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BPSC CCEइतिहास और राष्ट्रीय आंदोलन

बिहार के जनजातीय और किसान आंदोलन

Tribal and Peasant Movements of Bihar

📖 किताब की तरह पढ़ें📝 इस परीक्षा का मॉक टेस्ट

यह अध्याय बीपीएससी प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह बिहार में ब्रिटिश शासन के खिलाफ प्रतिरोध की नींव को दर्शाता है। इससे हर साल जनजातीय विद्रोहों और किसान सभाओं से संबंधित प्रश्न पूछे जाते हैं।

बिहार के प्रमुख जनजातीय विद्रोह

बिहार में ब्रिटिश शासन और जमींदारों के शोषण के खिलाफ जनजातियों ने कई सशस्त्र विद्रोह किए। तिलका मांझी ने 1784 में भागलपुर क्षेत्र में अंग्रेजों को चुनौती दी और पहले आदिवासी शहीद बने। कोल विद्रोह (1831-32) छोटानागपुर क्षेत्र में बाहरी लोगों (दिक्कुओं) के हस्तक्षेप के विरुद्ध था। संथाल विद्रोह (1855) सिद्धू और कान्हू के नेतृत्व में हुआ, जिसे 'हूल' कहा जाता है और यह ब्रिटिश सत्ता के खिलाफ एक बड़ी चुनौती थी। बिरसा मुंडा का 'उलगुलान' (1899-1900) न केवल राजनीतिक था, बल्कि धार्मिक और सामाजिक सुधार का भी आंदोलन था।

मुख्य तथ्य

तालिका

अभ्यास प्रश्न (हल सहित)

(क) सिद्धू-कान्हू (ख) बिरसा मुंडा (ग) बुद्धू भगत (घ) तिलका मांझी

(क) संथाल (ख) कोल (ग) मुंडा (घ) चेरो

(क) कच्छ (ख) सिंहभूम (ग) पश्चिमी घाट (घ) सतारा

(क) संथाल-1855 (ख) कोल-1831 (ग) मुंडा-1899 (घ) तिलका मांझी-1810

(क) 1905 (ख) 1908 (ग) 1911 (घ) 1917

परीक्षा में कैसे आता है

बीपीएससी अक्सर विद्रोह के वर्ष, नेतृत्वकर्ता और उनके द्वारा मारे गए ब्रिटिश अधिकारियों के नाम पूछता है। मिलान करने वाले प्रश्न (Match the following) बहुत आम हैं।

इनमें भ्रम न करें

💡 सिद्धू-कान्हू ने 55 में हूल किया, बिरसा ने 99 में उलगुलान मचाया।

ताना भगत और सरदारी आंदोलन

सरदारी आंदोलन (1858-1895) छोटानागपुर क्षेत्र के मुंडा और ओरांव जनजातीय सरदारों द्वारा ज़मींदारों के उत्पीड़न, बेगार प्रथा (मुफ्त श्रम) और पारंपरिक खूंटकट्टी अधिकारों के हनन के खिलाफ चलाया गया एक दीर्घकालिक संघर्ष था। यह आंदोलन आगे चलकर बिरसा मुंडा के उलगुलान की आधारशिला बना। इसके बाद अप्रैल 1914 में जातरा भगत के नेतृत्व में ताना भगत आंदोलन की शुरुआत हुई। प्रारंभ में यह ओरांव जनजाति के बीच मांस-मदिरा के त्याग और नैतिक आचरण पर आधारित एक धार्मिक-सामाजिक सुधार आंदोलन था। जल्द ही इसने राजनीतिक और आर्थिक रूप धारण कर लिया और ब्रिटिश सरकार तथा ज़मींदारों को लगान व चौकीदारी कर देने से मना कर दिया। ताना भगत आंदोलन जनजातियों का पहला अहिंसक सत्याग्रह था जो महात्मा गांधी के विचारों से अत्यधिक प्रभावित हुआ और असहयोग आंदोलन का प्रमुख अंग बना।

मुख्य तथ्य

तालिका

अभ्यास प्रश्न (हल सहित)

(क) 1905 ई. (ख) 1914 ई. (ग) 1920 ई. (घ) 1930 ई.

