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BPSC CCEइतिहास और राष्ट्रीय आंदोलनबिहार के जनजातीय और किसान आंदोलन
Tribal and Peasant Movements of Bihar
यह अध्याय बीपीएससी प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह बिहार में ब्रिटिश शासन के खिलाफ प्रतिरोध की नींव को दर्शाता है। इससे हर साल जनजातीय विद्रोहों और किसान सभाओं से संबंधित प्रश्न पूछे जाते हैं।
बिहार के प्रमुख जनजातीय विद्रोह
बिहार में ब्रिटिश शासन और जमींदारों के शोषण के खिलाफ जनजातियों ने कई सशस्त्र विद्रोह किए। तिलका मांझी ने 1784 में भागलपुर क्षेत्र में अंग्रेजों को चुनौती दी और पहले आदिवासी शहीद बने। कोल विद्रोह (1831-32) छोटानागपुर क्षेत्र में बाहरी लोगों (दिक्कुओं) के हस्तक्षेप के विरुद्ध था। संथाल विद्रोह (1855) सिद्धू और कान्हू के नेतृत्व में हुआ, जिसे 'हूल' कहा जाता है और यह ब्रिटिश सत्ता के खिलाफ एक बड़ी चुनौती थी। बिरसा मुंडा का 'उलगुलान' (1899-1900) न केवल राजनीतिक था, बल्कि धार्मिक और सामाजिक सुधार का भी आंदोलन था।
मुख्य तथ्य
- तिलका मांझी (जबरह पहाड़िया) ने 1784 में भागलपुर के कलेक्टर ऑगस्टस क्लीवलैंड की तीर मारकर हत्या कर दी थी।
- तिलका मांझी को 1785 में भागलपुर में एक बरगद के पेड़ पर लटकाकर फांसी दी गई थी।
- कोल विद्रोह (1831-32) का नेतृत्व बुद्धू भगत, झिंदराय मानकी और सुई मुंडा ने किया था।
- संथाल विद्रोह 30 जून 1855 को भोगनाडीह गांव से शुरू हुआ था, जिसे 'हूल' कहा जाता है।
- संथाल विद्रोह के मुख्य नेता सिद्धू, कान्हू, चाँद और भैरव चार भाई थे।
- संथालों ने अपनी बहनों फूलो और झानो के साथ मिलकर अंग्रेजों का मुकाबला किया।
- संथाल विद्रोह के दमन के लिए मेजर जनरल लॉयड को भेजा गया था।
- संथाल विद्रोह के बाद 1855 में 'संथाल परगना' को एक नॉन-रेगुलेशन जिला घोषित किया गया।
- बिरसा मुंडा का जन्म 15 नवंबर 1875 को रांची के उलिहातू गांव में हुआ था।
- बिरसा मुंडा ने 'सिंहबोंगा' (एक ईश्वर) की पूजा का उपदेश दिया और खुद को भगवान का दूत घोषित किया।
- मुंडा विद्रोह को 'उलगुलान' (महान हलचल) के नाम से जाना जाता है।
- बिरसा मुंडा की मृत्यु 9 जून 1900 को रांची जेल में हैजा (Cholera) के कारण हुई थी।
- मुंडा विद्रोह के परिणामस्वरूप 1908 में छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम (CNT Act) पारित हुआ।
- बिरसा मुंडा को 'धरती आबा' (जगत पिता) के नाम से भी जाना जाता है।
तालिका
- विद्रोह: तिलका आंदोलन · वर्ष: 1784-85 · प्रमुख नेता: तिलका मांझी · क्षेत्र: भागलपुर/राजमहल
- विद्रोह: कोल विद्रोह · वर्ष: 1831-32 · प्रमुख नेता: बुद्धू भगत · क्षेत्र: छोटानागपुर
- विद्रोह: संथाल हूल · वर्ष: 1855-56 · प्रमुख नेता: सिद्धू-कान्हू · क्षेत्र: दामिन-इ-कोह
- विद्रोह: मुंडा उलगुलान · वर्ष: 1899-1900 · प्रमुख नेता: बिरसा मुंडा · क्षेत्र: रांची/खूंटी
अभ्यास प्रश्न (हल सहित)
- प्रश्न 1: संथाल विद्रोह का नेतृत्व किसने किया था?
(क) सिद्धू-कान्हू (ख) बिरसा मुंडा (ग) बुद्धू भगत (घ) तिलका मांझी
- ✔ उत्तर: (क) सिद्धू-कान्हू — सिद्धू और कान्हू संथाल विद्रोह के प्रमुख नेता थे।
- प्रश्न 2: 'उलगुलान' विद्रोह किससे जुड़ा था?
(क) संथाल (ख) कोल (ग) मुंडा (घ) चेरो
- ✔ उत्तर: (ग) मुंडा — बिरसा मुंडा के विद्रोह को उलगुलान कहा जाता है।
- प्रश्न 3: 1831 में बुद्धू भगत के नेतृत्व में कोल विद्रोह किस क्षेत्र में हुआ?
(क) कच्छ (ख) सिंहभूम (ग) पश्चिमी घाट (घ) सतारा
- ✔ उत्तर: (ख) सिंहभूम — कोल विद्रोह छोटानागपुर के सिंहभूम और पलामू क्षेत्र में हुआ था।
- प्रश्न 4: निम्नलिखित में से कौन सा युग्म सही सुमेलित नहीं है?
(क) संथाल-1855 (ख) कोल-1831 (ग) मुंडा-1899 (घ) तिलका मांझी-1810
- ✔ उत्तर: (घ) तिलका मांझी-1810 — तिलका मांझी का विद्रोह 1784-85 में हुआ था।
- प्रश्न 5: छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम (CNT Act) कब पारित किया गया?
(क) 1905 (ख) 1908 (ग) 1911 (घ) 1917
- ✔ उत्तर: (ख) 1908 — मुंडा विद्रोह के बाद 1908 में यह अधिनियम पारित हुआ।
परीक्षा में कैसे आता है
बीपीएससी अक्सर विद्रोह के वर्ष, नेतृत्वकर्ता और उनके द्वारा मारे गए ब्रिटिश अधिकारियों के नाम पूछता है। मिलान करने वाले प्रश्न (Match the following) बहुत आम हैं।
इनमें भ्रम न करें
- ✘ छात्र अक्सर संथाल विद्रोह (1855) और मुंडा विद्रोह (1899) के वर्षों में भ्रमित हो जाते हैं।
- ✘ बुद्धू भगत (कोल) और बिरसा मुंडा के नेतृत्व वाले क्षेत्रों को लेकर भी भ्रम होता है।
💡 सिद्धू-कान्हू ने 55 में हूल किया, बिरसा ने 99 में उलगुलान मचाया।
ताना भगत और सरदारी आंदोलन
सरदारी आंदोलन (1858-1895) छोटानागपुर क्षेत्र के मुंडा और ओरांव जनजातीय सरदारों द्वारा ज़मींदारों के उत्पीड़न, बेगार प्रथा (मुफ्त श्रम) और पारंपरिक खूंटकट्टी अधिकारों के हनन के खिलाफ चलाया गया एक दीर्घकालिक संघर्ष था। यह आंदोलन आगे चलकर बिरसा मुंडा के उलगुलान की आधारशिला बना। इसके बाद अप्रैल 1914 में जातरा भगत के नेतृत्व में ताना भगत आंदोलन की शुरुआत हुई। प्रारंभ में यह ओरांव जनजाति के बीच मांस-मदिरा के त्याग और नैतिक आचरण पर आधारित एक धार्मिक-सामाजिक सुधार आंदोलन था। जल्द ही इसने राजनीतिक और आर्थिक रूप धारण कर लिया और ब्रिटिश सरकार तथा ज़मींदारों को लगान व चौकीदारी कर देने से मना कर दिया। ताना भगत आंदोलन जनजातियों का पहला अहिंसक सत्याग्रह था जो महात्मा गांधी के विचारों से अत्यधिक प्रभावित हुआ और असहयोग आंदोलन का प्रमुख अंग बना।
मुख्य तथ्य
- सरदारी आंदोलन (1858-1895) छोटानागपुर में ओरांव और मुंडा सरदारों द्वारा भूमि अधिकारों की रक्षा हेतु चलाया गया था।
- सरदारी आंदोलन का मुख्य लक्ष्य बेगार प्रथा (मुफ्त श्रम) का अंत करना और खूंटकट्टी व्यवस्था को बहाल करना था।
- ताना भगत आंदोलन की शुरुआत अप्रैल 1914 में छोटानागपुर (गुमला-रांची क्षेत्र) में ओरांव जनजाति द्वारा की गई थी।
- ताना भगत आंदोलन के मुख्य प्रणेता और संस्थापक जातरा भगत (जातरा ओरांव) थे।
- जातरा भगत के अलावा तुरिया भगत, सिबू भगत और बलराम भगत इस आंदोलन के प्रमुख नेता थे।
- देवमनिया नामक ओरांव महिला ने ताना भगत आंदोलन के धार्मिक एवं सामाजिक सुधारों का नेतृत्व किया था।
- ताना भगत आंदोलन को आदिवासियों द्वारा चलाया गया पहला पूर्णतः अहिंसक सत्याग्रह आंदोलन माना जाता है।
- ताना भगतों ने अंग्रेजों और ज़मींदारों को मालगुजारी (लगान) तथा चौकीदारी कर देने से पूर्णतः इंकार कर दिया था।
- 1920 के असहयोग आंदोलन के दौरान ताना भगतों ने महात्मा गांधी का पूर्ण समर्थन किया और खादी को अपनाया।
- ताना भगतों ने 1922 में आयोजित गया कांग्रेस अधिवेशन में तिरंगे झंडे के साथ बड़ी संख्या में भाग लिया था।
तालिका
- आंदोलन का नाम: सरदारी आंदोलन · समय अवधि: 1858 - 1895 ई. · मुख्य नेतृत्वकर्ता: मुंडा एवं ओरांव सरदार · संबद्ध जनजाति: मुंडा और ओरांव · मुख्य स्वरूप एवं विशेषता: बेगार प्रथा का विरोध, खूंटकट्टी अधिकारों की वापसी; मुंडा उलगुलान की पूर्व पीठिका।
- आंदोलन का नाम: ताना भगत आंदोलन · समय अवधि: 1914 ई. से प्रारंभ · मुख्य नेतृत्वकर्ता: जातरा भगत, तुरिया भगत, सिबू भगत · संबद्ध जनजाति: ओरांव जनजाति · मुख्य स्वरूप एवं विशेषता: धार्मिक सुधार से राजनीतिक सत्याग्रह; अहिंसक, गांधीवादी विचार, कर-अदायगी से इंकार।
अभ्यास प्रश्न (हल सहित)
- प्रश्न 6: ताना भगत आंदोलन किस वर्ष प्रारंभ हुआ था?
