यह अध्याय बीपीएससी प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में बिहार की अग्रणी भूमिका को दर्शाता है। इसमें गांधीजी के पहले सत्याग्रह से लेकर 1942 की क्रांति तक के बिहार के योगदान का विवरण है।
चंपारण सत्याग्रह 1917
1917 का चंपारण सत्याग्रह भारत की धरती पर महात्मा गांधी का पहला सफल सत्याग्रह आंदोलन था। चंपारण के किसानों पर यूरोपीय नील बागान मालिकों द्वारा तिनकठिया प्रथा थोप दी गई थी, जिसके तहत भूमि के 3/20 भाग पर नील उगाना अनिवार्य था। स्थानीय किसान राजकुमार शुक्ल ने 1916 के लखनऊ कांग्रेस अधिवेशन में गांधीजी से मिलकर उन्हें चंपारण आने का न्योता दिया। अप्रैल 1917 में गांधीजी चंपारण पहुंचे, जहां डॉ. राजेंद्र प्रसाद, अनुग्रह नारायण सिंह, जे.बी. कृपलानी और ब्रजकिशोर प्रसाद जैसे नेताओं ने उनका साथ दिया। सरकार ने चंपारण कृषि जांच समिति गठित की, जिसके दबाव में तिनकठिया प्रथा समाप्त हुई और चंपारण एग्रेरियन एक्ट पारित हुआ।
मुख्य तथ्य
- राजकुमार शुक्ल ने 1916 के लखनऊ कांग्रेस अधिवेशन में महात्मा गांधी को चंपारण आने का न्योता दिया था।
- राजकुमार शुक्ल पश्चिमी चंपारण जिले के मुरली भरहवा गांव के निवासी थे।
- तिनकठिया प्रणाली के तहत किसानों को अपनी जमीन के 3/20वें भाग (प्रति बीघा 3 कट्ठा) पर नील की खेती करना अनिवार्य था।
- महात्मा गांधी 10 अप्रैल 1917 को पटना पहुंचे और 15 अप्रैल 1917 को मोतिहारी (चंपारण) पहुंचे।
- गांधीजी के प्रमुख सहयोगियों में डॉ. राजेंद्र प्रसाद, ब्रजकिशोर प्रसाद, अनुग्रह नारायण सिंह, जे.बी. कृपलानी और मज़रहूल हक़ शामिल थे।
- चंपारण जांच समिति (Champaran Agrarian Committee) के अध्यक्ष एफ.जी. सलाई (F.G. Sly) थे और गांधीजी इसके सदस्य थे।
- यूरोपीय नील बागान मालिकों ने किसानों से अवैध रूप से वसूले गए धन का 25 प्रतिशत हिस्सा वापस करने पर सहमति व्यक्त की।
- चंपारण एग्रेरियन एक्ट 1918 में पारित हुआ, जिससे तिनकठिया प्रथा कानूनी रूप से समाप्त हो गई।
- रवींद्रनाथ टैगोर ने चंपारण सत्याग्रह की सफलता के बाद मोहनदास करमचंद गांधी को 'महात्मा' की उपाधि दी थी।
- चंपारण सत्याग्रह के समय बिहार के उप-राज्यपाल (Lt. Governor) एडवर्ड अल्बर्ट गेट (Edward Albert Gait) थे।
- गणेश शंकर विद्यार्थी द्वारा संपादित समाचार पत्र 'प्रताप' ने चंपारण के किसानों की समस्याओं को व्यापक रूप से उठाया था।
तालिका
- पक्ष/संगठन: किसान निमंत्रणकर्ता · प्रमुख व्यक्ति/भूमिका: राजकुमार शुक्ल (मुरली भरहवा गांव) · मुख्य कार्य / परिणाम: लखनऊ कांग्रेस अधिवेशन (1916) में गांधीजी को चंपारण आने का न्योता दिया
- पक्ष/संगठन: गांधीजी के मुख्य सहयोगी · प्रमुख व्यक्ति/भूमिका: डॉ. राजेंद्र प्रसाद, अनुग्रह नारायण सिंह, जे.बी. कृपलानी, ब्रजकिशोर प्रसाद · मुख्य कार्य / परिणाम: किसानों के बयान दर्ज किए और कानूनी साक्ष्य एकत्र करने में सहायता की
- पक्ष/संगठन: चंपारण कृषि जांच समिति · प्रमुख व्यक्ति/भूमिका: एफ.जी. सलाई (अध्यक्ष), महात्मा गांधी (सदस्य) · मुख्य कार्य / परिणाम: तिनकठिया प्रथा को समाप्त करने की सिफारिश और 25% अवैध कर की वापसी
- पक्ष/संगठन: कानूनी सुधार · प्रमुख व्यक्ति/भूमिका: चंपारण एग्रेरियन एक्ट (1918) · मुख्य कार्य / परिणाम: नील बागान मालिकों द्वारा थोपे गए तिनकठिया कानून का आधिकारिक अंत
अभ्यास प्रश्न (हल सहित)
- प्रश्न 1: चंपारण सत्याग्रह के दौरान लागू 'तिनकठिया प्रथा' का क्या अर्थ था?
(क) भूमि के 1/3 भाग पर नील की खेती करना (ख) भूमि के 3/20 भाग पर नील की खेती करना (ग) 3 वर्षों तक लगान माफ करना (घ) कुल उपज का 3% कर के रूप में देना
- ✔ उत्तर: (ख) भूमि के 3/20 भाग पर नील की खेती करना — तिनकठिया प्रथा का अर्थ प्रति बीघा (20 कट्ठा) में से 3 कट्ठा अर्थात् 3/20 भाग पर नील उगाने की अनिवार्यता थी।
- प्रश्न 2: 1916 के लखनऊ कांग्रेस अधिवेशन में महात्मा गांधी को चंपारण के किसानों की समस्या से किसने अवगत कराया था?
