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BPSC CCEभारतीय राजव्यवस्थापंचायती राज और नगरीय निकाय
Panchayati Raj and Urban Local Bodies
यह अध्याय बीपीएससी प्रारंभिक परीक्षा और मुख्य परीक्षा (जीएस पेपर 2) के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह विकेंद्रीकृत शासन और बिहार के विशिष्ट सुधारों पर केंद्रित है। बिहार पंचायती राज अधिनियम 2006 से संबंधित प्रश्न अक्सर पूछे जाते हैं।
बलवंत राय मेहता और अन्य समितियाँ
भारत में स्वतंत्रता के बाद सामुदायिक विकास कार्यक्रम (1952) और राष्ट्रीय विस्तार सेवा (1953) के कामकाज की समीक्षा के लिए जनवरी 1957 में बलवंत राय मेहता समिति नियुक्त की गई थी। इस समिति ने 'लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण' की अवधारणा पेश की और त्रि-स्तरीय पंचायती राज प्रणाली की सिफारिश की। इसकी सिफारिशों के आधार पर 2 अक्टूबर 1959 को राजस्थान के नागौर जिले में पहली बार पंचायती राज व्यवस्था का उद्घाटन हुआ। बाद में 1977 में जनता पार्टी सरकार ने अशोक मेहता समिति बनाई जिसने केवल दो-स्तरीय (मंडल पंचायत और जिला परिषद) व्यवस्था का सुझाव दिया। आगे चलकर जी.वी.के. राव समिति (1985) और एल.एम. सिंघवी समिति (1986) ने पंचायतों को संवैधानिक दर्जा देने और उन्हें वित्तीय व प्रशासनिक रूप से सशक्त बनाने की सशक्त पैरवी की। अंततः वी.एन. गाडगिल और पी.के. थुंगन समिति की सिफारिशों ने 73वें संविधान संशोधन अधिनियम का मार्ग प्रशस्त किया।
मुख्य तथ्य
- बलवंत राय मेहता समिति का गठन जनवरी 1957 में सामुदायिक विकास कार्यक्रम की जांच हेतु हुआ था।
- बलवंत राय मेहता समिति ने त्रि-स्तरीय पंचायती राज (ग्राम पंचायत, पंचायत समिति और जिला परिषद) की सिफारिश नवंबर 1957 में की।
- भारत में सर्वप्रथम पंचायती राज का उद्घाटन 2 अक्टूबर 1959 को राजस्थान के नागौर जिले में पंडित जवाहरलाल नेहरू द्वारा किया गया।
- पंचायती राज व्यवस्था लागू करने वाला देश का दूसरा राज्य आंध्र प्रदेश (1959) था।
- अशोक मेहता समिति का गठन 1977 में जनता पार्टी सरकार द्वारा किया गया और इसने अगस्त 1978 में अपनी रिपोर्ट दी।
- अशोक मेहता समिति ने त्रि-स्तरीय के स्थान पर द्वि-स्तरीय प्रणाली (जिला परिषद और मंडल पंचायत) की सिफारिश की थी।
- अशोक मेहता समिति ने पंचायती राज चुनावों में राजनीतिक दलों की खुली भागीदारी की वकालत की थी।
- जी.वी.के. राव समिति का गठन योजना आयोग द्वारा 1985 में ग्रामीण विकास व गरीबी उन्मूलन कार्यक्रमों की प्रशासनिक समीक्षा हेतु किया गया था।
- जी.वी.के. राव समिति ने नौकरशाही के प्रभाव के कारण पंचायती राज संस्थाओं को 'बिना जड़ की घास' (Grass without roots) कहा।
- एल.एम. सिंघवी समिति (1986) ने पंचायती राज संस्थाओं को संवैधानिक मान्यता प्रदान करने की सबसे प्रमुख सिफारिश की थी।
- पी.के. थुंगन समिति (1988) ने भी पंचायतों को संवैधानिक मान्यता देने और 5 वर्ष के निश्चित कार्यकाल की अनुशंसा की थी।
- वी.एन. गाडगिल समिति (1988) के सुझावों के आधार पर ही पंचायती राज के संवैधानिक संशोधन विधेयक का प्रारूप तैयार हुआ था।
तालिका
- समिति का नाम: बलवंत राय मेहता समिति · गठन वर्ष: 1957 · प्रमुख सिफारिश / महत्वपूर्ण बिंदु: त्रि-स्तरीय व्यवस्था (ग्राम, ब्लॉक, जिला) और लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण की सिफारिश
- समिति का नाम: के. संथानम समिति · गठन वर्ष: 1963 · प्रमुख सिफारिश / महत्वपूर्ण बिंदु: पंचायती राज वित्त तथा वित्तीय अधिकारों के हस्तांतरण पर अध्ययन
- समिति का नाम: अशोक मेहता समिति · गठन वर्ष: 1977 · प्रमुख सिफारिश / महत्वपूर्ण बिंदु: द्वि-स्तरीय व्यवस्था (मंडल पंचायत व जिला परिषद) और राजनीतिक दलों की खुली भागीदारी
- समिति का नाम: जी.वी.के. राव समिति · गठन वर्ष: 1985 · प्रमुख सिफारिश / महत्वपूर्ण बिंदु: जिले को मूल नियोजन इकाई बनाना, पंचायतों को 'बिना जड़ की घास' बताया
- समिति का नाम: एल.एम. सिंघवी समिति · गठन वर्ष: 1986 · प्रमुख सिफारिश / महत्वपूर्ण बिंदु: पंचायती राज संस्थाओं को संवैधानिक मान्यता और न्याय पंचायतों की सिफारिश
- समिति का नाम: पी.के. थुंगन समिति · गठन वर्ष: 1988 · प्रमुख सिफारिश / महत्वपूर्ण बिंदु: पंचायतों को संवैधानिक दर्जा, त्रि-स्तरीय ढांचा व 5 वर्ष का निश्चित कार्यकाल
- समिति का नाम: वी.एन. गाडगिल समिति · गठन वर्ष: 1988 · प्रमुख सिफारिश / महत्वपूर्ण बिंदु: 73वें संविधान संशोधन के मूल मसौदे हेतु आधारभूत सिफारिशें
अभ्यास प्रश्न (हल सहित)
- प्रश्न 1: भारत में पंचायती राज प्रणाली की त्रि-स्तरीय संरचना की संस्तुति सर्वप्रथम किस समिति द्वारा की गई थी?
(क) अशोक मेहता समिति (ख) बलवंत राय मेहता समिति (ग) जी.वी.के. राव समिति (घ) एल.एम. सिंघवी समिति
- ✔ उत्तर: (ख) बलवंत राय मेहता समिति — बलवंत राय मेहता समिति (1957) ने लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण के तहत त्रि-स्तरीय पंचायती राज व्यवस्था की सिफारिश की थी।
- प्रश्न 2: पंचायती राज को संवैधानिक दर्जा देने की पुरजोर अनुशंसा सबसे पहले किस समिति ने की थी?
(क) बलवंत राय मेहता समिति (ख) अशोक मेहता समिति (ग) एल.एम. सिंघवी समिति (घ) संथानम समिति
- ✔ उत्तर: (ग) एल.एम. सिंघवी समिति — राजीव गांधी सरकार के समय 1986 में गठित एल.एम. सिंघवी समिति ने पंचायतों को संवैधानिक संरक्षण प्रदान करने का सुझाव दिया था।
- प्रश्न 3: अशोक मेहता समिति (1977) के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है?
(क) इसने पंचायती राज की तीन स्तरों वाली व्यवस्था बनाए रखने की वकालत की। (ख) इसने जिला स्तर पर 'जिला परिषद' और 15000-20000 आबादी वाले गांवों के समूह पर 'मंडल पंचायत' की द्वि-स्तरीय व्यवस्था की सिफारिश की। (ग) इसने राजनीतिक दलों को पंचायत चुनावों से पूरी तरह दूर रखने की सिफारिश की। (घ) इसने ग्राम पंचायत को ही सबसे प्रमुख प्रशासनिक इकाई माना।
- ✔ उत्तर: (ख) इसने जिला स्तर पर 'जिला परिषद' और 15000-20000 आबादी वाले गांवों के समूह पर 'मंडल पंचायत' की द्वि-स्तरीय व्यवस्था की सिफारिश की। — अशोक मेहता समिति ने द्वि-स्तरीय व्यवस्था (जिला परिषद और मंडल पंचायत) का प्रस्ताव दिया था।
- प्रश्न 4: किस समिति ने विकास प्रशासन में अत्यधिक नौकरशाही के कारण पंचायती राज संस्थाओं को 'बिना जड़ की घास' (Grass without roots) कहा था?
(क) जी.वी.के. राव समिति (1985) (ख) एल.एम. सिंघवी समिति (1986) (ग) बलवंत राय मेहता समिति (1957) (घ) अशोक मेहता समिति (1977)
- ✔ उत्तर: (क) जी.वी.के. राव समिति (1985) — योजना आयोग द्वारा 1985 में गठित जी.वी.के. राव समिति ने पंचायतों की कमजोर स्थिति को 'बिना जड़ की घास' कहा था।
- प्रश्न 5: भारत में 2 अक्टूबर 1959 को सर्वप्रथम पंचायती राज का उद्घाटन किस राज्य में हुआ था?
(क) आंध्र प्रदेश (ख) बिहार (ग) राजस्थान (घ) उत्तर प्रदेश
- ✔ उत्तर: (ग) राजस्थान — पंडित जवाहरलाल नेहरू ने 2 अक्टूबर 1959 को राजस्थान के नागौर जिले में पंचायती राज का औपचारिक शुभारंभ किया था।
📜 असली पिछले वर्ष के प्रश्न (BPSC)
- [BPSC 71वीं प्रारंभिक (13 सितंबर 2025), प्रश्न 68] पंचायती राज का क्या मुख्य उद्देश्य है?