(क) 1905 ई. (ख) 1914 ई. (ग) 1920 ई. (घ) 1930 ई.
- ✔ उत्तर: (ख) 1914 ई. — ताना भगत आंदोलन की शुरुआत अप्रैल 1914 ई. में छोटानागपुर क्षेत्र में जातरा भगत के नेतृत्व में हुई थी।
- प्रश्न 7: ताना भगत आंदोलन के मुख्य नेता कौन थे?
(क) सिद्धू और कान्हू (ख) बिरसा मुंडा (ग) जातरा भगत (घ) तिलका मांझी
- ✔ उत्तर: (ग) जातरा भगत — जातरा भगत (जातरा ओरांव) ताना भगत आंदोलन के संस्थापक एवं मुख्य प्रणेता थे।
- प्रश्न 8: निम्नलिखित में से कौन-सा आंदोलन मुंडा उलगुलान (1899-1900) की पूर्व पीठिका के रूप में जाना जाता है?
(क) कोल विद्रोह (ख) सरदारी आंदोलन (ग) संथाल हुल (घ) तमाड़ विद्रोह
- ✔ उत्तर: (ख) सरदारी आंदोलन — 1858 से 1895 तक चला सरदारी आंदोलन बिरसा मुंडा के उलगुलान की मुख्य पृष्ठभूमि और पूर्व पीठिका बना।
- प्रश्न 9: 1922 के गया कांग्रेस अधिवेशन में किस जनजातीय समूह ने अहिंसक सत्याग्रह का समर्थन करते हुए प्रमुखता से भाग लिया?
(क) संथाल (ख) कोल (ग) ताना भगत (घ) चेरो
- ✔ उत्तर: (ग) ताना भगत — ताना भगतों ने 1922 के गया कांग्रेस अधिवेशन में महात्मा गांधी के प्रति निष्ठा व्यक्त करते हुए भाग लिया था।
- प्रश्न 10: ताना भगत आंदोलन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन असत्य है?
(क) यह मुख्य रूप से ओरांव जनजाति से संबंधित था। (ख) यह आदिवासियों का एक अहिंसक आंदोलन था। (ग) इन्होंने अंग्रेजों को चौकीदारी कर देने का समर्थन किया। (घ) इन्होंने असहयोग आंदोलन में सक्रिय रूप से भाग लिया।
- ✔ उत्तर: (ग) इन्होंने अंग्रेजों को चौकीदारी कर देने का समर्थन किया। — ताना भगतों ने अंग्रेजों और ज़मींदारों को लगान तथा चौकीदारी कर देने से साफ इंकार कर दिया था।
परीक्षा में कैसे आता है
BPSC प्रीलिम्स में ताना भगत आंदोलन से संबंधित प्रश्न इसके वर्ष (1914), संस्थापक (जातरा भगत), संबंधित जनजाति (ओरांव) और राष्ट्रीय आंदोलन (असहयोग आंदोलन व गया कांग्रेस 1922) से जुड़ाव पर सीधे पूछे जाते हैं।
इनमें भ्रम न करें
- ✘ जातरा भगत (ताना भगत आंदोलन, 1914) और बिरसा मुंडा (मुंडा उलगुलान, 1899-1900) के नेतृत्व वाले आंदोलनों में भ्रमित न हों; ताना भगत आंदोलन पूर्णतः अहिंसक एवं गांधीवादी था।
- ✘ सरदारी आंदोलन (1858-1895) और ताना भगत आंदोलन (1914) अलग हैं; सरदारी आंदोलन कानूनी और हिंसक संघर्ष था जबकि ताना भगत एक अहिंसक सत्याग्रह था।
💡 ट्रिक: '14 में जातरा ने ताना कसा' -> 1914 में जातरा भगत ने ताना भगत आंदोलन शुरू किया।
चंपारण में नील की खेती और तिनकठिया प्रणाली
चंपारण में यूरोपीय नील बागान मालिकों द्वारा किसानों पर 'तिनकठिया' पद्धति थोपी गई थी, जिसके तहत प्रति बीघा (20 कट्ठा) में से 3 कट्ठा जमीन पर नील की खेती करना अनिवार्य था। 19वीं सदी के अंत में जर्मनी में कृत्रिम रंगों (Synthetic Dyes) के विकास के कारण नील की मांग गिर गई, जिससे बागान मालिकों ने किसानों को अनुबंध से मुक्त करने के बदले भारी अवैध लगान (शराहबेशी और तवान) वसूला। राजकुमार शुक्ल के विशेष आग्रह पर महात्मा गांधी 1917 में चंपारण पहुँचे, जो भारत में उनका पहला सविनय अवज्ञा आंदोलन बना। गांधीजी के दबाव में सरकार ने 'चंपारण एग्रेरियन कमेटी' का गठन किया, जिसमें गांधीजी भी एक सदस्य थे। इस समिति की सिफारिश पर तिनकठिया प्रणाली को समाप्त कर दिया गया और बागान मालिक अवैध वसूली का 25% हिस्सा वापस करने पर सहमत हुए। यह आंदोलन सफल रहा और इसी दौरान रवींद्रनाथ टैगोर ने गांधीजी को 'महात्मा' की उपाधि दी थी।
मुख्य तथ्य
- तिनकठिया प्रणाली के तहत किसानों को अपनी भूमि के 3/20 भाग पर नील उगाना पड़ता था।
- राजकुमार शुक्ल ने 1916 के लखनऊ कांग्रेस अधिवेशन में गांधीजी को चंपारण आने का निमंत्रण दिया था।
- महात्मा गांधी 15 अप्रैल 1917 को पहली बार मोतिहारी (चंपारण) पहुँचे थे।
- चंपारण सत्याग्रह के दौरान गांधीजी के प्रमुख सहयोगी डॉ. राजेंद्र प्रसाद, अनुग्रह नारायण सिंह और जे.बी. कृपलानी थे।
- चंपारण एग्रेरियन कमेटी के अध्यक्ष एफ.जी. स्लाई (F.G. Sly) थे।
- बागान मालिक अवैध रूप से वसूले गए धन का 25% वापस करने के लिए सहमत हुए थे।
- एन.जी. रंगा ने गांधीजी के चंपारण सत्याग्रह का विरोध किया था।
- ब्रजकिशोर प्रसाद और मजहरुल हक भी इस आंदोलन में गांधीजी के साथ सक्रिय थे।
- गांधीजी ने चंपारण में अपनी जांच के दौरान 'भीतिहरवा' और 'बड़हरवा लखनसेन' में स्कूल स्थापित किए।
- यह भारत में गांधीजी द्वारा शुरू किया गया पहला वास्तविक किसान सत्याग्रह था।
तालिका
- प्रमुख व्यक्ति: राजकुमार शुक्ल · भूमिका/महत्व: गांधीजी को चंपारण आमंत्रित करने वाले स्थानीय किसान नेता
- प्रमुख व्यक्ति: एफ.जी. स्लाई · भूमिका/महत्व: चंपारण एग्रेरियन कमेटी के अध्यक्ष
- प्रमुख व्यक्ति: डॉ. राजेंद्र प्रसाद · भूमिका/महत्व: गांधीजी के मुख्य सहयोगी और बिहार के नेता
- प्रमुख व्यक्ति: एन.जी. रंगा · भूमिका/महत्व: चंपारण सत्याग्रह के आलोचक/विरोधी
- प्रमुख व्यक्ति: रवींद्रनाथ टैगोर · भूमिका/महत्व: गांधीजी को 'महात्मा' की उपाधि देने वाले
अभ्यास प्रश्न (हल सहित)
- प्रश्न 11: चंपारण में 'तिनकठिया' प्रथा का क्या तात्पर्य था?
(क) 3/20 भू-भाग पर नील की खेती करना (ख) 3/19 भू-भाग पर नील की खेती करना (ग) 3/18 भू-भाग पर नील की खेती करना (घ) उपरोक्त में से कोई नहीं
- ✔ उत्तर: (क) 3/20 भू-भाग पर नील की खेती करना — तिनकठिया का अर्थ है प्रति बीघा (20 कट्ठा) में 3 कट्ठा पर नील की खेती।
- प्रश्न 12: किसने महात्मा गांधी को चंपारण आने और किसानों की समस्याओं की जांच करने के लिए राजी किया था?
(क) राजेंद्र प्रसाद (ख) राजकुमार शुक्ल (ग) मजहरुल हक (घ) महादेव देसाई
- ✔ उत्तर: (ख) राजकुमार शुक्ल — राजकुमार शुक्ल ने 1916 के लखनऊ अधिवेशन में गांधीजी को आमंत्रित किया था।
- प्रश्न 13: चंपारण सत्याग्रह के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन असत्य है?
