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BPSC CCEभारतीय राजव्यवस्थाराज्य सरकार और बिहार की राजव्यवस्था
State Government and Bihar Polity
यह अध्याय बीपीएससी प्रारंभिक परीक्षा के सामान्य अध्ययन तथा मुख्य परीक्षा के सामान्य अध्ययन प्रश्न-पत्र 2 (भारतीय राजव्यवस्था) के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसमें राज्यपाल, मुख्यमंत्री, बिहार विधानमंडल की द्विसदनीय संरचना, पटना उच्च न्यायालय तथा प्रशासनिक ढांचे से संबंधित तथ्यात्मक व विश्लेषणात्मक प्रश्न अनिवार्य रूप से पूछे जाते हैं।
राज्यपाल: नियुक्ति, शक्तियाँ एवं विवेकाधिकार
भारतीय संविधान के भाग 6 में अनुच्छेद 153 से 167 तक राज्य कार्यपालिका का विवरण है, जिसमें राज्यपाल राज्य का संवैधानिक प्रमुख होता है। अनुच्छेद 153 के अनुसार प्रत्येक राज्य के लिए एक राज्यपाल होगा, हालांकि 7वें संविधान संशोधन 1956 द्वारा एक ही व्यक्ति को दो या दो से अधिक राज्यों का राज्यपाल नियुक्त किया जा सकता है। राज्यपाल की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है और वह राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत अपने पद पर बना रहता है। राज्य की समस्त कार्यपालिका शक्ति राज्यपाल में निहित होती है जिसका प्रयोग वह प्रत्यक्ष रूप से अथवा अधीनस्थ अधिकारियों के माध्यम से करता है। राज्यपाल के पास कार्यपालिका, विधायी, वित्तीय तथा न्यायिक शक्तियाँ होती हैं, जिनमें अध्यादेश जारी करना और राज्य वित्त आयोग का गठन शामिल है। इसके अलावा, अनुच्छेद 163 के तहत राज्यपाल को कुछ विशिष्ट परिस्थितियों में स्वविवेकाधिकार (Discretionary Powers) का भी प्रयोग करने की स्वतंत्रता है।
मुख्य तथ्य
- अनुच्छेद 153 के तहत प्रत्येक राज्य के लिए एक राज्यपाल की व्यवस्था की गई है।
- 7वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1956 के द्वारा एक ही व्यक्ति को दो या अधिक राज्यों का राज्यपाल नियुक्त करने का प्रावधान किया गया।
- अनुच्छेद 154 के अनुसार राज्य की कार्यपालिका शक्ति राज्यपाल में निहित होती है।
- अनुच्छेद 155 के अंतर्गत राज्यपाल की नियुक्ति भारत के राष्ट्रपति द्वारा अपने हस्ताक्षर और मुद्रा सहित अधिपत्र द्वारा की जाती है।
- अनुच्छेद 156 के तहत राज्यपाल राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत (Pleasure of the President) पद धारण करता है और सामान्यतः इसका कार्यकाल 5 वर्ष होता है।
- अनुच्छेद 157 के अनुसार राज्यपाल पद की अर्हता भारत का नागरिक होना और न्यूनतम 35 वर्ष की आयु पूरी करना है।
- अनुच्छेद 159 के तहत राज्यपाल को पद की शपथ संबंधित राज्य के उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश या वरिष्ठतम न्यायाधीश द्वारा दिलाई जाती है।
- अनुच्छेद 161 के तहत राज्यपाल को क्षमादान, दंड के निलंबन, परिहार या लघुकरण की न्यायिक शक्ति प्राप्त है, परंतु वह मृत्युदंड को पूर्णतः क्षमा (Pardon) नहीं कर सकता।
- अनुच्छेद 163 के अनुसार राज्यपाल को सहायता और सलाह देने के लिए मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में मंत्रिपरिषद होगी, सिवाय उन मामलों के जहाँ वह स्वविवेक से कार्य करता है।
- अनुच्छेद 200 के तहत राज्यपाल राज्य विधानमंडल द्वारा पारित विधेयक को स्वीकृति दे सकता है, रोक सकता है, पुनर्विचार के लिए लौटा सकता है या राष्ट्रपति के विचारार्थ सुरक्षित रख सकता है।
- अनुच्छेद 213 के अनुसार राज्य विधानमंडल के सत्र में न होने पर राज्यपाल अध्यादेश (Ordinance) प्रख्यापित कर सकता है, जिसकी अधिकतम अवधि 6 सप्ताह (सत्र शुरू होने से) होती है।
- अनुच्छेद 243-I और 243-Y के अंतर्गत राज्यपाल प्रत्येक 5 वर्ष पर राज्य वित्त आयोग (State Finance Commission) का गठन करता है।
तालिका
- अनुच्छेद: अनुच्छेद 153 · संवैधानिक प्रावधान / विषय: राज्यों के लिए एक राज्यपाल का पद (7वें संशोधन द्वारा दो या अधिक राज्यों के लिए भी)
- अनुच्छेद: अनुच्छेद 154 · संवैधानिक प्रावधान / विषय: राज्य की कार्यपालिका शक्ति का राज्यपाल में निहित होना
- अनुच्छेद: अनुच्छेद 155 · संवैधानिक प्रावधान / विषय: राज्यपाल की राष्ट्रपति द्वारा नियुक्ति
- अनुच्छेद: अनुच्छेद 156 · संवैधानिक प्रावधान / विषय: राज्यपाल की पदावधि (राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत, सामान्यतः 5 वर्ष)
- अनुच्छेद: अनुच्छेद 157 · संवैधानिक प्रावधान / विषय: राज्यपाल नियुक्त होने के लिए अर्हताएं (नागरिक, न्यूनतम आयु 35 वर्ष)
- अनुच्छेद: अनुच्छेद 159 · संवैधानिक प्रावधान / विषय: राज्यपाल द्वारा शपथ या प्रतिज्ञान (उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश द्वारा)
- अनुच्छेद: अनुच्छेद 161 · संवैधानिक प्रावधान / विषय: क्षमादान, दंड घटाने या स्थगित करने की राज्यपाल की शक्ति
- अनुच्छेद: अनुच्छेद 163 · संवैधानिक प्रावधान / विषय: राज्यपाल को सलाह देने के लिए मंत्रिपरिषद एवं राज्यपाल का स्वविवेकाधिकार
- अनुच्छेद: अनुच्छेद 200 · संवैधानिक प्रावधान / विषय: राज्य विधानमंडल द्वारा पारित विधेयकों पर राज्यपाल की अनुमति या राष्ट्रपति के लिए आरक्षण
- अनुच्छेद: अनुच्छेद 213 · संवैधानिक प्रावधान / विषय: विधानमंडल के विश्रांतिकाल में राज्यपाल की अध्यादेश प्रख्यापित करने की शक्ति
- अनुच्छेद: अनुच्छेद 243-I / 243-Y · संवैधानिक प्रावधान / विषय: राज्यपाल द्वारा प्रत्येक पाँच वर्ष पर राज्य वित्त आयोग का गठन
अभ्यास प्रश्न (हल सहित)
- प्रश्न 1: भारतीय संविधान के किस अनुच्छेद के तहत राज्यपाल को अध्यादेश जारी करने की शक्ति प्राप्त है?
(क) अनुच्छेद 123 (ख) अनुच्छेद 213 (ग) अनुच्छेद 200 (घ) अनुच्छेद 161
- ✔ उत्तर: (ख) अनुच्छेद 213 — अनुच्छेद 213 के तहत जब विधानमंडल सत्र में न हो, तब राज्यपाल अध्यादेश जारी कर सकता है (जबकि अनुच्छेद 123 राष्ट्रपति के अध्यादेश से संबंधित है)।
- प्रश्न 2: राज्यपाल की नियुक्ति और पदावधि के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा सही है?
(क) राज्यपाल का चुनाव जनता द्वारा प्रत्यक्ष रूप से किया जाता है। (ख) राज्यपाल को उसके पद की शपथ भारत के मुख्य न्यायाधीश दिलाते हैं। (ग) राज्यपाल राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत पद धारण करता है। (घ) राज्यपाल बनने के लिए न्यूनतम आयु 30 वर्ष निर्धारित है।
- ✔ उत्तर: (ग) राज्यपाल राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत पद धारण करता है। — अनुच्छेद 156(1) के अनुसार राज्यपाल राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत पद धारण करता है और न्यूनतम आयु 35 वर्ष है।
- प्रश्न 3: किस संविधान संशोधन अधिनियम द्वारा यह प्रावधान किया गया कि एक ही व्यक्ति को दो या अधिक राज्यों का राज्यपाल नियुक्त किया जा सकता है?
(क) 1ला संविधान संशोधन, 1951 (ख) 7वां संविधान संशोधन, 1956 (ग) 42वां संविधान संशोधन, 1976 (घ) 44वां संविधान संशोधन, 1978
- ✔ उत्तर: (ख) 7वां संविधान संशोधन, 1956 — 7वें संविधान संशोधन अधिनियम 1956 द्वारा अनुच्छेद 153 में संशोधन कर एक व्यक्ति को दो या अधिक राज्यों का राज्यपाल नियुक्त करने की व्यवस्था की गई।
- प्रश्न 4: राज्यपाल की क्षमादान शक्ति (अनुच्छेद 161) के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन असत्य है?
(क) राज्यपाल राज्य विधि के विरुद्ध अपराध के लिए दिए गए दंड को निलंबित कर सकता है। (ख) राज्यपाल दंड को कम या उसका स्वरूप बदल सकता है। (ग) राज्यपाल मृत्युदंड की सजा को पूर्णतः क्षमा (Pardon) कर सकता है। (घ) राज्यपाल की क्षमादान शक्ति सेना न्यायालय (कोर्ट मार्शल) के निर्णयों पर लागू नहीं होती।
- ✔ उत्तर: (ग) राज्यपाल मृत्युदंड की सजा को पूर्णतः क्षमा (Pardon) कर सकता है। — मृत्युदंड को पूर्ण रूप से क्षमा (Pardon) करने की शक्ति केवल राष्ट्रपति के पास (अनुच्छेद 72) है, राज्यपाल के पास नहीं।
- प्रश्न 5: राज्य विधानमंडल द्वारा पारित किसी विधेयक को राष्ट्रपति के विचारार्थ सुरक्षित रखने का अधिकार राज्यपाल को किस अनुच्छेद के तहत प्राप्त है?
