (ख) स्कंदगुप्त
  3. (ग) समुद्रगुप्त
  4. (घ) चंद्रगुप्त द्वितीय
उत्तर देखें

उत्तर: (क) कुमारगुप्त प्रथम

नालंदा महाविहार की स्थापना 5वीं शताब्दी में गुप्त वंश के शासक कुमारगुप्त प्रथम (जिन्हें शक्रादित्य या महेंद्रादित्य भी कहा जाता है) ने की थी।

6. 12वीं शताब्दी के अंत में ऐतिहासिक नालंदा महाविहार को किसने नष्ट किया था?

  1. (क) महमूद गजनवी
  2. (ख) मुहम्मद गोरी
  3. (ग) इख्तियारुद्दीन मुहम्मद बिन बख्तियार खिलजी
  4. (घ) क़ुतुबुद्दीन ऐबक
उत्तर देखें

उत्तर: (ग) इख्तियारुद्दीन मुहम्मद बिन बख्तियार खिलजी

1193 ईस्वी के आसपास तुर्क सैन्य कमांडर बख्तियार खिलजी ने नालंदा महाविहार पर आक्रमण कर इसके विशाल पुस्तकालय (धर्मगंज) और भवनों को नष्ट कर दिया था।

7. बिहार के भागलपुर जिले में स्थित प्रसिद्ध 'विक्रमशिला विश्वविद्यालय' की स्थापना किस पाल राजा ने की थी?

  1. (क) गोपाल
  2. (ख) धर्मपाल
  3. (ग) देवपाल
  4. (घ) महिपाल प्रथम
उत्तर देखें

उत्तर: (ख) धर्मपाल

पाल वंश के प्रतापी राजा धर्मपाल (770-810 ईस्वी) ने भागलपुर जिले के अंतीचक में विक्रमशिला विश्वविद्यालय की स्थापना की थी, जो वज्रयान बौद्ध धर्म का प्रमुख केंद्र बना।

8. बिहार शरीफ में स्थित प्राचीन 'ओदंतपुरी महाविहार' की स्थापना निम्नलिखित में से किस पाल शासक ने की थी?

  1. (क) धर्मपाल
  2. (ख) गोपाल
  3. (ग) देवपाल
  4. (घ) रामपाल
उत्तर देखें

उत्तर: (ख) गोपाल

पाल वंश के संस्थापक गोपाल ने 8वीं शताब्दी में बिहार शरीफ में ओदंतपुरी (उदंतपुर) महाविहार की स्थापना की थी।

9. सुवर्णद्वीप (सुमात्रा) के शैलेंद्र वंशीय शासक बालपुत्रदेव के अनुरोध पर किस पाल शासक ने नालंदा में बौद्ध मठ के रखरखाव के लिए 5 गाँव दान दिए थे?

  1. (क) धर्मपाल
  2. (ख) देवपाल
  3. (ग) गोपाल
  4. (घ) महिपाल प्रथम
उत्तर देखें

उत्तर: (ख) देवपाल

नालंदा ताम्रपत्र के अनुसार, देवपाल ने सुवर्णद्वीप के राजा बालपुत्रदेव के अनुरोध पर नालंदा में विदेशी बौद्ध भिक्षुओं के आवास और रखरखाव हेतु 5 गाँव प्रदान किए थे।

10. निम्नलिखित प्राचीन रचनाओं और उनके रचयिताओं का कौन-सा युग्म सही सुमेलित नहीं है?

  1. (क) आर्यभट्टीय - आर्यभट्ट
  2. (ख) बृहत्संहिता - वराहमिहिर
  3. (ग) हर्षचरित - बाणभट्ट
  4. (घ) पंचसिद्धांतिका - ब्रह्मगुप्त
उत्तर देखें

उत्तर: (घ) पंचसिद्धांतिका - ब्रह्मगुप्त

'पंचसिद्धांतिका' की रचना प्रसिद्ध खगोलशास्त्री वराहमिहिर ने की थी, ब्रह्मगुप्त ने नहीं। ब्रह्मगुप्त ने 'ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त' की रचना की थी।