(क) सिद्धू और कान्हू (ख) बिरसा मुंडा (ग) जातरा भगत (घ) तिलका मांझी

(क) कोल विद्रोह (ख) सरदारी आंदोलन (ग) संथाल हुल (घ) तमाड़ विद्रोह

(क) संथाल (ख) कोल (ग) ताना भगत (घ) चेरो

(क) यह मुख्य रूप से ओरांव जनजाति से संबंधित था। (ख) यह आदिवासियों का एक अहिंसक आंदोलन था। (ग) इन्होंने अंग्रेजों को चौकीदारी कर देने का समर्थन किया। (घ) इन्होंने असहयोग आंदोलन में सक्रिय रूप से भाग लिया।

परीक्षा में कैसे आता है

BPSC प्रीलिम्स में ताना भगत आंदोलन से संबंधित प्रश्न इसके वर्ष (1914), संस्थापक (जातरा भगत), संबंधित जनजाति (ओरांव) और राष्ट्रीय आंदोलन (असहयोग आंदोलन व गया कांग्रेस 1922) से जुड़ाव पर सीधे पूछे जाते हैं।

इनमें भ्रम न करें

💡 ट्रिक: '14 में जातरा ने ताना कसा' -> 1914 में जातरा भगत ने ताना भगत आंदोलन शुरू किया।

चंपारण में नील की खेती और तिनकठिया प्रणाली

चंपारण में यूरोपीय नील बागान मालिकों द्वारा किसानों पर 'तिनकठिया' पद्धति थोपी गई थी, जिसके तहत प्रति बीघा (20 कट्ठा) में से 3 कट्ठा जमीन पर नील की खेती करना अनिवार्य था। 19वीं सदी के अंत में जर्मनी में कृत्रिम रंगों (Synthetic Dyes) के विकास के कारण नील की मांग गिर गई, जिससे बागान मालिकों ने किसानों को अनुबंध से मुक्त करने के बदले भारी अवैध लगान (शराहबेशी और तवान) वसूला। राजकुमार शुक्ल के विशेष आग्रह पर महात्मा गांधी 1917 में चंपारण पहुँचे, जो भारत में उनका पहला सविनय अवज्ञा आंदोलन बना। गांधीजी के दबाव में सरकार ने 'चंपारण एग्रेरियन कमेटी' का गठन किया, जिसमें गांधीजी भी एक सदस्य थे। इस समिति की सिफारिश पर तिनकठिया प्रणाली को समाप्त कर दिया गया और बागान मालिक अवैध वसूली का 25% हिस्सा वापस करने पर सहमत हुए। यह आंदोलन सफल रहा और इसी दौरान रवींद्रनाथ टैगोर ने गांधीजी को 'महात्मा' की उपाधि दी थी।

मुख्य तथ्य

तालिका

अभ्यास प्रश्न (हल सहित)

(क) 3/20 भू-भाग पर नील की खेती करना (ख) 3/19 भू-भाग पर नील की खेती करना (ग) 3/18 भू-भाग पर नील की खेती करना (घ) उपरोक्त में से कोई नहीं

(क) राजेंद्र प्रसाद (ख) राजकुमार शुक्ल (ग) मजहरुल हक (घ) महादेव देसाई

(क) यह गांधीजी का भारत में पहला सत्याग्रह था (ख) यह तिनकठिया प्रणाली के विरुद्ध था (ग) एन.जी. रंगा ने इसका समर्थन किया था (घ) रवींद्रनाथ टैगोर ने गांधीजी को 'महात्मा' की उपाधि दी

(क) महात्मा गांधी (ख) एफ.जी. स्लाई (ग) एल.सी. एडेमी (घ) डी.जे. रीड

(क) 20 प्रतिशत (ख) 25 प्रतिशत (ग) 50 प्रतिशत (घ) 100 प्रतिशत

📜 असली पिछले वर्ष के प्रश्न (BPSC)