(क) अनुच्छेद 200 (ख) अनुच्छेद 201 (ग) अनुच्छेद 213 (घ) अनुच्छेद 163
- ✔ उत्तर: (क) अनुच्छेद 200 — अनुच्छेद 200 के तहत राज्यपाल राज्य विधानमंडल द्वारा पारित विधेयक को राष्ट्रपति के विचारार्थ सुरक्षित (Reserve) रख सकता है।
परीक्षा में कैसे आता है
BPSC में राज्यपाल से संबंधित प्रश्न मुख्य रूप से संवैधानिक अनुच्छेदों (जैसे 153, 155, 161, 200, 213), उनकी योग्यताओं, अध्यादेश जारी करने की शक्ति, क्षमादान अधिकार तथा राष्ट्रपति और राज्यपाल की शक्तियों के तुलनात्मक अंतर पर पूछे जाते हैं।
इनमें भ्रम न करें
- ✘ नियुक्ति बनाम शपथ: राज्यपाल की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है (अनुच्छेद 155), लेकिन शपथ संबंधित राज्य के उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश दिलाते हैं (अनुच्छेद 159)।
- ✘ मृत्युदंड क्षमादान: राष्ट्रपति मृत्युदंड को पूरी तरह क्षमा (Pardon) कर सकते हैं, जबकि राज्यपाल केवल निलंबन, परिहार या लघुकरण कर सकते हैं, पूर्ण क्षमा नहीं।
- ✘ कार्यकाल: राज्यपाल का सामान्य कार्यकाल 5 वर्ष होता है, किंतु संविधान में कोई महाभियोग प्रक्रिया नहीं है; वे पूर्णतः राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत पद पर रहते हैं।
💡 राजा का कार्य निकास: 153 (पद), 154 (कार्यपालिका शक्ति), 155 (नियुक्ति), 156 (कार्यकाल), 157 (शर्तें/अर्हताएं), 159 (शपथ)
मुख्यमंत्री और राज्य मंत्रिपरिषद
राज्य की कार्यपालिका में मुख्यमंत्री वास्तविक प्रमुख (Real Executive) होता है, जबकि राज्यपाल केवल नाममात्र का प्रमुख होता है। संविधान के अनुच्छेद 163 के अनुसार, राज्यपाल को उसके कार्यों में सहायता और सलाह देने के लिए एक मंत्रिपरिषद होगी जिसका प्रधान मुख्यमंत्री होगा। मुख्यमंत्री की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा की जाती है और अन्य मंत्रियों की नियुक्ति राज्यपाल, मुख्यमंत्री की सलाह पर करता है। मंत्रिपरिषद सामूहिक रूप से राज्य की विधानसभा के प्रति उत्तरदायी होती है, जिसका अर्थ है कि वे तब तक पद पर रहते हैं जब तक उन्हें सदन का विश्वास प्राप्त है। बिहार की राजनीति में मुख्यमंत्री का पद अत्यंत प्रभावशाली रहा है, जहाँ डॉ. श्री कृष्ण सिंह से लेकर वर्तमान तक कई महत्वपूर्ण व्यक्तित्वों ने राज्य का नेतृत्व किया है।
मुख्य तथ्य
- अनुच्छेद 164 के तहत मुख्यमंत्री की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा की जाती है।
- 91वें संविधान संशोधन (2003) के अनुसार, मंत्रिपरिषद की कुल संख्या विधानसभा की कुल सदस्य संख्या के 15% से अधिक नहीं हो सकती (न्यूनतम 12)।
- बिहार के प्रथम मुख्यमंत्री डॉ. श्री कृष्ण सिंह (1946-1961) थे।
- बिहार की पहली महिला मुख्यमंत्री राबड़ी देवी थीं।
- अनुच्छेद 167 मुख्यमंत्री के कर्तव्यों को परिभाषित करता है, जिसमें राज्यपाल को सूचना देना शामिल है।
- बिहार के प्रथम दलित मुख्यमंत्री भोला पासवान शास्त्री थे।
- सतीश प्रसाद सिंह बिहार के सबसे कम समय (मात्र 5 दिन) तक रहने वाले मुख्यमंत्री थे।
- मुख्यमंत्री राज्य योजना बोर्ड का अध्यक्ष होता है।
- मंत्रियों को पद और गोपनीयता की शपथ राज्यपाल दिलाते हैं।
- यदि कोई मंत्री 6 महीने तक विधानमंडल का सदस्य नहीं बनता है, तो उसे पद छोड़ना पड़ता है।
- बिहार में वर्तमान में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार हैं, जिन्होंने रिकॉर्ड 9 बार शपथ ली है (2024 तक)।
- राज्य मंत्रिपरिषद के वेतन और भत्ते राज्य विधानमंडल द्वारा निर्धारित किए जाते हैं।
तालिका
- श्रेणी: प्रथम मुख्यमंत्री · नाम: डॉ. श्री कृष्ण सिंह · विशेषता: सबसे लंबा कार्यकाल (1946-61)
- श्रेणी: प्रथम महिला मुख्यमंत्री · नाम: राबड़ी देवी · विशेषता: तीन बार मुख्यमंत्री रहीं
- श्रेणी: प्रथम दलित मुख्यमंत्री · नाम: भोला पासवान शास्त्री · विशेषता: तीन बार अल्पकालिक कार्यकाल
- श्रेणी: प्रथम मुस्लिम मुख्यमंत्री · नाम: अब्दुल गफूर · विशेषता: 1973-75 के दौरान
- श्रेणी: सबसे कम कार्यकाल · नाम: सतीश प्रसाद सिंह · विशेषता: मात्र 5 दिन (1968)
अभ्यास प्रश्न (हल सहित)
- प्रश्न 6: बिहार के मुख्यमंत्री की नियुक्ति संविधान के किस अनुच्छेद के तहत की जाती है?
(क) अनुच्छेद 163 (ख) अनुच्छेद 164 (ग) अनुच्छेद 165 (घ) अनुच्छेद 167
- ✔ उत्तर: (ख) अनुच्छेद 164 — अनुच्छेद 164 स्पष्ट रूप से मुख्यमंत्री की नियुक्ति और मंत्रियों के कार्यकाल का प्रावधान करता है।
- प्रश्न 7: बिहार मंत्रिपरिषद में मंत्रियों की अधिकतम संख्या कितनी हो सकती है?
(क) 30 (ख) 36 (ग) 40 (घ) विधानसभा सदस्यों का 15%
- ✔ उत्तर: (घ) विधानसभा सदस्यों का 15% — 91वें संशोधन के अनुसार, यह सीमा विधानसभा की कुल सदस्य संख्या का 15% निर्धारित है।
- प्रश्न 8: बिहार की प्रथम महिला मुख्यमंत्री कौन थीं?
(क) सुचेता कृपलानी (ख) सरोजिनी नायडू (ग) राबड़ी देवी (घ) मीरा कुमार
- ✔ उत्तर: (ग) राबड़ी देवी — राबड़ी देवी बिहार की पहली महिला मुख्यमंत्री बनी थीं।
- प्रश्न 9: राज्य मंत्रिपरिषद सामूहिक रूप से किसके प्रति उत्तरदायी होती है?
(क) राज्यपाल (ख) मुख्यमंत्री (ग) विधानसभा (घ) विधान परिषद
- ✔ उत्तर: (ग) विधानसभा — संसदीय प्रणाली में मंत्रिपरिषद केवल निचले सदन (विधानसभा) के प्रति जवाबदेह होती है।
- प्रश्न 10: निम्नलिखित में से कौन बिहार के सबसे कम अवधि के मुख्यमंत्री रहे हैं?
(क) भोला पासवान शास्त्री (ख) सतीश प्रसाद सिंह (ग) कर्पूरी ठाकुर (घ) जीतराम मांझी
- ✔ उत्तर: (ख) सतीश प्रसाद सिंह — सतीश प्रसाद सिंह 1968 में केवल 5 दिनों के लिए मुख्यमंत्री रहे थे।
📜 असली पिछले वर्ष के प्रश्न (BPSC)
- [BPSC 70वीं प्रारंभिक (13 दिसंबर 2024), प्रश्न 115] बिहार विधानसभा में राज्य बजट 2024-25 किसने पेश किया ?