English version — Gupta Period, Harsha and Ancient Educational Centres

{"kind": "gs", "intro_hi": "यह अध्याय बीपीएससी प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा दोनों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसमें बिहार का प्राचीन इतिहास और उसकी सांस्कृतिक विरासत शामिल है। इससे गुप्त प्रशासन, नालंदा और विक्रमशिला जैसे प्राचीन विश्वविद्यालयों और चीनी यात्रियों से संबंधित प्रश्न लगातार पूछे जाते हैं।", "intro_en": "This chapter is extremely crucial for both BPSC Prelims and Mains as it covers ancient Bihar's history and its rich cultural heritage. Questions regarding Gupta administration, ancient universities like Nalanda and Vikramshila, and foreign travelers are frequently asked in the exam.", "subtopics": [{"name_hi": "गुप्त शासक: चंद्रगुप्त प्रथम, समुद्रगुप्त, चंद्रगुप्त द्वितीय एवं फाह्यान", "name_en": "Gupta Rulers: Chandragupta I, Samudragupta, Chandragupta II and Fa-Hien", "explain_hi": "गुप्त वंश की वास्तविक सत्ता की स्थापना चंद्रगुप्त प्रथम ने 319-320 ईस्वी में 'महाराजाधिराज' की उपाधि धारण करके की। उनके पुत्र समुद्रगुप्त ने व्यापक सैन्य अभियानों द्वारा साम्राज्य का भारी विस्तार किया, जिसकी विशद जानकारी हरिषेण द्वारा रचित 'प्रयाग प्रशस्ति' से मिलती है। समुद्रगुप्त की कलाप्रियता एवं सिक्कों पर वीणावादन के कारण उन्हें 'कविराज' भी कहा गया। उनके बाद चंद्रगुप्त द्वितीय (विक्रमादित्य) ने शकों को पराजित कर 'शकारि' की उपाधि ली और चांदी के सिक्के जारी किए। चंद्रगुप्त द्वितीय के शासनकाल में चीनी बौद्ध यात्री फाह्यान भारत आया, जिसने पाटलिपुत्र और गुप्तकालीन शांति-व्यवस्था का सजीव वर्णन किया।", "explain_en": "Chandragupta I established the real political power of the Gupta dynasty in 319-320 AD by assuming the title 'Maharajadhiraja'. His son, Samudragupta, massively expanded the empire through military campaigns documented in the 'Prayag Prashasti' composed by his court poet Harishena. Samudragupta was termed 'Kaviraja' due to his love for arts and coins depicting him playing the Veena. Chandragupta II (Vikramaditya) succeeded him, defeated the Sakas, adopted the title 'Sakari', and issued silver coins. During Chandragupta II's reign, the Chinese Buddhist pilgrim Fa-Hien visited India and provided a vivid account of Pataliputra and the peaceful governance of the Gupta era.", "facts": [{"hi": "चंद्रगुप्त प्रथम ने 319-320 ईस्वी में 'गुप्त संवत्' की शुरुआत की और 'महाराजाधिराज' की उपाधि धारण की।", "en": "Chandragupta I started the 'Gupta Samvat' in 319-320 AD and assumed the title 'Maharajadhiraja'."}, {"hi": "चंद्रगुप्त प्रथम का विवाह लिच्छवि राजकुमारी कुमारदेवी से हुआ था, जिसके बाद 'चंद्रगुप्त-कुमारदेवी प्रकार' के सोने के सिक्के जारी किए गए।", "en": "Chandragupta I married Lichchhavi princess Kumaradevi and issued 'Chandragupta-Kumaradevi' type gold coins."}, {"hi": "समुद्रगुप्त को उनकी महान सैन्य विजयों के कारण इतिहासकार वी.ए. स्मिथ ने 'भारत का नेपोलियन' कहा था।", "en": "Samudragupta was termed the 'Napoleon of India' by historian V.A. Smith due to his massive military conquests."}, {"hi": "प्रयाग प्रशस्ति (इलाहाबाद स्तंभ लेख) की रचना समुद्रगुप्त के दरबारी कवि हरिषेण ने संस्कृत भाषा में (चंपू शैली) की थी।", "en": "The Prayag Prashasti (Allahabad Pillar inscription) was composed by Samudragupta's court poet Harishena in Sanskrit (Champu style)."}, {"hi": "इलाहाबाद के एक ही स्तंभ पर अशोक, समुद्रगुप्त और बाद में मुगल सम्राट जहांगीर के अभिलेख उत्कीर्ण हैं।", "en": "Inscriptions of Ashoka, Samudragupta, and later Mughal emperor Jahangir are engraved on the same pillar at Allahabad."}, {"hi": "समुद्रगुप्त को सिक्कों पर वीणा बजाते हुए दिखाया गया है और उन्हें 'कविराज' की उपाधि प्राप्त थी।", "en": "Samudragupta is depicted playing the Veena on his coins and held the title 'Kaviraja'."}, {"hi": "श्रीलंका के राजा मेघवर्मन ने बोधगया में बौद्ध मठ बनाने की अनुमति मांगने के लिए समुद्रगुप्त के पास राजदूत भेजा था।", "en": "King Meghavarman of Sri Lanka sent an ambassador to Samudragupta seeking permission to build a Buddhist monastery at Bodh Gaya."}, {"hi": "चंद्रगुप्त द्वितीय ने अंतिम शक शासक रुद्रसिंह तृतीय को हराकर 'शकारि' तथा 'विक्रमादित्य' की उपाधि धारण की।", "en": "Chandragupta II defeated the last Saka ruler Rudrasimha III and adopted the titles 'Sakari' and 'Vikramaditya'."}, {"hi": "चंद्रगुप्त द्वितीय प्रथम गुप्त शासक थे जिन्होंने विजय के उपलक्ष्य में चांदी के सिक्के (रूपक) जारी किए।", "en": "Chandragupta II was the first Gupta ruler to issue silver coins (Rupaka) to commemorate his victory."}, {"hi": "दिल्ली का मेहरौली लौह स्तंभ अभिलेख राजा 'चंद्र' से संबंधित माना जाता है, जिनकी पहचान चंद्रगुप्त द्वितीय से की जाती है।", "en": "The Mehrauli Iron Pillar inscription in Delhi is attributed to King 'Chandra', identified as Chandragupta II."}, {"hi": "चंद्रगुप्त द्वितीय के दरबार में 'नवरत्न' रहते थे, जिनमें कालिदास, वराहमिहिर, अमरसिंह और धनवंतरी प्रमुख थे।", "en": "Chandragupta II's court hosted 'Navaratnas' (Nine Gems), including Kalidasa, Varahamihira, Amarasimha, and Dhanvantari."}, {"hi": "चीनी यात्री फाह्यान (399-414 ई.) चंद्रगुप्त द्वितीय के शासनकाल में भारत आया और उसने 'फ़ो-को-की' नामक यात्रा वृत्तांत लिखा।", "en": "Chinese pilgrim Fa-Hien (399-414 AD) visited India during Chandragupta II's reign and wrote the travelogue 'Fo-Kuo-Ki'."}, {"hi": "फाह्यान ने पाटलिपुत्र में अशोक के महल को देखकर लिखा कि यह मनुष्यों द्वारा नहीं बल्कि देवों द्वारा निर्मित प्रतीत होता है।", "en": "Fa-Hien visited Pataliputra and remarked that Ashoka's palace seemed to be created by spirits, not human hands."}], "examples": [{"q": "प्रयाग प्रशस्ति (इलाहाबाद स्तंभ अभिलेख) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:\n1. इसकी रचना समुद्रगुप्त के दरबारी कवि हरिषेण ने की थी।\n2. यह केवल समुद्रगुप्त की विजयों का उल्लेख करता है और इस पर अन्य किसी राजा का लेख नहीं है।