(क) डॉ. राजेंद्र प्रसाद (ख) अनुग्रह नारायण सिंह (ग) राज कुमार शुक्ल (घ) ब्रजकिशोर प्रसाद
- ✔ उत्तर: (ग) राज कुमार शुक्ल — मुरली भरहवा के किसान नेता राजकुमार शुक्ल ने 1916 के लखनऊ अधिवेशन में गांधीजी से भेंट कर चंपारण आने का निमंत्रण दिया था।
- प्रश्न 3: चंपारण कृषि जांच समिति (Champaran Agrarian Committee) के अध्यक्ष निम्नलिखित में से कौन थे?
(क) महात्मा गांधी (ख) एफ.जी. सलाई (F.G. Sly) (ग) एडवर्ड गेट (घ) एल.सी. अदामी
- ✔ उत्तर: (ख) एफ.जी. सलाई (F.G. Sly) — चंपारण कृषि जांच समिति के अध्यक्ष मध्य प्रांत के आयुक्त एफ.जी. सलाई थे, जबकि गांधीजी इसके सदस्य थे।
- प्रश्न 4: चंपारण सत्याग्रह के दौरान यूरोपीय बागान मालिक किसानों से वसूले गए अवैध धन का कितना प्रतिशत वापस करने पर सहमत हुए?
(क) 10 प्रतिशत (ख) 25 प्रतिशत (ग) 50 प्रतिशत (घ) 100 प्रतिशत
- ✔ उत्तर: (ख) 25 प्रतिशत — गांधीजी की बातचीत के बाद यूरोपीय बागान मालिक अवैध रूप से वसूले गए धन का 25% वापस लौटाने पर सहमत हुए।
- प्रश्न 5: निम्नलिखित में से कौन-सा/से कथन चंपारण सत्याग्रह (1917) के संबंध में सही है/हैं?
1. गांधीजी 15 अप्रैल 1917 को मोतिहारी पहुंचे।
2. चंपारण सत्याग्रह के परिणामस्वरूप तिनकठिया प्रथा समाप्त हो गई।
3. डॉ. राजेंद्र प्रसाद और जे.बी. कृपलानी गांधीजी के सहयोगी थे।
(क) केवल 1 और 2 (ख) केवल 2 और 3 (ग) 1, 2 और 3 (घ) केवल 1
- ✔ उत्तर: (ग) 1, 2 और 3 — तीनों कथन ऐतिहासिक रूप से पूर्णतः सत्य हैं।
📜 असली पिछले वर्ष के प्रश्न (BPSC)
- [BPSC 71वीं प्रारंभिक (13 सितंबर 2025), प्रश्न 82] चम्पारन कृषि कमेटी की नियुक्ति में किसके बीच समझौता हुआ?
(क) भारतीय सरकार और गाँधीजी (ख) भारतीय सरकार और राज कुमार शुक्ला (ग) भारतीय सरकार और राजेन्द्र प्रसाद (घ) भारतीय सरकार और अनुग्रह नारायण सिंह
- ✔ आधिकारिक उत्तर: (क) भारतीय सरकार और गाँधीजी — चंपारण कृषि समिति (Champaran Agrarian Committee) का गठन ब्रिटिश सरकार और महात्मा गांधी के बीच सहमति के बाद हुआ था, जिसमें गांधीजी को किसान प्रतिनिधि के रूप में सदस्य बनाया गया था।
- [BPSC 71वीं प्रारंभिक (13 सितंबर 2025), प्रश्न 100] सूची-I को सूची-II के साथ सुमेलित कीजिए।
सूची-I
घटना/संगठन
a) चंपारन सत्याग्रह
b) आज़ाद दस्ता
c) 1940 में बिहार में व्यक्तिगत सत्याग्रह
d) किसान सभा बिहार
सूची-II
सम्बन्धित व्यक्ति
1) जयप्रकाश नारायण
2) श्याम नारायण सिंह
3) सहजानन्द सरस्वती
4) डॉ. राजेन्द्र प्रसाद
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए :
(क) a-4, b-2, c-3, d-1 (ख) a-2, b-3, c-1, d-4 (ग) a-1, b-4, c-3, d-2 (घ) a-4, b-1, c-2, d-3
- ✔ आधिकारिक उत्तर: (घ) a-4, b-1, c-2, d-3 — 1917 के चंपारण सत्याग्रह के दौरान डॉ. राजेंद्र प्रसाद गांधीजी के प्रमुख स्थानीय सहयोगियों में से एक थे।
परीक्षा में कैसे आता है
BPSC की प्रारंभिक परीक्षा में चंपारण सत्याग्रह से हर वर्ष प्रश्न पूछे जाते हैं। प्रश्न मुख्य रूप से तिनकठिया प्रणाली का अनुपात (3/20), राजकुमार शुक्ल का गांव (मुरली भरहवा), चंपारण कृषि समिति के अध्यक्ष (एफ.जी. सलाई), गांधीजी के प्रमुख सहयोगियों के नाम और वापसी की गई राशि (25%) पर आधारित होते हैं।
इनमें भ्रम न करें
- ✘ तिनकठिया प्रथा का अनुपात 3/20 है (प्रति बीघा 3 कट्ठा), इसे 3/10 या 1/3 से भ्रमित न करें।
- ✘ चंपारण कृषि समिति के अध्यक्ष एफ.जी. सलाई थे; महात्मा गांधी समिति के सदस्य थे, अध्यक्ष नहीं।
- ✘ अवैध वसूली की वापसी का प्रतिशत 25% था, 50% या 100% नहीं।
💡 तिनकठिया = 3/20 (20 कट्ठा में 3 कट्ठा नील); सलाई = तिनकठिया प्रथा की 'सिलाई/समाप्ति' करने वाले अध्यक्ष सलाई।
बिहार में असहयोग एवं खिलाफत आंदोलन, बिहार विद्यापीठ और सदाकत आश्रम