(क) श्री नीतीश कुमार (ख) श्री विजय सिन्हा (ग) श्री सम्राट चौधरी (घ) श्री विजय कुमार चौधरी
- ✔ आधिकारिक उत्तर: (ग) श्री सम्राट चौधरी — यह प्रश्न राज्य सरकार के एक महत्वपूर्ण मंत्री (वित्त मंत्री/उप-मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी) द्वारा बजट पेश करने से संबंधित है, जो मंत्रिपरिषद की भूमिका को दर्शाता है।
- [BPSC 71वीं प्रारंभिक (13 सितंबर 2025), प्रश्न 61] केन्द्रीय सरकार के बारे में निम्न कथनों पर विचार कीजिए।
1) मंत्रालय तथा विभागों का निर्माण प्रधानमंत्री द्वारा कैबिनेट सचिव के परामर्श से होता है।
2) प्रत्येक मंत्री को मंत्रालय राष्ट्रपति द्वारा प्रधानमंत्री के परामर्श पर आवंटित किया जाता है।
इनमें से :
(क) केवल 1 सही है (ख) केवल 2 सही है (ग) 1 और 2 सही है (घ) न तो 1 सही है और न ही 2 सही है
- ✔ आधिकारिक उत्तर: (ख) केवल 2 सही है — यह प्रश्न स्पष्ट करता है कि विभागों का आवंटन राज्यपाल (या राष्ट्रपति) द्वारा मुख्यमंत्री (या प्रधानमंत्री) की सलाह पर किया जाता है।
परीक्षा में कैसे आता है
BPSC में इस विषय से अक्सर मुख्यमंत्री की शक्तियों, बिहार के 'प्रथम' व्यक्तियों (प्रथम मुख्यमंत्री, महिला मुख्यमंत्री) और मंत्रिपरिषद की संरचना (15% नियम) पर प्रश्न पूछे जाते हैं।
इनमें भ्रम न करें
- ✘ अनुच्छेद 163 (सलाह देना) और 164 (नियुक्ति) के बीच भ्रम।
- ✘ मंत्रिपरिषद राज्यपाल के प्रति व्यक्तिगत रूप से लेकिन विधानसभा के प्रति सामूहिक रूप से उत्तरदायी होती है।
💡 CM की 'शपथ' और 'नियुक्ति' के लिए '164' याद रखें - 'एक' मुख्यमंत्री, 'छह' महीने में सदस्यता, 'चार' (चयन) राज्यपाल द्वारा।
बिहार विधायिका: विधानसभा और विधान परिषद
बिहार में द्विसदनीय विधायिका व्यवस्था है, जिसका अर्थ है कि यहाँ कानून बनाने के लिए दो सदन हैं: विधानसभा और विधान परिषद। विधानसभा निचला सदन है जहाँ सदस्य जनता द्वारा सीधे चुने जाते हैं, जबकि विधान परिषद एक स्थायी उच्च सदन है। विधानसभा का नेतृत्व 'अध्यक्ष' (Speaker) करता है, जो सदन की कार्यवाही और अनुशासन बनाए रखने के लिए जिम्मेदार होता है। बिहार में सीटों का बँवारा जनसंख्या के आधार पर किया गया है, जिसमें अनुसूचित जाति और जनजाति के लिए विशेष आरक्षण का प्रावधान है। 1937 के पहले चुनावों से लेकर वर्तमान तक, बिहार की विधायिका ने राज्य के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
मुख्य तथ्य
- बिहार विधानसभा में कुल सीटों की संख्या 243 है।
- बिहार विधान परिषद में कुल सीटों की संख्या 75 है।
- विधानसभा में अनुसूचित जाति (SC) के लिए 38 सीटें आरक्षित हैं।
- विधानसभा में अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए 2 सीटें (कटोरिया और मनिहारी) आरक्षित हैं।
- बिहार विधानसभा के प्रथम अध्यक्ष श्री राम दयालु सिंह थे।
- 1937 के चुनावों में बिहार विधानसभा की कुल 152 सीटों में से कांग्रेस ने 98 सीटें जीती थीं।
- सदन की कार्यवाही शुरू करने के लिए गणपूर्ति (कोरम) कुल सदस्यों का 1/10 भाग होना अनिवार्य है।
- विधान परिषद एक स्थायी सदन है, इसके 1/3 सदस्य प्रत्येक दो वर्ष में सेवानिवृत्त होते हैं।
- वर्तमान में (2024) बिहार विधानसभा के अध्यक्ष नंद किशोर यादव हैं।
- विधायिका में कार्य केवल राज्य की सरकारी भाषा, हिंदी या अंग्रेजी में किया जा सकता है।
- स्वतंत्रता के बाद बिहार विधानसभा के प्रथम अध्यक्ष बिंदेश्वरी प्रसाद वर्मा थे।
तालिका
- सदन का नाम: विधानसभा · कुल सीटें: 243 · आरक्षित सीटें (SC/ST): 38 (SC) / 2 (ST) · प्रथम प्रमुख: राम दयालु सिंह
- सदन का नाम: विधान परिषद · कुल सीटें: 75 · आरक्षित सीटें (SC/ST): लागू नहीं · प्रथम प्रमुख: राजीव रंजन प्रसाद सिंह
अभ्यास प्रश्न (हल सहित)
- प्रश्न 11: बिहार विधानसभा में अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए कितनी सीटें आरक्षित हैं?
(क) 38 (ख) 2 (ग) 40 (घ) 1
- ✔ उत्तर: (ख) 2 — बिहार विधानसभा में ST के लिए 2 सीटें (कटोरिया और मनिहारी) आरक्षित हैं।
- प्रश्न 12: बिहार विधान परिषद की सदस्य संख्या कितनी है?
(क) 243 (ख) 75 (ग) 152 (घ) 101
- ✔ उत्तर: (ख) 75 — बिहार विधान परिषद में कुल 75 सीटें हैं।
- प्रश्न 13: बिहार विधानसभा के प्रथम अध्यक्ष कौन थे?
(क) बिंदेश्वरी प्रसाद वर्मा (ख) राम दयालु सिंह (ग) नंद किशोर यादव (घ) राजीव रंजन प्रसाद
- ✔ उत्तर: (ख) राम दयालु सिंह — श्री राम दयालु सिंह बिहार विधानसभा के पहले अध्यक्ष थे।
- प्रश्न 14: राज्य विधायिका की कार्यवाही के संबंध में कौन सा कथन सत्य है?
(क) कार्यवाही केवल अंग्रेजी में होगी (ख) महाधिवक्ता को मत देने का अधिकार है (ग) कार्यवाही हिंदी, अंग्रेजी या सरकारी भाषा में होगी (घ) न्यायाधीश के आचरण पर चर्चा हो सकती है
- ✔ उत्तर: (ग) कार्यवाही हिंदी, अंग्रेजी या सरकारी भाषा में होगी — अनुच्छेद 210 के अनुसार कार्यवाही हिंदी, अंग्रेजी या राज्य की आधिकारिक भाषा में होती है।
- प्रश्न 15: 1937 के प्रांतीय चुनावों में बिहार विधानसभा में कुल कितनी सीटें थीं?
(क) 243 (ख) 152 (ग) 75 (घ) 324
- ✔ उत्तर: (ख) 152 — 1937 के चुनावों के समय बिहार विधानसभा में कुल 152 सीटें निर्धारित थीं।
📜 असली पिछले वर्ष के प्रश्न (BPSC)
- [BPSC 71वीं प्रारंभिक (13 सितंबर 2025), प्रश्न 62] राज्य विधायिका की कार्यवाही के बारे में क्या सत्य है?
(क) विधायिका में कार्य केवल राज्य की सरकारी भाषा में अथवा हिन्दी अथवा अंग्रेजी में निष्पादित किए जाएँगे। (ख) महाधिवक्ता को मत देने का अधिकार है। (ग) यह किसी उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के आचरण पर चर्चा कर सकती है। (घ) किसी कथित अनियमितता के आधार पर कार्यवाही की वैधता पर प्रश्न किए जा सकते हैं।
- ✔ आधिकारिक उत्तर: (क) विधायिका में कार्य केवल राज्य की सरकारी भाषा में अथवा हिन्दी अथवा अंग्रेजी में निष्पादित किए जाएँगे। — संविधान के अनुच्छेद 210 के अनुसार, राज्य विधायिका में कार्य हिंदी, अंग्रेजी या राज्य की आधिकारिक भाषा में किया जाता है।
परीक्षा में कैसे आता है
BPSC अक्सर विधानसभा और विधान परिषद की सीटों की संख्या, आरक्षित सीटों (SC/ST) के आंकड़े और प्रथम पदाधिकारियों के नाम पूछता है।
इनमें भ्रम न करें
- ✘ विधानसभा (243) और विधान परिषद (75) की सीटों की संख्या में भ्रम।
- ✘ SC आरक्षण (38) और ST आरक्षण (2) के आंकड़ों को आपस में बदलना।
- ✘ प्रथम अध्यक्ष (राम दयालु सिंह) और स्वतंत्रता के बाद प्रथम अध्यक्ष (बिंदेश्वरी प्रसाद वर्मा) के बीच भ्रम।
💡 बिहार विधायिका का '243-75' फॉर्मूला याद रखें: 243 (जनता की सभा) और 75 (बड़ों की परिषद)।
पटना उच्च न्यायालय, BPSC और राज्य निर्वाचन आयोग
बिहार की शासन व्यवस्था में न्यायपालिका और संवैधानिक आयोगों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। पटना उच्च न्यायालय राज्य का सर्वोच्च न्यायिक अंग है, जिसकी स्थापना ब्रिटिश काल में 1916 में हुई थी। राज्य निर्वाचन आयोग (अनुच्छेद 243K) पंचायतों और नगर निकायों के चुनावों के लिए जिम्मेदार है, जबकि बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) राज्य की प्रशासनिक सेवाओं के लिए अधिकारियों का चयन करता है। इसके अतिरिक्त, राज्य सूचना आयोग और महिला आयोग जैसी संस्थाएं सुशासन और अधिकारों के संरक्षण को सुनिश्चित करती हैं। ये सभी संस्थाएं मिलकर बिहार में कानून का शासन और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को सुदृढ़ बनाती हैं।
मुख्य तथ्य
- पटना उच्च न्यायालय की स्थापना 3 फरवरी 1916 को हुई थी।
- संविधान के अनुच्छेद 214 से 231 तक उच्च न्यायालयों के गठन और शक्तियों का वर्णन है।
- उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा CJI और संबंधित राज्यपाल के परामर्श से की जाती है।
- राज्य निर्वाचन आयोग का गठन अनुच्छेद 243K के तहत किया जाता है।
- दीपक प्रसाद वर्तमान में बिहार के राज्य निर्वाचन आयुक्त हैं।
- राज्य निर्वाचन आयुक्त को उसी प्रक्रिया से हटाया जा सकता है जैसे उच्च न्यायालय के न्यायाधीश को।
- बिहार राज्य सूचना आयोग की स्थापना जून 2006 में की गई थी।
- राज्य निर्वाचन आयोग पंचायतों और नगर पालिकाओं के लिए मतदाता सूची तैयार और अपडेट करता है।
- पटना विश्वविद्यालय की स्थापना 1917 में हुई थी, जो उच्च न्यायालय के एक वर्ष बाद बनी।
- बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) एक संवैधानिक निकाय है जो अनुच्छेद 315 के तहत कार्य करता है।
तालिका
- संस्था: पटना उच्च न्यायालय · स्थापना / अनुच्छेद: 3 फरवरी 1916 · मुख्यालय / प्रमुख: पटना
- संस्था: राज्य निर्वाचन आयोग · स्थापना / अनुच्छेद: अनुच्छेद 243K · मुख्यालय / प्रमुख: दीपक प्रसाद (आयुक्त)
- संस्था: राज्य सूचना आयोग · स्थापना / अनुच्छेद: जून 2006 · मुख्यालय / प्रमुख: विनोद सिंह गुंजियाल (मुख्य आयुक्त)
- संस्था: BPSC · स्थापना / अनुच्छेद: अनुच्छेद 315 · मुख्यालय / प्रमुख: पटना
- संस्था: राज्य महिला आयोग · स्थापना / अनुच्छेद: स्वतंत्र विभाग · मुख्यालय / प्रमुख: पटना
अभ्यास प्रश्न (हल सहित)
- प्रश्न 16: पटना उच्च न्यायालय की स्थापना किस वर्ष हुई थी?
(क) 1912 (ख) 1916 (ग) 1917 (घ) 1921
- ✔ उत्तर: (ख) 1916 — पटना उच्च न्यायालय की स्थापना 3 फरवरी 1916 को हुई थी।
- प्रश्न 17: बिहार के राज्य निर्वाचन आयुक्त के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही है?