(क) कृषि उत्पादन में वृद्धि करना (ख) रोजगार सृजन (ग) जनता में राजनीतिक चेतना में वृद्धि करना (घ) जनता को विकास के प्रशासन में प्रतिभाग करने योग्य बनाना
- ✔ आधिकारिक उत्तर: (घ) जनता को विकास के प्रशासन में प्रतिभाग करने योग्य बनाना — बलवंत राय मेहता समिति की मूल संकल्पना 'लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण' थी, जिसका मुख्य ध्येय जनता को विकास और स्वशासन के प्रशासन में सीधे भागीदार बनाना था।
परीक्षा में कैसे आता है
BPSC प्रारंभिक परीक्षा में समितियों के गठन का वर्ष, उनके द्वारा सुझाई गई संरचना (त्रि-स्तरीय बनाम द्वि-स्तरीय), संवैधानिक मान्यता की सिफारिश करने वाली समिति और नागौर (राजस्थान) में इसके पहले उद्घाटन से सीधे प्रश्न पूछे जाते हैं।
इनमें भ्रम न करें
- ✘ बलवंत राय मेहता समिति (1957) ने 'त्रि-स्तरीय' व्यवस्था दी, जबकि अशोक मेहता समिति (1977) ने 'द्वि-स्तरीय' (मंडल पंचायत और जिला परिषद) व्यवस्था की सिफारिश की थी।
- ✘ पंचायती राज अपनाने वाला प्रथम राज्य राजस्थान (2 अक्टूबर 1959) था, जबकि दूसरा राज्य आंध्र प्रदेश (11 अक्टूबर 1959) बना। छात्र अक्सर आंध्र प्रदेश को पहला मान लेते हैं।
- ✘ पंचायतों के गठन का विचार बलवंत राय मेहता ने दिया, परंतु उन्हें 'संवैधानिक दर्जा' देने की पहली सशक्त मांग एल.एम. सिंघवी समिति (1986) ने उठाई थी।
💡 समितियों का कालक्रम याद रखने की ट्रिक: 'B-A-G-S' -> Balwant Rai (1957), Ashok Mehta (1977), G.V.K. Rao (1985), Singhvi (1986)
73वाँ संविधान संशोधन: त्रि-स्तरीय ढांचा, 11वीं अनुसूची और ग्राम सभा
73वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1992 ने भारत में पंचायती राज को संवैधानिक दर्जा प्रदान किया। इसके माध्यम से संविधान में 'भाग 9' और '11वीं अनुसूची' जोड़ी गई, जिसमें पंचायतों के लिए 29 कार्यक्षेत्र निर्धारित किए गए। यह कानून 24 अप्रैल 1993 से प्रभावी हुआ, जिसे अब 'राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस' के रूप में मनाया जाता है। इस संशोधन ने ग्राम, ब्लॉक और जिला स्तर पर एक त्रि-स्तरीय संरचना अनिवार्य कर दी। ग्राम सभा को इस व्यवस्था की आधारशिला माना गया है, जिसमें गाँव के सभी पंजीकृत मतदाता शामिल होते हैं। यह स्थानीय स्वशासन को सशक्त बनाने और लोकतंत्र को जमीनी स्तर तक पहुँचाने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम था।
मुख्य तथ्य
- 73वाँ संशोधन अधिनियम 1992 में पारित हुआ और 24 अप्रैल 1993 से लागू हुआ।
- इसके द्वारा संविधान में नया भाग 9 (अनुच्छेद 243 से 243-O) जोड़ा गया।
- 11वीं अनुसूची में पंचायतों के लिए कुल 29 विषयों की सूची दी गई है।
- अनुच्छेद 243A ग्राम सभा की शक्तियों और कार्यों का वर्णन करता है।
- ग्राम सभा में गाँव की निर्वाचक नामावली में पंजीकृत सभी वयस्क मतदाता सदस्य होते हैं।
- अनुच्छेद 243B के तहत त्रि-स्तरीय ढांचा (ग्राम, मध्यवर्ती और जिला स्तर) अनिवार्य है।
- 20 लाख से कम जनसंख्या वाले राज्यों में मध्यवर्ती स्तर (ब्लॉक) बनाना अनिवार्य नहीं है।
- अनुच्छेद 243D महिलाओं के लिए कम से कम 1/3 (33%) आरक्षण का प्रावधान करता है।
- बिहार भारत का पहला राज्य था जिसने पंचायतों में महिलाओं को 50% आरक्षण दिया।
- पंचायतों का कार्यकाल अनुच्छेद 243E के तहत 5 वर्ष निर्धारित है।
- ग्राम सभा की बैठकों के बीच अधिकतम 3 महीने का अंतराल हो सकता है।
- ग्राम सभा की बैठक की अध्यक्षता आमतौर पर मुखिया द्वारा की जाती है।
तालिका
- स्तर: ग्राम स्तर · निकाय का नाम: ग्राम पंचायत · प्रमुख का पद: मुखिया / सरपंच
- स्तर: ब्लॉक स्तर · निकाय का नाम: पंचायत समिति · प्रमुख का पद: प्रमुख / अध्यक्ष
- स्तर: जिला स्तर · निकाय का नाम: जिला परिषद · प्रमुख का पद: अध्यक्ष
अभ्यास प्रश्न (हल सहित)
- प्रश्न 6: 73वें संविधान संशोधन द्वारा संविधान में कौन सी अनुसूची जोड़ी गई?
(क) 9वीं अनुसूची (ख) 10वीं अनुसूची (ग) 11वीं अनुसूची (घ) 12वीं अनुसूची
- ✔ उत्तर: (ग) 11वीं अनुसूची — 73वें संशोधन (1992) के माध्यम से पंचायतों के लिए 11वीं अनुसूची जोड़ी गई थी।
- प्रश्न 7: ग्राम सभा का सदस्य बनने के लिए क्या अनिवार्य है?
(क) 25 वर्ष की आयु (ख) गाँव की मतदाता सूची में पंजीकृत होना (ग) कम से कम 10वीं पास होना (घ) गाँव में संपत्ति होना
- ✔ उत्तर: (ख) गाँव की मतदाता सूची में पंजीकृत होना — ग्राम सभा में वे सभी व्यक्ति शामिल होते हैं जिनका नाम गाँव की निर्वाचक नामावली में दर्ज होता है।
- प्रश्न 8: 11वीं अनुसूची में पंचायतों के कार्य के लिए कितने विषय सूचीबद्ध हैं?
(क) 18 विषय (ख) 22 विषय (ग) 25 विषय (घ) 29 विषय
- ✔ उत्तर: (घ) 29 विषय — 73वें संशोधन के तहत 11वीं अनुसूची में पंचायतों को 29 विषयों पर कार्य करने की शक्ति दी गई है।
- प्रश्न 9: पंचायती राज व्यवस्था के तहत 'मध्यवर्ती स्तर' का गठन किस जनसंख्या से कम वाले राज्यों में अनिवार्य नहीं है?
(क) 10 लाख (ख) 15 लाख (ग) 20 लाख (घ) 25 लाख
- ✔ उत्तर: (ग) 20 लाख — अनुच्छेद 243B के अनुसार, 20 लाख से कम आबादी वाले राज्यों में ब्लॉक स्तर की पंचायत बनाना वैकल्पिक है।
- प्रश्न 10: ग्राम सभा की बैठकों के संदर्भ में कौन सा कथन सही है?
(क) बैठक साल में केवल एक बार होनी चाहिए (ख) दो बैठकों के बीच अधिकतम 3 महीने का अंतर हो सकता है (ग) बैठक की अध्यक्षता जिला कलेक्टर करता है (घ) बैठक में केवल वार्ड सदस्य भाग ले सकते हैं
- ✔ उत्तर: (ख) दो बैठकों के बीच अधिकतम 3 महीने का अंतर हो सकता है — नियमों के अनुसार ग्राम सभा की बैठकों के बीच अधिकतम अंतराल 3 महीने से अधिक नहीं होना चाहिए।
📜 असली पिछले वर्ष के प्रश्न (BPSC)
- [BPSC 70वीं प्रारंभिक (13 दिसंबर 2024), प्रश्न 36] अनुच्छेद "243J" के अन्तर्गत पंचायतों के लेखा प्रबन्धन से सम्बन्धित नियम कौन बनाता है ?
(क) राज्य विधानमण्डल (ख) संसद (ग) राज्य वित्त आयोग (घ) जिला कलेक्टर
- ✔ आधिकारिक उत्तर: (क) राज्य विधानमण्डल — अनुच्छेद 243J के तहत पंचायतों के लेखा प्रबन्धन और ऑडिट से सम्बन्धित नियम बनाने का अधिकार राज्य विधानमण्डल को दिया गया है।
- [BPSC 71वीं प्रारंभिक (13 सितंबर 2025), प्रश्न 66] पंचायतों की वित्तीय स्थिति की समीक्षा के लिए कौन अधिकृत है?