\n3. यह संस्कृत की चंपू शैली में लिखा गया है।\nउपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?", "options": ["केवल 1 और 2", "केवल 1 और 3", "केवल 2 और 3", "1, 2 और 3"], "ans": 1, "why": "प्रयाग प्रशस्ति की रचना हरिषेण ने चंपू शैली में की थी, तथा इस स्तंभ पर अशोक और जहांगीर के अभिलेख भी मौजूद हैं।"}, {"q": "शकों पर विजय प्राप्त करने के उपलक्ष्य में निम्नलिखित में से किस गुप्त शासक ने 'शकारि' की उपाधि ली तथा चांदी के सिक्के जारी किए?", "options": ["चंद्रगुप्त प्रथम", "समुद्रगुप्त", "चंद्रगुप्त द्वितीय", "स्कंदगुप्त"], "ans": 2, "why": "चंद्रगुप्त द्वितीय (विक्रमादित्य) ने शक राजा रुद्रसिंह तृतीय को पराजित कर 'शकारि' उपाधि ली और चांदी के रूपक सिक्के चलाए।"}, {"q": "चीनी यात्री फाह्यान किस गुप्त शासक के शासनकाल में भारत की यात्रा पर आया था?", "options": ["चंद्रगुप्त प्रथम", "समुद्रगुप्त", "चंद्रगुप्त द्वितीय", "कुमारगुप्त प्रथम"], "ans": 2, "why": "फाह्यान लगभग 399-414 ई. के दौरान चंद्रगुप्त द्वितीय (विक्रमादित्य) के शासनकाल में भारत आया था।"}, {"q": "बोधगया में एक बौद्ध मठ बनाने के लिए किस श्रीलंकाई राजा ने समुद्रगुप्त के पास अपना राजदूत भेजा था?", "options": ["मेघवर्मन", "धातुसेन", "अग्निमित्र", "काश्यप प्रथम"], "ans": 0, "why": "श्रीलंका के राजा मेघवर्मन ने बोधगया में बौद्ध भिक्षुओं के लिए विहार/मठ निर्माण की अनुमति हेतु समुद्रगुप्त को उपहार एवं राजदूत भेजा था।"}, {"q": "गुप्त संवत् (319-320 ई.) की शुरुआत करने का श्रेय किस शासक को दिया जाता है?", "options": ["श्रीगुप्त", "घटोत्कच", "चंद्रगुप्त प्रथम", "समुद्रगुप्त"], "ans": 2, "why": "चंद्रगुप्त प्रथम ने 319-320 ई. में अपने राज्यारोहण के अवसर पर गुप्त संवत् चलाया था।"}], "asked_hi": "BPSC की प्रारंभिक परीक्षा में प्रयाग प्रशस्ति के रचयिता, समुद्रगुप्त की उपाधियों (कविराज/नेपोलियन), फाह्यान के आगमन काल, गुप्त संवत् की तिथि और चंद्रगुप्त द्वितीय की शक-विजय पर प्रश्न नियमित रूप से पूछे जाते हैं।", "asked_en": "BPSC Prelims frequently asks questions about the author of Prayag Prashasti, Samudragupta's titles, Fa-Hien's visit, the start date of Gupta Era, and Chandragupta II's Saka conquest.", "confusions_hi": ["चंद्रगुप्त मौर्य (मौर्य वंश के संस्थापक) और चंद्रगुप्त प्रथम / चंद्रगुप्त द्वितीय (गुप्त शासक) के बीच भ्रमित न हों।", "प्रयाग प्रशस्ति स्तंभ पर अशोक, समुद्रगुप्त और जहांगीर तीनों के लेख हैं, केवल समुद्रगुप्त का नहीं।", "फाह्यान चंद्रगुप्त द्वितीय के समय आया था, जबकि ह्वेनसांग हर्षवर्धन के समय आया था (फाह्यान-चंद्रगुप्त II, ह्वेनसांग-हर्षवर्धन)।"], "table": {"head": ["गुप्त शासक / यात्री", "प्रमुख उपाधियाँ / ग्रंथ", "महत्वपूर्ण तथ्य / उपलब्धियाँ"], "rows": [["चंद्रगुप्त प्रथम", "महाराजाधिराज", "गुप्त संवत् (319-320 ई.) के प्रवर्तक, लिच्छवि राजकुमारी कुमारदेवी से विवाह।"], ["समुद्रगुप्त", "कविराज, भारत का नेपोलियन, लिच्छवि-दोहित्र", "प्रयाग प्रशस्ति (हरिषेण), सिक्कों पर वीणा वादन, मेघवर्मन को बोधगया मठ की अनुमति।"], ["चंद्रगुप्त द्वितीय", "विक्रमादित्य, शकारि, परमभागवत", "शकों का उन्मूलन, चांदी के सिक्के जारी किए, नवरत्न (कालिदास, वराहमिहिर आदि) का दरबार।"], ["फाह्यान", "फ़ो-को-की (यात्रा वृत्तांत)", "चंद्रगुप्त द्वितीय के काल में आगमन, पाटलिपुत्र में अशोक के राजप्रासाद की प्रशंसा।"]]}, "trick_hi": "'समुद्र में हरि की वीणा' -> समुद्रगुप्त के दरबारी कवि 'हरिषेण' थे और वे सिक्कों पर 'वीणा' बजाते दिखते हैं।", "pyqs": []}, {"name_hi": "गुप्त प्रशासन, अर्थव्यवस्था, स्वर्ण युग एवं विज्ञान", "name_en": "Gupta Administration, Economy, Golden Age Claims & Science", "explain_hi": "गुप्त साम्राज्य का शासन काल प्राचीन भारत का एक महत्वपूर्ण युग माना जाता है। गुप्तकालीन प्रशासनिक व्यवस्था विकेंद्रीकृत और सामंती प्रकृति की थी, जिसमें साम्राज्य भुक्ति (प्रांत), विषय (जिला) और ग्राम में विभाजित था। इस काल में व्यापारिक श्रेणियों, सोने के सिक्कों (दीनार) और उन्नत कृषि व्यवस्था का विकास हुआ; अमरकोश में 12 प्रकार की भूमि का उल्लेख मिलता है। पाटलिपुत्र/कुसुमपुर से जुड़े महान खगोलविद् आर्यभट्ट ने 'आर्यभटीय' लिखकर गणित एवं खगोलशास्त्र में क्रांति ला दी, वहीं वराहमिहिर ने 'बृहत्संहिता' की रचना की। सांस्कृतिक, कलात्मक और वैज्ञानिक उपलब्धियों के कारण ही गुप्त काल को भारतीय इतिहास का 'स्वर्ण युग' कहा जाता है। उत्तर-गुप्त काल (Later Gupta period) के ऐतिहासिक अवशेष बिहार के गया जिले के अपसढ़ से प्राप्त हुए हैं।", "explain_en": "The Gupta period represents a pivotal era in ancient Indian history characterized by a decentralized and feudal administrative system. The empire was divided into Bhuktis (provinces), Vishayas (districts), and Gramas (villages). The economy flourished with merchant guilds, gold coins known as Dinara, and structured agriculture, as highlighted by Amarakosha's 12 land classifications. Scientific achievements reached new heights with Aryabhata of Pataliputra/Kusumpura writing 'Aryabhatiya' and Varahamihira composing 'Brihat Samhita'. Due to supreme accomplishments in art, literature, and science, this era is termed the 'Golden Age of India'. Additionally, Later Gupta period relics are found at Apsadh in Bihar's Gaya district.", "facts": [{"hi": "कला, साहित्य और विज्ञान में अभूतपूर्व प्रगति के कारण गुप्त काल को 'भारतीय इतिहास का स्वर्ण युग' कहा जाता है।", "en": "The Gupta period is called the 'Golden Age of Indian History' due to extraordinary progress in art, literature, and science."}, {"hi": "महान गणितज्ञ एवं खगोलशास्त्री आर्यभट्ट का संबंध पाटलिपुत्र (कुसुमपुर) से था।", "en": "The great mathematician and astronomer Aryabhata was associated with Pataliputra (Kusumpura)."}, {"hi": "वराहमिहिर गुप्तकाल के प्रमुख खगोलशास्त्री थे, जिन्होंने 'बृहत्संहिता', 'बृहज्जातक' और 'पंचसिद्धान्तिका' ग्रंथ लिखे।", "en": "Varahamihira was a prominent Gupta astronomer who wrote 'Brihat Samhita', 'Brihajjataka', and 'Panchasiddhantika'."}, {"hi": "अमरसिंह द्वारा रचित 'अमरकोश' ग्रंथ में गुप्तकालीन 12 प्रकार की भूमियों का वर्णन मिलता है।", "en": "Amarasimha's 'Amarakosha' describes 12 types of land classifications during the Gupta period."