(क) उनकी नियुक्ति मुख्यमंत्री द्वारा की जाती है। (ख) उन्हें केवल राज्यपाल द्वारा हटाया जा सकता है। (ग) उन्हें उसी रीति से हटाया जाएगा जैसे उच्च न्यायालय के न्यायाधीश को। (घ) उनका कार्यकाल 10 वर्ष का होता है।
- ✔ उत्तर: (ग) उन्हें उसी रीति से हटाया जाएगा जैसे उच्च न्यायालय के न्यायाधीश को। — अनुच्छेद 243K के अनुसार, राज्य निर्वाचन आयुक्त को हटाने की प्रक्रिया उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के समान है।
- प्रश्न 18: बिहार राज्य सूचना आयोग की स्थापना कब हुई थी?
(क) जून 2005 (ख) जून 2006 (ग) अगस्त 2007 (घ) जनवरी 2006
- ✔ उत्तर: (ख) जून 2006 — बिहार राज्य सूचना आयोग की स्थापना जून 2006 में की गई थी।
- प्रश्न 19: पंचायतों के चुनाव कराने का उत्तरदायित्व किसका है?
(क) भारत निर्वाचन आयोग (ख) राज्य निर्वाचन आयोग (ग) जिला मजिस्ट्रेट (घ) मुख्यमंत्री कार्यालय
- ✔ उत्तर: (ख) राज्य निर्वाचन आयोग — अनुच्छेद 243K के तहत राज्य निर्वाचन आयोग स्थानीय निकायों (पंचायतों) के चुनाव कराता है।
परीक्षा में कैसे आता है
BPSC में पटना उच्च न्यायालय की स्थापना तिथि, राज्य निर्वाचन आयोग के अनुच्छेद (243K) और वर्तमान पदाधिकारियों के नाम पर अक्सर प्रश्न पूछे जाते हैं।
इनमें भ्रम न करें
- ✘ पटना उच्च न्यायालय (1916) और पटना विश्वविद्यालय (1917) की स्थापना के वर्षों में भ्रम हो सकता है।
- ✘ राज्य निर्वाचन आयोग (स्थानीय निकाय चुनाव) और भारत निर्वाचन आयोग (विधानसभा चुनाव) के कार्यों में अंतर स्पष्ट रखें।
💡 16 में कोर्ट (HC), 17 में यूनिवर्सिटी (PU) - पहले न्याय मिला, फिर शिक्षा।
बिहार में जिला प्रशासन
बिहार में जिला प्रशासन राज्य शासन की सबसे महत्वपूर्ण जमीनी इकाई है, जो सीधे जनता से जुड़ी होती है। राज्य को प्रशासनिक सुगमता के लिए 9 प्रमंडलों और 38 जिलों में विभाजित किया गया है। जिला स्तर पर सर्वोच्च अधिकारी जिला पदाधिकारी (DM) होता है, जो कानून-व्यवस्था, राजस्व संग्रहण और विकास कार्यों के लिए जिम्मेदार है। जिले के नीचे अनुमंडल (Subdivision) और फिर प्रखंड (Block) स्तर की प्रशासनिक व्यवस्था होती है। प्रखंड स्तर पर प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) विकास योजनाओं के क्रियान्वयन का मुख्य केंद्र होता है। यह ढांचा राज्य सरकार की नीतियों को अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाने का कार्य करता है।
मुख्य तथ्य
- बिहार में कुल जिलों की संख्या 38 है।
- बिहार को प्रशासनिक रूप से 9 प्रमंडलों (Divisions) में बांटा गया है।
- बिहार का 38वां और सबसे नवीनतम जिला अरवल है, जिसे जहानाबाद से अलग कर बनाया गया था।
- राज्य में अनुमंडलों (Subdivisions) की कुल संख्या 101 है।
- बिहार में कुल प्रखंडों (Blocks) की संख्या 534 है।
- प्रमंडल का मुख्य प्रशासनिक अधिकारी 'प्रमंडलीय आयुक्त' (Divisional Commissioner) होता है।
- जिला स्तर पर कानून-व्यवस्था बनाए रखने की मुख्य जिम्मेदारी पुलिस अधीक्षक (SP) की होती है।
- 10 अगस्त 1929 को बिहार के पटना जिले में 'राजनीतिक पीड़ित दिवस' मनाया गया था।
- क्षेत्रफल की दृष्टि से बिहार का सबसे बड़ा जिला पश्चिमी चंपारण है।
- क्षेत्रफल की दृष्टि से बिहार का सबसे छोटा जिला शिवहर है।
- जनसंख्या की दृष्टि से पटना बिहार का सबसे बड़ा जिला है।
- जिला स्तर पर मुख्य विकास अधिकारी 'उप विकास आयुक्त' (DDC) होता है।
तालिका
- प्रशासनिक इकाई: प्रमंडल (Division) · मुख्य अधिकारी: प्रमंडलीय आयुक्त (Commissioner)
- प्रशासनिक इकाई: जिला (District) · मुख्य अधिकारी: जिला पदाधिकारी (DM) / कलेक्टर
- प्रशासनिक इकाई: अनुमंडल (Subdivision) · मुख्य अधिकारी: अनुमंडल पदाधिकारी (SDO/SDM)
- प्रशासनिक इकाई: प्रखंड (Block) · मुख्य अधिकारी: प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO)
- प्रशासनिक इकाई: अंचल (Circle) · मुख्य अधिकारी: अंचल अधिकारी (CO)
अभ्यास प्रश्न (हल सहित)
- प्रश्न 20: बिहार में प्रमंडलों (Divisions) की कुल संख्या कितनी है?
(क) 7 (ख) 8 (ग) 9 (घ) 12
- ✔ उत्तर: (ग) 9 — बिहार को प्रशासनिक कार्यों के लिए 9 प्रमंडलों में विभाजित किया गया है।
- प्रश्न 21: बिहार का 38वां जिला कौन सा है?
(क) शिवहर (ख) अरवल (ग) बांका (घ) शेखपुरा
- ✔ उत्तर: (ख) अरवल — अरवल बिहार का सबसे नवीनतम और 38वां जिला है।
- प्रश्न 22: पटना जिले में 'राजनीतिक पीड़ित दिवस' कब मनाया गया था?
(क) 10 अगस्त 1929 (ख) 15 अगस्त 1930 (ग) 26 जनवरी 1929 (घ) 9 अगस्त 1942
- ✔ उत्तर: (क) 10 अगस्त 1929 — स्रोत के अनुसार, 10 अगस्त 1929 को पटना में राजनीतिक पीड़ित दिवस मनाया गया था।
- प्रश्न 23: प्रखंड (Block) स्तर पर विकास योजनाओं के लिए मुख्य रूप से कौन जिम्मेदार होता है?
(क) SDO (ख) DM (ग) BDO (घ) CO
- ✔ उत्तर: (ग) BDO — प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) प्रखंड स्तर पर विकास कार्यों का प्रमुख होता है।
- प्रश्न 24: बिहार के प्रशासनिक ढांचे के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन सा मिलान सही नहीं है?
(क) प्रमंडल - 9 (ख) जिला - 38 (ग) अनुमंडल - 101 (घ) प्रखंड - 512
- ✔ उत्तर: (घ) प्रखंड - 512 — बिहार में प्रखंडों की कुल संख्या 534 है, न कि 512।
परीक्षा में कैसे आता है
BPSC में इस उप-विषय से अक्सर जिलों की संख्या, प्रमंडलों के नाम, नवीनतम जिले का नाम और प्रशासनिक अधिकारियों के पदानुक्रम से संबंधित प्रश्न पूछे जाते हैं।
इनमें भ्रम न करें
- ✘ छात्र अक्सर DM और कलेक्टर के बीच भ्रमित होते हैं; वास्तव में ये एक ही व्यक्ति के दो अलग-अलग कार्य (प्रशासन और राजस्व) हैं।
- ✘ अनुमंडल (101) और प्रखंड (534) की संख्या में अक्सर भ्रम होता है।
💡 बिहार का '9-38-101-534' नियम याद रखें (प्रमंडल-जिला-अनुमंडल-प्रखंड)।
एक नज़र में (Revision)
- संविधान के भाग-6 (अनुच्छेद 153-167) में राज्य की कार्यपालिका का वर्णन है, जिसके संवैधानिक प्रमुख राज्यपाल होते हैं।
- राज्यपाल की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा अनुच्छेद 155 के तहत की जाती है तथा वह राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत (अनुच्छेद 156) पद धारण करते हैं।
- अनुच्छेद 163 के तहत राज्यपाल को सहायता एवं सलाह देने हेतु मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में एक मंत्रिपरिषद होती है।
- 91वें संविधान संशोधन 2003 के अनुसार राज्य मंत्रिपरिषद का आकार विधानसभा के कुल सदस्यों के 15% से अधिक और 12 सदस्यों से कम नहीं हो सकता।
- बिहार विधानमंडल एक द्विसदनीय व्यवस्था है, जिसमें विधान सभा (243 सीटें) और विधान परिषद (75 सीटें) शामिल हैं।
- बिहार विधानसभा की कुल 243 सीटों में से 38 सीटें अनुसूचित जाति (SC) और 2 सीटें (मनिहारी एवं कटोरिया) अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए आरक्षित हैं।
- बिहार विधान परिषद के 75 सदस्यों में से 5/6 सदस्य अप्रत्यक्ष रूप से निर्वाचित तथा 1/6 सदस्य राज्यपाल द्वारा मनोनीत किए जाते हैं।
- पटना उच्च न्यायालय की स्थापना 3 फरवरी 1916 को हुई थी तथा इसके प्रथम मुख्य न्यायाधीश सर एडवर्ड मेनार्ड डेस चैम्प्स चामियर थे।
- बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) की स्थापना 1 अप्रैल 1949 को हुई थी; इसके अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति राज्यपाल करते हैं लेकिन उन्हें पदमुक्त केवल राष्ट्रपति कर सकते हैं।
- राज्य निर्वाचन आयोग का गठन अनुच्छेद 243K एवं 243ZA के तहत पंचायतों तथा नगर निकायों के स्वतंत्र व निष्पक्ष चुनावों के संचालन हेतु किया जाता है।
- बिहार प्रशासनिक दृष्टि से 9 प्रमंडल (Divisions), 38 जिले (Districts), 101 अनुमंडल (Sub-divisions) और 534 प्रखंडों (Blocks) में विभाजित है।
- जिला प्रशासन का सर्वोच्च अधिकारी जिला दंडाधिकारी (District Magistrate/Collector) होता है, जो विधि-व्यवस्था, राजस्व और विकास प्रशासन का समन्वय करता है।
अपने आप को जाँचिए — 10 प्रश्न
1. बिहार विधान सभा में आरक्षित सीटों के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा युग्म सही है?