(क) यह गांधीजी का भारत में पहला सत्याग्रह था (ख) यह तिनकठिया प्रणाली के विरुद्ध था (ग) एन.जी. रंगा ने इसका समर्थन किया था (घ) रवींद्रनाथ टैगोर ने गांधीजी को 'महात्मा' की उपाधि दी
- ✔ उत्तर: (ग) एन.जी. रंगा ने इसका समर्थन किया था — एन.जी. रंगा ने चंपारण सत्याग्रह का विरोध किया था, समर्थन नहीं।
- प्रश्न 14: चंपारण कृषि जांच समिति (Champaran Agrarian Committee) के अध्यक्ष कौन थे?
(क) महात्मा गांधी (ख) एफ.जी. स्लाई (ग) एल.सी. एडेमी (घ) डी.जे. रीड
- ✔ उत्तर: (ख) एफ.जी. स्लाई — एफ.जी. स्लाई इस समिति के अध्यक्ष थे, जबकि गांधीजी इसके एक सदस्य थे।
- प्रश्न 15: चंपारण सत्याग्रह के सफल समापन पर बागान मालिक अवैध वसूली का कितना प्रतिशत वापस करने पर सहमत हुए?
(क) 20 प्रतिशत (ख) 25 प्रतिशत (ग) 50 प्रतिशत (घ) 100 प्रतिशत
- ✔ उत्तर: (ख) 25 प्रतिशत — गांधीजी के समझौते के अनुसार बागान मालिक 25% राशि लौटाने को तैयार हुए थे।
📜 असली पिछले वर्ष के प्रश्न (BPSC)
- [BPSC 71वीं प्रारंभिक (13 सितंबर 2025), प्रश्न 100] सूची-I को सूची-II के साथ सुमेलित कीजिए।
सूची-I
घटना/संगठन
a) चंपारन सत्याग्रह
b) आज़ाद दस्ता
c) 1940 में बिहार में व्यक्तिगत सत्याग्रह
d) किसान सभा बिहार
सूची-II
सम्बन्धित व्यक्ति
1) जयप्रकाश नारायण
2) श्याम नारायण सिंह
3) सहजानन्द सरस्वती
4) डॉ. राजेन्द्र प्रसाद
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए :
(क) a-4, b-2, c-3, d-1 (ख) a-2, b-3, c-1, d-4 (ग) a-1, b-4, c-3, d-2 (घ) a-4, b-1, c-2, d-3
- ✔ आधिकारिक उत्तर: (घ) a-4, b-1, c-2, d-3 — इस प्रश्न में चंपारण सत्याग्रह को डॉ. राजेंद्र प्रसाद से सुमेलित किया गया है, जो गांधीजी के प्रमुख सहयोगी के रूप में वहां उपस्थित थे।
परीक्षा में कैसे आता है
BPSC में इस विषय से अक्सर प्रश्न पूछे जाते हैं, विशेषकर तिनकठिया का अनुपात (3/20), राजकुमार शुक्ल का नाम, गांधीजी के सहयोगियों की सूची और चंपारण एग्रेरियन कमेटी के बारे में।
इनमें भ्रम न करें
- ✘ छात्र अक्सर 25% और 50% रिफंड के बीच भ्रमित होते हैं; सही उत्तर 25% है।
- ✘ गांधीजी समिति के अध्यक्ष नहीं बल्कि केवल एक सदस्य थे (अध्यक्ष एफ.जी. स्लाई थे)।
- ✘ राजकुमार शुक्ल ने गांधीजी को लखनऊ में आमंत्रित किया था, न कि चंपारण में।
💡 राजकुमार (शुक्ल) ने 16 (1916) में गांधी को 3/20 नील के लिए बुलाया।
किसान सभा: स्वामी सहजानंद सरस्वती और बकाश्त आंदोलन
बिहार में किसान आंदोलन का उदय जमींदारी शोषण और किसानों की बेदखली के खिलाफ हुआ था। स्वामी सहजानंद सरस्वती ने 1929 में सोनपुर मेले के दौरान बिहार प्रांतीय किसान सभा (BPKS) की स्थापना की, जिसने किसानों को एक संगठित मंच प्रदान किया। इस आंदोलन का मुख्य केंद्र 'बकाश्त' भूमि का मुद्दा था, जहाँ जमींदार उन जमीनों से किसानों को बेदखल कर रहे थे जिन्हें किसान स्वयं जोतते थे। 1936 में लखनऊ में अखिल भारतीय किसान सभा का गठन हुआ, जिसने इस आंदोलन को राष्ट्रीय स्तर पर पहुँचाया। मुंगेर का बरहिया टाल क्षेत्र बकाश्त संघर्ष का सबसे प्रमुख केंद्र बना। स्वामी जी ने 'लोक संग्रह' जैसे समाचार पत्रों के माध्यम से किसानों की पीड़ा को जनता के सामने रखा।
मुख्य तथ्य
- बिहार प्रांतीय किसान सभा (BPKS) की स्थापना नवंबर 1929 में सोनपुर मेले में हुई थी।
- स्वामी सहजानंद सरस्वती BPKS के प्रथम अध्यक्ष और श्री कृष्ण सिंह प्रथम सचिव थे।
- अखिल भारतीय किसान सभा (AIKS) का गठन 11 अप्रैल 1936 को लखनऊ में हुआ था।
- स्वामी सहजानंद AIKS के अध्यक्ष और एन.जी. रंगा इसके महासचिव चुने गए थे।
- बकाश्त आंदोलन जमींदारों द्वारा किसानों की स्वयं-जोत वाली भूमि (बकाश्त) से बेदखली के विरुद्ध था।
- मुंगेर के बरहिया टाल में बकाश्त आंदोलन का नेतृत्व कार्यानंद शर्मा ने किया था।
- बिहार प्रांतीय किसान सभा का तीसरा सम्मेलन हाजीपुर में स्वामी सहजानंद की अध्यक्षता में हुआ था।
- 1940 में रामगढ़ में स्वामी जी ने सुभाष चंद्र बोस के साथ मिलकर 'अखिल भारतीय समझौता विरोधी सम्मेलन' आयोजित किया।
- भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान गिरफ्तारी के बाद, 28 अप्रैल को 'अखिल भारतीय स्वामी सहजानंद दिवस' के रूप में मनाया जाता है।
तालिका
- संस्था/आंदोलन: बिहार प्रांतीय किसान सभा · वर्ष: 1929 · स्थान: सोनपुर · प्रमुख व्यक्तित्व: स्वामी सहजानंद सरस्वती
- संस्था/आंदोलन: अखिल भारतीय किसान सभा · वर्ष: 1936 · स्थान: लखनऊ · प्रमुख व्यक्तित्व: स्वामी सहजानंद, एन.जी. रंगा
- संस्था/आंदोलन: बकाश्त आंदोलन · वर्ष: 1930 के दशक · स्थान: मुंगेर (बरहिया टाल) · प्रमुख व्यक्तित्व: कार्यानंद शर्मा
- संस्था/आंदोलन: समझौता विरोधी सम्मेलन · वर्ष: 1940 · स्थान: रामगढ़ · प्रमुख व्यक्तित्व: स्वामी सहजानंद, सुभाष चंद्र बोस
अभ्यास प्रश्न (हल सहित)
- प्रश्न 16: बिहार प्रांतीय किसान सभा का गठन किस वर्ष और किस स्थान पर हुआ था?
(क) 1928, पटना (ख) 1929, सोनपुर (ग) 1936, लखनऊ (घ) 1930, मुंगेर
- ✔ उत्तर: (ख) 1929, सोनपुर — बिहार प्रांतीय किसान सभा की स्थापना नवंबर 1929 में सोनपुर मेले के दौरान हुई थी।
- प्रश्न 17: अखिल भारतीय किसान सभा (1936) के प्रथम महासचिव कौन थे?
(क) स्वामी सहजानंद सरस्वती (ख) एन.जी. रंगा (ग) कार्यानंद शर्मा (घ) इन्दुलाल याज्ञिक
- ✔ उत्तर: (ख) एन.जी. रंगा — 1936 में लखनऊ में गठित अखिल भारतीय किसान सभा के महासचिव एन.जी. रंगा थे, जबकि स्वामी सहजानंद अध्यक्ष थे।
- प्रश्न 18: मुंगेर के बरहिया टाल में 'बकाश्त आंदोलन' का मुख्य उद्देश्य क्या था?
(क) नील की खेती का विरोध (ख) जमींदारों द्वारा बेदखल की गई भूमि की वापसी (ग) लगान में वृद्धि की मांग (घ) नमक कानून का उल्लंघन
- ✔ उत्तर: (ख) जमींदारों द्वारा बेदखल की गई भूमि की वापसी — बकाश्त आंदोलन का मुख्य उद्देश्य जमींदारों द्वारा छीनी गई स्वयं-जोत वाली भूमि (बकाश्त) को वापस पाना था।
- प्रश्न 19: निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही है?
1. बिहार प्रांतीय किसान सभा के प्रथम सचिव श्री कृष्ण सिंह थे।
2. बकाश्त आंदोलन का नेतृत्व मुंगेर में कार्यानंद शर्मा ने किया था।
(क) केवल 1 (ख) केवल 2 (ग) 1 और 2 दोनों (घ) इनमें से कोई नहीं
- ✔ उत्तर: (ग) 1 और 2 दोनों — दोनों कथन सही हैं; श्री कृष्ण सिंह प्रथम सचिव थे और कार्यानंद शर्मा ने मुंगेर में नेतृत्व किया था।
📜 असली पिछले वर्ष के प्रश्न (BPSC)
- [BPSC 71वीं प्रारंभिक (13 सितंबर 2025), प्रश्न 83] बिहार में किसान सभा का प्रमुख नेता कौन था?