बिहार में खिलाफत और असहयोग आंदोलन ने राष्ट्रीय आंदोलन को जन-जन तक पहुँचाया। 1919 में पटना में खिलाफत आंदोलन की शुरुआत हुई, जिसका नेतृत्व मौलाना मजहरुल हक, हसन इमाम और शफी दाऊदी ने किया। अगस्त 1920 में भागलपुर में डॉ. राजेंद्र प्रसाद की अध्यक्षता में बिहार प्रांतीय सम्मेलन में असहयोग प्रस्ताव पारित किया गया। आंदोलन के दौरान राष्ट्रीय शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए 6 फरवरी 1921 को महात्मा गांधी ने बिहार विद्यापीठ और बिहार राष्ट्रीय महाविद्यालय का उद्घाटन किया। पटना के दीघा में खैरू मियाँ द्वारा दान दी गई भूमि पर मौलाना मजहरुल हक ने सदाकत आश्रम की स्थापना की, जो बिहार कांग्रेस का मुख्य केंद्र बना। यहीं से मजहरुल हक ने राष्ट्रीय चेतना के प्रसार हेतु 'द मदरलैंड' (The Motherland) समाचार पत्र का प्रकाशन शुरू किया।
मुख्य तथ्य
- 1919 में पटना में खिलाफत आंदोलन का नेतृत्व मौलाना मजहरुल हक, हसन इमाम और शाह सुलेमान ने किया था।
- अगस्त 1920 में भागलपुर में आयोजित बिहार प्रांतीय सम्मेलन के 12वें अधिवेशन की अध्यक्षता डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने की, जिसमें असहयोग का प्रस्ताव पारित हुआ।
- 6 फरवरी 1921 को महात्मा गांधी ने पटना में बिहार विद्यापीठ का औपचारिक उद्घाटन किया।
- बिहार विद्यापीठ के प्रथम कुलपति (Chancellor) मौलाना मजहरुल हक और उप-कुलपति (Vice-Chancellor) ब्रजकिशोर प्रसाद बने।
- असहयोग आंदोलन के तहत स्थापित बिहार नेशनल कॉलेज (राष्ट्रीय महाविद्यालय) के प्रथम प्राचार्य डॉ. राजेंद्र प्रसाद बने।
- सदाकत आश्रम की स्थापना पटना के दीघा में खैरू मियाँ द्वारा दान में दी गई भूमि पर मौलाना मजहरुल हक द्वारा की गई थी।
- सितंबर 1921 में मौलाना मजहरुल हक ने सदाकत आश्रम से 'द मदरलैंड' (The Motherland) समाचार पत्र निकाला।
- 22 दिसंबर 1921 को प्रिंस ऑफ वेल्स के पटना आगमन पर पूरे शहर में हड़ताल का आयोजन किया गया और उनका व्यापक विरोध हुआ।
- 1922 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का 37वाँ वार्षिक अधिवेशन गया में आयोजित हुआ, जिसकी अध्यक्षता देशबंधु चितरंजन दास ने की।
- असहयोग आंदोलन के दौरान बिहार में शराबबंदी (नशाबंदी) अभियान बड़े पैमाने पर चलाया गया।
तालिका
- संस्थान / समाचार पत्र / घटना: बिहार विद्यापीठ · संस्थापक / प्रमुख व्यक्ति: महात्मा गांधी (उद्घाटनकर्ता) · स्थापना वर्ष / स्थान: 6 फरवरी 1921, पटना · महत्वपूर्ण तथ्य: प्रथम कुलपति: मौलाना मजहरुल हक; उप-कुलपति: ब्रजकिशोर प्रसाद
- संस्थान / समाचार पत्र / घटना: बिहार राष्ट्रीय महाविद्यालय · संस्थापक / प्रमुख व्यक्ति: डॉ. राजेंद्र प्रसाद (प्राचार्य) · स्थापना वर्ष / स्थान: 1921, पटना · महत्वपूर्ण तथ्य: असहयोग आंदोलन के दौरान छात्रों को राष्ट्रीय शिक्षा देने हेतु स्थापित
- संस्थान / समाचार पत्र / घटना: सदाकत आश्रम · संस्थापक / प्रमुख व्यक्ति: मौलाना मजहरुल हक · स्थापना वर्ष / स्थान: 1921, दीघा (पटना) · महत्वपूर्ण तथ्य: खैरू मियाँ की दान की गई भूमि पर निर्मित; बिहार कांग्रेस का मुख्यालय बना
- संस्थान / समाचार पत्र / घटना: द मदरलैंड (अखबार) · संस्थापक / प्रमुख व्यक्ति: मौलाना मजहरुल हक · स्थापना वर्ष / स्थान: सितंबर 1921, पटना · महत्वपूर्ण तथ्य: सदाकत आश्रम से प्रकाशित अंग्रेजी समाचार पत्र, राष्ट्रीय चेतना का प्रचारक
- संस्थान / समाचार पत्र / घटना: गया कांग्रेस अधिवेशन · संस्थापक / प्रमुख व्यक्ति: देशबंधु चितरंजन दास (अध्यक्ष) · स्थापना वर्ष / स्थान: 1922, गया · महत्वपूर्ण तथ्य: भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का 37वाँ अधिवेशन; स्वराज पार्टी के विचार की उत्पत्ति
अभ्यास प्रश्न (हल सहित)
- प्रश्न 6: 6 फरवरी 1921 को पटना में बिहार विद्यापीठ का उद्घाटन निम्नलिखित में से किसके द्वारा किया गया था?
(क) डॉ. राजेंद्र प्रसाद (ख) मौलाना मजहरुल हक (ग) महात्मा गांधी (घ) पंडित जवाहरलाल नेहरू
- ✔ उत्तर: (ग) महात्मा गांधी — 6 फरवरी 1921 को महात्मा गांधी ने बिहार विद्यापीठ का औपचारिक उद्घाटन किया था।
- प्रश्न 7: बिहार विद्यापीठ के प्रथम कुलपति (Chancellor) कौन नियुक्त किए गए थे?