- (क) अनुसूचित जाति: 40; अनुसूचित जनजाति: 0
- (ख) अनुसूचित जाति: 38; अनुसूचित जनजाति: 2
- (ग) अनुसूचित जाति: 36; अनुसूचित जनजाति: 4
- (घ) अनुसूचित जाति: 42; अनुसूचित जनजाति: 1
उत्तर देखें
उत्तर: (ख) अनुसूचित जाति: 38; अनुसूचित जनजाति: 2
बिहार विधानसभा की कुल 243 सीटों में से 38 सीटें अनुसूचित जाति (SC) के लिए और 2 सीटें (मनिहारी एवं कटोरिया) अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए आरक्षित हैं।
2. राज्यपाल के पद और शक्तियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 155 के तहत राज्यपाल की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है।
2. राज्यपाल अपने पद पर राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत बना रहता है।
3. अनुच्छेद 213 के तहत राज्यपाल को अध्यादेश जारी करने की शक्ति प्राप्त है।
उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?
- (क) केवल 1 और 2
- (ख) केवल 2 और 3
- (ग) केवल 1 और 3
- (घ) 1, 2 और 3
उत्तर देखें
उत्तर: (घ) 1, 2 और 3
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 155 (नियुक्ति), अनुच्छेद 156 (राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत कार्यकाल), और अनुच्छेद 213 (अध्यादेश जारी करने की शक्ति) के प्रावधान राज्यपाल से संबंधित हैं और तीनों कथन सत्य हैं।
3. भारतीय संविधान के किस अनुच्छेद के तहत मुख्यमंत्री का यह कर्तव्य है कि वह राज्य के प्रशासन और विधायी प्रस्तावों से संबंधित जानकारी राज्यपाल को दे?
- (क) अनुच्छेद 163
- (ख) अनुच्छेद 164
- (ग) अनुच्छेद 166
- (घ) अनुच्छेद 167
उत्तर देखें
उत्तर: (घ) अनुच्छेद 167
संविधान का अनुच्छेद 167 मुख्यमंत्री के कर्तव्यों को परिभाषित करता है, जिसके अंतर्गत राज्यपाल को राज्य प्रशासन और विधायी प्रस्तावों की जानकारी देना अनिवार्य है।
4. बिहार विधान परिषद की कुल सदस्य संख्या 75 है। इसके संदर्भ में राज्यपाल द्वारा साहित्य, विज्ञान, कला, सहकारिता और समाज सेवा क्षेत्र से कितने सदस्य मनोनीत किए जाते हैं?
- (क) 1/3 सदस्य (25 सदस्य)
- (ख) 1/6 सदस्य (12 या 13 सदस्य)
- (ग) 1/12 सदस्य (6 सदस्य)
- (घ) 1/4 सदस्य (18 सदस्य)
उत्तर देखें
उत्तर: (ख) 1/6 सदस्य (12 या 13 सदस्य)
अनुच्छेद 171(3)(e) और 171(5) के तहत विधान परिषद के कुल सदस्यों का 1/6 भाग (75 में से लगभग 12 सदस्य) राज्यपाल द्वारा मनोनीत किया जाता है।
5. पटना उच्च न्यायालय की औपचारिक स्थापना किस तिथि को हुई थी?
- (क) 22 मार्च 1912
- (ख) 3 फरवरी 1916
- (ग) 1 अप्रैल 1936
- (घ) 26 जनवरी 1950
उत्तर देखें
उत्तर: (ख) 3 फरवरी 1916
पटना उच्च न्यायालय का औपचारिक उद्घाटन 3 फरवरी 1916 को भारत के तत्कालीन वायसराय लॉर्ड हार्डिंग द्वारा किया गया था।
6. बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सत्य है?
- (क) इसके अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है।
- (ख) इसके अध्यक्ष और सदस्यों को पद से हटाने का अधिकार केवल राज्यपाल को है।
- (ग) इसकी स्थापना 1 अप्रैल 1949 को भारत सरकार अधिनियम 1935 के प्रावधानों के तहत की गई थी।
- (घ) इसके सदस्यों का कार्यकाल 6 वर्ष या 65 वर्ष की आयु (जो भी पहले हो) तक होता है।
उत्तर देखें
उत्तर: (ग) इसकी स्थापना 1 अप्रैल 1949 को भारत सरकार अधिनियम 1935 के प्रावधानों के तहत की गई थी।
BPSC की स्थापना 1 अप्रैल 1949 को हुई थी। नियुक्ति राज्यपाल करते हैं लेकिन निष्कासन राष्ट्रपति द्वारा अनुच्छेद 317 के तहत किया जाता है, तथा राज्य लोक सेवा आयोग के सदस्यों की आयु सीमा 62 वर्ष होती है।
7. राज्य निर्वाचन आयुक्त (State Election Commissioner) को पद से हटाने की प्रक्रिया किसके समान है?
- (क) राज्यपाल
- (ख) राज्य लोक सेवा आयोग का अध्यक्ष
- (ग) उच्च न्यायालय का न्यायाधीश
- (घ) राज्य का महाधिवक्ता
उत्तर देखें
उत्तर: (ग) उच्च न्यायालय का न्यायाधीश
संविधान के अनुच्छेद 243K(2) के अनुसार राज्य निर्वाचन आयुक्त को केवल उन्हीं आधारों और रीति से पद से हटाया जा सकता है, जैसे उच्च न्यायालय के न्यायाधीश को हटाया जाता है।
8. बिहार के प्रशासनिक प्रभागों के संदर्भ में निम्नलिखित का सही मिलान कीजिए:
(a) प्रमंडल (Divisions) - (1) 534
(b) जिले (Districts) - (2) 101
(c) अनुमंडल (Sub-divisions) - (3) 9
(d) प्रखंड (Blocks) - (4) 38
कूट:
- (क) a-3, b-4, c-2, d-1
- (ख) a-4, b-3, c-1, d-2
- (ग) a-3, b-4, c-1, d-2
- (घ) a-2, b-4, c-3, d-1
उत्तर देखें
उत्तर: (क) a-3, b-4, c-2, d-1
बिहार में 9 प्रमंडल, 38 जिले, 101 अनुमंडल और 534 प्रखंड (प्रखंड/अंचल) हैं। अतः सही कूट a-3, b-4, c-2, d-1 है।
9. बिहार विधानसभा के अध्यक्ष (Speaker) के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन असत्य है?
- (क) विधानसभा अध्यक्ष का चुनाव विधानसभा के सदस्यों द्वारा अपने में से ही किया जाता है।
- (ख) अध्यक्ष अपना त्यागपत्र विधानसभा के उपाध्यक्ष को संबोधित करता है।
- (ग) सामान्य स्थिति में अध्यक्ष सदन में पहला मत देने का अधिकार रखता है।
- (घ) कोई विधेयक धन विधेयक है या नहीं, इसका अंतिम निर्णय विधानसभा अध्यक्ष करता है।
उत्तर देखें
उत्तर: (ग) सामान्य स्थिति में अध्यक्ष सदन में पहला मत देने का अधिकार रखता है।
अनुच्छेद 189(1) के अनुसार विधानसभा अध्यक्ष सामान्य स्थिति में मतदान नहीं करता; वह केवल मत बराबर (tie) होने की स्थिति में निर्णायक मत (casting vote) का प्रयोग करता है।
10. जिले के स्तर पर भू-राजस्व प्रशासन, शांति व्यवस्था और विकास योजनाओं के प्रभावी समन्वय हेतु जिला दंडाधिकारी (DM) किस रूप में कार्य करता है?
- (क) केवल मुख्य न्यायिक अधिकारी के रूप में
- (ख) जिला कलेक्टर, जिला दंडाधिकारी और जिला विकास आयुक्त/मुख्य प्रशासनिक समन्वयक के रूप में
- (ग) राज्य लोक सेवा आयोग के क्षेत्रीय प्रतिनिधि के रूप में
- (घ) उच्च न्यायालय के अधीनस्थ पर्यवेक्षक के रूप में
उत्तर देखें
उत्तर: (ख) जिला कलेक्टर, जिला दंडाधिकारी और जिला विकास आयुक्त/मुख्य प्रशासनिक समन्वयक के रूप में
जिला स्तर पर एक ही अधिकारी भू-राजस्व के लिए 'कलेक्टर', विधि-व्यवस्था के लिए 'जिला दंडाधिकारी' (DM) और विकास कार्यों के शीर्ष समन्वयक के रूप में त्रिस्तरीय भूमिका निभाता है।
English version — State Government and Bihar Polity
This chapter is vital for BPSC Prelims GS and Mains GS Paper 2 (Indian Polity). It covers the constitutional framework of the state executive, Bihar's bicameral legislature, Patna High Court, and the state's administrative machinery.
Governor: Appointment, Powers, and Discretion
Part VI of the Constitution (Articles 153 to 167) deals with the state executive, headed by the Governor as the constitutional head. Under Article 153, there shall be a Governor for each state, but the 7th Constitutional Amendment Act of 1956 allows the appointment of the same person as Governor for two or more states. The Governor is appointed by the President and holds office during the pleasure of the President. The executive power of the state is vested in the Governor under Article 154. The Governor exercises executive, legislative, financial, and judicial powers, including promulgating ordinances and constituting the State Finance Commission. Additionally, Article 163 endows the Governor with certain discretionary powers where ministerial advice is not strictly binding.
Key facts
- Article 153 provides that there shall be a Governor for each state.
- The 7th Constitutional Amendment Act of 1956 enabled the appointment of the same person as Governor for two or more states.
- Under Article 154, the executive power of the state is vested in the Governor.
- Under Article 155, the Governor is appointed by the President by warrant under his hand and seal.
- Under Article 156, the Governor holds office during the pleasure of the President, normally for a term of 5 years.
- Under Article 157, qualifications for a Governor require being an Indian citizen and having completed at least 35 years of age.
- Under Article 159, the oath of office to the Governor is administered by the Chief Justice of the concerned High Court or the senior-most judge.