(क) मुख्यमंत्री (ख) ब्लॉक समिति का अध्यक्ष (ग) जिला परिषद का अध्यक्ष (घ) राज्यपाल द्वारा गठित वित्त आयोग
- ✔ आधिकारिक उत्तर: (घ) राज्यपाल द्वारा गठित वित्त आयोग — अनुच्छेद 243I के अनुसार, राज्यपाल पंचायतों की वित्तीय स्थिति की समीक्षा के लिए राज्य वित्त आयोग का गठन करते हैं।
परीक्षा में कैसे आता है
BPSC इस उप-विषय से अक्सर अनुच्छेदों (विशेषकर 243A, 243D, 243I), 11वीं अनुसूची के विषयों की संख्या (29), और महिलाओं के आरक्षण प्रतिशत पर सीधे प्रश्न पूछता है।
इनमें भ्रम न करें
- ✘ 11वीं अनुसूची (पंचायती राज) और 12वीं अनुसूची (नगरपालिका) के बीच भ्रम।
- ✘ राष्ट्रीय स्तर पर अनिवार्य 33% आरक्षण और बिहार में लागू 50% आरक्षण के बीच अंतर।
💡 29 विषय, 11वीं अनुसूची, भाग 9 - पंचायत का नया राज।
बिहार पंचायती राज अधिनियम 2006 और महिला आरक्षण
बिहार पंचायती राज अधिनियम 2006, राज्य में त्रि-स्तरीय पंचायती राज व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए लागू किया गया था। इस अधिनियम की सबसे बड़ी विशेषता महिलाओं को पंचायतों के सभी स्तरों पर 50% आरक्षण देना है, ऐसा करने वाला बिहार भारत का पहला राज्य बना। इसके अलावा, बिहार ने अत्यंत पिछड़ा वर्ग (EBC) के लिए 20% आरक्षण का प्रावधान किया है। स्थानीय स्तर पर न्यायिक कार्यों के लिए 'ग्राम कचहरी' की व्यवस्था की गई है, जिसका नेतृत्व सरपंच करता है। यह अधिनियम ग्रामीण विकास और सामाजिक न्याय सुनिश्चित करने के लिए एक महत्वपूर्ण कानूनी ढांचा प्रदान करता है। इसमें अनुसूचित जाति और जनजाति को उनकी जनसंख्या के अनुपात में आरक्षण दिया गया है।
मुख्य तथ्य
- बिहार पंचायती राज अधिनियम वर्ष 2006 में पारित किया गया था।
- बिहार पंचायतों में महिलाओं को 50% आरक्षण देने वाला देश का पहला राज्य है।
- अधिनियम के तहत अत्यंत पिछड़ा वर्ग (EBC) को 20% आरक्षण दिया गया है।
- अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) को उनकी जनसंख्या के अनुपात में आरक्षण प्राप्त है।
- ग्राम कचहरी का कार्यकाल 5 वर्षों का होता है।
- सरपंच और पंच का चुनाव सीधे (प्रत्यक्ष) जनता द्वारा किया जाता है।
- उप-सरपंच का चुनाव निर्वाचित पंचों द्वारा अपने बीच से (अप्रत्यक्ष) किया जाता है।
- बिहार राज्य महिला आयोग का मुख्यालय पटना में स्थित है।
- बिहार के महिला बजट का आकार 63,964 करोड़ रुपये तक पहुँच गया है।
- ग्राम सभा पंचायत की बुनियादी इकाई है जिसमें गाँव के सभी मतदाता सदस्य होते हैं।
तालिका
- श्रेणी: महिलाएं · आरक्षण प्रतिशत / विवरण: 50% (सभी स्तरों पर)
- श्रेणी: अत्यंत पिछड़ा वर्ग (EBC) · आरक्षण प्रतिशत / विवरण: 20%
- श्रेणी: SC और ST · आरक्षण प्रतिशत / विवरण: जनसंख्या के अनुपात में
- श्रेणी: ग्राम कचहरी प्रधान · आरक्षण प्रतिशत / विवरण: सरपंच (प्रत्यक्ष निर्वाचित)
- श्रेणी: कार्यकाल · आरक्षण प्रतिशत / विवरण: 5 वर्ष
अभ्यास प्रश्न (हल सहित)
- प्रश्न 11: बिहार पंचायती राज अधिनियम 2006 के तहत महिलाओं को कितना प्रतिशत आरक्षण दिया गया है?
(क) 33 प्रतिशत (ख) 50 प्रतिशत (ग) 25 प्रतिशत (घ) उपरोक्त में से कोई नहीं
- ✔ उत्तर: (ख) 50 प्रतिशत — बिहार 2006 के अधिनियम के माध्यम से पंचायतों में महिलाओं को 50% आरक्षण देने वाला पहला राज्य बना।
- प्रश्न 12: बिहार में ग्राम कचहरी के सरपंच का चुनाव कैसे होता है?
(क) अप्रत्यक्ष रूप से (ख) मनोनयन द्वारा (ग) प्रत्यक्ष रूप से जनता द्वारा (घ) वार्ड सदस्यों द्वारा
- ✔ उत्तर: (ग) प्रत्यक्ष रूप से जनता द्वारा — बिहार पंचायती राज अधिनियम के अनुसार सरपंच और पंच का चुनाव सीधे मतदाताओं द्वारा किया जाता है।
- प्रश्न 13: बिहार में अत्यंत पिछड़ा वर्ग (EBC) के लिए पंचायतों में कितने प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान है?
(क) 10% (ख) 15% (ग) 20% (घ) 27%
- ✔ उत्तर: (ग) 20% — बिहार सरकार ने 2006 के अधिनियम के तहत EBC के लिए 20% आरक्षण सुनिश्चित किया है।
- प्रश्न 14: ग्राम कचहरी के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही है?
(क) इसका कार्यकाल 6 वर्ष का होता है। (ख) उप-सरपंच का चुनाव प्रत्यक्ष रूप से होता है। (ग) सरपंच ग्राम कचहरी का प्रधान होता है। (घ) इसमें महिलाओं के लिए कोई आरक्षण नहीं है।
- ✔ उत्तर: (ग) सरपंच ग्राम कचहरी का प्रधान होता है। — सरपंच ग्राम कचहरी का मुखिया होता है और इसका कार्यकाल 5 वर्ष का होता है।
परीक्षा में कैसे आता है
BPSC में अक्सर महिलाओं के 50% आरक्षण के वर्ष और प्रतिशत, EBC आरक्षण की मात्रा, और ग्राम कचहरी के चुनाव की प्रकृति (प्रत्यक्ष/अप्रत्यक्ष) पर प्रश्न पूछे जाते हैं।
इनमें भ्रम न करें
- ✘ राष्ट्रीय स्तर पर 33% आरक्षण है, लेकिन बिहार में यह 50% है।
- ✘ सरपंच का चुनाव प्रत्यक्ष होता है, जबकि उप-सरपंच का चुनाव अप्रत्यक्ष होता है।
💡 बिहार का 'पंच' (5) मंत्र: 50% महिला, 5 साल कार्यकाल, और 20% EBC (5 का गुणांक)।
74वाँ संशोधन और नगरीय निकाय
74वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1992 ने भारत में शहरी स्थानीय निकायों (ULBs) को संवैधानिक दर्जा प्रदान किया। इसके माध्यम से संविधान में 'भाग IX-A' और '12वीं अनुसूची' जोड़ी गई, जिसमें नगर पालिकाओं के लिए 18 कार्यात्मक विषय शामिल हैं। यह अधिनियम तीन प्रकार की नगर पालिकाओं का प्रावधान करता है: नगर पंचायत, नगर परिषद और नगर निगम। बिहार के संदर्भ में, पटना नगर निगम की स्थापना 15 अगस्त 1952 को हुई थी, जो राज्य का एक प्रमुख ऐतिहासिक संस्थान है। यह संशोधन शहरी क्षेत्रों में स्वशासन, नियमित चुनाव और समाज के कमजोर वर्गों के लिए आरक्षण सुनिश्चित करता है। बिहार नगरपालिका अधिनियम, 2007 के तहत राज्य में इन निकायों का संचालन किया जाता है।
मुख्य तथ्य
- 74वाँ संविधान संशोधन अधिनियम 1 जून 1993 से प्रभावी हुआ।
- संविधान में भाग IX-A (अनुच्छेद 243-P से 243-ZG) जोड़ा गया।
- 12वीं अनुसूची में नगर पालिकाओं के लिए कुल 18 विषय दिए गए हैं।
- पटना नगर निगम की स्थापना 15 अगस्त 1952 को हुई थी।
- नगर पंचायत: ग्रामीण से शहरी क्षेत्र में परिवर्तित हो रहे क्षेत्रों के लिए।
- नगर परिषद: छोटे शहरी क्षेत्रों के लिए गठित निकाय।
- नगर निगम: बड़े शहरी क्षेत्रों (महानगरों) के लिए गठित निकाय।
- बिहार में नगर निकायों में महिलाओं के लिए 50% आरक्षण का प्रावधान है।
- 3 लाख या अधिक जनसंख्या वाले नगरों में वार्ड समितियों का गठन अनिवार्य है।
- जिला योजना समिति का गठन अनुच्छेद 243-ZD के तहत किया जाता है।
- महानगर योजना समिति का प्रावधान अनुच्छेद 243-ZE में है।
- नगर निकायों का कार्यकाल प्रथम बैठक से 5 वर्ष का होता है।
- राज्य निर्वाचन आयोग नगर निकायों के चुनावों का संचालन करता है।
तालिका
- निकाय का प्रकार: नगर निगम · क्षेत्र का प्रकार: बड़ा शहरी क्षेत्र · बिहार में उदाहरण: पटना नगर निगम
- निकाय का प्रकार: नगर परिषद · क्षेत्र का प्रकार: छोटा शहरी क्षेत्र · बिहार में उदाहरण: आरा, बिहारशरीफ (पूर्व में)
- निकाय का प्रकार: नगर पंचायत · क्षेत्र का प्रकार: संक्रमणकालीन क्षेत्र · बिहार में उदाहरण: नवगठित नगर पंचायतें
अभ्यास प्रश्न (हल सहित)
- प्रश्न 15: 74वें संविधान संशोधन द्वारा संविधान में कौन सी अनुसूची जोड़ी गई थी?
(क) 9वीं अनुसूची (ख) 10वीं अनुसूची (ग) 11वीं अनुसूची (घ) 12वीं अनुसूची
- ✔ उत्तर: (घ) 12वीं अनुसूची — 74वें संशोधन (1992) द्वारा नगर पालिकाओं के लिए 12वीं अनुसूची जोड़ी गई थी।
- प्रश्न 16: पटना नगर निगम की स्थापना किस वर्ष और तिथि को हुई थी?