(क) राज कुमार शुक्ला (ख) सहजानन्द सरस्वती (ग) आचार्य नरेन्द्र देव (घ) बाबा रामचन्द्र
- ✔ आधिकारिक उत्तर: (ख) सहजानन्द सरस्वती — स्वामी सहजानंद सरस्वती बिहार में किसान सभा के सबसे प्रमुख नेता थे और उन्होंने ही 1929 में प्रांतीय सभा की स्थापना की थी।
- [BPSC 70वीं प्रारंभिक (13 दिसंबर 2024), प्रश्न 43] किसानों द्वारा विपत्तियों का सामना करने को उजागर करने के लिए सहजानंद सरस्वती ने किस समाचार पत्र को प्रकाशित किया ?
(क) द ब्रोकेन विंग (ख) लोक संग्रह (ग) निर्बल सेवक (घ) इण्डियन नेशन
- ✔ आधिकारिक उत्तर: (ख) लोक संग्रह
परीक्षा में कैसे आता है
BPSC में इस विषय से अक्सर बिहार प्रांतीय किसान सभा की स्थापना की तिथि, इसके प्रथम अध्यक्ष (स्वामी सहजानंद) और सचिव (श्री कृष्ण सिंह) के बारे में पूछा जाता है। बकाश्त आंदोलन का अर्थ और इसके प्रमुख केंद्र (मुंगेर/बरहिया टाल) से संबंधित प्रश्न भी बार-बार दोहराए जाते हैं।
इनमें भ्रम न करें
- ✘ 1929 (बिहार प्रांतीय किसान सभा) और 1936 (अखिल भारतीय किसान सभा) के वर्षों में भ्रम।
- ✘ बकाश्त भूमि का अर्थ: यह वह भूमि थी जिसे किसान जोतते थे लेकिन जमींदार उस पर अधिकार जताते थे।
💡 सोनपुर में '29' में सहजानंद ने 'प्रांतीय' बिगुल फूँका और '36' में लखनऊ जाकर 'अखिल भारतीय' नेता बने।
आंदोलनों के परिणाम और नेताओं की रचनाएँ
बिहार के जनजातीय और किसान आंदोलनों ने न केवल ब्रिटिश सत्ता को चुनौती दी, बल्कि दूरगामी कानूनी और सामाजिक बदलाव भी लाए। संथाल विद्रोह के बाद संथाल परगना जिला बना, जबकि बिरसा मुंडा के उलगुलान के परिणामस्वरूप 1908 का छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम (CNT Act) पारित हुआ। किसान आंदोलनों ने चंपारण कृषि अधिनियम (1918) और बकाश्त भूमि की वापसी जैसे महत्वपूर्ण सुधारों का मार्ग प्रशस्त किया। इन आंदोलनों के वैचारिक आधार को मजबूत करने में स्वामी सहजानंद सरस्वती और राहुल सांकृत्यायन जैसे नेताओं की लेखनी का बड़ा योगदान रहा। उनकी पुस्तकों और पत्रिकाओं ने किसानों और आदिवासियों में राजनीतिक चेतना जगाई। 'हुंकार' जैसी पत्रिकाओं ने पटना से किसान संघर्षों की आवाज को बुलंद किया।
मुख्य तथ्य
- 1855 के संथाल विद्रोह के बाद संथाल परगना को एक अलग गैर-विनियमन जिला बनाया गया।
- बिरसा मुंडा आंदोलन के परिणामस्वरूप 11 नवंबर 1908 को छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम (CNT Act) पारित हुआ।
- चंपारण सत्याग्रह के बाद 1918 में 'चंपारण कृषि अधिनियम' पारित कर तिनकठिया प्रणाली को समाप्त किया गया।
- स्वामी सहजानंद सरस्वती की आत्मकथा का नाम 'मेरा जीवन संघर्ष' है।
- पटना से प्रकाशित होने वाली पत्रिका 'हुंकार' (1942) किसान आंदोलन का प्रमुख मुखपत्र थी।
- राहुल सांकृत्यायन ने 'हुंकार' पत्रिका का संपादन किया और 'दिमागी गुलामी' जैसी पुस्तकें लिखीं।
- स्वामी सहजानंद ने 'किसान कैसे लड़ते हैं' और 'खेत मजदूर' जैसी महत्वपूर्ण पुस्तकें लिखीं।
- 1938 में बिहार टेनेंसी (संशोधन) अधिनियम पारित किया गया, जिससे बकाश्त भूमि का मुद्दा सुलझाया गया।
- कानपुर से प्रकाशित 'प्रताप' समाचार पत्र ने चंपारण के किसानों की समस्याओं को राष्ट्रीय स्तर पर उठाया।
तालिका
- नेता/आंदोलन: स्वामी सहजानंद · रचना/अधिनियम: मेरा जीवन संघर्ष (आत्मकथा) · वर्ष: -
- नेता/आंदोलन: स्वामी सहजानंद · रचना/अधिनियम: किसान कैसे लड़ते हैं · वर्ष: -
- नेता/आंदोलन: राहुल सांकृत्यायन · रचना/अधिनियम: हुंकार (पत्रिका) · वर्ष: 1942
- नेता/आंदोलन: बिरसा मुंडा विद्रोह · रचना/अधिनियम: छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम · वर्ष: 1908
- नेता/आंदोलन: चंपारण सत्याग्रह · रचना/अधिनियम: चंपारण कृषि अधिनियम · वर्ष: 1918
अभ्यास प्रश्न (हल सहित)
- प्रश्न 20: छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम (CNT Act) किस वर्ष पारित किया गया था?
(क) 1885 (ख) 1905 (ग) 1908 (घ) 1918
- ✔ उत्तर: (ग) 1908 — बिरसा मुंडा के आंदोलन के दबाव में ब्रिटिश सरकार ने 1908 में आदिवासियों की भूमि की रक्षा के लिए यह कानून बनाया।
- प्रश्न 21: स्वामी सहजानंद सरस्वती द्वारा लिखित आत्मकथा का शीर्षक क्या है?
(क) मेरा संघर्ष (ख) मेरा जीवन संघर्ष (ग) किसान और क्रांति (घ) भारत का किसान
- ✔ उत्तर: (ख) मेरा जीवन संघर्ष — स्वामी सहजानंद सरस्वती ने 'मेरा जीवन संघर्ष' नाम से अपनी आत्मकथा लिखी थी।
- प्रश्न 22: पटना से प्रकाशित होने वाली 'हुंकार' पत्रिका के संपादन से कौन जुड़े थे?
(क) राहुल सांकृत्यायन (ख) राजेंद्र प्रसाद (ग) श्री कृष्ण सिंह (घ) अनुग्रह नारायण सिंह
- ✔ उत्तर: (क) राहुल सांकृत्यायन — राहुल सांकृत्यायन ने 1942 में पटना से प्रकाशित होने वाली किसान आंदोलन की पत्रिका 'हुंकार' का संपादन किया था।
- प्रश्न 23: निम्नलिखित में से कौन सी पुस्तक स्वामी सहजानंद सरस्वती द्वारा नहीं लिखी गई है?
(क) किसान कैसे लड़ते हैं (ख) खेत मजदूर (ग) झारखंड के किसान (घ) दिमागी गुलामी
- ✔ उत्तर: (घ) दिमागी गुलामी — 'दिमागी गुलामी' राहुल सांकृत्यायन की रचना है, जबकि अन्य तीनों स्वामी सहजानंद की हैं।
- प्रश्न 24: चंपारण कृषि अधिनियम (Champaran Agrarian Act) कब पारित हुआ?
(क) 1917 (ख) 1918 (ग) 1919 (घ) 1920
- ✔ उत्तर: (ख) 1918 — गांधीजी के चंपारण सत्याग्रह के बाद 1918 में यह अधिनियम पारित कर तिनकठिया प्रथा को कानूनी रूप से समाप्त किया गया।
परीक्षा में कैसे आता है
BPSC में अक्सर आंदोलनों के बाद पारित कानूनों (जैसे CNT Act, SPT Act) के वर्ष और किसान नेताओं की प्रसिद्ध पुस्तकों के नाम पूछे जाते हैं।
इनमें भ्रम न करें
- ✘ CNT Act (1908) और SPT Act (1876) के वर्षों में भ्रम हो सकता है।
- ✘ 'हुंकार' पत्रिका (सहजानंद/राहुल सांकृत्यायन) और 'प्रताप' समाचार पत्र (गणेश शंकर विद्यार्थी) के बीच अंतर ध्यान रखें।
💡 सहज जीवन का संघर्ष (सहजानंद - मेरा जीवन संघर्ष) और 'हुंकार' भरते राहुल (राहुल सांकृत्यायन - हुंकार)।
एक नज़र में (Revision)
- तिलका मांझी (1784) बिहार के पहले जनजातीय नेता थे जिन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ हथियार उठाए थे।
- कोल विद्रोह (1831-32) का नेतृत्व बुद्धू भगत ने किया था, जो छोटानागपुर क्षेत्र में फैला था।
- संथाल हूल (1855-56) का नेतृत्व सिद्धू, कान्हू, चाँद और भैरव ने किया था।
- बिरसा मुंडा के विद्रोह (1899-1900) को 'उलगुलान' (महान हलचल) कहा जाता है।
- ताना भगत आंदोलन (1914) जतरा भगत द्वारा शुरू किया गया था, जो बाद में गांधीवादी विचारधारा से जुड़ा।
- सरदारी लड़ाई (1858-1895) मुंडा विद्रोह की पूर्ववर्ती थी, जिसका उद्देश्य भूमि अधिकारों की बहाली था।
- चंपारण में तिनकठिया प्रणाली के तहत किसानों को अपनी जमीन के 3/20 हिस्से पर नील उगाना अनिवार्य था।
- बिहार प्रांतीय किसान सभा (BPKS) की स्थापना 1929 में सोनपुर मेले में स्वामी सहजानंद सरस्वती द्वारा की गई थी।
- अखिल भारतीय किसान सभा का गठन 1936 में लखनऊ में हुआ था, जिसके अध्यक्ष स्वामी सहजानंद थे।
- बकाश्त आंदोलन (1937-39) जमींदारों द्वारा बेदखल की गई भूमि को वापस पाने के लिए कार्यानंद शर्मा के नेतृत्व में चलाया गया था।
- स्वामी सहजानंद सरस्वती की प्रसिद्ध आत्मकथा का नाम 'मेरा जीवन संघर्ष' है।
- राहुल सांकृत्यायन ने 1939 के अंबारी सत्याग्रह का नेतृत्व किया था।
अपने आप को जाँचिए — 10 प्रश्न
1. बिहार में 1784 में ब्रिटिश सत्ता के विरुद्ध विद्रोह करने वाले पहले जनजातीय नेता कौन थे?