- Under Article 161, the Governor has pardoning powers to suspend, remit, or commute sentences, but cannot fully pardon a death sentence.
- Article 163 provides for a Council of Ministers headed by the Chief Minister to aid and advise the Governor, except in discretionary matters.
- Under Article 200, the Governor can give assent, withhold assent, return a bill for reconsideration, or reserve it for the President's consideration.
- Under Article 213, the Governor can promulgate ordinances when the state legislature is in recess, valid up to 6 weeks from reassembly.
- Under Articles 243-I and 243-Y, the Governor constitutes the State Finance Commission every 5 years.
Table
- अनुच्छेद: अनुच्छेद 153 · संवैधानिक प्रावधान / विषय: राज्यों के लिए एक राज्यपाल का पद (7वें संशोधन द्वारा दो या अधिक राज्यों के लिए भी)
- अनुच्छेद: अनुच्छेद 154 · संवैधानिक प्रावधान / विषय: राज्य की कार्यपालिका शक्ति का राज्यपाल में निहित होना
- अनुच्छेद: अनुच्छेद 155 · संवैधानिक प्रावधान / विषय: राज्यपाल की राष्ट्रपति द्वारा नियुक्ति
- अनुच्छेद: अनुच्छेद 156 · संवैधानिक प्रावधान / विषय: राज्यपाल की पदावधि (राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत, सामान्यतः 5 वर्ष)
- अनुच्छेद: अनुच्छेद 157 · संवैधानिक प्रावधान / विषय: राज्यपाल नियुक्त होने के लिए अर्हताएं (नागरिक, न्यूनतम आयु 35 वर्ष)
- अनुच्छेद: अनुच्छेद 159 · संवैधानिक प्रावधान / विषय: राज्यपाल द्वारा शपथ या प्रतिज्ञान (उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश द्वारा)
- अनुच्छेद: अनुच्छेद 161 · संवैधानिक प्रावधान / विषय: क्षमादान, दंड घटाने या स्थगित करने की राज्यपाल की शक्ति
- अनुच्छेद: अनुच्छेद 163 · संवैधानिक प्रावधान / विषय: राज्यपाल को सलाह देने के लिए मंत्रिपरिषद एवं राज्यपाल का स्वविवेकाधिकार
- अनुच्छेद: अनुच्छेद 200 · संवैधानिक प्रावधान / विषय: राज्य विधानमंडल द्वारा पारित विधेयकों पर राज्यपाल की अनुमति या राष्ट्रपति के लिए आरक्षण
- अनुच्छेद: अनुच्छेद 213 · संवैधानिक प्रावधान / विषय: विधानमंडल के विश्रांतिकाल में राज्यपाल की अध्यादेश प्रख्यापित करने की शक्ति
- अनुच्छेद: अनुच्छेद 243-I / 243-Y · संवैधानिक प्रावधान / विषय: राज्यपाल द्वारा प्रत्येक पाँच वर्ष पर राज्य वित्त आयोग का गठन
Practice questions (solved)
- Q 1: भारतीय संविधान के किस अनुच्छेद के तहत राज्यपाल को अध्यादेश जारी करने की शक्ति प्राप्त है?
(क) अनुच्छेद 123 (ख) अनुच्छेद 213 (ग) अनुच्छेद 200 (घ) अनुच्छेद 161
- ✔ Answer: (ख) अनुच्छेद 213 — अनुच्छेद 213 के तहत जब विधानमंडल सत्र में न हो, तब राज्यपाल अध्यादेश जारी कर सकता है (जबकि अनुच्छेद 123 राष्ट्रपति के अध्यादेश से संबंधित है)।
- Q 2: राज्यपाल की नियुक्ति और पदावधि के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा सही है?
(क) राज्यपाल का चुनाव जनता द्वारा प्रत्यक्ष रूप से किया जाता है। (ख) राज्यपाल को उसके पद की शपथ भारत के मुख्य न्यायाधीश दिलाते हैं। (ग) राज्यपाल राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत पद धारण करता है। (घ) राज्यपाल बनने के लिए न्यूनतम आयु 30 वर्ष निर्धारित है।
- ✔ Answer: (ग) राज्यपाल राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत पद धारण करता है। — अनुच्छेद 156(1) के अनुसार राज्यपाल राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत पद धारण करता है और न्यूनतम आयु 35 वर्ष है।
- Q 3: किस संविधान संशोधन अधिनियम द्वारा यह प्रावधान किया गया कि एक ही व्यक्ति को दो या अधिक राज्यों का राज्यपाल नियुक्त किया जा सकता है?
(क) 1ला संविधान संशोधन, 1951 (ख) 7वां संविधान संशोधन, 1956 (ग) 42वां संविधान संशोधन, 1976 (घ) 44वां संविधान संशोधन, 1978
- ✔ Answer: (ख) 7वां संविधान संशोधन, 1956 — 7वें संविधान संशोधन अधिनियम 1956 द्वारा अनुच्छेद 153 में संशोधन कर एक व्यक्ति को दो या अधिक राज्यों का राज्यपाल नियुक्त करने की व्यवस्था की गई।
- Q 4: राज्यपाल की क्षमादान शक्ति (अनुच्छेद 161) के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन असत्य है?
(क) राज्यपाल राज्य विधि के विरुद्ध अपराध के लिए दिए गए दंड को निलंबित कर सकता है। (ख) राज्यपाल दंड को कम या उसका स्वरूप बदल सकता है। (ग) राज्यपाल मृत्युदंड की सजा को पूर्णतः क्षमा (Pardon) कर सकता है। (घ) राज्यपाल की क्षमादान शक्ति सेना न्यायालय (कोर्ट मार्शल) के निर्णयों पर लागू नहीं होती।
- ✔ Answer: (ग) राज्यपाल मृत्युदंड की सजा को पूर्णतः क्षमा (Pardon) कर सकता है। — मृत्युदंड को पूर्ण रूप से क्षमा (Pardon) करने की शक्ति केवल राष्ट्रपति के पास (अनुच्छेद 72) है, राज्यपाल के पास नहीं।
- Q 5: राज्य विधानमंडल द्वारा पारित किसी विधेयक को राष्ट्रपति के विचारार्थ सुरक्षित रखने का अधिकार राज्यपाल को किस अनुच्छेद के तहत प्राप्त है?
(क) अनुच्छेद 200 (ख) अनुच्छेद 201 (ग) अनुच्छेद 213 (घ) अनुच्छेद 163
- ✔ Answer: (क) अनुच्छेद 200 — अनुच्छेद 200 के तहत राज्यपाल राज्य विधानमंडल द्वारा पारित विधेयक को राष्ट्रपति के विचारार्थ सुरक्षित (Reserve) रख सकता है।
How it is asked
BPSC frequently tests factual articles related to the Governor (such as 153, 155, 161, 200, 213), qualifications, ordinance-making powers, pardoning powers, and comparisons between the Governor and President.
Do not confuse
- ✘ नियुक्ति बनाम शपथ: राज्यपाल की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है (अनुच्छेद 155), लेकिन शपथ संबंधित राज्य के उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश दिलाते हैं (अनुच्छेद 159)।
- ✘ मृत्युदंड क्षमादान: राष्ट्रपति मृत्युदंड को पूरी तरह क्षमा (Pardon) कर सकते हैं, जबकि राज्यपाल केवल निलंबन, परिहार या लघुकरण कर सकते हैं, पूर्ण क्षमा नहीं।
- ✘ कार्यकाल: राज्यपाल का सामान्य कार्यकाल 5 वर्ष होता है, किंतु संविधान में कोई महाभियोग प्रक्रिया नहीं है; वे पूर्णतः राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत पद पर रहते हैं।
💡 राजा का कार्य निकास: 153 (पद), 154 (कार्यपालिका शक्ति), 155 (नियुक्ति), 156 (कार्यकाल), 157 (शर्तें/अर्हताएं), 159 (शपथ)
CM and State Council of Ministers
In the state executive, the Chief Minister is the real executive head, while the Governor is the nominal head. According to Article 163 of the Constitution, there shall be a Council of Ministers with the Chief Minister at the head to aid and advise the Governor. The Chief Minister is appointed by the Governor, and other ministers are appointed by the Governor on the advice of the CM. The Council of Ministers is collectively responsible to the State Legislative Assembly, meaning they hold office as long as they enjoy the confidence of the house. In Bihar's politics, the office of the CM has been highly influential, with figures from Dr. Shri Krishna Singh to the present day shaping the state's trajectory.
Key facts
- Under Article 164, the Chief Minister is appointed by the Governor.
- According to the 91st Amendment (2003), the total number of ministers cannot exceed 15% of the total strength of the Assembly (minimum 12).
- The first Chief Minister of Bihar was Dr. Shri Krishna Singh (1946-1961).
- The first woman Chief Minister of Bihar was Rabri Devi.
- Article 167 defines the duties of the CM, including furnishing information to the Governor.
- The first Dalit Chief Minister of Bihar was Bhola Paswan Shastri.
- Satish Prasad Singh was the CM of Bihar for the shortest duration (only 5 days).
- The Chief Minister is the Chairman of the State Planning Board.
- The Governor administers the oath of office and secrecy to the ministers.
- If a minister does not become a member of the legislature within 6 months, they must resign.
- Nitish Kumar is the current CM of Bihar, having taken the oath a record 9 times (as of 2024).
- Salaries and allowances of the State Council of Ministers are determined by the State Legislature.
Table
- श्रेणी: प्रथम मुख्यमंत्री · नाम: डॉ. श्री कृष्ण सिंह · विशेषता: सबसे लंबा कार्यकाल (1946-61)
- श्रेणी: प्रथम महिला मुख्यमंत्री · नाम: राबड़ी देवी · विशेषता: तीन बार मुख्यमंत्री रहीं
- श्रेणी: प्रथम दलित मुख्यमंत्री · नाम: भोला पासवान शास्त्री · विशेषता: तीन बार अल्पकालिक कार्यकाल
- श्रेणी: प्रथम मुस्लिम मुख्यमंत्री · नाम: अब्दुल गफूर · विशेषता: 1973-75 के दौरान
- श्रेणी: सबसे कम कार्यकाल · नाम: सतीश प्रसाद सिंह · विशेषता: मात्र 5 दिन (1968)
Practice questions (solved)
- Q 6: बिहार के मुख्यमंत्री की नियुक्ति संविधान के किस अनुच्छेद के तहत की जाती है?