सूची-I

घटना/संगठन

a) चंपारन सत्याग्रह

b) आज़ाद दस्ता

c) 1940 में बिहार में व्यक्तिगत सत्याग्रह

d) किसान सभा बिहार

सूची-II

सम्बन्धित व्यक्ति

1) जयप्रकाश नारायण

2) श्याम नारायण सिंह

3) सहजानन्द सरस्वती

4) डॉ. राजेन्द्र प्रसाद

नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए :

(क) a-4, b-2, c-3, d-1 (ख) a-2, b-3, c-1, d-4 (ग) a-1, b-4, c-3, d-2 (घ) a-4, b-1, c-2, d-3

परीक्षा में कैसे आता है

BPSC में इस विषय से अक्सर प्रश्न पूछे जाते हैं, विशेषकर तिनकठिया का अनुपात (3/20), राजकुमार शुक्ल का नाम, गांधीजी के सहयोगियों की सूची और चंपारण एग्रेरियन कमेटी के बारे में।

इनमें भ्रम न करें

💡 राजकुमार (शुक्ल) ने 16 (1916) में गांधी को 3/20 नील के लिए बुलाया।

किसान सभा: स्वामी सहजानंद सरस्वती और बकाश्त आंदोलन

बिहार में किसान आंदोलन का उदय जमींदारी शोषण और किसानों की बेदखली के खिलाफ हुआ था। स्वामी सहजानंद सरस्वती ने 1929 में सोनपुर मेले के दौरान बिहार प्रांतीय किसान सभा (BPKS) की स्थापना की, जिसने किसानों को एक संगठित मंच प्रदान किया। इस आंदोलन का मुख्य केंद्र 'बकाश्त' भूमि का मुद्दा था, जहाँ जमींदार उन जमीनों से किसानों को बेदखल कर रहे थे जिन्हें किसान स्वयं जोतते थे। 1936 में लखनऊ में अखिल भारतीय किसान सभा का गठन हुआ, जिसने इस आंदोलन को राष्ट्रीय स्तर पर पहुँचाया। मुंगेर का बरहिया टाल क्षेत्र बकाश्त संघर्ष का सबसे प्रमुख केंद्र बना। स्वामी जी ने 'लोक संग्रह' जैसे समाचार पत्रों के माध्यम से किसानों की पीड़ा को जनता के सामने रखा।

मुख्य तथ्य

तालिका

अभ्यास प्रश्न (हल सहित)

(क) 1928, पटना (ख) 1929, सोनपुर (ग) 1936, लखनऊ (घ) 1930, मुंगेर

(क) स्वामी सहजानंद सरस्वती (ख) एन.जी. रंगा (ग) कार्यानंद शर्मा (घ) इन्दुलाल याज्ञिक

(क) नील की खेती का विरोध (ख) जमींदारों द्वारा बेदखल की गई भूमि की वापसी (ग) लगान में वृद्धि की मांग (घ) नमक कानून का उल्लंघन

1. बिहार प्रांतीय किसान सभा के प्रथम सचिव श्री कृष्ण सिंह थे।

2. बकाश्त आंदोलन का नेतृत्व मुंगेर में कार्यानंद शर्मा ने किया था।

(क) केवल 1 (ख) केवल 2 (ग) 1 और 2 दोनों (घ) इनमें से कोई नहीं

📜 असली पिछले वर्ष के प्रश्न (BPSC)

(क) राज कुमार शुक्ला (ख) सहजानन्द सरस्वती (ग) आचार्य नरेन्द्र देव (घ) बाबा रामचन्द्र

(क) द ब्रोकेन विंग (ख) लोक संग्रह (ग) निर्बल सेवक (घ) इण्डियन नेशन

परीक्षा में कैसे आता है

BPSC में इस विषय से अक्सर बिहार प्रांतीय किसान सभा की स्थापना की तिथि, इसके प्रथम अध्यक्ष (स्वामी सहजानंद) और सचिव (श्री कृष्ण सिंह) के बारे में पूछा जाता है। बकाश्त आंदोलन का अर्थ और इसके प्रमुख केंद्र (मुंगेर/बरहिया टाल) से संबंधित प्रश्न भी बार-बार दोहराए जाते हैं।