- (क) सिद्धू मुर्मू
- (ख) बिरसा मुंडा
- (ग) तिलका मांझी
- (घ) बुद्धू भगत
उत्तर देखें
उत्तर: (ग) तिलका मांझी
तिलका मांझी ने 1784 में भागलपुर क्षेत्र में अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह का नेतृत्व किया था और उन्हें 1785 में फांसी दी गई थी।
2. 1831-32 के कोल विद्रोह का नेतृत्व निम्नलिखित में से किसने किया था?
- (क) जतरा भगत
- (ख) बुद्धू भगत
- (ग) कान्हू मुर्मू
- (घ) भैरव
उत्तर देखें
उत्तर: (ख) बुद्धू भगत
बुद्धू भगत कोल विद्रोह के प्रमुख नेता थे, जो छोटानागपुर क्षेत्र में बाहरी लोगों (दिक्कुओं) के प्रवेश के खिलाफ था।
3. संथाल विद्रोह (1855-56) के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन से नेता भाइयों का समूह सही है?
- (क) सिद्धू, कान्हू, चाँद और भैरव
- (ख) बिरसा, गया और कोन्टा
- (ग) जतरा, बलराम और देवमनिया
- (घ) तिलका, सिद्धू और बुद्धू
उत्तर देखें
उत्तर: (क) सिद्धू, कान्हू, चाँद और भैरव
संथाल हूल का नेतृत्व चार भाइयों - सिद्धू, कान्हू, चाँद और भैरव ने किया था।
4. बिरसा मुंडा के विद्रोह को किस अन्य नाम से जाना जाता है?
- (क) हूल
- (ख) उलगुलान
- (ग) सफा होड़
- (घ) ताना भगत
उत्तर देखें
उत्तर: (ख) उलगुलान
बिरसा मुंडा के विद्रोह (1899-1900) को 'उलगुलान' कहा जाता है, जिसका अर्थ है 'महान हलचल'।
5. 1914 में शुरू हुए ताना भगत आंदोलन के प्रणेता कौन थे?
- (क) कार्यानंद शर्मा
- (ख) जतरा भगत
- (ग) यदुवंश सहाय
- (घ) सहजानंद सरस्वती
उत्तर देखें
उत्तर: (ख) जतरा भगत
ताना भगत आंदोलन की शुरुआत 1914 में जतरा भगत ने की थी, जो एक धार्मिक और सांस्कृतिक सुधार आंदोलन के रूप में शुरू हुआ था।
6. चंपारण में प्रचलित 'तिनकठिया' प्रणाली का क्या अर्थ था?
- (क) प्रति बीघा 3 कट्ठा नील की खेती
- (ख) प्रति बीघा 10 कट्ठा नील की खेती
- (ग) प्रति बीघा 5 कट्ठा नील की खेती
- (घ) उपरोक्त में से कोई नहीं / एक से अधिक
उत्तर देखें
उत्तर: (क) प्रति बीघा 3 कट्ठा नील की खेती
तिनकठिया प्रणाली के तहत किसानों को अपनी भूमि के प्रत्येक 20 कट्ठा (1 बीघा) में से 3 कट्ठा पर नील उगाना अनिवार्य था।
7. बिहार प्रांतीय किसान सभा (BPKS) की स्थापना किस वर्ष और कहाँ हुई थी?
- (क) 1922, मुंगेर
- (ख) 1929, सोनपुर
- (ग) 1936, लखनऊ
- (घ) 1930, पटना
उत्तर देखें
उत्तर: (ख) 1929, सोनपुर
स्वामी सहजानंद सरस्वती ने नवंबर 1929 में सोनपुर मेले के दौरान बिहार प्रांतीय किसान सभा की स्थापना की थी।
8. मुंगेर के बरहिया ताल में 'बकाश्त आंदोलन' का नेतृत्व किसने किया था?
- (क) राहुल सांकृत्यायन
- (ख) पंचानन शर्मा
- (ग) कार्यानंद शर्मा
- (घ) यदुनंदन शर्मा
उत्तर देखें
उत्तर: (ग) कार्यानंद शर्मा
कार्यानंद शर्मा ने मुंगेर के बरहिया ताल (बकाश्त भूमि) में किसानों के अधिकारों के लिए आंदोलन का नेतृत्व किया था।
9. स्वामी सहजानंद सरस्वती द्वारा लिखित आत्मकथा का शीर्षक क्या है?
- (क) बंदी जीवन
- (ख) मेरा जीवन संघर्ष
- (ग) भारत दुर्दशा
- (घ) किसान क्या करें
उत्तर देखें
उत्तर: (ख) मेरा जीवन संघर्ष
स्वामी सहजानंद सरस्वती की आत्मकथा का नाम 'मेरा जीवन संघर्ष' है, जो किसान आंदोलनों के इतिहास के लिए महत्वपूर्ण है।
10. निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. सरदारी लड़ाई मुंडा विद्रोह की प्रस्तावना थी।
2. 1936 में अखिल भारतीय किसान सभा के सचिव एन.जी. रंगा थे।
सही कूट चुनें:
- (क) केवल 1
- (ख) केवल 2
- (ग) 1 और 2 दोनों
- (घ) न तो 1 और न ही 2
उत्तर देखें
उत्तर: (ग) 1 और 2 दोनों
दोनों कथन सही हैं। सरदारी लड़ाई ने मुंडा विद्रोह की जमीन तैयार की और एन.जी. रंगा अखिल भारतीय किसान सभा के पहले सचिव थे।
English version — Tribal and Peasant Movements of Bihar
This chapter is crucial for BPSC Prelims and Mains as it illustrates the foundation of resistance against British rule in Bihar. Questions regarding tribal revolts and Kisan Sabhas are frequently asked every year.
Major Tribal Revolts of Bihar
Tribal communities in Bihar launched several armed revolts against British exploitation and oppressive landlords. Tilka Manjhi challenged the British in the Bhagalpur region in 1784, becoming the first tribal martyr. The Kol Revolt (1831-32) in Chotanagpur was a reaction against the interference of outsiders (Dikkus). The Santhal Hul (1855), led by Sidhu and Kanhu, was a massive uprising against British authority. Birsa Munda's 'Ulgulan' (1899-1900) was a significant movement that combined political resistance with religious and social reforms.
Key facts
- Tilka Manjhi (Jabrah Paharia) killed Bhagalpur Collector Augustus Cleveland with an arrow in 1784.
- Tilka Manjhi was hanged from a banyan tree in Bhagalpur in 1785.
- The Kol Revolt (1831-32) was led by Buddhu Bhagat, Jhindrai Manki, and Sui Munda.
- The Santhal Revolt began on June 30, 1855, from Bhognadih village and is known as 'Hul'.
- The main leaders of the Santhal Revolt were four brothers: Sidhu, Kanhu, Chand, and Bhairav.
- Santhals fought the British alongside their sisters Phulo and Jhano.
- Major General Lloyd was sent to suppress the Santhal Revolt.
- After the Santhal Revolt, 'Santhal Pargana' was declared a non-regulation district in 1855.
- Birsa Munda was born on November 15, 1875, in Ulihatu village, Ranchi.
- Birsa Munda preached the worship of 'Singbonga' (one God) and declared himself a messenger of God.
- The Munda Revolt is known as 'Ulgulan' or the Great Tumult.
- Birsa Munda died of cholera in Ranchi Jail on June 9, 1900.
- The Chotanagpur Tenancy Act (CNT Act) was passed in 1908 as a result of the Munda Revolt.
- Birsa Munda is also known as 'Dharti Aba' or Father of the Earth.
Table
- विद्रोह: तिलका आंदोलन · वर्ष: 1784-85 · प्रमुख नेता: तिलका मांझी · क्षेत्र: भागलपुर/राजमहल
- विद्रोह: कोल विद्रोह · वर्ष: 1831-32 · प्रमुख नेता: बुद्धू भगत · क्षेत्र: छोटानागपुर
- विद्रोह: संथाल हूल · वर्ष: 1855-56 · प्रमुख नेता: सिद्धू-कान्हू · क्षेत्र: दामिन-इ-कोह
- विद्रोह: मुंडा उलगुलान · वर्ष: 1899-1900 · प्रमुख नेता: बिरसा मुंडा · क्षेत्र: रांची/खूंटी
Practice questions (solved)
- Q 1: संथाल विद्रोह का नेतृत्व किसने किया था?
(क) सिद्धू-कान्हू (ख) बिरसा मुंडा (ग) बुद्धू भगत (घ) तिलका मांझी
- ✔ Answer: (क) सिद्धू-कान्हू — सिद्धू और कान्हू संथाल विद्रोह के प्रमुख नेता थे।
- Q 2: 'उलगुलान' विद्रोह किससे जुड़ा था?