(क) 26 जनवरी 1950 (ख) 15 अगस्त 1952 (ग) 1 अप्रैल 1936 (घ) 15 अगस्त 1947
- ✔ उत्तर: (ख) 15 अगस्त 1952 — पटना नगर निगम की स्थापना 15 अगस्त 1952 को हुई थी।
- प्रश्न 17: नगर पालिकाओं के पास 12वीं अनुसूची के तहत कितने कार्यात्मक विषय हैं?
(क) 29 विषय (ख) 18 विषय (ग) 21 विषय (घ) 15 विषय
- ✔ उत्तर: (ख) 18 विषय — 74वें संशोधन के तहत नगर पालिकाओं को 18 विषयों पर कार्य करने की शक्ति दी गई है।
- प्रश्न 18: नगर निकायों में वार्ड समितियों का गठन कितनी जनसंख्या पर अनिवार्य है?
(क) 1 लाख या अधिक (ख) 2 लाख या अधिक (ग) 3 लाख या अधिक (घ) 5 लाख या अधिक
- ✔ उत्तर: (ग) 3 लाख या अधिक — अनुच्छेद 243-S के अनुसार, 3 लाख या उससे अधिक जनसंख्या वाली नगर पालिकाओं में वार्ड समितियां बनाना अनिवार्य है।
- प्रश्न 19: बिहार में नगर निकायों में महिलाओं के लिए कितने प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान है?
(क) 33% (ख) 25% (ग) 50% (घ) कोई आरक्षण नहीं
- ✔ उत्तर: (ग) 50% — बिहार नगरपालिका अधिनियम के तहत महिलाओं को 50% आरक्षण दिया गया है।
परीक्षा में कैसे आता है
BPSC में इस उप-विषय से अक्सर 74वें संशोधन की अनुसूची, विषयों की संख्या (18), और पटना नगर निगम की स्थापना की तारीख के बारे में प्रश्न पूछे जाते हैं।
इनमें भ्रम न करें
- ✘ 11वीं अनुसूची (पंचायत) और 12वीं अनुसूची (नगर निकाय) के बीच भ्रम।
- ✘ पंचायतों के 29 विषयों और नगर निकायों के 18 विषयों की संख्या में गलती।
- ✘ भाग IX (पंचायत) और भाग IX-A (नगर निकाय) को आपस में बदलना।
💡 नगर में 18 साल के बच्चे 12वीं (12वीं अनुसूची) कक्षा में पढ़ते हैं - (18 विषय, 12वीं अनुसूची)।
राज्य वित्त आयोग और चुनाव
73वें और 74वें संविधान संशोधन ने स्थानीय निकायों के लोकतांत्रिक और वित्तीय आधार को मजबूत करने के लिए दो महत्वपूर्ण संस्थाओं, राज्य निर्वाचन आयोग और राज्य वित्त आयोग का प्रावधान किया है। अनुच्छेद 243K के तहत राज्य निर्वाचन आयोग पंचायतों और नगर निकायों के लिए मतदाता सूची तैयार करने और चुनाव कराने के लिए जिम्मेदार है। राज्य निर्वाचन आयुक्त की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा की जाती है, लेकिन उन्हें पद से हटाने की प्रक्रिया उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के समान ही कठिन है। दूसरी ओर, अनुच्छेद 243I के तहत राज्यपाल हर पांच साल में राज्य वित्त आयोग का गठन करते हैं। यह आयोग राज्य सरकार द्वारा एकत्रित करों और शुल्कों को स्थानीय निकायों के बीच बांटने के सिद्धांतों की सिफारिश करता है। यह सुनिश्चित करता है कि पंचायतों और नगर पालिकाओं के पास अपने कार्यों को पूरा करने के लिए पर्याप्त संसाधन उपलब्ध हों।
मुख्य तथ्य
- अनुच्छेद 243K: राज्य निर्वाचन आयोग (SEC) का गठन और स्थानीय निकायों के चुनाव का संचालन।
- अनुच्छेद 243I: पंचायतों के लिए राज्य वित्त आयोग (SFC) का गठन (प्रत्येक 5 वर्ष में)।
- अनुच्छेद 243Y: नगर पालिकाओं के लिए राज्य वित्त आयोग के प्रावधानों का विस्तार।
- राज्य निर्वाचन आयुक्त की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा की जाती है।
- राज्य निर्वाचन आयुक्त को हटाने की प्रक्रिया उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के समान है।
- अनुच्छेद 243J: पंचायतों के खातों के अंकेक्षण (Audit) से संबंधित है।
- बिहार राज्य सूचना आयोग की स्थापना जून 2006 में की गई थी।
- बिहार राज्य महिला आयोग पटना में स्थित एक स्वतंत्र सरकारी विभाग है।
- स्थानीय चुनाव कराने का निर्णय राज्य सरकार लेती है, लेकिन संचालन राज्य निर्वाचन आयोग करता है।
तालिका
- संस्थान: राज्य निर्वाचन आयोग · अनुच्छेद: 243K · मुख्य कार्य: स्थानीय चुनाव और मतदाता सूची
- संस्थान: राज्य वित्त आयोग · अनुच्छेद: 243I · मुख्य कार्य: राजस्व का बंटवारा (पंचायती राज)
- संस्थान: राज्य वित्त आयोग · अनुच्छेद: 243Y · मुख्य कार्य: राजस्व का बंटवारा (नगर निकाय)
- संस्थान: लेखा परीक्षा (Audit) · अनुच्छेद: 243J · मुख्य कार्य: पंचायतों के खातों की जांच
अभ्यास प्रश्न (हल सहित)
- प्रश्न 20: भारतीय संविधान के किस अनुच्छेद के तहत राज्य निर्वाचन आयोग का गठन किया जाता है?
(क) अनुच्छेद 243I (ख) अनुच्छेद 243K (ग) अनुच्छेद 243J (घ) अनुच्छेद 243L
- ✔ उत्तर: (ख) अनुच्छेद 243K — अनुच्छेद 243K पंचायतों और नगर निकायों के चुनावों के लिए राज्य निर्वाचन आयोग का प्रावधान करता है।
- प्रश्न 21: राज्य निर्वाचन आयुक्त को उसके पद से किसके समान प्रक्रिया द्वारा हटाया जा सकता है?
(क) राज्यपाल (ख) मुख्यमंत्री (ग) उच्च न्यायालय के न्यायाधीश (घ) राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष
- ✔ उत्तर: (ग) उच्च न्यायालय के न्यायाधीश — संविधान के अनुसार, राज्य निर्वाचन आयुक्त को हटाने की विधि और आधार वही हैं जो उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के लिए हैं।
- प्रश्न 22: राज्य वित्त आयोग का गठन कितने वर्षों के अंतराल पर किया जाता है?
(क) 3 वर्ष (ख) 4 वर्ष (ग) 5 वर्ष (घ) 6 वर्ष
- ✔ उत्तर: (ग) 5 वर्ष — अनुच्छेद 243I के तहत राज्यपाल प्रत्येक 5 वर्ष की समाप्ति पर राज्य वित्त आयोग का गठन करते हैं।
- प्रश्न 23: बिहार राज्य सूचना आयोग की स्थापना किस वर्ष हुई थी?
(क) 2005 (ख) 2006 (ग) 2007 (घ) 2008
- ✔ उत्तर: (ख) 2006 — बिहार राज्य सूचना आयोग की स्थापना जून 2006 में की गई थी।
- प्रश्न 24: निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. राज्य निर्वाचन आयोग मतदाता सूची तैयार करता है।
2. राज्य वित्त आयोग की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है।
सही कथन चुनें:
(क) केवल 1 (ख) केवल 2 (ग) 1 और 2 दोनों (घ) इनमें से कोई नहीं
- ✔ उत्तर: (क) केवल 1 — कथन 1 सही है, लेकिन कथन 2 गलत है क्योंकि राज्य वित्त आयोग की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा की जाती है।
परीक्षा में कैसे आता है
BPSC में इस उप-विषय से अक्सर अनुच्छेदों (243I और 243K) पर सीधे प्रश्न पूछे जाते हैं। राज्य निर्वाचन आयुक्त की नियुक्ति और हटाने की प्रक्रिया पर भी प्रश्न देखे गए हैं।
इनमें भ्रम न करें
- ✘ छात्र अक्सर 243I (वित्त) और 243K (चुनाव) के बीच भ्रमित हो जाते हैं।
- ✘ राज्य वित्त आयोग की नियुक्ति राज्यपाल करते हैं, जबकि केंद्रीय वित्त आयोग की नियुक्ति राष्ट्रपति करते हैं।
💡 I = Income (वित्त आयोग 243I), K = Kursi/Election (निर्वाचन आयोग 243K)
एक नज़र में (Revision)
- बलवंत राय मेहता समिति (1957) ने त्रि-स्तरीय पंचायती राज व्यवस्था की सिफारिश की थी।
- 73वें संविधान संशोधन (1992) द्वारा संविधान में भाग IX और 11वीं अनुसूची जोड़ी गई जिसमें 29 विषय हैं।
- ग्राम सभा पंचायती राज व्यवस्था की आधारशिला है जिसमें गाँव के सभी पंजीकृत मतदाता शामिल होते हैं।
- बिहार पंचायती राज अधिनियम 2006 लागू करने वाला बिहार देश का पहला राज्य बना जिसने महिलाओं को 50% आरक्षण दिया।
- बिहार में ग्राम कचहरी का नेतृत्व 'सरपंच' करता है और यह न्यायिक कार्यों को देखती है।
- 74वें संविधान संशोधन (1992) द्वारा नगर निकायों को संवैधानिक दर्जा दिया गया और 12वीं अनुसूची (18 विषय) जोड़ी गई।
- राज्य चुनाव आयोग (अनुच्छेद 243K) स्थानीय निकायों के चुनावों के संचालन के लिए जिम्मेदार है।
- राज्य वित्त आयोग (अनुच्छेद 243I) राज्य और स्थानीय निकायों के बीच राजस्व वितरण की सिफारिश करता है।
- अशोक मेहता समिति (1977) ने द्वि-स्तरीय प्रणाली और राजनीतिक दलों की भागीदारी की सिफारिश की थी।
- एल.एम. सिंघवी समिति (1986) ने पंचायतों को संवैधानिक दर्जा देने की पुरजोर सिफारिश की थी।
अपने आप को जाँचिए — 10 प्रश्न
1. पंचायती राज व्यवस्था में 'लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण' की सिफारिश करने वाली पहली समिति कौन सी थी?
