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BPSC CCEभारतीय राजव्यवस्था

मौलिक अधिकार, नीति निदेशक तत्व एवं मौलिक कर्तव्य

Fundamental Rights, Directive Principles of State Policy, and Fundamental Duties

📖 किताब की तरह पढ़ें📝 इस परीक्षा का मॉक टेस्ट

यह अध्याय BPSC प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा दोनों के दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण है। प्रारंभिक परीक्षा में अनुच्छेदों, रिटों और संवैधानिक संशोधनों से सीधे वस्तुनिष्ठ प्रश्न पूछे जाते हैं। मुख्य परीक्षा में मौलिक अधिकारों एवं नीति निदेशक तत्वों के अंतर-संबंधों पर विश्लेषणात्मक प्रश्न आते हैं।

मौलिक अधिकार: अनुच्छेद 12 से 35 एवं छह अधिकार

भारतीय संविधान के भाग-3 में अनुच्छेद 12 से 35 तक मौलिक अधिकारों का विस्तृत विवरण दिया गया है, जिसे 'भारत का मैग्नाकार्टा' कहा जाता है। यह अधिकार अमेरिकी संविधान के 'बिल ऑफ राइट्स' से प्रेरित हैं और नागरिकों को राज्य की निरंकुश सत्ता के विरुद्ध गारंटी प्रदान करते हैं। मूल संविधान में कुल सात मौलिक अधिकार शामिल थे, परंतु 44वें संविधान संशोधन (1978) द्वारा संपत्ति के अधिकार (अनुच्छेद 31) को मौलिक अधिकारों की सूची से हटाकर अनुच्छेद 300A के तहत विधिक अधिकार बना दिया गया। वर्तमान में भारतीय नागरिकों को छह मौलिक अधिकार प्राप्त हैं। ये अधिकार असीमित या निरपेक्ष नहीं हैं, बल्कि राज्य इन पर लोक व्यवस्था, नैतिकता और सुरक्षा के आधार पर उचित प्रतिबंध (युक्तिसंगत निर्बंधन) लगा सकता है।

मुख्य तथ्य

तालिका

अभ्यास प्रश्न (हल सहित)

(क) अनुच्छेद 14 (ख) अनुच्छेद 17 (ग) अनुच्छेद 18 (घ) अनुच्छेद 19

(क) विधि के समक्ष समता (अनुच्छेद 14) (ख) प्राण एवं दैहिक स्वतंत्रता का अधिकार (अनुच्छेद 21) (ग) लोक नियोजन के विषय में अवसर की समता (अनुच्छेद 16) (घ) धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार (अनुच्छेद 25)

(क) समानता का अधिकार (ख) शोषण के विरुद्ध अधिकार (ग) संपत्ति का अधिकार (घ) सांस्कृतिक और शैक्षणिक अधिकार

(क) अनुच्छेद 14 और 19 (ख) अनुच्छेद 19 और 20 (ग) अनुच्छेद 20 और 21 (घ) अनुच्छेद 21 और 22

1. मौलिक अधिकार असीमित और पूर्णतः निरपेक्ष हैं।

2. 86वें संशोधन अधिनियम 2002 द्वारा अनुच्छेद 21A को जोड़ा गया।

3. डॉ. आंबेडकर ने अनुच्छेद 32 को 'संविधान की आत्मा' कहा था।

उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?

(क) केवल 1 और 2 (ख) केवल 2 और 3 (ग) केवल 1 और 3 (घ) 1, 2 और 3

(क) अनुच्छेद 23 (ख) अनुच्छेद 24 (ग) अनुच्छेद 21A (घ) अनुच्छेद 25

📜 असली पिछले वर्ष के प्रश्न (BPSC)

1) सामान्य जन का हित संरक्षित हो

2) विद्यमान सामाजिक मूल्य एवं सामाजिक आवश्यकताएं अवरोध न हो।

3) राज्य के नीति निर्देशक सिद्धांतों को नजर अंदाज किया जा सकता है।

4) सामूहिक हित बृहत्तर नही है।

इनमें से :

(क) 1 और 2 सही है (ख) 2 और 3 सही है (ग) केवल 4 सही है (घ) केवल 1 सही है

परीक्षा में कैसे आता है

BPSC CCE और बिहार दरोगा में मौलिक अधिकारों से हर वर्ष 1 से 3 प्रश्न निश्चित पूछे जाते हैं। आयोग अनुच्छेदों के मिलान (जैसे अनु. 17, 21, 24), केवल नागरिकों को प्राप्त अधिकारों (15, 16, 19, 29, 30), आपातकाल में गैर-निलंबित अधिकारों (20, 21) और 44वें व 86वें संविधान संशोधनों पर सीधे या कूट आधारित प्रश्न पूछता है।

इनमें भ्रम न करें

💡 याद रखें ट्रिक: 'समस्त शोध संस्कृति के उपचार' (सम = समानता 14-18, स्त = स्वतंत्रता 19-22, शो = शोषण के विरुद्ध 23-24, ध = धार्मिक स्वतंत्रता 25-28, संस्कृति = सांस्कृतिक व शैक्षिक 29-30, उपचार = संवैधानिक उपचार 32)।

रिट (संवैधानिक उपचार)