इनमें भ्रम न करें

💡 सोनपुर में '29' में सहजानंद ने 'प्रांतीय' बिगुल फूँका और '36' में लखनऊ जाकर 'अखिल भारतीय' नेता बने।

आंदोलनों के परिणाम और नेताओं की रचनाएँ

बिहार के जनजातीय और किसान आंदोलनों ने न केवल ब्रिटिश सत्ता को चुनौती दी, बल्कि दूरगामी कानूनी और सामाजिक बदलाव भी लाए। संथाल विद्रोह के बाद संथाल परगना जिला बना, जबकि बिरसा मुंडा के उलगुलान के परिणामस्वरूप 1908 का छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम (CNT Act) पारित हुआ। किसान आंदोलनों ने चंपारण कृषि अधिनियम (1918) और बकाश्त भूमि की वापसी जैसे महत्वपूर्ण सुधारों का मार्ग प्रशस्त किया। इन आंदोलनों के वैचारिक आधार को मजबूत करने में स्वामी सहजानंद सरस्वती और राहुल सांकृत्यायन जैसे नेताओं की लेखनी का बड़ा योगदान रहा। उनकी पुस्तकों और पत्रिकाओं ने किसानों और आदिवासियों में राजनीतिक चेतना जगाई। 'हुंकार' जैसी पत्रिकाओं ने पटना से किसान संघर्षों की आवाज को बुलंद किया।

मुख्य तथ्य

तालिका

अभ्यास प्रश्न (हल सहित)

(क) 1885 (ख) 1905 (ग) 1908 (घ) 1918

(क) मेरा संघर्ष (ख) मेरा जीवन संघर्ष (ग) किसान और क्रांति (घ) भारत का किसान

(क) राहुल सांकृत्यायन (ख) राजेंद्र प्रसाद (ग) श्री कृष्ण सिंह (घ) अनुग्रह नारायण सिंह

(क) किसान कैसे लड़ते हैं (ख) खेत मजदूर (ग) झारखंड के किसान (घ) दिमागी गुलामी

(क) 1917 (ख) 1918 (ग) 1919 (घ) 1920

परीक्षा में कैसे आता है

BPSC में अक्सर आंदोलनों के बाद पारित कानूनों (जैसे CNT Act, SPT Act) के वर्ष और किसान नेताओं की प्रसिद्ध पुस्तकों के नाम पूछे जाते हैं।

इनमें भ्रम न करें

💡 सहज जीवन का संघर्ष (सहजानंद - मेरा जीवन संघर्ष) और 'हुंकार' भरते राहुल (राहुल सांकृत्यायन - हुंकार)।

एक नज़र में (Revision)

अपने आप को जाँचिए — 10 प्रश्न

1. बिहार में 1784 में ब्रिटिश सत्ता के विरुद्ध विद्रोह करने वाले पहले जनजातीय नेता कौन थे?

  1. (क) सिद्धू मुर्मू
  2. (ख) बिरसा मुंडा
  3. (ग) तिलका मांझी
  4. (घ) बुद्धू भगत
उत्तर देखें

उत्तर: (ग) तिलका मांझी

तिलका मांझी ने 1784 में भागलपुर क्षेत्र में अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह का नेतृत्व किया था और उन्हें 1785 में फांसी दी गई थी।

2. 1831-32 के कोल विद्रोह का नेतृत्व निम्नलिखित में से किसने किया था?

  1. (क) जतरा भगत
  2. (ख) बुद्धू भगत
  3. (ग) कान्हू मुर्मू
  4. (घ) भैरव
उत्तर देखें

उत्तर: (ख) बुद्धू भगत

बुद्धू भगत कोल विद्रोह के प्रमुख नेता थे, जो छोटानागपुर क्षेत्र में बाहरी लोगों (दिक्कुओं) के प्रवेश के खिलाफ था।

3. संथाल विद्रोह (1855-56) के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन से नेता भाइयों का समूह सही है?