- (क) अशोक मेहता समिति
- (ख) बलवंत राय मेहता समिति
- (ग) जी.वी.के. राव समिति
- (घ) एल.एम. सिंघवी समिति
उत्तर देखें
उत्तर: (ख) बलवंत राय मेहता समिति
बलवंत राय मेहता समिति (1957) ने त्रि-स्तरीय पंचायती राज व्यवस्था के माध्यम से लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण की सिफारिश की थी।
2. 73वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1992 द्वारा संविधान में कौन सी अनुसूची जोड़ी गई और इसमें कितने विषय शामिल हैं?
- (क) 11वीं अनुसूची, 29 विषय
- (ख) 12वीं अनुसूची, 18 विषय
- (ग) 11वीं अनुसूची, 18 विषय
- (घ) 10वीं अनुसूची, 29 विषय
उत्तर देखें
उत्तर: (क) 11वीं अनुसूची, 29 विषय
73वें संशोधन ने 11वीं अनुसूची जोड़ी जिसमें पंचायतों के कार्यों के लिए 29 विषय सूचीबद्ध हैं।
3. बिहार पंचायती राज अधिनियम, 2006 के तहत महिलाओं को पंचायतों में कितना प्रतिशत आरक्षण दिया गया है?
- (क) 33 प्रतिशत
- (ख) 50 प्रतिशत
- (ग) 25 प्रतिशत
- (घ) उपर्युक्त में से कोई नहीं
उत्तर देखें
उत्तर: (ख) 50 प्रतिशत
बिहार 2006 में पंचायती राज संस्थाओं के सभी स्तरों पर महिलाओं को 50% आरक्षण देने वाला पहला राज्य बना।
4. बिहार में 'ग्राम कचहरी' के संदर्भ में, न्यायिक कार्यों का प्रधान कौन होता है?
- (क) मुखिया
- (ख) पंचायत सचिव
- (ग) सरपंच
- (घ) न्याय मित्र
उत्तर देखें
उत्तर: (ग) सरपंच
बिहार पंचायती राज अधिनियम के तहत, ग्राम कचहरी का नेतृत्व सरपंच द्वारा किया जाता है, जो दीवानी और फौजदारी मामलों की सुनवाई करता है।
5. 74वें संविधान संशोधन अधिनियम के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें: 1. इसने संविधान में भाग IX-A जोड़ा। 2. इसने 12वीं अनुसूची जोड़ी जिसमें 18 विषय हैं।
- (क) केवल 1 सही है
- (ख) केवल 2 सही है
- (ग) 1 और 2 दोनों सही हैं
- (घ) न तो 1 और न ही 2 सही है
उत्तर देखें
उत्तर: (ग) 1 और 2 दोनों सही हैं
74वां संशोधन नगर पालिकाओं से संबंधित है, जिसने भाग IX-A और 12वीं अनुसूची (18 विषय) को जोड़ा।
6. पंचायतों के वित्तीय स्थिति की समीक्षा के लिए 'राज्य वित्त आयोग' का गठन कौन करता है?
- (क) मुख्यमंत्री
- (ख) राज्य का राज्यपाल
- (ग) राज्य विधानसभा का अध्यक्ष
- (घ) भारत का राष्ट्रपति
उत्तर देखें
उत्तर: (ख) राज्य का राज्यपाल
अनुच्छेद 243-I के तहत, राज्य का राज्यपाल प्रत्येक पांच वर्ष में राज्य वित्त आयोग का गठन करता है।
7. ग्राम सभा की सही परिभाषा क्या है?
- (क) गाँव के सभी निवासी
- (ख) गाँव के सभी वयस्क पुरुष
- (ग) गाँव स्तर पर पंचायत के क्षेत्र के भीतर निर्वाचक नामावली में पंजीकृत व्यक्ति
- (घ) पंचायत के निर्वाचित सदस्य
उत्तर देखें
उत्तर: (ग) गाँव स्तर पर पंचायत के क्षेत्र के भीतर निर्वाचक नामावली में पंजीकृत व्यक्ति
ग्राम सभा में वे सभी व्यक्ति शामिल होते हैं जिनका नाम ग्राम स्तर पर पंचायत की मतदाता सूची में दर्ज होता है।
8. निम्नलिखित समितियों को उनके गठन के वर्ष के साथ सुमेलित करें: (A) अशोक मेहता - 1. 1986, (B) एल.एम. सिंघवी - 2. 1977, (C) जी.वी.के. राव - 3. 1957, (D) बलवंत राय मेहता - 4. 1985
- (क) A-2, B-1, C-4, D-3
- (ख) A-1, B-2, C-3, D-4
- (ग) A-3, B-4, C-1, D-2
- (घ) A-4, B-3, C-2, D-1
उत्तर देखें
उत्तर: (क) A-2, B-1, C-4, D-3
सही मिलान है: बलवंत राय मेहता (1957), अशोक मेहता (1977), जी.वी.के. राव (1985), और एल.एम. सिंघवी (1986)।
9. राज्य निर्वाचन आयोग के बारे में कौन सा कथन सत्य है?
- (क) इसकी नियुक्ति भारत के राष्ट्रपति द्वारा की जाती है।
- (ख) यह पंचायतों और नगर पालिकाओं के चुनावों का संचालन करता है।
- (ग) यह विधानसभा चुनावों का संचालन करता है।
- (घ) उपर्युक्त में से कोई नहीं
उत्तर देखें
उत्तर: (ख) यह पंचायतों और नगर पालिकाओं के चुनावों का संचालन करता है।
राज्य निर्वाचन आयोग (अनुच्छेद 243K) केवल स्थानीय निकायों (पंचायतों और नगर पालिकाओं) के चुनावों के लिए जिम्मेदार है।
10. बिहार पंचायती राज अधिनियम, 2006 के अनुसार, 'पंचायत समिति' का पदेन सचिव कौन होता है?
- (क) अनुमंडल पदाधिकारी (SDO)
- (ख) प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO)
- (ग) जिलाधिकारी (DM)
- (घ) अंचल अधिकारी (CO)
उत्तर देखें
उत्तर: (ख) प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO)
बिहार में, प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) पंचायत समिति के मुख्य कार्यकारी अधिकारी और पदेन सचिव के रूप में कार्य करता है।
English version — Panchayati Raj and Urban Local Bodies
This chapter is crucial for BPSC Prelims and Mains (GS Paper 2) as it focuses on decentralized governance and Bihar-specific reforms. Questions regarding the Bihar Panchayati Raj Act 2006 are frequently asked.
Balwant Rai Mehta and Other Committees
In January 1957, the Balwant Rai Mehta Committee was appointed to assess the functioning of the Community Development Programme (1952) and National Extension Service (1953). The committee introduced the idea of 'democratic decentralization' and recommended a three-tier Panchayati Raj system. Based on its recommendations, the first Panchayati Raj system was inaugurated on 2 October 1959 in Nagaur, Rajasthan. Later in 1977, the Janata Party government constituted the Ashok Mehta Committee, which suggested a two-tier model (Mandal Panchayat and Zila Parishad). Subsequent committees like G.V.K. Rao (1985) and L.M. Singhvi (1986) strongly advocated for granting constitutional status and revitalizing local governance. Finally, the recommendations of the Thungon and Gadgil committees formed the framework for the 73rd Constitutional Amendment Act.
Key facts
- The Balwant Rai Mehta Committee was appointed in January 1957 to review the Community Development Programme.
- The Balwant Rai Mehta Committee recommended a three-tier Panchayati Raj system (Gram Panchayat, Panchayat Samiti, and Zila Parishad) in November 1957.
- Panchayati Raj was first inaugurated on 2 October 1959 in Nagaur district of Rajasthan by Pandit Jawaharlal Nehru.
- Andhra Pradesh (1959) was the second state in India to adopt the Panchayati Raj system.
- The Ashok Mehta Committee was constituted in 1977 by the Janata Party government and submitted its report in August 1978.
- The Ashok Mehta Committee recommended a two-tier system (Zila Parishad and Mandal Panchayat) instead of three tiers.
- The Ashok Mehta Committee advocated for the official participation of political parties in Panchayati Raj elections.
- The G.V.K. Rao Committee was set up by the Planning Commission in 1985 to review administrative arrangements for rural development and poverty alleviation.
- The G.V.K. Rao Committee described the Panchayati Raj institutions as 'grass without roots' due to excessive bureaucratization.
- The L.M. Singhvi Committee (1986) made the primary recommendation to grant constitutional recognition to Panchayati Raj institutions.
- The P.K. Thungon Committee (1988) also recommended constitutional status and a fixed five-year tenure for Panchayats.
- The recommendations of the V.N. Gadgil Committee (1988) formed the basis for drafting the constitutional amendment bill on Panchayati Raj.