भारतीय संविधान में मौलिक अधिकारों के संरक्षण के लिए न्यायपालिका को रिट जारी करने की असाधारण शक्ति दी गई है। डॉ. भीमराव अंबेडकर ने अनुच्छेद 32 को 'संविधान का हृदय और आत्मा' कहा था क्योंकि इसके बिना मौलिक अधिकार अर्थहीन हो जाते हैं। उच्चतम न्यायालय अनुच्छेद 32 के तहत केवल मौलिक अधिकारों के प्रवर्तन के लिए 5 प्रकार की रिटें जारी कर सकता है। वहीं उच्च न्यायालयों को अनुच्छेद 226 के तहत मौलिक अधिकारों के साथ-साथ अन्य सामान्य कानूनी अधिकारों के उल्लंघन पर भी रिट जारी करने का अधिकार प्राप्त है। ये पाँच रिटें हैं—बंदी प्रत्यक्षीकरण, परमादेश, प्रतिषेध, उत्प्रेषण और अधिकार-पृच्छा। भारत में रिट क्षेत्राधिकार की यह संकल्पना ब्रिटिश विधि (विशेषाधिकार रिट) से ली गई है।

मुख्य तथ्य

तालिका

अभ्यास प्रश्न (हल सहित)

(क) अनुच्छेद 14 (ख) अनुच्छेद 19 (ग) अनुच्छेद 21 (घ) अनुच्छेद 32

(क) परमादेश (ख) बंदी प्रत्यक्षीकरण (ग) प्रतिषेध (घ) अधिकार-पृच्छा

(क) उच्चतम न्यायालय का रिट क्षेत्राधिकार उच्च न्यायालय से व्यापक है। (ख) उच्च न्यायालय केवल मौलिक अधिकारों के प्रवर्तन हेतु रिट जारी कर सकता है। (ग) उच्च न्यायालय का रिट क्षेत्राधिकार उच्चतम न्यायालय से अधिक व्यापक है। (घ) अनुच्छेद 32 के तहत उच्च न्यायालय रिट जारी करता है।

(क) बंदी प्रत्यक्षीकरण (ख) परमादेश (ग) उत्प्रेषण (घ) अधिकार-पृच्छा

(क) अधिकार-पृच्छा (Quo-Warranto) (ख) प्रतिषेध (Prohibition) (ग) उत्प्रेषण (Certiorari) (घ) बंदी प्रत्यक्षीकरण (Habeas Corpus)

1. प्रतिषेध रिट वरिष्ठ न्यायालय द्वारा अधीनस्थ न्यायालय को अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाने से रोकने हेतु जारी की जाती है।

2. उत्प्रेषण रिट केवल निवारक (preventive) प्रकृति की होती है।

उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?

(क) केवल 1 (ख) केवल 2 (ग) 1 और 2 दोनों (घ) न तो 1 और न ही 2

परीक्षा में कैसे आता है

BPSC प्रारंभिक परीक्षा में रिटों के लैटिन अर्थ (शाब्दिक अर्थ), अनुच्छेदों (अनुच्छेद 32 बनाम अनुच्छेद 226), रिटों के प्रकार, तथा किन परिस्थितियों एवं किसके विरुद्ध (सार्वजनिक या निजी निकाय) ये रिटें जारी की जाती हैं—इस पर प्रत्यक्ष व कूट-आधारित प्रश्न बार-बार पूछे जाते हैं।

इनमें भ्रम न करें

💡 ट्रिक: 'CPM HQ' (Certiorari, Prohibition, Mandamus, Habeas corpus, Quo-warranto) — बंदी को शरीर दो (Habeas), हम आदेश दें (Mandamus), काम रोको (Prohibition), रिकॉर्ड भेजो (Certiorari), हक बताओ (Quo-warranto)।

राज्य के नीति निदेशक तत्व (अनुच्छेद 36-51 एवं वर्गीकरण)

भारतीय संविधान के भाग IV में अनुच्छेद 36 से 51 तक राज्य के नीति निदेशक तत्वों (DPSP) का उल्लेख है, जिन्हें आयरलैंड के संविधान से लिया गया है। इनका मुख्य उद्देश्य भारत में एक 'कल्याणकारी राज्य' (Welfare State) की स्थापना करना तथा सामाजिक एवं आर्थिक लोकतंत्र को सुनिश्चित करना है। यद्यपि संविधान में इनका कोई औपचारिक विभाजन नहीं किया गया है, तथापि इनकी वैचारिक प्रकृति के आधार पर इन्हें तीन श्रेणियों—समाजवादी, गांधीवादी और उदार बौद्धिक सिद्धांतों में वर्गीकृत किया जाता है। अनुच्छेद 37 स्पष्ट करता है कि ये तत्व न्यायालय द्वारा प्रवर्तनीय (गैर-न्यायोचित) नहीं हैं, किंतु देश के शासन में मूलभूत हैं। डॉ. बी. आर. आंबेडकर ने इन तत्वों को भारतीय संविधान की 'अनूठी विशेषता' (Novel Feature) कहा था।

मुख्य तथ्य

तालिका

अभ्यास प्रश्न (हल सहित)

(क) अनुच्छेद 45 (ख) अनुच्छेद 48 (ग) अनुच्छेद 50 (घ) अनुच्छेद 51

(क) अनुच्छेद 39A (समान न्याय और निःशुल्क कानूनी सहायता) (ख) अनुच्छेद 43A (उद्योगों के प्रबंधन में कर्मकारों की भागीदारी) (ग) अनुच्छेद 43B (सहकारी समितियों की प्रोन्नति) (घ) अनुच्छेद 48A (पर्यावरण का संरक्षण एवं संवर्धन)

1. ये न्यायालय द्वारा प्रवर्तनीय हैं।

2. इनका उद्देश्य भारत में कल्याणकारी राज्य की स्थापना करना है।

उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?