  1. (क) सिद्धू, कान्हू, चाँद और भैरव
  2. (ख) बिरसा, गया और कोन्टा
  3. (ग) जतरा, बलराम और देवमनिया
  4. (घ) तिलका, सिद्धू और बुद्धू
उत्तर देखें

उत्तर: (क) सिद्धू, कान्हू, चाँद और भैरव

संथाल हूल का नेतृत्व चार भाइयों - सिद्धू, कान्हू, चाँद और भैरव ने किया था।

4. बिरसा मुंडा के विद्रोह को किस अन्य नाम से जाना जाता है?

  1. (क) हूल
  2. (ख) उलगुलान
  3. (ग) सफा होड़
  4. (घ) ताना भगत
उत्तर देखें

उत्तर: (ख) उलगुलान

बिरसा मुंडा के विद्रोह (1899-1900) को 'उलगुलान' कहा जाता है, जिसका अर्थ है 'महान हलचल'।

5. 1914 में शुरू हुए ताना भगत आंदोलन के प्रणेता कौन थे?

  1. (क) कार्यानंद शर्मा
  2. (ख) जतरा भगत
  3. (ग) यदुवंश सहाय
  4. (घ) सहजानंद सरस्वती
उत्तर देखें

उत्तर: (ख) जतरा भगत

ताना भगत आंदोलन की शुरुआत 1914 में जतरा भगत ने की थी, जो एक धार्मिक और सांस्कृतिक सुधार आंदोलन के रूप में शुरू हुआ था।

6. चंपारण में प्रचलित 'तिनकठिया' प्रणाली का क्या अर्थ था?

  1. (क) प्रति बीघा 3 कट्ठा नील की खेती
  2. (ख) प्रति बीघा 10 कट्ठा नील की खेती
  3. (ग) प्रति बीघा 5 कट्ठा नील की खेती
  4. (घ) उपरोक्त में से कोई नहीं / एक से अधिक
उत्तर देखें

उत्तर: (क) प्रति बीघा 3 कट्ठा नील की खेती

तिनकठिया प्रणाली के तहत किसानों को अपनी भूमि के प्रत्येक 20 कट्ठा (1 बीघा) में से 3 कट्ठा पर नील उगाना अनिवार्य था।

7. बिहार प्रांतीय किसान सभा (BPKS) की स्थापना किस वर्ष और कहाँ हुई थी?

  1. (क) 1922, मुंगेर
  2. (ख) 1929, सोनपुर
  3. (ग) 1936, लखनऊ
  4. (घ) 1930, पटना
उत्तर देखें

उत्तर: (ख) 1929, सोनपुर

स्वामी सहजानंद सरस्वती ने नवंबर 1929 में सोनपुर मेले के दौरान बिहार प्रांतीय किसान सभा की स्थापना की थी।

8. मुंगेर के बरहिया ताल में 'बकाश्त आंदोलन' का नेतृत्व किसने किया था?

  1. (क) राहुल सांकृत्यायन
  2. (ख) पंचानन शर्मा
  3. (ग) कार्यानंद शर्मा
  4. (घ) यदुनंदन शर्मा
उत्तर देखें

उत्तर: (ग) कार्यानंद शर्मा

कार्यानंद शर्मा ने मुंगेर के बरहिया ताल (बकाश्त भूमि) में किसानों के अधिकारों के लिए आंदोलन का नेतृत्व किया था।

9. स्वामी सहजानंद सरस्वती द्वारा लिखित आत्मकथा का शीर्षक क्या है?