}, {"hi": "अमरकोश के अनुसार 'उर्वरा' (उपजाऊ), 'मरु' (रेगिस्तान), 'शाद्वल' (घासयुक्त) तथा 'देवमातृक' (वर्षा से सिंचित) प्रमुख भूमि प्रकार थे।", "en": "According to Amarakosha, 'Urvara' (fertile), 'Maru' (desert), 'Shadvala' (grassy), and 'Devamatrika' (rain-fed) were major land types."}, {"hi": "उत्तर-गुप्त काल (Later Gupta period) के ऐतिहासिक साक्ष्य और अवशेष बिहार के गया जिले के 'अपसढ़' से प्राप्त हुए हैं।", "en": "Historical evidence and relics of the Later Gupta period have been recovered from 'Apsadh' in Gaya district of Bihar."}, {"hi": "गुप्त साम्राज्य में प्रांतों को 'भुक्ति' कहा जाता था, जिसके प्रशासक को 'उपरिक' या 'उपरिक महाराज' कहते थे।", "en": "In the Gupta Empire, provinces were called 'Bhukti', and their administrator was known as 'Uparika' or 'Uparika Maharaja'."}, {"hi": "भुक्ति का विभाजन 'विषय' (जिला) में होता था, जिसका प्रमुख अधिकारी 'विषयपति' कहलाता था।", "en": "A Bhukti was divided into 'Vishaya' (district), headed by an officer called 'Vishayapati'."}, {"hi": "गुप्त काल में सोने के सिक्कों को 'दीनार' तथा चाँदी के सिक्कों को 'रूपक' (रूप्यक) कहा जाता था।", "en": "In the Gupta era, gold coins were called 'Dinara' and silver coins were referred to as 'Rupaka'."}, {"hi": "इंडिका से पाटलिपुत्र प्रशासन की जानकारी मिलती है, जहाँ प्रशासन 6 समितियों (प्रत्येक में 5 सदस्य) द्वारा चलाया जाता था।", "en": "Indica provides information on Pataliputra administration, which was run by 6 committees of 5 members each."}, {"hi": "गुप्त काल में सामान्यतः उपज का 1/6 भाग भू-राजस्व (भाग) के रूप में लिया जाता था।", "en": "In the Gupta period, land revenue ('Bhaga') was generally levied at 1/6th of the total produce."}], "examples": [{"q": "प्राचीन खगोलशास्त्री एवं गणितज्ञ आर्यभट्ट का संबंध बिहार के किस स्थान से था?", "options": ["वैशाली", "पाटलिपुत्र (कुसुमपुर)", "राजगृह", "अंग"], "ans": 1, "why": "आर्यभट्ट प्राचीन भारत के महान गणितज्ञ थे जिनका संबंध पाटलिपुत्र (कुसुमपुर) से था।"}, {"q": "गुप्तकालीन विद्वान अमरसिंह के ग्रंथ 'अमरकोश' के अनुसार 'देवमातृक' भूमि का क्या अर्थ है?", "options": ["नहरों द्वारा सिंचित भूमि", "वर्षा जल से सिंचित होने वाली भूमि", "बंजर अथवा रेगिस्तानी भूमि", "घास वाली भूमि"], "ans": 1, "why": "अमरकोश में देवमातृक भूमि का तात्पर्य प्राकृतिक वर्षा जल से सिंचित होने वाली कृषि भूमि से है।"}, {"q": "उत्तर-गुप्त काल (Later Gupta period) से संबंधित अवशेष बिहार के किस जिले में स्थित 'अपसढ़' से प्राप्त हुए हैं?", "options": ["पटना", "गया", "भागलपुर", "नालंदा"], "ans": 1, "why": "उत्तर-गुप्त काल के महत्वपूर्ण पुरातात्विक साक्ष्य गया जिले के अपसढ़ नामक स्थान से मिले हैं।"}, {"q": "गुप्तकालीन प्रशासनिक इकाइयों को बढ़ते से घटते आकार (उच्च से निम्न) के सही क्रम में व्यवस्थित कीजिए:", "options": ["विषय - भुक्ति - ग्राम", "भुक्ति - विषय - ग्राम", "ग्राम - विषय - भुक्ति", "भुक्ति - ग्राम - विषय"], "ans": 1, "why": "गुप्त काल में साम्राज्य भुक्ति (प्रांत) में, भुक्ति विषय (जिला) में और विषय ग्रामों में विभाजित था।"}, {"q": "निम्नलिखित में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?\n1. वराहमिहिर ने 'बृहत्सहित' की रचना की थी।\n2. गुप्त काल में सोने के सिक्कों को 'रूपक' कहा जाता था।", "options": ["केवल 1", "केवल 2", "1 और 2 दोनों", "न तो 1, न ही 2"], "ans": 0, "why": "कथन 1 सही है। कथन 2 गलत है क्योंकि गुप्त काल में सोने के सिक्कों को 'दीनार' तथा चाँदी के सिक्कों को 'रूपक' कहा जाता था।"}], "asked_hi": "BPSC प्रीलिम्स में गुप्तकालीन विज्ञान (आर्यभट्ट/वराहमिहिर), अमरकोश के अनुसार भू-राजस्व एवं भूमि वर्गीकरण, प्रशासनिक पदों (उपरिक, विषयपति) और बिहार केंद्रित पुरातात्विक स्थलों (जैसे अपसढ़, गया) से प्रश्न पूछे जाते हैं।", "asked_en": "BPSC Prelims frequently asks questions regarding Gupta period science (Aryabhata/Varahamihira), Amarakosha land classifications, administrative titles (Uparika, Vishayapati), and Bihar-centric archaeological sites (like Apsadh in Gaya).", "confusions_hi": ["दीनार (सोने के सिक्के) और रूपक (चाँदी के सिक्के) के नाम में छात्र भ्रमित होते हैं।", "देवमातृक (वर्षा से सिंचित भूमि) और अदेवमातृक (कृत्रिम सिंचाई/बिना वर्षा की भूमि) में अंतर याद रखें।", "पाटलिपुत्र नगर प्रशासन की 6 समितियों (प्रत्येक में 5 सदस्य) का उल्लेख मूलतः इंडिका से प्राप्त होता है।"], "table": {"head": ["शब्दावली / इकाई", "वर्ग / प्रकार", "विवरण / अर्थ"], "rows": [["भुक्ति (Bhukti)", "प्रशासनिक इकाई", "प्रांत (प्रमुख अधिकारी: उपरिक/उपरिक महाराज)"], ["विषय (Vishaya)", "प्रशासनिक इकाई", "जिला (प्रमुख अधिकारी: विषयपति)"], ["दीनार (Dinara)", "मुद्रा", "गुप्तकालीन स्वर्ण सिक्का"], ["रूपक (Rupaka)", "मुद्रा", "गुप्तकालीन रजत (चाँदी) सिक्का"], ["उर्वरा (Urvara)", "भूमि प्रकार (अमरकोश)", "उपजाऊ कृषि भूमि"], ["मरु (Maru)", "भूमि प्रकार (अमरकोश)", "रेगिस्तान / बंजर भूमि"], ["शाद्वल (Shadvala)", "भूमि प्रकार (अमरकोश)", "घास से ढकी भूमि"], ["देवमातृक (Devamatrika)", "भूमि प्रकार (अमरकोश)", "वर्षा के जल से सिंचित भूमि"]]}, "trick_hi": "गुप्त सिक्का ट्रिक: 'सोना गया दीनार में, चाँदी आई रूपक में' (सोना = दीनार, चाँदी = रूपक)।", "pyqs": [{"id": "bpsc-cce-70-pre:146", "label": "BPSC 70वीं प्रारंभिक (13 दिसंबर 2024), प्रश्न 146", "topic": "प्राचीन भारतीय भूमि के प्रकार", "q": "अमरकोश के अनुसार भूमि के प्रकारों पर विचार करें :\na. उर्वरा-उपजाऊ\nb. मरू-रेगिस्तान\nc. शादवला-घास\nd. देवमातृक-वर्षा से सिंचित\nनिम्न में से कौन-सा सही है ?", "options": ["a और b दोनों", "c और d दोनों", "b, c और d", "उपरोक्त में से एक से अधिक"], "ans": [3], "why_hi": "अमरकोश के अनुसार उर्वरा (उपजाऊ), मरु (रेगिस्तान), शाद्वल (घास) और देवमातृक (वर्षा से सिंचित) भूमि के वर्गीकरण से संबंधित सभी विकल्प सही हैं।"