(क) केवल 1 (ख) केवल 2 (ग) 1 और 2 दोनों (घ) न तो 1 और न ही 2

सूची-I: (A) अनुच्छेद 40, (B) अनुच्छेद 44, (C) अनुच्छेद 48, (D) अनुच्छेद 51

सूची-II: 1. समान नागरिक संहिता, 2. ग्राम पंचायतों का संगठन, 3. अंतरराष्ट्रीय शांति, 4. कृषि एवं पशुपालन

(क) A-2, B-1, C-4, D-3 (ख) A-1, B-2, C-3, D-4 (ग) A-2, B-4, C-1, D-3 (घ) A-4, B-1, C-2, D-3

(क) अनुच्छेद 46 (ख) अनुच्छेद 47 (ग) अनुच्छेद 48 (घ) अनुच्छेद 49

📜 असली पिछले वर्ष के प्रश्न (BPSC)

1) ग्राम पंचायतों का गठन

2) समान नागरिक संहिता

3) ग्रामीण क्षेत्रों में कुटीर उद्योगों की प्रोन्नति

4) काम का अधिकार

(क) 1 तथा 2 (ख) केवल 2 (ग) 2 और 4 (घ) 1 और 3

परीक्षा में कैसे आता है

BPSC में नीति निदेशक तत्वों से संबंधित अनुच्छेदों का मिलान (Match the following), उनका वैचारिक वर्गीकरण (समाजवादी, गांधीवादी या उदार बौद्धिक) तथा 42वें एवं 44वें संविधान संशोधन द्वारा जोड़े गए नए अनुच्छेदों पर लगातार सीधे और कूट-आधारित प्रश्न पूछे जाते हैं।

इनमें भ्रम न करें

💡 गांधीजी के 5 स्तम्भ याद रखें: 'पंचायत (40) में कुटीर उद्योग (43), SC/ST हित (46), शराबबंदी (47) और गो-रक्षा (48)'।

मौलिक कर्तव्य (अनुच्छेद 51क): 42वाँ एवं 86वाँ संविधान संशोधन

मूल संविधान में नागरिकों के लिए मौलिक कर्तव्यों का कोई उल्लेख नहीं था। वर्ष 1976 में आपातकाल के दौरान सरदार स्वर्ण सिंह समिति की सिफारिश पर 42वें संविधान संशोधन द्वारा संविधान में भाग IV-क और अनुच्छेद 51क जोड़कर 10 मौलिक कर्तव्य शामिल किए गए। ये कर्तव्य पूर्व सोवियत संघ (USSR) के संविधान से प्रेरित हैं। इसके बाद 86वें संविधान संशोधन अधिनियम (2002) द्वारा 11वाँ मौलिक कर्तव्य जोड़ा गया, जिसके तहत 6 से 14 वर्ष की आयु के बच्चों को शिक्षा के अवसर प्रदान करना माता-पिता या संरक्षक का कर्तव्य बनाया गया। नीति निदेशक तत्वों की तरह मौलिक कर्तव्य भी गैर-न्यायिक (अवादयोग्य) हैं, यानी इनके उल्लंघन पर न्यायालय सीधे दंड नहीं दे सकता, लेकिन संसद कानून बनाकर इनके क्रियान्वयन की व्यवस्था कर सकती है। यह केवल भारतीय नागरिकों पर लागू होते हैं, विदेशी नागरिकों पर नहीं।

मुख्य तथ्य

तालिका

अभ्यास प्रश्न (हल सहित)

(क) 44वाँ संशोधन (ख) 42वाँ संशोधन (ग) 86वाँ संशोधन (घ) 73वाँ संशोधन

(क) प्राकृतिक पर्यावरण का संरक्षण करना (ख) वैज्ञानिक दृष्टिकोण और ज्ञानार्जन की भावना का विकास करना (ग) 6 से 14 वर्ष तक की आयु के बालकों को शिक्षा का अवसर प्रदान करना (घ) सार्वजनिक संपत्ति को सुरक्षित रखना

1. मूल संविधान में 10 मौलिक कर्तव्य शामिल थे।

2. सरदार स्वर्ण सिंह समिति ने 8 मौलिक कर्तव्यों की अनुशंसा की थी।

3. मौलिक कर्तव्य केवल भारतीय नागरिकों पर लागू होते हैं।

उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?

(क) केवल 1 और 2 (ख) केवल 2 और 3 (ग) केवल 1 और 3 (घ) 1, 2 और 3

(क) सरकारिया आयोग (ख) वर्मा समिति (ग) केलकर समिति (घ) संथानम समिति

(क) संविधान का पालन करना तथा राष्ट्रध्वज का आदर करना (ख) मतदान करना और चुनावों में भाग लेना (ग) सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा करना और हिंसा से दूर रहना (घ) वैज्ञानिक दृष्टिकोण, मानववाद और ज्ञानार्जन की भावना का विकास करना

(क) राष्ट्रगान का सम्मान (ख) कर अदायगी (Tax payment) (ग) वैज्ञानिक दृष्टिकोण (घ) पर्यावरण संरक्षण

परीक्षा में कैसे आता है

BPSC CCE और बिहार दरोगा में इस उप-विषय से प्रायः सीधे प्रश्न पूछे जाते हैं—जैसे समिति का नाम (स्वर्ण सिंह समिति), स्रोत देश (USSR), संविधान संशोधन संख्या (42वाँ और 86वाँ), कुल कर्तव्यों की संख्या (11), तथा 'निम्न में से कौन-सा मौलिक कर्तव्य नहीं है' प्रकार के प्रश्न।