  1. (क) बंदी जीवन
  2. (ख) मेरा जीवन संघर्ष
  3. (ग) भारत दुर्दशा
  4. (घ) किसान क्या करें
उत्तर देखें

उत्तर: (ख) मेरा जीवन संघर्ष

स्वामी सहजानंद सरस्वती की आत्मकथा का नाम 'मेरा जीवन संघर्ष' है, जो किसान आंदोलनों के इतिहास के लिए महत्वपूर्ण है।

10. निम्नलिखित कथनों पर विचार करें: 1. सरदारी लड़ाई मुंडा विद्रोह की प्रस्तावना थी। 2. 1936 में अखिल भारतीय किसान सभा के सचिव एन.जी. रंगा थे। सही कूट चुनें:

  1. (क) केवल 1
  2. (ख) केवल 2
  3. (ग) 1 और 2 दोनों
  4. (घ) न तो 1 और न ही 2
उत्तर देखें

उत्तर: (ग) 1 और 2 दोनों

दोनों कथन सही हैं। सरदारी लड़ाई ने मुंडा विद्रोह की जमीन तैयार की और एन.जी. रंगा अखिल भारतीय किसान सभा के पहले सचिव थे।

English version — Tribal and Peasant Movements of Bihar

This chapter is crucial for BPSC Prelims and Mains as it illustrates the foundation of resistance against British rule in Bihar. Questions regarding tribal revolts and Kisan Sabhas are frequently asked every year.

Major Tribal Revolts of Bihar

Tribal communities in Bihar launched several armed revolts against British exploitation and oppressive landlords. Tilka Manjhi challenged the British in the Bhagalpur region in 1784, becoming the first tribal martyr. The Kol Revolt (1831-32) in Chotanagpur was a reaction against the interference of outsiders (Dikkus). The Santhal Hul (1855), led by Sidhu and Kanhu, was a massive uprising against British authority. Birsa Munda's 'Ulgulan' (1899-1900) was a significant movement that combined political resistance with religious and social reforms.

Key facts

Table

Practice questions (solved)

(क) सिद्धू-कान्हू (ख) बिरसा मुंडा (ग) बुद्धू भगत (घ) तिलका मांझी

(क) संथाल (ख) कोल (ग) मुंडा (घ) चेरो

(क) कच्छ (ख) सिंहभूम (ग) पश्चिमी घाट (घ) सतारा

(क) संथाल-1855 (ख) कोल-1831 (ग) मुंडा-1899 (घ) तिलका मांझी-1810

(क) 1905 (ख) 1908 (ग) 1911 (घ) 1917

How it is asked

BPSC frequently asks about the years of revolts, the leaders, and the names of British officers involved. Match-the-following questions are very common.

Do not confuse

💡 सिद्धू-कान्हू ने 55 में हूल किया, बिरसा ने 99 में उलगुलान मचाया।

Tana Bhagat and Sardari Movements

The Sardari movement (1858-1895) was a long-drawn struggle led by Munda and Oraon tribal chiefs in the Chota Nagpur region against landlord oppression, forced labor (Beth Begari), and the erosion of traditional Khuntkatti land rights. It laid the foundation for Birsa Munda's Ulgulan. Later, in April 1914, the Tana Bhagat movement was initiated under the leadership of Jatra Bhagat. Initially a socio-religious reform movement among the Oraon tribe focused on monotheism and abstinence from alcohol and meat, it soon transformed into an anti-British agrarian protest. Tana Bhagats adopted complete non-violence, refusing to pay land revenue and Chaukidari taxes. It is regarded as the first non-violent tribal satyagraha and actively merged with Mahatma Gandhi's Non-Cooperation Movement.

Key facts

Table

Practice questions (solved)

(क) 1905 ई. (ख) 1914 ई. (ग) 1920 ई. (घ) 1930 ई.