}]}, {"name_hi": "हर्षवर्धन और ह्वेनसांग", "name_en": "Harshavardhana and Hiuen Tsang", "explain_hi": "सातवीं शताब्दी के प्रारंभ में पुष्यभूति वंश के शासक हर्षवर्धन ने उत्तर भारत में एक विशाल साम्राज्य की स्थापना की। उसने अपनी राजधानी थानेश्वर से कन्नौज स्थानांतरित की, जिससे कन्नौज उत्तर भारत का प्रमुख राजनीतिक केंद्र बन गया। हर्ष के शासनकाल में चीनी बौद्ध यात्री ह्वेनसांग (युआन च्वांग) भारत आया, जिसने नालंदा विश्वविद्यालय में शिक्षा ग्रहण की और 635 ई. में पाटलिपुत्र की यात्रा की। ह्वेनसांग ने अपने यात्रा वृत्तांत 'सियुकी' में तत्कालीन भारत की सामाजिक, धार्मिक एवं प्रशासनिक स्थिति का विस्तृत वर्णन किया है। हर्ष स्वयं एक महान विद्वान था और उसने कन्नौज तथा प्रयाग में विशाल धार्मिक सभाओं का आयोजन कराया था।", "explain_en": "In the early 7th century, Harshavardhana of the Pushyabhuti dynasty established a large empire in Northern India. He shifted his capital from Thanesar to Kannauj, making Kannauj the political center of Northern India. During his reign, the Chinese Buddhist pilgrim Hiuen Tsang visited India, studied at Nalanda University, and visited Pataliputra in 635 AD. Hiuen Tsang recorded the socio-religious and administrative conditions of India in his travelogue 'Si-Yu-Ki'. Harsha himself was a great scholar and organized grand religious assemblies at Kannauj and Prayag.", "facts": [{"hi": "हर्षवर्धन पुष्यभूति (वर्धन) वंश का सबसे प्रतापी शासक था, जिसने अपनी राजधानी थानेश्वर से कन्नौज स्थानांतरित की।", "en": "Harshavardhana was the most powerful ruler of the Pushyabhuti (Vardhana) dynasty, who shifted his capital from Thanesar to Kannauj."}, {"hi": "चीनी यात्री ह्वेनसांग 7वीं शताब्दी में (629-645 ई.) हर्षवर्धन के शासनकाल में भारत आया था।", "en": "The Chinese traveler Hiuen Tsang visited India in the 7th century (629-645 AD) during the reign of Harshavardhana."}, {"hi": "ह्वेनसांग ने 635 ई. में पाटलिपुत्र (बिहार) की यात्रा की थी।", "en": "Hiuen Tsang visited Pataliputra (Bihar) in the year 635 A.D."}, {"hi": "ह्वेनसांग ने नालंदा विश्वविद्यालय में बौद्ध धर्म एवं दर्शन का अध्ययन किया, जहाँ उस समय आचार्य शीलभद्र कुलपति थे।", "en": "Hiuen Tsang studied Buddhist philosophy at Nalanda University under the chancellorship of Acharya Shilabhadra."}, {"hi": "ह्वेनसांग के यात्रा वृत्तांत का नाम 'सियुकी' (पश्चिम युगीन वृत्तांत) है।", "en": "The travelogue written by Hiuen Tsang is named 'Si-Yu-Ki' (Record of the Western Regions)."}, {"hi": "ह्वेनसांग को 'शाक्यमुनि' और 'यात्रियों का राजकुमार' (Prince of Pilgrims) भी कहा जाता है।", "en": "Hiuen Tsang is also known as 'Shakyamuni' and the 'Prince of Pilgrims'."}, {"hi": "हर्षवर्धन ने कन्नौज में एक विशाल धर्मसभा और प्रयाग में प्रत्येक 5वें वर्ष 'महामोक्ष परिषद' (प्रयाग की सभा) आयोजित की।", "en": "Harsha organized a grand religious assembly at Kannauj and the 'Maha Moksha Parishad' (Prayag Assembly) every 5th year at Prayag."}, {"hi": "हर्षवर्धन स्वयं तीन संस्कृत नाटकों के रचयिता थे: रत्नावली, प्रियदर्शिका और नागानंद।", "en": "Harshavardhana authored three Sanskrit plays: Ratnavali, Priyadarsika, and Nagananda."}, {"hi": "हर्ष के दरबारी कवि बाणभट्ट थे, जिन्होंने 'हर्षचरित' और 'कादंबरी' की रचना की।", "en": "Banabhatta was Harsha's court poet who wrote 'Harshacharita' and 'Kadambari'."}, {"hi": "हर्षवर्धन को दक्षिण भारत की ओर विस्तार करने से चालुक्य शासक पुलकेशिन द्वितीय ने नर्मदा नदी के तट पर पराजित कर रोका।", "en": "Harsha's southward expansion was checked by Chalukya ruler Pulakeshin II on the banks of the Narmada River."}, {"hi": "पुलकेशिन द्वितीय और हर्ष के बीच युद्ध का उल्लेख ऐहोल अभिलेख (रविकीर्ति द्वारा रचित) में मिलता है।", "en": "The conflict between Pulakeshin II and Harsha is recorded in the Aihole Inscription authored by Ravikirti."}, {"hi": "हर्षवर्धन ने 'शिलादित्य' की उपाधि धारण की थी।", "en": "Harshavardhana assumed the title of 'Siladitya'."}], "examples": [{"q": "चीनी यात्री ह्वेनसांग ने किस वर्ष पाटलिपुत्र की यात्रा की थी?", "options": ["605 ई.", "635 ई.", "645 ई.", "675 ई."], "ans": 1, "why": "ह्वेनसांग ने 635 ई. में बिहार के पाटलिपुत्र शहर का भ्रमण किया था।"}, {"q": "निम्नलिखित में से कौन सी रचना राजा हर्षवर्धन द्वारा नहीं लिखी गई है?", "options": ["रत्नावली", "प्रियदर्शिका", "कादंबरी", "नागानंद"], "ans": 2, "why": "'कादंबरी' की रचना हर्ष के दरबारी कवि बाणभट्ट ने की थी, जबकि अन्य तीनों नाटक हर्ष के हैं।"}, {"q": "हर्षवर्धन को नर्मदा नदी के तट पर किस दक्षिण भारतीय शासक ने पराजित किया था?", "options": ["राजेंद्र प्रथम", "पुलकेशिन द्वितीय", "विक्रमादित्य VI", "नरसिंहवर्मन प्रथम"], "ans": 1, "why": "चालुक्य सम्राट पुलकेशिन द्वितीय ने नर्मदा नदी के युद्ध में हर्षवर्धन को पराजित किया था।"}, {"q": "ह्वेनसांग के भारत आगमन के समय नालंदा विश्वविद्यालय के कुलपति कौन थे?", "options": ["धर्मपाल", "शीलभद्र", "दिंगनाग", "वसुबंधु"], "ans": 1, "why": "ह्वेनसांग के अध्ययन काल के दौरान नालंदा विश्वविद्यालय के प्रधान/कुलपति आचार्य शीलभद्र थे।"}, {"q": "हर्षवर्धन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:\n1. उसने अपनी राजधानी थानेश्वर से कन्नौज स्थानांतरित की।\n2. वह प्रत्येक पाँचवें वर्ष प्रयाग में महामोक्ष परिषद का आयोजन करता था।\nउपरोक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?", "options": ["केवल 1", "केवल 2", "1 और 2 दोनों", "न तो 1 और न ही 2"], "ans": 2, "why": "हर्ष ने राजधानी कन्नौज बनाई तथा प्रयाग में पंचवार्षिक महामोक्ष परिषद आयोजित की, दोनों कथन सत्य हैं।"