इनमें भ्रम न करें

💡 'सोवियत से स्वर्ण लेकर 42वें में 10 जोड़े, 86वें में 11वाँ शिक्षा कर्तव्य बनाया।' (USSR -> स्वर्ण सिंह -> 42वाँ संशोधन = 10 कर्तव्य; 86वाँ = 11वाँ शिक्षा कर्तव्य)

महत्वपूर्ण वाद (केशवानंद भारती, मेनका गांधी, मिनर्वा मिल्स आदि)

भारतीय संविधान के विकास में न्यायपालिका और संसद के बीच अधिकारों के संतुलन को लेकर कई ऐतिहासिक वाद हुए। प्रारंभिक दौर में शंकरी प्रसाद वाद (1951) में संसद को मौलिक अधिकारों में संशोधन की असीमित शक्ति मानी गई, किंतु गोलकनाथ वाद (1967) में सर्वोच्च न्यायालय ने संसद की मौलिक अधिकारों में कटौती की शक्ति पर रोक लगा दी। इसके समाधान हेतु केशवानंद भारती वाद (1973) में 13 न्यायाधीशों की पीठ ने 'मूल संरचना का सिद्धांत' (Basic Structure Doctrine) प्रतिपादित किया, जिसके तहत संसद संविधान के किसी भी भाग में संशोधन कर सकती है किंतु उसके आधारभूत ढांचे को नष्ट नहीं कर सकती। मेनका गांधी वाद (1978) ने अनुच्छेद 21 का विस्तार करते हुए 'विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया' की संकीर्ण व्याख्या को समाप्त कर प्राकृतिक न्याय और 'विधि की सम्यक प्रक्रिया' (Due Process of Law) को अपनाया। मिनर्वा मिल्स वाद (1980) ने स्थापित किया कि भारतीय संविधान मौलिक अधिकारों और राज्य के नीति निदेशक तत्वों के बीच संतुलन पर आधारित है तथा न्यायिक समीक्षा संविधान की मूल संरचना है।

मुख्य तथ्य

तालिका

अभ्यास प्रश्न (हल सहित)

(क) गोलकनाथ वाद (1967) (ख) केशवानंद भारती वाद (1973) (ग) मिनर्वा मिल्स वाद (1980) (घ) शंकरी प्रसाद वाद (1951)

(क) मेनका गांधी वाद (ख) ए.डी.एम. जबलपुर वाद (ग) मिनर्वा मिल्स वाद (घ) इंदिरा साहनी वाद

(क) ए.के. गोपालन बनाम मद्रास राज्य (ख) मेनका गांधी बनाम भारत संघ (ग) आई.आर. कोएल्हो बनाम तमिलनाडु राज्य (घ) एस.आर. बोम्मई बनाम भारत संघ

(क) सातवीं अनुसूची (ख) आठवीं अनुसूची (ग) नौवीं अनुसूची (घ) दसवीं अनुसूची

1. गोलकनाथ वाद (1967) में संसद को मौलिक अधिकारों में संशोधन करने से रोक दिया गया था।

2. केशवानंद भारती पीठ की अध्यक्षता मुख्य न्यायाधीश एस.एम. सीकरी ने की थी।

उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?

(क) केवल 1 (ख) केवल 2 (ग) 1 और 2 दोनों (घ) न तो 1 और न ही 2

(क) एस.आर. बोम्मई वाद (1994) (ख) राजनारायण वाद (1975) (ग) ए.डी.एम. जबलपुर वाद (1976) (घ) शंकरी प्रसाद वाद (1951)

परीक्षा में कैसे आता है

BPSC में ऐतिहासिक वादों से सीधे प्रश्न पूछे जाते हैं; जैसे मूल संरचना का सिद्धांत किस वाद से आया, विदेश यात्रा का अधिकार किस वाद से जुड़ा है, अथवा नौवीं अनुसूची की न्यायिक समीक्षा की कट-ऑफ तारीख (24 अप्रैल 1973) क्या है। मिलान करने वाले और कथन-आधारित प्रश्नों का चलन बढ़ा है।

इनमें भ्रम न करें

💡 याद रखें कालक्रम: 'शंकरी ने बोला (गोलक) -> केशव ने ढांचा बनाया -> मेनका विदेश गई -> मिनर्वा ने संतुलन बनाया' (1951 -> 1967 -> 1973 -> 1978 -> 1980)

एक नज़र में (Revision)

अपने आप को जाँचिए — 10 प्रश्न

1. मौलिक अधिकारों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. अनुच्छेद 19 के अंतर्गत प्राप्त स्वतंत्रताएं केवल भारतीय नागरिकों को उपलब्ध हैं। 2. राष्ट्रीय आपातकाल के दौरान अनुच्छेद 20 और 21 द्वारा प्रदत्त अधिकारों को निलंबित नहीं किया जा सकता है। उपयुक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?

  1. (क) केवल 1
  2. (ख) केवल 2
  3. (ग) 1 और 2 दोनों
  4. (घ) न तो 1 और न ही 2
उत्तर देखें

उत्तर: (ग) 1 और 2 दोनों

अनुच्छेद 19 के तहत मौलिक अधिकार केवल नागरिकों को प्राप्त हैं, तथा 44वें संशोधन के बाद अनुच्छेद 20 और 21 आपातकाल में भी निलंबित नहीं होते हैं।

2. सुमेलित कीजिए: (a) बंदी प्रत्यक्षीकरण - 1. हम आदेश देते हैं, (b) परमादेश - 2. आपको शरीर प्रस्तुत करना होगा, (c) अधिकार-पृच्छा - 3. किस प्राधिकार या वारंट से। सही कूट चुनिए:

  1. (क) a-2, b-1, c-3
  2. (ख) a-1, b-2, c-3
  3. (ग) a-3, b-1, c-2
  4. (घ) a-2, b-3, c-1
उत्तर देखें

उत्तर: (क) a-2, b-1, c-3

बंदी प्रत्यक्षीकरण का शाब्दिक अर्थ 'शरीर प्रस्तुत करना', परमादेश का 'हम आदेश देते हैं' और अधिकार-पृच्छा का अर्थ 'किस प्राधिकार से' होता है।

3. निम्नलिखित में से कौन सा अनुच्छेद राज्य के नीति निदेशक तत्वों में गांधीवादी सिद्धांत पर आधारित है?