(क) डॉ. राजेंद्र प्रसाद (ख) मौलाना मजहरुल हक (ग) ब्रजकिशोर प्रसाद (घ) अनुग्रह नारायण सिंह
- ✔ उत्तर: (ख) मौलाना मजहरुल हक — बिहार विद्यापीठ के प्रथम कुलपति मौलाना मजहरुल हक थे, जबकि उप-कुलपति ब्रजकिशोर प्रसाद थे।
- प्रश्न 8: पटना में सदाकत आश्रम की स्थापना हेतु भूमि किसने दान में दी थी?
(क) हसन इमाम (ख) खैरू मियाँ (ग) मजहरुल हक (घ) मोहम्मद शफी
- ✔ उत्तर: (ख) खैरू मियाँ — सदाकत आश्रम का निर्माण खैरू मियाँ द्वारा दान दी गई भूमि पर मौलाना मजहरुल हक ने किया था।
- प्रश्न 9: मौलाना मजहरुल हक ने सितंबर 1921 में सदाकत आश्रम से किस समाचार पत्र का प्रकाशन शुरू किया था?
(क) सर्चलाइट (ख) द मदरलैंड (ग) बिहार बंधु (घ) द इंडियन नेशन
- ✔ उत्तर: (ख) द मदरलैंड — मजहरुल हक ने राष्ट्रीय चेतना और असहयोग आंदोलन के प्रचार हेतु 'द मदरलैंड' पत्र निकाला था।
- प्रश्न 10: निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. अगस्त 1920 के बिहार प्रांतीय सम्मेलन के भागलपुर अधिवेशन में असहयोग आंदोलन का समर्थन किया गया। 2. बिहार राष्ट्रीय महाविद्यालय के प्रथम प्राचार्य डॉ. राजेंद्र प्रसाद थे। उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
(क) केवल 1 (ख) केवल 2 (ग) 1 और 2 दोनों (घ) न तो 1 और न ही 2
- ✔ उत्तर: (ग) 1 और 2 दोनों — भागलपुर अधिवेशन (अध्यक्षता राजेंद्र प्रसाद) में असहयोग का प्रस्ताव पारित हुआ था और राजेंद्र प्रसाद राष्ट्रीय महाविद्यालय के प्रथम प्राचार्य बने थे।
- प्रश्न 11: दिसंबर 1921 में प्रिंस ऑफ वेल्स के बिहार आगमन पर किस शहर में पूर्ण हड़ताल आयोजित की गई थी?
(क) गया (ख) मुजफ्फरपुर (ग) भागलपुर (घ) पटना
- ✔ उत्तर: (घ) पटना — 22 दिसंबर 1921 को प्रिंस ऑफ वेल्स के पटना आगमन पर शहर में पूर्ण हड़ताल और बहिष्कार किया गया था।
परीक्षा में कैसे आता है
BPSC प्रीलिम्स परीक्षा में बिहार विद्यापीठ के उद्घाटनकर्ता, उसके प्रथम कुलपति व प्राचार्य, सदाकत आश्रम की भूमि दान देने वाले व्यक्ति, तथा 'द मदरलैंड' समाचार पत्र के संस्थापक/संपादक से सीधे प्रश्न अक्सर पूछे जाते हैं।
इनमें भ्रम न करें
- ✘ बिहार विद्यापीठ के प्रथम 'कुलपति' मौलाना मजहरुल हक थे, जबकि बिहार राष्ट्रीय महाविद्यालय के प्रथम 'प्राचार्य' डॉ. राजेंद्र प्रसाद थे - छात्र अक्सर इन दोनों पदों में भ्रमित होते हैं।
- ✘ सदाकत आश्रम की स्थापना मौलाना मजहरुल हक ने की थी, लेकिन इसकी भूमि 'खैरू मियाँ' ने दान दी थी।
💡 ट्रिक: 'विद्यापीठ के हक (मजहरुल हक - कुलपति), कॉलेज के प्रसाद (राजेंद्र प्रसाद - प्राचार्य), आश्रम में खैर (खैरू मियाँ)'।
बिहार में सविनय अवज्ञा और नमक सत्याग्रह (नखास पिंड, बिहपुर)
सविनय अवज्ञा आंदोलन के दौरान बिहार में समुद्र तट न होने के कारण नमकीन मिट्टी (लोनिया मिट्टी) से नमक बनाकर कानून तोड़ा गया। डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने बिहार के लिए सत्याग्रह की रूपरेखा तैयार की और 6 अप्रैल 1930 की तिथि निर्धारित की, हालांकि वास्तविक शुरुआत 15 अप्रैल को हुई। पटना में 'नखास पिंड' नमक सत्याग्रह का मुख्य केंद्र बना, जहाँ अंबिका कांत सिंह के नेतृत्व में जत्थों ने पुलिस दमन का सामना किया। भागलपुर के बिहपुर में सत्याग्रहियों पर भीषण लाठीचार्ज हुआ, जिसमें डॉ. राजेंद्र प्रसाद और अब्दुल बारी घायल हुए। बिहार में इस आंदोलन की एक विशिष्ट विशेषता 'चौकीदारी कर' का बहिष्कार करना था, क्योंकि यहाँ नमक बनाना कठिन था। महिलाओं ने भी शराब और विदेशी कपड़ों की दुकानों पर धरना देकर इस आंदोलन में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
मुख्य तथ्य
- डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने बिहार में नमक सत्याग्रह की पूरी योजना तैयार की थी।
- बिहार में नमक सत्याग्रह की शुरुआत 15 अप्रैल 1930 को चंपारण और सारण जिलों से हुई।