}], "asked_hi": "BPSC प्रारंभिक परीक्षा में ह्वेनसांग के भारत/बिहार आगमन का समय, नालंदा में उसका अध्ययन, हर्षवर्धन की रचनाएँ, दरबारी कवि (बाणभट्ट), प्रयाग की धार्मिक सभा तथा पुलकेशिन द्वितीय के साथ नर्मदा युद्ध से संबंधित सीधे तथा सुमेलित करने वाले प्रश्न पूछे जाते हैं।", "asked_en": "BPSC asks direct factual and matching questions regarding Hiuen Tsang's visit to India/Bihar, his stay at Nalanda, Harsha's literary works, court poet Banabhatta, Prayag assembly, and the battle of Narmada against Pulakeshin II.", "confusions_hi": ["फाह्यान (चंद्रगुप्त द्वितीय/गुप्त काल) और ह्वेनसांग (हर्षवर्धन/7वीं सदी) के आगमन काल और शासक में भ्रम होना।", "हर्ष की अपनी रचनाओं (रत्नावली, प्रियदर्शिका, नागानंद) और उनके कवि बाणभट्ट की रचनाओं (हर्षचरित, कादंबरी) में अंतर न समझ पाना।"], "table": {"head": ["विषय / क्षेत्र", "महत्वपूर्ण विवरण", "संबंधित प्रमुख तथ्य"], "rows": [["राजधानी परिवर्तन", "थानेश्वर से कन्नौज", "उत्तर भारत की राजनीति का केंद्र कन्नौज बना"], ["चीनी यात्री", "ह्वेनसांग (सियुकी)", "7वीं शताब्दी (635 ई. में पाटलिपुत्र यात्रा)"], ["धार्मिक सभाएँ", "कन्नौज सभा एवं प्रयाग सभा", "प्रयाग में प्रत्येक 5वें वर्ष महामोक्ष परिषद का आयोजन"], ["हर्ष की साहित्यिक कृतियाँ", "रत्नावली, प्रियदर्शिका, नागानंद", "संस्कृत भाषा के प्रसिद्ध नाटक"], ["दरबारी विद्वान", "बाणभट्ट", "'हर्षचरित' और 'कादंबरी' के रचयिता"], ["ऐतिहासिक युद्ध", "नर्मदा नदी का युद्ध", "चालुक्य नरेश पुलकेशिन द्वितीय ने हर्ष को हराया (ऐहोल प्रशस्ति)"]]}, "trick_hi": "ह से हर्षवर्धन, ह से ह्वेनसांग (7वीं सदी में आए) और क से कन्नौज राजधानी बनाई।", "pyqs": [{"id": "bpsc-cce-71-pre:88", "label": "BPSC 71वीं प्रारंभिक (13 सितंबर 2025), प्रश्न 88", "topic": "प्राचीन भारत", "q": "सूची-I को सूची-II के साथ सुमेलित कीजिए।\nसूची-I (घटना/स्थान) — सूची-II (सम्बन्धित व्यक्ति)\na) चोल गंगम झील — 1) चन्द्रगुप्त मौर्य\nb) धर्म महामात्र की नियुक्ति — 2) हर्षवर्धन\nc) प्रयाग की सभा — 3) राजेन्द्र प्रथम\nd) सुदर्शन झील — 4) अशोक\nनीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए :", "options": ["a-3, b-4, c-2, d-1", "a-1, b-4, c-2, d-3", "a-3, b-4, c-1, d-2", "a-2, b-3, c-1, d-4"], "ans": [0], "why_hi": "हर्षवर्धन प्रत्येक पाँच वर्ष में प्रयाग में धार्मिक सभा (महामोक्ष परिषद) का आयोजन करता था, इसलिए प्रयाग की सभा हर्षवर्धन से संबंधित है।"}]}, {"name_hi": "नालंदा, विक्रमशिला और ओदंतपुरी विश्वविद्यालय", "name_en": "Nalanda, Vikramshila and Odantapuri Universities", "explain_hi": "प्राचीन बिहार अंतरराष्ट्रीय शिक्षा का सबसे बड़ा केंद्र था, जहाँ विश्व भर से छात्र अध्ययन करने आते थे। नालंदा महाविहार की स्थापना 5वीं शताब्दी ईस्वी में गुप्त शासक कुमारगुप्त प्रथम ने की थी। बाद में सम्राट हर्षवर्धन और पाल शासकों (जैसे धर्मपाल) ने इसे उदारतापूर्वक दान और गाँव देकर संरक्षण प्रदान किया। भागलपुर में स्थित विक्रमशिला विश्वविद्यालय की स्थापना पाल सम्राट धर्मपाल ने की थी, जो वज्रयान बौद्ध धर्म तथा तर्कशास्त्र का प्रमुख केंद्र बना। इसके अलावा बिहारशरीफ स्थित ओदंतपुरी विश्वविद्यालय की स्थापना भी पाल काल में हुई थी। 12वीं शताब्दी के अंत में बख्तियार खिलजी ने इन सभी महान शिक्षा केंद्रों पर आक्रमण कर इन्हें नष्ट कर दिया और इनके विशाल पुस्तकालयों को जला दिया।", "explain_en": "Ancient Bihar was a global hub of learning, attracting scholars and students from across Asia. Nalanda Mahavihara was established in the 5th century CE by the Gupta ruler Kumaragupta I. It subsequently received royal patronage and village grants from Emperor Harshavardhana and Pala rulers like Dharmapala. Vikramshila University, located near Bhagalpur, was founded by Pala Emperor Dharmapala and became a renowned center for Vajrayana Buddhism and logic. Additionally, Odantapuri University at Bihar Sharif was established during the Pala period. In the late 12th century, Bakhtiyar Khilji attacked and destroyed these great seats of learning, burning their extensive libraries.", "facts": [{"hi": "नालंदा महाविहार की स्थापना 5वीं शताब्दी ईस्वी में गुप्त शासक कुमारगुप्त प्रथम (महेंद्रादित्य) ने की थी।", "en": "Nalanda Mahavihara was founded in the 5th century CE by Gupta ruler Kumaragupta I (Mahendraditya)."}, {"hi": "हर्षवर्धन और पाल राजा धर्मपाल ने नालंदा महाविहार के रखरखाव के लिए 100 से 200 गाँवों का राजस्व दान दिया था।", "en": "Harshavardhana and Pala king Dharmapala donated revenues of 100 to 200 villages for Nalanda Mahavihara's maintenance."}, {"hi": "चीनी यात्री ह्वेनसांग के नालंदा प्रवास के दौरान वहाँ के कुलपति आचार्य शीलभद्र थे।", "en": "Acharya Silabhadra was the Chancellor of Nalanda during the visit of Chinese traveler Hiuen Tsang."}, {"hi": "नालंदा के विशाल पुस्तकालय क्षेत्र को 'धर्मगंज' कहा जाता था, जिसमें रत्नसागर, रत्नोदधि और रत्नरंजक नामक तीन भवन थे।", "en": "The library complex of Nalanda was known as 'Dharmaganja', comprising three buildings: Ratnasagara, Ratnodadhi, and Ratnaranjaka."}, {"hi": "विक्रमशिला महाविहार की स्थापना पाल वंश के शासक धर्मपाल ने 8वीं-9वीं शताब्दी में की थी।", "en": "Vikramshila Mahavihara was founded by Pala dynasty ruler Dharmapala in the 8th-9th century."}, {"hi": "विक्रमशिला विश्वविद्यालय वर्तमान बिहार के भागलपुर जिले के अंतीचक गाँव में स्थित था।", "en": "Vikramshila University was located at Antichak village in present-day Bhagalpur district of Bihar."}, {"hi": "विक्रमशिला विश्वविद्यालय बौद्ध धर्म की 'वज्रयान' शाखा और तंत्रज्ञान के अध्ययन का मुख्य केंद्र था।", "en": "Vikramshila University was a major center for the study of the Vajrayana branch of Buddhism and Tantrism."}, {"hi": "प्रसिद्ध बौद्ध विद्वान अतीश दीपंकर (श्रीज्ञान) विक्रमशिला विश्वविद्यालय से संबंधित थे, जिन्होंने तिब्बत में बौद्ध धर्म का प्रचार किया।", "en": "Famous Buddhist scholar Atisha Dipankara (Srijnana) was associated with Vikramshila and propagated Buddhism in Tibet."}, {"hi": "ओदंतपुरी (उदंतपुर) विश्वविद्यालय बिहार शरीफ (नालंदा जिला) में स्थित था, जिसकी स्थापना पाल वंश के संस्थापक गोपाल ने की थी।", "en": "Odantapuri (Udantapur) University was situated in Bihar Sharif (Nalanda district) and founded by Gopala, the Pala dynasty founder."}, {"hi": "तुर्क सेनापति इख्तियारुद्दीन मोहम्मद बिन बख्तियार खिलजी ने 12वीं सदी के अंत (लगभग 1193-1200 ई.) में नालंदा, विक्रमशिला और ओदंतपुरी को नष्ट कर दिया।", "en": "Turkic commander Ikhtiyaruddin Muhammad bin Bakhtiyar Khilji destroyed Nalanda, Vikramshila, and Odantapuri in the late 12th century (c. 1193-1200 CE)."}], "examples": [{"q": "नालंदा महाविहार की स्थापना निम्नलिखित में से किस गुप्त शासक ने की थी?", "options": ["चंद्रगुप्त द्वितीय", "समुद्रगुप्त", "कुमारगुप्त प्रथम", "स्कंदगुप्त"], "ans": 2, "why": "नालंदा महाविहार की स्थापना 5वीं शताब्दी में गुप्त शासक कुमारगुप्त प्रथम ने की थी।"