  1. (क) अनुच्छेद 39A - समान न्याय और नि:शुल्क कानूनी सहायता
  2. (ख) अनुच्छेद 40 - ग्राम पंचायतों का संगठन
  3. (ग) अनुच्छेद 44 - समान नागरिक संहिता
  4. (घ) अनुच्छेद 50 - न्यायपालिका का कार्यपालिका से पृथक्करण
उत्तर देखें

उत्तर: (ख) अनुच्छेद 40 - ग्राम पंचायतों का संगठन

अनुच्छेद 40 (ग्राम पंचायतों का गठन) महात्मा गांधी के स्वशासन के सपने पर आधारित गांधीवादी सिद्धांत है।

4. भारतीय संविधान का कौन सा अनुच्छेद अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के संवर्धन से संबंधित है?

  1. (क) अनुच्छेद 48A
  2. (ख) अनुच्छेद 49
  3. (ग) अनुच्छेद 50
  4. (घ) अनुच्छेद 51
उत्तर देखें

उत्तर: (घ) अनुच्छेद 51

अनुच्छेद 51 राज्य को अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा को बढ़ावा देने का निर्देश देता है, जो उदार-बौद्धिक सिद्धांत का हिस्सा है।

5. मौलिक कर्तव्यों के संदर्भ में, 86वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2002 द्वारा कौन सा कर्तव्य जोड़ा गया था?

  1. (क) वैज्ञानिक दृष्टिकोण और ज्ञानार्जन का विकास करना
  2. (ख) सार्वजनिक संपत्ति की सुरक्षा करना
  3. (ग) 6 से 14 वर्ष के बच्चों को शिक्षा का अवसर प्रदान करना
  4. (घ) पर्यावरण की रक्षा और उसका संवर्धन करना
उत्तर देखें

उत्तर: (ग) 6 से 14 वर्ष के बच्चों को शिक्षा का अवसर प्रदान करना

86वें संशोधन 2002 द्वारा अनुच्छेद 51A में (k) अंतःस्थापित करके 11वां मौलिक कर्तव्य (6 से 14 वर्ष तक की आयु के बच्चों के शिक्षा का अवसर प्रदान करना) जोड़ा गया।

6. भारतीय संविधान में मौलिक कर्तव्यों को किस समिति की सिफारिशों के आधार पर शामिल किया गया था?

  1. (क) वर्मा समिति
  2. (ख) स्वर्ण सिंह समिति
  3. (ग) सरकारिया आयोग
  4. (घ) बलवंत राय मेहता समिति
उत्तर देखें

उत्तर: (ख) स्वर्ण सिंह समिति

42वें संविधान संशोधन 1976 द्वारा मौलिक कर्तव्यों को स्वर्ण सिंह समिति की सिफारिश पर संविधान के भाग IV-A में जोड़ा गया।

7. संसद द्वारा संविधान के किसी भी हिस्से में संशोधन करने की शक्ति पर 'मूल ढांचे का सिद्धांत' (Basic Structure Doctrine) किस प्रसिद्ध मामले में दिया गया था?

  1. (क) गोलकनाथ मामला (1967)
  2. (ख) केशवानंद भारती मामला (1973)
  3. (ग) मिनर्वा मिल्स मामला (1980)
  4. (घ) ए. के. गोपालन मामला (1950)
उत्तर देखें

उत्तर: (ख) केशवानंद भारती मामला (1973)

1973 के केशवानंद भारती मामले में सर्वोच्च न्यायालय की 13 न्यायाधीशों की पीठ ने 'मूल ढांचे का सिद्धांत' प्रतिपादित किया।

8. अनुच्छेद 21 में उल्लिखित 'विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया' की व्याख्या करते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने किस मामले में 'विधि की सम्यक प्रक्रिया' (Due Process of Law) का सिद्धांत समाविष्ट किया?

  1. (क) मेनका गांधी मामला (1978)
  2. (ख) केशवानंद भारती मामला (1973)
  3. (ग) शाह बानो मामला (1985)
  4. (घ) इंद्रा साहनी मामला (1992)
उत्तर देखें

उत्तर: (क) मेनका गांधी मामला (1978)

मेनका गांधी मामले (1978) में न्यायालय ने माना कि अनुच्छेद 21 के तहत प्रक्रिया न केवल कानूनन सही होनी चाहिए बल्कि वह न्यायसंगत, उचित और तर्कसंगत भी होनी चाहिए।

9. किस ऐतिहासिक वाद में यह निर्णय दिया गया कि मौलिक अधिकार और नीति निदेशक तत्व एक-दूसरे के पूरक हैं और संविधान इन दोनों के संतुलन पर आधारित है?