(क) सिद्धू और कान्हू (ख) बिरसा मुंडा (ग) जातरा भगत (घ) तिलका मांझी

(क) कोल विद्रोह (ख) सरदारी आंदोलन (ग) संथाल हुल (घ) तमाड़ विद्रोह

(क) संथाल (ख) कोल (ग) ताना भगत (घ) चेरो

(क) यह मुख्य रूप से ओरांव जनजाति से संबंधित था। (ख) यह आदिवासियों का एक अहिंसक आंदोलन था। (ग) इन्होंने अंग्रेजों को चौकीदारी कर देने का समर्थन किया। (घ) इन्होंने असहयोग आंदोलन में सक्रिय रूप से भाग लिया।

How it is asked

In BPSC Prelims, questions on the Tana Bhagat movement focus directly on its start year (1914), founder (Jatra Bhagat), associated tribe (Oraon), and its connection to the national movement (Non-Cooperation Movement and Gaya Congress 1922).

Do not confuse

💡 ट्रिक: '14 में जातरा ने ताना कसा' -> 1914 में जातरा भगत ने ताना भगत आंदोलन शुरू किया।

Indigo Cultivation and Tinkathia System in Champaran

In Champaran, European indigo planters imposed the 'Tinkathia' system, requiring farmers to cultivate indigo on 3 out of every 20 katthas of their land. With the advent of synthetic dyes in Germany in the late 19th century, the demand for natural indigo declined, leading planters to extract illegal taxes (Sharahbeshi and Tawan) from farmers in exchange for releasing them from contracts. At the persistent invitation of Raj Kumar Shukla, Mahatma Gandhi arrived in Champaran in 1917, marking his first Civil Disobedience movement in India. Under pressure, the government formed the 'Champaran Agrarian Committee', with Gandhi as a member. Based on the committee's recommendations, the Tinkathia system was abolished, and planters agreed to refund 25% of the illegally collected money. The movement was a success, and it was during this time that Rabindranath Tagore bestowed the title 'Mahatma' upon Gandhi.

Key facts

Table

Practice questions (solved)

(क) 3/20 भू-भाग पर नील की खेती करना (ख) 3/19 भू-भाग पर नील की खेती करना (ग) 3/18 भू-भाग पर नील की खेती करना (घ) उपरोक्त में से कोई नहीं

(क) राजेंद्र प्रसाद (ख) राजकुमार शुक्ल (ग) मजहरुल हक (घ) महादेव देसाई

(क) यह गांधीजी का भारत में पहला सत्याग्रह था (ख) यह तिनकठिया प्रणाली के विरुद्ध था (ग) एन.जी. रंगा ने इसका समर्थन किया था (घ) रवींद्रनाथ टैगोर ने गांधीजी को 'महात्मा' की उपाधि दी

(क) महात्मा गांधी (ख) एफ.जी. स्लाई (ग) एल.सी. एडेमी (घ) डी.जे. रीड

(क) 20 प्रतिशत (ख) 25 प्रतिशत (ग) 50 प्रतिशत (घ) 100 प्रतिशत

📜 Real previous-year questions (BPSC)

सूची-I

घटना/संगठन

a) चंपारन सत्याग्रह

b) आज़ाद दस्ता

c) 1940 में बिहार में व्यक्तिगत सत्याग्रह

d) किसान सभा बिहार

सूची-II

सम्बन्धित व्यक्ति

1) जयप्रकाश नारायण

2) श्याम नारायण सिंह

3) सहजानन्द सरस्वती

4) डॉ. राजेन्द्र प्रसाद

नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए :

(क) a-4, b-2, c-3, d-1 (ख) a-2, b-3, c-1, d-4 (ग) a-1, b-4, c-3, d-2 (घ) a-4, b-1, c-2, d-3

How it is asked

BPSC frequently asks questions on this topic, especially the ratio of Tinkathia (3/20), the name of Raj Kumar Shukla, the list of Gandhi's associates, and details about the Champaran Agrarian Committee.