- पटना में नमक सत्याग्रह के लिए 'नखास पिंड' नामक स्थान को चुना गया था।
- पटना में आंदोलन का नेतृत्व अंबिका कांत सिंह ने किया था।
- बिहपुर (भागलपुर) में सत्याग्रह के दौरान डॉ. राजेंद्र प्रसाद और प्रो. अब्दुल बारी पुलिस लाठीचार्ज में घायल हुए थे।
- बिहार में समुद्र न होने के कारण 'चौकीदारी कर' न देने का आंदोलन अत्यंत सफल रहा।
- मई 1930 में पटना में 'स्वदेशी समिति' का गठन किया गया, जिसके अध्यक्ष सर अली इमाम थे।
- बिहपुर में सरकार ने सत्याग्रह शिविर को जब्त कर लिया और गोरखा पुलिस को तैनात किया था।
- मुंगेर के बरही में चौकीदारी कर बंद करने के आंदोलन का नेतृत्व श्री कृष्ण सिंह ने किया था।
- जवाहरलाल नेहरू ने जून 1930 में बिहार का दौरा कर आंदोलन की प्रगति की समीक्षा की थी।
तालिका
- स्थान: पटना (नखास पिंड) · प्रमुख नेता: अंबिका कांत सिंह · मुख्य घटना/विशेषता: नमक कानून का उल्लंघन
- स्थान: चंपारण और सारण · प्रमुख नेता: विपिन बिहारी वर्मा · मुख्य घटना/विशेषता: बिहार में आंदोलन की शुरुआत (15 अप्रैल)
- स्थान: बिहपुर (भागलपुर) · प्रमुख नेता: राजेंद्र प्रसाद, अब्दुल बारी · मुख्य घटना/विशेषता: पुलिस लाठीचार्ज और सत्याग्रह
- स्थान: मुंगेर · प्रमुख नेता: श्री कृष्ण सिंह · मुख्य घटना/विशेषता: चौकीदारी कर का सफल बहिष्कार
अभ्यास प्रश्न (हल सहित)
- प्रश्न 12: बिहार में नमक सत्याग्रह का औपचारिक शुभारंभ किस तिथि को हुआ था?
(क) 6 अप्रैल 1930 (ख) 15 अप्रैल 1930 (ग) 12 मार्च 1930 (घ) 20 अप्रैल 1930
- ✔ उत्तर: (ख) 15 अप्रैल 1930 — बिहार में नमक सत्याग्रह की वास्तविक शुरुआत 15 अप्रैल 1930 को चंपारण और सारण से हुई थी।
- प्रश्न 13: पटना में नमक सत्याग्रह के लिए किस स्थान को केंद्र के रूप में चुना गया था?
(क) बांकीपुर मैदान (ख) सदाकत आश्रम (ग) नखास पिंड (घ) गांधी मैदान
- ✔ उत्तर: (ग) नखास पिंड — नखास पिंड पटना में नमक कानून तोड़ने का मुख्य स्थल था।
- प्रश्न 14: सविनय अवज्ञा आंदोलन के दौरान बिहार में कौन सा कर न देने का आंदोलन चलाया गया?
(क) चौकीदारी कर (ख) नमक कर (ग) आय कर (घ) उपरोक्त में से कोई नहीं
- ✔ उत्तर: (क) चौकीदारी कर — बिहार एक भू-आबद्ध राज्य था, इसलिए यहाँ चौकीदारी कर का बहिष्कार प्रमुख मुद्दा बना।
- प्रश्न 15: बिहपुर (भागलपुर) सत्याग्रह के दौरान पुलिस लाठीचार्ज में निम्नलिखित में से कौन घायल हुआ था?
(क) डॉ. राजेंद्र प्रसाद (ख) अब्दुल बारी (ग) अनुग्रह नारायण सिंह (घ) A और B दोनों
- ✔ उत्तर: (घ) A और B दोनों — बिहपुर में पुलिस दमन के दौरान राजेंद्र प्रसाद और अब्दुल बारी दोनों को चोटें आई थीं।
- प्रश्न 16: मई 1930 में पटना में गठित 'स्वदेशी समिति' के अध्यक्ष कौन थे?
(क) सच्चिदानंद सिन्हा (ख) सर अली इमाम (ग) हसन इमाम (घ) मजहरुल हक
- ✔ उत्तर: (ख) सर अली इमाम — 3 मई 1930 को सर अली इमाम की अध्यक्षता में स्वदेशी समिति बनाई गई थी।
परीक्षा में कैसे आता है
BPSC अक्सर नमक सत्याग्रह की शुरुआत की तारीख, पटना के विशिष्ट स्थल (नखास पिंड) और बिहपुर की घटना के नेताओं के बारे में पूछता है। चौकीदारी कर का बहिष्कार बिहार की एक अनूठी विशेषता के रूप में बार-बार पूछा जाता है।
इनमें भ्रम न करें
- ✘ 6 अप्रैल 1930 (निर्धारित तिथि) और 15 अप्रैल 1930 (वास्तविक शुरुआत) के बीच भ्रमित न हों।
- ✘ नखास पिंड पटना में है, जबकि बिहपुर भागलपुर जिले में स्थित है।
💡 नखास में 'न' से नमक और 'प' से पटना; बिहपुर में 'ब' से बारी (अब्दुल बारी) और 'ब' से भागलपुर।
भारत छोड़ो आंदोलन 1942: बिहार की भूमिका