  1. (क) शंकरी प्रसाद मामला
  2. (ख) सज्जन सिंह मामला
  3. (ग) मिनर्वा मिल्स मामला
  4. (घ) बेरुबारी यूनियन मामला
उत्तर देखें

उत्तर: (ग) मिनर्वा मिल्स मामला

मिनर्वा मिल्स मामले (1980) में सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि भाग III और भाग IV के बीच संतुलन संविधान के मूल ढांचे का हिस्सा है।

10. किसी निचले न्यायालय या न्यायाधिकरण को अपनी अधिकार क्षेत्र की सीमाओं का उल्लंघन करने से रोकने के लिए उच्च न्यायालय द्वारा कौन सी रिट जारी की जाती है?

  1. (क) प्रतिषेध (Prohibition)
  2. (ख) उत्प्रेषण (Certiorari)
  3. (ग) अधिकार-पृच्छा (Quo-Warranto)
  4. (घ) परमादेश (Mandamus)
उत्तर देखें

उत्तर: (क) प्रतिषेध (Prohibition)

प्रतिषेध (Prohibition) रिट का अर्थ 'रोकना' है और यह केवल न्यायिक या अर्ध-न्यायिक निकायों के खिलाफ तब जारी की जाती है जब कार्यवाही जारी हो और क्षेत्राधिकार का उल्लंघन हो रहा हो।

English version — Fundamental Rights, Directive Principles of State Policy, and Fundamental Duties

This chapter is extremely vital for both BPSC Prelims and Mains examinations. Direct objective questions are asked on articles, writs, and constitutional amendments in Prelims, while Mains focuses on the analytical relationship between Fundamental Rights and DPSPs.

Fundamental Rights: Articles 12-35 and Six Rights

Part III of the Indian Constitution, spanning Articles 12 to 35, enshrines the Fundamental Rights, famously referred to as the 'Magna Carta of India'. Inspired by the US Bill of Rights, these rights protect citizens against arbitrary state action and foster political democracy. Originally, the Constitution provided seven fundamental rights, but the 44th Constitutional Amendment Act of 1978 removed the Right to Property (Article 31) from Part III, reclassifying it as a legal right under Article 300A in Part XII. Currently, there are six fundamental rights available to citizens. These rights are not absolute but qualified, meaning the State can impose reasonable restrictions on grounds such as public order, morality, and national sovereignty.

Key facts

Table

Practice questions (solved)

(क) अनुच्छेद 14 (ख) अनुच्छेद 17 (ग) अनुच्छेद 18 (घ) अनुच्छेद 19

(क) विधि के समक्ष समता (अनुच्छेद 14) (ख) प्राण एवं दैहिक स्वतंत्रता का अधिकार (अनुच्छेद 21) (ग) लोक नियोजन के विषय में अवसर की समता (अनुच्छेद 16) (घ) धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार (अनुच्छेद 25)

(क) समानता का अधिकार (ख) शोषण के विरुद्ध अधिकार (ग) संपत्ति का अधिकार (घ) सांस्कृतिक और शैक्षणिक अधिकार

(क) अनुच्छेद 14 और 19 (ख) अनुच्छेद 19 और 20 (ग) अनुच्छेद 20 और 21 (घ) अनुच्छेद 21 और 22

1. मौलिक अधिकार असीमित और पूर्णतः निरपेक्ष हैं।

2. 86वें संशोधन अधिनियम 2002 द्वारा अनुच्छेद 21A को जोड़ा गया।

3. डॉ. आंबेडकर ने अनुच्छेद 32 को 'संविधान की आत्मा' कहा था।

उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?

(क) केवल 1 और 2 (ख) केवल 2 और 3 (ग) केवल 1 और 3 (घ) 1, 2 और 3

(क) अनुच्छेद 23 (ख) अनुच्छेद 24 (ग) अनुच्छेद 21A (घ) अनुच्छेद 25

📜 Real previous-year questions (BPSC)

1) सामान्य जन का हित संरक्षित हो

2) विद्यमान सामाजिक मूल्य एवं सामाजिक आवश्यकताएं अवरोध न हो।

3) राज्य के नीति निर्देशक सिद्धांतों को नजर अंदाज किया जा सकता है।

4) सामूहिक हित बृहत्तर नही है।

इनमें से :

(क) 1 और 2 सही है (ख) 2 और 3 सही है (ग) केवल 4 सही है (घ) केवल 1 सही है

How it is asked

BPSC CCE and Bihar SI consistently ask 1-3 direct or statement-based questions on Fundamental Rights. Recurring patterns include article-matching (e.g., Art 17, 21, 24), rights available solely to citizens (15, 16, 19, 29, 30), non-suspendable rights during emergency (20 & 21), and constitutional amendments (44th and 86th).

Do not confuse

💡 याद रखें ट्रिक: 'समस्त शोध संस्कृति के उपचार' (सम = समानता 14-18, स्त = स्वतंत्रता 19-22, शो = शोषण के विरुद्ध 23-24, ध = धार्मिक स्वतंत्रता 25-28, संस्कृति = सांस्कृतिक व शैक्षिक 29-30, उपचार = संवैधानिक उपचार 32)।

Writs (Constitutional Remedies)

The Indian Constitution empowers the judiciary to issue extraordinary orders known as writs to enforce and protect Fundamental Rights. Dr. B.R. Ambedkar described Article 32 as the 'Heart and Soul of the Constitution' because rights are meaningless without a judicial remedy. Under Article 32, the Supreme Court can issue five types of writs solely for the enforcement of Fundamental Rights. Under Article 226, High Courts possess a broader writ jurisdiction that covers Fundamental Rights as well as ordinary legal rights. The five writs are Habeas Corpus, Mandamus, Prohibition, Certiorari, and Quo-Warranto, which have their origin in British common law prerogative writs.