(क) संथाल (ख) कोल (ग) मुंडा (घ) चेरो
- ✔ Answer: (ग) मुंडा — बिरसा मुंडा के विद्रोह को उलगुलान कहा जाता है।
- Q 3: 1831 में बुद्धू भगत के नेतृत्व में कोल विद्रोह किस क्षेत्र में हुआ?
(क) कच्छ (ख) सिंहभूम (ग) पश्चिमी घाट (घ) सतारा
- ✔ Answer: (ख) सिंहभूम — कोल विद्रोह छोटानागपुर के सिंहभूम और पलामू क्षेत्र में हुआ था।
- Q 4: निम्नलिखित में से कौन सा युग्म सही सुमेलित नहीं है?
(क) संथाल-1855 (ख) कोल-1831 (ग) मुंडा-1899 (घ) तिलका मांझी-1810
- ✔ Answer: (घ) तिलका मांझी-1810 — तिलका मांझी का विद्रोह 1784-85 में हुआ था।
- Q 5: छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम (CNT Act) कब पारित किया गया?
(क) 1905 (ख) 1908 (ग) 1911 (घ) 1917
- ✔ Answer: (ख) 1908 — मुंडा विद्रोह के बाद 1908 में यह अधिनियम पारित हुआ।
How it is asked
BPSC frequently asks about the years of revolts, the leaders, and the names of British officers involved. Match-the-following questions are very common.
Do not confuse
- ✘ छात्र अक्सर संथाल विद्रोह (1855) और मुंडा विद्रोह (1899) के वर्षों में भ्रमित हो जाते हैं।
- ✘ बुद्धू भगत (कोल) और बिरसा मुंडा के नेतृत्व वाले क्षेत्रों को लेकर भी भ्रम होता है।
💡 सिद्धू-कान्हू ने 55 में हूल किया, बिरसा ने 99 में उलगुलान मचाया।
Tana Bhagat and Sardari Movements
The Sardari movement (1858-1895) was a long-drawn struggle led by Munda and Oraon tribal chiefs in the Chota Nagpur region against landlord oppression, forced labor (Beth Begari), and the erosion of traditional Khuntkatti land rights. It laid the foundation for Birsa Munda's Ulgulan. Later, in April 1914, the Tana Bhagat movement was initiated under the leadership of Jatra Bhagat. Initially a socio-religious reform movement among the Oraon tribe focused on monotheism and abstinence from alcohol and meat, it soon transformed into an anti-British agrarian protest. Tana Bhagats adopted complete non-violence, refusing to pay land revenue and Chaukidari taxes. It is regarded as the first non-violent tribal satyagraha and actively merged with Mahatma Gandhi's Non-Cooperation Movement.
Key facts
- Sardari movement (1858-1895) was launched by Oraon and Munda chiefs in Chota Nagpur to protect land rights.
- The main goal of Sardari movement was ending forced labor (Beth Begari) and restoring Khuntkatti system.
- Tana Bhagat movement began in April 1914 by Oraon tribe in Chota Nagpur (Gumla-Ranchi region).
- The chief initiator and founder of the Tana Bhagat movement was Jatra Bhagat (Jatra Oraon).
- Apart from Jatra Bhagat, Turia Bhagat, Sibu Bhagat, and Balram Bhagat were prominent leaders.
- Devmania, an Oraon woman, led the religious and social reform aspects of the Tana Bhagat movement.
- Tana Bhagat movement is considered the first fully non-violent satyagraha movement run by tribals.
- Tana Bhagats completely refused to pay land revenue and Chaukidari tax to the British and landlords.
- During the 1920 Non-Cooperation Movement, Tana Bhagats fully supported Mahatma Gandhi and adopted khadi.
- Tana Bhagats participated in large numbers with the tricolor flag at the 1922 Gaya Congress Session.
Table
- आंदोलन का नाम: सरदारी आंदोलन · समय अवधि: 1858 - 1895 ई. · मुख्य नेतृत्वकर्ता: मुंडा एवं ओरांव सरदार · संबद्ध जनजाति: मुंडा और ओरांव · मुख्य स्वरूप एवं विशेषता: बेगार प्रथा का विरोध, खूंटकट्टी अधिकारों की वापसी; मुंडा उलगुलान की पूर्व पीठिका।
- आंदोलन का नाम: ताना भगत आंदोलन · समय अवधि: 1914 ई. से प्रारंभ · मुख्य नेतृत्वकर्ता: जातरा भगत, तुरिया भगत, सिबू भगत · संबद्ध जनजाति: ओरांव जनजाति · मुख्य स्वरूप एवं विशेषता: धार्मिक सुधार से राजनीतिक सत्याग्रह; अहिंसक, गांधीवादी विचार, कर-अदायगी से इंकार।
Practice questions (solved)
- Q 6: ताना भगत आंदोलन किस वर्ष प्रारंभ हुआ था?
(क) 1905 ई. (ख) 1914 ई. (ग) 1920 ई. (घ) 1930 ई.
- ✔ Answer: (ख) 1914 ई. — ताना भगत आंदोलन की शुरुआत अप्रैल 1914 ई. में छोटानागपुर क्षेत्र में जातरा भगत के नेतृत्व में हुई थी।
- Q 7: ताना भगत आंदोलन के मुख्य नेता कौन थे?
(क) सिद्धू और कान्हू (ख) बिरसा मुंडा (ग) जातरा भगत (घ) तिलका मांझी
- ✔ Answer: (ग) जातरा भगत — जातरा भगत (जातरा ओरांव) ताना भगत आंदोलन के संस्थापक एवं मुख्य प्रणेता थे।
- Q 8: निम्नलिखित में से कौन-सा आंदोलन मुंडा उलगुलान (1899-1900) की पूर्व पीठिका के रूप में जाना जाता है?
(क) कोल विद्रोह (ख) सरदारी आंदोलन (ग) संथाल हुल (घ) तमाड़ विद्रोह
- ✔ Answer: (ख) सरदारी आंदोलन — 1858 से 1895 तक चला सरदारी आंदोलन बिरसा मुंडा के उलगुलान की मुख्य पृष्ठभूमि और पूर्व पीठिका बना।
- Q 9: 1922 के गया कांग्रेस अधिवेशन में किस जनजातीय समूह ने अहिंसक सत्याग्रह का समर्थन करते हुए प्रमुखता से भाग लिया?
(क) संथाल (ख) कोल (ग) ताना भगत (घ) चेरो
- ✔ Answer: (ग) ताना भगत — ताना भगतों ने 1922 के गया कांग्रेस अधिवेशन में महात्मा गांधी के प्रति निष्ठा व्यक्त करते हुए भाग लिया था।
- Q 10: ताना भगत आंदोलन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन असत्य है?
(क) यह मुख्य रूप से ओरांव जनजाति से संबंधित था। (ख) यह आदिवासियों का एक अहिंसक आंदोलन था। (ग) इन्होंने अंग्रेजों को चौकीदारी कर देने का समर्थन किया। (घ) इन्होंने असहयोग आंदोलन में सक्रिय रूप से भाग लिया।
- ✔ Answer: (ग) इन्होंने अंग्रेजों को चौकीदारी कर देने का समर्थन किया। — ताना भगतों ने अंग्रेजों और ज़मींदारों को लगान तथा चौकीदारी कर देने से साफ इंकार कर दिया था।
How it is asked
In BPSC Prelims, questions on the Tana Bhagat movement focus directly on its start year (1914), founder (Jatra Bhagat), associated tribe (Oraon), and its connection to the national movement (Non-Cooperation Movement and Gaya Congress 1922).
Do not confuse
- ✘ जातरा भगत (ताना भगत आंदोलन, 1914) और बिरसा मुंडा (मुंडा उलगुलान, 1899-1900) के नेतृत्व वाले आंदोलनों में भ्रमित न हों; ताना भगत आंदोलन पूर्णतः अहिंसक एवं गांधीवादी था।
- ✘ सरदारी आंदोलन (1858-1895) और ताना भगत आंदोलन (1914) अलग हैं; सरदारी आंदोलन कानूनी और हिंसक संघर्ष था जबकि ताना भगत एक अहिंसक सत्याग्रह था।
💡 ट्रिक: '14 में जातरा ने ताना कसा' -> 1914 में जातरा भगत ने ताना भगत आंदोलन शुरू किया।
Indigo Cultivation and Tinkathia System in Champaran
In Champaran, European indigo planters imposed the 'Tinkathia' system, requiring farmers to cultivate indigo on 3 out of every 20 katthas of their land. With the advent of synthetic dyes in Germany in the late 19th century, the demand for natural indigo declined, leading planters to extract illegal taxes (Sharahbeshi and Tawan) from farmers in exchange for releasing them from contracts. At the persistent invitation of Raj Kumar Shukla, Mahatma Gandhi arrived in Champaran in 1917, marking his first Civil Disobedience movement in India. Under pressure, the government formed the 'Champaran Agrarian Committee', with Gandhi as a member. Based on the committee's recommendations, the Tinkathia system was abolished, and planters agreed to refund 25% of the illegally collected money. The movement was a success, and it was during this time that Rabindranath Tagore bestowed the title 'Mahatma' upon Gandhi.
Key facts
- Under the Tinkathia system, farmers had to grow indigo on 3/20th of their land.
- Raj Kumar Shukla invited Gandhi to Champaran during the 1916 Lucknow Congress session.
- Mahatma Gandhi first reached Motihari (Champaran) on April 15, 1917.
- Key associates of Gandhi during Champaran Satyagraha were Dr. Rajendra Prasad, Anugrah Narayan Sinha, and J.B. Kripalani.