Table
- समिति का नाम: बलवंत राय मेहता समिति · गठन वर्ष: 1957 · प्रमुख सिफारिश / महत्वपूर्ण बिंदु: त्रि-स्तरीय व्यवस्था (ग्राम, ब्लॉक, जिला) और लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण की सिफारिश
- समिति का नाम: के. संथानम समिति · गठन वर्ष: 1963 · प्रमुख सिफारिश / महत्वपूर्ण बिंदु: पंचायती राज वित्त तथा वित्तीय अधिकारों के हस्तांतरण पर अध्ययन
- समिति का नाम: अशोक मेहता समिति · गठन वर्ष: 1977 · प्रमुख सिफारिश / महत्वपूर्ण बिंदु: द्वि-स्तरीय व्यवस्था (मंडल पंचायत व जिला परिषद) और राजनीतिक दलों की खुली भागीदारी
- समिति का नाम: जी.वी.के. राव समिति · गठन वर्ष: 1985 · प्रमुख सिफारिश / महत्वपूर्ण बिंदु: जिले को मूल नियोजन इकाई बनाना, पंचायतों को 'बिना जड़ की घास' बताया
- समिति का नाम: एल.एम. सिंघवी समिति · गठन वर्ष: 1986 · प्रमुख सिफारिश / महत्वपूर्ण बिंदु: पंचायती राज संस्थाओं को संवैधानिक मान्यता और न्याय पंचायतों की सिफारिश
- समिति का नाम: पी.के. थुंगन समिति · गठन वर्ष: 1988 · प्रमुख सिफारिश / महत्वपूर्ण बिंदु: पंचायतों को संवैधानिक दर्जा, त्रि-स्तरीय ढांचा व 5 वर्ष का निश्चित कार्यकाल
- समिति का नाम: वी.एन. गाडगिल समिति · गठन वर्ष: 1988 · प्रमुख सिफारिश / महत्वपूर्ण बिंदु: 73वें संविधान संशोधन के मूल मसौदे हेतु आधारभूत सिफारिशें
Practice questions (solved)
- Q 1: भारत में पंचायती राज प्रणाली की त्रि-स्तरीय संरचना की संस्तुति सर्वप्रथम किस समिति द्वारा की गई थी?
(क) अशोक मेहता समिति (ख) बलवंत राय मेहता समिति (ग) जी.वी.के. राव समिति (घ) एल.एम. सिंघवी समिति
- ✔ Answer: (ख) बलवंत राय मेहता समिति — बलवंत राय मेहता समिति (1957) ने लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण के तहत त्रि-स्तरीय पंचायती राज व्यवस्था की सिफारिश की थी।
- Q 2: पंचायती राज को संवैधानिक दर्जा देने की पुरजोर अनुशंसा सबसे पहले किस समिति ने की थी?
(क) बलवंत राय मेहता समिति (ख) अशोक मेहता समिति (ग) एल.एम. सिंघवी समिति (घ) संथानम समिति
- ✔ Answer: (ग) एल.एम. सिंघवी समिति — राजीव गांधी सरकार के समय 1986 में गठित एल.एम. सिंघवी समिति ने पंचायतों को संवैधानिक संरक्षण प्रदान करने का सुझाव दिया था।
- Q 3: अशोक मेहता समिति (1977) के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है?
(क) इसने पंचायती राज की तीन स्तरों वाली व्यवस्था बनाए रखने की वकालत की। (ख) इसने जिला स्तर पर 'जिला परिषद' और 15000-20000 आबादी वाले गांवों के समूह पर 'मंडल पंचायत' की द्वि-स्तरीय व्यवस्था की सिफारिश की। (ग) इसने राजनीतिक दलों को पंचायत चुनावों से पूरी तरह दूर रखने की सिफारिश की। (घ) इसने ग्राम पंचायत को ही सबसे प्रमुख प्रशासनिक इकाई माना।
- ✔ Answer: (ख) इसने जिला स्तर पर 'जिला परिषद' और 15000-20000 आबादी वाले गांवों के समूह पर 'मंडल पंचायत' की द्वि-स्तरीय व्यवस्था की सिफारिश की। — अशोक मेहता समिति ने द्वि-स्तरीय व्यवस्था (जिला परिषद और मंडल पंचायत) का प्रस्ताव दिया था।
- Q 4: किस समिति ने विकास प्रशासन में अत्यधिक नौकरशाही के कारण पंचायती राज संस्थाओं को 'बिना जड़ की घास' (Grass without roots) कहा था?
(क) जी.वी.के. राव समिति (1985) (ख) एल.एम. सिंघवी समिति (1986) (ग) बलवंत राय मेहता समिति (1957) (घ) अशोक मेहता समिति (1977)
- ✔ Answer: (क) जी.वी.के. राव समिति (1985) — योजना आयोग द्वारा 1985 में गठित जी.वी.के. राव समिति ने पंचायतों की कमजोर स्थिति को 'बिना जड़ की घास' कहा था।
- Q 5: भारत में 2 अक्टूबर 1959 को सर्वप्रथम पंचायती राज का उद्घाटन किस राज्य में हुआ था?
(क) आंध्र प्रदेश (ख) बिहार (ग) राजस्थान (घ) उत्तर प्रदेश
- ✔ Answer: (ग) राजस्थान — पंडित जवाहरलाल नेहरू ने 2 अक्टूबर 1959 को राजस्थान के नागौर जिले में पंचायती राज का औपचारिक शुभारंभ किया था।
📜 Real previous-year questions (BPSC)
- [BPSC 71वीं प्रारंभिक (13 सितंबर 2025), प्रश्न 68] पंचायती राज का क्या मुख्य उद्देश्य है?
(क) कृषि उत्पादन में वृद्धि करना (ख) रोजगार सृजन (ग) जनता में राजनीतिक चेतना में वृद्धि करना (घ) जनता को विकास के प्रशासन में प्रतिभाग करने योग्य बनाना
- ✔ Official answer: (घ) जनता को विकास के प्रशासन में प्रतिभाग करने योग्य बनाना — बलवंत राय मेहता समिति की मूल संकल्पना 'लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण' थी, जिसका मुख्य ध्येय जनता को विकास और स्वशासन के प्रशासन में सीधे भागीदार बनाना था।
How it is asked
BPSC frequently asks direct and conceptual questions about the year of committee formation, structural recommendations (3-tier vs 2-tier), the committee advocating constitutional status, and the first inauguration in Nagaur (Rajasthan).
Do not confuse
- ✘ बलवंत राय मेहता समिति (1957) ने 'त्रि-स्तरीय' व्यवस्था दी, जबकि अशोक मेहता समिति (1977) ने 'द्वि-स्तरीय' (मंडल पंचायत और जिला परिषद) व्यवस्था की सिफारिश की थी।
- ✘ पंचायती राज अपनाने वाला प्रथम राज्य राजस्थान (2 अक्टूबर 1959) था, जबकि दूसरा राज्य आंध्र प्रदेश (11 अक्टूबर 1959) बना। छात्र अक्सर आंध्र प्रदेश को पहला मान लेते हैं।
- ✘ पंचायतों के गठन का विचार बलवंत राय मेहता ने दिया, परंतु उन्हें 'संवैधानिक दर्जा' देने की पहली सशक्त मांग एल.एम. सिंघवी समिति (1986) ने उठाई थी।
💡 समितियों का कालक्रम याद रखने की ट्रिक: 'B-A-G-S' -> Balwant Rai (1957), Ashok Mehta (1977), G.V.K. Rao (1985), Singhvi (1986)
73rd Amendment: Three Tiers, 11th Schedule, and Gram Sabha
The 73rd Constitutional Amendment Act of 1992 granted constitutional status to Panchayati Raj in India. It introduced 'Part 9' and the '11th Schedule' to the Constitution, specifying 29 functional subjects for Panchayats. Effective from April 24, 1993, this day is celebrated as National Panchayati Raj Day. The amendment mandated a three-tier structure at the village, block, and district levels. The Gram Sabha, comprising all registered voters of a village, is considered the foundation of this system. This was a revolutionary step towards empowering local self-governance and bringing democracy to the grassroots level.
Key facts
- The 73rd Amendment Act was passed in 1992 and came into force on April 24, 1993.
- A new Part 9 (Articles 243 to 243-O) was added to the Constitution by this amendment.
- The 11th Schedule contains a list of 29 functional subjects for Panchayats.
- Article 243A describes the powers and functions of the Gram Sabha.
- All adult voters registered in the village electoral rolls are members of the Gram Sabha.
- A three-tier structure (Village, Intermediate, and District levels) is mandatory under Article 243B.
- States with a population below 20 lakhs are not required to constitute the intermediate level.
- Article 243D provides for at least 1/3 (33%) reservation for women.
- Bihar was the first state in India to provide 50% reservation for women in Panchayats.
- The tenure of Panchayats is fixed at 5 years under Article 243E.
- The maximum gap between meetings of the Gram Sabha can be 3 months.
- The meetings of the Gram Sabha are usually chaired by the Mukhiya.
Table
- स्तर: ग्राम स्तर · निकाय का नाम: ग्राम पंचायत · प्रमुख का पद: मुखिया / सरपंच
- स्तर: ब्लॉक स्तर · निकाय का नाम: पंचायत समिति · प्रमुख का पद: प्रमुख / अध्यक्ष
- स्तर: जिला स्तर · निकाय का नाम: जिला परिषद · प्रमुख का पद: अध्यक्ष
Practice questions (solved)
- Q 6: 73वें संविधान संशोधन द्वारा संविधान में कौन सी अनुसूची जोड़ी गई?
(क) 9वीं अनुसूची (ख) 10वीं अनुसूची (ग) 11वीं अनुसूची (घ) 12वीं अनुसूची
- ✔ Answer: (ग) 11वीं अनुसूची — 73वें संशोधन (1992) के माध्यम से पंचायतों के लिए 11वीं अनुसूची जोड़ी गई थी।
- Q 7: ग्राम सभा का सदस्य बनने के लिए क्या अनिवार्य है?