8 अगस्त 1942 को गांधीजी के 'करो या मरो' के आह्वान के साथ भारत छोड़ो आंदोलन शुरू हुआ, जिसमें बिहार ने क्रांतिकारी भूमिका निभाई। 11 अगस्त 1942 को पटना सचिवालय पर झंडा फहराने के प्रयास में सात छात्र शहीद हो गए, जो बिहार के बलिदान का प्रतीक बना। जयप्रकाश नारायण 9 नवंबर 1942 (दिवाली की रात) को हजारीबाग जेल से भागकर नेपाल पहुंचे और वहां 'आजाद दस्ता' का गठन कर छापामार युद्ध का नेतृत्व किया। इस दौरान बिहार में समानांतर सरकारें बनीं और व्यापक जन-विद्रोह देखा गया। आंदोलन के दौरान बिहार में आधिकारिक रूप से 134 लोग शहीद हुए और 15,000 से अधिक लोगों को जेल भेजा गया। अंततः 12 अप्रैल 1946 को कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टी से प्रतिबंध हटने के बाद जयप्रकाश नारायण की रिहाई हुई।
मुख्य तथ्य
- 8 अगस्त 1942: बम्बई के ग्वालिया टैंक मैदान से भारत छोड़ो आंदोलन की शुरुआत हुई।
- 11 अगस्त 1942: पटना सचिवालय गोलीकांड हुआ, जिसमें 7 छात्र शहीद हुए।
- डब्लू.जी. आर्चर: पटना के तत्कालीन जिला मजिस्ट्रेट जिन्होंने सचिवालय पर गोली चलाने का आदेश दिया था।
- 9 नवंबर 1942: जयप्रकाश नारायण दिवाली की रात हजारीबाग जेल से अपने 5 साथियों के साथ भागे।
- आजाद दस्ता: जयप्रकाश नारायण द्वारा नेपाल के 'बकरी का टापू' में गठित छापामार संगठन।
- 15 अगस्त 1947: राज्यपाल जयरामदास दौलतराम ने पटना शहीद स्मारक की आधारशिला रखी।
- 1956: प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने शहीद स्मारक का औपचारिक अनावरण किया।
- 10 अगस्त 1942: भागलपुर के दीप नारायण सिंह को बिधौली आश्रम से गिरफ्तार किया गया।
- 12 अप्रैल 1946: सरकार ने कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टी से प्रतिबंध हटाया और जेपी नारायण रिहा हुए।
- बिहार में हताहत: आंदोलन के दौरान 134 शहीद, 15,000+ जेल गए और 8,783 को सजा हुई।
तालिका
- शहीद का नाम: उमाकांत प्रसाद सिन्हा · संस्थान/स्कूल: राम मोहन राय सेमीनरी
- शहीद का नाम: रामानंद सिंह · संस्थान/स्कूल: राम मोहन राय सेमीनरी
- शहीद का नाम: सतीश प्रसाद झा · संस्थान/स्कूल: पटना कॉलेजिएट
- शहीद का नाम: जगतपति कुमार · संस्थान/स्कूल: बिहार नेशनल कॉलेज
- शहीद का नाम: देवी पद चौधरी · संस्थान/स्कूल: मिलर हाई स्कूल
- शहीद का नाम: राजेंद्र सिंह · संस्थान/स्कूल: पटना हाई स्कूल
- शहीद का नाम: रामगोविंद सिंह · संस्थान/स्कूल: पुनपुन हाई स्कूल
अभ्यास प्रश्न (हल सहित)
- प्रश्न 17: 11 अगस्त 1942 को पटना सचिवालय गोलीकांड में शहीद होने वाले छात्रों की संख्या कितनी थी?
(क) 5 (ख) 7 (ग) 9 (घ) 11
- ✔ उत्तर: (ख) 7 — 11 अगस्त 1942 को झंडा फहराने के प्रयास में 7 छात्र शहीद हुए थे।
- प्रश्न 18: जयप्रकाश नारायण ने 'आजाद दस्ता' का गठन कहाँ किया था?
(क) हजारीबाग जेल (ख) पटना (ग) नेपाल (घ) भागलपुर
- ✔ उत्तर: (ग) नेपाल — जेपी ने हजारीबाग जेल से भागने के बाद नेपाल के जंगलों (बकरी का टापू) में आजाद दस्ता बनाया था।
- प्रश्न 19: पटना सचिवालय के सामने शहीद स्मारक की आधारशिला किसके द्वारा रखी गई थी?
(क) डॉ. राजेंद्र प्रसाद (ख) जयरामदास दौलतराम (ग) श्री कृष्ण सिंह (घ) अनुग्रह नारायण सिंह
- ✔ उत्तर: (ख) जयरामदास दौलतराम — 15 अगस्त 1947 को राज्यपाल जयरामदास दौलतराम ने इसकी आधारशिला रखी थी।
- प्रश्न 20: जयप्रकाश नारायण हजारीबाग जेल से किस त्योहार की रात को भागे थे?
(क) होली (ख) छठ (ग) दिवाली (घ) दशहरा
- ✔ उत्तर: (ग) दिवाली — 9 नवंबर 1942 को दिवाली की रात जेपी अपने साथियों के साथ जेल से फरार हुए थे।
- प्रश्न 21: भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान बिहार के किस जिले में दीप नारायण सिंह को गिरफ्तार किया गया था?
(क) पटना (ख) गया (ग) भागलपुर (घ) मुजफ्फरपुर
- ✔ उत्तर: (ग) भागलपुर — दीप नारायण सिंह भागलपुर के नेता थे जिन्हें 10 अगस्त 1942 को गिरफ्तार किया गया था।
📜 असली पिछले वर्ष के प्रश्न (BPSC)
- [BPSC 71वीं प्रारंभिक (13 सितंबर 2025), प्रश्न 84] बिक्रम पुलिस थाने के अन्तर्गत राष्ट्रीय ध्वज को फहराते समय किसको मार दिया गया था?