Key facts

Table

Practice questions (solved)

(क) अनुच्छेद 14 (ख) अनुच्छेद 19 (ग) अनुच्छेद 21 (घ) अनुच्छेद 32

(क) परमादेश (ख) बंदी प्रत्यक्षीकरण (ग) प्रतिषेध (घ) अधिकार-पृच्छा

(क) उच्चतम न्यायालय का रिट क्षेत्राधिकार उच्च न्यायालय से व्यापक है। (ख) उच्च न्यायालय केवल मौलिक अधिकारों के प्रवर्तन हेतु रिट जारी कर सकता है। (ग) उच्च न्यायालय का रिट क्षेत्राधिकार उच्चतम न्यायालय से अधिक व्यापक है। (घ) अनुच्छेद 32 के तहत उच्च न्यायालय रिट जारी करता है।

(क) बंदी प्रत्यक्षीकरण (ख) परमादेश (ग) उत्प्रेषण (घ) अधिकार-पृच्छा

(क) अधिकार-पृच्छा (Quo-Warranto) (ख) प्रतिषेध (Prohibition) (ग) उत्प्रेषण (Certiorari) (घ) बंदी प्रत्यक्षीकरण (Habeas Corpus)

1. प्रतिषेध रिट वरिष्ठ न्यायालय द्वारा अधीनस्थ न्यायालय को अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाने से रोकने हेतु जारी की जाती है।

2. उत्प्रेषण रिट केवल निवारक (preventive) प्रकृति की होती है।

उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?

(क) केवल 1 (ख) केवल 2 (ग) 1 और 2 दोनों (घ) न तो 1 और न ही 2

How it is asked

In BPSC exams, questions are frequently asked on the literal Latin meanings of the writs, the difference in scope between Article 32 and Article 226, the specific bodies against which they can be issued (public vs private), and concept-based statement matching.

Do not confuse

💡 ट्रिक: 'CPM HQ' (Certiorari, Prohibition, Mandamus, Habeas corpus, Quo-warranto) — बंदी को शरीर दो (Habeas), हम आदेश दें (Mandamus), काम रोको (Prohibition), रिकॉर्ड भेजो (Certiorari), हक बताओ (Quo-warranto)।

Directive Principles of State Policy (Articles 36-51 and Classification)

Part IV of the Indian Constitution, from Article 36 to 51, lays down the Directive Principles of State Policy (DPSP), borrowed from the Irish Constitution. Their primary objective is to establish a 'Welfare State' and ensure socio-economic democracy in the country. Although the Constitution does not formally classify them, they are traditionally categorized into Socialist, Gandhian, and Liberal-Intellectual principles based on their ideological content. Article 37 states that these principles are non-justiciable (not enforceable by courts), yet they are fundamental in the governance of the country. Dr. B. R. Ambedkar termed these principles as the 'novel features' of the Indian Constitution.

Key facts

Table

Practice questions (solved)

(क) अनुच्छेद 45 (ख) अनुच्छेद 48 (ग) अनुच्छेद 50 (घ) अनुच्छेद 51

(क) अनुच्छेद 39A (समान न्याय और निःशुल्क कानूनी सहायता) (ख) अनुच्छेद 43A (उद्योगों के प्रबंधन में कर्मकारों की भागीदारी) (ग) अनुच्छेद 43B (सहकारी समितियों की प्रोन्नति) (घ) अनुच्छेद 48A (पर्यावरण का संरक्षण एवं संवर्धन)

1. ये न्यायालय द्वारा प्रवर्तनीय हैं।

2. इनका उद्देश्य भारत में कल्याणकारी राज्य की स्थापना करना है।

उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?

(क) केवल 1 (ख) केवल 2 (ग) 1 और 2 दोनों (घ) न तो 1 और न ही 2

सूची-I: (A) अनुच्छेद 40, (B) अनुच्छेद 44, (C) अनुच्छेद 48, (D) अनुच्छेद 51

सूची-II: 1. समान नागरिक संहिता, 2. ग्राम पंचायतों का संगठन, 3. अंतरराष्ट्रीय शांति, 4. कृषि एवं पशुपालन

(क) A-2, B-1, C-4, D-3 (ख) A-1, B-2, C-3, D-4 (ग) A-2, B-4, C-1, D-3 (घ) A-4, B-1, C-2, D-3

(क) अनुच्छेद 46 (ख) अनुच्छेद 47 (ग) अनुच्छेद 48 (घ) अनुच्छेद 49

📜 Real previous-year questions (BPSC)

1) ग्राम पंचायतों का गठन

2) समान नागरिक संहिता

3) ग्रामीण क्षेत्रों में कुटीर उद्योगों की प्रोन्नति

4) काम का अधिकार

(क) 1 तथा 2 (ख) केवल 2 (ग) 2 और 4 (घ) 1 और 3

How it is asked

BPSC consistently tests DPSP through direct and matching questions on specific Article numbers, ideological classification (Socialist, Gandhian, Liberal-Intellectual), and newly inserted articles via the 42nd and 44th Constitutional Amendments.

Do not confuse

💡 गांधीजी के 5 स्तम्भ याद रखें: 'पंचायत (40) में कुटीर उद्योग (43), SC/ST हित (46), शराबबंदी (47) और गो-रक्षा (48)'।

Fundamental Duties (Article 51A): 42nd and 86th Amendments

The original Constitution did not contain Fundamental Duties for citizens. In 1976, during the Emergency, based on the recommendations of the Sardar Swaran Singh Committee, the 42nd Constitutional Amendment Act introduced Part IV-A and Article 51A, incorporating 10 Fundamental Duties. These duties were inspired by the Constitution of the former USSR. Later, the 86th Constitutional Amendment Act (2002) added the 11th Fundamental Duty, mandating parents or guardians to provide education opportunities to children aged 6 to 14 years. Like DPSPs, Fundamental Duties are non-justiciable in nature, meaning they cannot be directly enforced by courts, though Parliament can enact laws for their enforcement. They apply strictly to Indian citizens and not to foreigners.