(क) 25 वर्ष की आयु (ख) गाँव की मतदाता सूची में पंजीकृत होना (ग) कम से कम 10वीं पास होना (घ) गाँव में संपत्ति होना
- ✔ Answer: (ख) गाँव की मतदाता सूची में पंजीकृत होना — ग्राम सभा में वे सभी व्यक्ति शामिल होते हैं जिनका नाम गाँव की निर्वाचक नामावली में दर्ज होता है।
- Q 8: 11वीं अनुसूची में पंचायतों के कार्य के लिए कितने विषय सूचीबद्ध हैं?
(क) 18 विषय (ख) 22 विषय (ग) 25 विषय (घ) 29 विषय
- ✔ Answer: (घ) 29 विषय — 73वें संशोधन के तहत 11वीं अनुसूची में पंचायतों को 29 विषयों पर कार्य करने की शक्ति दी गई है।
- Q 9: पंचायती राज व्यवस्था के तहत 'मध्यवर्ती स्तर' का गठन किस जनसंख्या से कम वाले राज्यों में अनिवार्य नहीं है?
(क) 10 लाख (ख) 15 लाख (ग) 20 लाख (घ) 25 लाख
- ✔ Answer: (ग) 20 लाख — अनुच्छेद 243B के अनुसार, 20 लाख से कम आबादी वाले राज्यों में ब्लॉक स्तर की पंचायत बनाना वैकल्पिक है।
- Q 10: ग्राम सभा की बैठकों के संदर्भ में कौन सा कथन सही है?
(क) बैठक साल में केवल एक बार होनी चाहिए (ख) दो बैठकों के बीच अधिकतम 3 महीने का अंतर हो सकता है (ग) बैठक की अध्यक्षता जिला कलेक्टर करता है (घ) बैठक में केवल वार्ड सदस्य भाग ले सकते हैं
- ✔ Answer: (ख) दो बैठकों के बीच अधिकतम 3 महीने का अंतर हो सकता है — नियमों के अनुसार ग्राम सभा की बैठकों के बीच अधिकतम अंतराल 3 महीने से अधिक नहीं होना चाहिए।
📜 Real previous-year questions (BPSC)
- [BPSC 70वीं प्रारंभिक (13 दिसंबर 2024), प्रश्न 36] अनुच्छेद "243J" के अन्तर्गत पंचायतों के लेखा प्रबन्धन से सम्बन्धित नियम कौन बनाता है ?
(क) राज्य विधानमण्डल (ख) संसद (ग) राज्य वित्त आयोग (घ) जिला कलेक्टर
- ✔ Official answer: (क) राज्य विधानमण्डल — अनुच्छेद 243J के तहत पंचायतों के लेखा प्रबन्धन और ऑडिट से सम्बन्धित नियम बनाने का अधिकार राज्य विधानमण्डल को दिया गया है।
- [BPSC 71वीं प्रारंभिक (13 सितंबर 2025), प्रश्न 66] पंचायतों की वित्तीय स्थिति की समीक्षा के लिए कौन अधिकृत है?
(क) मुख्यमंत्री (ख) ब्लॉक समिति का अध्यक्ष (ग) जिला परिषद का अध्यक्ष (घ) राज्यपाल द्वारा गठित वित्त आयोग
- ✔ Official answer: (घ) राज्यपाल द्वारा गठित वित्त आयोग — अनुच्छेद 243I के अनुसार, राज्यपाल पंचायतों की वित्तीय स्थिति की समीक्षा के लिए राज्य वित्त आयोग का गठन करते हैं।
How it is asked
BPSC frequently asks direct questions from this sub-topic on Articles (especially 243A, 243D, 243I), the number of subjects in the 11th Schedule (29), and the percentage of reservation for women.
Do not confuse
- ✘ 11वीं अनुसूची (पंचायती राज) और 12वीं अनुसूची (नगरपालिका) के बीच भ्रम।
- ✘ राष्ट्रीय स्तर पर अनिवार्य 33% आरक्षण और बिहार में लागू 50% आरक्षण के बीच अंतर।
💡 29 विषय, 11वीं अनुसूची, भाग 9 - पंचायत का नया राज।
Bihar Panchayati Raj Act 2006 and Women Reservation
The Bihar Panchayati Raj Act 2006 was enacted to strengthen the three-tier Panchayati Raj system in the state. Its most significant feature is the provision of 50% reservation for women at all levels of Panchayats, making Bihar the first state in India to do so. Additionally, Bihar has provided 20% reservation for Extremely Backward Classes (EBC). For local judicial matters, the system of 'Gram Kachahari' has been established, headed by a Sarpanch. This Act provides a crucial legal framework for ensuring rural development and social justice. It also mandates reservation for SCs and STs in proportion to their population.
Key facts
- The Bihar Panchayati Raj Act was passed in the year 2006.
- Bihar is the first state in the country to provide 50% reservation for women in Panchayats.
- Under the Act, 20% reservation is given to Extremely Backward Classes (EBC).
- SCs and STs receive reservation in proportion to their population.
- The term of the Gram Kachahari is 5 years.
- The Sarpanch and Panch are elected directly by the people.
- The Up-Sarpanch is elected indirectly by the elected Panches from among themselves.
- The headquarters of the Bihar State Commission for Women is located in Patna.
- The size of Bihar's women's budget has reached 63,964 crore rupees.
- Gram Sabha is the basic unit of the Panchayat, consisting of all voters in the village.
Table
- श्रेणी: महिलाएं · आरक्षण प्रतिशत / विवरण: 50% (सभी स्तरों पर)
- श्रेणी: अत्यंत पिछड़ा वर्ग (EBC) · आरक्षण प्रतिशत / विवरण: 20%
- श्रेणी: SC और ST · आरक्षण प्रतिशत / विवरण: जनसंख्या के अनुपात में
- श्रेणी: ग्राम कचहरी प्रधान · आरक्षण प्रतिशत / विवरण: सरपंच (प्रत्यक्ष निर्वाचित)
- श्रेणी: कार्यकाल · आरक्षण प्रतिशत / विवरण: 5 वर्ष
Practice questions (solved)
- Q 11: बिहार पंचायती राज अधिनियम 2006 के तहत महिलाओं को कितना प्रतिशत आरक्षण दिया गया है?
(क) 33 प्रतिशत (ख) 50 प्रतिशत (ग) 25 प्रतिशत (घ) उपरोक्त में से कोई नहीं
- ✔ Answer: (ख) 50 प्रतिशत — बिहार 2006 के अधिनियम के माध्यम से पंचायतों में महिलाओं को 50% आरक्षण देने वाला पहला राज्य बना।
- Q 12: बिहार में ग्राम कचहरी के सरपंच का चुनाव कैसे होता है?
(क) अप्रत्यक्ष रूप से (ख) मनोनयन द्वारा (ग) प्रत्यक्ष रूप से जनता द्वारा (घ) वार्ड सदस्यों द्वारा
- ✔ Answer: (ग) प्रत्यक्ष रूप से जनता द्वारा — बिहार पंचायती राज अधिनियम के अनुसार सरपंच और पंच का चुनाव सीधे मतदाताओं द्वारा किया जाता है।
- Q 13: बिहार में अत्यंत पिछड़ा वर्ग (EBC) के लिए पंचायतों में कितने प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान है?
(क) 10% (ख) 15% (ग) 20% (घ) 27%
- ✔ Answer: (ग) 20% — बिहार सरकार ने 2006 के अधिनियम के तहत EBC के लिए 20% आरक्षण सुनिश्चित किया है।
- Q 14: ग्राम कचहरी के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही है?
(क) इसका कार्यकाल 6 वर्ष का होता है। (ख) उप-सरपंच का चुनाव प्रत्यक्ष रूप से होता है। (ग) सरपंच ग्राम कचहरी का प्रधान होता है। (घ) इसमें महिलाओं के लिए कोई आरक्षण नहीं है।
- ✔ Answer: (ग) सरपंच ग्राम कचहरी का प्रधान होता है। — सरपंच ग्राम कचहरी का मुखिया होता है और इसका कार्यकाल 5 वर्ष का होता है।
How it is asked
BPSC frequently asks questions about the year and percentage of 50% reservation for women, the amount of EBC reservation, and the nature of Gram Kachahari elections (direct/indirect).
Do not confuse
- ✘ राष्ट्रीय स्तर पर 33% आरक्षण है, लेकिन बिहार में यह 50% है।
- ✘ सरपंच का चुनाव प्रत्यक्ष होता है, जबकि उप-सरपंच का चुनाव अप्रत्यक्ष होता है।
💡 बिहार का 'पंच' (5) मंत्र: 50% महिला, 5 साल कार्यकाल, और 20% EBC (5 का गुणांक)।
74th Amendment, Municipal Bodies
The 74th Constitutional Amendment Act of 1992 granted constitutional status to Urban Local Bodies (ULBs) in India. It introduced 'Part IX-A' and the '12th Schedule' to the Constitution, listing 18 functional items for municipalities. The act provides for three types of urban bodies: Nagar Panchayats, Municipal Councils, and Municipal Corporations. In the context of Bihar, the Patna Municipal Corporation was established on August 15, 1952, marking a significant milestone in urban governance. This amendment ensures self-governance in urban areas through regular elections and reservations for marginalized sections. Currently, these bodies in Bihar are governed under the Bihar Municipal Act, 2007.
Key facts
- The 74th Constitutional Amendment Act came into force on June 1, 1993.
- Part IX-A (Articles 243-P to 243-ZG) was added to the Constitution.
- The 12th Schedule contains 18 functional items for municipalities.
- Patna Municipal Corporation was established on August 15, 1952.
- Nagar Panchayat: For areas in transition from rural to urban.