Do not confuse

💡 राजकुमार (शुक्ल) ने 16 (1916) में गांधी को 3/20 नील के लिए बुलाया।

Kisan Sabha: Swami Sahajanand Saraswati and Bakasht Movement

The peasant movement in Bihar emerged as a reaction against landlord exploitation and the eviction of tenants. Swami Sahajanand Saraswati founded the Bihar Provincial Kisan Sabha (BPKS) in November 1929 during the Sonpur Fair, providing a structured platform for farmers. The movement's primary focus was the 'Bakasht' land issue, where landlords were evicting tenants from lands they traditionally cultivated. In 1936, the All India Kisan Sabha was formed in Lucknow, elevating the struggle to a national level. Barahiya Tal in Munger became a significant center for the Bakasht struggle. Through publications like 'Lok Sangrah', Swami Sahajanand highlighted the distress of the peasantry to the masses.

Key facts

Table

Practice questions (solved)

(क) 1928, पटना (ख) 1929, सोनपुर (ग) 1936, लखनऊ (घ) 1930, मुंगेर

(क) स्वामी सहजानंद सरस्वती (ख) एन.जी. रंगा (ग) कार्यानंद शर्मा (घ) इन्दुलाल याज्ञिक

(क) नील की खेती का विरोध (ख) जमींदारों द्वारा बेदखल की गई भूमि की वापसी (ग) लगान में वृद्धि की मांग (घ) नमक कानून का उल्लंघन

1. बिहार प्रांतीय किसान सभा के प्रथम सचिव श्री कृष्ण सिंह थे।

2. बकाश्त आंदोलन का नेतृत्व मुंगेर में कार्यानंद शर्मा ने किया था।

(क) केवल 1 (ख) केवल 2 (ग) 1 और 2 दोनों (घ) इनमें से कोई नहीं

📜 Real previous-year questions (BPSC)

(क) राज कुमार शुक्ला (ख) सहजानन्द सरस्वती (ग) आचार्य नरेन्द्र देव (घ) बाबा रामचन्द्र

(क) द ब्रोकेन विंग (ख) लोक संग्रह (ग) निर्बल सेवक (घ) इण्डियन नेशन

How it is asked

BPSC frequently asks about the formation date of the Bihar Provincial Kisan Sabha, its first President (Swami Sahajanand), and Secretary (Shri Krishna Singh). Questions regarding the meaning of the Bakasht movement and its major centers (Munger/Barahiya Tal) are also recurrent.

Do not confuse

💡 सोनपुर में '29' में सहजानंद ने 'प्रांतीय' बिगुल फूँका और '36' में लखनऊ जाकर 'अखिल भारतीय' नेता बने।

Results of Movements and Leaders' Writings

The tribal and peasant movements in Bihar not only challenged British authority but also brought long-term legal and social changes. The Santhal rebellion led to the creation of the Santhal Pargana district, while Birsa Munda's Ulgulan resulted in the Chotanagpur Tenancy Act (CNT Act) of 1908. Peasant movements paved the way for significant reforms like the Champaran Agrarian Act (1918) and the restoration of Bakasht land. The writings of leaders like Swami Sahajanand Saraswati and Rahul Sankrityayan played a major role in strengthening the ideological base of these movements. Their books and journals awakened political consciousness among peasants and tribals. Journals like 'Hunkar' from Patna amplified the voice of peasant struggles.

Key facts

Table

Practice questions (solved)

(क) 1885 (ख) 1905 (ग) 1908 (घ) 1918

(क) मेरा संघर्ष (ख) मेरा जीवन संघर्ष (ग) किसान और क्रांति (घ) भारत का किसान

(क) राहुल सांकृत्यायन (ख) राजेंद्र प्रसाद (ग) श्री कृष्ण सिंह (घ) अनुग्रह नारायण सिंह

(क) किसान कैसे लड़ते हैं (ख) खेत मजदूर (ग) झारखंड के किसान (घ) दिमागी गुलामी

(क) 1917 (ख) 1918 (ग) 1919 (घ) 1920

How it is asked

BPSC frequently asks about the years of acts passed after movements (like CNT Act, SPT Act) and the names of famous books by peasant leaders.

Do not confuse

💡 सहज जीवन का संघर्ष (सहजानंद - मेरा जीवन संघर्ष) और 'हुंकार' भरते राहुल (राहुल सांकृत्यायन - हुंकार)।

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