(क) गोराखड़ी के रघुनाथ सिंह (ख) बिक्रमपुर के राम नारायण (ग) गोराखड़ी के सत्येन्द्र (घ) उपरोक्त में से कोई नहीं
- ✔ आधिकारिक उत्तर: (घ) उपरोक्त में से कोई नहीं — यह प्रश्न भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान बिहार में ध्वज फहराने और पुलिस दमन (शहादत) की घटनाओं से संबंधित है।
परीक्षा में कैसे आता है
BPSC में इस उप-विषय से सचिवालय गोलीकांड की तिथि, शहीदों की संख्या, जेपी के जेल से भागने की तिथि और आजाद दस्ता के स्थान के बारे में बार-बार प्रश्न पूछे जाते हैं।
इनमें भ्रम न करें
- ✘ शहीद स्मारक की आधारशिला (1947) और अनावरण (1956) के वर्षों में भ्रम हो सकता है।
- ✘ गोली चलाने का आदेश देने वाला अधिकारी डब्लू.जी. आर्चर था, इसे अन्य पुलिस अधिकारियों के साथ न मिलाएं।
💡 हजारीबाग से दिवाली पर भागे जेपी और नेपाल में बनाया आजाद दस्ता।
बिहार में कांग्रेस अधिवेशन एवं 1946-47 में बिहार की भूमिका
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के इतिहास में बिहार की अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका रही है। अविभाजित बिहार में कांग्रेस के तीन प्रमुख अधिवेशन आयोजित किए गए। वर्ष 1912 में पटना के बाँकीपुर में बिहार का पहला (27वाँ) कांग्रेस अधिवेशन हुआ, जिसकी अध्यक्षता आर. एन. मधोलकर ने की थी। इसके बाद 1922 में गया में देशबंधु चितरंजन दास की अध्यक्षता में 37वाँ अधिवेशन आयोजित हुआ, जिससे स्वराज पार्टी के गठन की पृष्ठभूमि तैयार हुई। वर्ष 1940 में अविभाजित बिहार के रामगढ़ में मौलाना अबुल कलाम आजाद की अध्यक्षता में 53वाँ अधिवेशन संपन्न हुआ। स्वतंत्रता के अंतिम चरण (1946-47) में श्री कृष्ण सिंह के नेतृत्व में पुनः कांग्रेस मंत्रिमंडल का गठन हुआ तथा डॉ. राजेंद्र प्रसाद संविधान सभा के स्थायी अध्यक्ष चुने गए।
मुख्य तथ्य
- 1912 बाँकीपुर (पटना) अधिवेशन बिहार में कांग्रेस का पहला (27वाँ) अधिवेशन था, जिसके अध्यक्ष आर. एन. मधोलकर थे।
- 1912 के बाँकीपुर अधिवेशन में स्वागत समिति के अध्यक्ष मजहरुल हक तथा महामंत्री सच्चिदानंद सिन्हा थे।
- 1912 के बाँकीपुर अधिवेशन में ए. ओ. ह्यूम को औपचारिक रूप से 'कांग्रेस का पिता' घोषित किया गया था।
- 1922 का गया अधिवेशन कांग्रेस का 37वाँ अधिवेशन था, जिसकी अध्यक्षता चितरंजन दास (देशबंधु) ने की थी।
- 1922 के गया अधिवेशन में विधान परिषदों में प्रवेश के मुद्दे पर मतभेद के बाद 1923 में स्वराज पार्टी का गठन हुआ।
- 1940 का रामगढ़ अधिवेशन (53वाँ) मौलाना अबुल कलाम आजाद की अध्यक्षता में हुआ था, जो अविभाजित बिहार में आयोजित अंतिम अधिवेशन था।
- 1934 में अंजुमन इस्लामिया हॉल, पटना में बिहार कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टी का औपचारिक गठन हुआ था।
- 31 अक्टूबर 1939 को द्वितीय विश्व युद्ध में भारत को बिना सहमति शामिल करने के विरोध में बिहार के प्रथम कांग्रेस मंत्रिमंडल ने इस्तीफा दिया।
- अप्रैल 1946 में बिहार में श्री कृष्ण सिंह के नेतृत्व में पुनः द्वितीय कांग्रेस मंत्रिमंडल गठित हुआ।
- 9 दिसंबर 1946 को संविधान सभा की प्रथम बैठक में डॉ. सच्चिदानंद सिन्हा को अस्थायी अध्यक्ष चुना गया।
- 11 दिसंबर 1946 को डॉ. राजेंद्र प्रसाद सर्वसम्मति से भारत की संविधान सभा के स्थायी अध्यक्ष चुने गए।
- 1946 की अंतरिम सरकार में डॉ. राजेंद्र प्रसाद को खाद्य एवं कृषि विभाग का मंत्री बनाया गया था।
- मार्च 1947 में महात्मा गांधी ने बिहार के सांप्रदायिक दंगा प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर शांति स्थापित की थी।
तालिका
- वर्ष: 1912 · स्थान: बाँकीपुर (पटना) · अधिवेशन संख्या: 27वाँ · अध्यक्ष: आर. एन. मधोलकर · मुख्य विशेषता / घटना: बिहार में पहला कांग्रेस अधिवेशन; ए. ओ. ह्यूम को 'कांग्रेस का पिता' घोषित किया गया।
- वर्ष: 1922 · स्थान: गया · अधिवेशन संख्या: 37वाँ · अध्यक्ष: चितरंजन दास · मुख्य विशेषता / घटना: विधान परिषद प्रवेश पर मतभेद; स्वराज पार्टी के गठन का मार्ग प्रशस्त।
- वर्ष: 1940 · स्थान: रामगढ़ (वर्तमान झारखंड) · अधिवेशन संख्या: 53वाँ · अध्यक्ष: मौलाना अबुल कलाम आजाद · मुख्य विशेषता / घटना: अविभाजित बिहार में आयोजित अंतिम अधिवेशन; व्यक्तिगत सत्याग्रह का अनुमोदन।
अभ्यास प्रश्न (हल सहित)
- प्रश्न 22: बिहार में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का प्रथम अधिवेशन किस स्थान पर आयोजित किया गया था?