(क) अनुच्छेद 163 (ख) अनुच्छेद 164 (ग) अनुच्छेद 165 (घ) अनुच्छेद 167
- ✔ Answer: (ख) अनुच्छेद 164 — अनुच्छेद 164 स्पष्ट रूप से मुख्यमंत्री की नियुक्ति और मंत्रियों के कार्यकाल का प्रावधान करता है।
- Q 7: बिहार मंत्रिपरिषद में मंत्रियों की अधिकतम संख्या कितनी हो सकती है?
(क) 30 (ख) 36 (ग) 40 (घ) विधानसभा सदस्यों का 15%
- ✔ Answer: (घ) विधानसभा सदस्यों का 15% — 91वें संशोधन के अनुसार, यह सीमा विधानसभा की कुल सदस्य संख्या का 15% निर्धारित है।
- Q 8: बिहार की प्रथम महिला मुख्यमंत्री कौन थीं?
(क) सुचेता कृपलानी (ख) सरोजिनी नायडू (ग) राबड़ी देवी (घ) मीरा कुमार
- ✔ Answer: (ग) राबड़ी देवी — राबड़ी देवी बिहार की पहली महिला मुख्यमंत्री बनी थीं।
- Q 9: राज्य मंत्रिपरिषद सामूहिक रूप से किसके प्रति उत्तरदायी होती है?
(क) राज्यपाल (ख) मुख्यमंत्री (ग) विधानसभा (घ) विधान परिषद
- ✔ Answer: (ग) विधानसभा — संसदीय प्रणाली में मंत्रिपरिषद केवल निचले सदन (विधानसभा) के प्रति जवाबदेह होती है।
- Q 10: निम्नलिखित में से कौन बिहार के सबसे कम अवधि के मुख्यमंत्री रहे हैं?
(क) भोला पासवान शास्त्री (ख) सतीश प्रसाद सिंह (ग) कर्पूरी ठाकुर (घ) जीतराम मांझी
- ✔ Answer: (ख) सतीश प्रसाद सिंह — सतीश प्रसाद सिंह 1968 में केवल 5 दिनों के लिए मुख्यमंत्री रहे थे।
📜 Real previous-year questions (BPSC)
- [BPSC 70वीं प्रारंभिक (13 दिसंबर 2024), प्रश्न 115] बिहार विधानसभा में राज्य बजट 2024-25 किसने पेश किया ?
(क) श्री नीतीश कुमार (ख) श्री विजय सिन्हा (ग) श्री सम्राट चौधरी (घ) श्री विजय कुमार चौधरी
- ✔ Official answer: (ग) श्री सम्राट चौधरी — यह प्रश्न राज्य सरकार के एक महत्वपूर्ण मंत्री (वित्त मंत्री/उप-मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी) द्वारा बजट पेश करने से संबंधित है, जो मंत्रिपरिषद की भूमिका को दर्शाता है।
- [BPSC 71वीं प्रारंभिक (13 सितंबर 2025), प्रश्न 61] केन्द्रीय सरकार के बारे में निम्न कथनों पर विचार कीजिए।
1) मंत्रालय तथा विभागों का निर्माण प्रधानमंत्री द्वारा कैबिनेट सचिव के परामर्श से होता है।
2) प्रत्येक मंत्री को मंत्रालय राष्ट्रपति द्वारा प्रधानमंत्री के परामर्श पर आवंटित किया जाता है।
इनमें से :
(क) केवल 1 सही है (ख) केवल 2 सही है (ग) 1 और 2 सही है (घ) न तो 1 सही है और न ही 2 सही है
- ✔ Official answer: (ख) केवल 2 सही है — यह प्रश्न स्पष्ट करता है कि विभागों का आवंटन राज्यपाल (या राष्ट्रपति) द्वारा मुख्यमंत्री (या प्रधानमंत्री) की सलाह पर किया जाता है।
How it is asked
BPSC frequently asks questions on the powers of the CM, 'firsts' in Bihar (first CM, woman CM), and the structure of the Council of Ministers (15% rule).
Do not confuse
- ✘ अनुच्छेद 163 (सलाह देना) और 164 (नियुक्ति) के बीच भ्रम।
- ✘ मंत्रिपरिषद राज्यपाल के प्रति व्यक्तिगत रूप से लेकिन विधानसभा के प्रति सामूहिक रूप से उत्तरदायी होती है।
💡 CM की 'शपथ' और 'नियुक्ति' के लिए '164' याद रखें - 'एक' मुख्यमंत्री, 'छह' महीने में सदस्यता, 'चार' (चयन) राज्यपाल द्वारा।
Bihar Legislature: Vidhan Sabha and Vidhan Parishad
Bihar follows a bicameral legislature system, meaning it has two houses for law-making: the Vidhan Sabha and the Vidhan Parishad. The Vidhan Sabha is the lower house where members are directly elected by the people, while the Vidhan Parishad is a permanent upper house. The Vidhan Sabha is led by the 'Speaker', who is responsible for maintaining order and conducting house proceedings. Seat distribution in Bihar is based on population, with specific reservations for Scheduled Castes and Scheduled Tribes. From the first elections in 1937 to the present, the Bihar legislature has played a crucial role in the state's development.
Key facts
- The total number of seats in the Bihar Vidhan Sabha is 243.
- The total number of seats in the Bihar Vidhan Parishad is 75.
- 38 seats are reserved for Scheduled Castes (SC) in the Vidhan Sabha.
- 2 seats (Katoria and Manihari) are reserved for Scheduled Tribes (ST) in the Vidhan Sabha.
- The first Speaker of the Bihar Vidhan Sabha was Shri Ram Dayalu Singh.
- In the 1937 elections, Congress won 98 out of the total 152 seats in the Bihar Vidhan Sabha.
- A quorum of 1/10th of the total members is mandatory to start house proceedings.
- The Vidhan Parishad is a permanent house; 1/3 of its members retire every two years.
- Currently (2024), Nand Kishore Yadav is the Speaker of the Bihar Vidhan Sabha.
- Work in the legislature can only be conducted in the state's official language, Hindi, or English.
- After independence, the first Speaker of the Bihar Vidhan Sabha was Bindeshwari Prasad Verma.
Table
- सदन का नाम: विधानसभा · कुल सीटें: 243 · आरक्षित सीटें (SC/ST): 38 (SC) / 2 (ST) · प्रथम प्रमुख: राम दयालु सिंह
- सदन का नाम: विधान परिषद · कुल सीटें: 75 · आरक्षित सीटें (SC/ST): लागू नहीं · प्रथम प्रमुख: राजीव रंजन प्रसाद सिंह
Practice questions (solved)
- Q 11: बिहार विधानसभा में अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए कितनी सीटें आरक्षित हैं?
(क) 38 (ख) 2 (ग) 40 (घ) 1
- ✔ Answer: (ख) 2 — बिहार विधानसभा में ST के लिए 2 सीटें (कटोरिया और मनिहारी) आरक्षित हैं।
- Q 12: बिहार विधान परिषद की सदस्य संख्या कितनी है?
(क) 243 (ख) 75 (ग) 152 (घ) 101
- ✔ Answer: (ख) 75 — बिहार विधान परिषद में कुल 75 सीटें हैं।
- Q 13: बिहार विधानसभा के प्रथम अध्यक्ष कौन थे?
(क) बिंदेश्वरी प्रसाद वर्मा (ख) राम दयालु सिंह (ग) नंद किशोर यादव (घ) राजीव रंजन प्रसाद
- ✔ Answer: (ख) राम दयालु सिंह — श्री राम दयालु सिंह बिहार विधानसभा के पहले अध्यक्ष थे।
- Q 14: राज्य विधायिका की कार्यवाही के संबंध में कौन सा कथन सत्य है?
(क) कार्यवाही केवल अंग्रेजी में होगी (ख) महाधिवक्ता को मत देने का अधिकार है (ग) कार्यवाही हिंदी, अंग्रेजी या सरकारी भाषा में होगी (घ) न्यायाधीश के आचरण पर चर्चा हो सकती है
- ✔ Answer: (ग) कार्यवाही हिंदी, अंग्रेजी या सरकारी भाषा में होगी — अनुच्छेद 210 के अनुसार कार्यवाही हिंदी, अंग्रेजी या राज्य की आधिकारिक भाषा में होती है।
- Q 15: 1937 के प्रांतीय चुनावों में बिहार विधानसभा में कुल कितनी सीटें थीं?
(क) 243 (ख) 152 (ग) 75 (घ) 324
- ✔ Answer: (ख) 152 — 1937 के चुनावों के समय बिहार विधानसभा में कुल 152 सीटें निर्धारित थीं।
📜 Real previous-year questions (BPSC)
- [BPSC 71वीं प्रारंभिक (13 सितंबर 2025), प्रश्न 62] राज्य विधायिका की कार्यवाही के बारे में क्या सत्य है?
(क) विधायिका में कार्य केवल राज्य की सरकारी भाषा में अथवा हिन्दी अथवा अंग्रेजी में निष्पादित किए जाएँगे। (ख) महाधिवक्ता को मत देने का अधिकार है। (ग) यह किसी उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के आचरण पर चर्चा कर सकती है। (घ) किसी कथित अनियमितता के आधार पर कार्यवाही की वैधता पर प्रश्न किए जा सकते हैं।
- ✔ Official answer: (क) विधायिका में कार्य केवल राज्य की सरकारी भाषा में अथवा हिन्दी अथवा अंग्रेजी में निष्पादित किए जाएँगे। — संविधान के अनुच्छेद 210 के अनुसार, राज्य विधायिका में कार्य हिंदी, अंग्रेजी या राज्य की आधिकारिक भाषा में किया जाता है।
How it is asked
BPSC frequently asks about the number of seats in the Vidhan Sabha and Parishad, data on reserved seats (SC/ST), and the names of the first office holders.
Do not confuse
- ✘ विधानसभा (243) और विधान परिषद (75) की सीटों की संख्या में भ्रम।
- ✘ SC आरक्षण (38) और ST आरक्षण (2) के आंकड़ों को आपस में बदलना।
- ✘ प्रथम अध्यक्ष (राम दयालु सिंह) और स्वतंत्रता के बाद प्रथम अध्यक्ष (बिंदेश्वरी प्रसाद वर्मा) के बीच भ्रम।
💡 बिहार विधायिका का '243-75' फॉर्मूला याद रखें: 243 (जनता की सभा) और 75 (बड़ों की परिषद)।
Patna High Court, BPSC and State Election Commission
The role of the judiciary and constitutional commissions is vital in Bihar's governance. The Patna High Court is the highest judicial body in the state, established in 1916 during the British era. The State Election Commission (Article 243K) is responsible for conducting Panchayat and Municipal elections, while the Bihar Public Service Commission (BPSC) recruits officers for state administrative services. Additionally, bodies like the State Information Commission and the Women's Commission ensure good governance and the protection of rights. Together, these institutions strengthen the rule of law and democratic processes in Bihar.