}, {"q": "प्रसिद्ध विक्रमशिला विश्वविद्यालय की स्थापना किस पाल राजा द्वारा की गई थी?", "options": ["गोपाल", "धर्मपाल", "देवपाल", "महीपाल प्रथम"], "ans": 1, "why": "विक्रमशिला विश्वविद्यालय की स्थापना भागलपुर में पाल सम्राट धर्मपाल द्वारा की गई थी।"}, {"q": "प्राचीन विश्वविद्यालय तथा उनके संस्थापक के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा/से युग्म सही सुमेलित है/हैं?\n1. नालंदा — कुमारगुप्त प्रथम\n2. विक्रमशिला — धर्मपाल\n3. ओदंतपुरी — गोपाल", "options": ["केवल 1 और 2", "केवल 2 और 3", "केवल 1 और 3", "1, 2 और 3"], "ans": 3, "why": "तीनों युग्म सही सुमेलित हैं: नालंदा (कुमारगुप्त I), विक्रमशिला (धर्मपाल) तथा ओदंतपुरी (गोपाल)।"}, {"q": "प्राचीन बिहार के महाविहारों (नालंदा, विक्रमशिला और ओदंतपुरी) को 12वीं शताब्दी के अंत में किसने नष्ट किया था?", "options": ["महमुद गजनवी", "मोहम्मद गोरी", "बख्तियार खिलजी", "कुतुबुद्दीन ऐबक"], "ans": 2, "why": "बख्तियार खिलजी ने आक्रमण करके नालंदा, विक्रमशिला तथा ओदंतपुरी विश्वविद्यालयों को जलाकर नष्ट कर दिया था।"}, {"q": "विक्रमशिला विश्वविद्यालय वर्तमान बिहार के किस जिले में स्थित था?", "options": ["नालंदा", "भागलपुर", "पटना", "गया"], "ans": 1, "why": "विक्रमशिला विश्वविद्यालय वर्तमान में भागलपुर जिले के अंतीचक स्थान पर स्थित था।"}], "asked_hi": "BPSC की प्रारंभिक परीक्षा में प्राचीन विश्वविद्यालयों के संस्थापक (कुमारगुप्त I, धर्मपाल), उनके स्थान (भागलपुर, बिहारशरीफ), प्रसिद्ध आचार्यों (शीलभद्र, अतीश दीपंकर) और बख्तियार खिलजी द्वारा किए गए विनाश पर बार-बार प्रश्न पूछे जाते हैं।", "asked_en": "BPSC frequently asks questions regarding the founders of ancient universities (Kumaragupta I, Dharmapala), their geographic locations (Bhagalpur, Bihar Sharif), famous scholars (Silabhadra, Atisha Dipankara), and their destruction by Bakhtiyar Khilji.", "confusions_hi": ["नालंदा की स्थापना कुमारगुप्त प्रथम ने की थी, जबकि विक्रमशिला की स्थापना पाल राजा धर्मपाल ने की थी; छात्र बहुधा धर्मपाल को नालंदा का संस्थापक समझ लेते हैं क्योंकि उन्होंने नालंदा को भी गाँव दान दिए थे।", "विक्रमशिला भागलपुर (अंतीचक) में है, जबकि ओदंतपुरी नालंदा जिले के बिहारशरीफ में स्थित है।"], "table": {"head": ["विश्वविद्यालय का नाम", "संस्थापक/संरक्षक", "वर्तमान स्थान", "मुख्य अध्ययन विषय/विशेषता"], "rows": [["नालंदा महाविहार", "कुमारगुप्त प्रथम (संस्थापक), हर्ष व धर्मपाल (संरक्षक)", "बड़गाँव/नालंदा (बिहार)", "महायान बौद्ध धर्म, दर्शन, तर्कशास्त्र, चिकित्सा"], ["विक्रमशिला महाविहार", "धर्मपाल (पाल वंश)", "अंतीचक, भागलपुर (बिहार)", "वज्रयान बौद्ध धर्म, तंत्रशास्त्र, तर्कशास्त्र"], ["ओदंतपुरी महाविहार", "गोपाल (पाल वंश)", "बिहार शरीफ, नालंदा (बिहार)", "बौद्ध शिक्षा व तंत्र ज्ञान"]]}, "trick_hi": "ना-कु, विक-धर्म, ओ-गो (नालंदा = कुमारगुप्त, विक्रमशिला = धर्मपाल, ओदंतपुरी = गोपाल)", "pyqs": []}, {"name_hi": "बिहार-बंगाल का पाल वंश और उसकी संस्कृति", "name_en": "Pala Dynasty of Bihar-Bengal and its Culture", "explain_hi": "पाल वंश की स्थापना 750 ईस्वी में गोपाल द्वारा की गई थी, जब बंगाल में 'मात्स्यन्याय' (अराजकता) की स्थिति थी। यह वंश बिहार और बंगाल के इतिहास में कला, शिक्षा और बौद्ध धर्म के संरक्षण के लिए प्रसिद्ध है। धर्मपाल और देवपाल जैसे महान शासकों ने न केवल साम्राज्य का विस्तार किया, बल्कि विक्रमशिला और ओदंतपुरी जैसे महान विश्वविद्यालयों की नींव भी रखी। पाल शासक बौद्ध धर्म के वज्रयान संप्रदाय के अनुयायी थे और उनके समय में धीमन और विठपाल जैसे कलाकारों ने कांस्य मूर्तिकला को नई ऊंचाइयों पर पहुँचाया। 12वीं शताब्दी के अंत में बख्तियार खिलजी के आक्रमणों और सेन वंश के उदय के साथ इस गौरवशाली युग का अंत हुआ।", "explain_en": "The Pala dynasty was founded by Gopala in 750 AD during a period of anarchy in Bengal known as 'Matsyanyaya'. This dynasty is renowned in the history of Bihar and Bengal for its patronage of art, education, and Buddhism. Great rulers like Dharmapala and Devapala not only expanded the empire but also laid the foundations of great universities like Vikramshila and Odantapuri. The Pala rulers were followers of the Vajrayana sect of Buddhism, and during their reign, artists like Dhiman and Vitpala took bronze sculpture to new heights. This glorious era ended in the late 12th century with the invasions of Bakhtiyar Khilji and the rise of the Sena dynasty.", "facts": [{"hi": "पाल वंश का संस्थापक गोपाल (750-770 ई.) था, जिसे जनता द्वारा चुना गया था।", "en": "The founder of the Pala dynasty was Gopala (750-770 AD), who was elected by the people."}, {"hi": "धर्मपाल ने भागलपुर जिले में प्रसिद्ध विक्रमशिला विश्वविद्यालय की स्थापना की थी।", "en": "Dharmapala founded the famous Vikramshila University in Bhagalpur district."}, {"hi": "देवपाल ने अपनी राजधानी बिहार के मुंगेर में स्थानांतरित की थी।", "en": "Devapala shifted his capital to Munger in Bihar."}, {"hi": "ओदंतपुरी (बिहारशरीफ) महाविहार की स्थापना पाल शासक गोपाल ने की थी।", "en": "The Odantapuri (Bihar Sharif) Mahavihara was established by the Pala ruler Gopala."}, {"hi": "पाल काल के दौरान धीमन और विठपाल कांस्य मूर्तिकला के महान कलाकार थे।", "en": "Dhiman and Vitpala were great artists of bronze sculpture during the Pala period."}, {"hi": "कन्नौज के लिए 'त्रिपक्षीय संघर्ष' पाल, प्रतिहार और राष्ट्रकूटों के बीच हुआ था।", "en": "The 'Tripartite Struggle' for Kannauj took place between the Palas, Pratiharas, and Rashtrakutas."}, {"hi": "इल्तुतमिश बिहार पर अभियान चलाने वाला दिल्ली का पहला सुल्तान था (1225 ई.)।", "en": "Iltutmish was the first Sultan of Delhi to campaign in Bihar (1225 AD)."}, {"hi": "बख्तियार खिलजी ने 1203-04 में सेन वंश के शासक लक्ष्मण सेन की राजधानी नदिया पर हमला किया था।", "en": "Bakhtiyar Khilji attacked Nadia, the capital of Lakshmana Sen of the Sena dynasty, in 1203-04."}, {"hi": "पाल वंश के पतन के बाद बिहार में 'चेरो' जैसे स्थानीय राजवंशों का उदय हुआ।", "en": "After the fall of the Pala dynasty, local dynasties like the 'Chero' emerged in Bihar."}, {"hi": "फिरोज शाह तुगलक ने 1359 में अपने बंगाल अभियान के दौरान बिहार की यात्रा की थी।", "en": "Firoz Shah Tughlaq visited Bihar during his Bengal campaign in 1359."