Key facts

Table

Practice questions (solved)

(क) 44वाँ संशोधन (ख) 42वाँ संशोधन (ग) 86वाँ संशोधन (घ) 73वाँ संशोधन

(क) प्राकृतिक पर्यावरण का संरक्षण करना (ख) वैज्ञानिक दृष्टिकोण और ज्ञानार्जन की भावना का विकास करना (ग) 6 से 14 वर्ष तक की आयु के बालकों को शिक्षा का अवसर प्रदान करना (घ) सार्वजनिक संपत्ति को सुरक्षित रखना

1. मूल संविधान में 10 मौलिक कर्तव्य शामिल थे।

2. सरदार स्वर्ण सिंह समिति ने 8 मौलिक कर्तव्यों की अनुशंसा की थी।

3. मौलिक कर्तव्य केवल भारतीय नागरिकों पर लागू होते हैं।

उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?

(क) केवल 1 और 2 (ख) केवल 2 और 3 (ग) केवल 1 और 3 (घ) 1, 2 और 3

(क) सरकारिया आयोग (ख) वर्मा समिति (ग) केलकर समिति (घ) संथानम समिति

(क) संविधान का पालन करना तथा राष्ट्रध्वज का आदर करना (ख) मतदान करना और चुनावों में भाग लेना (ग) सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा करना और हिंसा से दूर रहना (घ) वैज्ञानिक दृष्टिकोण, मानववाद और ज्ञानार्जन की भावना का विकास करना

(क) राष्ट्रगान का सम्मान (ख) कर अदायगी (Tax payment) (ग) वैज्ञानिक दृष्टिकोण (घ) पर्यावरण संरक्षण

How it is asked

In BPSC CCE and Bihar SI exams, questions are frequently framed around the committee name (Swaran Singh), country of origin (USSR), amendment acts (42nd and 86th), total number of duties (11), and identifying which listed item is or is not a fundamental duty.

Do not confuse

💡 'सोवियत से स्वर्ण लेकर 42वें में 10 जोड़े, 86वें में 11वाँ शिक्षा कर्तव्य बनाया।' (USSR -> स्वर्ण सिंह -> 42वाँ संशोधन = 10 कर्तव्य; 86वाँ = 11वाँ शिक्षा कर्तव्य)

Important Landmark Cases (Kesavananda, Maneka Gandhi, Minerva Mills)

The evolution of the Indian Constitution witnessed historic judicial battles defining the power equation between Parliament and Fundamental Rights. While Shankari Prasad (1951) upheld unrestricted parliamentary power to amend rights, Golaknath (1967) prohibited Parliament from curtailing Fundamental Rights. To resolve this standoff, the 13-judge bench in Kesavananda Bharati (1973) propounded the landmark 'Basic Structure Doctrine', allowing amendments while preserving the core framework. In Maneka Gandhi (1978), the Supreme Court expanded Article 21 beyond mere 'procedure established by law' into 'due process of law' and natural justice. Finally, Minerva Mills (1980) reaffirmed that the Constitution rests on the delicate balance between Fundamental Rights and Directive Principles, establishing judicial review as an unalterable basic feature.

Key facts

Table

Practice questions (solved)

(क) गोलकनाथ वाद (1967) (ख) केशवानंद भारती वाद (1973) (ग) मिनर्वा मिल्स वाद (1980) (घ) शंकरी प्रसाद वाद (1951)

(क) मेनका गांधी वाद (ख) ए.डी.एम. जबलपुर वाद (ग) मिनर्वा मिल्स वाद (घ) इंदिरा साहनी वाद

(क) ए.के. गोपालन बनाम मद्रास राज्य (ख) मेनका गांधी बनाम भारत संघ (ग) आई.आर. कोएल्हो बनाम तमिलनाडु राज्य (घ) एस.आर. बोम्मई बनाम भारत संघ

(क) सातवीं अनुसूची (ख) आठवीं अनुसूची (ग) नौवीं अनुसूची (घ) दसवीं अनुसूची

1. गोलकनाथ वाद (1967) में संसद को मौलिक अधिकारों में संशोधन करने से रोक दिया गया था।

2. केशवानंद भारती पीठ की अध्यक्षता मुख्य न्यायाधीश एस.एम. सीकरी ने की थी।

उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?

(क) केवल 1 (ख) केवल 2 (ग) 1 और 2 दोनों (घ) न तो 1 और न ही 2

(क) एस.आर. बोम्मई वाद (1994) (ख) राजनारायण वाद (1975) (ग) ए.डी.एम. जबलपुर वाद (1976) (घ) शंकरी प्रसाद वाद (1951)

How it is asked

BPSC frequently tests landmark judicial cases through direct questions (identifying the case associated with Basic Structure, right to travel abroad, or judicial review of the 9th Schedule) as well as statement-based matchings.

Do not confuse

💡 याद रखें कालक्रम: 'शंकरी ने बोला (गोलक) -> केशव ने ढांचा बनाया -> मेनका विदेश गई -> मिनर्वा ने संतुलन बनाया' (1951 -> 1967 -> 1973 -> 1978 -> 1980)

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