Key facts
- Patna High Court was established on 3 February 1916.
- Articles 214 to 231 of the Constitution describe the formation and powers of High Courts.
- High Court judges are appointed by the President in consultation with the CJI and the concerned Governor.
- The State Election Commission is constituted under Article 243K.
- Deepak Prasad is currently the State Election Commissioner of Bihar.
- The State Election Commissioner can be removed in the same manner as a High Court judge.
- The Bihar State Information Commission was established in June 2006.
- The State Election Commission prepares and updates electoral rolls for Panchayats and Municipalities.
- Patna University was established in 1917, one year after the High Court.
- Bihar Public Service Commission (BPSC) is a constitutional body functioning under Article 315.
Table
- संस्था: पटना उच्च न्यायालय · स्थापना / अनुच्छेद: 3 फरवरी 1916 · मुख्यालय / प्रमुख: पटना
- संस्था: राज्य निर्वाचन आयोग · स्थापना / अनुच्छेद: अनुच्छेद 243K · मुख्यालय / प्रमुख: दीपक प्रसाद (आयुक्त)
- संस्था: राज्य सूचना आयोग · स्थापना / अनुच्छेद: जून 2006 · मुख्यालय / प्रमुख: विनोद सिंह गुंजियाल (मुख्य आयुक्त)
- संस्था: BPSC · स्थापना / अनुच्छेद: अनुच्छेद 315 · मुख्यालय / प्रमुख: पटना
- संस्था: राज्य महिला आयोग · स्थापना / अनुच्छेद: स्वतंत्र विभाग · मुख्यालय / प्रमुख: पटना
Practice questions (solved)
- Q 16: पटना उच्च न्यायालय की स्थापना किस वर्ष हुई थी?
(क) 1912 (ख) 1916 (ग) 1917 (घ) 1921
- ✔ Answer: (ख) 1916 — पटना उच्च न्यायालय की स्थापना 3 फरवरी 1916 को हुई थी।
- Q 17: बिहार के राज्य निर्वाचन आयुक्त के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही है?
(क) उनकी नियुक्ति मुख्यमंत्री द्वारा की जाती है। (ख) उन्हें केवल राज्यपाल द्वारा हटाया जा सकता है। (ग) उन्हें उसी रीति से हटाया जाएगा जैसे उच्च न्यायालय के न्यायाधीश को। (घ) उनका कार्यकाल 10 वर्ष का होता है।
- ✔ Answer: (ग) उन्हें उसी रीति से हटाया जाएगा जैसे उच्च न्यायालय के न्यायाधीश को। — अनुच्छेद 243K के अनुसार, राज्य निर्वाचन आयुक्त को हटाने की प्रक्रिया उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के समान है।
- Q 18: बिहार राज्य सूचना आयोग की स्थापना कब हुई थी?
(क) जून 2005 (ख) जून 2006 (ग) अगस्त 2007 (घ) जनवरी 2006
- ✔ Answer: (ख) जून 2006 — बिहार राज्य सूचना आयोग की स्थापना जून 2006 में की गई थी।
- Q 19: पंचायतों के चुनाव कराने का उत्तरदायित्व किसका है?
(क) भारत निर्वाचन आयोग (ख) राज्य निर्वाचन आयोग (ग) जिला मजिस्ट्रेट (घ) मुख्यमंत्री कार्यालय
- ✔ Answer: (ख) राज्य निर्वाचन आयोग — अनुच्छेद 243K के तहत राज्य निर्वाचन आयोग स्थानीय निकायों (पंचायतों) के चुनाव कराता है।
How it is asked
BPSC frequently asks questions on the establishment date of Patna High Court, the Article for the State Election Commission (243K), and the names of current office holders.
Do not confuse
- ✘ पटना उच्च न्यायालय (1916) और पटना विश्वविद्यालय (1917) की स्थापना के वर्षों में भ्रम हो सकता है।
- ✘ राज्य निर्वाचन आयोग (स्थानीय निकाय चुनाव) और भारत निर्वाचन आयोग (विधानसभा चुनाव) के कार्यों में अंतर स्पष्ट रखें।
💡 16 में कोर्ट (HC), 17 में यूनिवर्सिटी (PU) - पहले न्याय मिला, फिर शिक्षा।
District Administration in Bihar
District administration in Bihar is the most crucial ground-level unit of state governance, directly interacting with the public. For administrative ease, the state is divided into 9 divisions and 38 districts. The District Magistrate (DM) is the highest official at the district level, responsible for law and order, revenue collection, and development works. Below the district level, there is a hierarchy of Subdivisions and then Blocks. At the block level, the Block Development Officer (BDO) is the central figure for implementing development schemes. This structure ensures that state government policies reach the last person in the hierarchy.
Key facts
- The total number of districts in Bihar is 38.
- Bihar is administratively divided into 9 divisions.
- Arwal is the 38th and newest district of Bihar, created by carving it out of Jehanabad.
- The total number of subdivisions in the state is 101.
- The total number of blocks in Bihar is 534.
- The chief administrative officer of a division is the 'Divisional Commissioner'.
- The primary responsibility for maintaining law and order at the district level lies with the Superintendent of Police (SP).
- Political Victims Day was observed in Patna district of Bihar on August 10, 1929.
- West Champaran is the largest district of Bihar in terms of area.
- Sheohar is the smallest district of Bihar in terms of area.
- Patna is the largest district of Bihar in terms of population.
- The chief development officer at the district level is the Deputy Development Commissioner (DDC).
Table
- प्रशासनिक इकाई: प्रमंडल (Division) · मुख्य अधिकारी: प्रमंडलीय आयुक्त (Commissioner)
- प्रशासनिक इकाई: जिला (District) · मुख्य अधिकारी: जिला पदाधिकारी (DM) / कलेक्टर
- प्रशासनिक इकाई: अनुमंडल (Subdivision) · मुख्य अधिकारी: अनुमंडल पदाधिकारी (SDO/SDM)
- प्रशासनिक इकाई: प्रखंड (Block) · मुख्य अधिकारी: प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO)
- प्रशासनिक इकाई: अंचल (Circle) · मुख्य अधिकारी: अंचल अधिकारी (CO)
Practice questions (solved)
- Q 20: बिहार में प्रमंडलों (Divisions) की कुल संख्या कितनी है?
(क) 7 (ख) 8 (ग) 9 (घ) 12
- ✔ Answer: (ग) 9 — बिहार को प्रशासनिक कार्यों के लिए 9 प्रमंडलों में विभाजित किया गया है।
- Q 21: बिहार का 38वां जिला कौन सा है?
(क) शिवहर (ख) अरवल (ग) बांका (घ) शेखपुरा
- ✔ Answer: (ख) अरवल — अरवल बिहार का सबसे नवीनतम और 38वां जिला है।
- Q 22: पटना जिले में 'राजनीतिक पीड़ित दिवस' कब मनाया गया था?
(क) 10 अगस्त 1929 (ख) 15 अगस्त 1930 (ग) 26 जनवरी 1929 (घ) 9 अगस्त 1942
- ✔ Answer: (क) 10 अगस्त 1929 — स्रोत के अनुसार, 10 अगस्त 1929 को पटना में राजनीतिक पीड़ित दिवस मनाया गया था।
- Q 23: प्रखंड (Block) स्तर पर विकास योजनाओं के लिए मुख्य रूप से कौन जिम्मेदार होता है?
(क) SDO (ख) DM (ग) BDO (घ) CO
- ✔ Answer: (ग) BDO — प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) प्रखंड स्तर पर विकास कार्यों का प्रमुख होता है।
- Q 24: बिहार के प्रशासनिक ढांचे के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन सा मिलान सही नहीं है?
(क) प्रमंडल - 9 (ख) जिला - 38 (ग) अनुमंडल - 101 (घ) प्रखंड - 512
- ✔ Answer: (घ) प्रखंड - 512 — बिहार में प्रखंडों की कुल संख्या 534 है, न कि 512।
How it is asked
In BPSC, questions from this sub-topic are frequently asked regarding the number of districts, names of divisions, the name of the newest district, and the hierarchy of administrative officers.
Do not confuse
- ✘ छात्र अक्सर DM और कलेक्टर के बीच भ्रमित होते हैं; वास्तव में ये एक ही व्यक्ति के दो अलग-अलग कार्य (प्रशासन और राजस्व) हैं।
- ✘ अनुमंडल (101) और प्रखंड (534) की संख्या में अक्सर भ्रम होता है।
💡 बिहार का '9-38-101-534' नियम याद रखें (प्रमंडल-जिला-अनुमंडल-प्रखंड)।
Quick revision
- Part VI of the Constitution (Articles 153-167) deals with the State Executive, headed nominally by the Governor.
- The Governor is appointed by the President under Article 155 and holds office during the pleasure of the President (Article 156).
- Under Article 163, there is a Council of Ministers headed by the Chief Minister to aid and advise the Governor.
- The 91st Constitutional Amendment Act (2003) limits the State Council of Ministers to a maximum of 15% of the Legislative Assembly strength, with a minimum of 12.
- Bihar possesses a bicameral legislature comprising the Legislative Assembly (243 seats) and the Legislative Council (75 seats).
- Out of 243 seats in Bihar Vidhan Sabha, 38 are reserved for Scheduled Castes (SC) and 2 (Manihari and Katoria) for Scheduled Tribes (ST).
- In the Bihar Legislative Council (75 seats), 5/6th of members are indirectly elected and 1/6th are nominated by the Governor.
- Patna High Court was established on 3 February 1916; its first Chief Justice was Sir Edward Maynard Des Champs Chamier.
- The Bihar Public Service Commission (BPSC) was established on 1 April 1949; members are appointed by the Governor but can only be removed by the President.
- The State Election Commission is constituted under Articles 243K and 243ZA for conducting local body elections in Bihar.
- Bihar is divided administratively into 9 Divisions, 38 Districts, 101 Sub-divisions, and 534 Community Development Blocks.
- The District Magistrate (Collector) acts as the apex administrative head overseeing law and order, land revenue, and developmental coordination.