}, {"hi": "1733 में सुजाउद्दीन ने बिहार को बंगाल सूबे में मिला लिया था।", "en": "In 1733, Shujauddin annexed Bihar into the Bengal province."}], "examples": [{"q": "विक्रमशिला विश्वविद्यालय की स्थापना किस पाल शासक ने की थी?", "options": ["गोपाल", "धर्मपाल", "देवपाल", "महिपाल"], "ans": 1, "why": "धर्मपाल ने 8वीं शताब्दी के अंत में भागलपुर में विक्रमशिला विश्वविद्यालय की स्थापना की थी।"}, {"q": "पाल काल में कांस्य मूर्तियों के निर्माण की शैली के लिए कौन प्रसिद्ध थे?", "options": ["धीमन और विठपाल", "अजातशत्रु", "चाणक्य", "उपरोक्त में से कोई नहीं"], "ans": 0, "why": "धीमन और विठपाल पाल कालीन बिहार के प्रसिद्ध मूर्तिकार थे।"}, {"q": "किस सुल्तान ने 1225 ई. में बिहार और बंगाल पर अधिकार करने के लिए अभियान चलाया था?", "options": ["बख्तियार खिलजी", "इल्तुतमिश", "बलवन", "अलाउद्दीन खिलजी"], "ans": 1, "why": "इल्तुतमिश दिल्ली का पहला सुल्तान था जिसने 1225 में बिहार पर सफल सैन्य अभियान किया था।"}, {"q": "पाल वंश के पतन के बाद बिहार में किस स्थानीय राजवंश का प्रभुत्व बढ़ा?", "options": ["मौर्य वंश", "चेरो वंश", "कर्नाट वंश", "उज्जैनिया वंश"], "ans": 1, "why": "पालों के पतन के बाद बिहार के कुछ हिस्सों में चेरो राजवंश एक प्रमुख शक्ति के रूप में उभरा।"}, {"q": "मुंगेर को अपनी राजधानी बनाने वाला पाल शासक कौन था?", "options": ["गोपाल", "धर्मपाल", "देवपाल", "रामपाल"], "ans": 2, "why": "देवपाल ने अपनी प्रशासनिक सुविधा के लिए राजधानी को मुंगेर स्थानांतरित किया था।"}], "asked_hi": "BPSC अक्सर पाल वंश के संस्थापकों, उनके द्वारा स्थापित विश्वविद्यालयों (विक्रमशिला, ओदंतपुरी) और पाल कालीन कला (कांस्य मूर्तिकला) के बारे में प्रश्न पूछता है। त्रिपक्षीय संघर्ष और मध्यकालीन आक्रमणकारियों का क्रम भी महत्वपूर्ण है।", "asked_en": "BPSC frequently asks questions about the founders of the Pala dynasty, the universities they established (Vikramshila, Odantapuri), and Pala art (bronze sculpture). The Tripartite Struggle and the sequence of medieval invaders are also important.", "confusions_hi": ["ओदंतपुरी की स्थापना गोपाल ने की थी, जबकि विक्रमशिला की स्थापना धर्मपाल ने की थी।", "बख्तियार खिलजी ने नालंदा को नष्ट किया था, लेकिन वह पाल शासक नहीं बल्कि एक आक्रमणकारी था।"], "table": {"head": ["शासक", "प्रमुख उपलब्धि", "राजधानी/क्षेत्र"], "rows": [["गोपाल", "पाल वंश का संस्थापक, ओदंतपुरी महाविहार", "बंगाल"], ["धर्मपाल", "विक्रमशिला विश्वविद्यालय, त्रिपक्षीय संघर्ष", "कन्नौज पर प्रभाव"], ["देवपाल", "मुंगेर को राजधानी बनाया, बौद्ध धर्म का विस्तार", "मुंगेर (बिहार)"], ["लक्ष्मण सेन", "सेन वंश का शासक (पालों के बाद)", "नदिया (बंगाल)"]]}, "trick_hi": "गोपाल ने 'ओढ़ा' (ओदंतपुरी), धर्म ने 'विक्रम' (विक्रमशिला) को पाला।", "pyqs": [{"id": "bpsc-cce-71-pre:86", "label": "BPSC 71वीं प्रारंभिक (13 सितंबर 2025), प्रश्न 86", "topic": "प्राचीन भारत", "q": "सूची-I को सूची-II के साथ सुमेलित कीजिए।\nसूची-I\nप्राचीन भारत के स्थल\nसूची-II\nवर्तमान में किस राज्य में\na) कर्णसुवर्ण — 1) महाराष्ट्र\nb) प्राग्ज्योतिष — 2) गुजरात\nc) गिरनार — 3) पश्चिम बंगाल\nd) प्रतिष्ठान — 4) असम\nनीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए :", "options": ["a-4, b-3, c-1, d-2", "a-3, b-4, c-2, d-1", "a-3, b-2, c-4, d-1", "a-4, b-2, c-1, d-3"], "ans": [1], "why_hi": "कर्णसुवर्ण पश्चिम बंगाल में स्थित है, जो पाल और सेन काल के दौरान एक महत्वपूर्ण राजनीतिक केंद्र था।"}]}], "summary_hi": ["चंद्रगुप्त प्रथम ने 319-320 ईस्वी में गुप्त संवत की शुरुआत की और महाराजाधिराज की उपाधि धारण की।", "समुद्रगुप्त को 'भारत का नेपोलियन' कहा जाता है, जिसकी विजयों का उल्लेख हरिषेण द्वारा रचित प्रयाग प्रशस्ति में मिलता है।", "चंद्रगुप्त द्वितीय (विक्रमादित्य) के शासनकाल में प्रसिद्ध चीनी यात्री फाह्यान भारत आया था।", "प्राचीन भारत के महान खगोलशास्त्री आर्यभट्ट का संबंध कुसुमपुर (पाटलिपुत्र) से था, जिन्होंने 'आर्यभट्टीय' की रचना की।", "वराहमिहिर ने गुप्त काल के दौरान 'बृहत्संहिता' और 'पंचसिद्धांतिका' नामक ग्रंथों की रचना की।", "सम्राट हर्षवर्धन के शासनकाल में चीनी यात्री ह्वेनसांग भारत आया और उसने नालंदा विश्वविद्यालय में अध्ययन किया।", "नालंदा महाविहार की स्थापना 5वीं शताब्दी में गुप्त शासक कुमारगुप्त प्रथम (महेंद्रादित्य) ने की थी।", "नालंदा विश्वविद्यालय को 12वीं शताब्दी के अंत में तुर्क आक्रमणकारी इख्तियारुद्दीन मुहम्मद बिन बख्तियार खिलजी ने नष्ट कर दिया था।", "बिहार के भागलपुर में स्थित प्रसिद्ध 'विक्रमशिला विश्वविद्यालय' की स्थापना पाल शासक धर्मपाल ने की थी।", "बिहार शरीफ में 'ओदंतपुरी महाविहार' की स्थापना पाल वंश के संस्थापक गोपाल ने की थी।", "सुवर्णद्वीप के शासक बालपुत्रदेव के अनुरोध पर पाल शासक देवपाल ने नालंदा महाविहार के लिए 5 गाँव दान में दिए थे।"], "summary_en": ["Chandragupta I started the Gupta Era in 319-320 AD and assumed the title of Maharajadhiraja.", "Samudragupta, known as the 'Napoleon of India', is praised in the Prayag Prashasti composed by Harisena.", "The famous Chinese traveler Fa-Hien visited India during the reign of Chandragupta II (Vikramaditya).", "The great ancient astronomer Aryabhata belonged to Kusumpura (Pataliputra) and authored 'Aryabhatiya'.", "Varahamihira composed famous treatises like 'Brihat Samhita' and 'Panchasiddhantika' during the Gupta era.", "Chinese traveler Hiuen Tsang visited India during Harshavardhana's reign and studied at Nalanda University.", "Nalanda Mahavihara was founded in the 5th century AD by the Gupta ruler Kumaragupta I (Mahendraditya).", "Nalanda Mahavihara was destroyed at the end of the 12th century by the Turkic invader Bakhtiyar Khilji.", "The famous Vikramshila University in Bhagalpur, Bihar was founded by the Pala king Dharmapala.", "Odantapuri Mahavihara at Bihar Sharif was established by Gopala, the founder of the Pala dynasty.", "Pala ruler Devapala granted 5 villages for the upkeep of Nalanda University at the request of Balaputradeva of Suvarnadvipa."]}

← मौर्य साम्राज्यमध्यकालीन भारत और बिहार: सल्तनत से शेरशाह →