(क) गया (ख) बाँकीपुर (पटना) (ग) रामगढ़ (घ) मुजफ्फरपुर
- ✔ उत्तर: (ख) बाँकीपुर (पटना) — बिहार में कांग्रेस का पहला (27वाँ) अधिवेशन 1912 में बाँकीपुर (पटना) में आयोजित किया गया था।
- प्रश्न 23: 1922 में आयोजित कांग्रेस के गया अधिवेशन की अध्यक्षता निम्नलिखित में से किसने की थी?
(क) मजहरुल हक (ख) मौलाना अबुल कलाम आजाद (ग) चितरंजन दास (घ) आर. एन. मधोलकर
- ✔ उत्तर: (ग) चितरंजन दास — 1922 के गया (37वें) कांग्रेस अधिवेशन के अध्यक्ष देशबंधु चितरंजन दास थे।
- प्रश्न 24: निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 1940 का रामगढ़ कांग्रेस अधिवेशन मौलाना अबुल कलाम आजाद की अध्यक्षता में हुआ था।
2. 9 दिसंबर 1946 को डॉ. राजेंद्र प्रसाद को संविधान सभा का अस्थायी अध्यक्ष बनाया गया था।
उपरोक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
(क) केवल 1 (ख) केवल 2 (ग) 1 और 2 दोनों (घ) न तो 1, न ही 2
- ✔ उत्तर: (क) केवल 1 — कथन 1 सही है; कथन 2 गलत है क्योंकि 9 दिसंबर 1946 को डॉ. सच्चिदानंद सिन्हा को अस्थायी अध्यक्ष बनाया गया था, राजेंद्र प्रसाद 11 दिसंबर को स्थायी अध्यक्ष बने।
- प्रश्न 25: 1946 की अंतरिम सरकार में बिहार के डॉ. राजेंद्र प्रसाद को कौन-सा विभाग सौंपा गया था?
(क) गृह विभाग (ख) रेल विभाग (ग) खाद्य एवं कृषि विभाग (घ) रक्षा विभाग
- ✔ उत्तर: (ग) खाद्य एवं कृषि विभाग — 1946 में बनी अंतरिम सरकार में डॉ. राजेंद्र प्रसाद को खाद्य एवं कृषि मंत्री का प्रभार दिया गया था।
- प्रश्न 26: 31 अक्टूबर 1939 को बिहार के कांग्रेस मंत्रिमंडल ने इस्तीफा क्यों दे दिया था?
(क) द्वितीय विश्व युद्ध में भारत को सहमति के बिना शामिल करने के विरोध में (ख) मुस्लिम लीग के विरोध के कारण (ग) किसान आंदोलन के दबाव में (घ) ब्रिटिश सरकार द्वारा बजट अस्वीकृत करने के कारण
- ✔ उत्तर: (क) द्वितीय विश्व युद्ध में भारत को सहमति के बिना शामिल करने के विरोध में — द्वितीय विश्व युद्ध में भारतीयों की सहमति के बिना भारत को शामिल करने के विरोध में 31 अक्टूबर 1939 को इस्तीफा दिया गया था।
परीक्षा में कैसे आता है
BPSC में बाँकीपुर, गया और रामगढ़ अधिवेशनों के वर्षों, स्थानों तथा अध्यक्षों पर प्रश्न बार-बार पूछे जाते हैं। साथ ही संविधान सभा में बिहार के नेताओं (राजेंद्र प्रसाद, सच्चिदानंद सिन्हा) की भूमिका और 1946 के मंत्रिमंडल गठन पर सीधे तथा कथन-आधारित प्रश्न आते हैं।
इनमें भ्रम न करें
- ✘ 1912 बाँकीपुर अधिवेशन के अध्यक्ष आर. एन. मधोलकर थे, जबकि स्वागत समिति के अध्यक्ष मजहरुल हक थे।
- ✘ 9 दिसंबर 1946 को डॉ. सच्चिदानंद सिन्हा अस्थायी अध्यक्ष बने थे, जबकि 11 दिसंबर 1946 को डॉ. राजेंद्र प्रसाद स्थायी अध्यक्ष चुने गए।
- ✘ रामगढ़ अधिवेशन (1940) तत्कालीन अविभाजित बिहार में हुआ था, जो वर्तमान में झारखंड राज्य में स्थित है।
💡 '12 में बाँकी (मधोलकर), '22 में गया (दास), '40 में रामगढ़ (आजाद)
एक नज़र में (Revision)
- राजकुमार शुक्ल ने 1916 के लखनऊ कांग्रेस में गांधीजी को चंपारण आने का निमंत्रण दिया था।
- तिनकठिया पद्धति के तहत किसानों को अपनी भूमि के 3/20 भाग पर नील की खेती करनी पड़ती थी।
- चंपारण कृषि अधिनियम (1918) द्वारा तिनकठिया पद्धति को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया।
- असहयोग आंदोलन के दौरान मजहरुल हक ने पटना में सदाकत आश्रम की स्थापना की थी।
- 6 फरवरी 1921 को गांधीजी द्वारा बिहार विद्यापीठ का औपचारिक उद्घाटन किया गया था।
- बिहार में नमक सत्याग्रह का प्रारंभ 15 अप्रैल 1930 को सारण और चंपारण जिलों से हुआ।
- पटना में 'नखास पिंड' नमक कानून भंग करने के लिए मुख्य केंद्र के रूप में चुना गया था।
- 11 अगस्त 1942 को पटना सचिवालय गोलीकांड में सात छात्र शहीद हुए थे।
- जयप्रकाश नारायण दीपावली की रात (1942) हजारीबाग जेल से भागकर नेपाल चले गए थे।
- नेपाल के राजविलास जंगल में जयप्रकाश नारायण ने 'आजाद दस्ता' का गठन किया था।
- बिहार में कांग्रेस के तीन प्रमुख अधिवेशन हुए: बांकीपुर (1912), गया (1922) और रामगढ़ (1940)।
- 1946 की अंतरिम सरकार में बिहार के डॉ. राजेंद्र प्रसाद खाद्य एवं कृषि मंत्री बने थे।