- The chairman of the Champaran Agrarian Committee was F.G. Sly.
- Planters agreed to refund 25% of the money collected illegally.
- N.G. Ranga opposed Gandhi's Champaran Satyagraha.
- Brajkishore Prasad and Mazharul Haque were also active with Gandhi in this movement.
- Gandhi established schools in 'Bhitharwa' and 'Barharwa Lakhansen' during his inquiry in Champaran.
- This was the first actual peasant Satyagraha launched by Gandhi in India.
Table
- प्रमुख व्यक्ति: राजकुमार शुक्ल · भूमिका/महत्व: गांधीजी को चंपारण आमंत्रित करने वाले स्थानीय किसान नेता
- प्रमुख व्यक्ति: एफ.जी. स्लाई · भूमिका/महत्व: चंपारण एग्रेरियन कमेटी के अध्यक्ष
- प्रमुख व्यक्ति: डॉ. राजेंद्र प्रसाद · भूमिका/महत्व: गांधीजी के मुख्य सहयोगी और बिहार के नेता
- प्रमुख व्यक्ति: एन.जी. रंगा · भूमिका/महत्व: चंपारण सत्याग्रह के आलोचक/विरोधी
- प्रमुख व्यक्ति: रवींद्रनाथ टैगोर · भूमिका/महत्व: गांधीजी को 'महात्मा' की उपाधि देने वाले
Practice questions (solved)
- Q 11: चंपारण में 'तिनकठिया' प्रथा का क्या तात्पर्य था?
(क) 3/20 भू-भाग पर नील की खेती करना (ख) 3/19 भू-भाग पर नील की खेती करना (ग) 3/18 भू-भाग पर नील की खेती करना (घ) उपरोक्त में से कोई नहीं
- ✔ Answer: (क) 3/20 भू-भाग पर नील की खेती करना — तिनकठिया का अर्थ है प्रति बीघा (20 कट्ठा) में 3 कट्ठा पर नील की खेती।
- Q 12: किसने महात्मा गांधी को चंपारण आने और किसानों की समस्याओं की जांच करने के लिए राजी किया था?
(क) राजेंद्र प्रसाद (ख) राजकुमार शुक्ल (ग) मजहरुल हक (घ) महादेव देसाई
- ✔ Answer: (ख) राजकुमार शुक्ल — राजकुमार शुक्ल ने 1916 के लखनऊ अधिवेशन में गांधीजी को आमंत्रित किया था।
- Q 13: चंपारण सत्याग्रह के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन असत्य है?
(क) यह गांधीजी का भारत में पहला सत्याग्रह था (ख) यह तिनकठिया प्रणाली के विरुद्ध था (ग) एन.जी. रंगा ने इसका समर्थन किया था (घ) रवींद्रनाथ टैगोर ने गांधीजी को 'महात्मा' की उपाधि दी
- ✔ Answer: (ग) एन.जी. रंगा ने इसका समर्थन किया था — एन.जी. रंगा ने चंपारण सत्याग्रह का विरोध किया था, समर्थन नहीं।
- Q 14: चंपारण कृषि जांच समिति (Champaran Agrarian Committee) के अध्यक्ष कौन थे?
(क) महात्मा गांधी (ख) एफ.जी. स्लाई (ग) एल.सी. एडेमी (घ) डी.जे. रीड
- ✔ Answer: (ख) एफ.जी. स्लाई — एफ.जी. स्लाई इस समिति के अध्यक्ष थे, जबकि गांधीजी इसके एक सदस्य थे।
- Q 15: चंपारण सत्याग्रह के सफल समापन पर बागान मालिक अवैध वसूली का कितना प्रतिशत वापस करने पर सहमत हुए?
(क) 20 प्रतिशत (ख) 25 प्रतिशत (ग) 50 प्रतिशत (घ) 100 प्रतिशत
- ✔ Answer: (ख) 25 प्रतिशत — गांधीजी के समझौते के अनुसार बागान मालिक 25% राशि लौटाने को तैयार हुए थे।
📜 Real previous-year questions (BPSC)
- [BPSC 71वीं प्रारंभिक (13 सितंबर 2025), प्रश्न 100] सूची-I को सूची-II के साथ सुमेलित कीजिए।
सूची-I
घटना/संगठन
a) चंपारन सत्याग्रह
b) आज़ाद दस्ता
c) 1940 में बिहार में व्यक्तिगत सत्याग्रह
d) किसान सभा बिहार
सूची-II
सम्बन्धित व्यक्ति
1) जयप्रकाश नारायण
2) श्याम नारायण सिंह
3) सहजानन्द सरस्वती
4) डॉ. राजेन्द्र प्रसाद
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए :
(क) a-4, b-2, c-3, d-1 (ख) a-2, b-3, c-1, d-4 (ग) a-1, b-4, c-3, d-2 (घ) a-4, b-1, c-2, d-3
- ✔ Official answer: (घ) a-4, b-1, c-2, d-3 — इस प्रश्न में चंपारण सत्याग्रह को डॉ. राजेंद्र प्रसाद से सुमेलित किया गया है, जो गांधीजी के प्रमुख सहयोगी के रूप में वहां उपस्थित थे।
How it is asked
BPSC frequently asks questions on this topic, especially the ratio of Tinkathia (3/20), the name of Raj Kumar Shukla, the list of Gandhi's associates, and details about the Champaran Agrarian Committee.
Do not confuse
- ✘ छात्र अक्सर 25% और 50% रिफंड के बीच भ्रमित होते हैं; सही उत्तर 25% है।
- ✘ गांधीजी समिति के अध्यक्ष नहीं बल्कि केवल एक सदस्य थे (अध्यक्ष एफ.जी. स्लाई थे)।
- ✘ राजकुमार शुक्ल ने गांधीजी को लखनऊ में आमंत्रित किया था, न कि चंपारण में।
💡 राजकुमार (शुक्ल) ने 16 (1916) में गांधी को 3/20 नील के लिए बुलाया।
Kisan Sabha: Swami Sahajanand Saraswati and Bakasht Movement
The peasant movement in Bihar emerged as a reaction against landlord exploitation and the eviction of tenants. Swami Sahajanand Saraswati founded the Bihar Provincial Kisan Sabha (BPKS) in November 1929 during the Sonpur Fair, providing a structured platform for farmers. The movement's primary focus was the 'Bakasht' land issue, where landlords were evicting tenants from lands they traditionally cultivated. In 1936, the All India Kisan Sabha was formed in Lucknow, elevating the struggle to a national level. Barahiya Tal in Munger became a significant center for the Bakasht struggle. Through publications like 'Lok Sangrah', Swami Sahajanand highlighted the distress of the peasantry to the masses.
Key facts
- Bihar Provincial Kisan Sabha (BPKS) was established in November 1929 at the Sonpur Fair.
- Swami Sahajanand Saraswati was the first President and Shri Krishna Singh was the first Secretary of BPKS.
- All India Kisan Sabha (AIKS) was formed on 11 April 1936 in Lucknow.
- Swami Sahajanand was elected President and N.G. Ranga as General Secretary of AIKS.
- The Bakasht movement was against the eviction of farmers from their self-cultivated land (Bakasht) by landlords.
- The Bakasht movement in Barahiya Tal, Munger, was led by Karyanand Sharma.
- The third session of the Bihar Provincial Kisan Sabha was held in Hajipur under the chairmanship of Swami Sahajanand.
- In 1940, Swami Sahajanand organized the 'All India Anti-Compromise Conference' at Ramgarh with Subhash Chandra Bose.
- Following his arrest during the Quit India Movement, 28 April is observed as 'All-India Swami Sahajanand Day'.
Table
- संस्था/आंदोलन: बिहार प्रांतीय किसान सभा · वर्ष: 1929 · स्थान: सोनपुर · प्रमुख व्यक्तित्व: स्वामी सहजानंद सरस्वती
- संस्था/आंदोलन: अखिल भारतीय किसान सभा · वर्ष: 1936 · स्थान: लखनऊ · प्रमुख व्यक्तित्व: स्वामी सहजानंद, एन.जी. रंगा
- संस्था/आंदोलन: बकाश्त आंदोलन · वर्ष: 1930 के दशक · स्थान: मुंगेर (बरहिया टाल) · प्रमुख व्यक्तित्व: कार्यानंद शर्मा
- संस्था/आंदोलन: समझौता विरोधी सम्मेलन · वर्ष: 1940 · स्थान: रामगढ़ · प्रमुख व्यक्तित्व: स्वामी सहजानंद, सुभाष चंद्र बोस
Practice questions (solved)
- Q 16: बिहार प्रांतीय किसान सभा का गठन किस वर्ष और किस स्थान पर हुआ था?
(क) 1928, पटना (ख) 1929, सोनपुर (ग) 1936, लखनऊ (घ) 1930, मुंगेर
- ✔ Answer: (ख) 1929, सोनपुर — बिहार प्रांतीय किसान सभा की स्थापना नवंबर 1929 में सोनपुर मेले के दौरान हुई थी।
- Q 17: अखिल भारतीय किसान सभा (1936) के प्रथम महासचिव कौन थे?
(क) स्वामी सहजानंद सरस्वती (ख) एन.जी. रंगा (ग) कार्यानंद शर्मा (घ) इन्दुलाल याज्ञिक
- ✔ Answer: (ख) एन.जी. रंगा — 1936 में लखनऊ में गठित अखिल भारतीय किसान सभा के महासचिव एन.जी. रंगा थे, जबकि स्वामी सहजानंद अध्यक्ष थे।
- Q 18: मुंगेर के बरहिया टाल में 'बकाश्त आंदोलन' का मुख्य उद्देश्य क्या था?