- Nagar Parishad: Body constituted for smaller urban areas.
- Municipal Corporation: Body constituted for larger urban areas.
- There is a provision for 50% reservation for women in urban bodies in Bihar.
- Constitution of Ward Committees is mandatory in cities with a population of 3 lakh or more.
- District Planning Committee is constituted under Article 243-ZD.
- Metropolitan Planning Committee is provided under Article 243-ZE.
- The tenure of urban bodies is 5 years from the date of the first meeting.
- The State Election Commission conducts elections for urban bodies.
Table
- निकाय का प्रकार: नगर निगम · क्षेत्र का प्रकार: बड़ा शहरी क्षेत्र · बिहार में उदाहरण: पटना नगर निगम
- निकाय का प्रकार: नगर परिषद · क्षेत्र का प्रकार: छोटा शहरी क्षेत्र · बिहार में उदाहरण: आरा, बिहारशरीफ (पूर्व में)
- निकाय का प्रकार: नगर पंचायत · क्षेत्र का प्रकार: संक्रमणकालीन क्षेत्र · बिहार में उदाहरण: नवगठित नगर पंचायतें
Practice questions (solved)
- Q 15: 74वें संविधान संशोधन द्वारा संविधान में कौन सी अनुसूची जोड़ी गई थी?
(क) 9वीं अनुसूची (ख) 10वीं अनुसूची (ग) 11वीं अनुसूची (घ) 12वीं अनुसूची
- ✔ Answer: (घ) 12वीं अनुसूची — 74वें संशोधन (1992) द्वारा नगर पालिकाओं के लिए 12वीं अनुसूची जोड़ी गई थी।
- Q 16: पटना नगर निगम की स्थापना किस वर्ष और तिथि को हुई थी?
(क) 26 जनवरी 1950 (ख) 15 अगस्त 1952 (ग) 1 अप्रैल 1936 (घ) 15 अगस्त 1947
- ✔ Answer: (ख) 15 अगस्त 1952 — पटना नगर निगम की स्थापना 15 अगस्त 1952 को हुई थी।
- Q 17: नगर पालिकाओं के पास 12वीं अनुसूची के तहत कितने कार्यात्मक विषय हैं?
(क) 29 विषय (ख) 18 विषय (ग) 21 विषय (घ) 15 विषय
- ✔ Answer: (ख) 18 विषय — 74वें संशोधन के तहत नगर पालिकाओं को 18 विषयों पर कार्य करने की शक्ति दी गई है।
- Q 18: नगर निकायों में वार्ड समितियों का गठन कितनी जनसंख्या पर अनिवार्य है?
(क) 1 लाख या अधिक (ख) 2 लाख या अधिक (ग) 3 लाख या अधिक (घ) 5 लाख या अधिक
- ✔ Answer: (ग) 3 लाख या अधिक — अनुच्छेद 243-S के अनुसार, 3 लाख या उससे अधिक जनसंख्या वाली नगर पालिकाओं में वार्ड समितियां बनाना अनिवार्य है।
- Q 19: बिहार में नगर निकायों में महिलाओं के लिए कितने प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान है?
(क) 33% (ख) 25% (ग) 50% (घ) कोई आरक्षण नहीं
- ✔ Answer: (ग) 50% — बिहार नगरपालिका अधिनियम के तहत महिलाओं को 50% आरक्षण दिया गया है।
How it is asked
BPSC frequently asks questions about the schedule of the 74th amendment, the number of subjects (18), and the establishment date of the Patna Municipal Corporation.
Do not confuse
- ✘ 11वीं अनुसूची (पंचायत) और 12वीं अनुसूची (नगर निकाय) के बीच भ्रम।
- ✘ पंचायतों के 29 विषयों और नगर निकायों के 18 विषयों की संख्या में गलती।
- ✘ भाग IX (पंचायत) और भाग IX-A (नगर निकाय) को आपस में बदलना।
💡 नगर में 18 साल के बच्चे 12वीं (12वीं अनुसूची) कक्षा में पढ़ते हैं - (18 विषय, 12वीं अनुसूची)।
State Finance Commission and Elections
The 73rd and 74th Constitutional Amendments provided for two crucial institutions, the State Election Commission and the State Finance Commission, to strengthen the democratic and financial base of local bodies. Under Article 243K, the State Election Commission is responsible for preparing electoral rolls and conducting elections for Panchayats and Municipal bodies. The State Election Commissioner is appointed by the Governor, but the process for their removal is as stringent as that of a High Court judge. On the other hand, under Article 243I, the Governor constitutes a State Finance Commission every five years. This commission recommends the principles for distributing taxes and duties collected by the state government among the local bodies. It ensures that Panchayats and Municipalities have adequate resources to perform their functions.
Key facts
- Article 243K: Constitution of State Election Commission (SEC) and conduct of local body elections.
- Article 243I: Constitution of State Finance Commission (SFC) for Panchayats (every 5 years).
- Article 243Y: Extension of State Finance Commission provisions for Municipalities.
- The State Election Commissioner is appointed by the Governor.
- The removal process of the State Election Commissioner is similar to that of a High Court Judge.
- Article 243J: Relates to the audit of accounts of Panchayats.
- Bihar State Information Commission was established in June 2006.
- Bihar State Commission for Women is an independent government department located in Patna.
- The decision to conduct local elections is taken by the State Government, but the conduct is handled by the SEC.
Table
- संस्थान: राज्य निर्वाचन आयोग · अनुच्छेद: 243K · मुख्य कार्य: स्थानीय चुनाव और मतदाता सूची
- संस्थान: राज्य वित्त आयोग · अनुच्छेद: 243I · मुख्य कार्य: राजस्व का बंटवारा (पंचायती राज)
- संस्थान: राज्य वित्त आयोग · अनुच्छेद: 243Y · मुख्य कार्य: राजस्व का बंटवारा (नगर निकाय)
- संस्थान: लेखा परीक्षा (Audit) · अनुच्छेद: 243J · मुख्य कार्य: पंचायतों के खातों की जांच
Practice questions (solved)
- Q 20: भारतीय संविधान के किस अनुच्छेद के तहत राज्य निर्वाचन आयोग का गठन किया जाता है?
(क) अनुच्छेद 243I (ख) अनुच्छेद 243K (ग) अनुच्छेद 243J (घ) अनुच्छेद 243L
- ✔ Answer: (ख) अनुच्छेद 243K — अनुच्छेद 243K पंचायतों और नगर निकायों के चुनावों के लिए राज्य निर्वाचन आयोग का प्रावधान करता है।
- Q 21: राज्य निर्वाचन आयुक्त को उसके पद से किसके समान प्रक्रिया द्वारा हटाया जा सकता है?
(क) राज्यपाल (ख) मुख्यमंत्री (ग) उच्च न्यायालय के न्यायाधीश (घ) राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष
- ✔ Answer: (ग) उच्च न्यायालय के न्यायाधीश — संविधान के अनुसार, राज्य निर्वाचन आयुक्त को हटाने की विधि और आधार वही हैं जो उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के लिए हैं।
- Q 22: राज्य वित्त आयोग का गठन कितने वर्षों के अंतराल पर किया जाता है?
(क) 3 वर्ष (ख) 4 वर्ष (ग) 5 वर्ष (घ) 6 वर्ष
- ✔ Answer: (ग) 5 वर्ष — अनुच्छेद 243I के तहत राज्यपाल प्रत्येक 5 वर्ष की समाप्ति पर राज्य वित्त आयोग का गठन करते हैं।
- Q 23: बिहार राज्य सूचना आयोग की स्थापना किस वर्ष हुई थी?
(क) 2005 (ख) 2006 (ग) 2007 (घ) 2008
- ✔ Answer: (ख) 2006 — बिहार राज्य सूचना आयोग की स्थापना जून 2006 में की गई थी।
- Q 24: निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. राज्य निर्वाचन आयोग मतदाता सूची तैयार करता है।
2. राज्य वित्त आयोग की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है।
सही कथन चुनें:
(क) केवल 1 (ख) केवल 2 (ग) 1 और 2 दोनों (घ) इनमें से कोई नहीं
- ✔ Answer: (क) केवल 1 — कथन 1 सही है, लेकिन कथन 2 गलत है क्योंकि राज्य वित्त आयोग की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा की जाती है।
How it is asked
In BPSC, direct questions are often asked on Articles (243I and 243K) from this sub-topic. Questions on the appointment and removal process of the State Election Commissioner have also been seen.
Do not confuse
- ✘ छात्र अक्सर 243I (वित्त) और 243K (चुनाव) के बीच भ्रमित हो जाते हैं।
- ✘ राज्य वित्त आयोग की नियुक्ति राज्यपाल करते हैं, जबकि केंद्रीय वित्त आयोग की नियुक्ति राष्ट्रपति करते हैं।
💡 I = Income (वित्त आयोग 243I), K = Kursi/Election (निर्वाचन आयोग 243K)
Quick revision
- Balwant Rai Mehta Committee (1957) recommended a three-tier Panchayati Raj system.
- The 73rd Amendment (1992) added Part IX and the 11th Schedule with 29 subjects to the Constitution.
- Gram Sabha is the foundation of the system, consisting of all registered voters in a village.
- Bihar was the first state to implement the Bihar Panchayati Raj Act 2006, providing 50% reservation for women.
- In Bihar, the Gram Kachahari is headed by the 'Sarpanch' and handles judicial matters.
- The 74th Amendment (1992) gave constitutional status to urban bodies and added the 12th Schedule (18 subjects).
- The State Election Commission (Article 243K) is responsible for conducting local body elections.
- The State Finance Commission (Article 243I) recommends revenue distribution between the state and local bodies.
- Ashok Mehta Committee (1977) recommended a two-tier system and political party participation.
- L.M. Singhvi Committee (1986) strongly recommended constitutional status for Panchayats.