(क) नील की खेती का विरोध (ख) जमींदारों द्वारा बेदखल की गई भूमि की वापसी (ग) लगान में वृद्धि की मांग (घ) नमक कानून का उल्लंघन
- ✔ Answer: (ख) जमींदारों द्वारा बेदखल की गई भूमि की वापसी — बकाश्त आंदोलन का मुख्य उद्देश्य जमींदारों द्वारा छीनी गई स्वयं-जोत वाली भूमि (बकाश्त) को वापस पाना था।
- Q 19: निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही है?
1. बिहार प्रांतीय किसान सभा के प्रथम सचिव श्री कृष्ण सिंह थे।
2. बकाश्त आंदोलन का नेतृत्व मुंगेर में कार्यानंद शर्मा ने किया था।
(क) केवल 1 (ख) केवल 2 (ग) 1 और 2 दोनों (घ) इनमें से कोई नहीं
- ✔ Answer: (ग) 1 और 2 दोनों — दोनों कथन सही हैं; श्री कृष्ण सिंह प्रथम सचिव थे और कार्यानंद शर्मा ने मुंगेर में नेतृत्व किया था।
📜 Real previous-year questions (BPSC)
- [BPSC 71वीं प्रारंभिक (13 सितंबर 2025), प्रश्न 83] बिहार में किसान सभा का प्रमुख नेता कौन था?
(क) राज कुमार शुक्ला (ख) सहजानन्द सरस्वती (ग) आचार्य नरेन्द्र देव (घ) बाबा रामचन्द्र
- ✔ Official answer: (ख) सहजानन्द सरस्वती — स्वामी सहजानंद सरस्वती बिहार में किसान सभा के सबसे प्रमुख नेता थे और उन्होंने ही 1929 में प्रांतीय सभा की स्थापना की थी।
- [BPSC 70वीं प्रारंभिक (13 दिसंबर 2024), प्रश्न 43] किसानों द्वारा विपत्तियों का सामना करने को उजागर करने के लिए सहजानंद सरस्वती ने किस समाचार पत्र को प्रकाशित किया ?
(क) द ब्रोकेन विंग (ख) लोक संग्रह (ग) निर्बल सेवक (घ) इण्डियन नेशन
- ✔ Official answer: (ख) लोक संग्रह
How it is asked
BPSC frequently asks about the formation date of the Bihar Provincial Kisan Sabha, its first President (Swami Sahajanand), and Secretary (Shri Krishna Singh). Questions regarding the meaning of the Bakasht movement and its major centers (Munger/Barahiya Tal) are also recurrent.
Do not confuse
- ✘ 1929 (बिहार प्रांतीय किसान सभा) और 1936 (अखिल भारतीय किसान सभा) के वर्षों में भ्रम।
- ✘ बकाश्त भूमि का अर्थ: यह वह भूमि थी जिसे किसान जोतते थे लेकिन जमींदार उस पर अधिकार जताते थे।
💡 सोनपुर में '29' में सहजानंद ने 'प्रांतीय' बिगुल फूँका और '36' में लखनऊ जाकर 'अखिल भारतीय' नेता बने।
Results of Movements and Leaders' Writings
The tribal and peasant movements in Bihar not only challenged British authority but also brought long-term legal and social changes. The Santhal rebellion led to the creation of the Santhal Pargana district, while Birsa Munda's Ulgulan resulted in the Chotanagpur Tenancy Act (CNT Act) of 1908. Peasant movements paved the way for significant reforms like the Champaran Agrarian Act (1918) and the restoration of Bakasht land. The writings of leaders like Swami Sahajanand Saraswati and Rahul Sankrityayan played a major role in strengthening the ideological base of these movements. Their books and journals awakened political consciousness among peasants and tribals. Journals like 'Hunkar' from Patna amplified the voice of peasant struggles.
Key facts
- After the Santhal rebellion of 1855, Santhal Pargana was made a separate non-regulation district.
- As a result of the Birsa Munda movement, the Chotanagpur Tenancy Act (CNT Act) was passed on November 11, 1908.
- After the Champaran Satyagraha, the 'Champaran Agrarian Act' was passed in 1918, abolishing the Tinkathia system.
- The name of Swami Sahajanand Saraswati's autobiography is 'Mera Jeevan Sangharsh'.
- The journal 'Hunkar' (1942), published from Patna, was the main mouthpiece of the peasant movement.
- Rahul Sankrityayan edited the journal 'Hunkar' and wrote books like 'Dimagi Gulami'.
- Swami Sahajanand wrote important books like 'Kisan Kaise Ladte Hain' and 'Khet Mazdoor'.
- The Bihar Tenancy (Amendment) Act was passed in 1938 to resolve the Bakasht land issue.
- The newspaper 'Pratap', published from Kanpur, raised the issues of Champaran farmers at the national level.
Table
- नेता/आंदोलन: स्वामी सहजानंद · रचना/अधिनियम: मेरा जीवन संघर्ष (आत्मकथा) · वर्ष: -
- नेता/आंदोलन: स्वामी सहजानंद · रचना/अधिनियम: किसान कैसे लड़ते हैं · वर्ष: -
- नेता/आंदोलन: राहुल सांकृत्यायन · रचना/अधिनियम: हुंकार (पत्रिका) · वर्ष: 1942
- नेता/आंदोलन: बिरसा मुंडा विद्रोह · रचना/अधिनियम: छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम · वर्ष: 1908
- नेता/आंदोलन: चंपारण सत्याग्रह · रचना/अधिनियम: चंपारण कृषि अधिनियम · वर्ष: 1918
Practice questions (solved)
- Q 20: छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम (CNT Act) किस वर्ष पारित किया गया था?
(क) 1885 (ख) 1905 (ग) 1908 (घ) 1918
- ✔ Answer: (ग) 1908 — बिरसा मुंडा के आंदोलन के दबाव में ब्रिटिश सरकार ने 1908 में आदिवासियों की भूमि की रक्षा के लिए यह कानून बनाया।
- Q 21: स्वामी सहजानंद सरस्वती द्वारा लिखित आत्मकथा का शीर्षक क्या है?
(क) मेरा संघर्ष (ख) मेरा जीवन संघर्ष (ग) किसान और क्रांति (घ) भारत का किसान
- ✔ Answer: (ख) मेरा जीवन संघर्ष — स्वामी सहजानंद सरस्वती ने 'मेरा जीवन संघर्ष' नाम से अपनी आत्मकथा लिखी थी।
- Q 22: पटना से प्रकाशित होने वाली 'हुंकार' पत्रिका के संपादन से कौन जुड़े थे?
(क) राहुल सांकृत्यायन (ख) राजेंद्र प्रसाद (ग) श्री कृष्ण सिंह (घ) अनुग्रह नारायण सिंह
- ✔ Answer: (क) राहुल सांकृत्यायन — राहुल सांकृत्यायन ने 1942 में पटना से प्रकाशित होने वाली किसान आंदोलन की पत्रिका 'हुंकार' का संपादन किया था।
- Q 23: निम्नलिखित में से कौन सी पुस्तक स्वामी सहजानंद सरस्वती द्वारा नहीं लिखी गई है?
(क) किसान कैसे लड़ते हैं (ख) खेत मजदूर (ग) झारखंड के किसान (घ) दिमागी गुलामी
- ✔ Answer: (घ) दिमागी गुलामी — 'दिमागी गुलामी' राहुल सांकृत्यायन की रचना है, जबकि अन्य तीनों स्वामी सहजानंद की हैं।
- Q 24: चंपारण कृषि अधिनियम (Champaran Agrarian Act) कब पारित हुआ?
(क) 1917 (ख) 1918 (ग) 1919 (घ) 1920
- ✔ Answer: (ख) 1918 — गांधीजी के चंपारण सत्याग्रह के बाद 1918 में यह अधिनियम पारित कर तिनकठिया प्रथा को कानूनी रूप से समाप्त किया गया।
How it is asked
BPSC frequently asks about the years of acts passed after movements (like CNT Act, SPT Act) and the names of famous books by peasant leaders.
Do not confuse
- ✘ CNT Act (1908) और SPT Act (1876) के वर्षों में भ्रम हो सकता है।
- ✘ 'हुंकार' पत्रिका (सहजानंद/राहुल सांकृत्यायन) और 'प्रताप' समाचार पत्र (गणेश शंकर विद्यार्थी) के बीच अंतर ध्यान रखें।
💡 सहज जीवन का संघर्ष (सहजानंद - मेरा जीवन संघर्ष) और 'हुंकार' भरते राहुल (राहुल सांकृत्यायन - हुंकार)।
Quick revision
- Tilka Manjhi (1784) was the first tribal leader in Bihar to take up arms against the British.
- The Kol Revolt (1831-32) was led by Buddhu Bhagat in the Chotanagpur region.
- The Santhal Hul (1855-56) was led by four brothers: Sidhu, Kanhu, Chand, and Bhairav.
- Birsa Munda's revolt (1899-1900) is known as 'Ulgulan' (The Great Tumult).
- The Tana Bhagat movement (1914) was started by Jatra Bhagat and later adopted Gandhian principles.
- The Sardari Larai (1858-1895) was a precursor to the Munda revolt, focusing on land rights.
- The Tinkathia system in Champaran mandated farmers to grow indigo on 3/20th of their land.
- The Bihar Provincial Kisan Sabha (BPKS) was founded by Swami Sahajanand Saraswati in 1929 at Sonpur.
- The All India Kisan Sabha was formed in 1936 in Lucknow with Swami Sahajanand as President.
- The Bakasht movement (1937-39) was led by Karyanand Sharma to reclaim lands evicted by landlords.
- Swami Sahajanand Saraswati's famous autobiography is titled 'Mera Jeevan Sangharsh'.
- Rahul Sankrityayan led the Ambari Satyagraha in 1939.